दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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मंगलवार, मार्च 31, 2015

एसिडिटी का घरेलू उपचार

HOME REMEDIES FOR ACIDITY
अम्ल से रहत दिलाएंगे राज के ये 22 उपाय

अम्ल (एसिडिटी) / बदहज़मी / गैस शब्द अपरिचित नहीं है। इससे शायद ही कोई  अनभिज्ञ हो। घरेलू उपचार गलत नहीं है, लेकिन यदि आपको बार-बार एसिडिटी की समस्या हो तो ढीला पन नहीं दिखाना चाहिए। ऐसी इस्थिति में फ़ौरन करीबी डॉक्टर से सलाह लेना चहिये। राजेश मिश्रा आपके लिए लाएं हैं अम्ल यानि एसिडिटी से बचने या राहत पाने के 22 अनमोल उपाए ।  
आजकल की भागदौड भरी और अनियमित जीवनशैली के कारण पेट की समस्या आम हो चली है। एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (GERD) के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आज इससे हर दूसरा व्यक्ति या महिला पीडि़त है। एसिडिटी होने पर शरीर की पाचन प्रक्रिया ठीक नहीं रहती। एसिडिटी का प्रमुख लक्षण है रोगी के सीने या छाती में जलन। अनेक बार एसिडिटी की वजह से सीने में दर्द भी रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता है। जब यह तकलीफ बार-बार होती है तो गंभीर समस्या का रूप धारण कर लेती है। एसिडिटी के कारण कई बार रोगी ऐसा महसूस करता है जैसे भोजन उसके गले में आ रहा है या कई बार डकार के साथ खाना मुँह में आ जाता है। रात्रि में सोते समय इस तरह की शिकायत ज्यादा होती है। कई बार एसिड भोजन नली से सांस की नली में भी पहुंच जाता है, जिससे मरीज को दमा या खांसी की तकलीफ भी हो सकती है। कभी-कभी मुंह में खट्टे पानी के साथ खून भी आ सकता है। एसिडिटी तभी होती है, जब पेट में एसिड का अधिक स्राव होने लगता है. जब यह स्राव तेज हो जाता है, तो हमें अंदर से ऐसा महसूस होता है कि हमारा सीना जल रहा है. ज्यादातर ऐसा तभी होता है जब हम तेज मिर्च मसाले वाला भोजन खाते हैं। 

घरेलू इलाज :

  1. एसिडिटी होने पर चाय काफी का सेवन कम कर देना चाहिए। ग्रीन टी का सेवन लाभप्रद होता है। 
  2. अधिक से अधिक हरी सब्जियों का खासकर जिन सब्जियों में विटामिन बी और ई हो, सेवन करना चाहिए। जैसे की सहजन, बीन्स, कद्दू, पत्ता गोभी, प्याज और गाजर। 
  3. खाना खाने के बाद तरल पेय का सेवन न करें। आधे घंटे के बाद ही गुनगुना नीबू पानी पियें। 
  4. खाने में केला,खीरा,,ककड़ी, तरबूज, नारियल पानी धनिये पुदीने की चटनी और बादाम की शिकंजी का सेवन करना चाहिए। 
  5. सौंफ और चन्दन का सर्बत बना कर पीने से पेट की जलन को शांत किया जा सकता है। 
  6. नींबू और शहद में अदरक का रस मिलाकर पीने से, पेट की जलन शांत होती है।
  7. एसिडिटी में पाइनेपल के जूस का सेवन करने से विशेष फायदा होता है क्योकि यह एंजाइम्स से भरा होता है. खाने के बाद अगर पेट अधिक भरा व भारी महसूस हो रहा है, तो आधा गिलास ताजे पाइनेपल का जूस पीएं. सारी बेचैनी और एसिडिटी खत्म हो जाएगी। 
  8. ज्यादा स्मोकिंग करना और ज्यादा शराब पीने से बचना चाहिए, इसके बदले में अच्छी क्वालिटी के च्युंगम,कच्ची सौंफ या लौंग चबाना चाहिए। 
  9. दही के छाछ में भुना हुआ पिसा जीरा डाल कर सेवन करने से भी लाभ मिलता है। 
  10. मूली का नियमित सेवन करने से एसिडिटी में लाभ होता है।
  11. सुबह-सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से एसिडिटी में फायदा होता है।पानी में पुदीने की कुछ पत्तियां डालकर उबाल लीजिए। हर रोज खाने के बाद इन इस पानी का सेवन कीजिए। 
  12. अदरक और परवल को मिलाकर काढा बना लीजिए। इस काढे को सुबह-शाम पीने से एसिडिटी की समस्या समाप्त होती है।
  13. दूध में मुनक्का डालकर उबालना चाहिए। उसके बाद दूध को ठंडा करके पीने से फायदा होता है और एसिडिटी ठीक होती है।
  14. एसिडिटी होने पर मुलेठी का चूर्ण या काढ़ा बनाकर उसका सेवन करना चाहिए। इससे एसिडिटी में फायदा होता है।
  15. त्रिफला चूर्ण को दूध के साथ पीने से एसिडिटी समाप्त होती है। पेट की जलन शांत होती है।
  16. शाह जीरा अम्लता निवारक होता है। डेढ लिटर पानी में 2 चम्मच शाह जीरा डालें । 10-15 मिनिट उबालें। यह काढा मामूली गरम हालत में दिन में 3 बार पीयें। एक हफ़्ते के प्रयोग से एसिडीटी नियंत्रित हो जाती है।
  17. एसिडीटी निवारण हेतु आंवला क उपयोग करना उत्तम फ़लदायी होता है।
  18. तुलसी के दो चार पत्ते दिन में कई बार चबाकर खाने से अम्लता में लाभ होता है।इसका रस निकाल कर भी थोड़ी थोड़ी मात्रा में सेवन किया जा सकता है। 
  19. हर तीन टाइम भोजन के बाद गुड जरुर खाएं। इसको मुंह में रखें और चबा चबा कर खा जाएं।
  20. एक कप पानी उबालिये और उसमें एक चम्मच सौंफ मिलाइये। इसको रातभर के लिए ढंक कर रख दीजिये और सुबह उठ कर पानी छान लीजिये। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाइये और तीन टाइम भोजन के बाद इसको लीजिये।
  21. गैस से फौरन राहत के लिए 2 चम्मच ऑंवला जूस या सूखा हुआ ऑंवला पाउडर और दो चम्मच पिसी हुई मिश्री ले लें और दोनों को पानी में मिलाकर पी जाएं।
  22. 25 ग्राम धनिये की रात में पत्थर के बर्तन में भिगो दें, सुबह छान कर थोड़ा सा सुहागे की बुकनी मिलाकर कुछ दिन नियमित सेवन करें, शर्तिया लाभ मिलेगा।
    Rajesh Mishra, Kolkata

सोमवार, मार्च 30, 2015

ऑयली त्वचा के लिए बेहतरीन उपाय

The best remedy for Oily Skin




महिलाओं को अपनी त्वचा को चमकदार बनाने की चिंता हर दम सताती रहती है। ऐसे में यदि त्वचा ऑयली हो तो उसके रखरखाव की चिंता और भी बढ़ जाती है। अगर त्वचा ऑयली हो तो इसे थोड़ी सी सावधानी और खास ट्रीटमैंट से शाइनी बनाया जा सकता है। त्वचा को चमकदार बनाने के लिए और इस पर मुंहासों को दूर करने के लिए अपने खान-पान में बदलाव जरूरी है।
ऑयली त्वचा की समस्या इस मौसम में होने वाली दिक्कतों में से सबसे अधिक आम है। त्वचा ऑयली है तो मुंहासे, ब्लैकहेड्स और अतिरिक्त ऑयल जैसी दिक्कतें हमारे लुक्स को चौपट करने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं।
ऐसे में अगर आप अपनी त्वचा को बहुत अधिक ऑयली नहीं होने देना चाहते हैं तो त्वचा का अतिरिक्त तेल हटाने के लिए ये आसान उपाय अपनाएं।
मुंहासों को दूर करने हेतु संतुलित आहार शुरू कर दें। कम से कम मसालों का इस्तेमाल करें और पानी खूब मात्रा में पिएं। चेहरे को कम से कम दिन में चार बार जरूर धोएं। ऑयली त्वचा से छुटकारा पाने के लिए एक कप नींबू का रस, एक चम्मच जौ पाऊडर, आधा चम्मच दूध और उतना ही हल्का गर्म पानी, इस सारे मिश्रण को घोल लें। इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर लगाएं और दस मिनट रखने के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धोएं।

मुंहासे को दूर करने के लिए 5-6 चम्मच नींबू का रस लें। उसमें एक चम्मच सेब का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इसे चेहरे पर कम से कम 15-20 मिनट तक लगाएं और बाद में ठंडे पानी से चेहरा धो लें। यह विधि ऑयली त्वचा को दूर करने में भी लाभदायक है।ऑयली त्वचा को चमकदार बनाने के लिए एक चम्मच अंडे का सफेद भाग, एक चम्मच शहद को मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे 10-15 मिनट चेहरे पर लगाएं और ऑयली त्वचा को चमकदार बनाएं।

हाथ रखें साफ

आप ऑयली त्वचा पर नियंत्रण के लिए दिन में कई बार हाथों को साबुन से साफ करें और अधिक से अधिक चेहरा साफ करें। इससे चेहरे पर धूल और संक्रमण नहीं होगा और त्वचा मुहांसों से दूर होगी।

टूथपेस्ट या कैलेमाइन

ऑयली त्वचा साफ करके आप चेहरे पर कैलेमाइन लोशन का इस्तेमाल करें जिससे अतिरिक्त तेल न रहे। इसके अलावा, मुंहासे पर टूथपेस्ट का इस्तेमाल भी तुरंत आराम पहुंचाता है।

बाल रखें साफ

त्वचा पर संक्रमण के वाहक आपके बाल भी हो सकते हैं। गंदगी या प्रदूषण का बालों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है और आपके गंदे बाल कई बार त्वचा के लिए संक्रमण के वाहक हो सकते हैं। ऐसे में बालों को रोज साफ करें जिससे बालों के कारण त्वचा के छिद्र बंद न हो और ऑयल ग्लैंड्स अधिक सक्रिय न हों।

मुहांसे न फोड़े

ऑयली त्वचा पर मुहांसे की समस्या आम होती है। इसके लिए दवा लें लेकिन इन्हें फोड़ने की गलती न करें। इससे संक्रमण फैलता है और ऑयली त्वचा की समस्याएं बढ़ जाती हैं।

नींद से खूबसूरती..

अगर आप खूबसूरत दिखना चाहती हैं तो भरपूर नींद लें। 24 घंटे में आठ घंटे की नींद जरूरी है। नींद पूरी लेने से त्वचा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही नींद सेहत के लिए भी लाभदायक है।

ज्यादा मात्रा में पानी पिएं

दिन में कम से कम आठ ग्लास पानी रोज पिएं जिससे त्वचा सेहतमंद रहेगी और शरीर डीटॉक्सिफाई होगी।चाहे गर्मी हो या सर्दी, अधिक पानी पीना सेहत के लिए बेहद ही लाभदायक है। सर्दियों के मौसम में प्यास कम लगती है, फिर भी ज्यादा पानी पीने की कोशिश करें। पानी शरीर में तरल पदार्थ के साथ संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही मांसपेशियों और गुर्दे के लिए भी लाभदायक है। शरीर में पानी की मात्रा पर्याप्त होने पर त्वचा भी मुलायम रहती है।

रविवार, मार्च 29, 2015

चक्कर आने पर इन्हें आजमाएं

Dizziness Home Remedies

चक्कर आना-एक ऐसी परेशानी है, जिसमें व्यक्ति को सब कुछ घूमता नजर आता है। यह अपने आपमें बीमारी नहीं है अपितु एक लक्षण है। शरीर में अन्य परेशानियों के कारण चक्कर आना प्रारम्भ हो सकता है। यह परेशानी सभी उम्र के लोगों में हो सकती है। बहुधा चक्कर आने के बारे में सही प्रकार से बता पाना मरीज के लिए कठिन होता है। ऐसे में पूरी और सही जानकारी उस समय मरीज को महसूस हो रही चक्कर आने संबंधी परेशानियों को चक्कर आने के अन्य प्रकारों जैसे बेहोशी, सिर का हल्कापन, ड्राप अटैक्स स्थिति के हिसाब से रक्त चाप के घटने-बढ़ने से अलग करके लेना चाहिए। मरीज को सही और विस्तार से डाक्टर को जानकारी देनी चाहिए-
पहले हम यह जान लेते है कि चक्कर आना किसे कहते है कभी-कभी किसी को चक्कर आते हैं, थोड़ी देर तक बैठे रहने के बाद जैसे ही उठते हैं, आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। ऐसा लगता होगा कि आपके चारो ओर की चीजें तेजी से घूम रही हैं। यह तब होता है, जब मस्तिष्क में रक्त की पूर्ति कम हो जाती है। रक्तचाप में अचानक कमी से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है। घर में रखी चीजों द्धारा आप इस का उपचार कर सकती है। आइए जानें इन उपायों के बारें में-

घरेलू उपचार

  1. पकने के बाद सूखी हुई लौकी को डण्ठल की तरफ से काट दें, ताकि अन्दर का खोखलापन दिखाई दे। अगर सूखा गूदा हो तो उसे निकाल दें। अब इसमें ऊपर तक पानी भर कर 12 घण्टे तक रखें फिर हिलाकर पानी निकाल कर साफ कपड़े छान लें। इस पानी को ऐसे बर्तन में भरें, जिसमें आप अपनी नाक डुबो सकें। नाक डुबोकर जोर से सांस खींचें, ताकि पानी नाक से अन्दर चढ़ जाए। पानी खींचने के बाद नाक नीची करके आराम करें। इस उपाय से चक्कर आने की समस्या सदा के लिए खत्म हो जाती है।
  2. चक्कर आने पर तुलसी के रस में चीनी मिलाकर सेवन करने से या तुलसी के पत्तों में शहद मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है। 
  3. चक्कर आने पर धनिया पाउडर दस ग्राम तथा आंवले का पाउडर दस ग्राम लेकर एक गिलास पानी में भिगो कर रख दें। सुबह अच्छी तरह मिलाकर पी लें। इससे चक्कर आने बंद हो जाते है।
  4. सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग डालकर उसे उबाल लें और फिर उस पानी को पी लें। इस पानी को पीने से लाभ मिलता है।
  5. 10 ग्राम आंवला, 3 ग्राम काली मिर्च और 10 ग्राम बताशे को पीस लें। 15 दिनों तक रोजाना इसका सेवन करें चक्कर आना बंद हो जाएगा।
  6. जिन लोगों को चक्कर आते हैं उन्हें दोपहर के भोजन के 2 घंटे पहले और शाम के नाश्ते में फलों का जूस पीना चाहिए। रोजाना जूस पीने से चक्कर आने बंद हो जाएंगे। लेकिन ध्यान रखें कि जूस में किसी प्रकार का मीठा या मसाला नहीं डालें सदा जूस पियें। जूस की जगह चाहें तो ताजे फल भी खा सकते हैं।
  7. नारियल का पानी रोज पीने से भी चक्कर आने बंद हो जाते है।
  8. चाय व कॉफ़ी कम पीनी चाहिए। अधिक चाय व कॉफ़ी पीने से भी चक्कर आते हैं।
  9. 20 ग्राम मुनक्का घी में सेंककर सेंधा नमक डालकर खाने से चक्कर आने बंद हो जाते है।
  10. खरबूजे के बीजों को पीसकर घी में भुन लें। अब इसकी थोड़ी थोड़ी मात्रा सुबह शाम लें, इससे चक्कर आने की समस्या में बहुत लाभ होता है।
इन सब घरेलू उपायों को अपनाकर आप चक्कर आने की समस्या से निजात पा सकती है लेकिन अगर समस्या, गंभीर है तो तुरन्त डाक्टर से संपर्क करें।

गले के लिए घरेलू उपचार

Home remedies for Sore Throat


गला खराब होना या गले में खराश रहना एक आम समस्या है। बदलता मौसम, प्रदूषित हवा, गलत खान-पान, अधिक ठंडे पदार्थ खाना-पीना और किसी बीमार व्यक्ति के सम्पर्क में रहने से गले में खराश और दर्द होने की समस्या पैदा होती है। अपने गले का ध्यान रखना बहुत जरूरी है नहीं तो इसके कारण अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आइए हम आप को बताते है कुछ सरल घरेलू उपाय जिनको अपना कर आप अपने गले की देखभाल कर सकते हैं।

घरेलू उपचार

  • गुनगुने पानी में नमक मिला कर दिन में दो-तीन बार गरारे करें। गरारे करने के तुरन्त बाद कुछ ठंडा न लें। गर्म चाय या गुनगुना पानी पिएं जिससे गले को आराम मिलेगा।
  • कच्चा सुहागा आधा ग्राम मुंह में रखें और उसका रस चुसते रहें। दो तीन घण्टों मे ही गला बिलकुल साफ हो जाएगा।
  • सोते समय एक ग्राम मुलहठी की छोटी सी गांठ मुख में रखकर कुछ देर चबाते रहे। फिर मुंह में रखकर सो जाए। सुबह तक गला साफ हो जायेगा। मुलहठी चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर लिया जाय तो और भी अच्छा रहेगा। इससे सुबह गला खुलने के साथ-साथ गले का दर्द और सूजन भी दूर होती है।
  • रात को सोते समय सात काली मिर्च और उतने ही बताशे चबाकर सो जायें। बताशे न मिलें तो काली मिर्च व मिश्री मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसते रहने से बैठा गला खुल जाता है।
  • जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या जुकाम में एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, वह सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का के दानों को खूब चबाकर खा लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक लगातार ऐसा करने से लाभ होगा।
  • 1 कप पानी में 4-5 कालीमिर्च एवं तुलसी की थोंडी सी पत्तियों को उबालकर काढ़ा बना लें और इस काढ़े को पी जाए।
  • रात को सोते समय दूध और आधा पानी मिलाकर पिएं। गले में खराश होने पर गुनगुना पानी पिएं।
  • गुनगुने पानी में सिरका डालकर गरारे करने से भी गले के रोग दूर हो जाते है।
  • पालक के पत्तों को पीसकर इसकी पट्टी बनाकर गले में बांधे। इस पट्टी को 15-20 मिनट के बाद खोल दें। इससे भी आराम मिलता है।
  • काली मिर्च को 2 बादाम के साथ पीसकर सेवन करने से गले के रोग दूर हो जाते हैं।
  • पानी में 5 अंजीर को डालकर उबाल लें और इसे छानकर इस पानी को गर्म-गर्म सुबह और शाम को पीने से खराब गले में लाभ होता है।
  • गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बंद गला खुल जाता है।
इन सब घरेलू उपायों को अपनाकर आप भी अपने गले का इलाज घर पर ही कर सकते हैं।

बुधवार, मार्च 25, 2015

राज का स्वास्थ्य चालीसा

Raj's Health Chalisa
स्वस्थ रहने के सूत्र

एक स्वस्थ जीवन शैली का चयन करना एक लंबी, अधिक पूरा जीवन हो सकता है। आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार से आप के आसपास हर किसी पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आप उदाहरण के माध्यम से अपने परिवार और दोस्तों के बेहतर आदतों को सिखा सकते हैं स्वस्थ रहने के विचार से भयभीत होने की जरूरत नहीं है. कुछ छोटे परिवर्तन करने से आपको बड़े परिणाम देखने को मिल सकते है।

मनुष्य के जीवन में स्वास्थ्य का सर्वाधिक महत्व है। स्वास्थ्य के बिना धन ,संपत्ति, मनोरंजन और अन्य सुविधाएं महत्व हीन हैं। कहते हैं जो व्यक्ति तन और मन से स्वस्थ् होता है, वह संसार का सबसे सुखी प्राणी है, क्योंकि स्वस्थ् तन में ही स्वस्थ् मन रहता है। हमारे ऋषि मुनियों ने शुरू से ही स्वास्थ्य के महत्व को स्वीकार किया है और स्वस्थ बने रहने के लिए प्रकृति के नियमों का पालन करने की सलाह दी है। जो मनुष्य सूर्योदय से पूर्व उठते हैं और अपनी दिनचर्या पूर्ण करके निर्धारित समय के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करते हैं, निष्काम भाव से कर्म करते हैं तथा रात्रि में समय पर शयन करते हैं वे हमेशा स्वस्थ् बने रहते हैं। स्वस्थ रहने का सबसे आसान मंत्र है- प्रकृति के नियमों का पालन, कठोर शारीरिक परिश्रम और पौष्टिक, सादा व गर्म भोजन। आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हम यहाँ दे रहे कुछ टिप्स जिन पर अमल करके आप अपने आपको चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं।

ताजा हवा और धूप

सूरज की रोशनी के कई फ़ायदे है इस से आपकी त्वचा सूर्य के प्रकाश के संपर्क मे रहती है. इस से आपको विटामिन डी मिलता है जिससे आपके शरीर के निर्माण और मजबूत, स्वस्थ हड्डियों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है जो कैल्शियम को अवशोषित में मदद करता है।
1. दूध और कटहल का कभी भी एक साथ सेवन नहीं करना चाहिये ।
2. दूध और कुलत्थी भी कभी एक साथ नहीं लेना चाहिए।
3. नमक और दूध (सेंधा नमक छोड़कर) दूध और सभी प्रकार की खटाइयां, दूध और मूँगफली, दूध और मछली, एक साथ प्रयोग ना करें।
4. दही गर्म करके नहीं खाना चाहिये हानि पहुँचती है, कढ़ी बनाकर खा सकते हैं।
5. शहद और घी समान परिणाम में मिलाकर लेना विष के समान है।
6. जौ का आटा कोर्इ अन्न मिलाये बिना नहीं लेना चाहिए।
7. रात्रि के समय सत्तू का प्रयोग वर्जित है, बिना जल मिलाये सत्तू ना खायें।
8. तेज धूप में चलकर आने के बाद थोड़ा आराम करके ही पानी पियें, व्यायाम या शारीरिक परिश्रम के तुरन्त बाद पानी ना पियें या थोड़ी देर बाद पानी पियें।
9. प्रात:काल भोजन के पश्चात तेज गति से चलना हानिकारक है।
10. शाम को खाने के बाद थोड़ी देर चलना आवश्यक है, खाना खाकर तुरन्त सो जाना हानिकारक है।
11. रात्रि में दही का सेवन निषेध है, भोजन के तुरन्त बाद जल का सेवन निषेध है। दिन में भोजन के बाद मठ्ठा और रात्रि में भोजन के बाद दूध लेना लाभदायक होता है। वात के रोगों में ब्लड एसिडिटी, कफ वृद्धि या संधिवात में दही ना खायें।
12. शौच क्रिया के बाद, भोजन से पहले, सर्दी-जुकाम होने पर, दांतों में पीव आने पर और पसीना आने की दशा में पान का सेवन नहीं करना चाहिए।
13. सिर पर अधिक गर्म पानी डालकर स्नान करने से नेत्रों की ज्योति कम होती है जरूरत पड़ने पर गुनगुने पानी से स्नान कर सकते हैं।
14. सोते समय सिर पर कपड़ा बांधकर सोना, पैरों में मोजे पहनकर सोना, अधिक चुस्त कपड़े पहनकर सोना हानिकारक है।
15. शहद कभी भी गर्म करके ना खायें, छोटी मधुमक्खी का शहद सर्वोत्तम होता है।
16. तेज ज्वर आने पर तेज हवा, दिन में अधिक देर तक सोना, अधिक परिश्रम, स्नान, क्रोध आदि से बचना चाहिये।
17. नींद लेने से पित्त घटता है, मालिश से वात कम होता है और उल्टी करने से कफ कम होता है एवं उपवास करने से ज्वर शांत होता है ।

राज के इन आसान हेल्थ टिप्स को भी अपनाएं 

इन दिनों लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल ऐसी बना ली है कि दिनों दिन वे नई-नई परेशानियों और बीमारियों से घिरते जा रहे हैं। चाहे खान-पान हो या आरामदायक जीवनशैली। और तो और शहरी वातावरण भी उन्हें इस तरह की दिनचर्या बनाने में काफी मदद की है। सभी ऐशोआराम की चीजें उन्हें घर बैठे हासिल हो जाती है। उन्हें उठकर कहीं जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
  • प्रतिदिन वॉक करें। अगर हो सके तो फुटबॉल खेलें यह एक प्रकार का एक्सरसाइज ही है।
  • ऑफिस में या कहीं भी जाएं तो लिफ्ट के बदले सीढिय़ों का इस्तेमाल करें।
  • अपने कुत्ते को वॉक पर खुद लेकर जाएं। बच्चों के साथ खेलें, लॉन में नंगे पांव चलें, घर के आसपास पेड़ पौधे लगाऐं, यानि कि वो सब करें जिनसे आप खुद को एक्टिव रख सकें। 
  • ऐसी जगह एक्सरसाइज न करें जहां भीड़भाड़ ज्यादा हो।
  • तले-भुने भोजन, और अन्य फैटी चीजों से परहेज करें यह बहुत से बीमारियों की जड़ होती है। 
  • डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। जैसे कि चीज, कॉटेज चीज, दूध और क्रीम का लो फैट प्रोडक्ट आदि। 
  • यदि खाना ही है तो, मक्खन ,फैट फ्री चीज और मोयोनीज का लो फैट उत्पाद प्रयोग में लाऐं।
  • तनाव हमारी जिंदगी में काफी निगेटिव असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव कम करने के लिए सकारात्मक विचार बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। 
  • तनाव कम करने के लिए रोज कम से कम आधा घंटा ऐसे काम करें, जिसे करने में आपको मन लगता हो। 
  • तनाव कम करने के लिए आप योग का भी सहारा ले सकते हैं।
  • गुस्सा तनाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है इसलिए गुस्सा आने पर स्वंय को शांत करने के लिए एक से दस तक गिनती गिनें। 
  • उन लोगों से दूर रहने की कोशिश करें जो आपके तनाव को बढ़ाते हों।
  • धूम्रपान से परहेज करें। धूम्रपान से शरीर और उम्र पर असर तो पड़ता ही है, साथ ही फेफड़ों का कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है।
  • धूम्रपान में कमी लाने के लिए उसकी तलब लगने पर सौंफ आदि का सेवन करें।
  • मार्केट में भी आजकल बहुत से प्रोडक्ट मिलने लगे हैं जो धूम्रपान की तलब को कम करते हैं।
  • सुबह-शाम ताजा भोजन करें।
  • निश्चित समय पर भोजन करें।
  • अनियमित भोजन से दूर रहें।
  • पानी ज्यादा से ज्यादा पिएँ।
  • रात का भोजन सोने से तीन घंटे पहले अवश्य कर लें।
  • खाना खाने के बाद 10 मिनट वज्रासन में अवश्य बैठें।
  • भोजन से पहले व तुरंत बाद पानी पीना हानिकारक है।
  • गरिष्ठ, तले, मसालेदार, खटाईयुक्त भोजन से परहेज करें।
  • अंकुरित अन्न, सलाद, सूप का समावेश भोजन व नाश्ते में अवश्य करें।
  • केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें।

मंगलवार, मार्च 24, 2015

बालों में रूसी दूर करने के कुछ उपाय

रूसी इलाज के लिए आयुर्वेदिक तरीके

सिर में रूसी का होना एक आम समस्या है, जिससे हममें से हर कोई परेशान रहता है। जब यह रूसी हद से ज्यादा बढ़ जाती है और हमारे कपड़ों कर गिरने लगती है, तब कई बार इस समस्या के कारण हमें दूसरों के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ता है।

आजकल विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले महँगे और रूसी हटाने का दावा करने वाले शैंपुओं से हमारे सिर की रूसी तो नहीं जाती परंतु हमारे सिर के बचे-कुचे बालजरूर चले जाते हैं। यदि सिर में रूसी हो तो इससे बाल झड़ने लगते हैं व उनकी वृद्धि रुक जाती है।

क्या है रूसी का कारण :-

बालों में तेल नहीं लगाना, कई दिनों तक सिर नहीं धोना, सिर की त्वचा में संक्रमण होना आदि सिर में रूसी होने के सामान्य कारण हैं।

क्या है उपचार :-

रूसी को दूर करने के कई घरेलू उपचार हैं, जिनसे इस समस्या से आसानी से निजात पाई जा सकती है। रूसी से निजात पाने के लिए आप निम्न उपाय करें -
* आँवला, रीठा, शिकाकाई तीनों की बराबर मात्रा लेकर इससे तीन गुना पानी में इन्हें धीमी आँच पर खूब उबालें। जब पानी पहले से आधा हो जाए तब इस पानी को छानकर इसे शैंपू की तरह इस्तेमाल करें।
* केस्टर ऑइल और जैतून का तेल दोनों को बराबर मात्रा में लेकर उसे गुनगुना गर्म करके इस तेल से बालों की जड़ों में मसाज करें।
* रात को मसाज करने के बाद सुबह एक चम्मच आँवला पावडर में एक अंडा मिलाकर इस मिश्रण को बालों की जड़ों में आधे घंटे लगाकर छोड़ दें। इसके बाद बाल धो लें।
* अपने भोजन में सलाद, फल व हरी सब्जियों को अवश्य शामिल करें।
* मेथीदाना हमारे पेट व बाल दोनों के लिए लाभकारी होता है। रात को मेथीदाना पानी में भिगोकर सुबह उसे पीसकर उस पेस्ट को बालों की जड़ों में अच्छी तरह लगाकर कुछ देर बाद बाल धो लें। इससे बाल काले व चमकदार बनते हैं।
* जैतून के तेल में शहद व दालचीनी पावडर मिलाकर इस मिश्रण को भी सिर की त्वचा पर लगाने से रूसी व बाल झड़ने की समस्या दूर होती है।* सामान्य बालों में रूसी की समस्या हो गई हो तो सरसों के तेल में थोड़ा नींबू का रस मिलाकर रूई से बालों की जड़ों में लगाएं। इसके प्रयोग से रूसी खत्म हो जायेगी।
* बाल यदि तैलीय हों और रूसी की *समस्या उत्पन्न हो गई हो तो जैतून का
*तेल व नींबू का रस मिलाकर बालों की *जड़ों में लगाएं और लगभग बीस मिनट के उपरान्त बालों को शैम्पू कर लें।
* शुष्क बालों में यदि रूपी की समस्या हो गई हो तो टमाटर के गूदे में एक चम्मच ग्लिसरीन मिलाकर बालों में लगाएं और बीस या तीस मिनट के उपरान्त बालों को शैम्पू कर लें।
* दो चम्मच जैतून के तेल में दो चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर उसे बालों की जड़ों में लगाएं।
* सौ ग्राम नारियल के तेल में चार ग्राम कपूर मिलाकर रात को सोने से पूर्व बालों की जड़ों में लगाने से रूसी से मुक्ति मिलती है।

सावधानियां

* बालों की स्वच्छता का पूर्ण ध्यान दें।
* दूसरों के ब्रश, कंघियां, टॉवेल आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
* पौष्टिक आहार का सेवन किया जाना चाहिए।

शुष्क बाल समाधान क्या है?

बालों की अनगिनत समस्याओं में शुष्क बाल भी एक आम समस्या है। तैलीय बाल जहां तेल ग्रंथियों की अतिक्रियाशीलता के कारण होते हैं, वही शुष्क बाल तेल ग्रंथियों की अक्रियाशीलता के कारण शुष्क हो जाते हैं। शुष्क बाल जहां देखने से अनाकर्षक लगते हैं वही यह बालों से संबंधित अनेक समस्या जैसे बालों का झड़ना बालों का दो मुंहे होना, बालों का सफेद होना, बाल में रूसी होना आदि को उत्पन्न कर देते है। शुष्क बालों की समस्या के कुछ कारण इस प्रकार हैं : कठोर शैम्पू, दुर्बल रक्त संचारण, बालों में रूसी, बालों का अधिक खुला रहना, रासायनिक लोशनों व डाई का प्रयोग, मानसिक तनाव या चिन्ता, अधिक गर्मी व तेल का प्रयोग, धूल मिट्टी, असंतुलित आहार, पानी का कम सेवन, बालों में मेहंदी का अधिक प्रयोग, बालों को गर्म पानी से धोना आदि।

उपचार

* तीन चम्मच मेथी पाउडर में दही मिलाकर बालों में लगभग 45 मिनट लगायें, तत्पश्चात हल्के गुनगुने पानी से बालों को धो लें।
* अंडे की जर्दी को बालों में लगाना भी शुष्क बालों के लिए बहुत उपयोगी है।
* शुष्क बालों के लिए सप्ताह में दो बार सरसों के तेल की मसाज भी बहुत उपयोगी है।
* नारियल या जैतून के तेल की मसाज भी शुष्क बालों की समस्या का समाधान करती है।
* प्रोटीन कंडीशनर का प्रयोग भी शुष्क बालों के लिए बहुत उपयोगी है।

सावधानियां

* बालों की प्रकृति के अनुसार शैम्पू का प्रयोग करें।
* पौष्टिक आहार का सेवन करें।
* रासायनिक लोशनों व डाई का प्रयोग कम करें।
* बालों को धूल मिट्टी से बचाकर रखें।
* बालों के धोने के लिए ठंडे पानी का प्रयोग करें।
* बालों को बांध कर रखें उन्हें खुला न छोड़े।
* बालों में शैंपू का प्रयोग सप्ताह में एक बार ही करें।

सोमवार, मार्च 23, 2015

पेट की चर्बी घटायें इन 3 आसनों से

Reduce belly fat from these 3 rugs


अगर आप अपने पेट की बढ़ती चर्बी से परेशान हैं और इसे कम करने के लिए किसी कारगर उपाय की तलाश में हैं तो योगासन आपके लिए बहुत मददगार हो सकते हैं। योगासनों न सिर्फ आपको पेट से फैट्स कम करने में मदद मिलेगी बल्कि आपकी मांसपेशियां मजबूत होंगी और शरीर लचीला होगा।

आइए जानें ऐसे तीन आसनों के बारे में जिनसे आपको पेट की चर्बी कम करने में आसानी होगी।

भुजंगासन

इस आसन से न सिर्फ पेट की चर्बी कम होती है बल्कि बाजुओं, कमर और पेट की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और शरीर लचीला बनता है। इसकी विधि इसप्रकार है -
  • पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे टिकाएं।
  • दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें।
  • अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े।
  • अब शरीर के अग्रभाग को बाजुओं के सहारे उठाएं।
  • शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।

बलासन

बलासन उन लोगों के लिए परफेक्ट आसन है जिन्होंने योगासन की शुरुआत की हो। इससे पेट की चर्बी भी कम होती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। गर्भवती महिलाएं या घुटने के रोग से पीड़ित लोग इसे न करें। इसकी विधि इसप्रकार है -
  • घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं जिससे शरीर का सारा भाग एड़ियों पर हो।
  • गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें।
  • आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं।

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन पेट की चर्बी कम करने के लिए बेहद आसान और प्रभावी आसन है। इसकी आसान विधि इसप्रकार है-
  • सबसे पहले सीधा बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की ओर सटाकर सीधा फैलाएं।
  • दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और कमर को बिल्कुल सीधा रखें। 
  • फिर झुककर दोनों हाथों से पैरों के दोनों अंगूठे पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके घुटने न मुड़ें और न ही आपके पैर जमीन से ऊपर उठें।
  • कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

इन योगासनों को रुटीन में शामिल करेंगे तो तोंद कम करना आपके लिए आसान हो जाएगा।

शनिवार, मार्च 21, 2015

पाचन शक्ति बढ़ाने के कारगर उपाय

भूख बढाने के कुछ असरदार नुस्खे

एक कहावत है ‘पहला सुख निरोगी काया’। स्वस्थ शरीर स्वस्थ दिमाग के निर्माण में सहायक होता है। स्वस्थ रहने की पहली शर्त है आपकी पाचन शक्ति का सुदृढ़ होना। भोजन के उचित पाचन के अभाव में शरीर अस्वस्थ हो जाता है, मस्तिष्क शिथिल हो जाता है और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। जिस प्रकार व्यायाम में अनुशासन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार भोजन में भी अनुशासन महत्वपूर्ण है। अधिक खाना, अनियमित खाना, देर रात तक जागना, ये सारी स्थितियां आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करती हैं। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि पाचन शक्ति को दुर्बल होने से बचाएं। पाचन तंत्र की दुर्बलता दूर करने के कुछ घरेलू उपाय यहां दिए जा रहे हैं, जिनके प्रयोग से निश्चय ही काफी लाभ होगा।
  • पके अनार के 10 ग्राम रस में भुना हुआ जीरा और गुड़ समभाग मिलाकर दिन में दो या तीन बार लें। पाचन शक्ति की दुर्बलता दूर होगी।
  •  काली राई 2-4 ग्राम फांकी लेने से कब्ज से होने वाली बदहजमी मिट जाती है।
  • अनानास के पके फल के बारीक टुकड़ों में सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
  • भोजन के बाद पेट झूल जाए, बेचैनी महसूस हो तो 20-50 ग्राम अनानास का रस पीएं।
  • पकाए हुए आंवले को घीयाकस करके स्वादानुसार काली मिर्च, सौंठ, सेंधा नमक, भुना जीरा और हींग मिलाकर बड़ी बनाकर छाया में सुखा लें। इसके सेवन से पाचन विकार दूर हो जाता है तथा भूख बढ़ती है। मन भी प्रसन्न रहता है।
  • अमरूद के कोमल पत्तों के 10 ग्राम रस में थोड़ी शक्कर मिलाकर प्रतिदिन केवल एक बार प्रातःकाल सेवन करने से बदहजमी दूर होकर पाचन शक्ति बढ़ती है।
  • खट्टे-मीठे अनार का रस एक ग्राम मुंह में लेकर धीरे-धीरे पीएं। इस प्रकार 8-10 बार करने से मुख का स्वाद ठीक होकर आंत्र दोष दूर होता है और ज्वर के कारण हुई अरूचि दूर होती है तथा पाचन शक्ति बढ़ जाती है।
  • हरड़ एवं गुड़ के 6 ग्राम चूर्ण को गर्म पानी से या हरड़ के चूर्ण में सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से पाचन शक्ति तेज होती है।
  • हरड़ का मुरब्बा खाने से पाचन शक्ति सबल होती है।
  • 1-2 ग्राम लौंग को जौकूट करके 100 ग्राम पानी में उबालें। 20-25 ग्राम शेष बचने पर छान लें और ठंडा होने पर पीएं। इससे पाचन संबंधी विकार दूर होते हैं। हैजे में भी यह लाभकारी है।
  • इलायची के बीजों के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर दिन में 2-3 बार 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गर्भवती स्त्री के पाचन विकार दूर हो जाते हैं तथा खुलकर भूख लगती है।
  • एक कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर 5-6 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से पेट की वायु, उर्द्धवात, बदहजमी, विषमाग्नि जैसी शिकायतें दूर होकर पाचन शक्ति प्रबल होती है।
  • नींबू काटकर काला नमक लगाकर चाटने से बदहजमी और भोजन के प्रति अरूचि दूर होती है।

सूखी खांसी दूर करने के कुछ घरेलू नुस्खे

घरेलु नुस्खे जो दिलाएंगे खांसी से राहत

बदलते मौसम, ठंडा गर्म खाना पीना या एलर्जी आदि के कारण हमें कभी भी खांसी हो सकती है। खाँसीसे बचाव, इसका उपचार अब हम बहुत ही आसानी से घर पर ही कर सकते है|
कहावत रही है कि आती सर्दी गला पकड़ती हैं और जाती सर्दी टांग मारती हैं अर्थात् इस ऋतु के प्रारम्भ और अंत में कई बीमारियां जन्म लेती है इस ऋतु में अधिकतर सर्दी, जुकाम, खांसी, ज्वर, मलेरिया जैसी घातक बीमारियां हो जाता हैं। मौसम बदलने के साथ खांसी जुकाम प्रायः हो जाते हैं। खांसी यदि लम्बे समय तक रहे तो नुकसानदायक हैं। अतः खांसी शुरू होते ही उसे दूर करने के उपाय किये जाने चाहिए। आयुर्वेद के ग्रंथ ‘सुश्रुत संहिता में लिखा है- मुख, कान और गले में धुएं एवं उड़ने वाली धूल के पहुंचने, अधिक व्यायाम करके रूखा आहार ग्रहण करने, आधारणी वेग जैसे छींक के वेग को रोकने और भोजन का जरा सा अंश भी श्वसन नलिका यानी विपरीत मार्ग में चले जाने से खांसी की उत्पति होती है। सामान्य तौर पर खांसी फेफड़ों से अधिक सर्दी या गर्मी का असर होते नजला जुकाम हो जाने, निमोनिया, प्लूरिसी, ब्रोंकाइटिस, तपेदिक फ्लू, टौंसिल्स बढ़ जाने, उस पर सूजन आ जाने, गले ं खराश हो जाने, श्वास नली में धूल, धुआं, आहार या दूध, जल जैसे पेय पदार्थ चले जाने, खट्टी वस्तुओं के अधिक सेवन से, फेफड़ों से किसी प्रकार काजख्म होने से और कफ होने से हुआ करती हैं। ठण्डा और कोहरे वाला मौसम भी खांसी को उत्पन्न करने में सहायक होता है। गंदी जगह रहने वाले, अस्वास्थ्यकर वातावरण, भीड़भाड़ वाले इलाके, झोपड़पट्टी तथा औद्योगिक क्षेत्र या अन्य प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों व बच्चों को यह समस्या अधिक रहती हैं। अतः ऐसे क्षेत्र में रहने वालों को विशेष सावधानी रखना चाहिए। मौसम के उतार-चढ़ाव व सर्दी के मौसम में शुरू से ही बचाव की कोशिश करनी चाहिए। सर्दी के मौसम में गर्म कपड़े पहनने चाहिए तथा किसी प्रकार का संक्रमण होने पर तत्काल ही चिकित्सा करवानी चाहिए। सर्दी का प्रभाव बच्चों व बूढ़ों पर अधिक होता है। अतः उनकी विशेष देखभाल करना चाहिए। खांसी होने पर कुछ घरेलू नुस्खे अपनाये जा सकते हैं।
‘सेंधा नमक मिलाये के, काढ़ा लेय बनाये।
जब चौथाई जल रहें, गर्म गर्म पी जाये,
यही विधि कुछ दिन पीये, सुखी खांसी जाये॥
काली मिर्च महीन पिसावे, आक पुष्प और शहद मिलावे।
चटनी भोजन पूर्व ही खाये, सूखी खांसी, झट मिट पाये॥
* खांसी होने पर अनार के छिलके का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसे। इसके अलावा अनार के छिलकों को सूखाकर चूर्ण बनाकर सेवन करें।
* भोजन के बाद दोनों समय आधा चम्मच सौंठ चबाने से सुखी खांसी में आराम मिलता है।
* भुनी हुई फिटकरी और चीनी (एक रत्ती) दोनों को मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें। 4/5 दिन में काली खांसी ठीक हो जायेगी।
* दही दो चम्मच, चीनी एक चम्मच, काली मिर्च का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर चाटने से बच्चों की काली खांसी और बूढ़ों की सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
* आधा चम्मच अदरक का रस और आधा चम्मच शहद चाटने से खांसी में आराम मिलता है।
* काली मिर्च पीसकर उसमें चार गुना गुड़ मिलाकर आधा ग्राम की गोलियां बना ले इससे खांसी जुकाम व सर्दी के रोगों में लाभ होता है।
* खांसी होने पर लौंग बराबर चूसते रहे। सिके हुए लौंग अधिक लाभदायक रहते हैं। इसके अलावा काली मिर्च मुंह में रखकर चूसे।
* सूखे आंवले का चूर्ण मिश्री के साथ लें। हल्दी भूनकर घी या शहद के साथ मिलाकर लें।
* मूलेठी का एक छोटा टुकड़ा, 2 कालीमिर्च व मिश्री का एक छोटा टुकड़ा लेकर इन तीनों को मुंह में लेकर धीरे-धीरे 2-3 बार खाली पेट या खाने के बाद चूसे। इससे पुरानी खांसी, गले की खराश, गला बैठना, स्वर भंग में तत्काल एवं स्थायी लाभ होता है। मूलेठी के टुकड़े मुंह में डालकर चूसते रहे। छोटे बच्चों को मुलेठी का सत दे। रात में सोते समय पान में मुलेठी का चूर्ण डालकर खाये। खांसी से छुटकारा मिल जायेगा।
* तुलसी के पत्ते, कालीमिर्च, अदरक युक्त चाय पीने से खांसी में शीघ्र आराम मिल जाता है।
* यदि बच्चा सूखी खांसी से पीड़ित है तो पान के रस में शहद का मिश्रण करके चटाइये शीघ्र लाभ होगा।
* सूखी खांसी तथा कूकर खांसी से परेशान होने पर पान के उष्ण रस से लाभ होता है ऐसा दिन में 3/4 बार करें।
* एक गिलास दूध में एक चम्मच पिसी हल्दी डालकर आग पर रखकर खूब उबाले जब दूध आधा शेष रह जाये तो उतार कर ठण्डा कर ले इसे रात को सोते समय पीने से खांसी, सर्दी व गले की खराश मिट जाती है।
* लौंग या बहेड़ा अथवा दोनों को धीमे तल कर रखले इनका 1-1 टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से खांसी में आराम मिलता है।
* अडूसा के पत्ती का रस एक चम्मच आधा चम्मच शुध्द घी व आधा चम्मच पिसी मिश्री मिला तीनों को मिलाकर दिन में 4/5 बार चाटने से खांसी में आराम मिलता है।
* सेव फलों का रस निकालकर थोड़ी मिश्री मिलाकर पीने से सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
* अंजीर के साथ पुदीना खाने से कफयुक्त खांसी में लाभ होता है।
* पुरानी खांसी में ताजा मुनक्के के दानों को रात के समय साफ पानी में भिगो दे प्रातःकाल 10 दाने कुछ दिनों तक लगातार नियमित खायें। मुनक्का के बीज निकालकर उसमें 3/4 काली मिर्च रखकर चबाये। 4/5 दिन में आराम हो जायेगा।
* बलगम खांसी में दो चम्मच शरद, आधा चम्मच ग्लिसरीन में गर्म करके नींबू का रस मिलाकर सेवन करें।
* अधिक तथा बार-2 खांसी चलने पर हल्दी की गांठ चूसने से आराम मिलता है।
* सुखी खांसी होने पर एक ग्राम अजवाइन एक सादे पान के पत्ते पर रखकर चबाये अदरक के छोटे-छोटे मुंह में रखकर चूसे।

सावधानियां

जाड़े के दिनों में विशेष सावधानी रखना चाहिए। ठण्डी हवा न लगे इसके लिए सिर व कान ढक कर रखें। यात्रा के दौरान ओढ़ने बिछाने का पूरा सामान रखें। प्रातः एवं सायंकाल दुपहिया वाहन की यात्रा टाले तथा यात्रा के दौरान मफलर व अन्य व्यवस्था रखें। खान-पान में तेल, घी व चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित यात्रा में करें। मौसमी फलो अमरूद, बेर, सेवफल, अनार आदि खाने का बाद पानी न पीयें। प्रतिदिन रात्रि को दूध में पिण्ड खजूर दूध में उबालकर पीये। यदा-कदा दूध में केसर डालकर पीये। सर्दी खांसी का प्रकोप अधिक होने पर विक्स का मालिश करें, गले व छाती पर विक्स की मालिश करें। यदा-कदा प्लास्टिक की बोतल में गर्म पानी डालकर सिकाई करें। पीने का पानी कुनकुना कर पीये। नमक युक्त पानी से गरारे करें। फ्रिज में रखे पदार्थों का सेवन नहीं करें। खांसी होने पर दही, छाछ, रायता, लस्सी व ठंडे पेय पदार्थों का सेवन नहीं करें। सास, चटनी, अचार तीखे मसालों का उपयोग कम करें।



समान्यतय कहा जाता हे की आप यह खाएँ यह न खाएँ, इस प्रकार से रहें या न रहें तो इसमें विचारणीय बात यह हे की इन उपरोक्त बताई गई बातों में लगभग हर रोग और उसके ठीक करने का राज छुपा हुआ हे, उन्हें समझना होगा।
सुखी खांसी को मिटाने सोंठ+ मुन्नक्का +मिश्री + कालानमक +शहद- को गाय के घी या अच्छे मलाई वाले गाय के दूध के साथ देने से कफ निकलेगा और आराम होगा।
उपरोक्त चीजें पीपल+ कालीमिर्च और मिलकर केवल शहद के साथ चटाने से कफ वाली खांसी (जिसमें अधिक बलगम आती हो)ठीक होती हे ।
सूखी खांसी में खट्टी चीजें,अधिक भोजन और हींग हानिकारक होती हे।
सूखी खांसी होने पर अदरक का प्रयोग नहीं करें ।
हल्दी का प्रयोग हमारे घरों में खांसी के लिए अक्सर किया जाता हे पर यह जान लें की हल्दी कफ को सुखाती हे , इसलिए सूखी खांसी में देने पर तकलीफ और बढ जाएगी।
खांसी के विषय में एक बात समझने की और भी हे की यह आती क्यों हे?
खांसी आने में श्वास सस्थान अर्थात साँस लेने में प्रयुक्त होने वाले शरीर के अवयव आते हें। इनमें गला,फेफड़े प्रमुख हें। जब भी प्रकार की विजातीय वस्तु इन स्थानों पर आ जाती हे जेसे खाई गई कोई बस्तु,श्वास से अन्दर आई कोई वस्तु,जीवाणु,विषाणु,आदि आदि,तब हमारे शरीर की प्रणाली उसे बाहर फेक देना चाहती हे तब ही खांसी,छींक, अदि आती हे। यह प्रयत्न तब तक चलता हे जब तक वह विजातीय पदार्थ बाहर नहीं कर दिया जाता ,यदि गले में चिकनाहट हे तब उसके साथ थोडा थोडा लगातार फेका जाता रहता हे परचिकनाहट नहीं हे तो इस प्रयत्न में सूखी खाँसी आती रहती हे। यदि ऐसी चीज जो और अधिक खुश्की करे तो खांसी का दोरा शांत नहीं हो पता। इस हेतु सहायक के रूप में चिकनाहट ओषधि के साथ देने पर लाभ होता हे। यही इसको ठीक करने का सिधांत हे।
आयुर्वेद में घरेलु उपायों के अतिरिक्त कई ओषधियाँ उपलब्ध हें इनका समुचित अनुपान( ओषधि के साथ ली जाने वाली सहायक द्रव्य जेसे शहद,पानी,दूध,घी, छाछ, दही, आदि-आदि) के साथ सेवन रोग मिटाता हे। इसी कारण आयुर्वेदिक चिकित्सा में अनुपान को भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हे। विना उपयुक्त अनुपान के ली गई ओषधि व्यर्थ या हानि करने वाली भी सिद्ध हो जाती हे। कुछ सामान्य सी ओषधियाँ बना कर प्रयोग की जा सकती हें

कंटकारी- Solanum Xanthocarpum
कंटकारी भस्म- बरसात के बाद अपने आप भारत के अधिकांश भागो में उत्पन्न होने वाली यह वनस्पति जिसमें जामुनी रंग के फुल लगते हे सारे पोधे पर कांटे और कांटे युक्त्त पत्तियां होती हे( देखे चित्र ) इसको जड़ सहित उखाड़कर धोकर मिटटी साफ करलें सुखाकर लोहे के तवे पर ढक कर जला लें यह कंटकारी भस्म होगी सुखी खांसी में शहद और गोघृत के साथ कफ युक्त खांसी में शहद और छोटी पीपल एक साथ, कहते से रोग मुक्त हो जाता हे यह बड़ी निरापद ओषधि हे जो शिशुओं से लेकर वृधो तक चमत्कारी असर दिखाती हे। किसी भी स्थिति में कोई भी हानी नहीं करती। कंटकार्यवलेह (या कंटकारी अवलेह ) के नाम से कई अन्य ओषधियो के साथ बनी का उपयोग विना भय के किया जा सकता हे। इसे पानी मिलाकर सिरप की तरह पिया जा सकता हे।

शुक्रवार, मार्च 20, 2015

Diabetes treat : मधुमेह का ईलाज

मधुमेह : कुछ देसी नुस्खे और योग

आजकल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है। डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। मधुमेह रोगियों के लिए कुछ देसी नुस्खे पेश किए जा रहे हैं। इनमें से किसी को भी आजमाने से पूर्व अपने चिकित्सक से राय अवश्य ले लें। डायबिटीज भारत मे 5 करोड़ 70 लाख लोगोंकों है और 3 करोड़ लोगों को हो जाएगी अगले कुछ सालों मे सरकार ये कह रही है । हर दो मिनट मे एक मौत हो रही है डायबिटीज से जुड़े लोगों की। आप गौर फरमाएं राजेश मिश्रा की बातों पर… इससे परेशान लोग बहुत तकलीफों का सामना कर रहे हैं ... किसी की किडनी ख़राब हो रही है, किसीका लीवर ख़राब हो रहा है किसीको ब्रेन हेमारेज हो रहा है, किसीको पैरालाईसीस हो रहा है, किसी को ब्रेन स्ट्रोक आ रहा है, किसी को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है, किसी को हार्ट अटैक आ रहा है। Complications बहुत ही खतरनाक है ।

नपुंशक बना देता है मधुमेह : राज 

मधुमेह या डायबिटीज का एक प्रभाव ऐसा भी है जिस पर अमूमन खुलकर चर्चा कम ही होती है। मधुमेह पर होने वाली कई गोष्ठियों में भी विशेषग्य अक्सर इस विषय (सेक्स प्रभाव ) को छोड़ देते हैं। सच यह है कि असुविधाजनक चर्चा मानकर छोड़ दिए जाने से इस गंभीर नुक्सान के प्रति जागरूकता लाने का एक महत्वपूर्ण पहलू छूट जाता है। विशेषग्यों का मानना है कि मधुमेहग्रस्त स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स संबंधी ऐसी शिथिलता आ जाती है जिसके कारण इच्छा होते हुए भी ऐसे मरीज सेक्स के प्रति अक्षम हो जाते हैं। अंग शिथिल पड़ जाते हैं । महिलाओं में योनि की तंत्रिकाओं व उसकी कोशिकाओं को इतना नुकसान पहुंचता है जिससे संसर्ग के वक्त होने वाला द्रव्य प्रवाह रुक जाता है। योनि मार्ग सूख जाता है जिससे संसर्ग काफी तकलीफदेह हो जाता है। नतीजे में मधुमेह के मरीजों में कामेच्छा ही मर जाती है। एक अध्ययन के मुताबिक लगभग ४० प्रतिशत मधुमेह पीड़ित महिलाओं में या कामेच्छा ही मर जाती है या सेक्स के प्रति उनकी रुचि ही खत्म हो जाती है। कोई कामोत्तेजना न होने या सेक्स की अक्षमता के कारण यौनांगों में कोई कामोत्मुक प्रतिक्रिया नहीं होती। कहने का अर्थ यह है कि ऐसा महिला मरीजों का पूरा सेक्स जीवन ही नष्ट हो जाता है।
इसी तरह पुरुषों में भी मधुमेह के कारण तंत्रिकाएं और रक्तवाहिनियां प्रभावित होती हैं। इस कारण वह नपुंशकता का शिकार हो जाता है। मधुमेह पुरुषों के शिश्न समेत पूरे शरीर के तंत्रिका तंत्र को नष्ट कर देता है। एक बार जब तंत्रिकाएं नष्ट हो जाती हैं तो वह बिल्कुल क्रियाशील नहीं रह जाती हैं। संपर्क या संसर्ग के वक्त इसी कारण पुरुषों को कोई उत्तेजना नहीं होती। सामान्य अर्थों में इसे यह कहा जा सकता है कि मन में उठी कामोत्तेजना शिश्न (लिंग) तक नहीं पहुंच पाती। मन उत्तेजित हो जाता है मगर यौनांग बेजान पड़े रहते हैं क्यों कि उन तक कामोत्तेजना को पहुंचाने वाली तंत्रिकाओं की क्रियाशीलता मधुमेह के कारण नष्ट हो चुकी रहती है। नपुंशकता की इस अवस्था में लगभग असहाय हो जाता है मधुमेह का मरीज। क्यों कि लिंग में वह तनाव या कड़ापन नही आ पाता जो सेक्स क्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी होता है। यानी दो मुख्य घटनाएं होती हैं। पहला यह कि संवेदनाओं या कामेच्छा की सूचना यौनांगों तक नहीं पहुंच पाती और दूसरा यह कि रक्त कोशिकाओं में दोष के कारण लिंग में तनाव नहीं आता। स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स की यह अधोगति तब आती है जब वे मधुमेह को नियंत्रित नहीं रख पाते। अगर मधुमेह पर कारगर नियंत्रण हो तो सेक्स संबंधी इन विकारों से बचा जा सकता है।
जब किसी व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी होती है। इसका मतलब है वह व्यक्ति दिन भर में जितनी भी मीठी चीजें खाता है (चीनी, मिठाई, शक्कर, गुड़ आदि) वह ठीक प्रकार से नहीं पचती अर्थात उस व्यक्ति का अग्नाशय उचित मात्रा में उन चीजों से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसलिये वह चीनी तत्व मूत्र के साथ सीधा निकलता है। इसे पेशाब में शुगर आना भी कहते हैं। जिन लोगों को अधिक चिंता, मोह, लालच, तनाव रहते हैं, उन लोगों को मधुमेह की बीमारी अधिक होती है। मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रेागी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

तो ऐसी स्थिति मे हम क्या करें ?

एक छोटी सी सलाह है के आप इन्सुलिन पर जादा निर्भर न करे क्योंकि यह इन्सुलिन डाईबेटिस से भी जादा खतरनाक है, साइड इफेक्ट्स बहुत है ।
सामग्री:: 100 ग्राम मेथी दाना, 100 ग्राम तेज पत्र, 150 ग्राम जामुन की गुठली और 250 ग्राम बेल पत्र।
बनाने की विधि :: इन सब को अलग अलग धूप में सुखाकर इन्हे पत्थर पर पीस ले और बाद में सबको मिलाले इसका एक चम्म्च सुबह नाश्ता करने से पहले 1 गिलास गर्म पानी से ले ले और एक चम्म्च रात को खाना खाने से एक घण्टे पहले, इस दवा को 3 महिने लगातार लेने से मधुमेह (डायबिटीज) खत्म हो जाती है, इसके साथ रोजाना योग-प्राणायाम जरूर करें । 

परहेज और सावधानियां  : राज 

ज्यादा फ़ाईबर और कम फ़ैट वाली चीजे खाए जैसे सब्जीया खाए, दाल छिलके वाली ही खाएं। चीनी न खाए, देसी गुड खा सकते है (बिना कैमीकल वाला) फ़ल आदि जिसमें प्राक्रतिक शक्कर होती है वो सभी खा सकते हैं। 

नींबू से प्यास बुझाइए : राज 

मधुमेह के मरीज को प्यास अधिक लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने की अवस्था में नीबू निचोड़कर पीने से प्यास की अधिकता शांत होती है।

खीरा खाकर भूख मिटाइए : राज 

मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में बार-बार भूख महसूस होती है। इस स्थिति में खीरा खाकर भूख मिटाना चाहिए।

गाजर-पालक को औषधि बनाइए

इन रोगियों को गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है।

रामबाण औषधि है शलजम : राज 

मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। अतः शलजम की सब्जी, पराठे, सलाद आदि चीजें स्वाद बदल-बदलकर ले सकते हैं।

जामुन खूब खाइए : राज 

मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। जामुन को मधुमेह के रोगी का ही फल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में बेहद फायदेमंद हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन औषधि के रूप में खूब करना चाहिए। जामुन की गुठली संभालकर एकत्रित कर लें। इसके बीजों जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार, तीन ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शुगर की मात्रा कम होती है।

करेले का इस्तेमाल करें : राज 

प्राचीन काल से करेले को मधुमेह की औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसका कड़वा रस शुगर की मात्रा कम करता है। मधुमेह के रोगी को इसका रस रोज पीना चाहिए। इससे आश्चर्यजनक लाभ मिलता है। अभी-अभी नए शोधों के अनुसार उबले करेले का पानी, मधुमेह को शीघ्र स्थाई रूप से समाप्त करने की क्षमता रखता है।

मैथी का प्रयोग कीजिए : राज 

मधुमेह के उपचार के लिए मैथी दाने के प्रयोग का भी बहुत चर्चा है। दवा कंपनियाँ मैथी के पावडर को बाजार तक ले आई हैं। इससे पुराना मधुमेह भी ठीक हो जाता है। मैथीदानों का चूर्ण बनाकर रख लीजिए। नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिए। कुछ दिनों में आप इसकी अद्भुत क्षमता देखकर चकित रह जाएँगे।

चमत्कार दिखाते हैं गेहूँ के जवारे

गेहूँ के पौधों में रोगनाशक गुण विद्यमान हैं। गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड के नाम से पुकारा जाता है। जवारे का ताजा रस निकालकर आधा कप रोगी को तत्काल पिला दीजिए। रोज सुबह-शाम इसका सेवन आधा कप की मात्रा में करें।

अन्य उपचार : राज 

नियमित रूप से दो चम्मच नीम का रस, केले के पत्ते का रस चार चम्मच सुबह-शाम लेना चाहिए। आँवले का रस चार चम्मच, गुडमार की पत्ती का काढ़ा सुबह-शाम लेना भी मधुमेह नियंत्रण के लिए रामबाण है।

मोटा खाएं मस्त रहें : राज 

मोटे अनाज न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं बल्कि इनके इस्तेमाल से दिल की बीमारी कैल्शियम की कमी और कई तरह की बीमारियां आप के पास भी नहीं फटक पातीं। देहाती भोजन समझ कर जिन मोटे अनाजों को रसोई से कभी का बाहर किया जा चुका है, अब वैज्ञानिक शोध से बार-बार उनकी पौष्टिकता सिद्घ हो रही है। भारतीय खाद्य एवं चारा विभाग की फसल विज्ञानी डा. उमा रघुनाथन के मुताबिक धान और गेहूं की अपेक्षा छोटे खाद्यान्न जैसे मड़ुआ, कोदो, सावां तथा कुटकी आदि की पौष्टिकता अधिक है। 

परंपरागत तौर से रसोई घर से बाहर की कर दिए गए मोटे अनाज दिल की बीमारी, मधुमेह तथा डियोडिनम अल्सर से लड़ने में सहायक है। यही नहीं, सामान्य गेंहूं में जहां साल 2 साल में घुन लग जाता है वहीं मड़ुआ का दाना 2 दशक तक ज्यों का त्यों बना रहता है।

शुगर फ्री से घुल न जाए कडुवाहट : राज 

चॉकलेट, मिठाई, आईसक्रीम व सॉफ्ट ड्रिंक जैसी चीजों पर 'शुगर फ्री' लिखा देखकर गुमराह न हों, क्योंकि इनका लगातार इस्तेमाल न सिर्फ मधुमेह के स्तर व मोटापे की समस्या को बढ़ा सकता है, बल्कि सिरदर्द, पेट दर्द, अनिद्रा व चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुगर फ्री के नाम पर धड़ल्ले से परोसी जा रही इन चीजों में सिर्फ चीनी के इस्तेमाल से परहेज किया जाता है, दूध, खोया, घी जैसे फैट व कैलोरी के अन्य कंटेंट वही होते हैं, जो आम उत्पादों में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में 'शुगर फ्री है, तो नुकसान नहीं करेगा' इस भ्रम में मधुमेह ग्रस्त लोग इन चीजों का मुक्त रूप से इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं, जो कि काफी घातक साबित होता है। उल्लेखनीय है कि चॉकलेट, आईसक्रीम, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक जैसी जिन चीजों से मधुमेह रोगियों को परहेज करने के लिए कहा जाता है, कंपनियां उनके शुगर फ्री उत्पाद बाजार में लेकर आ जाते हैं, जिनका दावा होता है कि इनके इस्तेमाल से मधुमेह रोगियों को कोई समस्या नहीं होगी। आजकल शादी-विवाह व जन्मदिन आदि की पार्टियों में भी शुगर फ्री उत्पादों को परोसना फैशन ट्रेंड बन गया है और मधुमेह पीड़ित लोग भी बेफिक्र होकर इनका इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली डायबिटिक रिसर्च सेंटर की ओर से किए गए अध्ययन में पाया गया कि शुगर फ्री उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मुंह का स्वाद खराब रहने, माइग्रेन, पेट संबंधी दिक्कतें, चिड़चिड़ापन व इनसोमनिया जैसी समस्याएं आम होती हैं।

कपाल भाति से दूर होते हैं संपूर्ण रोग : राज 

यदि प्रत्येक व्यक्ति कपाल भाति प्राणायाम करता रहे तो वह संपूर्ण रोगों से मुक्ति पा सकता है। कपाल भाति प्राणायाम के निरंतर अभ्यास करने से मस्तिष्क व मुख मंडल पर तेज, आभा व सौंदर्य बढ़ता है साथ ही हृदय, फेफड़ों एवं मस्तिष्क के सभी रोग दूर होते है। मोटापा, मधुमेह, गैस, कब्ज, अम्लियत आदि के विकार दूर होते है यदि मनुष्य कपाल भाति प्राणायाम करता रहे तो शरीर निरोग रहता है। भ्रामरी प्राणायाम अनेक रोगों को दूर करता है। यह प्राणायाम आंख, कान, बालों के लिए काफी लाभदायक है इसके अलावा इससे मिरगी के चक्कर आना, हाथ, पैरों के सुनापन आदि बीमारियों में यह योग महत्वपूर्ण है। यह प्राणायाम बुद्धि वर्धक भी है। रोजाना इसे 3-4 मिनट तक करने से बुद्धि का विकास होगा व स्मरण शक्ति भी बढ़ेगी।

प्राणायाम और आसन

योग गुरु स्वामी रामदेव साधकों को प्राणायाम और आसन कराने के साथ ही इनकी खासियत भी बताते है। जीवन के रूपांतरण की सप्त प्रणायाम की क्रियाओं के सम्पूर्ण आरोग्य देने का जिक्र करते हुए स्वामी रामदेव ने भस्त्रिका प्राणायाम के बारे में बताया है कि लम्बा गहरा श्वास फेफड़ों में ढाई सेकेंड में भरो और ढाई सेकेंड में ही छोड़ो। सामान्य तरह से अधिकतम पांच मिनट और कैंसर या किसी अन्य समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को इसे 10 मिनट तक करना चाहिए। यानी सामान्यत: 50 से 60 बार और जटिलता में सौ बार यह प्रक्रिया दोहरानी है। कपाल भांति एक सेकेंड में एक बार करना चहिये। औसतन इससे एक झटके में एक ग्राम वजन कम होता है। कैंसर ल्यूकोडर्मा में कपालभांति 15 की जगह 30 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है। भस्त्रिका अगर अर्जन है तो कपालभांति विसर्जन। यह क्रिया 15 मिनट में नौ सौ होनी चाहिए। असाध्य रोगों में 18 सौ से दो हजार बार दोहराई जानी चाहिए। गत दिनों मैं जगकल्याण स्नेह मिलन कार्यक्रम के दौरान उनके हरिद्वार स्थित विशालकाय सभी सुखों से समृद्ध आश्रम में भी गया था जहाँ उन्होंने गहरा श्वास लेकर बाहर छोड़कर वाह्य प्राणायाम की क्रिया को तीन से पांच बार करने की सलाह देते हुए अनुलोम-विलोम प्राणायाम के बारे में बताया कि इसे एक चक्र में अधिकतम पांच मिनट करें और सामान्य रूप में कुल समय 15 मिनट और असाध्य रोगों की स्थिति में 30 मिनट दें। होंठ बंदकर ओंकार का गुंजन करने वाले भ्रामरी के साथ ही उन्होंने उद्गीत और प्रणाम प्राणायाम का जिक्र किया। साथ ही सहायक प्राणायाम उज्जायी के बारे में बताया कि यह गले और थायरायड की समस्याओं में लाभप्रद है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी शक्ति संकल्प की, विचार की और विश्वास की है। प्राणायाम यह सोचकर करो कि मैं बीमार नहीं हूं। उन्होंने कहा कि अतिपोषण और कुपोषण दोनों बीमारी का कारण हैं। अब तक अन्नमय कोष को खूब पोषित किया है, अब कमजोर पड़ते मनोमय, ज्ञानमय और आनन्दमय कोष को प्राणायाम से पोषित करो। प्रज्ञा का विस्तार होगा। प्राणायाम, सूक्ष्म व सम्पूर्ण व्यायाम के साथ उंन्होंने योग आसन के विषय में कहा कि जितनी भी संसार में आकृतियां हैं, पशु पक्षी हैं, उतने ही आसन हैं। लिहाजा सब आसन हमें नहीं करने, हमें सिर्फ वही योग करना है जो हमें निरोग बनाता हो। उन्होंने भुजंग, मर्कट, वज्र और सिंह आसन भी कराये।

कम खाएँ ज्यादा जिएँ : राज 

यदि आप कम खाते हैं, तो आप ज्यादा समय तक जिंदा रहेंगे। एक नए अध्ययन में ये बात सामने आई है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बहुत कम खाना शुरू कर दिया जाए, जो जीवन ही समाप्त कर दे। 1930 में यह पाया गया कि प्रयोगशाला में रहने वाले जीव कम कैलोरी वाले पदार्थ खाते हैं और लंबे समय तक जीवित रहते हैं। इन लोगों को कैंसर, मधुमेह और हृदयाघात जैसी शिकायतें कम ही होती है। परंतु फिर भी अभी तक इसके प्रमाण कम ही थे कि कम खाने वाले ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं। अब एन्ड्रयू डिलिन ने केलिफोर्निया के ला जोला स्थित साल्क इंस्टीट्यूट फॉर बायलॉजिकल स्टडीज में अध्ययन में एक जीन का पता किया है। इसका सीधा संबंध मनुष्य के जीवन से होता है। यह भी बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि यदि कैलोरी सीमित कर दी जाए तो इससे जीवन अवधि ब़ढ़ सकती है। शोध दल ने पाया कि शरीर पीएच-4 नाम की जीन होती है, जो मनुष्य में विकास के लिए जिम्मेदार होती है। परंतु वयस्कों में ये कैलोरी के साथ कार्य करती है। मनुष्य में पीएचए-4 के समान तीन जीन और भी होती हैं। ये जीन ग्लूकागॉन से संबंधित रहती है। इसका संबंध पेनक्रियाज के हार्मोन से बना रहता है। यही शरीर में रक्त शर्करा को ब़ढ़ाता है और शरीर का संतुलन बनाए रखता है, विशेष रूप से उपवास आदि के दौरान।

बुधवार, मार्च 04, 2015

कब्‍ज दूर करने के घरेलू उपचार

Constipation: Causes, Prevention and treatment as per Ayurveda
कैसे रुके कब्ज का कब्जा

सामान्य रूप से मल का निष्कासन ना होना तथा आंतों में मल का रूकना कब्ज कहलाता है॰

अक़सर आपका पेट ठीक तरह से साफ नहीं होता है तो इसका मतलब कब्ज हो सकता है और आपके शरीर में तरल पदार्थ की कमी है। कब्ज के दौरान आप खुद में तरोजाता महसूस नहीं कर पाते। कब्ज का यदि ठीक समय पर इलाज न कराया जाए तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकता है। कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कूते जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यांदि होती हैं। कब्ज के लिए प्रभावी प्राकृतिक उपचार तो मौजूद है ही साथ ही आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से भी कब्ज को दूर किया जा सकता है। आइए जानें कब्ज के लिए कौन-कौन से आयुर्वेदिक उपचार मौजूद हैं।
अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्‍ज और पेट गैस की समस्‍या आम बीमारी की तरह हो गई है। कब्‍ज रोगियों में गैस व पेट फूलने की शिकायत भी देखने को मिलती है। लोग कहीं भी और कुछ भी खा लेते हैं। खाने के बाद बैठे रहना, डिनर के बाद तुरंत सो जाना ऐसी आदतें हैं जिनके कारण कब्‍ज की शिकायत शुरू होती है। पेट में गैस बनने की बीमारी ज्‍यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है लेकिन यह किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकती है।
आइए हम आपको कब्‍ज से बचने के घरेलू नुस्‍खे के बारे में जानकारी देते हैं;

कब्‍ज के उपचार के घरेलू उपाय –

  • सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा।
  • 20 ग्राम त्रिफला रात को एक लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्‍ज की शिकायत दूर हो जाएगी।
  • कब्‍ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्‍मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्‍ज दूर हो जाता है।
  • हर रोज रात में हर्र को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्‍ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा।
  • रात को सोते वक्‍त अरंडी के तेल को हल्‍के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा।
  • इसबगोल की भूसी कब्‍ज के लिए रामबाण दवा है। दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्‍त इसबगोल की भूसी लेने से कब्‍ज समाप्‍त होता है।

  • पका हुआ अमरूद और पपीता कब्‍ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है।
  • किशमिश को पानी में कुछ देर तक डालकर गलाइए, इसके बाद किशमिश को पानी से निकालकर खा लीजिए। इससे कब्‍ज की शिकायत दूर होती है।
  • पालक का रस पीने से कब्‍ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्‍जी का प्रयोग करना चाहिए।
  • अंजीर के फल को रात भर पानी में डालकर गलाइए, इसके बाद सुबह उठकर इस फल को खाने से कब्‍ज की शिकायत समाप्‍त होती है।
  • मुनक्‍का में कब्‍ज नष्‍ट करने के तत्‍व मौजूद होते हैं। 6-7 मुनक्‍का रोज रात को सोने से पहले खाने से कब्‍ज समाप्‍त होती है।
  • कब्‍ज की समस्‍या से बचने के लिए नियमित रूप से व्‍यायाम और योगा करना चाहिए। गरिष्‍ठ भोजन करने से बचें।
इन नुस्‍खों को प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। अपनाने के बाद भी अगर पेट की बीमारी ठीक नही होती तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए।

इमली एक गुण अनेक

Tamarind is a property of Manyइमली के औषधीय गुण

इमली का फल कच्चा हरा, पकने के बाद लाल रंग का हो जाता है। पकी इमली का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। इसे खाने के बाद दांत तक खट्टे होने लगते हैं। एक इमली के फल में तीन से लेकर दस बीज निकलते हैं। ये बीज काले, चमकदार व बहुत कड़े होते हैं। इमली का खट्टा-मीठा स्वाद किसी के भी मुंह में देखते ही पानी ला देता है। इसीलिए इमली का उपयोग खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि इमली सिर्फ टेस्टी ही नहीं है चटखारेदार और मुँह में पानी लाने वाली इमली स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है : राजेश मिश्रा| 

वीर्य – पुष्टिकर योग : 

इमली के बीज दूध में कुछ देर पकाकर और उसका छिलका उतारकर सफ़ेद गिरी को बारीक पीस ले और घी में भून लें, इसके बाद सामान मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें | इसे प्रातः एवं शाम को 5-5 ग्राम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य पुष्ट हो जाता है | बल और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है तथा स्व-प्रमेह नष्ट हो जाता है |

शराब एवं भांग का नशा उतारने में :

  • नशा समाप्त करने के लिए पकी इमली का गूदा जल में भिगोकर, मथकर, और छानकर उसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर पिलाना चाहिए |
  • इमली के गूदे का पानी पीने से वमन, पीलिया, प्लेग, गर्मी के ज्वर में भी लाभ होता है |
  • ह्रदय की दाहकता या जलन को शान्त करने के लिये पकी हुई इमली के रस (गूदे मिले जल) में मिश्री मिलाकर पिलानी चाहियें |

लू-लगना : 

पकी हुई इमली के गूदे को हाथ और पैरों के तलओं पर मलने से लू का प्रभाव समाप्त हो जाता है | यदि इस गूदे का गाढ़ा धोल बालों से रहित सर पर लगा दें तो लू के प्रभाव से उत्पन्न बेहोसी दूर हो जाती है |

चोट – मोच लगना : 

इमली की ताजा पत्तियाँ उबालकर, मोच या टूटे अंग को उसी उबले पानी में सेंके या धीरे – धीरे उस स्थान को उँगलियों से हिलाएं ताकि एक जगह जमा हुआ रक्त फ़ैल जाए |

गले की सूजन : 

इमली 10 ग्राम को 1 किलो जल में अध्औटा कर (आधा जलाकर) छाने और उसमें थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर रोगी को गरारे या कुल्ला करायें तो गले की सूजन में आराम मिलता है |

खांसी : 

टी.बी. या क्षय की खांसी हो (जब कफ़ थोड़ा रक्त आता हो) तब इमली के बीजों को तवे पर सेंक, ऊपर से छिलके निकाल कर कपड़े से छानकर चूर्ण रख ले| इसे 3 ग्राम तक घृत या मधु के साथ दिन में 3-4 बार चाटने से शीघ्र ही खांसी का वेग कम होने लगता है | कफ़ सरलता से निकालने लगता है और रक्तश्राव व् पीला कफ़ गिरना भी समाप्त हो जाता है |

ह्रदय में जलन : 

इमली का रस मिश्री के साथ पिलाने से ह्रदय में जलन कम हो जाती है |

नेत्रों में गुहेरी होना : 

इमली के बीजों की गिरी पत्थर पर घिसें और इसे गुहेरी पर लगाने से तत्काल ठण्डक पहुँचती है |

चर्मरोग : 

लगभग 30 ग्राम इमली (गूदे सहित) को 1 गिलाश पानी में मथकर पीयें तो इससे घाव, फोड़े-फुंसी में लाभ होगा|
उल्टी होने पर पकी इमली को पाने में भिगोयें और इस इमली के रस को पिलाने से उल्टी आनी बंद हो जाती है |

भांग का नशा उतारने में : 

नशा उतारने के लिये शीतल जल में इमली को भिगोकर उसका रस निकालकर रोगी को पिलाने से उसका नशा उतर जाएगा |

खूनी बवासीर : 

इमली के पत्तों का रस निकालकर रोगी को सेवन कराने से रक्तार्श में लाभ होता है |

शीघ्रपतन : 
Tamarind Jam and Morabba : Rajesh Mishra

  • लगभग 500 ग्राम इमली 4 दिन के लिए जल में भिगों दे | उसके बाद इमली के छिलके उतारकर छाया में सुखाकर पीस ले | फिर 500 ग्राम के लगभग मिश्री मिलाकर एक चौथाई चाय की चम्मच चूर्ण (मिश्री और इमली मिला हुआ) दूध के साथ प्रतिदिन दो बार लगभग 50 दिनों तक लेने से लाभ होगा |
  • लगभग 50 ग्राम इमली, लगभग 500 ग्राम पानी में दो घन्टे के लिए भिगोकर रख दें उसके बाद उसको मथकर मसल लें | इसे छानकर पी जाने से लू लगना, जी मिचलाना, बेचैनी, दस्त, शरीर में जलन आदि में लाभ होता है तथा शराब व् भांग का नशा उतर जाता है | 

बहुमूत्र या महिलाओं का सोमरोग : 

इमली का गूदा 5 ग्राम रात को थोड़े जल में भिगो दे, दूसरे दिन प्रातः उसके छिलके निकालकर दूध के साथ पीसकर और छानकर रोगी को पिला दे | इससे स्त्री और पुरुष दोनों को लाभ होता है | मूत्र- धारण की शक्ति क्षीण हो गयी हो या मूत्र अधिक बनता हो या मूत्रविकार के कारण शरीर क्षीण होकर हड्डियाँ निकल आयी हो तो इसके प्रयोग से लाभ होगा |

अण्डकोशों में जल भरना : 

लगभग 30 ग्राम इमली की ताजा पत्तियाँ को गौमूत्र में औटाये | एकबार मूत्र जल जाने पर पुनः गौमूत्र डालकर पकायें | इसके बाद गरम – गरम पत्तियों को निकालकर किसी अन्डी या बड़े पत्ते पर रखकर सुहाता- सुहाता अंडकोष पर बाँध कपड़े की पट्टी और ऊपर से लगोंट कास दे | सारा पानी निकल जायेगा और अंडकोष पूर्ववत मुलायम हो जायेगें |

पीलिया या पांडु रोग : 

इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भष्म 10 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से पान्डु रोग ठीक हो जाता है |

आग से जल जाने पर : 

इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भष्म गाय के घी में मिलाकर लगाने से, जलने से पड़े छाले व् घाव ठीक हो जाते है |

पित्तज ज्वर : 

इमली 20 ग्राम 100 ग्राम पाने में रात भर के लिए भिगो दे | उसके निथरे हुए जल को छानकर उसमे थोड़ा बूरा मिला दे | 4-5 ग्राम इसबगोल की फंकी लेकर ऊपर से इस जल को पीने से लाभ होता है |

सर्प , बिच्छू आदि का विष : 

इमली के बीजों को पत्थर पर थोड़े जल के साथ घिसकर रख ले | दंशित स्थान पर चाकू आदि से छत करके 1 या 2 बीज चिपका दे | वे चिपककर विष चूसने लगेंगे और जब गिर पड़े तो दूसरा बीज चिपका दें | विष रहने तक बीज बदलते रहे |

मंगलवार, मार्च 03, 2015

राज कि छोटी-छोटी मगर मोटी-मोटी बातें

Get compliments of the house as a Doctor

घर का डॉक्टर बनें तारीफ पाएं


छोटी-छोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स सभी को कभी न कभी होती है। यदि आप घर पर ही ऐसी प्रॉब्लम्स का उपाय करना चाहते हैं तो आज राजेश मिश्रा आपको बता रहे हैं ऐसे महत्वपूर्ण घरेलू नुस्खे, जिनका पता होने पर आप कुछ साधारण रोगों का इलाज खुद कर सकते हैं और घर का डॉक्टर कहलाने के साथ-साथ तारीफ भी पाएंगे.. 
पेट दर्द - अाधा चम्मच हल्दी और आधे चम्मच नमक को मिलाकर ठंडे पानी से फांकी मार लें। पेट दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
बालों का गिरना - यदि आपके बालों में रूसी है या फिर आपके बाल झड़ रहे हैं तो आप कच्चे पपीते का पेस्ट बनाकर बालों की जड़ों पर 10 मिनट तक लगाएं। उसके बाद बाल धो लें। ऐसा करने से आपके बाल नहीं झड़ेंगे।

खून की खराबी - खून साफ नहीं हैं तो 1 चम्मच शहद को आधे गिलास पालक के रस में मिलाकर 1 महीने तक सेवन करें। यह आपके रक्त विकार को दूर करेगा और खून को साफ रखेगा।
स्किन प्रॉब्लम - नारियल पानी में कच्चा दूध, नींबू का रस, बेसन और चंदन पाउडर मिलाकर लेप तैयार करें। नहाने से 15 मिनट पहले ये लेप चेहरे पर लगाएं। उसके बाद चेहरा धो लें। यह नुस्खा स्किन प्रॉब्लम दूर कर चेहरे को चमकदार बनाता है।
एसिडिटी - भोजन करने के बाद आप थोड़े से गुड़ का सेवन करें। ऐसा करने से एसिडिटी की समस्या खत्म हो जाएगी।
सिरदर्द - एक गिलास गर्म पानी में आधे नींबू का रस डालकर पिएं। सिर दर्द दूर हो जाएगा। साथ ही युकेलिप्टस के तेल से सिर की मसाज करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है।
गैस्ट्रिक ट्रबल - अजवायन और काला नमक पीस कर समान मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को एक चम्मच मात्रा में गर्म पानी से लें। गैस की समस्या में तुरंत आराम मिलेगा।
गैस्ट्रिक ट्रबल - एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नीबू, थोड़ा सा काला नमक, सिका हुआ जीरा और थोडी सी हींग मिलाकर लेने से गैस की तकलीफ में तत्काल राहत मिलती है।
जुकाम - यदि जुकाम या सर्दी हो तो रात को सोने से पहले गर्म पानी पीकर सोएं। जुकाम में बहुत राहत मिलेगी।

घरेलू उपचार

1. अपनी दवा ठंडे पानी से मत लें।

2. पांच बजे शाम के बाद भारी खाना न खाएं।

3. सुबह में रात की अपेक्षा ज्यादा पानी पियें.

4. सोने का सबसे बेहतर समय 10 बजे रात से 4 बजे सुबह होता है।

5. खाना खाने के तुरंत बाद न ही सोयें या न ही लेटे.

6. फ़ोन कॉल बाएं कान से सुनें।

7. जब मोबाइल फ़ोन बिलकुल डिस्चार्ज हो रहा हो तो उस समय फ़ोन न सुने क्योंकि उस समय रेडिएशन

1000 गुना ज्यादा होता है।

8. चार्ज में लगे फ़ोन से फ़ोन न ही करें, न ही रिसीव करें. उस समय रेडिएशन ज्यादा निकलता है।

दांत दर्द-

  • दांत का दर्द अगर परेशान कर रहा हो तो पांच लौंग पीस कर उसमे निम्बू का रस निचोड़कर दांतो पर मलने से दर्द दूर होता है। 
  • दांत में कीड़ा लगने पर दांतो के नीचे लौंग को रखना या लौंग का तेल लगाना चाहिए। 
  • पांच लौंग एक ग्लास पानी में उबालकर इसमें कुल्ले करने से दर्द ठीक हो जाता है। 
  • नीम की कोंपलों को उबाल कर कुल्ले करने से दांतो का दर्द जाता रहता है। 
  • दर्द वाले दांत पर कपूर लगाएं। दांत में छेद हो तो उसमे कपूर भर दें। दर्द दूर होगा, कीड़े भी मर जाएंगे।
  • गर्म पानी में मिलकर कुल्ले करने से दांत दर्द में लाभ होता है। नित्य रात को सोने से पहले गर्म पानी में 
  • नमक डाल कर गरारे करके सोने से दांतों में कोई रोग नहीं होता। 
  • अदरक के टुकड़े पर नमक डालकर दर्द वाले दांतो में दबाएं, आराम मिलेगा। 

खजूर-

  • खजूर को शीतकालीन का फल माना गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए यह पित्त के अनेक रोगों में लाभदायक हता है। शरीर के विकास के लिए यह श्रेष्ठ फल है। आइये जानें इसके फ़ायदे। 
  • सुखी खांसी होने पर दिन में दो बार सुबह और शाम खजूर खाने से लाभ होता है। 
  • खजूर का सेवन करने से पाचन-क्रिया ठीक होती है। पेट के दर्द और कब्ज़ के लिए लाभकारी है। 
  • दूध के साथ खजूर खाने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। 
  • खजूर और दही खाने से पेचिश में लाभ होता है। 
  • गुठली निकाले हुए दो खजूरों में थोड़ा सा शुद्ध घी, दो दाने काली मिर्च मिलकर एक महीना खाएं और ऊपर से दूध पिएं। इस तरह आपको अद्भुत शक्ति मिलेगी।

मेथी -

हम बात कर रहे है मेथी की । आइए जाने इसके फ़ायदे । 
  • इसे खाने से भूख बढ़ती है और कमर व पीठ दर्द में लाभ होता हैं । 
  • भले ही इसे कफ और ज्वर का कारक माना जाता रहा हो लेकिन यह शरीर की कई कृमियों का विनाश करती है । 
  • आग से जलने पर दानेदार मेथी को पानी में पीसकर लेप लगाने से जलन दूर हो जाती हैं । 
  • दानेदार मेथी की फंकी गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता हैं। 
  • अगर भूख ना लगती हो तो 7 ग्राम मेथी दाने में थोड़ा सा घी डालकर सके जब यह लाल होने लगे तो उतार कर ठंढा करें फिर पीस लें । इसके बाद इसमें शहद मिलाकर डेढ़ महीने तक चाटे ,भूख बढऩे लगेगी। 
  • डायबिटीज के रोगियों के लिए भी यह काफ़ी लाभदायक हैं । इसके सेवन से शरीर में शुगर लेवल कम होने के साथ कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होने लगता हैं ।

माइग्रेन :कारण और निवारण

Successful home Treatment
of Migraine

माइग्रेन का सफल घरेलू उपचार

माइग्रेन को आम बोलचाल की भाषा में अधकपारी भी कहते हैं। यह नाम इसे इसलिए मिला क्योंकि आम तौर पर इसका शिकार होने पर सिर के आधे हिस्से में दर्द रहता है, जबकि आधा दर्द से मुक्त होता है।यह कोई छोटा-मोटा दर्द नहीं है। यह आपके सारे दिन की गतिविधियों को ठप्प कर देने वाला दर्द है। इससे आपकी आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। यह ऐसा दर्द है जिसे भगाने के लिए कई बार मरीज को दवा लेने का होश तक नहीं रहता। इसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन आप इस दर्द को कम ज़रूर कर सकते हैं। भीषण सरदर्द की यह बीमारी माइग्रेन है। माइग्रेन किस वजह से होता है यह भी जानना जरूरी है। माइग्रेन की मुख्य वजह है, चिंता करना, देर रात तक काम करना, मानसिक दुर्बलता, जुकाम, नजला, कब्ज, मलेरिया का प्रभाव आदि।महिलाओं में माइग्रेन के मुख्य कारण है, हिस्टीरिया, अधिक शारीरिक या मानसिक कार्य करना, सदमा लगना, बेवजह पेरशान रहना आदि। महिलाएं पुरूषों की तुलना में माइग्रेन से अधिक पीड़ित रहती हैं। माइग्रेन का सही समय पर इलाज होना जरूरी है क्योंकि इस दर्द से रोगी बेचैन हो जाता है और गलत दवाइयों का सेवन करने लगता है। जिसकी वजह से दूसरी और बीमारियां रोगी को लग जाती है। आयुर्वेद में माइग्रेन का सटीक इलाज मौजूद है लेकिन यदि दर्द बहुत ही तेज है तो आप तुरंत डाक्टर को दिखाना न भूलें।
इसके निवारण के लिए डॉक्टर द्वारा कई दवाईयाँ दी जाती हैं लेकिन इन दवाइयों का लगातार उपयोग हमारे शरीर को नुकसान भी पहुँचा सकता है। इनको लगातार लेते रहने से इन दवाओं की शरीर को आदत भी हो जाती है। इस बीमारी के लिए कई घरेलू उपचार भी किए जा सकते हैं।
कुछ घरेलू और आसान उपाय जिनसे माइग्रेन में आराम मिल सकता है, इस प्रकार हैं-
माइग्रेन के ज्यादातर रोगी जानते हैं कि इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन कई ऐसे भी हैं, जिन्हें यह भी पता नहीं कि इससे असरदार तरीके से निपटा जा सकता है।

माइग्रेन की पहचान

  • क्या आपको सिर के एक हिस्से में बुरी तरह धुन देने वाले मुक्कों का एहसास होता है, और लगता है कि सिर अभी फट जाएगा?
  • क्या उस वक्त आपके लिए अत्यंत साधारण काम करना भी मुश्किल हो जाता है?
  • क्या आपको यह एहसास होता है कि आप किसी अंधेरी कोठरी में पड़े हैं, और दर्द कम होने पर ही इस अनुभव से निजात मिलती है?
अगर इनमें से किसी भी प्रश्न का उत्तर हां में है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि आपको माइग्रेन हुआ है। इसलिए फौरन डॉक्टर के पास जाकर इसकी पुष्टि कर लेनी चाहिए।
ज्यादातर लोगों को माइग्रेन का पता तब चलता है, जब वे कई साल तक इस तकलीफ को ङोलने के बाद इसके लक्षणों से वाकिफ हो जाते हैं।
कठोरता : किसी कठोर चीज से सिर के एक हिस्से में जोर-जोर से वार करने का एहसास तब होता है, जब जैविक परिवर्तन के कारण खून की धमनियां फूलने लगती हैं, या उनमें जलन होने लगती है। जबकि अन्य प्रकार के सिरदर्द में आमतौर पर दर्द सिकुड़ी हुई धमनियों या सिर और गर्दन की मांसपेशियों के सख्त हो जाने के कारण होता है। ‘माइग्रेन का दर्द बहुत जबर्दस्त होता है। इसस आप रोजमर्रा के आम काम भी नहीं कर पाते। यहां तक कि चलना फिरना भी दूभर हो जाता है, और लगता है कि शरीर टूट चुका है।’
गैस की समस्या :
  • माइग्रेन के साथ अक्सर जी मिचलाता है, और उल्टी भी हो जाती है।
  • माइग्रेन का अटैक होने पर मरीज को रोशनी, आवाज या किसी तरह की गंध नहीं सुहाती।
  • माइग्रेन का हमला अचानक होता है। कई बार यह शुरू में हल्का होता है, लेकिन धीरे-धीरे बहुत तेज दर्द में तब्दील हो जाता है। माइग्रेन का अटैक किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन ज्यादातर इसकी शुरुआत किशोर उम्र से होती है।
  • माइग्रेन के ज्यादातर मरीज वे होते हैं, जिनके परिवार में ऐसा इतिहास रहा है। इसके कुल मरीजों में 75 प्रतिशत महिलाएं होती हैं।
  • स्थान : माइग्रेन का दर्द आमतौर पर सिर के एक सिरे से, या कभी-कभी बीचोंे बीच से या पीछे की तरफ से उठता है।
  • माइग्रेन का दर्द 4 से 48 घंटे तक रह सकता है। कभी यह रह-रहकर कई हफ्तों या महीनों तक, या फिर सालों तक खास अंतराल में उठता है। कई बार एक ही समय में यह बार-बार हथौड़ों की बारिश का एहसास कराता है।
  • माइग्रेन की अनुभूति कई बार वास्तविक दर्द से दस मिनट से लेकर आधे घंटे पहले ही शुरू हो जाती है। इस दाौरान सिर में बिजली फट पड़ने, आंखों के आगे अंधेरा छा जाने, बदबू आने, सुन्न पड़ जाने या दिमाग में झन्नाहट का एहसास होता है। किसी-किसी मरीज को अजीब-अजीब सी छायाएं नजर आती हैं। किसी को चेहरे और हाथों में सुइयां या या पिनें चुभने का एहसास होता है। लेकिन कई अध्ययनों से सामने आया है कि माइग्रेन के प्रभामंडल का एहसास केवल एक से पांच प्रतिशत मरीजों को ही होता है। इसे क्लासिकल माइग्रेन कहा जाता है, लेकिन यह महिलाओं में कम होता है।

माइग्रेन का इलाज

  • विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन से निपटने में इस बात का रोल काफी अहम होता है कि आप इसके लिए कितने तैयार हैं। सभी मरीजों में माइग्रेन के पूर्व संकेत (ट्रिगर्स) एक से नहीं होते, इसलिए उनके लिए डायरी में अपनी अनुभूतियां दर्ज करना उपयोगी हो सकता है। इसके बाद आप दवा की सहायता से इन ट्रिगर्स से समय रहते बचकर, माइग्रेन को टाल भी सकते हैं।
  • माइग्रेन का दर्द होने पर आप देशी घी में गुड खायें यह आधे सिर मे होने वाले दर्द से निजात दिलाता है। यदि दर्द सुबह से ही होने लगे तो आप दूध में जलेबी या रबड़ी का सेवन करें। एैसा करने से आधे सीसी का दर्द रूक जाता है।माइग्रेन के दर्द से यदि उल्टी हो रही हो तो खाने के समय में रोगी को शहद खिलाएं एैसा करने से उल्टी और दर्द बंद हो जाता है। यदि दर्द सुबह से ही शुरू हो जाता है तो तुलसी के पत्तों को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें और फिर इसमें शहद मिलाकर दिन में तीन बार चाटें। यह दर्द में राहत देगा और धीरे-धीरे माइग्रेन के प्रभाव को कम करेगा।
  • आधे सिर के हिस्से में दर्द ज्यादा हो तो आप रोगी को आधा चम्मच शहद में आधा चम्मच नमक मिलाकर चटाएं। हींग भी माइग्रेन के दर्द से रहात देने में असरकारी है। आप पानी में हींग को अच्छी तरह से घोल लें फिर इसे सूंघे और इसका लेप माथे पर लगाएं। दर्द से निजात मिलेगा।
  • अंगूर का रस सुबह पीने से माइग्रेन के दर्द से निजात मिलता है। सुबह से शुरू होने वाले दर्द में आप सुबह-सुबह ही 150 ग्राम पानी में 50 ग्राम शक्कर मिलाकर धीरे-धीरे पीएं यह सिर दर्द से मुक्ति दिलवाता है। आधे सिर के दर्द से निजात पाने के लिए आप सूर्योदय से पहले उठकर 25 ग्राम खील को शहद के साथ सेवन करें और फिर आधे घंटे की नींद लें एैसा 1 सप्ताह तक करने से माइग्रेन के दर्द से मुक्ति मिलती है।
  • लहसून माइग्रेन के दर्द से निजात दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लहसून को पीस कर उसका लेप दर्द वाली जगह पर लगाने से दर्द से निजात मिलता है साथ ही आप लहसून के रस की दो छोटी बूंदे नाक के छिद्र में डालें।

सिर की मालिश -

हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम और प्यार किसी भी दवा से ज़्यादा असर करता है। इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह इस दर्द से राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए हल्की खुश्बू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।

धीमी गति से साँस लें -

अपनी साँस की गति को थोड़ा धीमा करके, लंबी साँसे लेने की कोशिश करें। यह तरीका आपको दर्द के साथ होने वाली बेचैनी से राहत दिलाने में सहायता करेगा।
अरोमा थेरेपी माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए आजकल खूब पसंद की जा रही है। इस तरीके में हर्बल तेलों के एक तकनीक के माध्यम से हवा में फैला दिया जाता है या फिर इसको भाप के ज़रिए चेहरे पर डाला जाता है...

ठंडे या गर्म पानी की मसाज-

एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर,उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग भी कर सकते हैं।

अरोमा थेरेपी-

अरोमा थेरेपी माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए आजकल खूब पसंद की जा रही है। इस तरीके में हर्बल तेलों के एक तकनीक के माध्यम से हवा में फैला दिया जाता है या फिर इसको भाप के ज़रिए चेहरे पर डाला जाता है।
इसके साथ हल्का म्यूज़िक भी चलाया जाता है जो दिमाग को सुकून पहुँचाता है।

योगासन

माइग्रेन का निवारण योगासन द्वारा भी सुलभ है। इसके लिए रात्रि को बिना तकिए केशवासन में सोएं। सुबह-शाम योगाभ्यास में ब्रह्म मुद्रा, कंध संचालन, मार्जरासन, शशकासन के पश्चात प्राणायाम करें। इसमें पीठ के बल लेटकर पैर मिलाकर रखें। श्वास धीरे-धीरे अंदर भरें, तब तक दोनों हाथ बिना मोड़े सिर की तरफ जमीन पर ले जाकर रखें और श्वास बाहर निकालते वक्त धीरे-धीरे दोनों हाथ बिना कोहनियों के मोड़ें व वापस यथास्थिति में रखें। ऐसा प्रतिदिन दस बार करें। अंत में कुछ देर शवासन करके नाड़िशोधन प्राणायाम दस-दस बार एक-एक स्वर में करें।

चेतावनी : कई बार सिरदर्द दूसरी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का भी संकेत होता है। इसलिए बार-बार होने वाले तेज सिरदर्द, गर्दन दर्द, अकड़न, जी मिचलाने या आंखों के आगे अंधेरा छा जाने को बिलकुल भी नजर अंदाज न करें और फौरन डॉक्टर को दिखाएं।

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