दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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शनिवार, अगस्त 05, 2017

36 Health Tips for life : RAJESH MISHRA



स्वस्थ रहने के 36 उपाय
महत्वपूर्ण ध्यान रखने योग्य बातें:

1) हमेशा पानी को घूट-घूट करके चबाते हुए पिये और खाने को इतना चबाये की पानी बन जाये। किसी ऋषि ने कहा है कि "खाने को पियो और पीने को खाओ"

2) खाने के 40 मिनट पहले और 60-90 मिनट के बाद पानी पिये और फ्रीज का ठंडा पानी, बर्फ डाला हुआ पानी जीवन मे कभी भी नही पिये। गुनगुना या मिट्टी के घडे का पानी ही पिये ।
3)सुबह जगने के बाद बिना कुल्ला करे 2 से 3 गिलास पानी सुखआसन मे बैठकर पानी घूटं-घूटं करके पिये यानी उषा पान करे ।
4) खाने के साथ भी कभी पानी न पिये। जरुरत पड़े तो सुबह ताजा फल का रस, दोपहर मे छाछ और रात्रि मे गर्म दूध का उपयोग कर सकते हैं।
5) भोजन हमेशा सुखआसन मे बैठकर करे और ध्यान खाने पर ही रहे, मतलब टेलीविजन देखते, गाने सुनते हुए, पढ़ते हुए, बातचीत करते हुए कभी भी भोजन न करे।

6) हमेशा बैठ कर खाना खाये और पानी पिये। अगर संभव हो तो सुखासन, सिद्धासन मे बैठ कर ही खाना खाये।
7) फ्रीज़ मे रखा हुआ भोजन न करें या उसे साधारण तापमान में आने पर ही खाये दुबारा कभी भी गर्म ना करे ।
8) गूँथ कर रखे हुये आटे की रोटी कभी न खाये, जैसे- कुछ लोग सुबह में ही आटा गूँथ कर रख देते है और शाम को उसी से बनी हुई चपाती खा लेते है जो स्वास्थ के लिए हानिकारक है। ताजा बनाए ताजा खाये।
9) खाना खाने के तुरंत बाद पेशाब जरूर करे ऐसा करने से डायबिटज होने की समभावना कम होती हैं।
10) मौसम पर आने वाले फल, और सब्जियाँ ही उत्तम है इसलिए बिना मौसम वाली सब्जियाँ या फल न खाये।
11) सुबह मे पेट भर भोजन करें। जबकि रात मे बहुत हल्का भोजन करें।
12) रात को खीरा, दही और कोई भी वात उत्पन्न करने वाली चीज न खाये।
13) दही के साथ उड़द की दाल न खाये। जैसे- दही और उड़द की दाल का बना हुआ भल्ला।
14) दूध के साथ नमक या नमक की बनी कोई भी चीज न खाये। क्योंकि ये दोनों एक दूसरे के प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
15) दूध से बनी कोई भी दो चीजे एक साथ न खाये।
16) कोई भी खट्टी चीज दूध के साथ न खाये सिर्फ एक खा सकते है आँवला। खट्टे आम का शेक न पिये केवल मीठे पके हुए आम का ही शेक पीये ।
17) कभी भी घी और शहद का उपयोग एक साथ न करे! क्योंकि दोनों मिलकर विष बनाते है।
18) खाना भूख से कम ही खाये। जीने के लिए खाना खाये न कि खाने के लिए जीये।
19) रिफाइण्ड तेल जहर हैं आप हमेशा कच्ची घाणी का सरसो, तिल या मूगंफली का तेल ही उपयोग करे और जीवन मे हाटॅ टेक व जोडो के दर्द से बचे ।
20) तला, और मसालेयुक्त खाना खाने से बचे। अगर ज्यादा ही मन हो तो सुबह मे खाये रात मे कभी भी नहीं।
21) खाने मे गुड या मिस्री का प्रयोग करें, चीनी के प्रयोग स बचें।
22) नमक का अधिक सेवन न करें। आयोडिन युक्त समुद्री नमक का उपयोग बिल्कुल भी नही करे! सेधां, काला या डली वाला नमक इस्तेमाल करें।
23) मेदा, नमक और चीनी ये तीनों सफ़ेद जहर है इनके प्रयोग से बचें।
24) हमेशा साधारण पानी से नहाएँ और पहले सर पर पानी डाले फिर पेरो पर और अगर गरम से नहाओ तो हमेशा पहले पैरो पर फिर सर पर पानी डालना चाहिये।
25) हमेशा पीठ को सीधी रख कर बेठे।
26) सर्दियों मे होंठ के फटने से बचने के लिए नहाने से पहले नाभि मे सरसों के तेल लगाये । जबरदस्त लाभ मिलता है।
27) शाम के खाने के बाद 2 घंटे तक न सोये। 5 से 10 मिनट वज्रासन मे बैठे 1000 कदम वाक जरूर करें।
28) खाना हमेशा ऐसी जगह पकाया जाये जहां वायु और सूर्य दोनों का स्पर्श खाने को मिल सके।
29) कूकर मे खाना न पकाए बल्कि किसी खुले बर्तन मे बनाए, क्योकि कूकर मे खाना उबलता है और खुले बर्तन के अन्दर खाना पकता हैं इससे खाने प्रोटीन मात्रा 93 प्रतिशत होती है और कूकर मे मात्र 13 प्रतिशत रहती है ।
30) सिल्वर के बर्तनो का प्रयोग खाना बनाने और खाने दोनों के लिए कभी भी न करें!पीतल, कासां, मिट्टी के बर्तन का ही उपयोग करें।
31) खाने को कम से कम 32 बार चबाये।
32) रोज टूथब्रश का प्रयोग न करें इससे मसूड़े कमजोर होते है। दंतमंजन का प्रयोग कर सकते है।
33) अपनी दोनों नासिकाओ मे देशी गाय के घी को हल्का गुनगुना करके 1-1 बुंद रात मे डालने से दिमाग तंदरुस्त रहता है। नजला जुकाम, सिर दर्द, माइगृेन, नींद नहीं आना, तनाव आदि समस्या का समाधान होता हैं
34) हमेशा मीठा, नमकीन से पहले खाना चाहिए ।

35) बार-बार नहीं खाना चाहिये एक बार बैठ कर भरपेट या उससे थोड़ा कम खाना चाहिये।
36) हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिये। नकारात्मक सोचने से भी बीमारियाँ आती है।

गुरुवार, मई 12, 2016

जल्दी वजन बढ़ाने के लिए

कैलोरी और वसायुक्त आहार का करें सेवन

वजन भी एक समस्‍या है चाहे वह ज्‍यादा हो या कम। लेकिन जिनका वजन कम हे वे इसे बढ़ाने के लिए कई प्रकार के जतन करते हैं, कुछ लोग तो जल्दी वजन बढ़ाने के लिए कुछ ऐसे नुस्खे आजमाते हैं जो वजन तो बढ़ाते हैं लेकिन उसका नुकसान शरीर पर होता है।

वजन बढ़ाने के साथ- साथ आप ऐसे टिप्स आजमायें जो आपके शरीर के लिए फायदेमंद हों और आपको फिट रखें। इसके लिए आपको निरंतर कोशिश करते रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो इसका साइड इफेक्ट आपके शरीर पर पड़े। जैसे - फास्ट फूड, जंक फूड और कोलेस्टॉल और वसायुक्त आहार के सेवन से वजन तो बढ़ता है लेकिन इनके कारण कई बीमारियों होने का खतरा भी बढ़ जाता है। आइए हम आपको वजन बढ़ाने के आसान नुस्खों के बारे में बताते हैं।



वजन बढ़ाने के टिप्‍स

  • वजन बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो आपका फिट रहना जरूरी है। आप वजन बढ़ाना चाहते हैं इसका ये अर्थ नहीं कि आप शारीरिक रूप से बिल्कुल भी सक्रिय नहीं होंगे।
  • वजन बढ़ाने के लिए नियमित व्यायाम बहुत जरूरी है, इसके लिए आप फिटनेस सेंटर ज्वॉइन कर सकते हैं।
  • वजन बढ़ाने के लिए सबसे बढ़िया उपाय है आप हाई कैलोरी का खाना खाएं। लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि आप जंकफूड भारी मात्रा में खाने लगे।
  • जंक फूड और फास्ट फूड की तुलना में स्‍वस्‍थ और अधिक कैलोरीयुक्त खाद्य-पदार्थों को प्राथमिकता दीजिए।
  • अगर आप वजन हेल्दी रूप से बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सुबह का नाश्ता हेवी करना होगा। सुबह का नाश्ता करने आप दिनभर ऊर्जावान बने रहते हैं।
  • वजन बढ़ाने के लिए प्रोटीन शेक भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे हड्डियां भी मजबूत होती है।
  • चिकन, चावल, फिश, अंडा इत्यादि भी वज़न बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। इन सभी खाद्य पदार्थों में भारी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है।
  • दूध या दूध से बनी चीजों में भी प्रोटीन पाया जाता है या फिर आप सोया मिल्क या पाउडर के सेवन से भी अपना वजन बढ़ा सकते हैं।
  • अंकुरित अनाज में प्रोटीन अच्छी मात्रा में मौजूद होती है। आप अंकुरित चने, मोंठ इत्यादि के सेवन से अपना वजन बढ़ा सकते हैं।
  • पनीर, मक्खन, घी, तेल, तैलीय भोजन सभी को खाने से मोटापा बढ़ाने में मदद मिलती हैं।
  • वजन बढ़ाने के लिए फुलक्रीम दूध में रात को चने भिगोकर सुबह खाने चाहिए। इस तरह के खाद्य पदार्थों में प्रोटीन अच्छी मात्रा में मौजूद होता है।
  • फलियां, मेवा, बींस इत्यादि में भरपूर प्रोटीन मौजूद होता हैं। इनके सेवन से आप आसानी से अपना वजन बढ़ा सकते हैं।
  • बहुत अधिक तैलीय पदार्थों के सेवन और तरल पदार्थों की कमी से भी वजन बढ़ता है।
  • अधिक वसा इत्यादि का सेवन या फिर अधिक मात्रा में कैलोरी लेना लेकिन उस अनुसार व्यायाम ना करने से भी मोटापा बढ़ता है।

इसके अलावा आप हरी सब्जियां, फल, सूप इत्यादि के सेवन से भी आसानी से अपना वजन बढ़ा सकते हैं। इन टिप्स से आप प्रोटीन की कमी को दूर कर अपना वजन बढ़ा सकते हैं, साथ ही आप अपने भोजन को भी संतुलित रख सकते हैं। वजन बढ़ाने के लिए भोजन का संतुलित होना भी बेहद जरूरी है।

मंगलवार, अगस्त 04, 2015

Gharelu Upchar or Ayurvedik Dohe

आयुर्वेदिक दोहे
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१-एक नंबर

दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

२-दू नंबर -राजेश मिश्रा

बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

३-तीन नंबर
अजवाइन को पीसिये, गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

४- नंबर-राजेश मिश्रा
अजवाइन को पीस लें, नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..

५- नंबर
अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

६- नंबर-राजेश मिश्रा

ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..

७- नंबर
अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..

८- नंबर-राजेश मिश्रा
रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर..

९- नंबर
गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..

१०- नंबर
शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..

११- नंबर-राजेश मिश्रा
चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..

१२- नंबर

लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..

१३- नंबर-राजेश मिश्रा
प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह,
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

१४- नंबर
सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय,
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..

१५- नंबर-राजेश मिश्रा
सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..

१६- नंबर
तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..

१७- नंबर-राजेश मिश्रा
थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.

१८- नंबर-राजेश मिश्रा
अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..

१९- नंबर

ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि..

२०- नंबर-राजेश मिश्रा
दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..

२१- नंबर
मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख, महक दूर होय तत्काल..

२२- नंबर
कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..

२३- नंबर-राजेश मिश्रा

बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

२४- नंबर
बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..

२५- नंबर-राजेश मिश्रा

नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..

२६.- नंबर
मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय,
कंठ सुरीला साथ में, वाणी मधुरिम होय.

२७.- नंबर-राजेश मिश्रा
पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..

२८- नंबर-राजेश मिश्रा
ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम,
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..

२९- नंबर-राजेश मिश्रा
कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

३०- नंबर-राजेश मिश्रा

अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम,
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..

३१- नंबर-राजेश मिश्रा
छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।

ज्यादा से ज्यादा शेयर करे : राजेश मिश्रा और शेयर करनेवाले को आशीर्वाद और दुआ मिलेगी।

रविवार, जुलाई 19, 2015

ये घरेलु नुस्खे हैं बेजोड़ ...राज

होमियो या एलोपैथिक दवा बार-बार लेने से बचें ...!

आज की लाइफस्टाइल और भाग - दौड़ की जिंदगी में आए दिन होने वाली इन तकलीफों में आराम पाने के लिए आजमाएं ये नुस्खे ...
* पीरियड्स का दर्द कुछ कम हो, इसके लिए एक गिलास ठंडे पानी में 2 - 3 नींबू निचोड़ कर पी लें !
* अगर तेज सिरदर्द हो - तो सेब काटकर उसमें थोड़ा सा नमक मिला कर सुबह खाली पेट खाएं - काफी आराम मिलेगा !
* बार - बार पेट फूलता है, तो पानी में 1/4 चम्मच बेकिंग सोडा पानी में मिलाकर पीने से आराम मिलेगा !
* अगर गले की खराश से परेशान हैं, तो 2 - 3 तुलसी की पत्तियों को डालकर पानी में उबाल लें - इस पानी से गरारा करें !
* मुंह के अल्सर में पका केला और शहद मिला कर खाने से काफी आराम मिलता है - इसे मुंह में लगाया भी जा सकता है !
* इसी तरह हाई बी पी का घरेलु इलाज करें - इसके लिए थोड़ा - थोड़ा मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांक लें!
( यह पाउडर डायबिटीज में भी लाभकारी है )
* अस्थमा है, तो आधा चम्मच दालचीनी पाउडर शहद में मिलाकर सोने से पहले खाएं - कुछ दिनों में फर्क महसूस करेंगे !
* कहीं जलन हो रही है या फिर धूप से त्वचा झुलस गई हो - कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है !
तरबूज के छिलके के सफेद भाग में कपूर और चंदन मिलकर लेप करें - जलन से शांति मिलेगी !
* जोड़ों के दर्द मेंं एक गिलास गर्म पानी में नींबू निचोड़कर दिन में 8 से 10 बार पीएं !
* बुखार आने पर अजवाइन चूर्ण आधा चम्मच दिन में तीन बार खाएं - जल्द राहत मिलेगी और बुखार उतर जाएगा !
* सरसों के तेल में 3 - 4 लहसुन की कली डालकर पका लें और ठंडा कर लें - इस तेल से मालिश करने से बदन दर्द में आराम मिलेगा !
* सौंफ और मिश्री का समभाग चूर्ण मिलाकर दो चम्मच दोनों समय भोजन के बाद लेते रहने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है !
* खरबूजे के साथ खरबूजे के बीज भी खाने चाहिए - क्योंकि बीज स्मरण शक्ति बढ़ाने व शरीर का पोषण करने में समर्थ हैं !
* गर्मी से चक्कर आना - उल्टी जैसा बार - बार लगता है, तो एक बर्तन में सौ ग्राम धनिया कूटकर डाल दें - उसमें लगभग आधा किलो पानी डाल दें ! एक घंटे बाद आधा कप पानी छानकर उसमें पांच बताशे डालकर हर तीन घण्टे में पीएं !
* तुलसी के पत्तों के रस में शहद या शक्कर मिला चाटने से चक्कर आना बन्द होता है !
* सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग उबालकर उस पानी को पीने से लाभ मिलता है !

शनिवार, जुलाई 04, 2015

राजेश मिश्रा की जनोपयोगी कुछ आवश्यक बातें

हर मर्ज का उपाय है इस आलेख में

सावन साग न भादौं दही, कुवार दूध न कातिक मही

हाथ जोड़कर आप सभी पाठकों से विनम्र निवेदन है इस आलेख को पुरे दिल से आत्मसात (कंठस्थ/याद) कर लें तो जिंदगी में कभी डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा. साथ ही राजेश मिश्रा द्वारा सुझाये गए इस आलेख से आप आस-पड़ोस और घर के डॉक्टर बन जायेंगे . यह आलेख हज़ारों पाठको से बातचीत और बड़े बुजुर्ग के कथन के साथ-साथ कई संकलन के बाद तैयार की गई है बहुत ही मेंहनत से ये आलेख (लिखी/संकलन से ) तैयार की गई है... पूरा जरूर पढ़ें और अपनों को पढ़ाएं : - राजेश मिश्रा 




आज का विज्ञान, चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी चमत्कारिक प्रयोग करता जा रहा है। छोटे-छोटे उपनगरों में भी बड़े-बड़े नर्सिग होम, डीएम, एमएस और एमडी चिकित्सकों की भरमार हो गई है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या जब ये चिकित्सक नहीं थे तो लोग बीमार होकर मर जाते थे? या आबादी वीरान हो जाया करती थी? बिल्कुल नहीं, लोग आज से ज्यादा स्वस्थ थे। आज भी गांवों में चिकित्सा की कोई बेहतर सुविधा नहीं है फिर भी 90 या 95 वर्ष के वृद्ध खेतों में काम करते हुए मिल जायेंगें। उनके उत्तम सेहत का राज है खान, पान, अनुपात और परम्परागत दिनचर्या। जो पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पूर्वजों द्वारा रटायी जाती रही है। ये सब दोहों, चौपाइयों और कविताओं के रूप में है। जिनके लेखक और रचनाकारों का कुछ अता-पता नहीं है।

इन कविताओं में भारतीय जलवायु, मौसम और परिवेश का ध्यान रखते हुए गहन शोध किया गया है। जो आज पढ़े लिखे समाज में लुप्तप्राय हैं। जिले के प्रख्यात वैद्य रहे स्व.शिवसहाय सिंह अपने शिष्यों व रोगियों को मौसम के निषिद्ध भोजन इस प्रकार समझाते थे- सावन साग न भादो दही, कुवार दूध न कातिक मही। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि मौसम विशेष में शारीरिक रासायनिक क्रियायें बदल जाया करती हैं। जलालपुर के इजरी गांव निवासी रामकुमार वैद्य अपनी कविताओं और गानों में खान-पान की दिनचर्या सुनाया करते थे।

भोजन के बाद की दिनचर्चा-भोजनोपरान्त थोड़ा टहल के बाई ओर करवट लेटना भी लाभकारी है। बासी भोजन खाना, हर हाल हानिकारक कहा, खाके तेज चलना या दौड़ना दुखारी है। किस भोजन के बाद कौन सा आहार स्वीकार है। कौन विष के समान है इसकी लम्बी फेहरिस्त है। -

  • पक्का कटहल खायके फिर लो पान चबाय, पेट फुलै सांसा रुके और तुरन्त मरिजाय।
  • जिस तेल में तली गई हो मछली उसी में, सिद्ध हुई पीपल जहर के समान है।
  • मधु की समान मात्रा घी या व्योम-जल संग, खाने वाले को ढकेल देता श्मशान है।
  • मधु या मकोय भी है एक साथ विष सम, प्रान हरने का यह करक प्रधान है

दूध के साथ इन फलों का सेवन निषिद्ध है-आम, आमड़ा, करौंदा, केला, नीबू, कागजी और नीबू जम्म्बूरी, वहेरी, बेर, कैंथ खाता है कमरख, कटहल, नारियल औ अनार, अखरोट आंवला न दूध से सुहाता है।

ये सारे के सारे प्रयोग लिपिबद्ध न होकर परम्परागत ढंग से लोगों द्वारा सुन-सुनकर याद किये गये हैं। ‘‘पूर्वजों ने जो भी कहा है उसकी प्रामाणिकता आज भी प्रासंगिक है, तब भी विज्ञान था। हमारे उन्हीं विज्ञान पर विदेशों में शोध हो रहा है। पुराने वैद्यों के पास दूर दर्शिता थी। सावन में साग वर्जित है कारण कि उस समय वैक्टीरिया का प्रभाव साग के पत्तों पर अधिक होता है।
भादों में दही इसलिए न खाना चाहिए कि उस समय भी वैक्टीरिया अधिक होती है। हमारे पूर्वज जो वैद्य के रूप में थे उनका अनुभव नकारा नहीं जा सकता। राज्य वैद्य नाड़ी देखकर बताते थे कि शरीर का ताप क्रम कितना है आज थर्मामीटर लगाये जाते हैं।’’

भोजन की विधि :-

  • सुबह के समय सूखा पदार्थ पहले खाएं फिर द्रव्य पदार्थ लें । भारी , मीठा और चिकना पदार्थ पहले खाएं,
  • अम्ल व लवण युक्त मध्य में खाएं ।
  • कडुवा, तीखा , कसैला अंत में खाएं ।
  • यदि भूख कम लगती है तो पहले गर्म पदार्थ पहले
  • खायें ।
  • रात्रि के समय सत्तू , फल और दही का सेवन ना करें।
  • हरा उड़द दालों में श्रेष्ठ है, यह हल्का और वातकारक है ।
  • कुलथी की दाल को सर्दियों में खाएं कफ, वायु , उदररोग , पथरी, साँस सम्बन्धी रोग को ठीक करता है ।
  • उड़द की दाल शुक्र को बढ़ाने वाला होता है ।
  • जौ पित्त , कंठ रोग और कफ को शांत करता है ।

निषेध :-

  • अति मधुर भोजन अग्नि को नष्ट करता है, अत्यंत लवण युक्त भोजन आँखों के हानिकर है, अति तीक्ष्ण,
  • तथा अति अम्ल युक्त भोजन वृद्धावस्था को बढाता है ।
  • दही, मधु , घृत, सत्तू , खीर, कांजी को छोड़कर अन्य आहार द्रव्य को खाते समय थोडा छोड़ देना चाहिए ।
  • पेट दर्द में- घी के साथ मिश्रित हींग, 
  • पुराने ज्वर में- मधु के साथ पीपर , 
  • वातरोग में- घी में भूना लहसुन, 
  • श्वांस रोग में - शहद मिश्रित त्रयूषण ( सोंठ, मिर्च, पीपल ), 
  • शीतरोग में- पान के रस में मिर्च, 
  • प्रमेह रोग में - त्रिफला के साथ गुड, 
  • सन्निपाति रोग में - शहद के साथ अदरक , 
  • ज्वर में - नागरमोथा तथा पित्तपापड़ा , 
  • गृहणी रोग में- मट्टा , गरविष में- स्वर्ण भस्म , उल्टी में - धान का लावा, 
  • अतिसार ( दस्त )में - कुटज , रक्तपित्त में - वासा , 
  • अर्श में - चित्रक , पेट के कीड़ों में - वायविडंग लाभप्रद है ।
  • दही :- दही को रात्रि में , ज्यादा गर्म करके , वर्षा ऋतु में , शरद ऋतु में दही नहीं खाना चाहिए । 
  • विना मूंग की दाल, मधु , घी , गुड के बिना दही नहीं खाना चाहिए ।
  • बिना पूरी जमे दही ना खाएं , रोजाना दही ना खाएं ।
पाठक बंधुओं! हजारों मरीजों को देख कर और न जाने कितने हजार मरीजों से बात करके मुझे एक बात बड़ी शिद्दत से परेशान करती रही कि ज्यादातर बीमारियों का मुख्य कारण गलत खान पान है। अगर हमें इस बात की सही जानकारी हो कि किस चीज के साथ क्या नहीं खाना चाहिए तो हो सकता है कि हम खुद को अनावश्यक रोगों से सुरक्षित रख सकें। इसलिए आप सभी से निवेदन है कि इस लेख को बहुत ध्यान से पढियेगा जिससे इसका लाभ आपको मिल सके। अगर ऎसी ही कुछ जानकारियां आपको हों तो मुझे जरूर बता दीजियेगा।

  • सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी। 
  • दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है। 
  • दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही, नमक, इमली, खरबूजा, बेल, नारियल, मूली, तोरई, तिल , तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए। 
  • दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए। 
  • गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए। 
  • ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं। 
  • शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं। 
  • खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी ,कटहल कभी नहीं। 
  • घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा
  • तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं। 
  • चावल के साथ सिरका कभी नहीं। 
  • चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं। 
  • खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं। 

कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे-

  1. खरबूजे के साथ चीनी 
  2. इमली के साथ गुड 
  3. गाजर और मेथी का साग
  4. बथुआ और दही का रायता 
  5. मकई के साथ मट्ठा 
  6. अमरुद के साथ सौंफ 
  7. तरबूज के साथ गुड 
  8. मूली और मूली के पत्ते 
  9. अनाज या दाल के साथ दूध या दही 
  10. आम के साथ गाय का दूध
  11. चावल के साथ दही
  12. खजूर के साथ दूध 
  13. चावल के साथ नारियल की गिरी
  14. केले के साथ इलायची 
कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं। और माले मुफ्त दिले बेरहम वाली कहावत तो मशहूर है ही। शादियों में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मैंने अनेक बार देखा है। कुछ लोगो तो बस फ्री में जहर भी मिल जाए तो थाली भर के खायेंगे ……खैर चलिए लेकिन माल भले ही दूसरे का हो पेट आप का ही होता है। और बाद में तकलीफ भी आप को ही होती है। आइये हम कुछ ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ --
  • केले की अधिकता में दो छोटी इलायची 
  • आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड 
  • जामुन ज्यादा खा लिया तो 3-4 चुटकी नमक 
  • सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम 
  • खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत 
  • तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग 
  • अमरूद के लिए सौंफ 
  • नींबू के लिए नमक
  • बेर के लिए सिरका
  • गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो 3-4 बेर खा लीजिये 
  • चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये 
  • बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च 
  • मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये 
  • बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं 
  • खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये 
  • मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं 
  • इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये 
  • मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये 
  • मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये 
  • घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं 
  • खुरमानी ज्यादा हो जाए तोठंडा पानी पीयें 
  • पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये 
अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये 80% बीमारियों से बचे रहेंगे। 

किस महीने में क्या नही खाना चाहिए और क्या जरूर खाना चाहिए ---

  1. चैत में गुड बिलकुल नहीं खाना, नीम की पत्ती /फल, फूल खूब चबाना। 
  2. बैसाख में नया तेल नहीं खाना, चावल खूब खाएं। 
  3. जेठ में दोपहर में चलना मना है, दोपहर में सोना जरुरी है। 
  4. आषाढ़ में पका बेल खाना मना है, घर की मरम्मत जरूरी है। 
  5. सावन में साग खाना मना है, हर्रे खाना जरूरी है। 
  6. भादो मे दही मत खाना, चना खाना जरुरी है। 
  7. कुवार में करेला मना है, गुड खाना जरुरी है। 
  8. कार्तिक में जमीन पर सोना मना है, मूली खाना जरूरी है। 
  9. अगहन में जीरा नहीं खाना, तेल खाना जरुरी है। 
  10. पूस में धनिया नहीं खाना, दूध पीना जरूरी है। 
  11. माघ में मिश्री मत खाना, खिचड़ी खाना जरुरी है। 
  12. फागुन में चना मत खाना, प्रातः स्नान और नाश्ता जरुरी है।
    Rajesh Mishra (Trip Trikut Pahad, Jharkhand)

शनिवार, जून 06, 2015

सेहत का खजाना : गर्मी का राजा ‘पुदीना’

गर्मी के मौसम में कई बड़ी बीमारियों
से बचाता है ‘पुदीना’


पुदिना सेहत के लिए तो अच्छा होता ही है ये गर्मी के मौसम में आपको कई बड़ी बीमारियों से भी बचाता है। मौसम की मांग के चलते पुदिना मार्केट में बहुत ही महंगे भाव में मिल रहा है।  पुदिना खाने का जायका बढाता है और पेट के लिए ठंडा होता है। पुदिना को जरूर खाना चाहिये क्‍योंकि यह पौष्टिकता से भरी होती है। 
आयुर्वेद के अनुसार पुदीना रूचिवर्ध्दक, स्वादिष्ट, सुगंधित, दिल के लिये फायदेमंद रूखा, तीखा, वात व कफ के विकार को दूर करने वाला, खांसी व नशा नाशक, पाचन शक्ति की कमजोरी, बदहजमी, आफरा, पेट दर्द, अतिसार, संग्रहणी, हैजा, पुराना बुखार और कृमिनाशक होता है। हिन्दी में इसे पुदीना, संस्कृत में पूतिहा, अंग्रेजी में स्पिअर मिण्ट, लैटिन में मेन्था स्पाइकेटा, गुजराती में फुदीनो, मराठी में पुदिना, बंगला में पोदीना, तमिल में पुदीना, पारसी में पुदिन नाम से जाना जाता है। पुदीने का प्रयोग पुरातन काल से होता आ रहा है। भोजन में पुदीने की जितनी उपयोगिता है, उतनी दूसरी शाक सब्जी या फल की नहीं है। चाहे शर्बत तैयार करना हो, महकदार चटनी का जायका लेना हो अथवा कढ़ी में भी महकदार पैदा करनी हो, रायता, छाछ, केरी का पानी हो इन सभी में पोदीने को डालकर जायकेदार बनाया जा सकता है। पुदीने से तमाम शारीरिक शिकार भी समाप्त हो जाते हैं। यदि लगातार पुदीने का प्रयोग किया जाता है, तो काया में व्याधि होने की सम्भावना भी कम हो जाती है। पुदीना अपनी सुगंध, खुशबू के लिए संसार में सर्वोपरि मान गया है। च्युंगम, मुखशुध्दि पेय तथा दंत पेस्ट आदि बनाने वाली सभी कम्पनियां किसी न किसी रूप में थोड़ी या अधिक मात्रा में पुदीने के रस का प्रयोग करती है। कहा जाता है कि पुदीने की पत्ती मुंह में रखकर चूसते रहना अमृत जैसा है। पुदीना विटामिन ‘ए’ की खान है। पुदीने में जितने विटामिन पाये जाते हैं, उतने न तो किसी विशेष वस्तु में होते हैं न ही किसी दवा में होते हैं। पुदीना एक विलक्षण व अनुपम औषधि है।
पुदीने को सामान्यत: तीन किस्मों में विभाजित किया जाता है। वन्य (जंगली) पुदीना, पर्वतीय (पहाड़ी) पुदीना और जलीय पुदीना।

पुदीने के औषधीय उपयोग-

  • सलाद में इसका उपयोग स्वास्थ्यवर्ध्दक है। प्राय: प्रतिदिन इसकी पत्ती चबाई जाये तो दंत क्षय, मसूढ़ों से रक्त निकलना, पायरिया आदि रोग कम हो जाते हैं। यह एण्टीसेप्टिक जैसा कार्य करता है, और दांतों तथा मसूढ़ों को आवश्यक पोषक तत्व पहुंचाता है।
  • एक गिलास पानी में पुदीने की 4/5 पत्तियां डालकर उबालें ठण्डा होने पर फ्रिज में रख दें। इस पानी से कुल्ला करने पर मूंह की दुर्गंध दूर हो जाती है।
  • पुदीना कीटनाशक है यदि घर के चारों तरफ पुदीना के तेल का छिड़काव कर दिया जाये तो मक्खी, मच्छर, चींटी आदि कीटाणु भाग जाते हैं।
  • पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लेप करने से, भाप लेने से मुहांसे, चेहरे की झाइयों एवं दागों में लाभ होता है।
  • एक टब में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें पुदीने का तेल डालकर यदि उसमें पैरों को रखा जाये तो थकान से राहत मिलती है, और बिवाईयों के लिए बहुत लाभकारी है।
  • पुदीने का ताजा रस क्षय रोग, अस्थमा एवं विचित्र प्रकार के श्वास रोगों में बहुत ही लाभकारी है।
  • पानी में नींबू का रस पुदीना एवं काला नमक मिलाकर पीने से मलेरिया के बुखार में राहत मिलती है।
  • हकलाहट दूर करने के लिए पुदीने की पत्तियों में काली मिर्च पीस लें तथा सुबह शाम एक एक चम्मच सेवन करे। हकलाहट दूर हो जायेगी।
  • हिचकी की शिकायत होने पर इसकी पत्तियों को चूसने से या इसके रस को शहद के साथ लेने से राहत मिलती है।
  • प्राकृतिक भोजन में रूचि रखने वाले लोगों में पुदीना डालकर बनाई गई चाय अच्छी रहती है, तथा पुदीने की चाय में एक दो चुटकी नमक मिलाकर पीने से खांसी में लाभ होता है।
  • हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, हैजा हो तो आधा कप रस हर घण्टे के अन्तराल पर रोगी को पिलाये।
  • पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है, तथा न्यूमोनिया से होने वाले विकार भी नष्ट हो जाते हैं। यदि आंतों की खराबी शिथिलता या अन्य पेट के कोई अन्य रोग हो तो पुदीना सेवन कर इन्हें दूर किया जा सकता है।
  • पेट में अचानक दर्द उठता हो, मरोड़ हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करे। पेट दर्द में राहत मिलेगी।
  • मुंह में छाले हो गये हो तो पुदीने के गाढ़े क्वाथ में रूई के फाहों को अच्छी तरह भिगोकर लगाने से छाले तथा घाव ठीक होकर राहत मिलती है।
  • नकसीर की शिकायत होने पर प्याज एवं पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है।
  • आजकल तो बाजार में ‘पुदीन हरा’ नामक औषधि प्रचलन में आ गई है। जो अजीर्ण बदहजमी, पेट दर्द में रामबाण है।
अगर आप पुदिना खाने का शौक रखते हैं, तो इसे अपने घर पर ही उगाएं।  इसे बडे से गमले में उगाइये जिससे आप हर वक्‍त इसका आनंद ले सकें। पुदिना को घर पर उगाना बहुत ही आसान है आइये जानते हैं कि पुदिना को घर पर कैसे उगाया जा सकता है।
पुदीना का छोटा पौधा कहीं भी किसी भी जमीन व यहां तक कि गमले में भी आसानी से उग जाता है। यह गर्मी को झेलने की शक्ति रखता है। इसे किसी भी उर्वरक की आवश्यकता नहीं पड़ती है। थोड़ी सी मिट्टी और पानी इसके विकास के लिये पर्याप्त है। पुदीना की उपज किसी भी समय ली जा सकती है। गर्मी के दिनों में तो इसकी उपज व बढ़वार अच्छी होती है। इसकी पत्तियों को ताजा तथा सुखाकर भी प्रयोग में लाया जा सकता है।

घर पर ऎसे उगाएं पुदिना का पौधा -

1. गमला और जगह चुनें- पुदिना लगाने के लिये गमला काफी बड़ा होना चाहिये जिससे वह आराम से लग जाए। गमले को सूरज की तेज धूप से दूर रखें साथ ही इसे दूसरे पौधों के पास नही रखें। पुदिना को ज्‍यादा धूप की जरूरत नहीं होती। इसे इंफेक्‍शन से बचाने के लिये इन्‍हें दूसरे गमलों के पास ना रखें। 

2. बीज बोना- बीज को किसी भी समय बोया जा सकता है। फिर यह आठ हफ्तों के अदंर बिल्‍कुल ठंड में उगेगा। बीज को मिट्टी में दो इंच नीचे बोना चाहिये। 

3. पानी- पुदिना के पौधे को उगने के लिये नमी की जरूरत होती है। पर इन्‍हें इतना भी पानी ना दें कि यह सड़ जाए। पानी की सही मात्रा ही दी जानी चाहिये। पौधों को सही तरह से नमी प्राप्‍त हो इसके लिये पौधे के चारों ओर फूल, फलों की पत्‍तियों को बिछा दें। इससे अत्‍यधिक पानी वे सोख लेगें और आपका पौधा खराब भी नहीं होगा। पुदिना को दिन में दो बार पानी दें।

4. गमले की खाद- पुदिना के पौधों को अच्‍छी तरह से उगने के लिये खाद की आवश्‍यकता पड़ती है। इसलिये उन्‍हें हर 10 दिन बाद प्राकृतिक खाद ही दें। खाद तब तक डालें जब तक कि वह कटाई योग्‍य ना हो जाएं। प्राकृतिक खाद में किचन का वेस्‍ट, गांय का गोबर या फिर अन्‍य फल और पत्तियों का इस्‍तमाल किया जा सकता है। 

5. कटाई- वैसे पुदिना के पौधों को उगने में 6 से 8 हफ्ते आराम से लग जाते हैं। आप चाहें तो गमले से केवल पत्तियों को तोड़ सकती हैं या फिर पूरे पौधों को जड़ सहित ही निकाल सकती हैं। पौधों को उस पर फूल लगने से पहले ही काट लेना चाहिये।

शनिवार, मई 23, 2015

गर्मी में कैसा हो आपका खान-पान

गर्मी में क्या खाना चाहिए और किस-किस से करें परहेज़
गर्मी के मौसम की दिनचर्या
Summer Routine : Food, water and shelter

गर्मी अनेक समस्याओं के साथ दस्तक दे चुकी है। सावधानी न बरती जाए तो इस मौसम में बीमार पड़ना तय-सा हो जाता है। राजेश मिश्रा बता रहे हैं इस मौसम में अपनी और परिवार की देखभाल करने के उपाय।
गर्मियां हमारे शरीर को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। इस मौसम में बाहरी तापमान बढ़ने से हमारे शरीर का ताप भी बढ़ जाता है, इसलिए हमें ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए, जो शरीर को ठंडा रखे। गर्मियों में हमारा पाचन-तंत्र भी कमजोर पड़ जाता है, इसलिए जरूरी है कि ताजा और हल्का भोजन किया जाए। बढ़ता तापमान संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है, इसलिए इस मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। गर्मियों में अधिक समय घर से बाहर न बिताएं।
बदलती ऋतुओं के अनुसार शरीर में स्वाभाविक रासायनिक परिवर्तन होते हैं और इस परिवर्तन में ऋतूचर्यानुसार खाध्य पदार्थों का सेवन किया जाए तो वात-पित्त-कफ के उभार से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है| यहाँ राजेश मिश्रा करेंगे  गर्मी की ऋतू में अच्छी सेहत के लिए सेहतमंद दिन चर्या की बात -
अल सुबह उठते ही 2-3 गिलास पानी पीना चाहिए| इसके बाद शौच,दन्त सफाई,आसान और प्राणायाम नियमित रूप से करें| अब रात को पानी भिगोये हुए 11  बादाम को छिलके उतारकर पीसकर एक गिलास दूध के साथ पीएं| इसके नियमित प्रयोग से शारीरिक तंदुरुस्ती मिलती है और आंतरिक उष्मा शांत होती है| गर्मी के मौसम में तले भुने,गरिष्ठ और ज्यादा मसालेदार पदार्थों की बजाय फल फ्रूट ,हरी सब्जियों के सलाद और जूस का ज्यादा इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद रहता है| इससे गर्मी की वजह से पसीना होने से होने वाली पानी कमी का पुनर्भरण भी होता रहता है|
ग्रीष्म ऋतू में बाजारू चीजें खाने से बचने की सलाह दी जाती है| इस मौसम में शारीरिक कमजोरी, अपच,  दाद, पेचिश, सीने में जलन, खूनी बवासीर, मुहं की बदबू आदि रोगों से बचने का सरल उपचार भी लिख देता हूँ| खाली पेट,नींबू का रस आंवले का रस और हरे धनिये का रस मिश्री मिलाकर पीने से कई रोगों से बचाव हो सकता है| दोपहर और सांयकालीन भोजन में चावल के साथ अरहर,मूंग,उडद की दाल और हरी पत्तीदार सब्जियों का समावेश करें| छाछ व् दही का सेवन करना हितकारी है| रात का भोजन ना करें तो ज्यादा अच्छा|
गर्मी में घर से बाहर निकलने के पहले 2 गिलास पानी जरूर पी लेना चाहिए| टमाटर, तरबूज, खरबूज, खीरा ककड़ी, गन्ने का रस और प्याज का उपयोग करते रहना चाहिए| इन चीजों से पेट की सफाई होती है और अंदरूनी गर्मी शांत होती है|

गर्मी दूर भगाने के कारगर तरीके-

नींबू पानी- यह गर्मी के मौसन का देसी टानिक है| शरीर में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाने पर एनीमिया, जोड़ों का दर्द, दांतों के रोग, पायरिया, खांसी और  दमा जैसी दिक्कते हो सकती हैं| नींबू में भरपूर विटामिन सी होता है| अत: इन बीमारियों से दूरी बनाए रखने में यह उपाय सफल रहता है| पेट में खराबी होना, कब्ज, दस्त होना में नींबू के रस में थौड़ी सी हींग, काली मिर्च, अजवाइन, नमक , जीरा मिलाकर पीने से काफी राहत मिलती है|

तरबूज का रस- 

तरबूज के रस से एसीडीटी का निवारण होता है| यह दिल के रोगों डायबीटीज व् केंसर रोग से शरीर की रक्षा करता है|

पुदीने का शरबत- 

गर्मी में पुदीना बेहद फायदेमंद रहता है| पुदीने को पीसकर स्वाद अनुसार नमक,चीनी जीरा मिलाएं| इस तरह पुदीने का शरबत बनाकर पीने से लू.जलन, बुखार, उल्टी व गैस जैसी समस्याओं में काफी लाभ होता है|

ठंडाई- 

गर्मी में ठंडाई काफी लाभ दायक होती है| इसे बनाने के लिये खस खस और बादाम रात को भिगो दें|सुबह इन्हें मिक्सर में पीसकर ठन्डे दूध में मिलाएं| स्वाद अनुसार शकर मिलाकर पीएं| गर्मी से मुक्ति मिलेगी|

गन्ने का रस- 

गर्मी में गन्ने का रस सेहत के लिये बहुत अच्छा होता है| इसमें विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं| इसे पीने से ताजगी बनी रहती है| लू नहीं लगती है| बुखार होने पर गन्ने का रस पीने से बुखार जल्दी उतर जाता है| एसीडीटी की वजह से होने वाली जलन में गन्ने का रस राहत पहुंचाता है| गन्ने के रस में नीम्बू मिलाकर पीने से पीलिया जल्दी ठीक होता है| गन्ने के रस में बर्फ मिलाना ठीक नहीं है|

छाछ - 
गर्मी के दिनों में छाछ का प्रयोग हितकारी है| आयुर्वेद शास्त्र में छाछ के लाभ बताए गए हैं| भोजन के बाद आधा गिलास छाछ पीने से फायदा होता है| छाछ में पुदीना ,काला नमक,जीरा मिलाकर पीने से एसीडीटी की समस्या से निजात मिलती है|

खस का शरबत - 

गर्मी में खस का शरबत बहुत ठंडक देने वाला होता है| इसके शरबत से दिमाग को ठंडक मिलती है| इसका शरबत बनाने के लिये खस को धोकर सुखालें| इसके बाद इसे पानी में उबालें| और स्वाद अनुसार शकर मिलाएं| ठंडा होने पर छानकर बोतल में भर लें|

सत्तू - 

यह एक प्रकार का व्यंजन है| इसे भुने हुए चने , जोऊं और गेहूं पीसकर बनाया जाता है| बिहार में यह काफी लोकप्रिय है| सत्तू पेट की गर्मी शांत करता है| कुछ लोग इसमें शकर मिलाकर तो कुछ लोग नमक और मसाले मिलाकर खाते हैं|

आम पन्ना - 

कच्चे आम को पानी में उबालकर उसका गूदा निकाल लें| इसमें शकर, भुना जीरा, धनिया, पुदीना, नमक मिलाकर पीयें| गर्मी की बीमारियाँ दूर होंगी|

हर दो घण्टे में 24 आउंस पानी पिएं

लोग अमूमन प्यास लगने पर पानी पीते हैं, जबकि डिहाइड्रेशन से बचने का तरीका यह है कि हर 10 मिनट पर पानी पीते रहें और प्यास लगने की नौबत ही न आए। डायटीशियन नीतू चांदना कहती हैं, ‘एक वयस्क व्यक्ति को गर्मी के मौसम में घर से निकलते वक्त 17 से 20 आउंस पानी पीना चाहिए। अगर खाली पानी न पिया जाए तो जूस या सूप के रूप में लिक्विड ले लें।’
जितनी देर बाहर रहें, हर 10 मिनट पर 7 से 10 आउंस पानी लेते रहें। ध्यान रहे कि हर दो घण्टे में शरीर को 24 आउंस पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा अगर सिर दर्द या शरीर में खिंचाव महसूस हो तो भी तुरंत पानी पिएं। पानी के अलावा सोडियम, पोटेशियम और नमक की कमी से भी डिहाइड्रेशन होता है, इसीलिए नमक खूब खाएं। फलों या स्नैक्स पर नमक ऊपर से डाल कर खाएं। सोडियम और पोटैशियम के लिए तरबूज, लीची, दही खाएं।

अदरक, काली मिर्च, तुलसी खाएं

नीतू सलाह देती हैं कि खाने में तुलसी की पत्ती और तुलसी के बीज का इस्तेमाल करें। तुलसी शरीर के लिए एक तरह से एंटीसेप्टिक का काम करती है। इसके अलावा सब्जी की ग्रेवी में भुना बेसन डालें, ये दोनों ही चीजें शरीर को ठंडा रखती हैं। खाने में प्याज, अदरक, काली मिर्च और लहसुन की मात्र बढ़ा दें। ये मसाले खून को साफ रखते हैं और इन्हें खाने से चूंकि पसीना निकलता है, इसलिए शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है। एलर्जी और फूड प्वाइजनिंग जैसी बीमारियां अपनी गिरफ्त में नहीं लेतीं।

चीनी कम, शहद ज्यादा

खान-पान में मिठास जितनी ज्यादा होगी, शरीर को ऊर्जा उतनी ही मिलेग, इसलिए ऐसी चीजें खाएं, जो अच्छा कार्बोहाइड्रेट दे सकें। लेकिन चीनी से परहेज करें, क्योंकि चीनी शरीर को खराब कार्बोहाइड्रेट देती है, जिससे ऊर्जा तो मिलती है, मगर पाचन संबंधी शिकायत भी हो जाती है। चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल करें। इससे आपके शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बनेगा। आप ग्रीन टी या दूध में शहद मिला कर पी सकते हैं। ऐसे फल खाएं, जिनमें ग्लूकोस का अंश हो। संतरा, मौसमी, लीची ऐसे ही फल हैं।

गर्मियों में क्या खाएं

मौसमी फल और सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करें। गर्मियों में मिलने वाली सब्जियां मुलायम, गूदेदार और नमी से भरपूर होती हैं, जो इस मौसम के लिहाज से बिल्कुल उपयुक्त होती हैं। ये सभी सब्जियां ठंडी तासीर वाली, पचने में आसान और उन सभी पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो इस गर्म और आर्द्र मौसम से शरीर का तालमेल बैठाने के लिए जरूरी हैं। लौकी, करेला, तोरी, कद्दू, खीरा, टिंडा, परमल, भिंडी, चौलाई जैसी गर्मियों की सब्जियों का सेवन करें। खीरा, पुदीना, तरबूज, मौसमी का सेवन भी करें। ये प्यास बुझाने वाले होते हैं, क्योंकि इनमें सोडियम और कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और एंटी ऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम और विटामिन ए काफी मात्रा में होते हैं। आम और दही भी कूलिंग वाले भोजन हैं। इनमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है।
प्याज में क्वेरिस्टिंग होता है, जो गर्मी से त्वचा पर पड़ने वाले रैशेज में आराम पहुंचाता है। तरबूज और खरबूजे में करीब 90 प्रतिशत पानी होता है और ये पचने में भी आसान होते हैं। गर्मियों में आने वाले इन फलों का सेवन जरूर करें। इस मौसम में अंगूर भी खूब आते हैं, जिनका सेवन काफी फायदेमंद होता है। इनमें लायकोपीन होता है, जो त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों के हानिकारक प्रभाव से बचाता है।
खाने के साथ सलाद जरूर खाएं। कच्ची सब्जियों से जरूरी एंजाइम मिलते हैं, जो शरीर को भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण करने में मदद करते हैं। शरीर जितने पोषक तत्वों का अवशोषण करेगा, उतना ही स्वस्थ रहेगा। सलाद फाइबर से भरपूर होने के कारण पाचन-तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

क्या न खाएं

  1. कैफीन से दूर रहें। इससे डीहाइड्रेशन बढ़ता है। 
  2. अधिक वसायुक्त और भारी भोजन न खाएं।
  3. तले हुए और मसालेदार भोजन से दूर रहें।
  4. बासी और गंदे माहौल में बना खाना न खाएं।
  5. प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से बचें।
  6. मिठाइयां कम से कम खाएं।

बढ़ा दें तरल पदार्थों का सेवन

गर्मी में हमारे शरीर को काम करने के लिए बहुत कम मात्रा में ऊष्मा की आवश्यकता होती है, इसलिए इस मौसम में हमें खाना कम खाना चाहिए और तरल पदार्थ ज्यादा लेने चाहिएं। डॉंक्टरों का कहना है कि गर्मियों में हमें अपने भोजन को खाना नहीं, पीना चाहिए। रोजाना तीन से चार लीटर पानी पिएं। इसके अलावा जूस, छाछ, लस्सी, नींबू पानी, नारियल पानी और आम पना का सेवन भी करें। डिब्बाबंद जूस का सेवन करने से बचें।

फलों, सब्जियों, दूध, ग्रीन टी और जूस में भी काफी मात्रा में पानी होता है। जो लोग इन चीजों का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, उन्हें ज्यादा मात्रा में पानी की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए अगर आपको बार-बार पानी पीना पसंद नहीं है तो अपने डाइट चार्ट में उन चीजों की मात्रा बढ़ा दें।

गर्मियों में जल्दी खराब हो जाता है खाना

इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, इसलिए फूड पॉयजनिंग, डायरिया और उल्टी-दस्त के मामले अत्यधिक बढ़ जाते हैं। अधिकतर लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखी सब्जियां, फल और खाना लंबे समय तक खराब नहीं होता, जो गलत है। कच्ची सब्जियों और फलों को 2 से 4 दिन से अधिक समय तक न रखें।

डीहाइड्रेशन और संक्रमण से बचाव

गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) हो जाती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी होने से लू लगने की आशंका बढ़ जाती है। गर्मियों में घर से बाहर धूप में अधिक समय न बिताएं। इससे शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे थकान, रक्तचाप कम होना, कमजोरी महसूस होना आदि समस्याएं हो सकती हैं। पानी के अलावा आप नारियल पानी, नींबू पानी, बेल के शरबत आदि से भी अपने शरीर में शीतलता बनाये रख सकते हैं। अपने युरिन के रंग पर नजर रखें। गहरे रंग का युरिन डीहाइड्रेशन की निशानी है। उसका रंग हल्का रखने के लिए अधिक मात्रा में पानी पिएं।
गर्मी के मौसम में दूषित जल पीने व बाहर के कटे-खुले खाद्य पदार्थ खाने के कारण हैजा, टाइफाइड, पीलिया, आंतों में सूजन व अनेक प्रकार के संक्रमणों के मामले बढ़ जाते हैं। कई बार अधिक खाना भी फूड पॉयजनिंग का कारण बन जाता है। घर पर बना सादा और सुपाच्य भोजन ही करें। बाहर खाने से बचें। कभी मजबूरी में बाहर खाना भी पड़े तो ऐसे रेस्तरां से खाएं, जहां ताजा और हाइजनिक खाना मिले।

रहें ऊर्जा से भरपूर

अपने दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करें। कम वसा वाला भोजन खाएं और ताजे फलों का रस पिएं। तले हुए और मसालेदार भोजन से बचें। अल्कोहल व कैफीन का सेवन कम करें, क्योंकि इनसे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और आप सुस्ती अनुभव करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

  • सब्जियों, फलों और बचे हुए खाने को तुरंत फ्रिज में रख दें।
  • फ्रिज का तापमान बहुत महत्वपूर्ण है। यह पांच डिग्री सेल्सियस से कम और फ्रीजर का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
  • कच्चे और पके हुए मांस तथा सी फूड को ज्यादा समय तक स्टोर न करें, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।
  • यह जांचने के लिए कि भोजन सही है या नहीं, उसे चखना नहीं चाहिए, क्योंकि कई बार यह बेहद नुकसानदेह साबित होता है।
  • दूध और दुग्ध उत्पादों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर न रखें।
  • बचे हुए खाने को ज्यादा समय तक रेफ्रिजरेटर के बाहर न रखें। दोबारा सेवन करने से पहले उसे ठीक से गर्म कर लें।
  • एक्सपाइरी डेट के खाद्य पदार्थों का सेवन कतई न करें।
  • उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।

बुधवार, मार्च 25, 2015

राज का स्वास्थ्य चालीसा

Raj's Health Chalisa
स्वस्थ रहने के सूत्र

एक स्वस्थ जीवन शैली का चयन करना एक लंबी, अधिक पूरा जीवन हो सकता है। आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार से आप के आसपास हर किसी पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आप उदाहरण के माध्यम से अपने परिवार और दोस्तों के बेहतर आदतों को सिखा सकते हैं स्वस्थ रहने के विचार से भयभीत होने की जरूरत नहीं है. कुछ छोटे परिवर्तन करने से आपको बड़े परिणाम देखने को मिल सकते है।

मनुष्य के जीवन में स्वास्थ्य का सर्वाधिक महत्व है। स्वास्थ्य के बिना धन ,संपत्ति, मनोरंजन और अन्य सुविधाएं महत्व हीन हैं। कहते हैं जो व्यक्ति तन और मन से स्वस्थ् होता है, वह संसार का सबसे सुखी प्राणी है, क्योंकि स्वस्थ् तन में ही स्वस्थ् मन रहता है। हमारे ऋषि मुनियों ने शुरू से ही स्वास्थ्य के महत्व को स्वीकार किया है और स्वस्थ बने रहने के लिए प्रकृति के नियमों का पालन करने की सलाह दी है। जो मनुष्य सूर्योदय से पूर्व उठते हैं और अपनी दिनचर्या पूर्ण करके निर्धारित समय के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करते हैं, निष्काम भाव से कर्म करते हैं तथा रात्रि में समय पर शयन करते हैं वे हमेशा स्वस्थ् बने रहते हैं। स्वस्थ रहने का सबसे आसान मंत्र है- प्रकृति के नियमों का पालन, कठोर शारीरिक परिश्रम और पौष्टिक, सादा व गर्म भोजन। आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हम यहाँ दे रहे कुछ टिप्स जिन पर अमल करके आप अपने आपको चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं।

ताजा हवा और धूप

सूरज की रोशनी के कई फ़ायदे है इस से आपकी त्वचा सूर्य के प्रकाश के संपर्क मे रहती है. इस से आपको विटामिन डी मिलता है जिससे आपके शरीर के निर्माण और मजबूत, स्वस्थ हड्डियों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है जो कैल्शियम को अवशोषित में मदद करता है।
1. दूध और कटहल का कभी भी एक साथ सेवन नहीं करना चाहिये ।
2. दूध और कुलत्थी भी कभी एक साथ नहीं लेना चाहिए।
3. नमक और दूध (सेंधा नमक छोड़कर) दूध और सभी प्रकार की खटाइयां, दूध और मूँगफली, दूध और मछली, एक साथ प्रयोग ना करें।
4. दही गर्म करके नहीं खाना चाहिये हानि पहुँचती है, कढ़ी बनाकर खा सकते हैं।
5. शहद और घी समान परिणाम में मिलाकर लेना विष के समान है।
6. जौ का आटा कोर्इ अन्न मिलाये बिना नहीं लेना चाहिए।
7. रात्रि के समय सत्तू का प्रयोग वर्जित है, बिना जल मिलाये सत्तू ना खायें।
8. तेज धूप में चलकर आने के बाद थोड़ा आराम करके ही पानी पियें, व्यायाम या शारीरिक परिश्रम के तुरन्त बाद पानी ना पियें या थोड़ी देर बाद पानी पियें।
9. प्रात:काल भोजन के पश्चात तेज गति से चलना हानिकारक है।
10. शाम को खाने के बाद थोड़ी देर चलना आवश्यक है, खाना खाकर तुरन्त सो जाना हानिकारक है।
11. रात्रि में दही का सेवन निषेध है, भोजन के तुरन्त बाद जल का सेवन निषेध है। दिन में भोजन के बाद मठ्ठा और रात्रि में भोजन के बाद दूध लेना लाभदायक होता है। वात के रोगों में ब्लड एसिडिटी, कफ वृद्धि या संधिवात में दही ना खायें।
12. शौच क्रिया के बाद, भोजन से पहले, सर्दी-जुकाम होने पर, दांतों में पीव आने पर और पसीना आने की दशा में पान का सेवन नहीं करना चाहिए।
13. सिर पर अधिक गर्म पानी डालकर स्नान करने से नेत्रों की ज्योति कम होती है जरूरत पड़ने पर गुनगुने पानी से स्नान कर सकते हैं।
14. सोते समय सिर पर कपड़ा बांधकर सोना, पैरों में मोजे पहनकर सोना, अधिक चुस्त कपड़े पहनकर सोना हानिकारक है।
15. शहद कभी भी गर्म करके ना खायें, छोटी मधुमक्खी का शहद सर्वोत्तम होता है।
16. तेज ज्वर आने पर तेज हवा, दिन में अधिक देर तक सोना, अधिक परिश्रम, स्नान, क्रोध आदि से बचना चाहिये।
17. नींद लेने से पित्त घटता है, मालिश से वात कम होता है और उल्टी करने से कफ कम होता है एवं उपवास करने से ज्वर शांत होता है ।

राज के इन आसान हेल्थ टिप्स को भी अपनाएं 

इन दिनों लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल ऐसी बना ली है कि दिनों दिन वे नई-नई परेशानियों और बीमारियों से घिरते जा रहे हैं। चाहे खान-पान हो या आरामदायक जीवनशैली। और तो और शहरी वातावरण भी उन्हें इस तरह की दिनचर्या बनाने में काफी मदद की है। सभी ऐशोआराम की चीजें उन्हें घर बैठे हासिल हो जाती है। उन्हें उठकर कहीं जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
  • प्रतिदिन वॉक करें। अगर हो सके तो फुटबॉल खेलें यह एक प्रकार का एक्सरसाइज ही है।
  • ऑफिस में या कहीं भी जाएं तो लिफ्ट के बदले सीढिय़ों का इस्तेमाल करें।
  • अपने कुत्ते को वॉक पर खुद लेकर जाएं। बच्चों के साथ खेलें, लॉन में नंगे पांव चलें, घर के आसपास पेड़ पौधे लगाऐं, यानि कि वो सब करें जिनसे आप खुद को एक्टिव रख सकें। 
  • ऐसी जगह एक्सरसाइज न करें जहां भीड़भाड़ ज्यादा हो।
  • तले-भुने भोजन, और अन्य फैटी चीजों से परहेज करें यह बहुत से बीमारियों की जड़ होती है। 
  • डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। जैसे कि चीज, कॉटेज चीज, दूध और क्रीम का लो फैट प्रोडक्ट आदि। 
  • यदि खाना ही है तो, मक्खन ,फैट फ्री चीज और मोयोनीज का लो फैट उत्पाद प्रयोग में लाऐं।
  • तनाव हमारी जिंदगी में काफी निगेटिव असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव कम करने के लिए सकारात्मक विचार बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। 
  • तनाव कम करने के लिए रोज कम से कम आधा घंटा ऐसे काम करें, जिसे करने में आपको मन लगता हो। 
  • तनाव कम करने के लिए आप योग का भी सहारा ले सकते हैं।
  • गुस्सा तनाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है इसलिए गुस्सा आने पर स्वंय को शांत करने के लिए एक से दस तक गिनती गिनें। 
  • उन लोगों से दूर रहने की कोशिश करें जो आपके तनाव को बढ़ाते हों।
  • धूम्रपान से परहेज करें। धूम्रपान से शरीर और उम्र पर असर तो पड़ता ही है, साथ ही फेफड़ों का कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है।
  • धूम्रपान में कमी लाने के लिए उसकी तलब लगने पर सौंफ आदि का सेवन करें।
  • मार्केट में भी आजकल बहुत से प्रोडक्ट मिलने लगे हैं जो धूम्रपान की तलब को कम करते हैं।
  • सुबह-शाम ताजा भोजन करें।
  • निश्चित समय पर भोजन करें।
  • अनियमित भोजन से दूर रहें।
  • पानी ज्यादा से ज्यादा पिएँ।
  • रात का भोजन सोने से तीन घंटे पहले अवश्य कर लें।
  • खाना खाने के बाद 10 मिनट वज्रासन में अवश्य बैठें।
  • भोजन से पहले व तुरंत बाद पानी पीना हानिकारक है।
  • गरिष्ठ, तले, मसालेदार, खटाईयुक्त भोजन से परहेज करें।
  • अंकुरित अन्न, सलाद, सूप का समावेश भोजन व नाश्ते में अवश्य करें।
  • केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें।

मंगलवार, मार्च 03, 2015

राज कि छोटी-छोटी मगर मोटी-मोटी बातें

Get compliments of the house as a Doctor

घर का डॉक्टर बनें तारीफ पाएं


छोटी-छोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स सभी को कभी न कभी होती है। यदि आप घर पर ही ऐसी प्रॉब्लम्स का उपाय करना चाहते हैं तो आज राजेश मिश्रा आपको बता रहे हैं ऐसे महत्वपूर्ण घरेलू नुस्खे, जिनका पता होने पर आप कुछ साधारण रोगों का इलाज खुद कर सकते हैं और घर का डॉक्टर कहलाने के साथ-साथ तारीफ भी पाएंगे.. 
पेट दर्द - अाधा चम्मच हल्दी और आधे चम्मच नमक को मिलाकर ठंडे पानी से फांकी मार लें। पेट दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
बालों का गिरना - यदि आपके बालों में रूसी है या फिर आपके बाल झड़ रहे हैं तो आप कच्चे पपीते का पेस्ट बनाकर बालों की जड़ों पर 10 मिनट तक लगाएं। उसके बाद बाल धो लें। ऐसा करने से आपके बाल नहीं झड़ेंगे।

खून की खराबी - खून साफ नहीं हैं तो 1 चम्मच शहद को आधे गिलास पालक के रस में मिलाकर 1 महीने तक सेवन करें। यह आपके रक्त विकार को दूर करेगा और खून को साफ रखेगा।
स्किन प्रॉब्लम - नारियल पानी में कच्चा दूध, नींबू का रस, बेसन और चंदन पाउडर मिलाकर लेप तैयार करें। नहाने से 15 मिनट पहले ये लेप चेहरे पर लगाएं। उसके बाद चेहरा धो लें। यह नुस्खा स्किन प्रॉब्लम दूर कर चेहरे को चमकदार बनाता है।
एसिडिटी - भोजन करने के बाद आप थोड़े से गुड़ का सेवन करें। ऐसा करने से एसिडिटी की समस्या खत्म हो जाएगी।
सिरदर्द - एक गिलास गर्म पानी में आधे नींबू का रस डालकर पिएं। सिर दर्द दूर हो जाएगा। साथ ही युकेलिप्टस के तेल से सिर की मसाज करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है।
गैस्ट्रिक ट्रबल - अजवायन और काला नमक पीस कर समान मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को एक चम्मच मात्रा में गर्म पानी से लें। गैस की समस्या में तुरंत आराम मिलेगा।
गैस्ट्रिक ट्रबल - एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नीबू, थोड़ा सा काला नमक, सिका हुआ जीरा और थोडी सी हींग मिलाकर लेने से गैस की तकलीफ में तत्काल राहत मिलती है।
जुकाम - यदि जुकाम या सर्दी हो तो रात को सोने से पहले गर्म पानी पीकर सोएं। जुकाम में बहुत राहत मिलेगी।

घरेलू उपचार

1. अपनी दवा ठंडे पानी से मत लें।

2. पांच बजे शाम के बाद भारी खाना न खाएं।

3. सुबह में रात की अपेक्षा ज्यादा पानी पियें.

4. सोने का सबसे बेहतर समय 10 बजे रात से 4 बजे सुबह होता है।

5. खाना खाने के तुरंत बाद न ही सोयें या न ही लेटे.

6. फ़ोन कॉल बाएं कान से सुनें।

7. जब मोबाइल फ़ोन बिलकुल डिस्चार्ज हो रहा हो तो उस समय फ़ोन न सुने क्योंकि उस समय रेडिएशन

1000 गुना ज्यादा होता है।

8. चार्ज में लगे फ़ोन से फ़ोन न ही करें, न ही रिसीव करें. उस समय रेडिएशन ज्यादा निकलता है।

दांत दर्द-

  • दांत का दर्द अगर परेशान कर रहा हो तो पांच लौंग पीस कर उसमे निम्बू का रस निचोड़कर दांतो पर मलने से दर्द दूर होता है। 
  • दांत में कीड़ा लगने पर दांतो के नीचे लौंग को रखना या लौंग का तेल लगाना चाहिए। 
  • पांच लौंग एक ग्लास पानी में उबालकर इसमें कुल्ले करने से दर्द ठीक हो जाता है। 
  • नीम की कोंपलों को उबाल कर कुल्ले करने से दांतो का दर्द जाता रहता है। 
  • दर्द वाले दांत पर कपूर लगाएं। दांत में छेद हो तो उसमे कपूर भर दें। दर्द दूर होगा, कीड़े भी मर जाएंगे।
  • गर्म पानी में मिलकर कुल्ले करने से दांत दर्द में लाभ होता है। नित्य रात को सोने से पहले गर्म पानी में 
  • नमक डाल कर गरारे करके सोने से दांतों में कोई रोग नहीं होता। 
  • अदरक के टुकड़े पर नमक डालकर दर्द वाले दांतो में दबाएं, आराम मिलेगा। 

खजूर-

  • खजूर को शीतकालीन का फल माना गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए यह पित्त के अनेक रोगों में लाभदायक हता है। शरीर के विकास के लिए यह श्रेष्ठ फल है। आइये जानें इसके फ़ायदे। 
  • सुखी खांसी होने पर दिन में दो बार सुबह और शाम खजूर खाने से लाभ होता है। 
  • खजूर का सेवन करने से पाचन-क्रिया ठीक होती है। पेट के दर्द और कब्ज़ के लिए लाभकारी है। 
  • दूध के साथ खजूर खाने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। 
  • खजूर और दही खाने से पेचिश में लाभ होता है। 
  • गुठली निकाले हुए दो खजूरों में थोड़ा सा शुद्ध घी, दो दाने काली मिर्च मिलकर एक महीना खाएं और ऊपर से दूध पिएं। इस तरह आपको अद्भुत शक्ति मिलेगी।

मेथी -

हम बात कर रहे है मेथी की । आइए जाने इसके फ़ायदे । 
  • इसे खाने से भूख बढ़ती है और कमर व पीठ दर्द में लाभ होता हैं । 
  • भले ही इसे कफ और ज्वर का कारक माना जाता रहा हो लेकिन यह शरीर की कई कृमियों का विनाश करती है । 
  • आग से जलने पर दानेदार मेथी को पानी में पीसकर लेप लगाने से जलन दूर हो जाती हैं । 
  • दानेदार मेथी की फंकी गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता हैं। 
  • अगर भूख ना लगती हो तो 7 ग्राम मेथी दाने में थोड़ा सा घी डालकर सके जब यह लाल होने लगे तो उतार कर ठंढा करें फिर पीस लें । इसके बाद इसमें शहद मिलाकर डेढ़ महीने तक चाटे ,भूख बढऩे लगेगी। 
  • डायबिटीज के रोगियों के लिए भी यह काफ़ी लाभदायक हैं । इसके सेवन से शरीर में शुगर लेवल कम होने के साथ कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होने लगता हैं ।