दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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मंगलवार, अगस्त 30, 2016

नस पर नस चढ़ना (Neuro Muscular Diseases) के उपचार

नस पर नस चढ़ना (माँस-पेशियों की ऐंठन)

By Dr. D K Goyal
pain in leg के लिए चित्र परिणाम

नस पर नस चढ़ना जैसी बीमारी से हो सकता है आप भी दुखी हों क्यूंकि ये एक आम समस्या बन गयी हैं सभी लोग इसके उपचार को देखते हैं लेकिन कोई भी इसके कारण को नहीं जानना चाहता वजह किसी के भी आज इसका वक़्त नहीं है गोली लो और अपना काम चलाओ लेकिन भविष्य में इस बीमारी के क्या नुक्सान हो सकते हैं आज इस बात पर लेख लिखने का मौका मिला ! कई लोगों को रात में सोते समय टांगों में एंठन की समस्या होती है। नस पर नस चढ़ जाती है। कई लोगों को टांगों और पिंडलियों में मीठा – 2 दर्द सा भी महसूस होता है। पैरों में दर्द के साथ ही जलन, सुन्न, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा एहसास होता है।


शरीर में कहीं भी, किसी भी माश्पेसी में दर्द (Muscular pain) हो तो उसका इलाज किसी भी थेरेपी में पेन किलर के अलावा और कुछ नही है! यह आप सब अच्छी तरह जानते हैं और आप यह भी जानते हैं कि पेन किलर कोई इलाज नहीं है! यह एक नशे की तरह है जितनी देर इसका असर रहता है उतनी देर ब्रेन को दर्द का एहसास नहीं होता! और आपको पेन किलर के दुष्प्रभाव (साइड एफेक्ट) के बारे मे भी अच्छी तरहं पता है! जिसे आप चाह कर भी नकार नहीं सकते हैं! इन सभी की मुख्य वजेह होती है गलत तरीके से बैठना – उठना, सोफे या बेड पर अर्ध लेटी अवस्था में ज्यादा देर तक रहना, उलटे सोना, दो – दो सिरहाने रख कर सोना, बेड पर बैठ कर ज्यादा देर तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना या ज्यादा सफर करना या जायदा टाइम तक खड़े रहना या जायदा देर तक एक ही अवस्था में बैठे रहना आदि!
पहले लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए और मशीनी-करण के ना होने के कारण शारीरिक मेहनत ज्यादा करते थे! जैसे वाहनों के अभाव में मीलों पैदल चलना, पेड़ों पर चढ़ना, लकड़ियां काटना, उन्हें जलाने योग बनाने के लिए उनके टुकड़े करना (फाड़ना), खेतों में काम करते हुए फावड़ा, खुरपा, दरांती आदि का इस्तेमाल करना जिनसे उनके हाथो व पैरों के नेचुरल रिफ्लेक्स पॉइंट्स अपने आप दबते रहते थे और उनका उपचार स्वयं प्रकृति करती रहती थी! इसलिए वे सदा तंदरुस्त रहते थे! मैं शरीर को स्वस्थ रखने में प्रकृति की सहायता करता हूँ उसके खिलाफ नहीं इसलिए मेरे उपचार के कोई दुष्प्रभाव (side effects) नहीं हैं!


शरीर में किसी भी रोग के आने से पहले हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता कमजोर पड़ जाती है या मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुक्सान (loss of muscle control) और किसी बड़े रोग के आने से कम से कम दो – तीन साल पहले हमारी अंत: स्त्रावी ग्रंथियों (endocrine glands) की कार्यप्रणाली सुस्त व् अव्यवस्थित हो जाती है! कुछ ग्रंथियां अपना काम कम करने लग जाती हैं और कुछ ग्रंथियां ज्यादा, जिसके कारण धीरे-धीरे शरीर में रोग पनपने लगते हैं!


जिनका हमे या तो पता ही नहीं चलता या फिर हम उन्हें कमजोरी, काम का बोझ, उम्र का तकाजा (बु ढ़ापा), खाने में विटामिन्स – प्रोटीन्स की कमी, थकान, व्यायाम की कमी आदि समझकर टाल देते हैं या फिर दवाइयां खाते रहते हैं! जिनसे ग्रंथियां (endocrine glands) कभी ठीक नहीं होती बल्कि उनकी (malfunctioning) अव्यवस्थित कार्यप्रणाली चलती रहती है जिस का नतीजा कम से कम दो-तीन साल या कभी – कभी इससे भी ज्यादा समय के बाद अचानक सामने आता है किसी बड़े रोग के रुप में, वह कोई भी हो सकता है! जैसे शुगर उच्च – रक्तचाप (high blood pressure) थायराइड (hypothyroidism or hyperthyroidism), दिल की बीमारी, चर्म रोग, किडनी संबंधी रोग, नाड़ी तंत्र संबंधी रोग या कोई और हजारों हैं! लेकिन मेरे उपचार द्वारा सभी अंत: स्त्रावी ग्रंथियां व्यवस्थित (सुचारु) तरीके से काम करने लग जाती हैं! या ये कहे की मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुक्सान (loss of muscle control) कम हो जाता है और रोग प्रतिरोधी क्षमता इम्युनिटी मजबूत हो जाती है! तो किसी प्रकार के रोग शरीर में आने की कोई संभावना ही नहीं रहती, यही कारण है लगभग दो पीढ़ियां पहले आजकल पाए जाने वाले रोग नहीं होते थे! इसीलिए आजकल कुछ रोगों को (lifestyle diseases) रहन सहन के रोग माना जाता है!

नस पर नस चढ़ना तो एक बीमारी पता है लेकिन कहाँ कहाँ की नस कब चढ़ जाये कोई नहीं कह सकता कुछ दर्द यहाँ लिख रहा हूँ जो इस तरह हैं मस्कुलर स्पाजम, मसल नोट के कारण होने वाली सभी दर्दें जैसे कमरदर्द, कंधे की दर्द, गर्दन और कंधे में दर्द, छाती में दर्द, कोहनी में दर्द, बाजू में दर्द, ऊँगली या अंगूठे में दर्द, पूरी टांग में दर्द, घुटने में दर्द, घुटने से नीचे दर्द, घुटने के पीछे दर्द, टांग के अगले हिस्से में दर्द, एडी में दर्द, पंजे में दर्द, नितंब (हिप) में दर्द, दोनो कंधो में दर्द, जबड़े में और कान के आस पास दर्द, आधे सिर में दर्द, पैर के अंगूठे में दर्द आदि सिर से पांव तक शरीर में बहुत सारे दर्द होते हैं ! हमारे शरीर में लगभग 650 मांसपेशियां होती हैं! जिनमे से 200 के करीब मुस्कुलर स्पासम या मसल नोट से प्रभावित होती हैं!
मुस्कुलर स्पासम (Muskulr Spasm) या मसल नोट (Muscle Note ) या नस पर नस चढ़ना :-
हमारे शरीर में जहां जहां पर भी रक्त जा रहा है! ठीक उसके बराबर वहां वहां पर बिजली भी जा रही है! जिसे बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं रक्त जो है वह धमनियों और शिराओं (arteries and veins) में चलता है! और करंट जो है वह तंत्रिकाओं (nerves) में चलता है! शरीर के किसी भी हिस्से में अगर रक्त नहीं पहुंच रहा हो तो वह हिस्सा सुन्न हो जाता है या मांसपेशियों पर नियंत्रण नहीं रहता (loss of muscle control) और उस स्थान पर हाथ लगाने पर ठंडा महसूस होता है और शरीर के जिस हिस्से में बायो इलेक्ट्रिसिटी (bio-electricity) नहीं पहुंच रही, वहां पर उस हिस्से में दर्द हो जाता है और वहां हाथ लगाने पर गर्म महसूस होता है! इस दर्द का साइंटिफिक कारण होता है कार्बोनिक एसिड (h2co3 carbonic acid) जो बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी के कारण उस मांसपेशी में प्रकृतिक तौर पर हो रही सव्चालित क्रिया से उत्पन्न होता है! उस प्रभावित मसल में जितनी ज्यादा बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी होती है, उतना अधिक कार्बोनिक एसिड उत्पन्न होता है और उतनी ही अधिक दर्द भी होती है! जैसे ही उस मांसपेशी में बायोइलेक्ट्रिसिटी जाने लगती है वहां से कार्बन घुलकर रक्त मे मिल जाता है, और दर्द ठीक हो जाता है! रक्त मे घुले कार्बोनिक एसिड को शरीर की रक्त शोधक प्रणाली पसीने और पेशाब के द्वारा बाहर निकाल देती है!

अनियंत्रित मधुमेह (रक्त में शक्कर का स्तर)


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नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के कारण :-


  • शरीर में जल, रक्तमें सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम स्तर कम होने
  • पेशाब ज्यादा होने वाली डाययूरेटिक दवाओं जैसे लेसिक्स सेवन करने के कारण शरीर में जल, खनिज लवण की मात्रा कम होने
  • मधुमेह, अधिक शराब पीने से, किसी बिमारी के कारण कमजोरी, कम भोजन या पौष्टिक भोजन ना लेने से, ‘Poly-neuropathy’ या नसों की कमजोरी।
  • कुछ हृदय रोगी के लिये दवायें जो कि ‘Beta-blockers’ कहलाती हैं, वो भी कई बार इसका कारण होती हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा सेवन करने से.
  • अत्यधिक कठोर व्यायाम करने, खेलने, कठोर श्रम करने से.
  • एक ही स्थिति में लंबे समय तक पैर मोड़े रखने के कारण और पेशियों की थकान के कारण हो सकता है।
  • पैर की धमनियोंकी अंदरूनी सतह में कोलेस्ट्रॉल जमा होने से, इनके संकरे होने (एथ्रीयो स्कोरोसिस) के कारण रक्त प्रवाह कम होने पर,
  • पैरों की स्नायुओं के मधुमेह ग्रस्त होने
  • अत्यधिक सिगरेट, तंबाकू, शराब का सेवन करने, पोष्क तत्वों की कमी, संक्रमण से।

नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के लक्षण :-

आधुनिक जीवन शैली – जिसमें व्यक्ति आराम परक जीवन जीना चाहता है, सभी काम मशीनों के द्वारा करता है, खाओ पीओ और मौज करो की इच्छा रखता है, इस प्रकार के जटिल रोगों को जन्म दे रही हैं।
लक्ष्णः
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  • हाथ पैरों में सुन्नपन्न (Numbness) होना, सोते समय यदि हाथ अथवा पैर सोने लगे, सोते हुए हाथ थोड़ा दबते ही सुन्न होने लगते हैं, कई बार एक हाथ सुन्न होता है, दूसरे हाथ से उसको उठाकर करवट बदलनी पड़ती है। 
  • हाथों की पकड़ ढीली होना, अथवा पैरों से सीढ़ी चढ़ते हुए घुटने से नीचे के हिस्सों में खिचांव आना। 
  • गर्दन के आस-पास के हिस्सों में ताकत की कमी महसूस देना। 
  • गर्दन को आगे-पीछे, दाॅंयी-बाॅंयी ओर घुमाने में दर्द होना। 
  • शरीर के दाॅंये अथवा बाॅंये हिस्से में दर्द के वेग आना। 
  • याददाश्त का कम होते चले जाना। 
  • चलने का सन्तुलन बिगड़ना। 
  • हाथ-पैरों में कम्पन्न रहना। 
  • माॅंसपेशियों में ऐठन विशेषकर जाॅंघ (Thigh)व घुटनों के नीचे (Calf) में Muscle Cramp होना। 
  • शरीर में लेटते हुए साॅंय-साॅंय अथवा धक-धक की आवाज रहना। 
  • कोई भी कार्य करते हुए आत्मविश्वास का अभाव अथवा भय की उत्पत्ति होना। इनको (Psychoromatic Disease) भी कहा जाता है। 
  • अनावश्यक हृदय की धड़कन बढ़ी हुई रहना। 
  • शरीर में सुईंया सी चुभती प्रतीत होना। 
  • शरीर के कभी किसी भाग में कभी किसी भाग में जैसे आॅंख, जबड़े,कान आदि में कच्चापन अथवा Paralytic Symptoms उत्पन्न होना। 
  • सर्दी अथवा गर्मी का शरीर पर अधिक असर होना अर्थात सहन करने में कठिनाई प्रतीत होना। 
  • एक बार यदि शरीर आराम की अवस्था में आ जाए तो कोई भी कार्य करने की इच्छा न होना अर्थात् उठने चलने में कष्ट प्रतीत होना। 
  • कार्य करते समय सामान्य रहकर उत्तेजना (Anxiety)चिड़चिड़ापन (Irritation) अथवा निराशा (Depression) वाली स्थिति बने रहना। 
  • रात्रि में बैचेनी बने रहना, छः-सात घण्टे की पर्याप्त निद्रा न ले पाना। 
  • कार्य करते हुए शीघ्र ही थकान का अनुभव होना। पसीना अधिक आने की प्रवृत्ति होना। 
  • किसी भी अंग में फड़फड़ाहट होते रहना। 
  • मानसिक कार्य करते ही दिमाग पर एक प्रकार का बोझ प्रतीत होना,मानसिक क्षमता का हृास होना। 
  • रात को सोते समय पैरों में नस पर नस चढ़ना अर्थात् अचानक कुछ मिनटों के लिए तेज दर्द से आहत होना। 
  • शरीर गिरा गिरा सा रहना, मानसिक दृढ़ता का अभाव प्रतीत होना। 
  • शरीर में पैरों के तलवों में जलन रहना या हाथ-पैर ठण्डे रहना। 

Neuromuscular disease

(1.) Nervousness- व्यक्ति अपने भीतर घबराहट, बैचेनी, बार-बार प्यास का अनुभव करता है| किसी interview को देने, अपरिचित व्यक्तियों से मिलने, भाषण देने आदि में थोडा ह्रदय की धड़कन बढती हा नींद ठीक प्रकार से नहीं आती व रक्तचाप असामन्य रहता है| इसके लिए व्यक्ति के ह्रदय व मस्तिष्क को बल देने वाले पोषक पदार्थ (nervine tonic) का सेवन करना चाहिए तथा अपने भीतर अद्यात्मिक दृष्टिकोण का विकास करना चाहिए| सम भाव, समर्पण का विकास कर व्यक्तिगत अंह से बचना चाहिए| उदाहरण के लिए यदि व्यक्ति मंच पर भाषण देता है तो यह भाव न लाए कि वह कितना अच्छा बोल सकता है अपितु इस भाव से प्रवचन करे कि भगवान उसके माध्यम से kids को क्या संदेश देना चाहते है? भविष्य के प्रति भय, महत्वाकांक्षा इत्यादि व्यक्ति में यह रोग पैदा करते है|
(2.) Neuralgia – इसमें व्यक्ति को शरीर के किसी भाग में तेज अथवा हलके दर्द का अनुभव होता है|जैसे जब चेहरे का तान्त्रिक तन्त्र (Facial Nervous) रुग्ण हो जाता है तो इस रोग को triglminal neuralgia कहते है| इसमें व्यक्ति के चेहरे में किसी एक और अथवा पुरे चेहरे जैसे जबड़े, बाल, आंखे के आस-पास एल प्रकार का खिंचाव महसूस होता है| कुछ मनोवैज्ञानिक को ने पाया कि यह रोग उनको अधिक होता है जो दुसरो की ख़ुशी से परेशान होते है| इस रोग का व्यक्ति यदि हसना भी चाहता है तो भी पीड़ा से कराह उड़ता है| अर्थात प्रकृति दुसरो की ख़ुशी छिनने वालो की ख़ुशी छिन्न लेती है| अंग्रेजी चिकित्सक इसको Nervous व muscular को relax करने वाली दवाएं जैसे Pregabalin,Migorill, Gabapentin इत्यादि देते है|
(3.) Parkinson(कम्पवात)– इसमें व्यक्ति के हाथ पैरों में कम्पन होता है| जब व्यक्ति आराम करता है तो हाथ पैर हिलाने लगता है| जब काम में लग जाता है तब ऐसी कठिनाई कम आती है| इसके L-dopa दिया जाता है| कृत्रिम विधि से तैयार किया हुआ यह chennal कम ही लोगो के शरीर स्वीकार करता है| आयुर्वैदिक जड़ी कोंच के बीजों (कपिकच्छु) में यह रसायन मिलता है| अंत: यह औषधि इस रोग में लाभकारी है| इसके लिए कोंच के बीजों को गर्म पानी में मंद आंच पर थोड़ी देर पकायें फिर छिलका उतार कर प्रति व्यक्ति 5 से 10 बीजों को दूध में खीर बना ले| साथ में दलिया अथवा अंकुरित गेंहू भी पकाया जा सकता है| खीर में थोडा गाय का घी अवश्य मिलाएं अन्यथा चूर्ण की अवस्था अथवा कोंच पाक भी लाभदायक है| यह समस्त तान्त्रिक तन्त्र व मासपेशियों के लिए बलदायक है|
(4.) Alzheimer- इसमें व्यक्ति की यादगार (Memory)कम होती चली जाती है|

न्यूरो मस्कुलर रोगों की चपेट में बहुत बड़े-बड़े व्यक्ति भी आए है| इस युग के जाने-माने भौतिक शास्त्र के वैज्ञानिक प्रो. स्टीफन हाकिन्स इसी से सम्बन्धित एक भयानक रोग से युवावस्था में ही पीड़ित हो गए व उनका सारा शरीर लकवाग्रस्त हो गया था| परन्तु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी व कठोर संघर्ष के द्वारा अपनी शोधों (Researches) को जारी रखा आज भी वो 65 वर्ष की उम्र में अपनी जीवन रक्षा के साथ-साथ विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे है| उनकी उपलब्धियों के आधार पर उनको न्यूटन व आइंस्टाइन जैसे महान वैज्ञानिकों की क्ष्रेणी में माना जाता है|

नस पर नस चढ़ना के कुछ घरेलू उपचार :-

अगर आपकी नस पर नस चढ़ जाती है तो आप जिस पैर की नस चढ़ी है तो उसी तरफ के हाथ की बीच की ऊँगली के नाखून के नीचे के भाग को दबाए और छोड़ें ऐसा जब तक करें जब तक ठीक न हो जाए!
नस पर नस चढ़ना एक बहुत साधारण सी प्रक्रिया है, लेकिन जब भी शरीर में कहीं भी नस पर नस चढ़ना जाए, जान ही निकाल देती है और अगर रात को सोते समय पैर की नस पर नस चढ़ना जाए तो व्यक्ति चकरघिन्नी की तरह घूम कर उठ बैठता है,



सूजन और दर्द अलग | तो यदि आपके साथ हो जाये तो तुरंत ये उपाय करें

(आप लंबाई में अपने शरीर को आधा आधा दो भागों में चिन्हित करें, अब जिस भाग में नस चढ़ी है उसके विपरीत भाग के कान के निचले जोड़ पर उंगली से दबाते हुए उंगली को हल्का सा ऊपर और हल्का सा नीचे की तरफ बार बार 10 सेकेंड तक करते रहें | नस उतर जाएगी |)
  1. सोते समय पैरों के नीचे मोटा तकिया रखकर सोएं। 
  2. आराम करें। पैरों को ऊंचाई पर रखें। 
  3. प्रभाव वाले स्थान पर बर्फ की ठंडी सिकाई करे। सिकाई 15 मिनट, दिन में 3-4 बार करे। 
  4. अगर गर्म-ठंडी सिकाई 3 से 5 मिनट की (दोनों तरह की बदल-2 कर) करें तो इस समस्या और दर्द – दोनों से राहत मिलेगी। 
  5. आहिस्ते से ऎंठन वाली पेशियों, तंतुओं पर खिंचाव दें, आहिस्ता से मालिश करें। 
  6. वेरीकोज वेन के लिए पैरों को ऊंचाई पर रखे, पैरों में इलास्टिक पट्टी बांधे जिससे पैरों में खून जमा न हो पाए। 
  7. यदि आप मधुमेह या उच्च रक्तचाप से ग्रसित हैं, तो परहेज, उपचार से नियंत्रण करें। 
  8. शराब, तंबाकू, सिगरेट, नशीले तत्वों का सेवन नहीं करें। 
  9. सही नाप के आरामदायक, मुलायम जूते पहनें। 
  10. अपना वजन घटाएं। रोज सैर पर जाएं या जॉगिंग करें। इससे टांगों की नसें मजबूत होती हैं। 
  11. फाइबर युक्त भोजन करें जैसे चपाती, ब्राउन ब्रेड, सब्जियां व फल। मैदा व पास्ता जैसे रिफाइंड फूड का सेवन न करें। 
  12. लेटते समय अपने पैरों को ऊंचा उठा कर रखें। पैरों के नीचे तकिया रख लें, इस स्थिति में सोना बहुत फायदेमंद रहता है।
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भोजन :

  1. – भोजन में नीबू-पानी, नारियल-पानी, फलों – विशेषकर मौसमी, अनार, सेब, पपीता केला आदि शामिल करें।
  2. – सब्जिओं में पालक, टमाटर, सलाद, फलियाँ, आलू, गाजर, चाकुँदर आदि का खूब सेवन करें।
  3. – 2-3 अखरोट की गिरि, 2-5 पिस्ता, 5-10 बादाम की गिरि, 5-10 किशमिश का रोज़ सेवन करें। 

अपील:- प्रिय दोस्तों यदि आपको ये पोस्ट अच्छा लगा हो या आप हिंदी भाषा को इन्टरनेट पर पोपुलर बनाना चाहते हो तो इसे नीचे दिए बटनों द्वारा Like और Share जरुर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस पोस्ट को पढ़ सकें हो सकता आपके किसी मित्र या किसी रिश्तेदार को इसकी जरुरत हो और यदि किसी को इस उपचार से मदद मिलती है तो आप को धन्यवाद जरुर देगा.

शनिवार, अगस्त 13, 2016

शीघ्रपतन: कारण और "राज" का निवारण

शीघ्र पतन का आयुर्वेदिक घरेलु इलाज

शीघ्रपतन सभी उम्र के पुरुषों में आम है। "शीघ्रपतन" या "शीघ्र स्खलन" एक ऐसा स्खलन है जो आदमी के चाहने के पहले हो जाता है और जिसकी प्रक्रिया को टालने या नियंत्रित करना आदमी के बस में नहीं है। शीघ्रपतन पुरुषों में एक बहुत आम समस्या है।  जिस प्रकार पार्टी जोरशोर से चल रही हो और अचानक वहां पुलिस आ जाये, कुछ ऐसी की मुश्किल घडी लेन में सक्षम है ये समस्या।  इसका कारण और इलाज क्या है? क्या इससे केवल पुरुष प्रभावित होते हैं? कुछ तथ्य ... कारण और "राज" का निवारण जानिए

शीघ्रपतन क्या है?

किसी पुरुष के सेक्स के दौरान अपने चरमोत्कर्ष का अनचाहे रूप से समय से पहले हो जाना और वीर्य पतन पर नियंत्रण न हो पाना शीघ्रपतन कहलाता हैI प्यार का ये सुनहरा पल- चरमोत्कर्ष, इस समस्या के चलते बुरा स्वप्न बन जाता है और दोनों ही पार्टनर्स को असंतुष्ट अवस्था में छोड़ देता हैI ये पुरुषों में सेक्स से जुडी समस्याओं में सबसे आम है, और लगभग हर पुरुष को जीवन में कभी न कभी इसका अनुभव हो ही जाता है। 

शीघ्रपतन की वजह क्या है?

शीघ्रपतन की वजह शारीरिक या मानसिक, दोनों में से कोई भी या दोनों हो सकती हैंI इस्सका असर उन् अनुभवहीन युवा व्यस्कों को ज़्यादा भुगतना पड़ता है जो सेक्स की शुरुवात कर रहे होते हैं और उनके दिमाग में अच्छा प्रदर्शन न कर पाने का डर बैठा होता हैI अनुभव और उम्र के साथ अक्सर पुरुष नियंत्रण करने की इस कला में थोड़ा माहिर हो जाते हैं, लेकिन हर बार कामयाबी की कोई गारंटी नहीं। 
इस स्थिति की पीछे कुछ और मानसिक वजह भी हैं जैसे की धार्मिक पृष्ठभूमि, जहाँ सेक्स एक हौवा होता है और इस से जुडी कई उलझनें हो सकती हैं या फिर काम से सम्बंधित तनाव, निराशा, अपराध बोध या फिर सेक्स से जुड़ा पुराण बुरा अनुभवI भौतिक वजह भी कई हो सकती हैं जैसी की लिंग के ऊपरी भाग का अतिसंवेदनशील होना, हार्मोन समस्या, ड्रग्स, पुरानी चोट, या कोई और मानसिक बीमारीI कुछ मामलों में इसकी वजह दिलचस्पी और आकर्षण की कमी भी हो सकती है। 

आप क्या कर सकते हैं?

बहुत से मामलों में कोशिश करके स्खलन पर नियंत्रण विकसित किया जा सकता है जिस प्रकार समय और अभ्यास से बच्चे पेशाब पर नियंत्रण करना सीख आते हैं।  विश्राम तकनीक या ध्यान बांटने की तकनीक भी कारगर सिद्ध हो सकती है, लेकिन सबसे असरदार तरीका है आपसी समन्वय और स्खलन को गति में विविधता के ज़रिये नियंत्रण करने की कला में कौशल हासिल करना। 
कंडोम या क्रीम और जेल का प्रयोग भी मददगार साबित हो सकता है क्यूंकि यह संवेदनशीलता में कमी लाता हैI अपने डॉक्टर से इस सन्दर्भ में दवा भी ली जा सकती है। 

शीघ्रपतन दोनों पार्टनर के लिए दुखदायी

सेक्स जीवन के लिए शीघ्रपतन एक बुरे समाचार की तरह है।  जब कोई पुरुष हर समय इस दबाव में सेक्स करता है, तो उसके लिए सेक्स का लुत्फ़ उठा पाना संभव हो जाता है।  और साथ ही शीघ्रपतन दोनों पार्टनर्स को असंतुष्टि की अवस्था में छोड़ देता हैI जब कोई पुरुष इस पर नियंत्रण करने के दबाव में सेक्स कर रहा होता है तो यह सहज है की वो अपने साथी को सेक्स का पूरा आनंद देने से भटक जाता है। 

समस्या पुरुषों तक ही सीमित नहीं

पुर्तगाल में की गयी शीघ्रपतन के सम्बन्द्ग में की गयी इकलौती रिसर्च के अनुसार सिर्फ पुरुष ही अपने आप को इस तकलीफ से जूझता नहीं पाते,बल्कि 40 महिलाएं भी इच्छानुसार चरम नहीं कर पाती, जबकि 3 फीसदी ने शीघ्र पतन की समस्या से जूझने का दावा किया है। 

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन निम्नलिखित कारणों का परिणाम हो सकता है :

* काम का तनाव, अवसाद यानी डिप्रेशन, अनियमित जीवनशैली, बढ़ती उम्र, धूम्रपान, शराब और नशीले ड्रग्‍स का सेवन, हृदय रोग, डायबटीज़, हार्मोन असन्तुलन आदि।

शीघ्रपतन रोकने के लिए आजमाएं इसे

यदि आप भी इसके शिकार हैं, तो आपको यह जान कर प्रसन्नता होगी कि आपके पास विकल्प हैं। आपके पास उपचार के निम्नलिखित विकल्प हैं :

* वियाग्रा जैसी गोली: यह केवल तत्‍कालिक समाधान है। इसे हर संभोग से पहले लेना पड़ता है। इसमें शरीर में खून का बहाव इतनी तेजी से होने लगता है कि इसके साइड इफेक्‍ट के रूप में ह़दयाघात तक के मामले देखे गए हैं।

* स्‍थाई समाधान: आयुर्वेद में शीघ्रपतन रोकने का स्‍थाई समाधान उपलब्‍ध हैं। आयुर्वेदिक पद्धति में शिलाजीत, सफेद मुसली, गोखरू, अश्‍वगंध आदि को सेक्‍स पावर बढ़ाने वाला और लंबे समय तक स्‍त्री को संतुष्‍ट करने वाल वाजीकरण औषधि की श्रेणी में रखा गया है।

* बाजार में शिलाजीत, सफेद मुसली आदि आधारित कई कंपनियों की दवा भी उपलब्‍ध है, जिसे किसी योग्‍य वैद्य से परामर्श कर लिया जा सकता है।

* इन सामधानों के अतिरिक्‍त मूत्रमार्ग में प्रौस्टेग्लेण्डिन गोली, इन्ट्राकैवर्नस इन्जेक्शन, लिंग में कड़ापन के लिए वैक्यूम उपकरण जैसे भी कई उपाय हैं।

* वैसे सबसे अच्‍छा तरीका तो यह है कि किसी सेक्‍स एक्‍सपर्ट या आयुर्वेद के डिग्रीधारी वैद्य से परामर्श लिया जाए। यह कोई बड़ी समस्‍या नहीं है। 90 फीसदी पुरुष इससे समय-समय पर पीडि़त होते रहते हैं। तनाव प्रबंधन पौष्टिक आहार और नियमित जीवनशैली अपनाकर इससे लंबे समय तक बचा जा सकता है।

शीघ्र पतन का आयुर्वेदिक घरेलु इलाज
Shighrapatan ke Gharelu Upaye :

1. आम
दो-तीन माह आम का अमरस पीने से मर्दाना ताकत आती है। शरीर की कमजोरी दूर होती है। शरीर मोटा होता है। वात संस्थान और काम शक्ति को उत्तेजना मिलती है।
2. भिंडी
भिंडी से बना पाउडर, प्रिमेच्यूर ईजॅक्युलेशन मे रामबन होता है. इसके 10गम पाउडर को ले और एक गिलास मिल्क मे घोलकर पी जाए. आप चाहे तो इसमे 2 स्पून शुगर भी डाल सकते है. ऐसा रोज़ 1 महीने तक करे, आपको ज़रूर लाभ मिलेगा.
3. नारियल
नारियल कामोत्तेजक है। वीर्य को गाढ़ा करता है।
4. गाजर
गाजर हर व्यक्ति के लिए शक्तिवर्धक ;ज्वदपबद्ध है। वीर्य को गाढ़ा करती है। मर्दाना कमजोरी को दूर करने में रामबाण है। गाजर का रस पीना चाहिए।
5. प्याज
प्याज कामवासना को जगाता है। वीर्य को उत्पन्न करता है। देर मैथुन करने की शक्ति देता है। ईरानी नागरिक याह्या अली अकबर बेग नूरी ने 88 वर्ष की आयु में 168 वाँ विवाह किया। इस आयु तक उसकी जवानी बरकरार रहने का कारण है, उसका एक किलो कच्चा प्याज खाना।




प्याज़ मे ऐसे गुण होते है जो शरीर मे यौन समस्याओ को दूर कर देता है. हरा और सामानया, दोनो ही प्रकार के प्याज़ फयदेमंद होते है. हरी प्याज़ के बीज को एक गिलास पानी मे घोलकर पी जाए. इससे भोजन करने से पहले ले, इससे शरीर मे ताक़त आती है. कक्चा प्याज़ ज़्यादा खाए.

मर्दाना शक्ति बढ़ाने के लिए प्याज का रस और शहद मिलाकर पियें। सफेद प्याज का रस, शहद, अदरक का रस, देषी घी, प्रत्येक 6 ग्राम- इन चारों को मिलाकर चाटें। एक महीने के सेवन से नामर्द भी मर्द बन सकते हैं।

गुरुवार, जुलाई 28, 2016

मानसून में "राज" बच्चों का आहार


बच्चों की खानपान पर दें ध्यान क्योंकि मानसून है दगाबाज़

बच्चों को तो "राज" बारिश में भीगना बहुत भाता है। पर ध्यान रहे ... -इस मौसम में गरिष्ठ भोजन को त्यागकर हल्का व सुपाच्य भोजन करें, क्योंकि मानसून में शरीर भोजन को जल्दी नहीं पचा पाता है। अपने पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए लहसुन, काली मिर्च, अदरक, हल्दी और धनिया का सेवन करें।

 मानसून के आने से "राज" गर्मी की चिलचिलाती धूप से काफी राहत मिलती है। जहां एक ओर ये राहत देता है तो दूसरी ओर मानसून के आने से नुकासान ज्यादा होता है। इस समय चारों ओर कीचड़ की गदंगी से संक्रमण के फैलने का डर बना रहता है। इसके बाद इन दिनों का संक्रमित खानपान बड़े से लेकर बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। बच्चे के लगातार बीमार होने से उनका इम्यूनिटी सिस्टम भी कमजोर होने लगता है। इसलिए उनके सुरक्षित रहने के लिए विशेष रख रखाव की जरूरत होती है। आज हम आपको बता रहें हैं बच्चों के इम्यूनिटी पावर को मजबूत करने के लिए ऐसे आहार लें, जिससे आपके बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हो और वो हर बीमारियों से सुरक्षित रहे।


1. सूप –

सूप पीना वैसे भी "राज" स्वास्थ के लिए काफी अच्छा माना जाता है। जिसकी सलाह डॉक्टर भी दिया करते हैं क्योंकि ये शरीर में असानी से पचने वाला होता है। सूप हमेशा आप घर का बनाया हुआ ही पीया करें। सूप को बनाने के लिए आप ताजी सब्जियों के साथ यदि मांस को भी डाल देते हैं तो यह काफी फायदेमंद वाला साबित होता है। इसे बनाने के लिए आप शोरबा में सब्जियां या मांस उबाल लें। फिर इनमें काली मिर्च, अदरक, लहसुन और प्याज को डालकर अच्छी तरह से मिला दें। ये सूप स्वाद बढ़ाने के साथ शरीर के लिए भी लाभदायक होता है।

2. मौसमी फलों को खाओ-

इस उमस भरे मौसम में "राज" बाहरी संक्रमण से बचने के लिए फलों का सेवन करना सबसे अच्छा उपाय है। इसके लिए आप अपने आहार में मौसमी फलों को शामिल कर अपने स्वास्थ को ठीक रखते हुए शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। आप ऐसे मौसम में फलों का सेवन करने के लिए प्लम, जामुन और चेरी को शामिल करें। इन फलों का सेवन रोज करें इन मानसूनी फलों में एंटीबॉयोटिक गुणों की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो प्रतिरोधक क्षमता में सुधार लाती है जिससे सर्द गर्म से होने वाले बुखार से राहत मिलती है।

3. स्नैक और नट

सूखे मेवे और नट्स का सेवन "राज" बच्चों के शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसके साथ ही इनमें पाए जाने वाले पौष्टिक गुण जैसे फैटी एसिड, प्रोटीन और सेलेनियम, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, carotenoids होते है। जो मानसून के समय में होने वाले संक्रमण के साथ बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक होते है। इसके साथ ही ये पौष्टिक तत्व बच्चों की ग्रोथ में भी सहायक होते है।

3. हल्दी वाला दूध-

हमारे भारत में "राज" हल्दी वाले दूध को हर घरों में मां और दादी के द्वारा दी जाने वाली औषधिय दवाई मानी जाती है। जो किसी भी तरह के संक्रमण को दूर करने में सहायक होती है। इसके अलावा शारीरिक दर्द को दूर करने लिए इसें जादूई चमत्कार माना जाता है। जादूई गुणों से भरपूर हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट के गुण पाएं जाते है जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करने में मदद करता है। इसलिए यदि आपका बच्चा मामूली सी सर्दी या किसी प्रकार के संक्रमण से पीड़ित है,तो उसे बिस्तर पर जाने से पहले एक गिलास गर्म हल्दी दूध पीने को दे दीजिए। आपका बच्चा स्वस्थ होने के साथ एक बेहतर नींद भी सोएगा।

4. शहद और अदरक-

शहद और अदरक का रस "राज" हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा उपचार माना जाता है। क्योंकि अदरक में एंटीवायरल और जीवाणुरोधी के गुण पाए जाते है जो संक्रमण को दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा हनी में भी एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो संक्रमण दूर करने में मदद करते है। इस मौसम में सर्द-गर्मी से सर्दी खासी के साथ गले में खराश होने लगती है और इस समस्या को दूर करने का यह सबसे अच्छा घरेलू नुस्खा माना जाता है।

5. तुलसी की चाय-

तुलसी के पत्तों में "राज" प्राकृतिक रूप से एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक के गुण पाए जाते है जो बाहरी संक्रमण को दूर करने में सहायक होते है। तुलसी का पत्तों से बनी चाय का सेवन रोज करने से हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जो बच्चों को हर तरह की बीमारियों से लड़ने में मदद करती है।

बुधवार, जुलाई 27, 2016

टमाटर के फायदे और नुकसान

टमाटर के आश्चर्य चकित करने वाले लाभ

टमाटर सिर्फ स्वाद में ही खट्टा-मीठा नहीं होता बल्कि टमाटर कई तरह के औषधिय गुणों से भी भरपूर होता है। टमाटर एंटी-ऑक्सीडेंट और खासकर लाइकोपीन से भरपूर होता है। टमाटर में प्रोटीन, विटामिन, वसा आदि तत्व विद्यमान होते हैं। यह सेवफल व संतरा दोनों के गुणों से युक्त होता है। कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है इसके अलावा भी टमाटर खाने से कई लाभ होते हैं। पौष्टिक तत्वों से भरपूर टमाटर हर मौसम में फायदेमंद है। इसे सब्जी में डालें या सलाद के रूप में या किसी और रूप में यह आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। टमाटर पर किए गए परीक्षणों से ज्ञात हुआ कि टमाटर सब्जी नहीं, बल्कि पौष्टिक व गुणकारी फल है। गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों के शरीर में लौह तत्व की कमी को पूरा करने वाला टमाटर को स्वादिष्ट व गुणकारी फल माना जाता है। टमाटर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस व विटामिन सी पाये जाते हैं, विटामिन, पोटाश, मैगजीन, लौह और कैल्शियम से भरपूर टमाटर को चटनी, सांस कैचाअप, जैम और विभिन्न व्यंजनों के रूप में सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा लोग सर्दियों के मौसम में टमाटर का सूप भी पीते हैं। यह सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है।

टमाटर खाने से भूख बढती है। इसके अलावा टमाटर पाचन शक्ति, पेट से संबंधित अनेक समस्याओं को दूर करता है। टमाटर खाने से पेट साफ रहता है और इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। त्वचा के लिए टमाटर खाने से सनबर्न और टैन्ड स्किन में फायदा होता है। टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन तत्व त्वचा को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाता है।
डायबिटीज रोगियों के लिए टमाटर खाना बहुत फायदेमंद होता है। हर रोज एक खीरा और एक टमाटर खाने से डायबिटीज रोगी को लाभ मिलता है। टमाटर आंखों व पेशाब संबंधी रोगों के लिए भी फायदेमंद है। टमाटर खाने से लीवर और किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। हर रोज टमाटर का सूप पीने से लीवर और किडनी को फायदा होता है।

यदि आप टमाटर जैसा लाल दिखना चाहते हैं तो अपने भोजन में टमाटर का सेवन शुरू कर दीजिए। टमाटर को कच्चा, पकाकर और सूप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी न किसी तरह से आप टमाटर को आप हर रोज इस्तेमाल करते हैं। टमाटर खाने से कैंसर का खतरा कम होता है।
टमाटर खाने से त्वचा जवां दिखती है और त्वचा से संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं। यानी टमाटर आपको जवां दिखाता है। ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी टमाटर बहुत फायदेमंद होता है। आइए हम आपको बताते हैं कि टमाटर में क्या-क्या गुण हैं और कैंसर से बचाव के लिए यह कितना फायदेमंद है।
टमाटर के नियमित सेवन से पेट साफ रहता है। टमाटर इतने पौष्टिक होते हैं कि सुबह नाश्ते में केवल दो टमाटर संपूर्ण भोजन के बराबर होते हैं और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनसे आपके वजन में जरा भी वृद्धि नहीं होगी। इसके अलावा यह पूरे शरीर के छोटे-मोटे विकारों को दूर करता है।
जो लोग अपना वजन कम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए टमाटर एक वरदान है। एक मध्यम आकार के टमाटर में केवल 12 कैलोरीज होती है, इसलिए इसे पतला होने के भोजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।

टमाटर के फायदे और नुकसान

टमाटर के फायदे

1. एनीमियाके रोगी को रोजाना दो सौ ग्राम टमाटर का रस पीने से बहुत लाभ होता है।
2. रोजाना टमाटर का रस पीने से जॉंडिस रोग में बहुत लाभ होता है।
3 कम वजन से परेशान लोग यदि भोजन के साथ पक्के टमाटर खाएं तो उनका वजन बढ़ता है।
4. पेट में कीड़े हो तो टमाटर के टुकडों पर या रस में काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक डालकर खाएं। पेट के कीड़े दूर हो जाएंगे।
5. टमाटर के रस में थोडी-सी शर्करा मिलाकर पीने से पित्त की विकृति से उत्पन्न रोग दूर होते है।
6. टमाटर खाने से न केवल मुंह के छाले दूर होते हैं बल्कि कब्ज की समस्या भी दूर होती है।
7. छोटे बच्चों में आंखों की ज्योति में क्षीणता अनुभव होने पर उन्हें टमाटर खिलाना चाहिए। टमाटरों में विटामिन ए होता है जो आंखों की ज्योति को विकसित करता है।
8. दांतों में खून की समस्या का अनुभव होते ही रोजाना दो सौ ग्राम टमाटर का रस सुबह-शाम पीने से बहुत लाभ होता है। यह स्कर्वी रोग में सहायक है।
9. भोजन के प्रति अरूचि होने या भूख न लगने की स्थिति में टमाटर के दो सौ ग्राम रस में अदरक का रस और नींबू का रस मिलाकर पीने से भूख अधिक लगती है।
10. अर्श रोग में खून निकलने पर रोजाना दो सौ ग्राम टमाटर खाने या रस पीने से खून निकलने की समस्या दूर होती है, टमाटर कब्ज को दूर करता है।
11. पके टमाटरों का रस रोजाना पिलाने से बच्चों के नाक से नकसीर की समस्या दूर होती है।
12. पके टमाटरों का रस, सुबह-शाम पीने से गर्मियों में निकलने वाले फोड़े-फुंसियों व त्वचा के अन्य विकारों से सुरक्षा होती है।
13. गर्मियों में अधिक प्यास की विकृति होने पर दो सौ ग्राम टमाटर के रस में दो-तीन लौंग का चूर्ण मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है।
14. टमाटर के सौ ग्राम रस में पचास ग्राम नारियल का तेल मिलाकर, शरीर पर मलकर कुछ देर बाद स्नान करने से खाज-खुजली से राहत मिलेगी।
15. अदरक, पोदीना, धनिया और सेंधा नमक को टमाटर के साथ पीसकर चटनी बनाकर भोजन के साथ सेवन करने से भूख बढ़ती है।
16. दो सौ ग्राम टमाटर का रस सुबह-शाम पीने से रतौंधी की विकृति नष्ट होती है।
17. टमाटर को काटकर उन पर सोंठ का चूर्ण और सेधा नमक डालकर खाने से पाचन क्रिया तीव्र होती है।
18. टमाटर के डेढ़ सौ ग्राम रस में दस ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से नाक व मुंह से रक्तपित्त की समस्या दूर होती है।
19. मधुमेह रोगी को रोजाना टमाटर का सेवन करना चाहिए। टमाटरों की खटाई शरीर में शर्करा की मात्रा को कम करती है।
20. गर्भावस्था में स्त्रियों को टमाटर का दो सौ ग्राम रस रोजाना पीना चाहिए, इससे खून निकलने की समस्या दूर होती है।

टमाटर के नुकसान

ध्यान रखें तेज खांसी, दस्त और पथरी के रोगी को टमाटर नहीं खाना चाहिए। साथ शरीर में सूजन और मांसपेशियों में दर्द हो तो टमाटर का सेवन ना करें।

टमाटर का सूप

भारत में टमाटर का सूप बड़े ही चाव से पिया जाता है। सर्दियों के मौसम में इसकी मांग बढ़ जाती है। यह एक ऐसा सूप है जिसे हर कोई असानी से बना सकता है। यह सूप सस्ती होने के साथ-साथ आपके सेहत को भी बेहतर बना सकती है। जिन लोगों की हड्डियां कमजोर है या जिन्हें ह्र्दय संबंधित रोग है उन्हें टमाटर का सूप पीना चाहिए। अगर आप नियमित रूप से टमाटर का सूप पीते हैं तो यह रक्त वाहिकाओं को दुरुस्त करता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मधुमेह और कैंसर के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है। यहां तक जिन लोगों को अपना वजन कम करना है उन्हें भी टमाटर का सूप लगातार पीते रहना चाहिए।

गुरुवार, जुलाई 21, 2016

18 रोगों के लिए "राज" सिर्फ एक घरेलू दवा

वृद्ध को जवान बना दे, रोगी को दौड़ना सिखा दे "राज" लाये  हैं ऐसा प्राकृतिक दवा

  • 250 ग्राम मैथीदाना
  • 100 ग्राम अजवाईन
  • 50 ग्राम काली जीरी

 (ज्यादा जानकारी के लिए नीचे देखे)

उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना (ज्यादा सेंकना नहीं) है। तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर कांच की शीशी या बरनी में भर लेवें ।
रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।
चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी (कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा । चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा । घरेलू

इससे " राज" फायदे ये हैं-

1. गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा ।
2. हड्डियाँ मजबूत होगी ।
3. आॅख का तेज बढ़ेगा ।
4. बालों का विकास होगा।
5. पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।
6. शरीर में "राज" खून दौड़ने लगेगा ।
7. कफ से मुक्ति ।
8. हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी ।
9. थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।
10. स्मरण शक्ति बढ़ेगी ।
11. स्त्री का शारीर "राज" शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा ।
12. कान का बहरापन दूर होगा ।
13. भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।
14. खून में "राज" सफाई और शुद्धता बढ़ेगी ।
15. शरीर की सभी खून की नलिकाएॅ शुद्ध हो जाएगी ।
16. दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा ।
17. नपुसंकता दूर होगी।
18. डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर "राज" दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा । जिंदगी निरोग, आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्ययवर्धक बनेगी । जीवन जीने योग्य बनेगा।

कुछ लोग कलौंजी को काली जीरी समझ रहे है जो कि गल्त है काली जीरी अलग होती है जो आपको पंसारी/करियाणा की दुकान से मिल जाएगी जिसके नाम इस तरह से है-
  • हिन्दी कालीजीरी, करजीरा।
  • संस्कृत अरण्यजीरक, कटुजीरक, बृहस्पाती।
  • मराठी कडूकारेलें, कडूजीरें।
  • गुजराती कडबुंजीरू, कालीजीरी।
  • बंगाली बनजीरा।
  • अंग्रेजी पर्पल फ्लीबेन।
पोस्ट अच्छा लगे तो "राज" प्लीज शेयर करना मत भूलना 

सोमवार, जुलाई 18, 2016

जूस के साथ कभी न लें दवा, नहीं तो...


दवाओं को अगर पानी के साथ न लेकर जूस के साथ लेने की आदत है, तो इसे सुधार लीजिए, क्योंकि इससे दवाओं का असर कम हो सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव व एचसीएफआई के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ.के.के. अग्रवाल के मुताबिक, अंगूर का रस शरीर में कुछ दवाओं को सोखने की क्षमता कम कर सकता है, वहीं संतरा और सेब के जूस शरीर में दवाओं की सोखने की क्षमता कम कर उनके असर को कम कर सकते हैं।

कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो के डॉ.डेविड बैले के अध्ययन का हवाला देते हुए डॉ, अग्रवाल ने कहा, "अंगूर का रस रक्तधारा में जाने वाली दवाओं की मात्रा कम कर देता है।"

अमेरिकन एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस, के डॉक्टरों ने कॉलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और दिल की धड़कन की दवा लेने वाले मरीजों को अंगूरों का रस न पीने की चेतावनी दे रखी है।

शोध में पता चला है कि अंगूर, संतरे व सेब का रस कैंसर की दवा एटोपोफोस, बीटा ब्लॉकर दवा एटेनोलोल और एंटी ट्रांसप्लांट रिजेक्शन ड्रग सिस्लोस्पोरीन, सिप्रोफ्लॉक्सासिन, लिवोफ्लॉक्सासिन व इट्राकॉनाजोल जैसे एंटीबायोटिक्स का असर कम कर देता है।

शोध में शामिल स्वयंसेवकों ने एलर्जी की दवा फेक्सोफेनाडाईन सादे पानी व अंगूर के रस के साथ ली। जिन्होंने यह दवा अंगूर के रस के साथ ली, उनके शरीर ने केवल आधी दवा ही सोखी।

रस में मौजूद तत्व दवा के सोखने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। कुछ रसायन दवा को ले जाने वाले तत्वों को बाधित कर देते हैं, जिससे दवा के सोखने की क्षमता कम हो जाती है, जबकि कुछ रसायन ड्रग्स मेटाबॉलिज्म एंजाइम जो आम तौर पर दवा को तोड़ने का काम करते हैं, उन्हें बाधित कर देते हैं।

आम तौर पर पानी के साथ दवा लेना सुरक्षित होता है। एक घूंट के बजाय एक ग्लास बेहतर होता है, क्योंकि यह दवा को घुलने में मदद करता है। ठंडे पानी की बजाए गर्म पानी ज्यादा बेहतर रहता है।

इन 5 हर्बल जूस को पीते वक़्त रखे सावधानी, वरना फायदे की जगह आप हो सकते है बीमार

Herbal juice benefits and side effects in Hindi

नेचुरल प्रोडक्ट्स हमें फायदा जरूर पहुंचाते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल शुरू करने से पहले ये सोच लेना जरूरी है कि ये आपके लिए फायदेमंद हैं या नहीं? इसकी वजह ये है कि कई बार ये दवाएं आपको बीमार भी कर सकती हैं। दूसरी ओर, आयुर्वेदिक दवाएं उम्र, बॉडी की पावर और बीमारी, उसकी स्टेज, सही मात्रा और मौसम के अनुसार लेने पर ही फायदेमंद साबित होती हैं। इसलिए जब भी ऐसी दवाओं को खाना जरूरी लगे तो सबसे पहले किसी एक्सपर्ट से सलाह-मशविरा जरूर करें।



सेहतमंद बने रहने के लिए तरह-तरह के नेचुरल जूस का सेवन शुरू करने से पहले उनकी प्योरिटी और इस्तेमाल के लिए हिदायतों पर गौर करना जरूरी होता है। वरना फायदे की जगह आपको हो सकता है नुक्सान।

1. एलोवेरा जूस (Aloevera juice)
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लाभ- यह ठंडा होता है। इसे पीना स्किन और बालों के ही लिए बहुत ही फायदेमंद है। शरीर की इम्यूनिटी पावर और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी ये मददगार होता है। यह दिल और लिवर से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम करता है।

कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 10 से 30 मिली.।

एहतियात- कफ की शिकायत है, तो मानसून या सर्दी के मौसम में इसे नहीं पीना चाहिए, क्योंकि कई बार इससे गले में खराश, खांसी और सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। एलोवेरा शरीर में नए सेल्स को बनाता है और उनका ग्रोथ भी करता है, इसलिए कैंसर रोगी इसे न पिएं।


2. आंवला जूस (Amla juice)



लाभ- वजन कंट्रोल करता है, आंखों, बालों और स्किन के लिए फायदेमंद होता है। इम्यूनिटी और डाइजेशन सिस्टम को मज़बूत बनाता है। शरीर की गर्मी को बाहर करने के साथ-साथ एसिडिटी और कोलेस्ट्रॉल की शिकायत भी दूर करता है।

कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 से 40 मिली.।


एहतियात- गर्मियों में तो इसे कोई भी व्यक्ति पी सकता है, लेकिन कफ की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बारिश और ठंड के दिनों में इससे परहेज करना चाहिए।

3. जामुन का रस (Jamun juice)



लाभ- डायबिटीज रोगियों के लिए खासतौर से फायदेमंद। ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है। डाइजेशन सिस्टम को सही रखने में मददगार होता है।


कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 मिली.।

एहतियात- कसैला होने के कारण वात प्रकृति के लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। गले में खराश या दर्द की शिकायत होने पर भी इसका सेवन न करें।

4. करेले का रस (Karele ka juice)




लाभ- डायबिटीज का खतरा कम करता है।

कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 मिली.।

एहतियात- ठंड खत्म होने का दौर में इससे परहेज करना चाहिए। इससे पेट दर्द और गैस की शिकायत हो सकती है। दस्त होने पर भी इसे पीना अवॉयड करना चाहिए।

5. जवारे का रस (Jaware ka ras)



लाभ- खून की कमी दूर करता है। कैंसर मरीजों के लिए फायदेमंद होता है।


कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 40 मिली.।

एहतियात- डायबिटीज की शिकायत हो, तो इससे परहेज करें।

सोमवार, जून 13, 2016

मधुमेह में कैसा आहार लेना चाहिए

मधुमेह को घरेलू इलाज से करें कंट्रोल

मधुमेह जैसी आजीवन रहने वाली बीमारी की चिकित्सा संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जाना आसान है। गौरतलब है कि मधुमेह या चीनी की बीमारी को मधुमेह रोगी स्वंय अपनी देखभाल करके कंट्रोल कर सकते हैं। विशेष भोजन या हल्का भोजन लेकर मधुमेह आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसमें ध्यान रखने वाली बात होती है कि मधुमेह रोगियों का खाना कैसा हो। आइए जानें मधुमेह रोगियों को खाने में क्या चीज लेनी चाहिए और क्या नहीं। 
"मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है...: "राज"

यदि आप मधुमेह रोगी हैं तो, जाहिर सी बात है कि आपके दिमाग में यह एक सवाल जरुर आया होगा कि क्या हम फल का सेवन कर सकते हैं? एक्सपर्ट बोलते हैं कि मधुमेह रोगी भी फल का सेवन कर सकते हैं लेकिन सही मात्रा में। ऐसे फल जैसे, केला, लीची, चीकू और कस्टर्ड एप्पल आदि से बचना चाहिये। आज हम आपको कुछ ऐसे 18 फल बताने जा रहे हैं, जिसका सेवन आप आराम से कर सकते हैं। दरअसल, मधुमेह के रोगियों को रेशेदार फल, जैसे तरबूज, खरबूजा, पपीता, सेब और स्ट्राबेरी आदि खाने चाहिए। इन फलों से रक्त शर्करा स्तर नियंत्रित होता है इसलिये इन्‍हें खाने से कोई नुकसान नहीं होता। मधुमेह रोगियों को फलो का रस नहीं पीना चाहिये क्योंकि एक तो इसमें चीनी डाली जाती है और दूसारा कि इसमें गूदा हटा दिया जाता है, जिससे शरीर को फाइबर नहीं मिल पाता। तो आइये जानते हैं कि मधुमेह रोगियों को कौन-कौन से फलों का सेवन करना चाहिये।

कीवी 

कई रिसर्च के अनुसार यह बात सामने आई है कि कीवी खाने से ब्‍लड शुगर लेवल कम होता है।

काली जामुन 

मधुमेह रोगियो के लिये यह फल बहुत ही लाभकारी है। इसके बीजो़ को पीस कर खाने से मधुमेह कंट्रोल होता है।

अमरख 

यदि आप को मधुमेह है तो आप यह फल आराम से खा सकते हैं। पर यदि रोगी को डायबिटीज अपवृक्कता है तो उसे अमरख खाने से पहले डॉक्‍टर से पूछना चाहिये।

अमरूद 

अमरूद में विटामिन ए और विटामिन सी के अलावा फाइबर भी होता है।

चैरी 

इसमें जीआई मूल्‍य 20 होता है जो कि बहुत कम माना जाता है। यह मधुमेह रोगियों के लिये बहुत ही स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक मानी जाती है।

आड़ू 

इस फल में भी जीआई बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और मधुमेह रोगियों के लिये अच्‍छा माना जाता है।

सेब 

सेब में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।

अनानास 

इसमें एंटी बैक्‍टीरियल तत्‍व होने के साथ ही शरीर की सूजन कम करने की क्षमता होती है। यह शरीर को पूरी तरह से फायदा पहुंचाता है।

नाशपाती 

इसमें खूब सारा फाइबर और विटामिन पाया जाता है जो कि मधुमेह रोगियों के लिये फायदेमंद होता है।

पपीता 

इसमें विटामिन और अन्‍य तरह के मिनरल होते हैं।

अंजीर

इसमें मौजूद रेशे मधुमेह रोगियों के शरीर में इंसुलिन के कार्य को बढावा देते हैं।

संतरा

यह फल रोज खाने से विटामिन सी की मात्रा बढेगी और मधुमेह सही होगा।

तरबूज 

यदि इसे सही मात्रा में खाया जाए तो यह फल मधुमेह रोगियों के लिये अच्‍छा साबित होगा।

अंगूर 

अंगूर का सेवन मधुमेह के एक अहम कारक मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम से बचाता है। अंगूर शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है।

अनार 

यह फल भी बढे हुए ब्‍लड शुगर लेवल को कम करने में असरदार है।

खरबूज 

इसमें ग्‍लाइसिमिक इंडेक्‍स ज्‍यादा होने के बावजूद भी फाइबर की मात्रा अच्‍छी होती है इसलिये यदि इसे सही मात्रा में खाया जाए तो अच्‍छा होगा।

कटहल

यह फल इंसुलिन लेवल को कम करता है क्‍योंकि इसमें विटामिन ए, सी, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, कैल्‍शियम, पौटैशियम, आयरन, मैग्‍नीशियम तथा अन्‍य पौष्टिक तत्‍व होते हैं।

आमला

इस फल में विटामिन सी और फाइबर होता है जो‍ कि मधुमेह रोगी के लिये अच्‍छा माना जाता है।

मधुमेह रोगियों का खाना "राज" कैसा हो?

मधुमेह जैसी आजीवन रहने वाली बीमारी की चिकित्सा संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जाना आसान है। गौरतलब है कि मधुमेह या चीनी की बीमारी को मधुमेह रोगी स्वंय अपनी देखभाल करके कंट्रोल कर सकते हैं। विशेष भोजन या हल्का भोजन लेकर मधुमेह आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसमें ध्यान रखने वाली बात होती है कि मधुमेह रोगियों का खाना कैसा हो। आइए जानें मधुमेह रोगियों को खाने में क्या चीज लेनी चाहिए और क्या नहीं।
  1. मधुमेह रोगियों को घुलनशील फाइबर युक्त आहार लेना चाहिए।
  2. विशेष भोजन के रूप में मधुमेह रोगी जल्दी पचने वाला आहार ले सकते हैं। 
  3. मधुमेह रोगी को खाने में हल्दी का सेवन किसी न किसी रूप में ज़रूर करना चाहिए।
  4. मधुमेह रोगियों को काब्रोहाइड्रेट के रूप में मोटा अनाज, भूरे चावल, प्रोटीन युक्त पदार्थ, मांस इत्यादि लेना चाहिए। 
  5. हल्के आहार में मधुमेह रोगी को अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, टोंड दूध इत्यादि लेना फायदेमंद होता है। 
  6. मधुमेह में संतुलित आहार के साथ-साथ कैलोरी, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट इत्यादि भी भरपूर मात्रा में लेना चाहिए। 
  7. तरल पदार्थों को बनाते समय उसमें शुगर फ्री खाद्य पदार्थ का ही इस्तेमाल करें जैसे टमाटर की चटनी इत्यादि में शुगर न डालें। 
  8. अंगूर, जामुन,सेब इत्यादि फलों से भी मधुमेह को नियंत्रि‍त किया जा सकता है। 
  9. कम शुगर वाले खाद्य पदार्थ लें जिसमें कम वसा वाले खाने को प्राथमिकता दें। 
  10. दूध वाली चाय के बजाय ग्रीन टी, लेमन टी, हर्बलटी इत्यादि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। 
  11. सलाद में हरी सब्जियां की सलाद बना सकते हैं। 
  12. आप घर की बनी टमाटर की चटनी, सूप और टमाटर ले सकते हैं। 
  13. खीरा प्याज, नींबू और सामान्य मिर्च मसालों का ही प्रयोग करें।
  14. करेला, मेथी दाना का सेवन करें। 
  15. अधिक समय तक भूखे ना रहें और थोड़े-थोड़े समय में कुछ न कुछ खाते रहें। 
  16. खाना बनाते समय सरसों का तेल, मूंगफली,सोयाबीन,सूर्यमुखी के तेल का इस्तेमाल करें ये आपको मधुमेह नियंत्रित करने में बहुत मदद करेगा। 
  17. स्ट्राबेरी, तरबूज़, पपीता, बेर जैसे फल आदि जल्दी पच जाते हैं इसलिए वो आंत में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं। काजू, बादाम और ड्राईफ्रूट्स खाने से भी मधुमेह को बढ़ने से रोका जा सकता है। 
  18. मधुमेह के मरीज साबुत दाल ,सलाद ,कच्चे मीठे खट्टे फलों के साथ-साथ विटामिन सी, ई कुछ खनिज इत्यादि पौष्टिक आहार को अपने भोजन में शामिल कर मधुमेह को कम कर सकते हैं। 
  19. हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ मैग्निशियम और विटामिन जैसी एंटी-ऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत होती हैं जो कि रक्त से शुगर की मात्रा कम करने में लाभकारी भूमिका निभाता है।
वे खाद्य पदार्थ  "राज" जो रक्त में शुगर का स्तर बढ़ाते हैं
  • चीनी
  • नमक
  • गुड़ 
  • देसी घी
  • फुलक्रीम दूध
  • घी में तले परांठें 
  • आइस्क्रीम
  • मांस 
  • अंडा 

धूम्रपान व मदिरापान 

डायबिटीज के रोगी को आहार में जड़ एवं कंद, मिठाइयाँ, चॉकलेट, तला हुआ भोजन, सूखे मेवे, केला, चीकू, सीताफल इत्यादि चीजों को खाने से बचना चाहिए। इतना ही नहीं मधुमेह नियंत्रि‍त करने के लिए डॉक्टर के निर्देशानुसार ही कैलोरीज लेनी चाहिए।

मधुमेह को घरेलू इलाज से करें कंट्रोल

मधुमेह बीमारी में रक्त में शर्करा की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है। अभी तक इसका कोई स्थाई इलाज सामने निकल कर नहीं आया है। इसलिए अगर आपको डायबीटीज को कंट्रोल करना है, तो अच्छा पौष्टिक आहार और अपने लाइफस्टाइल में परिवर्तन लाना होगा। इस बीमारी को घरेलू इलाज से काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते है मधुमेह को घरेलू इलाज से कैसे कंट्रोल कर सकते हैं।

मधूमेह को ठीक करने के लिए "राज" घरेलू इलाज- 

1. करेला- डायबिटीज में करेला काफी फायदेमंद होता है, करेले में कैरेटिन नामक रसायन होता है, इसलिए यह प्राकृतिक स्टेरॉयड के रुप में इस्तेमाल होता है, जिससे खून में शुगर लेवल नहीं बढ़ पाता। करेले के 100 मिली. रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है।
2. मेथी- मधुमेह के रोगियों के लिए मेथी बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप रोज़ 50 ग्राम मेथी नियमित रुप से खाएगें तो निश्चित ही आपका ग्लूकोज़ लेवल नीचे चला जाएगा, और आपको मधुमेह से राहत मिलेगी।
3. जामुन- जामुन का रस, पत्ती़ और बीज मधुमेह की बीमारी को जड़ से समाप्त कर सकता हैं। जामुन के सूखे बीजों को पाउडर बना कर एक चम्मच दिन में दो बार पानी या दूध के साथ लेने से राहत मिलती है।
4. आमला- एक चम्मच आमले का रस करेले के रस में मिला कर रोज पीएं , यह मधुमेह की सबसे अच्छी दवा है।
5. आम की पत्ती – 15 ग्राम ताजे आम के पत्तों को 250 एमएल पानी में रात भर भिगो कर रख दें। इसके बाद सुबह इस पानी को छान कर पी लें। इसके अलावा सूखे आम के पत्तों को पीस कर पाउडर के रूप में खाने से भी मधुमेह में लाभ होता है।
6. शहद- कार्बोहाइर्ड्रेट, कैलोरी और कई तरह के माइक्रो न्यू ट्रिएंट से भरपूर शहद मधुमेह के लिए लाभकारी है। शहद मधुमेह को कम करने में सहायता करता है।
इसके अलावे इनका सेवन करने से भी मधुमेह में आराम मिलता है-
1. एक खीरा, एक करेला और एक टमाटर, तीनो का जूस निकालकर सुबह खाली पेट पीने से मधुमेह नियंत्रित होता है।
2. नीम के सात पत्ते सुबह खाली पेट चबाकर या पीसकर पानी के साथ लेने से मधुमेह में आराम मिलता है।
3. सदाबहार के सात फूल खाली पेट पानी के साथ चबाकर पीने से मधुमेह में आराम मिलता है।
4. जामुन, गिलोय, कुटकी, नीम के पत्ते, चिरायता, कालमेघ, सूखा करेला, काली जीरी, मेथी इन सब को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण सुबह-शाम खाली पेट पानी के साथ लें, इससे मधुमेह में आराम मिलता है।

इन आहार से "राज" दूर रहें-

1. मीठे से दूर रहें
वैसे तो ऐसे लोग बहुत बड़ी संख्या में हैं, जो मीठा खाना पसंद नहीं करते, लेकिन इसके बावजूद वे मधुमेह के शिकार हैं। मधुमेह मीठा खाने के कारण नहीं होता, लेकिन एक बार यह हो जाए तो मरीज को मीठे से दूर रहना पड़ता है। इसलिए कोशिश करें कि मिठाई ना खाएं।
2. जमीन के अंदर उगनेवाले चाजों से बचें
शकरकंदी, अरवी, आलू और ऐसी कई चीजे जो जमीन के अंदर उगती है, उनको ना खाएं या कोशिश करें कि कम से कम मात्रा में इनका सेवन करें।
3. जंक फ़ूड से दूर रहें
जंक फ़ूड बिल्कुल ना खाएं, इससे मधुमेह का खतरा और बढ़ जाता है। साथ ही तली हुई चीजें भी ना खाएं, यह आपकी बीमारी को और बढ़ा देगा। अंकुरित अन्न को उबालकर या भुनकर खाएं पर तलकर नहीं खाएं।
4. सूखा मेवा ना खाएं
अगर आपको मधुमेह है तो आप सूखा मेवा कभी नहीं खाएं, और अगर खाना भी हो तो इन्हे पानी में भिगोकर खा सकते हैं।
5. वसायुक्त भोजन ना करें
मधुमेह से बचना है, तो वसायुक्त भोजन कम लें। वसा या कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने से मधुमेह बढ़ता है। इसलिए वसा या कार्बोहाइड्रेट की कम मात्रा वाला भोजन लेने से मधुमेह से बचाव हो सकता है।
6. चावल ना खाएं 
अगर आप रोज एक बड़ा बाउल सफेद चावल खाते हैं, तो आपको टाइप-2 मधुमेह होने का खतरा सामान्य से 11 प्रतिशत ज्यादा होता है। चावल के पकाने की विधि पर उसके खाने से होने वाला फायदा या नुकसान निर्भर करता है। अगर चावल की बिरयानी बनाई जाए या चावल को मांस या सोयाबीन के साथ खाया जाए, तो डाइबिटीज होने का खतरा ज्यादा रहता है। क्योंकि इससे शरीर में रक्त में शर्करा की मात्रा पर असर पड़ सकता है।
7. इन फलों से दूर रहें
केला, आम, लीची जैसे फलों को ना खाएं या कम मात्रा में खाएं, क्योंकि इससे मधूमेह का खतरा बढ़ता है।
8. इनसे भी दूर रहें
अगर आपको मधुमेह हो तो आप आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री आदि से भी परहेज रखें। यह आपके स्वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक होते है।

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