दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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शनिवार, अक्टूबर 03, 2015

रात में 8 घंटे की नींद रोज लेनी चाहिये

नींद से कंजूसी गंभीर परिणाम

नींद से कंजूसी करने से मोटापा, इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर, दिल की बीमारी, मधुमेह, स्‍ट्रोक, हाइ बीपी, सिरदर्द, उम्र कम हो सकती है : राजेश मिश्रा

इन दिनों रात को देर से सोना मानों एक फैशन सा हो गया है। आप रात से सुबह तक पार्टी करते हैं और फिर हल्‍की सी नींद ले कर दूसरे दिन सुबह ऑफिस पहुंच जाते हैं। आज कल यही लाइफस्‍टाइल पूरे देश के युवाओं में फैली हुई है। कभी कभी ऑफिस का भारी काम पड़ने पर भी रात को नींद पूरी नहीं हो पाती। रात में 6 घंटों की नींद पूरी करना हर शरीर के लिये आवश्‍यक है। नियम के अनुसार आपको रात में 8 घंटे की नींद रोज लेनी चाहिये।



जी हां! वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि अगर किसी वजह से रात की नींद ना ले पाएं हो तो ये सीधा आपके जीन पर असर डालता है। ये शरीर की जैविक घड़ी को नियंत्रित करने वाले जीन को प्रभावित करता है जिससे जीन को नुकसान पहुंचेगा। 

पहले भी नींद की कमी से होने वाले घातक परिणामों का पता कई शोधों से मिला है। नींद की कमी आपके मैटाबॉलिजम पर उलटा असर डालती है। साथ ही अगर आप मोटे हो रहें हो तो आपको सोने और जागने के समय पर ध्यान देना होगा। यहां तक की कम नींद लेने से टाइप 2 डायबटीज का भी खतरा मंडराता रहता है।
अब शोध से पता चला है कि शरीर की जैविक घड़ी को नियंत्रित करने वाले जींस नींद ना लेने की वजह से घट जाते हैं। जिसकी वजह से जींस को नियंत्रित करने वाले डीएनए अणु तेजी से बढ़ते हैं। 

डीएनए अणुओं के बढ़ने से जींस के खुलने और बंद होने का खतरा दोगुना हो जाता है। इसके अलावा एक हफ्ते से ज्यादा यदि सोनें में दिक्कत है तो ये 700 से ज्यादा जींस को प्रभावित करेगा जिसमें इम्यून सिस्टम, तनाव सभी कुछ आता है। इसलिए जरुरी है की आप अपनी नींद का बेहतर ख्याल रखें। 

अगर आप रात को देर से सोएंगे और दिन में जल्‍दी उठेगें तो आपके दिमाग को इसका खामियाजा भुगतना पडे़गा। इससे आपके शरीर में कई सारी बीमारियां भी पैदा हो सकती हैं। तो चलिये जानते हैं कि रात को देर से सोने पर हमारे शरीर पर क्‍या-क्‍या बुरे प्रभाव पड़ते हैं। 

मोटापा बढता है

मोटापा तभी बढता है जब आप अपनी नींद को पूरा नहीं करते। अगर आप रात में 6 घंटे की नींद पूरी नहीं करेगें तो आपका फैट मैटोबॉलिज्‍म बढ जाएगा।

इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर बनता है

रात को जगने से आपकी वाइट ब्‍लड सेल्‍स खराब हो जाती हैं जो कि आपके शरीर को इम्‍यूनिटी प्रदान करते हैं।

दिल की बीमारी

रात को देर से सोने पर दिल कमजोर बनता है।

मधुमेह

रात को देर से सोने से शरीर का होर्मोन इंबैलेंस हो जाता है। शुगर बढने लगती है और आप मधुमेह के रोगी बन सकते हैं।

स्‍ट्रोक

कई लोगों को रात में देर से सो कर जल्‍दी उठना पड़ता है, जिससे उन्‍हें कम नींद मिलती है। इससे दिल पर प्रेशर आता है और कार्डियेक अरस्‍ट का खतरा बढ जाता है।

हाइ बीपी

अगर आपको पूरी नींद नहीं मिलेगी तो आप स्‍ट्रेस में आ जाएंगे और हमेशा स्‍ट्रेस में रहने से आकपा बीपी बढ सकता है।

सिरदर्द

रात को देर से सोना और सुबह जल्‍दी उठना आपके दिमाग को ब्रेन हैमरेज तक की कगार पर पहुंचा सकता है।

उम्र का कम होना

अगर आप एक स्‍वस्‍थ लाइफस्‍टाइल नहीं अपना रहे हैं तो निश्‍चित ही आकी उम्र के दिल कम हो सकते हैं। रात को देर से सोने आपकी उम्र कम हो सकती है।

मंगलवार, अप्रैल 14, 2015

कोलेस्ट्रोल कम ऐसे करें

कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने वाले फूड
कोलेस्ट्रोल, एक ऐसी समस्या है जो अब आम बनती जा रही है। कोलेस्ट्रोल कम करने का अर्थ है हृदय रोग का सही उपचार। हर साल लगभग एक करोड़ लोगों की मृत्यु ह्रदय रोगों से होती है। इस बेहिसाब मृत्युदर की वजह है शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा का सामान्य से बहुत अधिक होना। आज की थकाऊ जीवनशैली एक तो कसरत करने का समय नहीं है वहीं दूसरी और जंक फ़ूड की बहुलता है, उस पर से अनियमित निद्रा समस्या को और गंभीर कर देती है। इस मेगा-गाइड में, हम आपको वह सब कुछ बताएंगे जिसे आजमाकर आप अपने कोलेस्ट्रोल लेवल को नियंत्रित रख सकते हैं और परिणामस्वरूप ह्रदय रोगों को दूर रख सकते हैं।
सबसे पहले केलोस्ट्रोल और सैच्युरेटेड चिकनाई से भरपूर खाद्द पदार्थ को कम से कम कर देना चाहिए| अंडे, मांस और पनीर में केलोस्ट्रोल अधिक होता है, मक्खन, सूअर का मांस, गाय का मांस, सम्पूर्ण चिकनाई वाला पदार्थ और जानवरों से प्राप्त होने वाले सभी खाद्द पदार्थ तथा नारियल के तेल इन सबमे सैच्युरेटेड फेट बहुत अधिक होता है| इनकी जगह सोयाबीन और सरसों के तेल जैसे पॉली अन्सैच्युरेटेड चिकनाई वाले खाद पदार्थ भोजन में शामिल किये जाने चाहिए इनके अलावा मूंगफली का तेल और जैतून के तेल में भी अन्सेच्युरेटेड चिकनाई होती है जो कि एल डी एल कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करती है|
कोलेस्ट्रोल को कम करने के कुछ घरेलू उपचार यहाँ दिए जा रहे हैं-
  • कच्ची लहसुन रोज सुबह खाली पेट खाने से कोलेस्ट्रोल कम होता है।
  • रोज 50 ग्राम कच्चा ग्वारपाठा खाली पेट खाने से खून में कोलेस्ट्रोल कम हो जाता है।
  • अंकुरित दालें भी खानी आरंभ करें।
  • सोयाबीन का तेल अवश्य प्रयोग करें यह भी उपचार है।
  • लहसुन, प्याज, इसके रस उपयोगी हैं।
  • नींबू, आंवला जैसे भी ठीक लगे, प्रतिदिन लें।
  • शराब या कोई नशा मत करें, बचें।
  • इसबगोल के बीजों का तेल आधा चम्मच दिन में दो बार।
  • दूध पीते हैं तो उसमे जरा सी दालचीनी) डाल दो, कोलेस्ट्रोल कण्ट्रोल होगा।
  • रात के समय धनिया के दो चम्मच एक गिलास पानी में भिगो दें। प्रात: हिलाकर पानी पी लें। धनिया भी चबाकर निगल जाएं।
  • भोजन में रेशेदार पदार्थ शामिल करने से भी एलडीएल कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होता है इसलिए रेशे से भरपूर पदार्थ भोजन में शामिल किये जाने चाहिए|
  • लेसिथिन एक चिकनाई वाला पदार्थ होता है| इसके सेवन से एलडीएल कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होता है| वानस्पतिक तेल, अनाज और सोयाबीन तथा unpasteurized दूध लेसिथिन के अच्छे स्त्रौत हैं|
  • लहसुन भी कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है।
  • जिन लोगों के रक्त में केलोस्ट्रोल कि मात्रा अधिक होती है उन्हें प्रतिदिन कम से कम 8 -10 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए|
  • ग्रीन टी भी कोलेस्ट्रोल को कम करती है इसलिए हमें दूध की चाय के बजाय ग्रीन टी पीनी चाहिए।
  • पानी में धनिया के सूखे बीज उबालकर प्रतिदिन पीने से भी रक्त में केलोस्ट्रोल कि मात्रा कम होती है|
  • रोजाना व्यायाम करने से भी केलोस्ट्रोल कम होता है|