दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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मंगलवार, अगस्त 04, 2015

दाद क्या और कैसे होती हैं ? इसके उपचार, लक्षण और बचाव, फंगल इन्फेक्शन

दाद और खुजली का घरेलु उपचार
Hindi remedies for Ringworm
(Ring worm and eczema home remedy)

हम हमेशा चाहते हैं की हमारा शरीर साफ़ और स्वस्थ रहे हम कभी भी नहीं चाहेंगे की हमे किसी तरह का कोई इन्फेक्शन या बीमारी लगे। वैसे तो हम अपने शरीरका हमेशा ध्यान रखते हैं लेकिन उसके बावजूद हमे कुछ बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए। हमे इन्फेक्शन कभी भी हो सकता है जैसे आप यात्रा कर रहे हों काम पर जा रहे हों तो ध्यान दे की आपका कोई साथी या आस पास के लोग बीमार तो नहीं हैं।नहाने के पानी मे 2 बून्द सेवलोंन या डेटोल डाल कर नहाएं। दाद एक ऐसी बिमारी है जो हर उम्र के लोगो मे हो सकती है बच्चा जवान या बुज़ुर्ग इससे कोई नहीं बच पाता। ये एक फंगल इन्फेक्शन है जो सर, पैर, गर्दन या किसी अंदरुनी भाग मे कहीं भी हो सकता है । ये लाल या हलके ब्राउन रंग का गोल आकार का होता है। ये इंसान , जानवर किसी से भी फेल सकता है। लेकिन डरें नहीं ये आसानी से ठीक भी हो जाता है। ये किसी कीड़े से नहीं होता ये तो एक फंगल इन्फेक्शन है।

दाद का इन्फेक्शन बहुत ख़राब फंगल इन्फेक्शन होता है ।अगर आपको ये इन्फेक्शन है तो आप अपने शरीर के किसी भी हिस्से पर लाल गोल निशान देख सकते हैं। ये बहुत तेज़ी से फेलता है जिस जगह पर हुआ है उसके आस पास की जगह पर भी फैलने लगता है। इसका इन्फेक्शन ज्यादा बढ़ने पर आप शरीर पर उभार और फुंसियाँ भी देख सकते हैं।

दाद के लक्षण

अगर आपको शरीर पर लाल धब्बे दीखते हैं और खुजली होती है तो सावधान हो जाइए ये दाद है अगर ये आपके नाख़ून पर हुआ तो आपका नाख़ून जड़ से निकल सकता है बालों की जड़ो मे हुआ तो आपके बाल उस जगह से झड़ सकते हैं। ये आपको बालों की जड़ो ,पैर ,अंदरुनी भागो में हो सकता है।

बालों की जड़ो में होने के लक्षण

  • जड़ो में खुजली होना
  • छोटी छोटी फुंसी होना
  • बालों का झड़ना
  • चमड़ी का तड़कना
  • पस होना
  • शरीर पर लक्षण
  • लाल पन और खुजली होना ।
  • पस की फुंसियाँ होना
  • खुजली के साथ उभार दिखना।
  • पैरों पर लक्षण
  • इर्रिटेशन और जलन होना।
  • फटी हुई चमड़ी
  • अंदरुनी भागों पर लक्षण
  • कटाव या चमड़ी निकलना।
  • लालपन होना
  • अंदरुनी भागो में खुजली होना
दाद एक फंगल इन्फेक्शन है जो सर, पैर, गर्दन या किसी अंदरुनी भाग मे कहीं भी हो सकता है । ये लाल या हलके ब्राउन रंग का गोल आकार का होता है। ये इंसान , जानवर किसी से भी फेल सकता है। लेकिन डरें नहीं ये आसानी से ठीक भी हो जाता है। ये किसी कीड़े से नहीं होता ये तो एक फंगल इन्फेक्शन है। अगर आपको ये इन्फेक्शन है तो आप अपने शरीर के किसी भी हिस्से पर लाल गोल निशान देख सकते हैं। ये बहुत तेज़ी से फेलता है जिस जगह पर हुआ है उसके आस पास की जगह पर भी फैलने लगता है। इसका इन्फेक्शन ज्यादा बढ़ने पर आप शरीर पर उभार और फुंसियाँ भी देख सकते हैं।

  • अगर आपको शरीर पर लाल धब्बे दीखते हैं और खुजली होती है तो सावधान हो जाइए ये दाद है अगर ये आपके नाख़ून पर हुआ तो आपका नाख़ून जड़ से निकल सकता है बालों की जड़ो मे हुआ तो आपके बाल उस जगह से झड़ सकते हैं।
  • शरीर की त्वचा पर कहीं भी चकत्ते हो तो उस पर नींबू के टुकड़े काटकर फिटकरी भरकर रगड़ने से चकत्ते हल्के पड़ जाते हैं और त्वचा निखर उठती है।
  • टमाटर खट्टा होता है। इसकी खटाई खून को साफ करती है। नींबू में इसी तरह के गुण होते हैं। रक्तशोधन (खून साफ करना) के लिए टमाटर को अकेले ही खाना चाहिए। रक्तदोष (खून की खराबी) से त्वचा पर जब लाल चकत्ते उठे हों, मुंह की हडि्डयां सूज गई हो, दांतों से खून निकल रहा हो, दाद या बेरी-बेरी रोग हो तो टमाटर का रस दिन में 3-4 बार पीने से लाभ होता है। कुछ सप्ताह तक रोजाना टमाटर का रस पीने से चर्मरोग (त्वचा के रोग) ठीक हो जाते हैं।
  1. अंजीर का दूध लगाने से दाद मिट जाते हैं।
  2. पके केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर लगाने से दाद, खाज, खुजली और छाजन आदि रोगों में लाभ होता है।
  3. दाद, खाज और खुजली में मूंगफली का असली तेल लगाने से आराम आता है।
  4. 1 कप गाजर का रस रोजाना पीने से त्वचा के रोग ठीक हो जाते हैं।
  5. त्वचा के किसी भी तरह के रोगों में मूली के पत्तों का रस लगाने से लाभ होता है।
  6. नीम्बू के रस में इमली के बीज पीसकर लगाने से दाद में लाभ होता हैं।
  7. लहसुन में प्राकृतिक रूप से एंटी फंगल तत्व होते हैं। जो की कई तरीके के फंगल इन्फेक्शन को ठीक करने में सहायक है। जिसमे से दाद भी एक है।
  8. लहसुन को छिल कर उसके छोटे छोटे टुकड़े कर दाद पर रख दीजिये जल्दी आराम मिलेगा।
  9. नारियल का तेल दाद को ठीक करने में बहुत उपयोगी है। ख़ास कर जब आपके सर की जड़ो में इन्फेक्शन हुआ हो तो ये एक बहुत बेहतरीन तरीका है।
  10. छोटे छोटे राई के दाने दाद को ठीक करने में सहायक है। राई को 30 मिनट तक पानी में भिगो कर रख दें। फिर उसका पेस्ट बनाकर दाद की जगह पर लगा लें।
  11. एलो वेरा का अर्क हर तरह के फंगल इन्फेक्शन को ठीक कर देता हैं । इसे तोड़कर सीधे दाद पर लगा लीजिये ठंडक मिलेगी। हो सके तो रात भर लगा कर रखें । एलो वेरा का नियमित सेवन करने और प्रभावित स्थान पर लगाने से दाद और खुजली में बहुत आराम मिलता हैं।
  12.  नीम के पत्तों को पानी में उबालकर स्नान करना चाहिये।
  13. काले चनों को पानी में पीस कर दाद पर लगायें। दाद में आराम आएगा।
  14. शरीर के जिन स्थानों पर दाद हों, वहां बड़ी हरड़ को सिरके में घिसकर लगाएं। 
  15. छिलकेवाली मूंग की दाल को पीसकर इसका लेप दाद पर लगाएं।
  16. दाद होने पर हींग को पानी में घिस कर नियमित प्रभावित स्थान पर लगाये। इस से दाद में आशातीत आराम मिलता हैं।
  17. नौसादर को नींबू के रस में पीसकर दाद में कुछ दिनों तक लगाने से दाद दूर हो जाता है।
  18. नाइलान व सिंथेटिक वस्त्रों की जगह सूती वस्त्रों का प्रयोग करें तथा अधोवस्त्र को हमेशा साफ सुथरा रखें।

खुजली : 

  • खुजली एक विशेष प्रकार के सूक्ष्म परजीवी के त्वचा पर चिपक कर खून चूसने से उस जगह पर छाले व फुंसियां निकल आती है। इससे अत्यधिक खुजली पैदा होती है। खुजली एक ऐसा चर्म रोग है जो आनंद देता है खुजाने में। जब तब त्वचा जलने न लगे तब तक खुजलाहट शांत नहीं होती। इस रोग में सबसे अधिक शरीर की सफाई पर ध्यान देना चाहिये। चूंकि यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक शीघ्र पहुंचाता है इसलिय संक्रमित के कपड़े अलग रखकर उनकी गरम पानी से धुलाई करनी चाहिये। 
  • इसके उपचार हैं।
  • आंवले की गुठली जलाकर उसकी भस्म में नारियल का तेल मिलाकर मलहम बनायें और खुजली वाले स्थान पर लगाने से खुजली दूर होती है। 
  • नीम की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर खुजली वाले स्थान पर लगायें। 
  • काली मिर्च एवं गंधक को घी में मिलाकर शरीर पर लगाने से खुजली दूर होती है। 
  • टमाटर का रस एक चम्मच, नारियल का तेल दो चम्मच मिलाकर मालिश करें और उसके आधे घंटे बाद स्नान करें। खुजली में राहत मिलेगी।
  • स्वमूत्र चिकित्सा से भी इसका लाभप्रद इलाज होता है। छ: दिन का पुराना स्वमूत्र दाद खुजली पर लगाने से और स्वमूत्र की पट्टी रखने से चमत्कारी लाभ मिलता है।
  • उपरोक्त दाद वाले इलाज खुजली में भी उतनी ही उपयोगी हैं जितने दाद में।
  • बच्चो को पहनाये जाने वाले डाइपर बहुत हानिकारक होते हैं, जहाँ तक हो सके उन से परहेज करे। 
  • दाद खाज-त्वचा के ऐसे रोग हैं कि लापरवाही बरतने से हमेशा के मेहमान बन जाते हैं।

मंगलवार, जून 30, 2015

फोड़े-फुंसियों के उत्पात से ऐसे पाएं निजात

घरेलू नुस्खे और परहेज़ से पाएं हर मुश्किल आसान


फोड़े-फुंसियों या दाद-खाज खुजली जैसी चमड़ी की बीमारियों को पीछे प्रमुख रूप से रक्त कादूषित होना होता है। जब शरीर का खून दूषित यानी गंदा हो जाता है तो कुछ समय के बाद उसका प्रभाव बाहर त्वचा पर भी नजर आने लगता है। प्रदूषण चाहे बाहर का हो या अंदर का वो हर हाल में अपना दुष्प्रभाव दिखाता ही है। बाहरी और भतरी प्रदूषण ने मिलकर हमारे शरीर की प्राकृतिक खूबसूरती को छीनकर कई सारे त्वचा रोगों को जन्म दिया है फोड़े- फुंसियां भी उन्हीं में से एक हैं।

आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली,जलन, फुंसियां, घमोरियां, दाद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण लगने से भी फोड़े- फुंसी या खुजली जैसी कोई त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।

यहां हम कुछ ऐसे घरेलू उपाय दे रहे हैं जो बर्सों से आजमाए और परखे हुए हैं। ये नुस्खे कारगर तो हैं ही साथ ही इनकी सबसे बड़ी खाशियत यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है, ऊपर से ये हैं भी बहुत ही सस्ते..गर्मी के मौसम में अक्सर स्किन सम्बन्धी समस्याएं पनपने लगती हैं। यही नहीं इस मौसम के खत्म होने के बाद आने वाली बारिश कई बार इन समस्याओं में और भी बढ़ोत्तरी कर डालती है। ऐसे में जरूरी है कि इसे लेकर सजग रहा जाए।

यहां हम कुछ ऐसे घरेलू उपाय दे रहे हैं जो बर्सों से आजमाए और परखे हुए हैं। ये नुस्खे कारगर तो हैं ही साथ ही इनकी सबसे बड़ी खाशियत यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है, ऊपर से ये हैं भी बहुत ही सस्ते..

बढ़ जाए जब तकलीफ

कई बार ध्यान न देने पर छोटी-सी फुंसी या फोड़े की तकलीफ भी गंभीर रूप ले लेती है। कुछ लोगों को गर्मी के मौसम में सर, आंखों या चेहरे पर पीली-लाल बड़ी फुंसियां होने की समस्या होती है।

ये फुंसियां पककर फूटती हैं तो संक्रमण के फैलने की आशंका भी हो सकती है। इसके अलावा तैलीय या ऑइली स्किन वालों को भी पिम्पल्स ज्यादा उभरते हैं। ये फुंसियां दर्द, जलन, खुजली आदि जैसी तकलीफ दे सकती हैं। यदि ऐसे में पर्याप्त साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो यह घाव बढ़कर गंभीर हो सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान

गर्मी हो या अन्य मौसम, साफ पानी से नियमित नहाना सबसे पहली जरूरत है। इससे शरीर पर लगी धूल-मिटटी और पसीने की गंदगी साफ होती है। यही नहीं पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की भी आदत डालें। इससे शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद मिलेगी।

कोशिश करें की भोजन में ताजे फल और सलाद ज्यादा खाएं। साथ ही तले-गले और गरिष्ठ भोजन से बचें। व्यायाम जरूर अपनाएं और सुबह ताजी हवा के सम्पर्क में आएं। जिम या अन्य एक्सरसाइज के दौरान आने वाले पसीने को साफ कपड़े से थपथपाकर पोंछें। इसके बाद अच्छे से नहाएं।

कॉटन के या पसीने को सोखने वाले मटेरियल के कपडे पहनें। अगर हो सके तो दिन में दो बार नहाएं। नहाने के पानी में एंटीसेप्टिक या अन्य संक्रमणों से बचाने वाले तेल आदि डालने से पसीने में दुर्गन्ध और संक्रमण से बचा जा सकता है, ऐसे उपाय अपनाएं।

यदि आपको किसी प्रकार के संक्रमण की टेंडेंसी है या फैमिली हिस्ट्री है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यदि 3-4 दिन में फोड़े-फुंसी ठीक न हों तो भी डॉक्टर से सलाह जरूर लें। आम से होने वाले संक्रमण के मामले में भी आमों को खाने से पहले अच्छी तरह धोने की और सावधानी से उसका ऊपरी सिरा हटाने की आदत डालें। हाथों को भी साफ रखने और अच्छे से धोने का ध्यान रखें। साथ ही अंडरगार्मेंट्स और अन्य कपड़ों को भी साफ रखें। ये भी संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

पसीना, प्रदूषण और बहुत कुछ

गर्मी के मौसम में पसीना फोड़े-फुंसी या रैशेज के होने का बड़ा कारण बन सकता है। लगातार आने वाले पसीने से एक जगह पर हुई तकलीफ शरीर में दूसरी जगहों पर भी पहुंच सकती है। इसके अलावा सीधे सूरज की किरणों या तेज गर्मी के सम्पर्क में आने, धूल-धुएं से, किसी खराब कॉस्मेटिक से, सिंथेटिक या मौसम के लिहाज से अन्य तरह के गलत मटेरियल के कपड़े पहनने से भी फोड़े-फुंसी या संक्रमण हो सकते हैं।

घमौरियां तो इस मौसम में आम हैं ही। कई बार तो आम को गलत तरीके से खाने से भी लोगों को चेहरे पर घाव जैसा पनप जाता है। इन सभी के पीछे असल कारण मौसम और बढ़ा हुआ तापमान ही है।

फोड़े फुंसी की चिकित्साः

  • थोड़ी सी साफ रूई पानी में भिगो दें, फिर हथेलियों से दबाकर पानी निकाल दें। तवे पर थोड़ा सा सरसों का तेल डालें और उसमें इस रूई को पकायें। फिर उतारकर सहन कर सकने योग्य गर्म रह जाय तब इसे फोड़े पर रखकर पट्टी बाँध दें। ऐसी पट्टी सुबह-शाम बाँधने से एक दो दिन में फोड़ा पककर फूट जायेगा। उसके बाद सरसों के तेल की जगह शुद्ध घी का उपयोग उपरोक्त विधि के अनुसार करने से घाव भर के ठीक हो जाता है।
  • फोड़े फुंसियों पर वट वृक्ष या बरगद के पत्तों को गरम कर बाँधने से शीघ्र ही पक कर फूट जाते
  • आयुर्वेद के अनुसार नीम की सूखी छाल को पानी के साथ घिसकर फोड़े फुंसी पर लेप लगाने से बहुत लाभ मिलता है और धीरे-धीरे इनकी समाप्ति हो जाती है।
  • जब तक समस्या से पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल जाता मीठा यानी शक्कर से बनी,बासी, तली-गली और अधिक मिर्च-मसालेदार चीजों को पूरी तरह से छोड़ दें।
  • फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर मूली के बीज पानी में पीस कर गरम करके लगाने से तत्काल लाभ होता होगा।
  • नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर लगाने और पानी के साथ पीने से बहुत सीघ्र लाभ होता है।
  • नींबू के छोटे पत्ते खाने से लाभ होता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी खून साफ करता है. फोड़े-फुंसियों पर नींबू की छाल पीसकर लगाएं. सप्ताह में एक बार फोड़े-फुंसिंयों पर मुल्तानी मिट्टी लगाएं. एक-दो घंटे बाद नहाएं ।
  • पालक, मूली के पत्ते, प्याज, टमाटर, गाजर, अमरुद, पपीता आदि को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करें।
  • सुबह खाली पेट चार-पांच तुलसी की पत्तियां चूंसने से भी त्वचा रोगों में स्थाई लाभ होता है।
  • पानी अधिक से अधिक पीएं।
  • सुबह उठकर 2 से 3 किलो मीटर घूमने के लिये अवश्य जाएं ताकि आपके शरीर और रक्त को शुद्ध ताजा हवा मिल सके और शरीर का रक्त प्रवाह भी सुधर सके।