दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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शुक्रवार, दिसंबर 25, 2015

BENEFITS OF TULSI

वरदान है तुलसी : इस दिव्य पौधे के फायदे अनगिनत हैं : राज BENEFITS OF TULSI !!

 

ज्यादातर हिंदू परिवारों में तुलसी की पूजा की जाती है. इसे सुख और कल्याण के तौर पर देखा जाता है लेकिन पौराणिक महत्व से अलग तुलसी एक जानी-मानी औषधि भी है, जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है. सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी और भयंकर बीमारियों में भी एक कारगर औषधि है. भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है और इस पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है। ऎसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पसंद नहीं करते। माना जाता है कि घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा कलह और दरिद्रता दूर करता है। इसे घर के आंगन में स्थापित कर सारा परिवार सुबह-सवेरे इसकी पूजा-अर्चना करता है। यह मन और तन दोनों को स्वच्छ करती है। इसके गुणों के कारण इसे पूजनीय मानकर उसे देवी का दर्जा दिया जाता है। तुलसी केवल हमारी आस्था का प्रतीक भर नहीं है। इस पौधे में पाए जाने वाले औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी तुलसी को महत्वपूर्ण माना गया है। भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है।

* लिवर (यकृत) संबंधी समस्या: तुलसी की 10-12 पत्तियों को गर्म पानी से धोकर रोज सुबह खाएं। लिवर की समस्याओं में यह बहुत फायदेमंद है।

* पेटदर्द होना: एक चम्मच तुलसी की पिसी हुई पत्तियों को पानी के साथ मिलाकर गाढा पेस्ट बना लें। पेटदर्द होने पर इस लेप को नाभि और पेट के आस-पास लगाने से आराम मिलता है।

* पाचन संबंधी समस्या : पाचन संबंधी समस्याओं जैसे दस्त लगना, पेट में गैस बनना आदि होने पर एक ग्लास पानी में 10-15 तुलसी की पत्तियां डालकर उबालें और काढा बना लें। इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीएं।

* बुखार आने पर : दो कप पानी में एक चम्मच तुलसी की पत्तियों का पाउडर और एक चम्मच इलायची पाउडर मिलाकर उबालें और काढा बना लें। दिन में दो से तीन बार यह काढा पीएं। स्वाद के लिए चाहें तो इसमें दूध और चीनी भी मिला सकते हैं।

* खांसी-जुकाम : करीब सभी कफ सीरप को बनाने में तुलसी का इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी की पत्तियां कफ साफ करने में मदद करती हैं। तुलसी की कोमल पत्तियों को थोडी- थोडी देर पर अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत मिलती है। चाय की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है। इस पानी को आप गरारा करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

* सर्दी से बचाव : बारिश या ठंड के मौसम में सर्दी से बचाव के लिए तुलसी की लगभग 10-12 पत्तियों को एक कप दूध में उबालकर पीएं। सर्दी की दवा के साथ-साथ यह एक न्यूट्रिटिव ड्रिंक के रूप में भी काम करता है। सर्दी जुकाम होने पर तुलसी की पत्तियों को चाय में उबालकर पीने से राहत मिलती है। तुलसी का अर्क तेज बुखार को कम करने में भी कारगर साबित होता है।

* श्वास की समस्या : श्वास संबंधी समस्याओं का उपचार करने में तुलसी खासी उपयोगी साबित होती है। शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है। नमक, लौंग और तुलसी के पत्तों से बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा (एक तरह का बुखार) में फौरन राहत देता है।

* गुर्दे की पथरी : तुलसी गुर्दे को मजबूत बनाती है। यदि किसी के गुर्दे में पथरी हो गई हो तो उसे शहद में मिलाकर तुलसी के अर्क का नियमित सेवन करना चाहिए। छह महीने में फर्क दिखेगा।

* हृदय रोग : तुलसी खून में कोलेस्ट्राल के स्तर को घटाती है। ऐसे में हृदय रोगियों के लिए यह खासी कारगर साबित होती है।

* तनाव : तुलसी की पत्तियों में तनाव रोधीगुण भी पाए जाते हैं। तनाव को खुद से दूर रखने के लिए कोई भी व्यक्ति तुलसी के 12 पत्तों का रोज दो बार सेवन कर सकता है।

* मुंह का संक्रमण : अल्सर और मुंह के अन्य संक्रमण में तुलसी की पत्तियां फायदेमंद साबित होती हैं। रोजाना तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है।

* त्वचा रोग : दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है। नैचुरोपैथों द्वारा ल्यूकोडर्मा का इलाज करने में तुलसी के पत्तों को सफलता पूर्वक इस्तेमाल किया गया है। तुलसी की ताजा पत्तियों को संक्रमित त्वचा पर रगडे। इससे इंफेक्शन ज्यादा नहीं फैल पाता।

* सांसों की दुर्गध : तुलसी की सूखी पत्तियों को सरसों के तेल में मिलाकर दांत साफ करने से सांसों की दुर्गध चली जाती है। पायरिया जैसी समस्या में भी यह खासा कारगर साबित होती है।

* सिर का दर्द : सिर के दर्द में तुलसी एक बढि़या दवा के तौर पर काम करती है। तुलसी का काढ़ा पीने से सिर के दर्द में आराम मिलता है।

* आंखों की समस्या : आंखों की जलन में तुलसी का अर्क बहुत कारगर साबित होता है। रात में रोजाना श्यामा तुलसी के अर्क को दो बूंद आंखों में डालना चाहिए।

* कान में दर्द : तुलसी के पत्तों को सरसों के तेल में भून लें और लहसुन का रस मिलाकर कान में डाल लें। दर्द में आराम मिलेगा।

* ब्लड-प्रेशर को सामान्य रखने के लिए तुलसी के पत्तों का सेवन करना चाहिए।

* तुलसी के पांच पत्ते और दो काली मिर्च मिलाकर खाने से वात रोग दूर हो जाता है।

* कैंसर रोग में तुलसी के पत्ते चबाकर ऊपर से पानी पीने से काफी लाभ मिलता है।

* तुलसी तथा पान के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर देने से बच्चों के पेट फूलने का रोग समाप्त हो जाता है।

* तुलसी का तेल विटामिन सी, कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर होता है।

* तुलसी का तेल मक्खी- मच्छरों को भी दूर रखता है।

* बदलते मौसम में चाय बनाते हुए हमेशा तुलसी की कुछ पत्तियां डाल दें। वायरल से बचाव रहेगा।

* शहद में तुलसी की पत्तियों के रस को मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है।

* तुलसी के बीज का चूर्ण दही के साथ लेने से खूनी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।

* तुलसी के बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में वृध्दि होती है।

रोज सुबह तुलसी की पत्तियों के रस को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीने से स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। तुलसी की केवल पत्तियां ही लाभकारी नहीं होती। तुलसी के पौधे पर लगने वाले फल जिन्हें आमतौर पर मंजर कहते हैं, पत्तियों की तुलना में कहीं अघिक फायदेमंद होता है। विभिन्न रोगों में दवा और काढे के रूप में तुलसी की पत्तियों की जगह मंजर का उपयोग भी किया जा सकता है। इससे कफ द्वारा पैदा होने वाले रोगों से बचाने वाला और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला माना गया है। 

किंतु जब भी तुलसी के पत्ते मुंह में रखें, उन्हें दांतों से न चबाकर सीधे ही निगल लें। इसके पीछे का विज्ञान यह है कि तुलसी के पत्तों में धातु के अंश होते हैं। जो चबाने पर बाहर निकलकर दांतों की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे दंत और मुख रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

तुलसी का पौधा मलेरिया के कीटाणु नष्ट करता है। नई खोज से पता चला है इसमें कीनोल, एस्कार्बिक एसिड, केरोटिन और एल्केलाइड होते हैं। तुलसी पत्र मिला हुआ पानी पीने से कई रोग दूर हो जाते हैं। इसीलिए चरणामृत में तुलसी का पत्ता डाला जाता है। तुलसी के स्पर्श से भी रोग दूर होते हैं। तुलसी पर किए गए प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि रक्तचाप और पाचनतंत्र के नियमन में तथा मानसिक रोगों में यह लाभकारी है। इससे रक्तकणों की वृद्धि होती है। तुलसी ब्रह्मचर्य की रक्षा करने एवं यह त्रिदोषनाशक है।

आयुर्वेद में तुलसी के पौधे के हर भाग को स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद बताया गया है. तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना-अपना महत्व है. आमतौर पर घरों में दो तरह की तुलसी देखने को मिलती है. एक जिसकी पत्त‍ियों का रंग थोड़ा गहरा होता है औ दूसरा जिसकी पत्तियों का रंग हल्का होता है.

यौन-रोगों की दवाइयां बनाने में तुलसी खास तौर पर इस्तेमाल की जाती है. तुलसी के कुछ अनदेखे फायदे इस प्रकार हैं: 

1. यौन रोगों के इलाज में
पुरुषों में शारीरिक कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. इसके अलावा यौन-दुर्बलता और नपुंसकता में भी इसके बीज का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद रहता है.

2. अनियमित पीरियड्स की समस्या में
अक्सर महिलाओं को पीरियड्स में अनियमितता की शिकायत हो जाती है. ऐसे में तुलसी के बीज का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है. मासिक चक्र की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों का भी नियमित किया जा सकता है.

3. सर्दी में खास
अगर आपको सर्दी या फिर हल्का बुखार है तो मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से पकाकर उसका काढ़ा पीने से फायदा होता है. आप चाहें तो इसकी गोलियां बनाकर भी खा सकते हैं.

4. दस्त होने पर
अगर आप दस्त से परेशान हैं तो तुलसी के पत्तों का इलाज आपको फायदा देगा. तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाकर पीस लें. इसके बाद उसे दिन में 3-4 बार चाटते रहें. ऐसा करने से दस्त रुक जाती है.

5. सांस की दुर्गंध दूर करने के लिए
सांस की दु्र्गंध को दूर करने में भी तुलसी के पत्ते काफी फायदेमंद होते हैं और नेचुरल होने की वजह से इसका कोई साइडइफेक्ट भी नहीं होता है. अगर आपके मुंह से बदबू आ रही हो तो तुलसी के कुछ पत्तों को चबा लें. ऐसा करने से दुर्गंध चली जाती है.

6. चोट लग जाने पर
अगर आपको कहीं चोट लग गई हो तो तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है. तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो घाव को पकने नहीं देता है. इसके अलावा तुलसी के पत्ते को तेल में मिलाकर लगाने से जलन भी कम होती है.

7. चेहरे की चमक के लिए
त्वचा संबंधी रोगों में तुलसी खासकर फायदेमंद है. इसके इस्तेमाल से कील-मुहांसे खत्म हो जाते हैं और चेहरा साफ होता है.

8. कैंसर के इलाज में 
कई शोधों में तुलसी के बीज को कैंसर के इलाज में भी कारगर बताया गया है . हालांकि अभी तक इसकी पुष्ट‍ि नहीं हुई है.

सोमवार, अप्रैल 20, 2015

घर के छतों पर लगाएं निरोगी की खेती

मिलेगी सब्जी और निखरेगा परिवार, जब होगा घर पर ऐसा पैदावार

सौंफ, मेथी, धनिया, तुलसी, पुदीना आदि की भारतीय रसोई में खास जगह रही है। कैसा हो अगर आप राजेश मिश्रा के कहे अनुसार अपनी छत, बरामदे व गमलों में भी इन्हें जगह देकर अपना खुद का गार्डन तैयार करें और ताजी हरी सब्जियों व औषधीय पौधों को अपने और परिवार की सेहत के लिए इस्तेमाल में लाएं। मैं भी जब गाँव में रहता था तो अपने बड़े भाईजी तारकेश्वर मिश्रजी के साथ अपने पैतृक निवास भेल्दी (जिला-छपरा, बिहार) में उगाया करता था... कच्चे सब्जियों को खेतों से तोड़कर खाने का मजा ही कुछ और होता है... यह करना बहुत मुश्किल भी नहीं है, आइये जानें..

मैंने कोलकाता और कई अन्य राज्यों में गया जहाँ मैंने लोगों को अपने छतों और आसपास के जगहों में तुलसी व धनिए जैसे औषधीय गुणों से युक्त पौधे लगाते देखा। चाहें तो आप भी इस तरह के पौधों को अपनी जरूरत के अनुरूप लगा सकते हैं। इस तरह ये चीजें व्यावसायिक फसलों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों से भी मुक्त रहेंगी। ‘औषधियों को जितना ताजा इस्तेमाल में लाया जाए, उतना बेहतर। फसल के रूप में कटाई होने और सेवन में देरी होने पर उनके पोषक तत्वों में कमी आती रहती है। इन पौधों में विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट व फाइटोन्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। शोध कहते हैं कि इन औषधियों का नियमित उपभोग संक्रमण, सूजन, जलन, मोटापे व जोड़ों के दर्द में राहत पहुंचाता है।
‘सबसे अच्छी बात है कि ऐसे पौधों को अधिक रख-रखाव की जरूरत नहीं होती। कम समय में भी इनकी देखभाल की जा सकती है। इन्हें जरूरत है तो बस थोड़ी सी धूप, पानी, रोशनी, हल्की मिट्टी और पत्तियों की खाद की। इनमें से कुछ पौधों को आप कांच की बोतल या छोटे गमलों में भी लगा सकते हैं।’ दो सप्ताह की अवधि के युवा पौधे यानी माइक्रोग्रीन, खासतौर पर फ्लेवर और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। माइक्रोग्रीन पौधों की उस अवस्था को कहते हैं, जब पौधों में शुरुआती पत्तियां आती हैं। माइक्रोग्रीन को आप साल भर उगा सकते हैं और ये 7 से 10 दिन में तैयार भी हो जाते हैं। इन्हें कम पानी की जरूरत होती है।
कैसे कर सकते हैं इन्हें तैयार, आइये जानें..

पुदीना

कैसे उगाएं: पुदीने के एक छोटे से गुच्छे को नीचे से लगभग दो इंच की लंबाई में काट लें। अब निचले हिस्से की पत्तियों को हटा लें और गांठ यानी पत्ती वाली जगह के नीचे से काट लें। अब तने को पानी के गिलास में रख लें। इसे तब तक हवा व रोशनी में रखें, जब तक इनमें जड़ें आने लगें। ऐसा होने में लगभग दो सप्ताह का समय लगता है। जैसे ही जड़ें निकलने लगती हैं, उन्हें लगभग 10 इंच गहरे गमले में रेतीली मिट्टी में बो दें। मिट्टी में नमी बनाए रखें। बहुत अधिक पानी न डालें। इस पौधे को हर रोज 5 से 6 घंटे की सूरज की रोशनी में रखना जरूरी है।

उपयोग करें: पुदीने की सुगंध और फ्लेवर चटनी, शीतल पेय व सलाद में खासे पसंद किए जाते हैं। पुदीने का रस अपाचन और मरोड़ में लाभ पहुंचाता है। 2012 में बायोशिमी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पुदीने में मौजूद एक तत्व प्रोस्टेट कैंसर को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। नई दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट व डायटिक्स सौम्या श्रीवास्तव के अनुसार, ‘पुदीना त्वचा के लिए फायदेमंद है। त्वचा के संक्रमण में भी इससे राहत मिलती है। इसीलिए इसे क्लिंजर व टोनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।’

तुलसी

कैसे उगाएं: तुलसी के बीजों को छोटी सी मटकी में मिट्टी में एक चौथाई इंच गहरे दबा दें। इस मिट्टी में रेत, सामान्य मिट्टी व खाद मिली होनी चाहिए। जब तक बीज फूटने न लगे, तब तक मिट्टी में नमी का बने रहना जरूरी है। इसमें पांच दिन से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। अब जैसे-जैसे दो से तीन पत्तियों के जोड़े बनते रहें, इन्हें 6 से 8 इंच के कंटेनर में बोएं। मिट्टी में नमी बनाए रखें। हर दिन पौधे को एक से दो घंटे की धूप दें।

उपयोग में लाएं: आयुर्वेदिक दवाओं में तुलसी का काफी इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुरता होती है। साथ ही इससे रक्त में ग्लूकोज व शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है। उबलते हुए पानी में तुलसी की तीन से चार पत्तियां डाल कर इसकी भाप भी ले सकते हैं, जिससे श्वसन संबंधी संक्रमण को दूर करने में मदद मिलती है। तुलसी के रस का घर में छिड़काव करने से मक्खी व मच्छर दूर रहते हैं। ब्रिटेन में वर्ष 2009 में ब्रिटिश फार्मास्युटिकल कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए एक अध्ययन के अनुसार तुलसी से सूजन व जलन को 73% तक कम किया जा सकता है।

लेमनग्रास

कैसे उगाएं: लेमनग्रास के डंठल को जार में एक इंच पानी डाल कर रखें। दो-तीन दिनों के भीतर जड़ों में स्प्राउट्स निकलेंगे। इन्हें हल्की मिट्टी में दबा दें। इनमें खूब पानी दें, पर मिट्टी पूरी तरह पानी में डूबी नहीं होनी चाहिए।
उपयोग में लाएं: थाई और वियतनामी व्यंजनों में इस फ्लेवर का काफी इस्तेमाल किया जाता है। अनीता अग्रवाल के अनुसार, ‘ऐसे लोग जिन्हें कब्ज रहता है, वे चाय में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।’ लेमनग्रास की चाय पाचक ग्रंथि की सफाई करती है, जिससे मधुमेह होने की स्थिति में रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। वर्ष 2011 में प्रकाशित जर्नल ऑफ एथनोफार्मेकोलॉजी के अनुसार लेमनग्रास से तनाव को कम करने में भी मदद मिलती है।

मेथी

कैसे उगाएं: छोटे पौधे के रूप में इसे उगाने के लिए केवल पांच से छह दिन का समय लगता है। इसके बीजों को रुई और ऊन के गोले में फैला कर इन्हें रोशनी में रखें, पर सीधे सूरज की धूप इन पर नहीं पड़नी चाहिए। पानी सूखने के बाद ही इन पर पानी का छिड़काव करें।

उपयोग में लाएं: मेथी से ग्लिसमिक इंडेक्स काबू में रहता है और यह सूजन व जलन को भी कम करता है। ग्लिसमिक इंडेक्स भोजन में मौजूद विभिन्न तरह के काबरेहाइड्रेट के रक्त शर्करा पर होने वाले असर का मापक है। सरसों और मेथी को पीस कर पट्टी पर इसका लेप करके आर्थराइटिस में दर्द वाले जोड़ पर लगाने से आराम मिलता है। श्रीवास्तव कहते हैं, ‘प्रसव के बाद महिलाओं के लिए मेथी का सेवन जरूरी बताया जाता है। इसमें मौजूद डायोज्गेनिन माताओं में अधिक दूध बनाता है। जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार मेथी की हर्बल चाय पीने से मांओं में अधिक दूध बनता है। कढ़ी, दाल, परांठा आदि भारतीय व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया ही जाता है।’

सरसों

कैसे उगाएं: मेथी की तरह ही समान प्रकिया सरसों के लिए अपनाएं।
उपयोग में लाएं: आशुतोष गुलेरी के अनुसार, ‘सरसों की पत्तियों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स, विटामिन, मिनरल व फाइबर प्रचुरता में होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं। सरसों के स्प्राउट्स का सेवन ऑस्टिओपरोसिस और एनीमिया में राहत पहुंचाता है। इसके अलावा हृदय रोगों, अस्थमा, आंत व प्रोस्टेट कैंसर में भी राहत मिलती है।’ श्रीवास्तव के अनुसार, ‘एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुरता के साथ सरसों बुढ़ापे की प्रक्रिया को भी धीमा करती है। जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार इससे एल्जाइमर्स रोग होने की आशंका भी कम हो जाती है।
गुलेरी यह भी कहते हैं, ‘हाइपरटेंशन के मरीजों को इसका इस्तेमाल ध्यानपूर्वक करना चाहिए। सरसों का अधिक और बार-बार इस्तेमाल रक्त के दबाव को बढ़ा देता है।’

सौंफ

कैसे उगाएं: बीजों को दस इंच गहरे गमले में मिट्टी में दबाएं। इस गमले को पॉलीथीन से ढंक दें। जैसे ही अंकुरण होने लगे, गमले को रोशनी में रख दें। पानी का छिड़काव मिट्टी सूखने पर ही करें।
उपयोग में लाएं: सौंफ में मौजूद आयरन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। आशुतोष कहते हैं, ‘सौंफ हाजमे को दुरुस्त रखती है, जिससे अतिरिक्त वायु और तरल बाहर निकलते हैं। पाचन दुरुस्त रखने वाले इन्जाइम्स बाहर निकलते हैं। इससे पीरियड सिस्टम ठीक होता है।

धनिया

कैसे उगाएं: सौंफ की तरह ही यही प्रक्रिया धनिये के साथ अपनाएं।
उपयोग में लाएं: धनिये को शीतल गुणों के कारण जाना जाता है। यह मधुमेह में भी लाभकारी है और कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, ‘धनिये के एंटीसेप्टिक गुण मुंह के छाले व अल्सर में फायदा पहुंचाते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स आंखों के लिए लाभकारी हैं।’ इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार रूमेटॉयड आर्थराइटिस के लिए उपयोगी सूजन को भी कम रखने में यह असरकारी है। ताजगी से भरपूर यह औषधि चीजों के फ्लेवर को भी बढ़ा देती है। आप इसे किसी भी सब्जी, सूप, दही, चावल में इस्तेमाल कर सकते हैं।