दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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बुधवार, सितंबर 28, 2016

शक्तिवर्धक फल, सब्जियां और दालें

शाकाहार अधिक पौष्टिक व गुणकारी

गेहूँ, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि के साथ यदि उचित मात्रा में दालें एवम् हरी सब्जियों का सेवन किया जाए तो "राज" मांसाहार की अपेक्षा शाकाहार सस्ता होने के साथ-साथ स्वादिष्ट, रोगप्रतिरोधक क्षमता से भरपूर और शक्तिवर्धक भी होता है।

शक्तिवर्धक सब्जियों तथा फलों के गुण

नींबू-lemon

नींबू की गिनती फल तथा सब्जियों दोनों में कर सकते हैं एकगिलास उबलते हुए पानी में "राज एक नींबू निचोडकर पीते रहने से शरीर में नयी स्फूर्ति का अनुभव होता है। नेत्र ज्योति बढ़ती है। मानसिक दुर्बलता दूर होती है। अधिक काम करने से थकावट नहीं होती। नींबू पानी बिना चीनी-नमक के एक एक घूंट पीना चाहिए। लंम्बी बीमारी के बादकी कमजोरी खाना खाने से कहीं ज्यादा नींबू पानी से दूर होती है। पर रोज-रोज नहीं लेना चाहिए, आपका मोटापा काफी कम हो जाएगा और यह आम्लीय होताहै ज्यादा लेना नुकसानदायक हो सकता है।
- एक कप उबला पानी में एक चुटकी सेंधा नमक, एक चुटकी काला नमक, एक चम्मच-lemonचीनी, दस बूंद नींबू का रस, भूना हुआ जीरा चौथाई चम्मच मिलाकर पियें। इसे चाय की जगह पर पी सकते हैं, यह पाचन शक्ति, शारीरिक शक्ति बढ़ता है। कभी –कभी इसे पीते रहें ।

सेबःapple 

इसमें फासफोरस होता है, जो पेट को साफ करता है। सेब, विटामिन व खनिज जैसे तत्वों से भरपूर होता है। इसके छोटे-छोटे टुकडे कर शहद डालकरखायें ,फलकी गुणवत्ता बढजातीहै। सेब काटकर उस पर उबलता पानी डालें जब पानी ठंडा हो जाये तो सेब को मसल कर उसका शर्बत बनायें मीठे के लिये मिश्री डालें।यह छोटे बच्चों केलिये भी उपयोगी आहार है.बच्चों ,बडों सब को शक्ति व स्फूर्ति देता है। गठिया रोग में दो सेब रोज खायें।
प्रतिदिन एक सेब खाएँ। यह हमें अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करेगा। सेब का सेवन हृदय रोगियों के लिए भी लाभदायक है। एनीमिया के रोगी सेब के रस का सेवन करें, लाभ होगा। भोजन के साथ सेब का सेवन करने से शराब पीने की आदत धीरे-धीरे छूट जाती है। कच्चे सेब के सेवन से अतिसार व कब्ज में आराम मिलता है। उच्च रक्तचाप में सेब खाने से बहुत राहत मिलती है। पथरी रोग में भी सेब का सेवन लाभप्रद सिद्ध होता ह

पपीताः pappaya 

अच्छा पका हुआ पपीता ही खाना गुणकारी है। खाली पेट पपीता खाना ज्यादा लाभदायक होता है। इसके बाद दोपहर भोजन के बाद पपीता खाने से भोजन ठीक से हजम हो जाता है। पपीता सेवन से रक्तवाहिनी शिरायें लचीली होती हैं, रक्त सुचारु रूप से प्रवाहि होता है। ह्रदय रोग में सबसे ज्यादा लाभदायक है।

आमःmango 

आम खाने से रक्तअधिक मात्रा में बनता है। दुबले लोगों का वजन बढ़ता है। शरीर में स्फूर्ति आती है। आम में शहद व ठंडे या गुनगुने दूध में मिलाकर पियें अधिक लाभकारी होता है.एनिमिक होने पर या गर्भवती महिलाएं अधिक मात्रा में खाएं।

अंगूरःgrape 

शरीर को भरपूर आयरन (Iron) पौष्टिक तत्व : अंगूर में कैल्शियम, क्लोरिन, लोहा और बायफ्लवोनाइडस् हैं।
सुझाव : अंगूर में शक्कर की मात्रा बहुत ज़्यादा है। अंगूर जितने गहरे रंग का होता है "राज उतना ही पौष्टिक होता है। स्वाद के अनुसार हरे या गहरे लाल रंग के अंगूर खा सकते हैं। इन्हें दूध से बने कस्टर्ड, क्रीम दही या पुडिंग में बिना पकाए डाला जा सकता है) मिलता है।
करता है ताकि रक्तआस नी से प्रवाहित हो सके। आपको मांसल करता है। श्वेत प्रदर में लाभ होता है। गर्भवति महिलाओं का बच्चा स्वस्थ्य व बलवान होता है।

मोनक्काः 

सर्दी के मौसम में मोनक्का लाभप्रद है। बीस मोनक्का गर्म पानी में धोकर रात को भिगो दें। प्रातः पानी पीलें तथा इसे खा लें। इसे नित्य प्रयोग करने से रक्तबढता है व शक्ति उत्पन्न होती है। दुर्बल-कमजोर रोगी को मोनक्का का पानी रोज पिलायें।मोनक्का से आयरन प्राप्त होता है ।एक पाव दूध में चार पांच मोनक्का उबालकर दूध पी जायें तथा पका हुआ मोनक्का भी खा जायें इससे कब्जियत दूर करता है।

आंवलाः amla 

इसमें सारे रोगों को दूर रखने की शक्ति होती है। आंवला युवक को नवयौवनता प्रदान करता है। इसमें विटामिन सी सर्वाधिक होता है। एक आंवला दो संतरे के बराबर होता है। आंवला शक्ति का भंडार है। आंवला किसी प्रकार भी खायें स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है।एक आंवला रोज किसी भी रूप में लें.

केलाः banana

केला एक संपू्र्ण व संतुलित आहारमाना जाता हैजो बच्चे भोजन नहीं कर पाते उन्हे भोजन की जगह केला खिलाने से ताकत मिलती है।केला अपने में संपूर्ण भोजन की तरह होता है ।मांसपेशियां मजबूत होती है। वीर्यवर्धक होता है। केला एक फल ही नहीं है इसे जरूरत पडने पर रोटी की जगह भी खा सकते हैं. एक समय में तीन से अधिक केले नहीं खाना चाहिये। ताजा केला खाना सर्वोत्तम है। प्रातः दो केले पर थोड़ा सा घी लगाकर खाकर ऊपर से दूध पीयें। इससे शरीर पुष्ठ होता है।

अमरूदःguava 

इसमें विटामिन सी 300 से 450 मि.ग्रा. तक होता है। ह्दय को बल, शरीर को स्फूर्ति देता है.पाचन क्रिया को सुचारू बनाता,होसके तो इसे भूंनकर भीखायें पेट के लिये फायदेमंद है.खाने को हजम करता है।

छुआराः 

इससे केलशियम बहुत मात्रा में मिलता है। इसे खाकर ऊपर से दूध पीने से हड्डियों के सभी रोगों से निजात मिलता है।

गाजरः 

रोज आधा गिलास गाजर के रसमें शहद मिलाकर पीने से कमजोरी दूर होती है। रक्त (हिमोग्लोबिन)बढता है। गाजर खाने से फाइबर अधिक मिलता है जिसकी सख्त जरूरत आपके शरीर को होती है।

शक्तिवर्धक सब्जियाँ vegetables

मूलीः radish

गन्धक, पोटाश, आयोडीन, कैलशियम, लोहा, फासफोरस, मैग्नीशियम, क्लोरीन मूली में बहुतायत पाया जाता है। एक मूली रोज खाने से हड्डियां मजबूत होंगी। ह्दय को बल मिलता है ।जॉडिस में सुबह खाली पेट अवश्य खायें.

टमाटरः tomato 

प्रातः नाश्ते में एक ग्लास टमाटर के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर पियें चहेरा टमाटर की तरह लाल हो जायेगा, स्मरण शक्ति बढ़ती है, हाईब्लड प्रेशर घटता है, भूख बढ़ती है ,हिमोग्लोबिन बढ़ाता है तथा रक्त में लाल कणों को बढ़ाता है। टमाटर में लोहा दोगुना पाया जाता है। बच्चों को टमाटर का रस पिलाने से बलवान हष्टपुष्ट रहते हैं। बड़ी आंतों को ताकत देता है। उनके घाव को दूर करता है

आलूःpotat 

आलुओं में "राज मुर्गों के चूजों जैसी प्रोटीन होती है। बड़ी आयु वालों के लिय बहुत लाभदायक है इसमें विटामिन .सी.अधिक मात्रामें पाया जाताहै.इसे भूनकर खायें तो डायबिटीस वालों को नुकसान नहीं करेगा.बच्चों को उबले आलू देना फायदेमंद है.छोटेबच्चों को आलू खिचडी में डालकर या अलग से उबालकर,मसलकरक खिलायें .

लहसुनःgarlic 

दिन में तीनों बार खाने के साथ खाने से बल बढ़ता है। पाचन शक्ति ठीक होती है। प्रातः चार दाने खाकर दूध पीने से वीर्य बढ़ता है। नपुंसकता जाती है। यदि लहसुन नियमित खाने तो बुढापा जल्दी नहीं आता। झुर्रिर्यां नहीं पड़ती हैं ,कारण झुर्रियां धमनियों के सिकुडने से पड़ती हैं–।

मूंगफलीःgroundnut 

इसमें प्रोटीन, चिकनाई पाई जाती है। इसकी चिकनाई घी से मिलती जुलती होती है। मूंगफली खाने से दूध बादाम घी की कमी पूरी होती है। अण्डे के बराबर प्रोटीन पाई जाती है। यह गर्म होती है इसलिए सर्दियों में खाना चाहिये, गरम प्रकृति के व्यक्तियों को हानिकारक है ज्यादा खाने से पित बढ़ता है। गर्भावस्था में नित्य मूंगफली खाने से शिशु की प्रगति में लाभ होता है। कच्ची मूंगफली खाने से दूध पिलाने वाली माताओं को दूध बढ़ता है। सर्दियों में सूखापन आ जाता है तो मूंगफली के तेल, गुलाब जल मिलाकर मालिश करें। सूखापन दूर होता है। मुठ्ठी भर मूंगफली तमाम पोषक तत्वों को पूरा करती है।

शक्तिवर्धक दालें dal

मूंग दालmungdal

- ज्वर में मूंगदाल देना उत्तम है।इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाई जाती है ये दाल पचनें में हल्की होती है इस कारण मरीज के लिये उत्तम मानी जाती है। छिलके सहित काम में लेना चाहिये। मूंग दाल आंखों के लिये हितकारक है।
- लम्बे समय तक बीमार रहने के बाद मूंग की दान खाने से शक्ति बढ़ती है। मूंग पानी में उबाल कर नमक, काली मिर्च डालकर, हींग का तड़का लगाकर देने से सुपाच्य होता है व शक्ति बढ़ती है।
-मूंग सेककर पीसे, उससे उबटन लगायें पसीना आना बंद हो जायेगा।
-कब्जः चावल एक भाग दाल दो भाग मूंग मिलाकर खिचड़ी बनाये कब्ज दूर होगा। पेट साफ होगा।
-मूंग पानी में पीसकर जले स्थान पर लगाये लेप से जलन ठीक होगी।
- छिल्के सहित मूंग इतने पीनी में भिगायें कि पानी सोख ले। दो घंटे बाद पीसकर दाल, खाज पर लगायें लाभ होगा। 

उड़द दाल urad dal

- मलमूत्र अधिक लाने वाली, गठिया, दमा, बवासीर, लकवा में लाभदायक इसकी दालें खायें।
-. शक्तिवर्धक उड़द किसी भी रूप में खाये शक्ति ही बढ़ायेगी। यह गरिष्ठ होती है, अच्छी पाचन शक्ति वाले ही खाये। उड़द खाने से शरीर में मांस बढ़ता है। दाल हींग से छौंकर खाने से इसके गुणों में वृद्धि होती है।
- साबुत उड़द जलते कोयले पर डालें इसका धुंआ सूंघे हिचकी मिट जायेगी।
- नकसीर सिर दर्द- उड़द की दाल पीसकर माथे पर लगाने से नकसीर, सिर दर्द ठीक होता है।

अरहर दाल arhar dal

जिन्हें अरहर की दाल नुकसान करती है किसी भी तरह से इसे घी में छौंकर खायें फिर किसी प्रकार हानि नहीं करेगी। इसे खोलकर पकाएं इसको उबाला पानी गिरा कर इसमें नमक मिर्च हल्दी डालकर बंद कर दें इसका झाग निकाल देनें से इससे यूरिया एसिड नहीं बनता।
हाइडोसिल- बच्चों की अगर पोत लटक जाये तो इसे भिगोकर, पीसकर गर्म कर लेप लगाये।
दाल प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत है। कई दाले मिलाकर खाने से प्रोटीन के अतिरिक्त लोहा-चूना कार्बोहाइडेट पाया जाता है। सामान्य व्यक्ति को अपने आहार में सामान्य रूप से पचास ग्राम दालें सेवन करना चाहिये।

मसूर दाल masoor dal

मसूर दाल गर्म शुष्क रक्त बढ़ाने वाली रक्त को गाढ़ा करने वाली होती है। पचने में भारी होती है। घी का छौंक लगाकर खाने से नेत्रों को शक्ति मिलती है। मसूर, मूंग की दाल समान है। मूंग की जगह धुली मसूर प्रयोग कर सकते है। -
-.पेट के रोग- पाचन क्रिया से संबंधित हर प्रकार के रोग में मसूर की दाल खाना लाभप्रद है।
-फोडे फुनसी- मसूर की पुलिटिस लगाने से फोडे फूटकर मवाद सुखा देते है।
- मुंहासे व मुंहासे के दाग धब्बे- मसूर की दाल इतने पानी में भिगोये की पानी सोखले फिर पीसकर दूध में मिलाकर सुबह शाम चेहरे पर मलें।
-खूनी बवासीर- हो तो प्रायः भोजन के साथ मसूर की दाल खाने व एक गिलास खट्टी छाछ पीने से लाभ होता है।

पापड papad

शक्तिप्रद- जो किसी बीमारी से उठें हों। पाचन शक्ति दुर्बल हो तो पापड के साथ भोजन करने से भोजन शीघ्र पचता है। रक्त अधिक बनता है।

बुधवार, सितंबर 21, 2016

वीर्यवृद्धि नपुंसकता दूर करने के लिए

इमली के बीज मर्दाना शक्तिवर्धक

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वीर्यवृद्धि के लिए सफेद प्याज के रस के साथ शहद लेने पर फायदा होता है। सफेद प्याज का रस, शहद, अदरक का रस और घी का मिश्रण 21 दिनों तक लगातार लेने से नपुंसकता दूर हो जाती है।

शीघ्रपतन और सेक्शुअल डिजायर बढ़ाने के लिए
1.) 100 ग्राम अजवाइन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें। सूख जाने पर फिर यही प्रक्रिया दोहराएं। ऐसा तीन बार करें। अच्छी तरह सूख जाने पर इसका बारीक पाउडर बना लें। अब इस पाउडर को पांच ग्राम घी और पांच ग्राम शक्कर के साथ सेवन करें। इस योग को इक्कीस दिन तक लेने पर शीघ्रपतन की समस्या से राहत मिलती है। एक किलो प्याज का रस, एक किलो शहद और आधा किलो शक्कर मिलाकर डिब्बे में पैक कर लें। इसे पंद्रह ग्राम की मात्रा में एक माह तक नियमित सेवन करें। इस योग के प्रयोग से सेक्शुअल डिजायर में वृद्धि होती है।

2.) एक किलो प्याज के रस में आधा किलो उड़द की काली दाल मिलाकर पीस कर पेस्ट बना लें। इसे सुखाकर एक किलो प्याज के रस में मिलाकर फिर से पीस लें। इस पेस्ट को दस ग्राम मात्रा में लेकर भैंस के दूध में पकाएं और शक्कर डाल कर पी जाएं। इस योग का सेवन तीस दिन तक नियमित सुबह-शाम सेवन करने से कमजोरी दूर होती है और कामेच्छा में बढ़ोतरी होती है।

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इमली के बीज बहुत लाभकारी हैं। इमली काम में ले लेने के बाद इसके बीज प्राय: फेंक दिए जाते हैं। आपको पता नहीं हैं के इमली के बीज मर्दाना शक्तिवर्धक स्वप्न दोष धातु की कमज़ोरी और स्त्रियों के प्रदर रोग में भी बहुत लाभकारी हैं। ये सस्ती और मर्दाना ताक़त के लिए बहुत बढ़िया दवा हैं। इस से वीर्य गाढ़ा हो स्तम्भन शक्ति बढ़ जाती हैं। आइये जाने इसके प्रयोग की विधि।

बनाने की विधि

250 ग्राम इमली के बीज भाड़ में भुनवा लीजिये या घर पर ही भून लीजिये। फिर इनको कूटकर छिलका उतार ले। इसमें 250 ग्राम बुरा खांड मिला ले। इसके दो चम्मच नित्य प्रात: गर्म दूध से फंकी ले। यह स्वप्न दोष और मर्दाना शक्ति बढ़ाने में लाभदायक हैं। स्त्रियों का प्रदर भी इससे ठीक होता हैं।

इसका चूर्ण बनाने की दूसरी विधि

250 ग्राम बीजो को चार दिन पानी में भिगोये और फिर छिलके उतार कर छाया में सुखाये। सूखने पर पीसकर समान भाग मिश्री मिलाकर पीसें। चौथाई चम्मच नित्य दूध से दो बार सुबह शाम इसकी फंकी ले। ५० दिन सेवन से शीघ्र पतन दूर होगा, वीर्य गाढ़ा हो जायेगा।
विशेष।

जिन युवको को धातु की कमज़ोरी हो या पेशाब में धात गिरती हो तो उनको हर रोज़ एक चममच आंवला और मिश्री का एक समान बना हुआ चूर्ण एक चम्मच रात्रि को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ ज़रूर सेवन करना चाहिए।

मंगलवार, सितंबर 20, 2016

चिकनगुनिया : कारण, लक्षण और घरेलू उपचार-राजेश मिश्रा



इस तरह मिल सकता है चिकुनगुनिया से राहत

Chikungunya Fever in Hindi | चिकनगुनिया बुखार क्या है

Chikungunya Fever (चिकनगुनिया बुखार) भी मच्छरों के संक्रमण से फैला हुआ एक तरह का बुखार है –डेंगू की तरह इसका भी प्रकोप बड़ी तेजी से देखनो को मिल रहा है । इस बीमारी की पूरी जानकारी न होने के कारण लोगो में इसका डर काफी ज्यादा देखनो को मिल रहा है. लेकिन हम, यह स्पष्ट कर देना चाहते है की यह बुखार डेंगू बुखार इतना प्रभावशाली नहीं होता, इसमें रोगी के जान जाने की खतरा न के बराबर ही होती है । लेकिन पहले से अस्वस्थ , बुजुर्गों और बच्‍चों के जीवन के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है । डॉक्टर की सलाह, समय पर रोकथाम और उचित देखरेख से इसका इलाज पूर्णतयः सम्भव है. इसलिए किसी भी दहशत और अफवाहों में न आए और "
राज" द्वारा सुझाए गए निर्देशो को पालन करे —

चिकनगुनिया बुखार से बचने के तरीके
चिकनगुनिया के लक्षण
चिकनगुनिया से जुड़े परीक्षण
चिकनगुनिया के घरेलू उपचार
चिकनगुनिया का इलाज

Chikungunya History in Hindi | चिकनगुनिया बुखार का इतिहास :राज 

जानकारों का मानना है की, इस रोग को सबसे पहले, तंज़ानिया Tanzania, मारकोंड प्लेटू Markonde Plateau, मोजाम्बिक Mozambique और टनगानिका Tanganyika पर 1952 में फैलते देखा गया था। Markonde इलाके में स्वाहिली भाषा बोली जाती है जिसमें चिकनगुनिया का मतलब होता है- “अकड़े हुए आदमी की बीमारी।” एक खास प्रजाति का मच्छर ही चिकनगुनिया फैलाता है जिसे एडिस एजेप्टी कहा जाता है, इस मच्छर की पहचान एक जर्मन डॉक्टर जोहान विल्हेम ने 1818 में की थी । एडिस एजिप्टी’ ग्रीक नाम है जिसका मतलब होता है ‘बुरा मच्छर’ । इस रोग को पहली बार मेरोन रोबिंसन तथा लुम्स्डेन ने वर्णित किया था। यह पहली बार तंजानिया मे फैला था।

Chikungunya Causes in Hindi 

चिकनगुनिया बुखार के कारण : राज


Chikungunya Fever, चिकनगुनिया वायरस संक्रमित मच्छरों के काटने से होता है । चिकनगुनिया वायरस एक अर्बोविषाणु है, जिसे अल्फाविषाणु परिवार का माना जाता है। इसका संवाहक एडीज एजिप्टी मच्छर है जो की डेंगू बुखार और येलो फीवर का भी संवाहक होता है, इस तरह के मच्छर बरसाती पानी जमा होने से तेजी से पनपते हैं।

चिकनगुनिया बुखार के लक्षण

साधारणतः चिकनगुनिया बुखार के लक्षण संक्रमण होने के 2 से 7 तक ही रहते हैं लेकिन साधारणतः रोगी की दशा और उम्र पर भी यह निर्भर करता है । चिकनगुनिया बुखार के लक्षण एक से अधिक भी हो सकते है । सामान्यत: चिकनगुनिया बुखार के लक्षण कुछ ऐसे होते हैं —
➥ रोगी को अचानक बिना खांसी व जुकाम के तथा ठंड व कपकंपी के साथ अचानक तेज़ बुख़ार चढ़ना
➥ जोड़ों में तेज दर्द के साथ सूजन होना
➥ तेज बुखार (104-105 F) जो की 2-7 दिन तक लगातार रहना
➥ रोगी के सिर के अगले हिस्से , आंख के पिछले भाग में रहना , कमर, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।
➥ मिचली nausea, उल्टी vomiting आना या महसूस होना
➥ शरीर पर लाल-गुलाबी चकत्ते red rashes होना
➥ आँखों लाल रहना ,आँखों में दर्द रहना
➥ हमेशा थका-थका और कमजोरी महसूश करना
➥ भूख न लगना, खाने की इच्छा में कमी, मुँह का स्वाद ख़राब होना, पेट ख़राब हो जाना,
➥ नींद न आना या नींद में कमी

Chikungunya Checkup and test in Hindi 

चिकनगुनिया बुखार से जुड़े जाँच राज

चिकनगुनिया बुखार से जुड़े जाँचो में आरटी-पीसीआर, रक्त सीरम की जाँच और वायरस पृथक्करण मुख्य है जिससे रोगी में चिकनगुनिया बुखार होने का पता लगया जा सकता है ।
Virus Isolation : संक्रमण के शुरुआत के दिनों में रक्त से चिकनगुनिया के वायरस को अलग कर परिक्षण करने के लिए यह जांच की जाती हैं।
Enzyme-Linked Immunosorbent assays (ELISA) Test : इससे चिकनगुनिया के antibodies रक्त में है या नहीं यह जांच की जाती हैं।
Complete Blood Count (CBC) Test : इस रक्त परिक्षण में सफेद रक्त कण (White Blood Cells) और Platelet Count में कमी आने पर चिकनगुनिया होने की आशंका का निर्धारण किया जाता है ।
Reverse Transcriptase – Polymerase Chain Reaction (RT-PCR) Test : इससे चिकनगुनिया के Gene की जांच की जाती हैं ।

Chikungunya Precautions and Prevention in Hindi | चिकनगुनिया से बचाव के तरीके

चूँकि चिकनगुनिया बुखार, मच्छरों के काटने से होता है । सम्भवतः जितना हो सके मच्छरों से बचा जाए

➥ घर में सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग करें ।
➥ घर में मच्छर भगाने वाले कॉयल , लिक्विड,इलेक्ट्रॉनिक बैट आदि का प्रयोग करें।
➥ बाहर जाने से पहले मोस्कीटो रेप्लेंट क्रीम का प्रयोग करें ।
➥ आपके घर के आसपास जलजमाव वाली जगह के सफाई का खासा ख्याल रखे । जलजमाव बिल्कुल भी न होने दे
➥ घर के दरवाजे , खिड़कियों और रोशनदानों पर जालियां लगाकर रखे ।
➥ टायर, डब्बे ,कूलर, A/C, पशुओ के लिए रखे पानी, गमले में रुके पानी को बदलते रहे और 2-3 दिन में साफ़ करते रहे
➥ खाली बर्तनों को खुले में न रखे और उसे ढक कर रखे ।
➥ अगर आस-पास में किसी को यह संक्रमण है तो विशेष सावधानी बरते।
➥ अगर 2-3 दिन से अधिक समय तक बुखार हो तो तुरन्त चिकत्सक से मिले और रक्तजाच जरूर करा लें ।

उपरोक्त लक्षण दिखने पर चिकित्सक के पास जाकर चिकनगुनिया बुखार के लक्षण का संदेह व्यक्त करे । डॉक्टर की सलाह, समय पर रोकथाम और उचित देखरेख इस रोग से संक्रमित व्यक्ति के लिए बहुत ही आवश्यक है.

चिकनगुनिया से बचने के प्राकृतिक एवं घरेलू तरीके राज

Chikunguniya Natural and Home remedies in Hindi


बकरी का दूध :- डेंगू बुखार के साथ ही साथ चिकनगुनिया बुखार के इलाज के लिए भी बकरी का दूध बहुत ही उपयोगी है क्योंकि यह सीधे प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है, ऊर्जा देता है, शरीर में जरूरी तरल की आपूर्ति करता है और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी नहीं होने देता।

पीपते के पत्ते :- पपीते की पत्तियां न सिर्फ डेंगू बल्कि चिकुनगुनिया में भी उतनी ही प्रभावी है। उपचार के लिए पपीते की पत्तियों से डंठल को अलग करें और केवल पत्ती को पीसकर उसका जूस निकाल लें। दो चम्मच जूस दिन में तीन बार लें । यह बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकालने तथा प्लेटलेट्स की गिनती बढ़ाने में मदद करता है ।

तुलसी के पत्ते और काली मिर्च :- 4 – 5 तुलसी के पत्ते, 25 ग्राम ताजी गिलोय का तना लेकर कूट लें एवं 2 – 3 काली मिर्च पीसकर 1 लीटर पानी में गर्म कर ले । जब पानी की मात्रा 250 M.L. तक रह जाए , तो उतार ले और यह काढ़ा रोगी को थोड़े समय के अंतराल पे देते रहे,यह ड्रिंक आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है और एंटी-बैक्टीरियल तत्व के रूप में कार्य करती है।

तुलसी अजवायन और नीम के पत्तियां – अजवायन, किशमिश, तुलसी और नीम की सूखी पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में उबाल लें। इस पेय को बिना छानें दिन में तीन बार पीना चाहिए। तुलसी का काढ़ा और उसकी पत्तियों को उबालकर पीने से राहत मिलती है।

मेथी के पत्ते :- इसकी पत्तियों को पानी में भिगोकर, छानकर पानी को पीया जा सकता है। इसके अलावा, मेथी पाउडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं। यह पत्तियां बुखार कम करने में सहायता करती है ।

एप्सम साल्ट (Epsom salt) :- एप्सम साल्ट की कुछ मात्रा गरम पानी में डालकर उस पानी से स्नान करे । इस पानी में नीम की पत्तियां भी मिलाएं। ऐसा करने से भी दर्द से राहत मिलेगी और तापमान नियंत्रित होगा।

गिलोय :- गिलोय के तनों को तुलसी के पत्ते के साथ उबालकर डेंगू पीड़ित व्यक्ति को देना चाहिए । यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने, इम्युनिटी और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।

हल्दी :- हल्दी में मेटाबालिज्म बढ़ाने का गुण होता है, यह दर्द और घाव को जल्दी ठीक करने में भी उपयोगी होता है । हल्दी का सेवन दूध में मिलाकर किया जा सकता है।

लहसुन और सजवायन की फली (Garlic and drum stick):- किसी भी तेल में लहसुन और सजवायन की फली मिलाकर तेल गरम करें और इस तेल से रोगी की मालिश करें। इसके सेवन से दर्द में काफी आराम मिलता है

फलों का रस, दूधश् दही, लाइट जल्दी पचने वाली चीजें सेवन करें । विटामिन-सी युक्त, आयरन, इलेक्टक्रेलाइट, ओआररस लेते रहें जो कि शरीर को बुखार से थ्रोमबोसाटोपनिया होने से बचाने में सहायक है।


कच्चा गाजर खाना भी काफी लाभदायक होता है । यह रोगी की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है साथ ही जोड़ों के दर्द से भी राहत देती है।

➥ चिकुनगुनिया बुखार के लिए गिलोय, पपीता पत्ते, एलोवेरा/मुसब्बर वेरा का रस और बकरी का दूध देना लाभप्रद होता है।

** लेकिन इन सभी घरेलू औषधियों का प्रयोग किसी योग्य चिकित्सक के देखरेख में ही किया जाना चाहिए।

Ayurvedic medicine of Chikungunya in hindi

चिकनगुनिया का आयुर्वेदिक इलाज राज

नीचे दी गई दवाओं को 2 सप्ताह तक, गर्म पानी के साथ लें। सटीक दवा शरीर में देखे जा रहे लक्षणों, दवा के प्रभाव पर तय की जाती है।
संजीवनी वटी (100 mg) दिन में दो बार।
सुदर्शन घन वटी 500mg 1 गोली दिन में तीन बार।
अमृतारिष्ट 15-30 ml दिन में दो बार।

अथवा
संजीवनी वटी (100 mg) दिन में दो बार।
त्रयोदशांग गुग्गुलु 500mg दिन में तीन बार।
महारस्नादी क्वाथ 45 ml दिन में दो बार।
बुखार और दर्द: दशमूल काढ़ा का सेवन करें।
बुखार के लिए: पटोलादि क्वाथ अथवा पञ्च तिक्त क्वाथ अथवा सुदर्शन चूर्ण का सेवन करें।
बुखार जिसमें कफ की अधिकता हो: निम्बादी क्वाथ
आमवात, गठिया, आर्थराइटिस जैसी स्थिति: रस्नादी क्वाथ अथवा महारास्नादि क्वाथ अथवा महा योगराज गुग्गुलु अथवा योगराज गुग्गुलु अथवा रसना सप्तक क्वाथ का सेवन करें।
पुराने बुखार में: आरोग्यवर्धिनी गुटिका का सेवन करें।
त्वचा पर दाने/रैशेस: गुडूच्यादी क्वाथ अथवा बिल्वादी गुटिका अथवा हरिद्रा खण्ड का सेवन करें।

चिकनगुनिया में गुग्गुलु का सेवन

गुग्गुलु क्योंकि शरीर में सूजन को दूर करते हैं इसलिए चिकनगुनिया में विशेष रूप से उपयोगी है। जब बुखार ठीक भी हो जाता है तो श्री में जोड़ों की दिकात रह जाती है। ऐसे में निम्न से किसी एक गुग्गुलु का सेवन शरीर में दर्द सूजन में राहत देता है:
अमृता गुग्गुलु Amrita Guggulu (2 tablets twice daily)
योगराज गुग्गुलु Yogaraj guggulu (2 tablets thrice daily)
महायोगराज गुग्गुलु Maha yogaraja Guggulu (2 tablets twice daily)
सिंहनाद गुग्गुलु Simhanada Guggulu (2 tablets thrice daily)
गोक्षुरादी गुग्गुलु Gokshuradi Guggulu (2 tablets twice daily)
कैशोर गुग्गुलु Kaishore Guggulu (2 tablets twice daily)
त्रयोदाशांग गुग्गुलु Trayodashanga Guggulu (2 tablets thrice daily)
सिद्ध की एक हर्बल दवा Nilavembu kudineer chooranam भी चिकनगुनिया में लाभकारी है। इसमें बुखार दूर करने के antipyretic, सूजन नष्ट करने के anti-inflammatory और दर्द निवारक analgesic गुण है।
क्लोरोक्विन फास्फेट (250 मिलीग्राम) Chloroquine Phosphate (250 mg) दिन में एक बार दैनिक देने से से चिकनगुनिया से पीड़ित लोगों में लाभ देखा गया है।

Herbal medicine of Chikungunya in Hindi

  • गिलोय
  • सोंठ
  • कालमेघ
  • पाठा
  • तुलसी
  • नीम
  • त्रिफला
  • मंजीठ
  • रसना
  • गुग्गुलु
  • हल्दी
  • निर्गुन्डी
  • अदरक का रस
  • त्रिफला का काढ़ा
आदि का प्रयोग घरेलू उपचार की तरह किया जा सकता है।
source by – http://www.bimbim.in/ayurved/chikungunya/2699

Homeopathic medicine of Chikungunya in Hindi

चिकनगुनिया का होमियोपैथिक इलाज

Eupatorium-perf
Pyroginum
Rhus-tox
Cedron
Influenzinum
China
Arnica
Belladona
Bryonia

Sourced by – http://treatment.hpathy.com/homeo-medicine/homeopathy-chikungunya/

Chikungunya Treatment in Hindi
 चिकनगुनिया का इलाज

Chikungunya Fever का फिलहाल अभी तक medical science में कोई सत्यापित इलाज नहीं है – हमारे द्वारा सुझाए गए चिकनगुनिया से बचाव के तरीके / Chikunguniya prevention in Hindi और चिकनगुनिया के घरेलू और प्राकर्तिक इलाज / Chikungunya home remedies and natural treatment in Hindi सबसे बेहतरीन इलाज है । डॉक्टर की सलाह अनुसार दवा , ब्लड टेस्ट, समय पर रोकथाम और उचित देखरेख से काफी हद तक इसपे काबू पाया जा सकता है ।

** चेतावनी –
राज

➥ अगर किसी को बुखार हो रखा हो तो, (खासकर डेंगू के सीजन में) तो एस्प्रिन (Asprin) बिल्कुल न लें। यह मार्केट में इकोस्प्रिन (Ecosprin) नाम से मुख्यतः मिलता है ।

➥ ब्रूफेन (Brufen), कॉम्बिफ्लेम (combiflame) आदि एनॉलजेसिक से भी परहेज करें क्योंकि अगर डेंगू है तो इन दवाओं से प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं और शरीर से ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।

➥ किसी भी तरह के बुखार में सबसे सेफ पैरासेटामॉल (Paracetamol) लेना है।

➥ किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत चिकित्सा शुरू करने से पहले चिकित्सक/वैद्य से परामर्श करना आवश्यक है।
Rajesh Mishra / राजेश मिश्रा, Kolkata

मंगलवार, अगस्त 30, 2016

नस पर नस चढ़ना (Neuro Muscular Diseases) के उपचार

नस पर नस चढ़ना (माँस-पेशियों की ऐंठन)

By Dr. D K Goyal
pain in leg के लिए चित्र परिणाम

नस पर नस चढ़ना जैसी बीमारी से हो सकता है आप भी दुखी हों क्यूंकि ये एक आम समस्या बन गयी हैं सभी लोग इसके उपचार को देखते हैं लेकिन कोई भी इसके कारण को नहीं जानना चाहता वजह किसी के भी आज इसका वक़्त नहीं है गोली लो और अपना काम चलाओ लेकिन भविष्य में इस बीमारी के क्या नुक्सान हो सकते हैं आज इस बात पर लेख लिखने का मौका मिला ! कई लोगों को रात में सोते समय टांगों में एंठन की समस्या होती है। नस पर नस चढ़ जाती है। कई लोगों को टांगों और पिंडलियों में मीठा – 2 दर्द सा भी महसूस होता है। पैरों में दर्द के साथ ही जलन, सुन्न, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा एहसास होता है।


शरीर में कहीं भी, किसी भी माश्पेसी में दर्द (Muscular pain) हो तो उसका इलाज किसी भी थेरेपी में पेन किलर के अलावा और कुछ नही है! यह आप सब अच्छी तरह जानते हैं और आप यह भी जानते हैं कि पेन किलर कोई इलाज नहीं है! यह एक नशे की तरह है जितनी देर इसका असर रहता है उतनी देर ब्रेन को दर्द का एहसास नहीं होता! और आपको पेन किलर के दुष्प्रभाव (साइड एफेक्ट) के बारे मे भी अच्छी तरहं पता है! जिसे आप चाह कर भी नकार नहीं सकते हैं! इन सभी की मुख्य वजेह होती है गलत तरीके से बैठना – उठना, सोफे या बेड पर अर्ध लेटी अवस्था में ज्यादा देर तक रहना, उलटे सोना, दो – दो सिरहाने रख कर सोना, बेड पर बैठ कर ज्यादा देर तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना या ज्यादा सफर करना या जायदा टाइम तक खड़े रहना या जायदा देर तक एक ही अवस्था में बैठे रहना आदि!
पहले लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए और मशीनी-करण के ना होने के कारण शारीरिक मेहनत ज्यादा करते थे! जैसे वाहनों के अभाव में मीलों पैदल चलना, पेड़ों पर चढ़ना, लकड़ियां काटना, उन्हें जलाने योग बनाने के लिए उनके टुकड़े करना (फाड़ना), खेतों में काम करते हुए फावड़ा, खुरपा, दरांती आदि का इस्तेमाल करना जिनसे उनके हाथो व पैरों के नेचुरल रिफ्लेक्स पॉइंट्स अपने आप दबते रहते थे और उनका उपचार स्वयं प्रकृति करती रहती थी! इसलिए वे सदा तंदरुस्त रहते थे! मैं शरीर को स्वस्थ रखने में प्रकृति की सहायता करता हूँ उसके खिलाफ नहीं इसलिए मेरे उपचार के कोई दुष्प्रभाव (side effects) नहीं हैं!


शरीर में किसी भी रोग के आने से पहले हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता कमजोर पड़ जाती है या मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुक्सान (loss of muscle control) और किसी बड़े रोग के आने से कम से कम दो – तीन साल पहले हमारी अंत: स्त्रावी ग्रंथियों (endocrine glands) की कार्यप्रणाली सुस्त व् अव्यवस्थित हो जाती है! कुछ ग्रंथियां अपना काम कम करने लग जाती हैं और कुछ ग्रंथियां ज्यादा, जिसके कारण धीरे-धीरे शरीर में रोग पनपने लगते हैं!


जिनका हमे या तो पता ही नहीं चलता या फिर हम उन्हें कमजोरी, काम का बोझ, उम्र का तकाजा (बु ढ़ापा), खाने में विटामिन्स – प्रोटीन्स की कमी, थकान, व्यायाम की कमी आदि समझकर टाल देते हैं या फिर दवाइयां खाते रहते हैं! जिनसे ग्रंथियां (endocrine glands) कभी ठीक नहीं होती बल्कि उनकी (malfunctioning) अव्यवस्थित कार्यप्रणाली चलती रहती है जिस का नतीजा कम से कम दो-तीन साल या कभी – कभी इससे भी ज्यादा समय के बाद अचानक सामने आता है किसी बड़े रोग के रुप में, वह कोई भी हो सकता है! जैसे शुगर उच्च – रक्तचाप (high blood pressure) थायराइड (hypothyroidism or hyperthyroidism), दिल की बीमारी, चर्म रोग, किडनी संबंधी रोग, नाड़ी तंत्र संबंधी रोग या कोई और हजारों हैं! लेकिन मेरे उपचार द्वारा सभी अंत: स्त्रावी ग्रंथियां व्यवस्थित (सुचारु) तरीके से काम करने लग जाती हैं! या ये कहे की मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुक्सान (loss of muscle control) कम हो जाता है और रोग प्रतिरोधी क्षमता इम्युनिटी मजबूत हो जाती है! तो किसी प्रकार के रोग शरीर में आने की कोई संभावना ही नहीं रहती, यही कारण है लगभग दो पीढ़ियां पहले आजकल पाए जाने वाले रोग नहीं होते थे! इसीलिए आजकल कुछ रोगों को (lifestyle diseases) रहन सहन के रोग माना जाता है!

नस पर नस चढ़ना तो एक बीमारी पता है लेकिन कहाँ कहाँ की नस कब चढ़ जाये कोई नहीं कह सकता कुछ दर्द यहाँ लिख रहा हूँ जो इस तरह हैं मस्कुलर स्पाजम, मसल नोट के कारण होने वाली सभी दर्दें जैसे कमरदर्द, कंधे की दर्द, गर्दन और कंधे में दर्द, छाती में दर्द, कोहनी में दर्द, बाजू में दर्द, ऊँगली या अंगूठे में दर्द, पूरी टांग में दर्द, घुटने में दर्द, घुटने से नीचे दर्द, घुटने के पीछे दर्द, टांग के अगले हिस्से में दर्द, एडी में दर्द, पंजे में दर्द, नितंब (हिप) में दर्द, दोनो कंधो में दर्द, जबड़े में और कान के आस पास दर्द, आधे सिर में दर्द, पैर के अंगूठे में दर्द आदि सिर से पांव तक शरीर में बहुत सारे दर्द होते हैं ! हमारे शरीर में लगभग 650 मांसपेशियां होती हैं! जिनमे से 200 के करीब मुस्कुलर स्पासम या मसल नोट से प्रभावित होती हैं!
मुस्कुलर स्पासम (Muskulr Spasm) या मसल नोट (Muscle Note ) या नस पर नस चढ़ना :-
हमारे शरीर में जहां जहां पर भी रक्त जा रहा है! ठीक उसके बराबर वहां वहां पर बिजली भी जा रही है! जिसे बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं रक्त जो है वह धमनियों और शिराओं (arteries and veins) में चलता है! और करंट जो है वह तंत्रिकाओं (nerves) में चलता है! शरीर के किसी भी हिस्से में अगर रक्त नहीं पहुंच रहा हो तो वह हिस्सा सुन्न हो जाता है या मांसपेशियों पर नियंत्रण नहीं रहता (loss of muscle control) और उस स्थान पर हाथ लगाने पर ठंडा महसूस होता है और शरीर के जिस हिस्से में बायो इलेक्ट्रिसिटी (bio-electricity) नहीं पहुंच रही, वहां पर उस हिस्से में दर्द हो जाता है और वहां हाथ लगाने पर गर्म महसूस होता है! इस दर्द का साइंटिफिक कारण होता है कार्बोनिक एसिड (h2co3 carbonic acid) जो बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी के कारण उस मांसपेशी में प्रकृतिक तौर पर हो रही सव्चालित क्रिया से उत्पन्न होता है! उस प्रभावित मसल में जितनी ज्यादा बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी होती है, उतना अधिक कार्बोनिक एसिड उत्पन्न होता है और उतनी ही अधिक दर्द भी होती है! जैसे ही उस मांसपेशी में बायोइलेक्ट्रिसिटी जाने लगती है वहां से कार्बन घुलकर रक्त मे मिल जाता है, और दर्द ठीक हो जाता है! रक्त मे घुले कार्बोनिक एसिड को शरीर की रक्त शोधक प्रणाली पसीने और पेशाब के द्वारा बाहर निकाल देती है!

अनियंत्रित मधुमेह (रक्त में शक्कर का स्तर)


pain in leg के लिए चित्र परिणाम

नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के कारण :-


  • शरीर में जल, रक्तमें सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम स्तर कम होने
  • पेशाब ज्यादा होने वाली डाययूरेटिक दवाओं जैसे लेसिक्स सेवन करने के कारण शरीर में जल, खनिज लवण की मात्रा कम होने
  • मधुमेह, अधिक शराब पीने से, किसी बिमारी के कारण कमजोरी, कम भोजन या पौष्टिक भोजन ना लेने से, ‘Poly-neuropathy’ या नसों की कमजोरी।
  • कुछ हृदय रोगी के लिये दवायें जो कि ‘Beta-blockers’ कहलाती हैं, वो भी कई बार इसका कारण होती हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा सेवन करने से.
  • अत्यधिक कठोर व्यायाम करने, खेलने, कठोर श्रम करने से.
  • एक ही स्थिति में लंबे समय तक पैर मोड़े रखने के कारण और पेशियों की थकान के कारण हो सकता है।
  • पैर की धमनियोंकी अंदरूनी सतह में कोलेस्ट्रॉल जमा होने से, इनके संकरे होने (एथ्रीयो स्कोरोसिस) के कारण रक्त प्रवाह कम होने पर,
  • पैरों की स्नायुओं के मधुमेह ग्रस्त होने
  • अत्यधिक सिगरेट, तंबाकू, शराब का सेवन करने, पोष्क तत्वों की कमी, संक्रमण से।

नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के लक्षण :-

आधुनिक जीवन शैली – जिसमें व्यक्ति आराम परक जीवन जीना चाहता है, सभी काम मशीनों के द्वारा करता है, खाओ पीओ और मौज करो की इच्छा रखता है, इस प्रकार के जटिल रोगों को जन्म दे रही हैं।
लक्ष्णः
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  • हाथ पैरों में सुन्नपन्न (Numbness) होना, सोते समय यदि हाथ अथवा पैर सोने लगे, सोते हुए हाथ थोड़ा दबते ही सुन्न होने लगते हैं, कई बार एक हाथ सुन्न होता है, दूसरे हाथ से उसको उठाकर करवट बदलनी पड़ती है। 
  • हाथों की पकड़ ढीली होना, अथवा पैरों से सीढ़ी चढ़ते हुए घुटने से नीचे के हिस्सों में खिचांव आना। 
  • गर्दन के आस-पास के हिस्सों में ताकत की कमी महसूस देना। 
  • गर्दन को आगे-पीछे, दाॅंयी-बाॅंयी ओर घुमाने में दर्द होना। 
  • शरीर के दाॅंये अथवा बाॅंये हिस्से में दर्द के वेग आना। 
  • याददाश्त का कम होते चले जाना। 
  • चलने का सन्तुलन बिगड़ना। 
  • हाथ-पैरों में कम्पन्न रहना। 
  • माॅंसपेशियों में ऐठन विशेषकर जाॅंघ (Thigh)व घुटनों के नीचे (Calf) में Muscle Cramp होना। 
  • शरीर में लेटते हुए साॅंय-साॅंय अथवा धक-धक की आवाज रहना। 
  • कोई भी कार्य करते हुए आत्मविश्वास का अभाव अथवा भय की उत्पत्ति होना। इनको (Psychoromatic Disease) भी कहा जाता है। 
  • अनावश्यक हृदय की धड़कन बढ़ी हुई रहना। 
  • शरीर में सुईंया सी चुभती प्रतीत होना। 
  • शरीर के कभी किसी भाग में कभी किसी भाग में जैसे आॅंख, जबड़े,कान आदि में कच्चापन अथवा Paralytic Symptoms उत्पन्न होना। 
  • सर्दी अथवा गर्मी का शरीर पर अधिक असर होना अर्थात सहन करने में कठिनाई प्रतीत होना। 
  • एक बार यदि शरीर आराम की अवस्था में आ जाए तो कोई भी कार्य करने की इच्छा न होना अर्थात् उठने चलने में कष्ट प्रतीत होना। 
  • कार्य करते समय सामान्य रहकर उत्तेजना (Anxiety)चिड़चिड़ापन (Irritation) अथवा निराशा (Depression) वाली स्थिति बने रहना। 
  • रात्रि में बैचेनी बने रहना, छः-सात घण्टे की पर्याप्त निद्रा न ले पाना। 
  • कार्य करते हुए शीघ्र ही थकान का अनुभव होना। पसीना अधिक आने की प्रवृत्ति होना। 
  • किसी भी अंग में फड़फड़ाहट होते रहना। 
  • मानसिक कार्य करते ही दिमाग पर एक प्रकार का बोझ प्रतीत होना,मानसिक क्षमता का हृास होना। 
  • रात को सोते समय पैरों में नस पर नस चढ़ना अर्थात् अचानक कुछ मिनटों के लिए तेज दर्द से आहत होना। 
  • शरीर गिरा गिरा सा रहना, मानसिक दृढ़ता का अभाव प्रतीत होना। 
  • शरीर में पैरों के तलवों में जलन रहना या हाथ-पैर ठण्डे रहना। 

Neuromuscular disease

(1.) Nervousness- व्यक्ति अपने भीतर घबराहट, बैचेनी, बार-बार प्यास का अनुभव करता है| किसी interview को देने, अपरिचित व्यक्तियों से मिलने, भाषण देने आदि में थोडा ह्रदय की धड़कन बढती हा नींद ठीक प्रकार से नहीं आती व रक्तचाप असामन्य रहता है| इसके लिए व्यक्ति के ह्रदय व मस्तिष्क को बल देने वाले पोषक पदार्थ (nervine tonic) का सेवन करना चाहिए तथा अपने भीतर अद्यात्मिक दृष्टिकोण का विकास करना चाहिए| सम भाव, समर्पण का विकास कर व्यक्तिगत अंह से बचना चाहिए| उदाहरण के लिए यदि व्यक्ति मंच पर भाषण देता है तो यह भाव न लाए कि वह कितना अच्छा बोल सकता है अपितु इस भाव से प्रवचन करे कि भगवान उसके माध्यम से kids को क्या संदेश देना चाहते है? भविष्य के प्रति भय, महत्वाकांक्षा इत्यादि व्यक्ति में यह रोग पैदा करते है|
(2.) Neuralgia – इसमें व्यक्ति को शरीर के किसी भाग में तेज अथवा हलके दर्द का अनुभव होता है|जैसे जब चेहरे का तान्त्रिक तन्त्र (Facial Nervous) रुग्ण हो जाता है तो इस रोग को triglminal neuralgia कहते है| इसमें व्यक्ति के चेहरे में किसी एक और अथवा पुरे चेहरे जैसे जबड़े, बाल, आंखे के आस-पास एल प्रकार का खिंचाव महसूस होता है| कुछ मनोवैज्ञानिक को ने पाया कि यह रोग उनको अधिक होता है जो दुसरो की ख़ुशी से परेशान होते है| इस रोग का व्यक्ति यदि हसना भी चाहता है तो भी पीड़ा से कराह उड़ता है| अर्थात प्रकृति दुसरो की ख़ुशी छिनने वालो की ख़ुशी छिन्न लेती है| अंग्रेजी चिकित्सक इसको Nervous व muscular को relax करने वाली दवाएं जैसे Pregabalin,Migorill, Gabapentin इत्यादि देते है|
(3.) Parkinson(कम्पवात)– इसमें व्यक्ति के हाथ पैरों में कम्पन होता है| जब व्यक्ति आराम करता है तो हाथ पैर हिलाने लगता है| जब काम में लग जाता है तब ऐसी कठिनाई कम आती है| इसके L-dopa दिया जाता है| कृत्रिम विधि से तैयार किया हुआ यह chennal कम ही लोगो के शरीर स्वीकार करता है| आयुर्वैदिक जड़ी कोंच के बीजों (कपिकच्छु) में यह रसायन मिलता है| अंत: यह औषधि इस रोग में लाभकारी है| इसके लिए कोंच के बीजों को गर्म पानी में मंद आंच पर थोड़ी देर पकायें फिर छिलका उतार कर प्रति व्यक्ति 5 से 10 बीजों को दूध में खीर बना ले| साथ में दलिया अथवा अंकुरित गेंहू भी पकाया जा सकता है| खीर में थोडा गाय का घी अवश्य मिलाएं अन्यथा चूर्ण की अवस्था अथवा कोंच पाक भी लाभदायक है| यह समस्त तान्त्रिक तन्त्र व मासपेशियों के लिए बलदायक है|
(4.) Alzheimer- इसमें व्यक्ति की यादगार (Memory)कम होती चली जाती है|

न्यूरो मस्कुलर रोगों की चपेट में बहुत बड़े-बड़े व्यक्ति भी आए है| इस युग के जाने-माने भौतिक शास्त्र के वैज्ञानिक प्रो. स्टीफन हाकिन्स इसी से सम्बन्धित एक भयानक रोग से युवावस्था में ही पीड़ित हो गए व उनका सारा शरीर लकवाग्रस्त हो गया था| परन्तु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी व कठोर संघर्ष के द्वारा अपनी शोधों (Researches) को जारी रखा आज भी वो 65 वर्ष की उम्र में अपनी जीवन रक्षा के साथ-साथ विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे है| उनकी उपलब्धियों के आधार पर उनको न्यूटन व आइंस्टाइन जैसे महान वैज्ञानिकों की क्ष्रेणी में माना जाता है|

नस पर नस चढ़ना के कुछ घरेलू उपचार :-

अगर आपकी नस पर नस चढ़ जाती है तो आप जिस पैर की नस चढ़ी है तो उसी तरफ के हाथ की बीच की ऊँगली के नाखून के नीचे के भाग को दबाए और छोड़ें ऐसा जब तक करें जब तक ठीक न हो जाए!
नस पर नस चढ़ना एक बहुत साधारण सी प्रक्रिया है, लेकिन जब भी शरीर में कहीं भी नस पर नस चढ़ना जाए, जान ही निकाल देती है और अगर रात को सोते समय पैर की नस पर नस चढ़ना जाए तो व्यक्ति चकरघिन्नी की तरह घूम कर उठ बैठता है,



सूजन और दर्द अलग | तो यदि आपके साथ हो जाये तो तुरंत ये उपाय करें

(आप लंबाई में अपने शरीर को आधा आधा दो भागों में चिन्हित करें, अब जिस भाग में नस चढ़ी है उसके विपरीत भाग के कान के निचले जोड़ पर उंगली से दबाते हुए उंगली को हल्का सा ऊपर और हल्का सा नीचे की तरफ बार बार 10 सेकेंड तक करते रहें | नस उतर जाएगी |)
  1. सोते समय पैरों के नीचे मोटा तकिया रखकर सोएं। 
  2. आराम करें। पैरों को ऊंचाई पर रखें। 
  3. प्रभाव वाले स्थान पर बर्फ की ठंडी सिकाई करे। सिकाई 15 मिनट, दिन में 3-4 बार करे। 
  4. अगर गर्म-ठंडी सिकाई 3 से 5 मिनट की (दोनों तरह की बदल-2 कर) करें तो इस समस्या और दर्द – दोनों से राहत मिलेगी। 
  5. आहिस्ते से ऎंठन वाली पेशियों, तंतुओं पर खिंचाव दें, आहिस्ता से मालिश करें। 
  6. वेरीकोज वेन के लिए पैरों को ऊंचाई पर रखे, पैरों में इलास्टिक पट्टी बांधे जिससे पैरों में खून जमा न हो पाए। 
  7. यदि आप मधुमेह या उच्च रक्तचाप से ग्रसित हैं, तो परहेज, उपचार से नियंत्रण करें। 
  8. शराब, तंबाकू, सिगरेट, नशीले तत्वों का सेवन नहीं करें। 
  9. सही नाप के आरामदायक, मुलायम जूते पहनें। 
  10. अपना वजन घटाएं। रोज सैर पर जाएं या जॉगिंग करें। इससे टांगों की नसें मजबूत होती हैं। 
  11. फाइबर युक्त भोजन करें जैसे चपाती, ब्राउन ब्रेड, सब्जियां व फल। मैदा व पास्ता जैसे रिफाइंड फूड का सेवन न करें। 
  12. लेटते समय अपने पैरों को ऊंचा उठा कर रखें। पैरों के नीचे तकिया रख लें, इस स्थिति में सोना बहुत फायदेमंद रहता है।
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भोजन :

  1. – भोजन में नीबू-पानी, नारियल-पानी, फलों – विशेषकर मौसमी, अनार, सेब, पपीता केला आदि शामिल करें।
  2. – सब्जिओं में पालक, टमाटर, सलाद, फलियाँ, आलू, गाजर, चाकुँदर आदि का खूब सेवन करें।
  3. – 2-3 अखरोट की गिरि, 2-5 पिस्ता, 5-10 बादाम की गिरि, 5-10 किशमिश का रोज़ सेवन करें। 

अपील:- प्रिय दोस्तों यदि आपको ये पोस्ट अच्छा लगा हो या आप हिंदी भाषा को इन्टरनेट पर पोपुलर बनाना चाहते हो तो इसे नीचे दिए बटनों द्वारा Like और Share जरुर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस पोस्ट को पढ़ सकें हो सकता आपके किसी मित्र या किसी रिश्तेदार को इसकी जरुरत हो और यदि किसी को इस उपचार से मदद मिलती है तो आप को धन्यवाद जरुर देगा.

शनिवार, अगस्त 13, 2016

शीघ्रपतन: कारण और "राज" का निवारण

शीघ्र पतन का आयुर्वेदिक घरेलु इलाज

शीघ्रपतन सभी उम्र के पुरुषों में आम है। "शीघ्रपतन" या "शीघ्र स्खलन" एक ऐसा स्खलन है जो आदमी के चाहने के पहले हो जाता है और जिसकी प्रक्रिया को टालने या नियंत्रित करना आदमी के बस में नहीं है। शीघ्रपतन पुरुषों में एक बहुत आम समस्या है।  जिस प्रकार पार्टी जोरशोर से चल रही हो और अचानक वहां पुलिस आ जाये, कुछ ऐसी की मुश्किल घडी लेन में सक्षम है ये समस्या।  इसका कारण और इलाज क्या है? क्या इससे केवल पुरुष प्रभावित होते हैं? कुछ तथ्य ... कारण और "राज" का निवारण जानिए

शीघ्रपतन क्या है?

किसी पुरुष के सेक्स के दौरान अपने चरमोत्कर्ष का अनचाहे रूप से समय से पहले हो जाना और वीर्य पतन पर नियंत्रण न हो पाना शीघ्रपतन कहलाता हैI प्यार का ये सुनहरा पल- चरमोत्कर्ष, इस समस्या के चलते बुरा स्वप्न बन जाता है और दोनों ही पार्टनर्स को असंतुष्ट अवस्था में छोड़ देता हैI ये पुरुषों में सेक्स से जुडी समस्याओं में सबसे आम है, और लगभग हर पुरुष को जीवन में कभी न कभी इसका अनुभव हो ही जाता है। 

शीघ्रपतन की वजह क्या है?

शीघ्रपतन की वजह शारीरिक या मानसिक, दोनों में से कोई भी या दोनों हो सकती हैंI इस्सका असर उन् अनुभवहीन युवा व्यस्कों को ज़्यादा भुगतना पड़ता है जो सेक्स की शुरुवात कर रहे होते हैं और उनके दिमाग में अच्छा प्रदर्शन न कर पाने का डर बैठा होता हैI अनुभव और उम्र के साथ अक्सर पुरुष नियंत्रण करने की इस कला में थोड़ा माहिर हो जाते हैं, लेकिन हर बार कामयाबी की कोई गारंटी नहीं। 
इस स्थिति की पीछे कुछ और मानसिक वजह भी हैं जैसे की धार्मिक पृष्ठभूमि, जहाँ सेक्स एक हौवा होता है और इस से जुडी कई उलझनें हो सकती हैं या फिर काम से सम्बंधित तनाव, निराशा, अपराध बोध या फिर सेक्स से जुड़ा पुराण बुरा अनुभवI भौतिक वजह भी कई हो सकती हैं जैसी की लिंग के ऊपरी भाग का अतिसंवेदनशील होना, हार्मोन समस्या, ड्रग्स, पुरानी चोट, या कोई और मानसिक बीमारीI कुछ मामलों में इसकी वजह दिलचस्पी और आकर्षण की कमी भी हो सकती है। 

आप क्या कर सकते हैं?

बहुत से मामलों में कोशिश करके स्खलन पर नियंत्रण विकसित किया जा सकता है जिस प्रकार समय और अभ्यास से बच्चे पेशाब पर नियंत्रण करना सीख आते हैं।  विश्राम तकनीक या ध्यान बांटने की तकनीक भी कारगर सिद्ध हो सकती है, लेकिन सबसे असरदार तरीका है आपसी समन्वय और स्खलन को गति में विविधता के ज़रिये नियंत्रण करने की कला में कौशल हासिल करना। 
कंडोम या क्रीम और जेल का प्रयोग भी मददगार साबित हो सकता है क्यूंकि यह संवेदनशीलता में कमी लाता हैI अपने डॉक्टर से इस सन्दर्भ में दवा भी ली जा सकती है। 

शीघ्रपतन दोनों पार्टनर के लिए दुखदायी

सेक्स जीवन के लिए शीघ्रपतन एक बुरे समाचार की तरह है।  जब कोई पुरुष हर समय इस दबाव में सेक्स करता है, तो उसके लिए सेक्स का लुत्फ़ उठा पाना संभव हो जाता है।  और साथ ही शीघ्रपतन दोनों पार्टनर्स को असंतुष्टि की अवस्था में छोड़ देता हैI जब कोई पुरुष इस पर नियंत्रण करने के दबाव में सेक्स कर रहा होता है तो यह सहज है की वो अपने साथी को सेक्स का पूरा आनंद देने से भटक जाता है। 

समस्या पुरुषों तक ही सीमित नहीं

पुर्तगाल में की गयी शीघ्रपतन के सम्बन्द्ग में की गयी इकलौती रिसर्च के अनुसार सिर्फ पुरुष ही अपने आप को इस तकलीफ से जूझता नहीं पाते,बल्कि 40 महिलाएं भी इच्छानुसार चरम नहीं कर पाती, जबकि 3 फीसदी ने शीघ्र पतन की समस्या से जूझने का दावा किया है। 

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन निम्नलिखित कारणों का परिणाम हो सकता है :

* काम का तनाव, अवसाद यानी डिप्रेशन, अनियमित जीवनशैली, बढ़ती उम्र, धूम्रपान, शराब और नशीले ड्रग्‍स का सेवन, हृदय रोग, डायबटीज़, हार्मोन असन्तुलन आदि।

शीघ्रपतन रोकने के लिए आजमाएं इसे

यदि आप भी इसके शिकार हैं, तो आपको यह जान कर प्रसन्नता होगी कि आपके पास विकल्प हैं। आपके पास उपचार के निम्नलिखित विकल्प हैं :

* वियाग्रा जैसी गोली: यह केवल तत्‍कालिक समाधान है। इसे हर संभोग से पहले लेना पड़ता है। इसमें शरीर में खून का बहाव इतनी तेजी से होने लगता है कि इसके साइड इफेक्‍ट के रूप में ह़दयाघात तक के मामले देखे गए हैं।

* स्‍थाई समाधान: आयुर्वेद में शीघ्रपतन रोकने का स्‍थाई समाधान उपलब्‍ध हैं। आयुर्वेदिक पद्धति में शिलाजीत, सफेद मुसली, गोखरू, अश्‍वगंध आदि को सेक्‍स पावर बढ़ाने वाला और लंबे समय तक स्‍त्री को संतुष्‍ट करने वाल वाजीकरण औषधि की श्रेणी में रखा गया है।

* बाजार में शिलाजीत, सफेद मुसली आदि आधारित कई कंपनियों की दवा भी उपलब्‍ध है, जिसे किसी योग्‍य वैद्य से परामर्श कर लिया जा सकता है।

* इन सामधानों के अतिरिक्‍त मूत्रमार्ग में प्रौस्टेग्लेण्डिन गोली, इन्ट्राकैवर्नस इन्जेक्शन, लिंग में कड़ापन के लिए वैक्यूम उपकरण जैसे भी कई उपाय हैं।

* वैसे सबसे अच्‍छा तरीका तो यह है कि किसी सेक्‍स एक्‍सपर्ट या आयुर्वेद के डिग्रीधारी वैद्य से परामर्श लिया जाए। यह कोई बड़ी समस्‍या नहीं है। 90 फीसदी पुरुष इससे समय-समय पर पीडि़त होते रहते हैं। तनाव प्रबंधन पौष्टिक आहार और नियमित जीवनशैली अपनाकर इससे लंबे समय तक बचा जा सकता है।

शीघ्र पतन का आयुर्वेदिक घरेलु इलाज
Shighrapatan ke Gharelu Upaye :

1. आम
दो-तीन माह आम का अमरस पीने से मर्दाना ताकत आती है। शरीर की कमजोरी दूर होती है। शरीर मोटा होता है। वात संस्थान और काम शक्ति को उत्तेजना मिलती है।
2. भिंडी
भिंडी से बना पाउडर, प्रिमेच्यूर ईजॅक्युलेशन मे रामबन होता है. इसके 10गम पाउडर को ले और एक गिलास मिल्क मे घोलकर पी जाए. आप चाहे तो इसमे 2 स्पून शुगर भी डाल सकते है. ऐसा रोज़ 1 महीने तक करे, आपको ज़रूर लाभ मिलेगा.
3. नारियल
नारियल कामोत्तेजक है। वीर्य को गाढ़ा करता है।
4. गाजर
गाजर हर व्यक्ति के लिए शक्तिवर्धक ;ज्वदपबद्ध है। वीर्य को गाढ़ा करती है। मर्दाना कमजोरी को दूर करने में रामबाण है। गाजर का रस पीना चाहिए।
5. प्याज
प्याज कामवासना को जगाता है। वीर्य को उत्पन्न करता है। देर मैथुन करने की शक्ति देता है। ईरानी नागरिक याह्या अली अकबर बेग नूरी ने 88 वर्ष की आयु में 168 वाँ विवाह किया। इस आयु तक उसकी जवानी बरकरार रहने का कारण है, उसका एक किलो कच्चा प्याज खाना।




प्याज़ मे ऐसे गुण होते है जो शरीर मे यौन समस्याओ को दूर कर देता है. हरा और सामानया, दोनो ही प्रकार के प्याज़ फयदेमंद होते है. हरी प्याज़ के बीज को एक गिलास पानी मे घोलकर पी जाए. इससे भोजन करने से पहले ले, इससे शरीर मे ताक़त आती है. कक्चा प्याज़ ज़्यादा खाए.

मर्दाना शक्ति बढ़ाने के लिए प्याज का रस और शहद मिलाकर पियें। सफेद प्याज का रस, शहद, अदरक का रस, देषी घी, प्रत्येक 6 ग्राम- इन चारों को मिलाकर चाटें। एक महीने के सेवन से नामर्द भी मर्द बन सकते हैं।

गुरुवार, जुलाई 28, 2016

मानसून में "राज" बच्चों का आहार


बच्चों की खानपान पर दें ध्यान क्योंकि मानसून है दगाबाज़

बच्चों को तो "राज" बारिश में भीगना बहुत भाता है। पर ध्यान रहे ... -इस मौसम में गरिष्ठ भोजन को त्यागकर हल्का व सुपाच्य भोजन करें, क्योंकि मानसून में शरीर भोजन को जल्दी नहीं पचा पाता है। अपने पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए लहसुन, काली मिर्च, अदरक, हल्दी और धनिया का सेवन करें।

 मानसून के आने से "राज" गर्मी की चिलचिलाती धूप से काफी राहत मिलती है। जहां एक ओर ये राहत देता है तो दूसरी ओर मानसून के आने से नुकासान ज्यादा होता है। इस समय चारों ओर कीचड़ की गदंगी से संक्रमण के फैलने का डर बना रहता है। इसके बाद इन दिनों का संक्रमित खानपान बड़े से लेकर बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। बच्चे के लगातार बीमार होने से उनका इम्यूनिटी सिस्टम भी कमजोर होने लगता है। इसलिए उनके सुरक्षित रहने के लिए विशेष रख रखाव की जरूरत होती है। आज हम आपको बता रहें हैं बच्चों के इम्यूनिटी पावर को मजबूत करने के लिए ऐसे आहार लें, जिससे आपके बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हो और वो हर बीमारियों से सुरक्षित रहे।


1. सूप –

सूप पीना वैसे भी "राज" स्वास्थ के लिए काफी अच्छा माना जाता है। जिसकी सलाह डॉक्टर भी दिया करते हैं क्योंकि ये शरीर में असानी से पचने वाला होता है। सूप हमेशा आप घर का बनाया हुआ ही पीया करें। सूप को बनाने के लिए आप ताजी सब्जियों के साथ यदि मांस को भी डाल देते हैं तो यह काफी फायदेमंद वाला साबित होता है। इसे बनाने के लिए आप शोरबा में सब्जियां या मांस उबाल लें। फिर इनमें काली मिर्च, अदरक, लहसुन और प्याज को डालकर अच्छी तरह से मिला दें। ये सूप स्वाद बढ़ाने के साथ शरीर के लिए भी लाभदायक होता है।

2. मौसमी फलों को खाओ-

इस उमस भरे मौसम में "राज" बाहरी संक्रमण से बचने के लिए फलों का सेवन करना सबसे अच्छा उपाय है। इसके लिए आप अपने आहार में मौसमी फलों को शामिल कर अपने स्वास्थ को ठीक रखते हुए शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। आप ऐसे मौसम में फलों का सेवन करने के लिए प्लम, जामुन और चेरी को शामिल करें। इन फलों का सेवन रोज करें इन मानसूनी फलों में एंटीबॉयोटिक गुणों की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो प्रतिरोधक क्षमता में सुधार लाती है जिससे सर्द गर्म से होने वाले बुखार से राहत मिलती है।

3. स्नैक और नट

सूखे मेवे और नट्स का सेवन "राज" बच्चों के शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसके साथ ही इनमें पाए जाने वाले पौष्टिक गुण जैसे फैटी एसिड, प्रोटीन और सेलेनियम, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, carotenoids होते है। जो मानसून के समय में होने वाले संक्रमण के साथ बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक होते है। इसके साथ ही ये पौष्टिक तत्व बच्चों की ग्रोथ में भी सहायक होते है।

3. हल्दी वाला दूध-

हमारे भारत में "राज" हल्दी वाले दूध को हर घरों में मां और दादी के द्वारा दी जाने वाली औषधिय दवाई मानी जाती है। जो किसी भी तरह के संक्रमण को दूर करने में सहायक होती है। इसके अलावा शारीरिक दर्द को दूर करने लिए इसें जादूई चमत्कार माना जाता है। जादूई गुणों से भरपूर हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट के गुण पाएं जाते है जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करने में मदद करता है। इसलिए यदि आपका बच्चा मामूली सी सर्दी या किसी प्रकार के संक्रमण से पीड़ित है,तो उसे बिस्तर पर जाने से पहले एक गिलास गर्म हल्दी दूध पीने को दे दीजिए। आपका बच्चा स्वस्थ होने के साथ एक बेहतर नींद भी सोएगा।

4. शहद और अदरक-

शहद और अदरक का रस "राज" हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा उपचार माना जाता है। क्योंकि अदरक में एंटीवायरल और जीवाणुरोधी के गुण पाए जाते है जो संक्रमण को दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा हनी में भी एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो संक्रमण दूर करने में मदद करते है। इस मौसम में सर्द-गर्मी से सर्दी खासी के साथ गले में खराश होने लगती है और इस समस्या को दूर करने का यह सबसे अच्छा घरेलू नुस्खा माना जाता है।

5. तुलसी की चाय-

तुलसी के पत्तों में "राज" प्राकृतिक रूप से एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक के गुण पाए जाते है जो बाहरी संक्रमण को दूर करने में सहायक होते है। तुलसी का पत्तों से बनी चाय का सेवन रोज करने से हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जो बच्चों को हर तरह की बीमारियों से लड़ने में मदद करती है।

बुधवार, जुलाई 27, 2016

टमाटर के फायदे और नुकसान

टमाटर के आश्चर्य चकित करने वाले लाभ

टमाटर सिर्फ स्वाद में ही खट्टा-मीठा नहीं होता बल्कि टमाटर कई तरह के औषधिय गुणों से भी भरपूर होता है। टमाटर एंटी-ऑक्सीडेंट और खासकर लाइकोपीन से भरपूर होता है। टमाटर में प्रोटीन, विटामिन, वसा आदि तत्व विद्यमान होते हैं। यह सेवफल व संतरा दोनों के गुणों से युक्त होता है। कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है इसके अलावा भी टमाटर खाने से कई लाभ होते हैं। पौष्टिक तत्वों से भरपूर टमाटर हर मौसम में फायदेमंद है। इसे सब्जी में डालें या सलाद के रूप में या किसी और रूप में यह आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। टमाटर पर किए गए परीक्षणों से ज्ञात हुआ कि टमाटर सब्जी नहीं, बल्कि पौष्टिक व गुणकारी फल है। गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों के शरीर में लौह तत्व की कमी को पूरा करने वाला टमाटर को स्वादिष्ट व गुणकारी फल माना जाता है। टमाटर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस व विटामिन सी पाये जाते हैं, विटामिन, पोटाश, मैगजीन, लौह और कैल्शियम से भरपूर टमाटर को चटनी, सांस कैचाअप, जैम और विभिन्न व्यंजनों के रूप में सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा लोग सर्दियों के मौसम में टमाटर का सूप भी पीते हैं। यह सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है।

टमाटर खाने से भूख बढती है। इसके अलावा टमाटर पाचन शक्ति, पेट से संबंधित अनेक समस्याओं को दूर करता है। टमाटर खाने से पेट साफ रहता है और इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। त्वचा के लिए टमाटर खाने से सनबर्न और टैन्ड स्किन में फायदा होता है। टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन तत्व त्वचा को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाता है।
डायबिटीज रोगियों के लिए टमाटर खाना बहुत फायदेमंद होता है। हर रोज एक खीरा और एक टमाटर खाने से डायबिटीज रोगी को लाभ मिलता है। टमाटर आंखों व पेशाब संबंधी रोगों के लिए भी फायदेमंद है। टमाटर खाने से लीवर और किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। हर रोज टमाटर का सूप पीने से लीवर और किडनी को फायदा होता है।

यदि आप टमाटर जैसा लाल दिखना चाहते हैं तो अपने भोजन में टमाटर का सेवन शुरू कर दीजिए। टमाटर को कच्चा, पकाकर और सूप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी न किसी तरह से आप टमाटर को आप हर रोज इस्तेमाल करते हैं। टमाटर खाने से कैंसर का खतरा कम होता है।
टमाटर खाने से त्वचा जवां दिखती है और त्वचा से संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं। यानी टमाटर आपको जवां दिखाता है। ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी टमाटर बहुत फायदेमंद होता है। आइए हम आपको बताते हैं कि टमाटर में क्या-क्या गुण हैं और कैंसर से बचाव के लिए यह कितना फायदेमंद है।
टमाटर के नियमित सेवन से पेट साफ रहता है। टमाटर इतने पौष्टिक होते हैं कि सुबह नाश्ते में केवल दो टमाटर संपूर्ण भोजन के बराबर होते हैं और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनसे आपके वजन में जरा भी वृद्धि नहीं होगी। इसके अलावा यह पूरे शरीर के छोटे-मोटे विकारों को दूर करता है।
जो लोग अपना वजन कम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए टमाटर एक वरदान है। एक मध्यम आकार के टमाटर में केवल 12 कैलोरीज होती है, इसलिए इसे पतला होने के भोजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।

टमाटर के फायदे और नुकसान

टमाटर के फायदे

1. एनीमियाके रोगी को रोजाना दो सौ ग्राम टमाटर का रस पीने से बहुत लाभ होता है।
2. रोजाना टमाटर का रस पीने से जॉंडिस रोग में बहुत लाभ होता है।
3 कम वजन से परेशान लोग यदि भोजन के साथ पक्के टमाटर खाएं तो उनका वजन बढ़ता है।
4. पेट में कीड़े हो तो टमाटर के टुकडों पर या रस में काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक डालकर खाएं। पेट के कीड़े दूर हो जाएंगे।
5. टमाटर के रस में थोडी-सी शर्करा मिलाकर पीने से पित्त की विकृति से उत्पन्न रोग दूर होते है।
6. टमाटर खाने से न केवल मुंह के छाले दूर होते हैं बल्कि कब्ज की समस्या भी दूर होती है।
7. छोटे बच्चों में आंखों की ज्योति में क्षीणता अनुभव होने पर उन्हें टमाटर खिलाना चाहिए। टमाटरों में विटामिन ए होता है जो आंखों की ज्योति को विकसित करता है।
8. दांतों में खून की समस्या का अनुभव होते ही रोजाना दो सौ ग्राम टमाटर का रस सुबह-शाम पीने से बहुत लाभ होता है। यह स्कर्वी रोग में सहायक है।
9. भोजन के प्रति अरूचि होने या भूख न लगने की स्थिति में टमाटर के दो सौ ग्राम रस में अदरक का रस और नींबू का रस मिलाकर पीने से भूख अधिक लगती है।
10. अर्श रोग में खून निकलने पर रोजाना दो सौ ग्राम टमाटर खाने या रस पीने से खून निकलने की समस्या दूर होती है, टमाटर कब्ज को दूर करता है।
11. पके टमाटरों का रस रोजाना पिलाने से बच्चों के नाक से नकसीर की समस्या दूर होती है।
12. पके टमाटरों का रस, सुबह-शाम पीने से गर्मियों में निकलने वाले फोड़े-फुंसियों व त्वचा के अन्य विकारों से सुरक्षा होती है।
13. गर्मियों में अधिक प्यास की विकृति होने पर दो सौ ग्राम टमाटर के रस में दो-तीन लौंग का चूर्ण मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है।
14. टमाटर के सौ ग्राम रस में पचास ग्राम नारियल का तेल मिलाकर, शरीर पर मलकर कुछ देर बाद स्नान करने से खाज-खुजली से राहत मिलेगी।
15. अदरक, पोदीना, धनिया और सेंधा नमक को टमाटर के साथ पीसकर चटनी बनाकर भोजन के साथ सेवन करने से भूख बढ़ती है।
16. दो सौ ग्राम टमाटर का रस सुबह-शाम पीने से रतौंधी की विकृति नष्ट होती है।
17. टमाटर को काटकर उन पर सोंठ का चूर्ण और सेधा नमक डालकर खाने से पाचन क्रिया तीव्र होती है।
18. टमाटर के डेढ़ सौ ग्राम रस में दस ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से नाक व मुंह से रक्तपित्त की समस्या दूर होती है।
19. मधुमेह रोगी को रोजाना टमाटर का सेवन करना चाहिए। टमाटरों की खटाई शरीर में शर्करा की मात्रा को कम करती है।
20. गर्भावस्था में स्त्रियों को टमाटर का दो सौ ग्राम रस रोजाना पीना चाहिए, इससे खून निकलने की समस्या दूर होती है।

टमाटर के नुकसान

ध्यान रखें तेज खांसी, दस्त और पथरी के रोगी को टमाटर नहीं खाना चाहिए। साथ शरीर में सूजन और मांसपेशियों में दर्द हो तो टमाटर का सेवन ना करें।

टमाटर का सूप

भारत में टमाटर का सूप बड़े ही चाव से पिया जाता है। सर्दियों के मौसम में इसकी मांग बढ़ जाती है। यह एक ऐसा सूप है जिसे हर कोई असानी से बना सकता है। यह सूप सस्ती होने के साथ-साथ आपके सेहत को भी बेहतर बना सकती है। जिन लोगों की हड्डियां कमजोर है या जिन्हें ह्र्दय संबंधित रोग है उन्हें टमाटर का सूप पीना चाहिए। अगर आप नियमित रूप से टमाटर का सूप पीते हैं तो यह रक्त वाहिकाओं को दुरुस्त करता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मधुमेह और कैंसर के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है। यहां तक जिन लोगों को अपना वजन कम करना है उन्हें भी टमाटर का सूप लगातार पीते रहना चाहिए।

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