दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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शनिवार, अगस्त 05, 2017

36 Health Tips for life : RAJESH MISHRA



स्वस्थ रहने के 36 उपाय
महत्वपूर्ण ध्यान रखने योग्य बातें:

1) हमेशा पानी को घूट-घूट करके चबाते हुए पिये और खाने को इतना चबाये की पानी बन जाये। किसी ऋषि ने कहा है कि "खाने को पियो और पीने को खाओ"

2) खाने के 40 मिनट पहले और 60-90 मिनट के बाद पानी पिये और फ्रीज का ठंडा पानी, बर्फ डाला हुआ पानी जीवन मे कभी भी नही पिये। गुनगुना या मिट्टी के घडे का पानी ही पिये ।
3)सुबह जगने के बाद बिना कुल्ला करे 2 से 3 गिलास पानी सुखआसन मे बैठकर पानी घूटं-घूटं करके पिये यानी उषा पान करे ।
4) खाने के साथ भी कभी पानी न पिये। जरुरत पड़े तो सुबह ताजा फल का रस, दोपहर मे छाछ और रात्रि मे गर्म दूध का उपयोग कर सकते हैं।
5) भोजन हमेशा सुखआसन मे बैठकर करे और ध्यान खाने पर ही रहे, मतलब टेलीविजन देखते, गाने सुनते हुए, पढ़ते हुए, बातचीत करते हुए कभी भी भोजन न करे।

6) हमेशा बैठ कर खाना खाये और पानी पिये। अगर संभव हो तो सुखासन, सिद्धासन मे बैठ कर ही खाना खाये।
7) फ्रीज़ मे रखा हुआ भोजन न करें या उसे साधारण तापमान में आने पर ही खाये दुबारा कभी भी गर्म ना करे ।
8) गूँथ कर रखे हुये आटे की रोटी कभी न खाये, जैसे- कुछ लोग सुबह में ही आटा गूँथ कर रख देते है और शाम को उसी से बनी हुई चपाती खा लेते है जो स्वास्थ के लिए हानिकारक है। ताजा बनाए ताजा खाये।
9) खाना खाने के तुरंत बाद पेशाब जरूर करे ऐसा करने से डायबिटज होने की समभावना कम होती हैं।
10) मौसम पर आने वाले फल, और सब्जियाँ ही उत्तम है इसलिए बिना मौसम वाली सब्जियाँ या फल न खाये।
11) सुबह मे पेट भर भोजन करें। जबकि रात मे बहुत हल्का भोजन करें।
12) रात को खीरा, दही और कोई भी वात उत्पन्न करने वाली चीज न खाये।
13) दही के साथ उड़द की दाल न खाये। जैसे- दही और उड़द की दाल का बना हुआ भल्ला।
14) दूध के साथ नमक या नमक की बनी कोई भी चीज न खाये। क्योंकि ये दोनों एक दूसरे के प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
15) दूध से बनी कोई भी दो चीजे एक साथ न खाये।
16) कोई भी खट्टी चीज दूध के साथ न खाये सिर्फ एक खा सकते है आँवला। खट्टे आम का शेक न पिये केवल मीठे पके हुए आम का ही शेक पीये ।
17) कभी भी घी और शहद का उपयोग एक साथ न करे! क्योंकि दोनों मिलकर विष बनाते है।
18) खाना भूख से कम ही खाये। जीने के लिए खाना खाये न कि खाने के लिए जीये।
19) रिफाइण्ड तेल जहर हैं आप हमेशा कच्ची घाणी का सरसो, तिल या मूगंफली का तेल ही उपयोग करे और जीवन मे हाटॅ टेक व जोडो के दर्द से बचे ।
20) तला, और मसालेयुक्त खाना खाने से बचे। अगर ज्यादा ही मन हो तो सुबह मे खाये रात मे कभी भी नहीं।
21) खाने मे गुड या मिस्री का प्रयोग करें, चीनी के प्रयोग स बचें।
22) नमक का अधिक सेवन न करें। आयोडिन युक्त समुद्री नमक का उपयोग बिल्कुल भी नही करे! सेधां, काला या डली वाला नमक इस्तेमाल करें।
23) मेदा, नमक और चीनी ये तीनों सफ़ेद जहर है इनके प्रयोग से बचें।
24) हमेशा साधारण पानी से नहाएँ और पहले सर पर पानी डाले फिर पेरो पर और अगर गरम से नहाओ तो हमेशा पहले पैरो पर फिर सर पर पानी डालना चाहिये।
25) हमेशा पीठ को सीधी रख कर बेठे।
26) सर्दियों मे होंठ के फटने से बचने के लिए नहाने से पहले नाभि मे सरसों के तेल लगाये । जबरदस्त लाभ मिलता है।
27) शाम के खाने के बाद 2 घंटे तक न सोये। 5 से 10 मिनट वज्रासन मे बैठे 1000 कदम वाक जरूर करें।
28) खाना हमेशा ऐसी जगह पकाया जाये जहां वायु और सूर्य दोनों का स्पर्श खाने को मिल सके।
29) कूकर मे खाना न पकाए बल्कि किसी खुले बर्तन मे बनाए, क्योकि कूकर मे खाना उबलता है और खुले बर्तन के अन्दर खाना पकता हैं इससे खाने प्रोटीन मात्रा 93 प्रतिशत होती है और कूकर मे मात्र 13 प्रतिशत रहती है ।
30) सिल्वर के बर्तनो का प्रयोग खाना बनाने और खाने दोनों के लिए कभी भी न करें!पीतल, कासां, मिट्टी के बर्तन का ही उपयोग करें।
31) खाने को कम से कम 32 बार चबाये।
32) रोज टूथब्रश का प्रयोग न करें इससे मसूड़े कमजोर होते है। दंतमंजन का प्रयोग कर सकते है।
33) अपनी दोनों नासिकाओ मे देशी गाय के घी को हल्का गुनगुना करके 1-1 बुंद रात मे डालने से दिमाग तंदरुस्त रहता है। नजला जुकाम, सिर दर्द, माइगृेन, नींद नहीं आना, तनाव आदि समस्या का समाधान होता हैं
34) हमेशा मीठा, नमकीन से पहले खाना चाहिए ।

35) बार-बार नहीं खाना चाहिये एक बार बैठ कर भरपेट या उससे थोड़ा कम खाना चाहिये।
36) हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिये। नकारात्मक सोचने से भी बीमारियाँ आती है।

शुक्रवार, अगस्त 04, 2017

51 "RAJ" Home Remedies for Cough and Cold in Babies

बच्चों में सर्दी और खांसी के लिए "
राज" 51 घरेलु उपचार


बड़े बच्चे नख़रेबाज़ और चिड़चिड़े हो जाते हैं "राज" और आपको लगता है कि आपके प्यारे बच्चे को किसी ने बदल दिया है।

मुझे सोमवार को छुट्टी लेनी पड़ी थी, क्योंकि मेरी छोटी अंशिका बदलते हुए मौसम के चपेट में आ गयी थी। सर्दी और खांसी की वजह से वह बहुत बीमार हो गयी थी। अब वह पहले से ठीक है और उसे आराम है।इसलिए मैंने यह विचार बनाया कि क्यों ना बच्चों और शिशुओं के लिए सर्दी और खांसी के सरल घरेलु उपचारों (baby cough medicine homemade) के बारे में एक पोस्ट लिखा जाये। ये घरेलु उपचार आजमाए और परखे हुए हैं, जिन्होंने मेरी सहायता की है। यह पोस्ट बच्चों और शिशुओं में सर्दी और खांसी के लिए २१ घरेलु उपचारों के बारे में है।

सर्दी और बुखार के लक्षण कई अभिभावकों को भ्रमित कर सकते हैं। आपको कैसे पता चलता है कि यह सर्दी है या बुखार? हालाँकि, इनके लक्षण एक समान प्रतीत होते हैं और आपको चिंतित कर सकते हैं, लेकिन इन दोनों में अंतर करना आसान होता है।

सर्दी में नाक बहती है, नाक जम जाती है, छींक आती है, खांसी होती है और कभी-कभी शरीर का तापमान भी थोड़ा बढ़ जाता है।
बुखार के लक्षण ज्यादा गंभीर होते हैं। इसकी वजह से शरीर का तापमान अधिक बढ़ सकता है, गले में संक्रमण, खांसी, शरीर दर्द आदि हो सकता है। चाहे सर्दी हो या बुखार, अपने डॉक्टर से अपने बच्चे के लिए दवाएं निर्देशित करवाना ना भूलें।

छोटी-मोटी बीमारियों का सामना करने के लिए माएं घरेलु उपचारों का प्रयोग क्यों करती हैं? मुख्य कारण है कि – यह नुकसानदायक रसायनों से नहीं बना होता है! मैंने बच्चों के आयु वर्ग के आधार पर उपचारों को विभाजित कर दिया है, ताकि यह आपके लिए आसान हो जाए।

जैसा कि आप जानती हैं, सभी उपचार सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।

६ महीने तक के बच्चे:
क्या "राज" आपको अपने बच्चे की पहली सर्दी याद है? मुझे याद है, अंशिका केवल ३ सप्ताह की थी जब वो पहली बार सर्दी और खांसी से बीमार पड़ी थी। मुझे याद है कि उसकी तकलीफ को देखकर मैं बहुत बेसहारा महसूस कर रही थी। उस उम्र में बच्चे पहले ही बहुत कोमल होते हैं और कोई भी बीमारी इस स्थिति को और भी अधिक बुरी बना सकती है।
मुझे पूरा भरोसा है कि सर्दी और खांसी के दौरान कई माएं जागती हुई रातों और बच्चों में चिड़चिड़ेपन के इस कठिन दौर से गुजरी होंगी। तो चलिए कुछ घरेलु उपचारों पर एक नज़र डालते हैं जो उनकी तकलीफ कम कर सकते हैं और उन्हें तेजी से स्वस्थ कर सकते हैं।

#१. माँ का दूध
माँ का दूध एक अद्भुत पेय होता है। इसलिए ६ महीने से छोटी उम्र के बच्चों को सर्दी और खांसी के दौरान विषाणुओं और जीवाणुओं का सामना करने के लिए माँ के दूध के अलावा किसी भी अन्य दवा की जरुरत नहीं होती है।
जैसा कि आपको पता है कि माँ का दूध प्रतिरक्षियों से भरपूर होता है। माँ के दूध में मौजूद ये प्रतिरक्षी सभी प्रकार के कीटाणुओं, विषाणुओं और जीवाणुओं के विरुद्ध बच्चे के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं। यह आपके छोटे बच्चे को उचित प्रकार से हाइड्रेट रखने में भी सहायता करता है।
आप स्तनपान कराने के फायदों के बारे में भी पढ़ सकती हैं।

#२. नाक में नमक के पानी की बूंदें डालना
मेरे मामले में यह प्रभावकारी साबित हुआ है और मैंने इसका नाम मेरा रक्षक भी रख दिया था। इससे नाक साफ़ रखने में और इसे जमने से बचाने में सहायता मिली। इससे नाक साफ़ करना बहुत आसान हो जाता है और यह अपेक्षाकृत रूप से आंसू-मुक्त भी होता है।
मुझे विश्वास है कि आपके बालरोग विशेषज्ञ ने आपके छोटे शिशु के लिए सेलाइन ड्रॉप का निर्देश दिया होगा। अपने डॉक्टर की बातों या उनके निर्देश का अनुसरण करना ना भूलें। इसके प्रयोग का सामान्य नियम यह है कि पहले नाक को हल्के हाथ से साफ़ करें और इसके बाद ड्रॉप डालें। बच्चे का सिर मोड़ कर रखें ताकि दवा बाहर ना निकले। आप घर पर भी सेलाइन ड्रॉप बना सकती हैं।

एक स्टील की कटोरी, चम्मच लें और इसे अच्छी प्रकार से कीटाणुमुक्त करें। १/२ छोटा चम्मच नमक लें और इसे ८ छोटे चम्मच गर्म फ़िल्टर के पानी में घोलें। ठंडा होने के बाद, आप इसे अपने बच्चे के लिए प्रयोग कर सकती हैं। लेकिन इसे केवल आपातकालीन स्थितियों में ही प्रयोग करें और मैं आपको घर पर बने सेलाइन ड्रॉप के बजाय बाज़ार में उपलब्ध सेलाइन ड्रॉप का प्रयोग करने की सलाह दूंगी, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा होता है।
अपने बच्चे की बंद नाक खोलने के लिए "राज" नेज़ल एस्पिरेटर भी एक बहुत बढ़िया विकल्प होता है। यह उन सभी चीजों को हटाने में सहायता करता है जो आपके बच्चे की नाक बंद करते हैं।
आप इसे यहाँ खरीद सकती हैं
आप सर्दी को दूर रखने के ५ उपायों के बारे में भी पढ़ सकती हैं।

#३. लहसुन और अजवाइन की पोटली

लहसुन और अजवाइन को इनके कीटाणु-रोधक और विषाणु-रोधक गुणों के लिए जाना जाता है। इसलिए ये दोनों एक साथ मिलकर काफी प्रभावशाली साबित हो सकते हैं और यह सर्दी और बंद नाक के विरुद्ध एक ताकतवर हथियार है। लेकिन इसके नाम से मत डरिये, वास्तव में इसे बनाना बहुत आसान है।
आपको यह पोटली या पाउच बनाने के लिए ३ चीजों की जरुरत होती है – लहसुन, अजवाइन और साफ़ मलमल का कपड़ा।
लहसुन की २ बड़ी कलियों और १ बड़ा चम्मच अजवाइन को तवे पर सूखा भूनें। इसके ठंडा होने का इंतज़ार करें और ठंडा होने के बाद इसे एक पोटली में बांधें। आप यह एक साफ़ मलमल के कपड़े की सहायता से भी कर सकती हैं।
इस पोटली को बच्चे के पालने या झूले में रखें जहाँ बच्चा सोता है। पोटली से निकलने वाला लहसुन-युक्त अजवाइन का धुआं बच्चे की मदद करेगा, क्योंकि यह बंद नाक खोलने में और कफ के जमाव से राहत पहुंचाने में सहायता करता है।
चेतावनी: बच्चे के द्वारा इस पोटली को मुंह में भरने और दम घुटने की संभावना से बचने के लिए कृपया पोटली/पाउच को बच्चे के पास ना रखें। इसे बहुत नजदीक रखने पर यह श्वसन के लिए नुकसानदेह भी बन सकता है।
यदि आप सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं तो आप इस पोटली को बच्चे के पैर के नीचे रगड़ भी सकती हैं। यह तरीका भी प्रभावी होता है।

#४. पनिकूरका

यह एक गूदेदार सदाबहार पौधा होता है, जिसे दक्षिण भारत में व्यापक रूप से पनिकूरका कहते हैं और इसे बच्चों में खांसी, बुखार, गले की खराश और बंद नाक का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
इसे भारतीय बोरेज, पत्ता अजवाइन, पत्थर चूर, कर्पूरवल्ली या नवरयिला के रूप में भी जाना जाता है, और यह एक प्राकृतिक ज्वरनाशक और कफ गिराने वाली औषधि है। गूदेदार सुगंधित पत्तियों को स्टोव पर भुना जाता है, और ठंडा करने के बाद बच्चे के माथे पर रखा जाता है। पत्तों का सूखना पानी का अवशोषण दर्शाता है और इस प्रकार बच्चे को खांसी/कफ जमने से राहत मिलती है।

#५. तेल मालिश

लगभग ¼ कप सरसों का तेल लें और इसे गर्म करें। एक या दो लहसुन की कलियाँ लें। उन्हें हल्का कूटें और इसके बाद काट दें। इसे सरसों के तेल में डाल दें। इसके भूरा होने का इंतज़ार करें, इसके बाद आंच से हटा दें।
याद रखें, इसे केवल भूरा करना होता है, इसे जलने ना दें। आप इस तेल का प्रयोग कर सकती हैं और बच्चे के सीने और पाँव की मालिश कर सकती हैं। इसे बाद उसे मोज़े पहनाएं।
बेहतर परिणामों के लिए "राज" चुटकी भर अजवाइन भी डाला जा सकता है। इसे तेल गर्म करते समय डालें। लहसुन की तरह इसे भी काला ना होने दें। सरसों के तेल, लहसुन और अजवाइन में कीटाणु-रोधक और विषाणु-रोधक गुण होते हैं। इसके अलावा सरसों के तेल की तासीर गर्म होती है जो बच्चे में कफ के जमाव में भी सहायता करता है। यह आपके बच्चे को काफी मात्रा में आराम प्रदान करने में सहायता करता है।
आप बच्चे की मालिश करने का क्रमशः तरीका भी पढ़ सकती हैं।
चेतावनी: इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा कभी भी तेल ना पीये क्योंकि इसकी वजह से दस्त और अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। बच्चों के लिए तेलों या हर्बल दवाओं के सेवन का सुझाव नहीं दिया जाता है।

#६. केसर तिलक

केसर के कुछ धागे लें। इसका पेस्ट बनाने के लिए इसे पत्थर पर रगड़ें। रात में बच्चे के पाँव और माथे पर तिलक या टीका लगाएं।
केसर का तिलक बच्चे के माथे में जमा पानी को अवशोषित करने में सहायता करेगा।
#७. सैजन के पत्तों का केश तेल

यह मेरी माँ द्वारा प्रयोग किया जाने वाला एक पुराना उपचार है।
मोरिंगा या सैजन की कोमल हरी पत्तियों को तोड़ें। एक मोटी पेनी वाली कढ़ाई में १/२ कप नारियल तेल गर्म करें और उसमें मुट्ठीभर सैजन की पत्तियां डालें।
पत्ते सूख जाने के बाद, आप कढ़ाई को आंच से हटा सकती हैं।

सर्दी, खांसी और कफ जमा होने पर इस तेल को अपने बच्चे के बालों के तेल के रूप में प्रयोग करें।

#८. मौसम के अनुसार कपड़े


बच्चे के कपड़े उसके सीने को सर्दी से बचाने वाले होने चाहिए।
सर्दियों के मौसम में, उसे गर्म रखने के लिए एक के ऊपर एक कपड़े पहनाएं।
यदि गर्मी है तो सुनिश्चित करें कि उसके कपड़े आरामदायक हों और उसे घुटन महसूस ना हो।
हालाँकि, रात में कंबल का प्रयोग करना सामान्य लगता है, लेकिन शायद यह उतना अच्छा विचार नहीं है। आपका बच्चा अपने सिर के ऊपर चादर या कंबल खींच सकता है। इससे घुटन हो सकती है और उसे SIDS या आकस्मिक शिशु मृत्यु सिंड्रोम का भी खतरा होता है।
आप अपने बच्चे को एक पीस की पोशाक और उसके ऊपर कोई टी-शर्ट पहना सकती हैं। यदि बाहर ठंड नहीं है तो यह प्रभावी हो सकता है। याद रखें, उसका आराम सबसे ज्यादा अहमियत रखता है, इसलिए यदि उसे परेशानी महसूस होती है तो उसकी पोशाक को उस हिसाब से निःसंकोच बदलें। हालाँकि, सीने को ढंकना ना भूलें।

#९. अपना और अपने बच्चे का हाथ साफ़ रखना

कीटाणुरोधी बेबी वाइप या साबुन से नियमित अंतरालों पर अपना और अपने बच्चे का हाथ अच्छी प्रकार से साफ़ करती रहें। यदि आपको लगता है कि यह कैसे उपयोगी है या परिवार में कोई ऐसा व्यक्ति है जो कहता है कि उसे इसमें विश्वास नहीं है तो मैं आपको बताती हूँ कि यह महत्वपूर्ण क्यों है।
यह कीटाणुओं को फैलने से रोकने में मदद करता है। अब आप इस स्थिति को और अधिक खराब नहीं बनाना चाहती। हैं ना?
दिनभर में आप कई लोगों से मुलाकात और बातचीत करेंगी और इसका मतलब है कि आप बहुत सारे जीवाणुओं और कीटाणुओं का आदान-प्रदान भी करेंगी।बीमारी के दौरान, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी ज्यादा मजबूत नहीं होती है – जिसका मतलब है कि वह अन्य बीमारियों के प्रति भी संवेदनशील होता है। इसलिए, कम से कम जब तक उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं होता है इस गतिविधि का पालन करना ना भूलें।

#१०. बच्चे का सिर ऊपर रखें

जब आपका बच्चा सोता है तो उसका सिर ऊपर रखने का प्रयास करें। इससे उसे सही प्रकार से साँस लेने में सहायता मिलती है। साथ ही, उसके बिस्तर, पालने या झूले में से ऐसी किसी भी चीज को हटा दें जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

६ महीने से बड़े बच्चे

आप ६ महीने से बड़े बच्चों के लिए भी माँ के दूध, सेलाइन नेज़ल ड्रॉप, अजवाइन लहसुन पोटली का प्रयोग कर सकती हैं। साथ ही, ४, ५, और ६ बिदुओं में दी गयी चीजों का भी इस्तेमाल करें।
सर्दी, खांसी और बंद नाक का सामना करने के लिए उन उपचारों के अतिरिक्त आप इन सरल उपचारों को भी शामिल कर सकती है।

#११. पनिकूरका जूस

पनिकूरका के पत्तों को भाप से पकाकर इसका रस निकालें। ७ महीने और इससे अधिक उम्र के बच्चों को इसका १/२ चम्मच दें। बच्चों में सर्दी-खांसी के लिए यह बहुत प्रभावशाली होता है।
#१२. सूखी भुनी हुई हल्दी रगड़ना

केरल में इस उपचार को उनक्का मंजल चुट्टठु के नाम से भी जाना जाता है।
हल्दी की एक सूखी गाँठ को आंच पर रखें जब तक कि यह थोड़ा जला हुआ नहीं दिखने लगता है। हल्दी का पेस्ट बनाने के लिए इसे पत्थर पर रगड़ें।
सर्दी से राहत पाने के लिए बच्चे की नाक के ऊपर यह पेस्ट लगाएं।
चेतावनी: कृपया इस पेस्ट को बच्चे के नाक के अंदर ना लगाएं या ऐसे किसी भी रूप में प्रयोग ना करें जिससे उसे घुटन हो।

#१३. हल्दी का पेस्ट


पेस्ट बनाने के लिए हल्दी पाउडर को थोड़े पानी के साथ मिलाएं। इसे एक कलछुल में लें और गर्म करें। गर्म होने के बाद इसे आंच से उतार दें।
हल्के गर्म पेस्ट को बच्चे के सीने, माथे और पैरों पर लगायें। हल्दी की गर्मी बलगम को अवशोषित कर सकती है, इस प्रकार बच्चे को सर्दी-खांसी से राहत मिलती है।
#१४. गाजर का रस

ताज़े गाजर से निकाले गए रस को उबाल कर कमरे के तापमान पर ठंडा करके रखे गए पानी में घोला जा सकता है और ६ महीने और इससे अधिक उम्र के बच्चों को दिया जा सकता है। यह सर्दी-खांसी के लिए प्रभावकारी होता है।
चेतावनी: कृपया इस बात का ध्यान रखें कि यह रस देने से पहले आपने पहले बच्चे को गाजर दिया हो और इससे बच्चे को किसी भी प्रकार की एलर्जी ना हो।

#१५. गर्म सरसों तेल की मालिश
सरसों के तेल को थोड़े कलौंजी और २ लहसुन की कलियों के साथ गर्म करें। इसे बच्चे के सीने, नाक के नीचे, पैरों के पीछे और हथेलियों पर लगाएं। हल्के हाथ से मालिश करें।
मालिश के बाद आप अतिरिक्त तेल पोंछ सकती हैं।

#१६. अजवाइन या जीरे के साथ गर्म पानी देना

बच्चे को अच्छी तरह से हाइड्रेट रखने के लिए नियमित अंतरालों पर गर्म पानी दें।
किसी भी बीमारी के दौरान हाइड्रेशन बहुत महत्वपूर्ण होता है। आपका बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है और शायद कुछ ना लेना चाहे, लेकिन आप उसे थोड़ा गर्म पानी जरूर पिलाएं। आप उबले हुए अजवाइन या जीरे के पानी का प्रयोग भी कर सकती हैं।
एक गिलास पानी लें और उसमें चुटकी भर अजवाइन या जीरा डालें। पानी उबलने का इंतज़ार करें। पानी ठंडा करें और इसका प्रयोग करें।
यदि आप बच्चे के पर्याप्त मात्रा में पानी लेने के बारे में चिंतित हैं तो बच्चों के पानी के सेवन पर दिया गया गया लेख पढ़ें।
#१७. सेंधा नमक के साथ मिले हुए गर्म सरसों के तेल की मालिश
सरसों का तेल गर्म करें। इसमें एक छोटा चम्मच सेंधा नमक डालें। इसे बच्चे की पीठ और छाती पर लगायें।

#१८. अजवाइन का काढ़ा
बच्चों के सर्दी-खांसी में अजवाइन का काढ़ा बहुत उपयोगी होता है।
सामग्री:
अजवाइन या ओमान – १ चम्मच
तुलसी के पत्ते – ८
सोंठ पाउडर या चुक्कू – १/२ चम्मच (वैकल्पिक)
लौंग – १
काली मिर्च – ५
हल्दी – १/२ चम्मच
गुड़ – १/३ कप
पानी – १/२ कप
विधि:
मोटी तली वाले एक बर्तन में सभी सामग्रियां लें और १० मिनट के लिए उबालें या इसकी मात्रा को ३/४ तक कम करें। छान लें, ठंडा करें और इसे अपने बच्चे को पिलायें।
इसकी खुराक है खाने के बाद दिन में दो बार १ चम्मच। यदि आप एलोपैथिक कफ सिरप दे रही हैं तो अजवाइन का काढ़ा ना दें।

#१९. सूप देना
उसके खाने में कुछ सूप का प्रयोग करें।
सर्दी-खांसी के दौरान सूप बहुत अच्छा आरामदायक भोजन होता है। आप सब्जियों या टमाटर का गर्म सूप दे सकती हैं। यदि आपका बच्चा ८ महीने और इससे ज्यादा उम्र का है तो आप उसे चिकन सूप दे सकती हैं।
ये सूप बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। यह इस बात को सुनिश्चित करने में सहायता करेगा कि उनके ऊर्जा स्तर में ज्यादा कमी ना आये और उन्हें बीमारी से लड़ने में मदद करेगा।
आप बच्चों में सर्दी-खांसी का सामना करने के लिए ७ पौष्टिक सूप और २५ भोजन पर दिया गया लेख देख सकती हैं।

#२०. नीलगिरी का तेल

नहीं, नीलगिरी का तेल लेने के लिए आपको नीलगिरी की यात्रा करने की जरुरत नहीं है। इसे युकलिप्टस तेल के नाम से भी जाना जाता है।
इसे युकलिप्टस के पेड़ से निकाला जाता है और इसके बहुत सारे प्रयोग हैं।
इसे छिलने-कटने, सांस लेने की परेशानी से राहत देने, साइनस दूर करने, एलर्जी आदि में आराम प्रदान करने के लिए दिया जाता है। यह कफ भी दूर करता है और इसलिए इसे सर्दी में आराम देने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।
आप थोड़ी रुई लेकर इसे नीलगिरी के तेल में भीगा सकती हैं। इसे बच्चे के शयनकक्ष में रखना बहुत प्रभावकारी होता है। यदि संभव हो तो आप इसकी कुछ बूंदें अपने डिफ्यूजर में भी डाल सकती हैं।
आप यहाँ नीलगिरी का तेल खरीद सकती हैं।

#२१. भाप

आप वेपराइज़र का प्रयोग करके कमरे को स्टीम कर सकती हैं। यह रोग से राहत प्रदान करने में लाभदायक होता है, क्योंकि भाप बलगम गिराने में और नाक साफ़ रखने में सहायता करता है। इससे आपके बच्चे को सांस लेने में आसानी होती है।
ध्यान दें: स्टीम बच्चे के पास ना रखें क्योंकि इससे उसके जलने का खतरा होता है।

#२२. लहसुन अजवाइन की पोटली रगड़ना

चरण ३ में दिए गए लहसुन और अजवाइन की पोटली को बच्चे की छाती पर रगड़ने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
इसे पहले गर्म करना पड़ता है। आप इसे तवे के प्रयोग से गर्म कर सकती हैं, पोटली को गर्म तवे पर रखें, लेकिन इसके बहुत ज्यादा गर्म होने का इंतज़ार ना करें। यह औषधीय पोटली छाती साफ़ करने में सहायता करती है। इसलिए, इसका इस्तेमाल करके कफ के जमाव और बलगम को अलविदा कहिये!
ध्यान दें: पोटली को सीधे तवे से उतार कर सीने पर ना रखें! इसे प्रयोग करने से पहले हमेशा तापमान जांच लें। आप इसे अपनी हथेली या कलाई के नीचे रख सकती हैं, इसका तापमान देखें और हल्की गर्म पोटली को सीने पर रगड़ें।
यदि यह बहुत ज्यादा गर्म लगता है तो इसके ठंडा होने का इंतज़ार करें। यदि आपको कोई गर्मी महसूस नहीं होती तो आपको इसे दोबारा गर्म करने की जरुरत होती है।
बच्चों की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है और इसलिए आपको ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है। हमारी हथेली और कलाई के नीचे की त्वचा हमारे पूरे शरीर की तुलना में ज्यादा कोमल होती है। इसलिए आपके द्वारा महसूस किया जाने वाला तापमान बच्चे को महसूस होने वाले तापमान के लगभग बराबर होता है। इस प्रकार, आप सुनिश्चित कर सकती हैं कि इससे आपका बच्चा नहीं जलेगा या इससे उसे किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होगी।

#२३. रसम

टमाटर और लहसुन के सूप को रसम भी कहा जाता है और इसे ७ महीने और इससे ज्यादा आयु के बच्चों को दिया जा सकता है। दक्षिण भारत में सर्दी-खांसी के उपचार के रूप में यह बहुत लोकप्रिय है। इसमें डाली जाने वाली सामग्रियां रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुधारने और आपके बच्चे को स्वस्थ करने में सहायता करती हैं।
और इसका एक अन्य लाभ यह है कि ये बहुत स्वादिष्ट होता है! बीमारी के दौरान दिया जाने वाला यह स्वादिष्ट मिश्रण बच्चों के लिए एक अच्छा परिवर्तन होता है। कृपया इसमें लाल मिर्च पाउडर ना डालें। आप बच्चों के लिए आसान और बेहद स्वादिष्ट रसम की रेसिपी यहाँ पढ़ सकती हैं।

#२४. गुड़ के साथ अजवाइन का पानी

१ कप पानी को चुटकी भर अजवाइन और १ चम्मच गुड़ के साथ उबालें। छानकर ठंडा करें और इसे अपने बच्चे को दें।
इसकी खुराक है दिन में एक बार १ चम्मच।

#२५. वेपो रब

सोने से पहले बच्चों के पाँव के नीचे वेपो रब लगाएं और उन्हें सूती मोज़े पहनायें।
यह कैसे मदद करता है? सच कहूँ तो मुझे भी नहीं पता। यह इसमें मौजूद मेंथॉल या कपूर की वजह से हो सकता है। लेकिन कई माएं और दादियाँ इस उपचार पर पूरा भरोसा करती हैं।
यह एक अद्भुत उपचार की तरह होता है। यह बच्चे को आराम पहुंचाने में मदद करता है और उसे चैन की नींद प्रदान करता है। यह खांसी के लिए भी उपयोगी है। जब आप इसे बड़े बच्चों के पैरों में लगाती हैं तो हमेशा थोड़ा सतर्क रहें क्योंकि इससे उसके फिसलने का खतरा होता है। यदि उन्हें बाथरूम जाने के लिए उठना पड़ता है तो यह सुनिश्चित करें कि वे सावधानी से और धीरे-धीरे चलें। (This is simple baby cough remedy)

#२६. सौंफ और अजवाइन मिश्रित पानी
१ कप पानी को १ छोटे चम्मच सौंफ और चुटकी भर अजवाइन के साथ उबालें। ठंडा करें, छानें और अपने बच्चे को पिलाएं।
इसकी खुराक है दिन और रात में २ छोटे चम्मच।

९ महीने से बड़े बच्चे

नंबर २५ तक उपरोक्त सभी विधियों को ९ महीने और इससे ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित भी उपयोगी हो सकते हैं।

#२७. भिंडी का सूप

जी हाँ! कोमल भिंडी बच्चे की सर्दी-खांसी दूर करने में मदद कर सकती है।
सामग्रियां:
भिंडी – १ कटी हुई
पानी – १ कप
अच्छी तरह से कटी हुई भिंडी को पानी के साथ १० मिनट के लिए उबालें। छानकर, ठंडा करें और इसे सूप के रूप में दें।

#२८. गर्म पानी में गुड़, जीरा और काली मिर्च

बच्चे को सर्दी, खांसी और गले में खराश होने पर यह मिश्रण प्रभावकारी होता है। इसे दिन में एक बार १-२ चम्मच से ज्यादा ना दें क्योंकि गुड़ की तासीर गर्म होती है।
गुड़ पाउडर – १ से २ छोटा चम्मच
जीरा – चुटकी भर
काली मिर्च – १ या २
पानी – १ कप
सभी सामग्रियों को १० मिनट के लिए पानी में उबालें। छाने, ठंडा करें और अपने बच्चे को दें।
#२९. नारियल तेल की मालिश 

१/२ कप नारियल तेल को १ छोटे प्याज, २ से ३ तुलसी के पत्तों और १ पान के तने के साथ गर्म करें। आंच बंद करने के बाद इसमें चुटकी भर कपूर डालें। इस तेल को बच्चे की छाती, गर्दन, पीठ और कांख में लगायें।
ध्यान दें: कपूर की मात्रा ज्यादा ना करें क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से तेज और तीखा होता है।
#३०. कपूर मिश्रित नारियल तेल की मालिश

नारियल तेल गर्म करें। तेल को स्टोव से उतारने के बाद इसमें चुटकी भर कपूर डालें। इसे अपने बच्चे की मालिश करने के लिए प्रयोग करें।
आप दुकान में मिलने वाले कर्पूरादी थैलम का प्रयोग भी कर सकती हैं।

१ वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे

एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए आप ऊपर दिए गए उपचारों का प्रयोग कर सकती हैं। इसके अलावा आप निम्नलिखित उपचारों का भी प्रयोग कर सकती हैं।

#३१. शहद

क्या आपका बच्चा लगातार होने वाली खांसी की वजह से रात में बार-बार उठता है और चैन की नींद नहीं ले पाता है। उसे १ छोटा चम्मच सादा शहद चटायें। यह उसके गले को आराम देने में मदद करता है।

#३२. सफेद प्याज़ का रस

अप्रैल-मई के महीने के दौरान उत्तर भारत में उगने वाले सफेद प्याज़ को ‘सफेद कांदा’ भी कहते हैं। इसे अपने औषधीय फायदों के लिए जाना जाता है।
सफेद प्याज़ का रस निकालें और अपने बच्चे को १ चम्मच पिलाएं। यह सर्दी, खांसी और बंद नाक से राहत देने में सहायता करता है।

#३३. अदरक और शहद

अदरक रेतें और इसमें शहद मिलाएं। इसका एक छोटा चम्मच नियमित अंतरालों पर दिया जा सकता है। यह गले, श्वसन नली को आराम पहुंचाता है और खांसी में राहत देता है।

#३४. नींबू का रस और शहद

नींबू का रस और शहद मिलाएं। इसमें थोड़ा गर्म पानी मिलाएं और इसे अपने बच्चे को पीने के लिए दें।
यह एक अन्य पसंदीदा उपचार है क्योंकि बच्चे दवा खाने में मुंह बना सकते हैं, लेकिन जब स्वादिष्ट पेय पदार्थों की बात आती है तो वे मना नहीं कर सकते हैं। इसलिए यह एक ऐसा उपचार है जिसके लिए किसी विरोध का सामना नहीं करना पड़ता है, क्योंकि यह बिल्कुल भी दवा जैसा नहीं लगता है।
माएं भी शिकायत नहीं करती हैं क्योंकि यह सर्दी-खांसी दूर करने में उनकी सहायता करता है, उन्हें हाइड्रेट रखता है और साथ ही ऊर्जा भी प्रदान करता है।

#३५. हल्दी दूध

हल्दी के साथ मिले हुए दूध को ‘हल्दी दूध’ के रूप में भी जाना जाता है, जिससे हममें से ज्यादातर लोग परिचित हैं। यह लोकप्रिय उपचार है और सूखी खांसी के लिए बहुत प्रभावशाली होता है। इसे एक गिलास दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर उबाल कर तैयार किया जाता है।
हल्दी को इसके चिकित्सीय गुणों के लिए जाना जाता है और यह बीमारी से लड़ने में और तेजी से आराम पहुंचाने में सहायता करता है। गर्म दूध आपके बच्चे को अच्छी और आरामदायक नींद प्रदान करने में भी सहायता करता है।

#३६. अदरक कॉफ़ी

यह जादू की तरह काम करता है।
मुझे पता है आप क्या सोच रही हैं, छोटे बच्चों के लिए कॉफ़ी? हालाँकि इसे कॉफ़ी कहा जाता है, लेकिन आप इसे बिना कॉफ़ी पाउडर के भी बना सकती हैं।
सामग्री:
अदरक के टुकड़े – २
तुलसी के पत्ते – २
कालीमिर्च – २
इलायची – २
लौंग – २
गुड़ या गुड़ का पाउडर – १ बड़ा चम्मच
पानी – १ कप
विधि:
ऊपर दी गयी सभी सामग्रियों को पानी के साथ उबालें। छान लें और सर्दी-खांसी में तेजी से राहत पाने के लिए यह मिश्रण दें। यह थोड़ा तीक्ष्ण लग सकता है, लेकिन भयानक सर्दी-जुकाम में भी यह बहुत ज्यादा प्रभावकारी होता है।
इस पेय पदार्थ की प्रत्येक सामग्री को सर्दी-खांसी से लड़ने की अपनी क्षमताओं के लिए जाना जाता है।
#३७. सोंठ कॉफ़ी

दक्षिण भारत में सोंठ कॉफ़ी या चुक्कू कॉफ़ी का प्रयोग सर्दी-खांसी के उपचार के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
सामग्री:
सोंठ या चुक्कू – १ इंच टुकड़ा
तुलसी के पत्ते – ६ से ७
काली मिर्च – २
गुड़ – १ भेली
पानी – १ कप
विधि:
सोंठ और कालीमिर्च को दरदरा पीस लें। तुलसी के पत्तों को तोड़कर किनारे रख लें।
गुड़ को पानी से साथ उबालें और इसे घुलने दें। सोंठ और कालीमिर्च डालें और इसके बाद तुलसी के पत्ते डाल दें।
पत्तियां मुरझाने के बाद, गैस बंद कर दें। छान लें और हल्का गर्म करके अपने बच्चे को पिलाएं।

#३८. अदरक और तुलसी मिश्रण

रस निकालने के लिए अदरक और तुलसी दोनों को पीस लें। शहद डालें और इसे अपने बच्चे को दें।

#३९. लौंग शहद मिश्रण

अब यह एक ऐसा उपचार है जो आपको यह सोचने पर मजबूर कर सकता है कि, सर्दी के लिए लौंग? मैं आपको बताती हूँ, यह बहुत उपयोगी होता है! यह कफनाशक है और बलगम से छुटकारा पाने में सहायता करता है। यह खांसी दूर रखने में भी लाभदायक होता है और बच्चे को अच्छी नींद प्रदान करता है।
५ लौंग को सूखा भूनें और ठंडा होने के बाद अच्छी तरह पीस लें। इसमें शहद डालें और सोने से पहले बच्चे को दें।

#४०. तुलसी, अदरक और काली मिर्च

५ तुलसी के पत्तों, १/२ इंच अदरक के टुकड़े और २ काली मिर्चों के साथ १ कप पानी उबालें। छाने, ठंडा करें और अपने बच्चे को पीने के लिए दें।

#४१. लहसुन और शहद का मिश्रण

शहद एक प्रज्वलनरोधी, कीटाणुरोधी और फंगसरोधी सामग्री होती है।
लहसुन की एक छोटी कली लें, इसे पीसें, और थोड़ा शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं। दिन में एक या दो बार इसे दें।
लहसुन में पाया जाने वाला एलिसन सूक्ष्मजीवरोधी, विषाणुरोधी और जीवाणुनाशक होता है। यह बलगम निकालने में और छाती में कफ के जमाव को कम करने में सहायता करता है।
बच्चों को लहसुन का स्वाद अच्छा नहीं लगता है, लेकिन शहद इसे मीठा करके सेवन योग्य बनाने में सहायता करता है। आप उनके भोजन में भी लहसुन डाल सकती हैं।

#४२. पान के पत्तों या वेथिलाई कशयम के साथ उबला पानी

तुलसी के पत्तों, पान के पत्तों, काली मिर्च और अजवाइन के साथ पानी उबालें। ठंडा होने के बाद, छान लें और इसमें शहद मिलाएं।

#४३. जीरा पाउडर मिश्रण

जीरा – १ छोटा चम्मच
मिश्री या कलकंदम – १ या २ टुकड़े
जीरे और मिश्री दोनों को महीन पाउडर में पीस लें। जब भी आपके बच्चे को खांसी आती है तो उसे यह मिश्रण दें।

#४४. सोंठ पाउडर मिश्रण

जीरे, सोंठ और मिश्री को महीन पाउडर के रूप में पीस लें। एक हवाबंद बर्तन में रखें। इसे अपने बच्चे की लगातार होने वाली सर्दी-खांसी के लिए प्रयोग करें।
#४५. शहद और अदरक के साथ उबला पानी

कुछ अदरक के टुकड़ों के साथ पानी गर्म करें। जब यह हल्का गर्म हो जाता है तो इसमें शहद मिलाएं। अपने बच्चे को यह पानी पीने के लिए दें। (This is home made baby cough syrup)

#४६. दालचीनी और शहद

एक छोटा चम्मच शहद लें और इसमें चुटकी भर दालचीनी पाउडर मिलाएं। अपने बच्चे को सर्दी-खांसी होने पर यह मिश्रण प्रदान करें।

#४७. अदथोडा कशयम या काढ़ा

अदथोडा या अदुलज़ा एक औषधीय पौधा होता है जिसे सिद्धा चिकित्सा में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। गुड़ या शहद के साथ अदुलज़ा के पत्तों का काढ़ा बनाएं।
#४८. काली मिर्च के साथ घी

एक चम्मच घी लें और इसमें चुटकीभर ताज़ा कूटा हुआ काली मिर्च का पाउडर डालें। यह स्वादिष्ट होता है, और सर्दी-खांसी में निश्चित रूप से आराम पहुंचाता है।

#४९. कचिया ऐना

सर्दी-खांसी के दौरान प्रयोग किया जाने वाला कचिया ऐना या गर्म केश तेल, प्राकृतिक रूप से बच्चे को आराम पहुंचाने में सहायता करता है। इसकी सामग्रियां हैं तुलसी के पत्ते, सैजन के पत्ते, नारियल तेल आदि।

#५०. केसर दूध

बच्चों में सर्दी और खांसी के दौरान केसर दूध बहुत अच्छा होता है।
१ कप उबले हुए दूध में केसर के कुछ धागे मिलाएं। इसे ठंडा होने दें, छानकर केसर के धागों को निकाल दें और सोने से पहले इसे अपने बच्चे को पीने के लिए दें।

#५१. नींबू, दालचीनी और शहद मिश्रण

नींबू के रस, दालचीनी पाउडर और शहद का मिश्रण तैयार करें। यह सर्दी और खांसी के वायरस से लड़ने के लिए बहुत अच्छा होता है।

ध्यान रखने योग्य चीजें:

आपको कब चिंतित होना चाहिए?

यदि आपके बच्चे की सर्दी-खांसी २ सप्ताह या इससे अधिक समय तक बनी रहती है तो कृपया तुरंत अपने बालरोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। संभवतः, यह केवल साधारण सर्दी-खांसी ना हो। यह गंभीर संक्रमण हो सकता है जिसके लिए डॉक्टर के हस्तक्षेप की जरुरत होती है।

कृपया किसी भी ऐसे घरेलु उपचार का प्रयोग ना करें जिसमें ६ महीने से छोटे बच्चों के लिए किसी प्रकार के तेल/औषधि/दवाओं का सेवन शामिल होता है। ये उसे लाभ पहुंचाने से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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