दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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शनिवार, अगस्त 05, 2017

36 Health Tips for life : RAJESH MISHRA



स्वस्थ रहने के 36 उपाय
महत्वपूर्ण ध्यान रखने योग्य बातें:

1) हमेशा पानी को घूट-घूट करके चबाते हुए पिये और खाने को इतना चबाये की पानी बन जाये। किसी ऋषि ने कहा है कि "खाने को पियो और पीने को खाओ"

2) खाने के 40 मिनट पहले और 60-90 मिनट के बाद पानी पिये और फ्रीज का ठंडा पानी, बर्फ डाला हुआ पानी जीवन मे कभी भी नही पिये। गुनगुना या मिट्टी के घडे का पानी ही पिये ।
3)सुबह जगने के बाद बिना कुल्ला करे 2 से 3 गिलास पानी सुखआसन मे बैठकर पानी घूटं-घूटं करके पिये यानी उषा पान करे ।
4) खाने के साथ भी कभी पानी न पिये। जरुरत पड़े तो सुबह ताजा फल का रस, दोपहर मे छाछ और रात्रि मे गर्म दूध का उपयोग कर सकते हैं।
5) भोजन हमेशा सुखआसन मे बैठकर करे और ध्यान खाने पर ही रहे, मतलब टेलीविजन देखते, गाने सुनते हुए, पढ़ते हुए, बातचीत करते हुए कभी भी भोजन न करे।

6) हमेशा बैठ कर खाना खाये और पानी पिये। अगर संभव हो तो सुखासन, सिद्धासन मे बैठ कर ही खाना खाये।
7) फ्रीज़ मे रखा हुआ भोजन न करें या उसे साधारण तापमान में आने पर ही खाये दुबारा कभी भी गर्म ना करे ।
8) गूँथ कर रखे हुये आटे की रोटी कभी न खाये, जैसे- कुछ लोग सुबह में ही आटा गूँथ कर रख देते है और शाम को उसी से बनी हुई चपाती खा लेते है जो स्वास्थ के लिए हानिकारक है। ताजा बनाए ताजा खाये।
9) खाना खाने के तुरंत बाद पेशाब जरूर करे ऐसा करने से डायबिटज होने की समभावना कम होती हैं।
10) मौसम पर आने वाले फल, और सब्जियाँ ही उत्तम है इसलिए बिना मौसम वाली सब्जियाँ या फल न खाये।
11) सुबह मे पेट भर भोजन करें। जबकि रात मे बहुत हल्का भोजन करें।
12) रात को खीरा, दही और कोई भी वात उत्पन्न करने वाली चीज न खाये।
13) दही के साथ उड़द की दाल न खाये। जैसे- दही और उड़द की दाल का बना हुआ भल्ला।
14) दूध के साथ नमक या नमक की बनी कोई भी चीज न खाये। क्योंकि ये दोनों एक दूसरे के प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
15) दूध से बनी कोई भी दो चीजे एक साथ न खाये।
16) कोई भी खट्टी चीज दूध के साथ न खाये सिर्फ एक खा सकते है आँवला। खट्टे आम का शेक न पिये केवल मीठे पके हुए आम का ही शेक पीये ।
17) कभी भी घी और शहद का उपयोग एक साथ न करे! क्योंकि दोनों मिलकर विष बनाते है।
18) खाना भूख से कम ही खाये। जीने के लिए खाना खाये न कि खाने के लिए जीये।
19) रिफाइण्ड तेल जहर हैं आप हमेशा कच्ची घाणी का सरसो, तिल या मूगंफली का तेल ही उपयोग करे और जीवन मे हाटॅ टेक व जोडो के दर्द से बचे ।
20) तला, और मसालेयुक्त खाना खाने से बचे। अगर ज्यादा ही मन हो तो सुबह मे खाये रात मे कभी भी नहीं।
21) खाने मे गुड या मिस्री का प्रयोग करें, चीनी के प्रयोग स बचें।
22) नमक का अधिक सेवन न करें। आयोडिन युक्त समुद्री नमक का उपयोग बिल्कुल भी नही करे! सेधां, काला या डली वाला नमक इस्तेमाल करें।
23) मेदा, नमक और चीनी ये तीनों सफ़ेद जहर है इनके प्रयोग से बचें।
24) हमेशा साधारण पानी से नहाएँ और पहले सर पर पानी डाले फिर पेरो पर और अगर गरम से नहाओ तो हमेशा पहले पैरो पर फिर सर पर पानी डालना चाहिये।
25) हमेशा पीठ को सीधी रख कर बेठे।
26) सर्दियों मे होंठ के फटने से बचने के लिए नहाने से पहले नाभि मे सरसों के तेल लगाये । जबरदस्त लाभ मिलता है।
27) शाम के खाने के बाद 2 घंटे तक न सोये। 5 से 10 मिनट वज्रासन मे बैठे 1000 कदम वाक जरूर करें।
28) खाना हमेशा ऐसी जगह पकाया जाये जहां वायु और सूर्य दोनों का स्पर्श खाने को मिल सके।
29) कूकर मे खाना न पकाए बल्कि किसी खुले बर्तन मे बनाए, क्योकि कूकर मे खाना उबलता है और खुले बर्तन के अन्दर खाना पकता हैं इससे खाने प्रोटीन मात्रा 93 प्रतिशत होती है और कूकर मे मात्र 13 प्रतिशत रहती है ।
30) सिल्वर के बर्तनो का प्रयोग खाना बनाने और खाने दोनों के लिए कभी भी न करें!पीतल, कासां, मिट्टी के बर्तन का ही उपयोग करें।
31) खाने को कम से कम 32 बार चबाये।
32) रोज टूथब्रश का प्रयोग न करें इससे मसूड़े कमजोर होते है। दंतमंजन का प्रयोग कर सकते है।
33) अपनी दोनों नासिकाओ मे देशी गाय के घी को हल्का गुनगुना करके 1-1 बुंद रात मे डालने से दिमाग तंदरुस्त रहता है। नजला जुकाम, सिर दर्द, माइगृेन, नींद नहीं आना, तनाव आदि समस्या का समाधान होता हैं
34) हमेशा मीठा, नमकीन से पहले खाना चाहिए ।

35) बार-बार नहीं खाना चाहिये एक बार बैठ कर भरपेट या उससे थोड़ा कम खाना चाहिये।
36) हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिये। नकारात्मक सोचने से भी बीमारियाँ आती है।

मंगलवार, अगस्त 04, 2015

Gharelu Upchar or Ayurvedik Dohe

आयुर्वेदिक दोहे
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१-एक नंबर

दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

२-दू नंबर -राजेश मिश्रा

बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

३-तीन नंबर
अजवाइन को पीसिये, गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

४- नंबर-राजेश मिश्रा
अजवाइन को पीस लें, नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..

५- नंबर
अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

६- नंबर-राजेश मिश्रा

ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..

७- नंबर
अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..

८- नंबर-राजेश मिश्रा
रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर..

९- नंबर
गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..

१०- नंबर
शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..

११- नंबर-राजेश मिश्रा
चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..

१२- नंबर

लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..

१३- नंबर-राजेश मिश्रा
प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह,
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

१४- नंबर
सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय,
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..

१५- नंबर-राजेश मिश्रा
सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..

१६- नंबर
तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..

१७- नंबर-राजेश मिश्रा
थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.

१८- नंबर-राजेश मिश्रा
अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..

१९- नंबर

ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि..

२०- नंबर-राजेश मिश्रा
दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..

२१- नंबर
मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख, महक दूर होय तत्काल..

२२- नंबर
कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..

२३- नंबर-राजेश मिश्रा

बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

२४- नंबर
बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..

२५- नंबर-राजेश मिश्रा

नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..

२६.- नंबर
मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय,
कंठ सुरीला साथ में, वाणी मधुरिम होय.

२७.- नंबर-राजेश मिश्रा
पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..

२८- नंबर-राजेश मिश्रा
ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम,
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..

२९- नंबर-राजेश मिश्रा
कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

३०- नंबर-राजेश मिश्रा

अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम,
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..

३१- नंबर-राजेश मिश्रा
छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।

ज्यादा से ज्यादा शेयर करे : राजेश मिश्रा और शेयर करनेवाले को आशीर्वाद और दुआ मिलेगी।

गुरुवार, जुलाई 30, 2015

मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट

60 दिनों के डाइट चार्ट से पा सकते हैं
एक परफेक्ट और फिट बॉडी : राज

मोटापा कम करना एक बहुत बड़ा चैलेंज है, खास तौर पर तब, जब वजन कुछ ज्‍यादा ही हो। ऐसे समय वजन कम करने के थका देने वाले शेड्यूल से भी कोई फायदा नहीं होता है। हर कोई स्‍लीम होने ... कई बार लोग डाइट के नाम पर भूखे रहते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदाई होता है। वजन घटाने के ... अपने डाइट चार्ट से अनहेल्‍दी फूड हटाकर कुछ ऐसी चीजें बढा़एं, जो स्वादिष्ट न हो लेकिन पोषक हो।
एक अच्छी पर्सनैलिटी की पहचान स्वस्थ शरीर से होती है। आप अपने काम में तभी परफेक्ट हो पाएंगे, जब आपका स्वास्थ्य अच्छा होगा और आप फिट होंगे। बिज़ी लाइफस्टाइल के चलते, आजकल सभी अपनी फिटनेस का ख़ास ख़्याल रखते हैं। फिट बॉडी के लिए ज़रूरी है कि आपकी डाइट भी हेल्दी हो। सही डाइट अगर नियमित रूप से टाइम पर ली जाए, तो आपका स्वास्थ्य सही रहेगा। इसके साथ एक्सरसाइज़ करना भी ज़रूरी है। यहां हेल्थ और वेलनेस गुरू आपको बता रहे हैं 2 महीने का डाइट प्लान। इससे आप बिना जिम गए और बिना पैसे खर्च किए सिर्फ 60 दिनों में पा सकते हैं एक परफेक्ट और फिट बॉडी।



Day 1
आज आपके हेल्थ प्रोग्राम का पहला दिन है। हमेशा ध्यान रखें कि आप जो भी आहार ले रहे हैं, वो सही मात्रा में हो। अपनी डाइट से स्टार्ची फूड जैसे ब्रेड, पास्ता और आलू को कम करें, क्योंकि इनमें बहुत ज़्यादा कैलोरीज़ होती हैं।

Day 2
आज आपके प्रोग्राम का दूसरा दिन है। फल खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन अगर आप अपने शरीर से एक्सट्रा फैट कम करना चाहते हैं, तो कुछ फल जैसे केला, चीकू, अंगूर और आम को अपनी डाइट में शामिल न करें। जूस लेने से बेहतर है फल खाएं।

Day 3
आज आपके डाइट चार्ट में हैं हेल्दी स्नैक्स। स्नैक्स में आप डिप की हुई वेजिटेबल सलाद, घर पर भुने हुए कुरमुरे, भेल, बिना मक्खन लगे हुए पॉपकॉर्न, ड्राय फूट्स और स्प्राउट्स खा सकते हैं। इससे आपको पूरे दिन के लिए एनर्जी मिलेगी।


Day 4

अपने हेल्थ प्रोग्राम में डाइट के साथ एक्सरसाइज़ भी शामिल करें, जैसे लिफ्ट के बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, मॉर्निंग वॉक।

Day 5
अगर आपको रात में उठ-उठकर खाने की आदत के लिए टोका जाता है, तो उन्हें बताएं कि यह खराब आदत नहीं हैं, बल्कि एक साथ ज़्यादा खाने से अच्छा है रुक-रुककर खाना। एेसा करने से एक बार में आपके शरीर में ज़्यादा फैट इकट्ठा नहीं होगा।

Day 6
चाय, कॉफी क्लोरीन युक्त पानी और सॉफ्ट ड्रिंक्स की जगह सोया मिल्क, वेजिटेबल जूस, फ्रूट जूस, सादा पानी और एलोवेरा जूस पिएं। इससे आप स्लिम एंड ट्रिम दिखेंगे।

Day 7
अगर आपको स्विमिंग आती है, तो यह रोज़ करें। इससे आपकी एक्सट्रा कैलोरीज़ बर्न होती हैं और आप फिट रहते हैं।

Day 8
प्योर वेजिटेरियन डाइट अपनाएं, जिसमें फलों और सब्जियों की भरपूर मात्रा हो। इसे वेदिक डाइट कहते हैं। इसके अलावा, स्प्राउट्स और अदरक-शहद को गर्म पानी में मिक्स करके पिएं। इससे शरीर का एक्सट्रा फैट कम होता है।

Day 9
क्या आपको पता है कि फल और सब्जियों के रंग भी शरीर को स्वस्थ बनाते हैं? लाल और नारंगी रंग के फल और सब्ज़ियों से नर्वस सिस्टम ठीक तरह से काम करता है। हरा रंग शरीर के एसिड और एल्कालाइन लेवल को संतुलित रखता है। जामुनी रंग के फल और सब्ज़ियां भी सेहत के लिए अच्छी होती हैं और आप आरामदेह महसूस करते हैं।

Day 10
अपनी डाइट में फ्रेश और नेचुरल तरीके से पकाए गए आहार ही शामिल करें। अल्कोहल और निकोटीन से बचें। रोज़ कम-से-कम 30 मिनट के लिए सैर करें। इससे आपके शरीर की थकान दूर होगी और दिमाग को भी शांति मिलेगी।

Day 11
आपके हेल्थ प्रोग्राम के दस दिन बीत चुके हैं। उम्मीद है कि आप हमारे डाइट चार्ट को फॉलो कर रहे हैं और फिटनेस की ओर बढ़ रहे हैं। अंगूर, केला, चीकू और आम को छोड़कर आप अच्छे से बाकी फल खाएं।

Day12
रोज़ कम-से-कम 2 लीटर पानी ज़रूर पिएं। एक गिलास पानी आपको 15 से 20 मिनट तक भूख लगने से रोकता है। साथ ही, पानी पीने से शरीर की आंतरिक गंदगी दूर होती है। इसलिए सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉफी और शेक के बजाए पानी भरपूर मात्रा में लें। वेजिटेरियन फूड लेने के साथ अपनी डाइट में तुलसी, गेहूं के जवारे, एलोवेरा, जिनसेंग (औषधीय पौधा, जो दक्षिण एशिया और उत्तर अमेरिका में पाया जाता हैं) को शामिल करें। यह आपके शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएगा और आपको सीज़नल इंफेक्शन से दूर रखेगा।

Day 14
स्नैक्स में हाई कैलोरीज़ और ऑयली फूड को अवॉइड करें। इसकी जगह मुट्ठी भर बादाम खाएं। इसमें प्रोटीन्स, मिनरल्स और अनसैचुरेटेड फैट होता है, जो ब्लड कोलेस्ट्रोल के लिए फायदेमंद है।आमतौर पर फूड फैट दो तरह के होते हैं- सैचुरेटेड फैट और अनसैचुरेटेड फैट। अनसैचुरेटेड फैट बेहतर होता है। यह वेजिटेबल ऑयल, नट्स और सीफूड में पाया जाता है।

Day 15
अच्छे स्वास्थ्य के लिए डिनर लाइट और कार्बोहाइड्रेट्स-फ्री होना चाहिए। सूप या सलाद डिनर के लिए बहुत हेल्दी होता है। डिनर करने के करीब 3 से 4 घंटे बाद सोना चाहिए।

Day 16

अगर आप वेजिटेरियन हैं, तो मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध, पनीर) और अंडे की जगह सोया मिल्क पी सकते हैं। मीट न खाने का फायदा यह होता है कि इससे कैंसर, डायबिटीज़, मोटापा और दिल से संबंधित बीमारियां होेने के चांसेस कम हो जाते हैं।

Day 17
ऐसा मत सोचिए कि आपकी खाने की आदत एक ही दिन में बदल जाएगी। इसके लिए हर रोज़ एक्सरसाइज़ करनी भी ज़रूरी है।

Day 18
यह ज़रूरी नहीं है कि दिन में आपको तीन बार ही खाना है। आप थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में 4 से 5 बार भी खा सकते हैं। हर 3 से 4 घंटे में खाने से आपका ब्लड शुगर लेवल नॉर्मल रहेगा और शरीर में एक्सट्रा फैट नहीं जमेगा।

Day 19
आपके आहार का ग्लाइसेमिक इन्डेक्स खाने के बाद शरीर के ब्लड शुगर को प्रभावित करता है। ग्लाइसेमिक इन्डेक्स एक प्रकार का न्यूमेरिकल मेज़रमेंट होता है। इससे यह मापा जाता है कि कौन-सा फूड आइटम ब्लड शुगर लेवल को कितना और कितनी तेजी से बढ़ा रहा है। इसलिए (low GI) कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स भोजन, जैसे- गेहूं की ब्रेड, पास्ता, उबले हुए आलू और अनपॉलिश्ड चावल का सेवन कीजिए। इनमें कार्बोहाइड्रेट्स कम होते हैं।

Day 20
भोजन में नमक की उचित मात्रा ही लेनी चाहिए। वो प्रोडक्ट्स जिनमें नमक ज़्यादा होता है, जैसे सॉस, कैचअप, चिप्स, पापड़, अचार, कैन और टिन वाले फूड आइटम्स को अवॉइड करना चाहिए।

Day 21
सोया में phytoestrogens होते हैं, जो महिलाओं में स्तन/ब्रेस्ट और ओवेरीअन/गर्भाशय कैंसर की संभावना कम करते हैं। सोया मिल्क दूसरे हाई प्रोटीन ड्रिंक्स की तुलना में बेहतर होता है, इसलिए खाने में पनीर की जगह टोफू खाएं। टोफू सोया दूध को जमाकर बनाया जाता है। जमी हुई दही को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाएं।


Day 22
केला हाई ब्लड प्रेशर के लिए अच्छा होता है, क्योंकि इसमें पोटेशियम की मात्रा ज़्यादा और सोडियम की मात्रा कम होती है। केला फाइबर्स का मुख्य स्रोत है और इससे पाचन क्रिया भी सही रहती है। केले के सेवन से तुरंत एनर्जी मिलती है।

Day 23
अल्कोहल, क्लोरीन युक्त पानी और सॉफ्ट ड्रिंक्स को अपनी डाइट से पूरी तरह हटा दीजिए। इनमें एनर्जी तो होती है, लेकिन न्यूट्रिशन बिल्कुल भी नहीं होता। इसकी जगह वेजिटेबल जूस, कोकोनट वॉटर, हर्बल चाय और चीनी डाले बिना, यानी अनस्वीटन्ड फ्रूट जूस पिएं।

Day 24
फ़िजिकल एक्टिविटी से थकान और स्ट्रेस दूर होता है। कभी-कभी बोरियत, डिप्रेशन और टेंशन में हम ज़्यादा खाना शुरू कर देते हैं। इसलिए एक्सरसाइज़ ज़रूर करें।बोरियत महसूस होने पर खाना खाने की जगह, म्यूज़िक सुनें या फिर कुछ ऐसा काम करें, जिससे आपको खुशी हो।

Day 25
एक दिन में एक बड़े चम्मच से ज़्यादा तेल का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। आप ऑलिव आयल या राइस ब्रैन ऑयल यूज़ कर सकते हैं। फूड आइटम्स को डीप फ्राइ करने की जगह ग्रिल या बेक करें।

DAY 26
जैसा कि हम पहले भी बता चुके हैं कि स्वस्थ और फिट रहने के लिए अपने भोजन में नॉनवेज, जैसे मीट, चिकन शामिल न करें। इससे न सिर्फ मोटापा बढ़ता है, बल्कि इनमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व भी मौजूद होते हैं। खासकर रेड मीट (गर्म मीट- सुअर, भैंस का) का सेवन कतई न करें। अगर आप नॉनवेज खाना ही चाहते हैं, तो फ्राइड फिश खाएं और अंडे का सफेद पोर्शन खाएं।

Day 27
इन टिप्स से आपको वज़न कम करने में मदद मिलेगी। 1- जब भी खाना खाएं, छोटी प्लेट में ही सर्व करें और हर बाइट को धीरे-धीरे चबा-चबा कर खाएं। 2- अगर आपका फेवरेट फूड भी है, तो भी ज़्यादा न खाएं। 3- कभी भी पूरा पेट भरकर नहीं खाएं।

Day 28

अपने भोजन में लहसुन का इस्तेमाल करें। लहसुन में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है। यह लिवर में carcinogens (एक प्रकार का कैंसरकारी पदार्थ) को निष्क्रिय करता है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए सलाद और सॉस में लहसुन ज़रूर डालें। सब्ज़ी बनाते हुए भी लहसुन-अदरक का पेस्ट डालना चाहिए। इससे सब्ज़ी का स्वाद भी बढ़ेगा और यह फायदा भी करेगा।

Day 29
पूरे दिन में नमक की मात्रा 2500 मिली ग्राम से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर नमक ज़्यादा लगे, तो नींबू भी खाने में डाल सकते हैं।

Day 30

आज आपके हेल्थ प्रोग्राम का एक महीना पूरा हुआ। हम उम्मीद करते हैं कि आप हमारे द्वारा बताए डाइट चार्ट को फॉलो कर रहे होंगे और अपनी सेहत में सुधार कर रहे होंगे। इस डाइट चार्ट को लंबे समय तक फॉलो करते रहने से आप अपनी फिटनेस को बरकरार रख पाएंगे।

Day 31

कुछ लोग डाइटिंग का गलत मतलब निकालते हैं और पतले होने के लिए खाना-पीना तक छोड़ देते हैं। यह एक अनहेल्दी और खतरनाक तरीका है। भोजन से सिर्फ भूख ही नहीं मिटती, बल्कि हमारे शरीर को एनर्जी भी मिलती है। अगर हम पर्याप्त भोजन नहीं करेंगे और भूखे रहेंगे, तो बीमार पड़ सकते हैं। इसलिए डाइटिंग का सही तरीका अपनाएं और फिट रहें।

Day 32
हमारा शरीर ब्रह्मांड की शक्तियों से प्रभावित होता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि जब भी आप कोई एक्सरसाइज़ करें तो मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इससे शरीर का मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है। एक्सरसाइज़ के दौरान अपनी गर्दन और बॉडी पार्ट्स को क्लॉकवाइस घुमाएं।

Day 33

एक्टिव रहना बहुत ज़रूरी है। एक ही जगह बैठे रहने से शरीर में फैट इकट्ठा होता रहता है। इसलिए अपने रूटीन में योगा, एक्सरसाइज़, वॉकिंग, जॉगिंग और एरोबिक्स शामिल करें। इससे शरीर की थकान दूर होती है और आप एक्टिव भी रहते हैं।

Day 34
एक्वा/वॉटर ऐरोबिक्स से शरीर की मांसपेशियां शेप में आती हैं। इससे ज्वाइंट और मांसपेशियों की चोट भी सही होती है। अपनी मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए अच्छी तरह सांस लें।

Day 35
सांस लेना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इससे आपकी मेंटल हेल्थ भी सही रहती है। जैसे कि अगर आप कन्फ्यूज़्ड हैं, तो लंबी सांसें लीजिए। जब भी आप टेंशन में हों, तो लंबी सांसें लें। कुछ देर में आप रिलैक्स्ड महसूस करेंगे।

Day 36
रोज़ बैलेंस्ड डाइट लें, जिसमें कैल्शियम, विटामिन और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा हो। फलों और सब्जियों का जूस भी पिएं।

Day 37

गाय के दूध की जगह सोया मिल्क पीना शुरू करें। नॉनवेज जैसे मीट और अंडे की जगह फलों और सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें। इससे कैंसर की संभावना कम हो जाती है।

Day 38
ताज़े सब्ज़ी और फल ही खाएं, यह शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। इसी तरह स्प्राउट्स और बादाम को भी अपने भोजन में शामिल करें। इससे आपके शरीर के साथ दिमाग को भी पॉज़िटिव एनर्जी मिलेगी।

Day 39
अपने शरीर को ठंडा रखने के लिए खीरे का खूब जूस पिएं। गर्मियों के दिनों में इसके साथ पुदीना भी ले सकते हैं। ज़्यादा मिर्च-मसाला और तली हुई चीज़ों से बचकर रहें। नारियल पानी पिएं।

Day 40
फलों और सब्ज़ियों से आपका नर्वस सिस्टम ठीक रहता है। ज़्यादा गुस्सा करने से भी बचें। जब भी गुस्सा आए, तो लंबी सांसें लें।

Day 41

एक छोटी प्लेट में जितना आ पाए, उतना ही खाएं। इसके बाद भी भूख लगे, तो आप कुछ हल्का और हेल्दी खा सकते हैं।

Day 42

फाइबर शरीर के लिए बहुत ज़रूरी होता है, लेकिन इसकी ज़्यादा मात्रा से पेट फूलने लगता है। अगर आप ज़्यादा फाइबर की मात्रा ले रहे हैं, तो इसके बाद खूब सारा पानी पिएं।

Day 43
शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ जैसे धूम्रपान, शराब, ड्रग्स, नॉनवेज और डेयरी प्रोडक्ट्स से बचकर रहें।

Day 44
वर्कआउट करने से शरीर में नए सेल्स का निर्माण होता है। इससे एनर्जी मिलती है। साथ ही, यह शरीर के सात चक्रों को एक सीध में संतुलित करता है।

Day 45
वेजिटेरियन फूड से शरीर और दिमाग को शक्ति मिलती है।

Day 46
योगा को अपने रूटीन में शामिल करें। योगा की प्रैक्टिस से शरीर को मज़बूती मिलती है।

Day 47
सोया में हाई प्रोटीन होता है। इसमें मीट के बराबर प्रोटीन तो होता ही है, साथ ही इसमें phytoestrogens हैं, जो महिलाओं में होने वाले स्तन और गर्भाशय कैंसर की संभावना कम करते हैं।

Day 48

ऐसा भोजन करें, जो ताज़ा हो, बनाने में आसान हो और नेचुरल तरीके से पकाया गया हो। पैकेज्ड फूट को अवॉइड करें। इससे आप मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेंगे।

DAY 49

भोजन में सजावट के लिए चीज़ और क्रीम की जगह नींबू के रस का इस्तेमाल करें। इसी तरह सुबह उठकर नींबू के रस को गर्म पानी में मिलाकर पिएं और अपने दिन की एक हेल्दी शुरुआत करें। इससे आप पूरे दिन एक्टिव रहेंगे।

DAY 50
स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ हेल्दी खाना ही नहीं, बल्कि एक्सरसाइज़ भी बहुत ज़रूरी है। इसलिए अपनी दिनचर्या में फिज़िकल एक्टिविटी शामिल करें। इससे आपकी थकान दूर होगी, साथ ही यह आपकी भूख और वज़न को कंट्रोल में रखेगा।

DAY 51
रिफाइंड शुगर का सेवन कम करें और ज्याद़ा मीठा खाने से बचें। चीनी से स्किन कोलेजन्स डैमेज हो जाते हैं। कोलेजन एक प्रकार का प्रोटीन है, जो हमारे शरीर में पाया जाता है। यह स्किन टिश्यू को आपस में जोड़ता है। कोलेजन के नष्ट हो जाने से त्वचा ढीली पड़ने लगती है।

DAY 52
सफेद रंग के आहार से बचें। इसमें डेयरी प्रोडक्ट्स, चीनी, चावल, ब्रेड और मैदा आते हैं। इनकी जगह आप गेहूं की बनी चीजें, जैसे ब्राउन या रेड राइस, व्हीट पास्ता और ब्रेड लें।

DAY 53

वज़न कम करने के लिए खाली पेट रहने का नुस्खा कभी मत अपनाएं। भूखे रहने के बाद जब आप खाना खाते हैं, तो आपके शरीर में एक्स्ट्रा फैट स्टोर हो जाता है, इसलिए खाना ज़रूर खाएं। वज़न कम करने के लिए आप कम मात्रा में दिन में 4 से 5 बार खाएं।

DAY 54

पालक, टमाटर और पपीते को अपने खाने में ज़रूर शामिल करें। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है, जो अर्ली साइन ऑफ एजिंग से स्किन को प्रोटेक्ट करते हैं और आंखों को भी स्वस्थ रखते हैं।

DAY 55
कई टिप्स हैं जो वज़न घटाने में असरदार हो सकते हैं, जैसे हर बाइट को चबा-चबाकर खाना। साथ ही, जितना एक बार में खा सकते हैं, उतना ही खाएं और टीवी के सामने बैठकर खाने से बचें।

DAY 56
पिलाटेस शरीर और दिमाग की एक्सरसाइज़ होती है। इससे शरीर की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं और बॉडी पोस्चर ठीक रहता है। इसलिए हर रोज़ पिलाटेस का अभ्यास करना चाहिए।

DAY 57
रोज़ 2 से 3 लीटर शुद्ध पानी पिएं। यह नेचुरल मिनरल्स से भरपूर होता है। पानी से चेहरा साफ और हाइड्रेटेड रहता है। सिर्फ यही नहीं, इससे डायजेशन सिस्टम भी सही रहता है।

DAY 58
क्लोरीन मिला हुआ पानी और कोल्ड ड्रिंक्स को अपनी डाइट से दूर रखें।

Day 59
दिन की शुरुआत सूर्य नमस्कार से करें। एक बार सूर्य नमस्कार करने से शरीर में पूरी तरह से खिंचाव आता है, जिससे सारे ज्वाइंट खुल जाते हैं। एक से ज़्यादा बार करने से आपको हार्ट प्रॉब्लम्स भी नहीं होतीं।

Day 60
रोज़ मेडिटेशन करें। इससे थकान तो दूर होती ही है, साथ ही यह आपको ऊर्जा देता है। इससे आपका कॉन्सन्ट्रेशन भी सही रहता है। इस तरह यह 60 दिनों का हेल्थ प्रोग्राम फॉलो करने से आप बिल्कुल फिट रहेंगे।

अब राजेश मिश्रा को इज़ाज़त दीजिये... मुझे आशा है... आप सभी को ये डाइट चार्ट पसंद आया होगा और आपके साथ आपके पुरे परिवार के लिए फायदेमंद साबित होगा.. 

Rajesh Mishra, Kolkata

रविवार, जुलाई 19, 2015

ये घरेलु नुस्खे हैं बेजोड़ ...राज

होमियो या एलोपैथिक दवा बार-बार लेने से बचें ...!

आज की लाइफस्टाइल और भाग - दौड़ की जिंदगी में आए दिन होने वाली इन तकलीफों में आराम पाने के लिए आजमाएं ये नुस्खे ...
* पीरियड्स का दर्द कुछ कम हो, इसके लिए एक गिलास ठंडे पानी में 2 - 3 नींबू निचोड़ कर पी लें !
* अगर तेज सिरदर्द हो - तो सेब काटकर उसमें थोड़ा सा नमक मिला कर सुबह खाली पेट खाएं - काफी आराम मिलेगा !
* बार - बार पेट फूलता है, तो पानी में 1/4 चम्मच बेकिंग सोडा पानी में मिलाकर पीने से आराम मिलेगा !
* अगर गले की खराश से परेशान हैं, तो 2 - 3 तुलसी की पत्तियों को डालकर पानी में उबाल लें - इस पानी से गरारा करें !
* मुंह के अल्सर में पका केला और शहद मिला कर खाने से काफी आराम मिलता है - इसे मुंह में लगाया भी जा सकता है !
* इसी तरह हाई बी पी का घरेलु इलाज करें - इसके लिए थोड़ा - थोड़ा मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांक लें!
( यह पाउडर डायबिटीज में भी लाभकारी है )
* अस्थमा है, तो आधा चम्मच दालचीनी पाउडर शहद में मिलाकर सोने से पहले खाएं - कुछ दिनों में फर्क महसूस करेंगे !
* कहीं जलन हो रही है या फिर धूप से त्वचा झुलस गई हो - कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है !
तरबूज के छिलके के सफेद भाग में कपूर और चंदन मिलकर लेप करें - जलन से शांति मिलेगी !
* जोड़ों के दर्द मेंं एक गिलास गर्म पानी में नींबू निचोड़कर दिन में 8 से 10 बार पीएं !
* बुखार आने पर अजवाइन चूर्ण आधा चम्मच दिन में तीन बार खाएं - जल्द राहत मिलेगी और बुखार उतर जाएगा !
* सरसों के तेल में 3 - 4 लहसुन की कली डालकर पका लें और ठंडा कर लें - इस तेल से मालिश करने से बदन दर्द में आराम मिलेगा !
* सौंफ और मिश्री का समभाग चूर्ण मिलाकर दो चम्मच दोनों समय भोजन के बाद लेते रहने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है !
* खरबूजे के साथ खरबूजे के बीज भी खाने चाहिए - क्योंकि बीज स्मरण शक्ति बढ़ाने व शरीर का पोषण करने में समर्थ हैं !
* गर्मी से चक्कर आना - उल्टी जैसा बार - बार लगता है, तो एक बर्तन में सौ ग्राम धनिया कूटकर डाल दें - उसमें लगभग आधा किलो पानी डाल दें ! एक घंटे बाद आधा कप पानी छानकर उसमें पांच बताशे डालकर हर तीन घण्टे में पीएं !
* तुलसी के पत्तों के रस में शहद या शक्कर मिला चाटने से चक्कर आना बन्द होता है !
* सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग उबालकर उस पानी को पीने से लाभ मिलता है !

शनिवार, जुलाई 04, 2015

राजेश मिश्रा की जनोपयोगी कुछ आवश्यक बातें

हर मर्ज का उपाय है इस आलेख में

सावन साग न भादौं दही, कुवार दूध न कातिक मही

हाथ जोड़कर आप सभी पाठकों से विनम्र निवेदन है इस आलेख को पुरे दिल से आत्मसात (कंठस्थ/याद) कर लें तो जिंदगी में कभी डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा. साथ ही राजेश मिश्रा द्वारा सुझाये गए इस आलेख से आप आस-पड़ोस और घर के डॉक्टर बन जायेंगे . यह आलेख हज़ारों पाठको से बातचीत और बड़े बुजुर्ग के कथन के साथ-साथ कई संकलन के बाद तैयार की गई है बहुत ही मेंहनत से ये आलेख (लिखी/संकलन से ) तैयार की गई है... पूरा जरूर पढ़ें और अपनों को पढ़ाएं : - राजेश मिश्रा 




आज का विज्ञान, चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी चमत्कारिक प्रयोग करता जा रहा है। छोटे-छोटे उपनगरों में भी बड़े-बड़े नर्सिग होम, डीएम, एमएस और एमडी चिकित्सकों की भरमार हो गई है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या जब ये चिकित्सक नहीं थे तो लोग बीमार होकर मर जाते थे? या आबादी वीरान हो जाया करती थी? बिल्कुल नहीं, लोग आज से ज्यादा स्वस्थ थे। आज भी गांवों में चिकित्सा की कोई बेहतर सुविधा नहीं है फिर भी 90 या 95 वर्ष के वृद्ध खेतों में काम करते हुए मिल जायेंगें। उनके उत्तम सेहत का राज है खान, पान, अनुपात और परम्परागत दिनचर्या। जो पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पूर्वजों द्वारा रटायी जाती रही है। ये सब दोहों, चौपाइयों और कविताओं के रूप में है। जिनके लेखक और रचनाकारों का कुछ अता-पता नहीं है।

इन कविताओं में भारतीय जलवायु, मौसम और परिवेश का ध्यान रखते हुए गहन शोध किया गया है। जो आज पढ़े लिखे समाज में लुप्तप्राय हैं। जिले के प्रख्यात वैद्य रहे स्व.शिवसहाय सिंह अपने शिष्यों व रोगियों को मौसम के निषिद्ध भोजन इस प्रकार समझाते थे- सावन साग न भादो दही, कुवार दूध न कातिक मही। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि मौसम विशेष में शारीरिक रासायनिक क्रियायें बदल जाया करती हैं। जलालपुर के इजरी गांव निवासी रामकुमार वैद्य अपनी कविताओं और गानों में खान-पान की दिनचर्या सुनाया करते थे।

भोजन के बाद की दिनचर्चा-भोजनोपरान्त थोड़ा टहल के बाई ओर करवट लेटना भी लाभकारी है। बासी भोजन खाना, हर हाल हानिकारक कहा, खाके तेज चलना या दौड़ना दुखारी है। किस भोजन के बाद कौन सा आहार स्वीकार है। कौन विष के समान है इसकी लम्बी फेहरिस्त है। -

  • पक्का कटहल खायके फिर लो पान चबाय, पेट फुलै सांसा रुके और तुरन्त मरिजाय।
  • जिस तेल में तली गई हो मछली उसी में, सिद्ध हुई पीपल जहर के समान है।
  • मधु की समान मात्रा घी या व्योम-जल संग, खाने वाले को ढकेल देता श्मशान है।
  • मधु या मकोय भी है एक साथ विष सम, प्रान हरने का यह करक प्रधान है

दूध के साथ इन फलों का सेवन निषिद्ध है-आम, आमड़ा, करौंदा, केला, नीबू, कागजी और नीबू जम्म्बूरी, वहेरी, बेर, कैंथ खाता है कमरख, कटहल, नारियल औ अनार, अखरोट आंवला न दूध से सुहाता है।

ये सारे के सारे प्रयोग लिपिबद्ध न होकर परम्परागत ढंग से लोगों द्वारा सुन-सुनकर याद किये गये हैं। ‘‘पूर्वजों ने जो भी कहा है उसकी प्रामाणिकता आज भी प्रासंगिक है, तब भी विज्ञान था। हमारे उन्हीं विज्ञान पर विदेशों में शोध हो रहा है। पुराने वैद्यों के पास दूर दर्शिता थी। सावन में साग वर्जित है कारण कि उस समय वैक्टीरिया का प्रभाव साग के पत्तों पर अधिक होता है।
भादों में दही इसलिए न खाना चाहिए कि उस समय भी वैक्टीरिया अधिक होती है। हमारे पूर्वज जो वैद्य के रूप में थे उनका अनुभव नकारा नहीं जा सकता। राज्य वैद्य नाड़ी देखकर बताते थे कि शरीर का ताप क्रम कितना है आज थर्मामीटर लगाये जाते हैं।’’

भोजन की विधि :-

  • सुबह के समय सूखा पदार्थ पहले खाएं फिर द्रव्य पदार्थ लें । भारी , मीठा और चिकना पदार्थ पहले खाएं,
  • अम्ल व लवण युक्त मध्य में खाएं ।
  • कडुवा, तीखा , कसैला अंत में खाएं ।
  • यदि भूख कम लगती है तो पहले गर्म पदार्थ पहले
  • खायें ।
  • रात्रि के समय सत्तू , फल और दही का सेवन ना करें।
  • हरा उड़द दालों में श्रेष्ठ है, यह हल्का और वातकारक है ।
  • कुलथी की दाल को सर्दियों में खाएं कफ, वायु , उदररोग , पथरी, साँस सम्बन्धी रोग को ठीक करता है ।
  • उड़द की दाल शुक्र को बढ़ाने वाला होता है ।
  • जौ पित्त , कंठ रोग और कफ को शांत करता है ।

निषेध :-

  • अति मधुर भोजन अग्नि को नष्ट करता है, अत्यंत लवण युक्त भोजन आँखों के हानिकर है, अति तीक्ष्ण,
  • तथा अति अम्ल युक्त भोजन वृद्धावस्था को बढाता है ।
  • दही, मधु , घृत, सत्तू , खीर, कांजी को छोड़कर अन्य आहार द्रव्य को खाते समय थोडा छोड़ देना चाहिए ।
  • पेट दर्द में- घी के साथ मिश्रित हींग, 
  • पुराने ज्वर में- मधु के साथ पीपर , 
  • वातरोग में- घी में भूना लहसुन, 
  • श्वांस रोग में - शहद मिश्रित त्रयूषण ( सोंठ, मिर्च, पीपल ), 
  • शीतरोग में- पान के रस में मिर्च, 
  • प्रमेह रोग में - त्रिफला के साथ गुड, 
  • सन्निपाति रोग में - शहद के साथ अदरक , 
  • ज्वर में - नागरमोथा तथा पित्तपापड़ा , 
  • गृहणी रोग में- मट्टा , गरविष में- स्वर्ण भस्म , उल्टी में - धान का लावा, 
  • अतिसार ( दस्त )में - कुटज , रक्तपित्त में - वासा , 
  • अर्श में - चित्रक , पेट के कीड़ों में - वायविडंग लाभप्रद है ।
  • दही :- दही को रात्रि में , ज्यादा गर्म करके , वर्षा ऋतु में , शरद ऋतु में दही नहीं खाना चाहिए । 
  • विना मूंग की दाल, मधु , घी , गुड के बिना दही नहीं खाना चाहिए ।
  • बिना पूरी जमे दही ना खाएं , रोजाना दही ना खाएं ।
पाठक बंधुओं! हजारों मरीजों को देख कर और न जाने कितने हजार मरीजों से बात करके मुझे एक बात बड़ी शिद्दत से परेशान करती रही कि ज्यादातर बीमारियों का मुख्य कारण गलत खान पान है। अगर हमें इस बात की सही जानकारी हो कि किस चीज के साथ क्या नहीं खाना चाहिए तो हो सकता है कि हम खुद को अनावश्यक रोगों से सुरक्षित रख सकें। इसलिए आप सभी से निवेदन है कि इस लेख को बहुत ध्यान से पढियेगा जिससे इसका लाभ आपको मिल सके। अगर ऎसी ही कुछ जानकारियां आपको हों तो मुझे जरूर बता दीजियेगा।

  • सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी। 
  • दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है। 
  • दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही, नमक, इमली, खरबूजा, बेल, नारियल, मूली, तोरई, तिल , तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए। 
  • दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए। 
  • गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए। 
  • ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं। 
  • शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं। 
  • खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी ,कटहल कभी नहीं। 
  • घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा
  • तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं। 
  • चावल के साथ सिरका कभी नहीं। 
  • चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं। 
  • खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं। 

कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे-

  1. खरबूजे के साथ चीनी 
  2. इमली के साथ गुड 
  3. गाजर और मेथी का साग
  4. बथुआ और दही का रायता 
  5. मकई के साथ मट्ठा 
  6. अमरुद के साथ सौंफ 
  7. तरबूज के साथ गुड 
  8. मूली और मूली के पत्ते 
  9. अनाज या दाल के साथ दूध या दही 
  10. आम के साथ गाय का दूध
  11. चावल के साथ दही
  12. खजूर के साथ दूध 
  13. चावल के साथ नारियल की गिरी
  14. केले के साथ इलायची 
कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं। और माले मुफ्त दिले बेरहम वाली कहावत तो मशहूर है ही। शादियों में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मैंने अनेक बार देखा है। कुछ लोगो तो बस फ्री में जहर भी मिल जाए तो थाली भर के खायेंगे ……खैर चलिए लेकिन माल भले ही दूसरे का हो पेट आप का ही होता है। और बाद में तकलीफ भी आप को ही होती है। आइये हम कुछ ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ --
  • केले की अधिकता में दो छोटी इलायची 
  • आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड 
  • जामुन ज्यादा खा लिया तो 3-4 चुटकी नमक 
  • सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम 
  • खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत 
  • तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग 
  • अमरूद के लिए सौंफ 
  • नींबू के लिए नमक
  • बेर के लिए सिरका
  • गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो 3-4 बेर खा लीजिये 
  • चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये 
  • बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च 
  • मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये 
  • बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं 
  • खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये 
  • मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं 
  • इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये 
  • मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये 
  • मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये 
  • घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं 
  • खुरमानी ज्यादा हो जाए तोठंडा पानी पीयें 
  • पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये 
अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये 80% बीमारियों से बचे रहेंगे। 

किस महीने में क्या नही खाना चाहिए और क्या जरूर खाना चाहिए ---

  1. चैत में गुड बिलकुल नहीं खाना, नीम की पत्ती /फल, फूल खूब चबाना। 
  2. बैसाख में नया तेल नहीं खाना, चावल खूब खाएं। 
  3. जेठ में दोपहर में चलना मना है, दोपहर में सोना जरुरी है। 
  4. आषाढ़ में पका बेल खाना मना है, घर की मरम्मत जरूरी है। 
  5. सावन में साग खाना मना है, हर्रे खाना जरूरी है। 
  6. भादो मे दही मत खाना, चना खाना जरुरी है। 
  7. कुवार में करेला मना है, गुड खाना जरुरी है। 
  8. कार्तिक में जमीन पर सोना मना है, मूली खाना जरूरी है। 
  9. अगहन में जीरा नहीं खाना, तेल खाना जरुरी है। 
  10. पूस में धनिया नहीं खाना, दूध पीना जरूरी है। 
  11. माघ में मिश्री मत खाना, खिचड़ी खाना जरुरी है। 
  12. फागुन में चना मत खाना, प्रातः स्नान और नाश्ता जरुरी है।
    Rajesh Mishra (Trip Trikut Pahad, Jharkhand)

शनिवार, जून 06, 2015

सेहत का खजाना : गर्मी का राजा ‘पुदीना’

गर्मी के मौसम में कई बड़ी बीमारियों
से बचाता है ‘पुदीना’


पुदिना सेहत के लिए तो अच्छा होता ही है ये गर्मी के मौसम में आपको कई बड़ी बीमारियों से भी बचाता है। मौसम की मांग के चलते पुदिना मार्केट में बहुत ही महंगे भाव में मिल रहा है।  पुदिना खाने का जायका बढाता है और पेट के लिए ठंडा होता है। पुदिना को जरूर खाना चाहिये क्‍योंकि यह पौष्टिकता से भरी होती है। 
आयुर्वेद के अनुसार पुदीना रूचिवर्ध्दक, स्वादिष्ट, सुगंधित, दिल के लिये फायदेमंद रूखा, तीखा, वात व कफ के विकार को दूर करने वाला, खांसी व नशा नाशक, पाचन शक्ति की कमजोरी, बदहजमी, आफरा, पेट दर्द, अतिसार, संग्रहणी, हैजा, पुराना बुखार और कृमिनाशक होता है। हिन्दी में इसे पुदीना, संस्कृत में पूतिहा, अंग्रेजी में स्पिअर मिण्ट, लैटिन में मेन्था स्पाइकेटा, गुजराती में फुदीनो, मराठी में पुदिना, बंगला में पोदीना, तमिल में पुदीना, पारसी में पुदिन नाम से जाना जाता है। पुदीने का प्रयोग पुरातन काल से होता आ रहा है। भोजन में पुदीने की जितनी उपयोगिता है, उतनी दूसरी शाक सब्जी या फल की नहीं है। चाहे शर्बत तैयार करना हो, महकदार चटनी का जायका लेना हो अथवा कढ़ी में भी महकदार पैदा करनी हो, रायता, छाछ, केरी का पानी हो इन सभी में पोदीने को डालकर जायकेदार बनाया जा सकता है। पुदीने से तमाम शारीरिक शिकार भी समाप्त हो जाते हैं। यदि लगातार पुदीने का प्रयोग किया जाता है, तो काया में व्याधि होने की सम्भावना भी कम हो जाती है। पुदीना अपनी सुगंध, खुशबू के लिए संसार में सर्वोपरि मान गया है। च्युंगम, मुखशुध्दि पेय तथा दंत पेस्ट आदि बनाने वाली सभी कम्पनियां किसी न किसी रूप में थोड़ी या अधिक मात्रा में पुदीने के रस का प्रयोग करती है। कहा जाता है कि पुदीने की पत्ती मुंह में रखकर चूसते रहना अमृत जैसा है। पुदीना विटामिन ‘ए’ की खान है। पुदीने में जितने विटामिन पाये जाते हैं, उतने न तो किसी विशेष वस्तु में होते हैं न ही किसी दवा में होते हैं। पुदीना एक विलक्षण व अनुपम औषधि है।
पुदीने को सामान्यत: तीन किस्मों में विभाजित किया जाता है। वन्य (जंगली) पुदीना, पर्वतीय (पहाड़ी) पुदीना और जलीय पुदीना।

पुदीने के औषधीय उपयोग-

  • सलाद में इसका उपयोग स्वास्थ्यवर्ध्दक है। प्राय: प्रतिदिन इसकी पत्ती चबाई जाये तो दंत क्षय, मसूढ़ों से रक्त निकलना, पायरिया आदि रोग कम हो जाते हैं। यह एण्टीसेप्टिक जैसा कार्य करता है, और दांतों तथा मसूढ़ों को आवश्यक पोषक तत्व पहुंचाता है।
  • एक गिलास पानी में पुदीने की 4/5 पत्तियां डालकर उबालें ठण्डा होने पर फ्रिज में रख दें। इस पानी से कुल्ला करने पर मूंह की दुर्गंध दूर हो जाती है।
  • पुदीना कीटनाशक है यदि घर के चारों तरफ पुदीना के तेल का छिड़काव कर दिया जाये तो मक्खी, मच्छर, चींटी आदि कीटाणु भाग जाते हैं।
  • पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लेप करने से, भाप लेने से मुहांसे, चेहरे की झाइयों एवं दागों में लाभ होता है।
  • एक टब में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें पुदीने का तेल डालकर यदि उसमें पैरों को रखा जाये तो थकान से राहत मिलती है, और बिवाईयों के लिए बहुत लाभकारी है।
  • पुदीने का ताजा रस क्षय रोग, अस्थमा एवं विचित्र प्रकार के श्वास रोगों में बहुत ही लाभकारी है।
  • पानी में नींबू का रस पुदीना एवं काला नमक मिलाकर पीने से मलेरिया के बुखार में राहत मिलती है।
  • हकलाहट दूर करने के लिए पुदीने की पत्तियों में काली मिर्च पीस लें तथा सुबह शाम एक एक चम्मच सेवन करे। हकलाहट दूर हो जायेगी।
  • हिचकी की शिकायत होने पर इसकी पत्तियों को चूसने से या इसके रस को शहद के साथ लेने से राहत मिलती है।
  • प्राकृतिक भोजन में रूचि रखने वाले लोगों में पुदीना डालकर बनाई गई चाय अच्छी रहती है, तथा पुदीने की चाय में एक दो चुटकी नमक मिलाकर पीने से खांसी में लाभ होता है।
  • हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, हैजा हो तो आधा कप रस हर घण्टे के अन्तराल पर रोगी को पिलाये।
  • पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है, तथा न्यूमोनिया से होने वाले विकार भी नष्ट हो जाते हैं। यदि आंतों की खराबी शिथिलता या अन्य पेट के कोई अन्य रोग हो तो पुदीना सेवन कर इन्हें दूर किया जा सकता है।
  • पेट में अचानक दर्द उठता हो, मरोड़ हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करे। पेट दर्द में राहत मिलेगी।
  • मुंह में छाले हो गये हो तो पुदीने के गाढ़े क्वाथ में रूई के फाहों को अच्छी तरह भिगोकर लगाने से छाले तथा घाव ठीक होकर राहत मिलती है।
  • नकसीर की शिकायत होने पर प्याज एवं पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है।
  • आजकल तो बाजार में ‘पुदीन हरा’ नामक औषधि प्रचलन में आ गई है। जो अजीर्ण बदहजमी, पेट दर्द में रामबाण है।
अगर आप पुदिना खाने का शौक रखते हैं, तो इसे अपने घर पर ही उगाएं।  इसे बडे से गमले में उगाइये जिससे आप हर वक्‍त इसका आनंद ले सकें। पुदिना को घर पर उगाना बहुत ही आसान है आइये जानते हैं कि पुदिना को घर पर कैसे उगाया जा सकता है।
पुदीना का छोटा पौधा कहीं भी किसी भी जमीन व यहां तक कि गमले में भी आसानी से उग जाता है। यह गर्मी को झेलने की शक्ति रखता है। इसे किसी भी उर्वरक की आवश्यकता नहीं पड़ती है। थोड़ी सी मिट्टी और पानी इसके विकास के लिये पर्याप्त है। पुदीना की उपज किसी भी समय ली जा सकती है। गर्मी के दिनों में तो इसकी उपज व बढ़वार अच्छी होती है। इसकी पत्तियों को ताजा तथा सुखाकर भी प्रयोग में लाया जा सकता है।

घर पर ऎसे उगाएं पुदिना का पौधा -

1. गमला और जगह चुनें- पुदिना लगाने के लिये गमला काफी बड़ा होना चाहिये जिससे वह आराम से लग जाए। गमले को सूरज की तेज धूप से दूर रखें साथ ही इसे दूसरे पौधों के पास नही रखें। पुदिना को ज्‍यादा धूप की जरूरत नहीं होती। इसे इंफेक्‍शन से बचाने के लिये इन्‍हें दूसरे गमलों के पास ना रखें। 

2. बीज बोना- बीज को किसी भी समय बोया जा सकता है। फिर यह आठ हफ्तों के अदंर बिल्‍कुल ठंड में उगेगा। बीज को मिट्टी में दो इंच नीचे बोना चाहिये। 

3. पानी- पुदिना के पौधे को उगने के लिये नमी की जरूरत होती है। पर इन्‍हें इतना भी पानी ना दें कि यह सड़ जाए। पानी की सही मात्रा ही दी जानी चाहिये। पौधों को सही तरह से नमी प्राप्‍त हो इसके लिये पौधे के चारों ओर फूल, फलों की पत्‍तियों को बिछा दें। इससे अत्‍यधिक पानी वे सोख लेगें और आपका पौधा खराब भी नहीं होगा। पुदिना को दिन में दो बार पानी दें।

4. गमले की खाद- पुदिना के पौधों को अच्‍छी तरह से उगने के लिये खाद की आवश्‍यकता पड़ती है। इसलिये उन्‍हें हर 10 दिन बाद प्राकृतिक खाद ही दें। खाद तब तक डालें जब तक कि वह कटाई योग्‍य ना हो जाएं। प्राकृतिक खाद में किचन का वेस्‍ट, गांय का गोबर या फिर अन्‍य फल और पत्तियों का इस्‍तमाल किया जा सकता है। 

5. कटाई- वैसे पुदिना के पौधों को उगने में 6 से 8 हफ्ते आराम से लग जाते हैं। आप चाहें तो गमले से केवल पत्तियों को तोड़ सकती हैं या फिर पूरे पौधों को जड़ सहित ही निकाल सकती हैं। पौधों को उस पर फूल लगने से पहले ही काट लेना चाहिये।

शनिवार, मई 23, 2015

गर्मी में कैसा हो आपका खान-पान

गर्मी में क्या खाना चाहिए और किस-किस से करें परहेज़
गर्मी के मौसम की दिनचर्या
Summer Routine : Food, water and shelter

गर्मी अनेक समस्याओं के साथ दस्तक दे चुकी है। सावधानी न बरती जाए तो इस मौसम में बीमार पड़ना तय-सा हो जाता है। राजेश मिश्रा बता रहे हैं इस मौसम में अपनी और परिवार की देखभाल करने के उपाय।
गर्मियां हमारे शरीर को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। इस मौसम में बाहरी तापमान बढ़ने से हमारे शरीर का ताप भी बढ़ जाता है, इसलिए हमें ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए, जो शरीर को ठंडा रखे। गर्मियों में हमारा पाचन-तंत्र भी कमजोर पड़ जाता है, इसलिए जरूरी है कि ताजा और हल्का भोजन किया जाए। बढ़ता तापमान संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है, इसलिए इस मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। गर्मियों में अधिक समय घर से बाहर न बिताएं।
बदलती ऋतुओं के अनुसार शरीर में स्वाभाविक रासायनिक परिवर्तन होते हैं और इस परिवर्तन में ऋतूचर्यानुसार खाध्य पदार्थों का सेवन किया जाए तो वात-पित्त-कफ के उभार से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है| यहाँ राजेश मिश्रा करेंगे  गर्मी की ऋतू में अच्छी सेहत के लिए सेहतमंद दिन चर्या की बात -
अल सुबह उठते ही 2-3 गिलास पानी पीना चाहिए| इसके बाद शौच,दन्त सफाई,आसान और प्राणायाम नियमित रूप से करें| अब रात को पानी भिगोये हुए 11  बादाम को छिलके उतारकर पीसकर एक गिलास दूध के साथ पीएं| इसके नियमित प्रयोग से शारीरिक तंदुरुस्ती मिलती है और आंतरिक उष्मा शांत होती है| गर्मी के मौसम में तले भुने,गरिष्ठ और ज्यादा मसालेदार पदार्थों की बजाय फल फ्रूट ,हरी सब्जियों के सलाद और जूस का ज्यादा इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद रहता है| इससे गर्मी की वजह से पसीना होने से होने वाली पानी कमी का पुनर्भरण भी होता रहता है|
ग्रीष्म ऋतू में बाजारू चीजें खाने से बचने की सलाह दी जाती है| इस मौसम में शारीरिक कमजोरी, अपच,  दाद, पेचिश, सीने में जलन, खूनी बवासीर, मुहं की बदबू आदि रोगों से बचने का सरल उपचार भी लिख देता हूँ| खाली पेट,नींबू का रस आंवले का रस और हरे धनिये का रस मिश्री मिलाकर पीने से कई रोगों से बचाव हो सकता है| दोपहर और सांयकालीन भोजन में चावल के साथ अरहर,मूंग,उडद की दाल और हरी पत्तीदार सब्जियों का समावेश करें| छाछ व् दही का सेवन करना हितकारी है| रात का भोजन ना करें तो ज्यादा अच्छा|
गर्मी में घर से बाहर निकलने के पहले 2 गिलास पानी जरूर पी लेना चाहिए| टमाटर, तरबूज, खरबूज, खीरा ककड़ी, गन्ने का रस और प्याज का उपयोग करते रहना चाहिए| इन चीजों से पेट की सफाई होती है और अंदरूनी गर्मी शांत होती है|

गर्मी दूर भगाने के कारगर तरीके-

नींबू पानी- यह गर्मी के मौसन का देसी टानिक है| शरीर में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाने पर एनीमिया, जोड़ों का दर्द, दांतों के रोग, पायरिया, खांसी और  दमा जैसी दिक्कते हो सकती हैं| नींबू में भरपूर विटामिन सी होता है| अत: इन बीमारियों से दूरी बनाए रखने में यह उपाय सफल रहता है| पेट में खराबी होना, कब्ज, दस्त होना में नींबू के रस में थौड़ी सी हींग, काली मिर्च, अजवाइन, नमक , जीरा मिलाकर पीने से काफी राहत मिलती है|

तरबूज का रस- 

तरबूज के रस से एसीडीटी का निवारण होता है| यह दिल के रोगों डायबीटीज व् केंसर रोग से शरीर की रक्षा करता है|

पुदीने का शरबत- 

गर्मी में पुदीना बेहद फायदेमंद रहता है| पुदीने को पीसकर स्वाद अनुसार नमक,चीनी जीरा मिलाएं| इस तरह पुदीने का शरबत बनाकर पीने से लू.जलन, बुखार, उल्टी व गैस जैसी समस्याओं में काफी लाभ होता है|

ठंडाई- 

गर्मी में ठंडाई काफी लाभ दायक होती है| इसे बनाने के लिये खस खस और बादाम रात को भिगो दें|सुबह इन्हें मिक्सर में पीसकर ठन्डे दूध में मिलाएं| स्वाद अनुसार शकर मिलाकर पीएं| गर्मी से मुक्ति मिलेगी|

गन्ने का रस- 

गर्मी में गन्ने का रस सेहत के लिये बहुत अच्छा होता है| इसमें विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं| इसे पीने से ताजगी बनी रहती है| लू नहीं लगती है| बुखार होने पर गन्ने का रस पीने से बुखार जल्दी उतर जाता है| एसीडीटी की वजह से होने वाली जलन में गन्ने का रस राहत पहुंचाता है| गन्ने के रस में नीम्बू मिलाकर पीने से पीलिया जल्दी ठीक होता है| गन्ने के रस में बर्फ मिलाना ठीक नहीं है|

छाछ - 
गर्मी के दिनों में छाछ का प्रयोग हितकारी है| आयुर्वेद शास्त्र में छाछ के लाभ बताए गए हैं| भोजन के बाद आधा गिलास छाछ पीने से फायदा होता है| छाछ में पुदीना ,काला नमक,जीरा मिलाकर पीने से एसीडीटी की समस्या से निजात मिलती है|

खस का शरबत - 

गर्मी में खस का शरबत बहुत ठंडक देने वाला होता है| इसके शरबत से दिमाग को ठंडक मिलती है| इसका शरबत बनाने के लिये खस को धोकर सुखालें| इसके बाद इसे पानी में उबालें| और स्वाद अनुसार शकर मिलाएं| ठंडा होने पर छानकर बोतल में भर लें|

सत्तू - 

यह एक प्रकार का व्यंजन है| इसे भुने हुए चने , जोऊं और गेहूं पीसकर बनाया जाता है| बिहार में यह काफी लोकप्रिय है| सत्तू पेट की गर्मी शांत करता है| कुछ लोग इसमें शकर मिलाकर तो कुछ लोग नमक और मसाले मिलाकर खाते हैं|

आम पन्ना - 

कच्चे आम को पानी में उबालकर उसका गूदा निकाल लें| इसमें शकर, भुना जीरा, धनिया, पुदीना, नमक मिलाकर पीयें| गर्मी की बीमारियाँ दूर होंगी|

हर दो घण्टे में 24 आउंस पानी पिएं

लोग अमूमन प्यास लगने पर पानी पीते हैं, जबकि डिहाइड्रेशन से बचने का तरीका यह है कि हर 10 मिनट पर पानी पीते रहें और प्यास लगने की नौबत ही न आए। डायटीशियन नीतू चांदना कहती हैं, ‘एक वयस्क व्यक्ति को गर्मी के मौसम में घर से निकलते वक्त 17 से 20 आउंस पानी पीना चाहिए। अगर खाली पानी न पिया जाए तो जूस या सूप के रूप में लिक्विड ले लें।’
जितनी देर बाहर रहें, हर 10 मिनट पर 7 से 10 आउंस पानी लेते रहें। ध्यान रहे कि हर दो घण्टे में शरीर को 24 आउंस पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा अगर सिर दर्द या शरीर में खिंचाव महसूस हो तो भी तुरंत पानी पिएं। पानी के अलावा सोडियम, पोटेशियम और नमक की कमी से भी डिहाइड्रेशन होता है, इसीलिए नमक खूब खाएं। फलों या स्नैक्स पर नमक ऊपर से डाल कर खाएं। सोडियम और पोटैशियम के लिए तरबूज, लीची, दही खाएं।

अदरक, काली मिर्च, तुलसी खाएं

नीतू सलाह देती हैं कि खाने में तुलसी की पत्ती और तुलसी के बीज का इस्तेमाल करें। तुलसी शरीर के लिए एक तरह से एंटीसेप्टिक का काम करती है। इसके अलावा सब्जी की ग्रेवी में भुना बेसन डालें, ये दोनों ही चीजें शरीर को ठंडा रखती हैं। खाने में प्याज, अदरक, काली मिर्च और लहसुन की मात्र बढ़ा दें। ये मसाले खून को साफ रखते हैं और इन्हें खाने से चूंकि पसीना निकलता है, इसलिए शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है। एलर्जी और फूड प्वाइजनिंग जैसी बीमारियां अपनी गिरफ्त में नहीं लेतीं।

चीनी कम, शहद ज्यादा

खान-पान में मिठास जितनी ज्यादा होगी, शरीर को ऊर्जा उतनी ही मिलेग, इसलिए ऐसी चीजें खाएं, जो अच्छा कार्बोहाइड्रेट दे सकें। लेकिन चीनी से परहेज करें, क्योंकि चीनी शरीर को खराब कार्बोहाइड्रेट देती है, जिससे ऊर्जा तो मिलती है, मगर पाचन संबंधी शिकायत भी हो जाती है। चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल करें। इससे आपके शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बनेगा। आप ग्रीन टी या दूध में शहद मिला कर पी सकते हैं। ऐसे फल खाएं, जिनमें ग्लूकोस का अंश हो। संतरा, मौसमी, लीची ऐसे ही फल हैं।

गर्मियों में क्या खाएं

मौसमी फल और सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करें। गर्मियों में मिलने वाली सब्जियां मुलायम, गूदेदार और नमी से भरपूर होती हैं, जो इस मौसम के लिहाज से बिल्कुल उपयुक्त होती हैं। ये सभी सब्जियां ठंडी तासीर वाली, पचने में आसान और उन सभी पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो इस गर्म और आर्द्र मौसम से शरीर का तालमेल बैठाने के लिए जरूरी हैं। लौकी, करेला, तोरी, कद्दू, खीरा, टिंडा, परमल, भिंडी, चौलाई जैसी गर्मियों की सब्जियों का सेवन करें। खीरा, पुदीना, तरबूज, मौसमी का सेवन भी करें। ये प्यास बुझाने वाले होते हैं, क्योंकि इनमें सोडियम और कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और एंटी ऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम और विटामिन ए काफी मात्रा में होते हैं। आम और दही भी कूलिंग वाले भोजन हैं। इनमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है।
प्याज में क्वेरिस्टिंग होता है, जो गर्मी से त्वचा पर पड़ने वाले रैशेज में आराम पहुंचाता है। तरबूज और खरबूजे में करीब 90 प्रतिशत पानी होता है और ये पचने में भी आसान होते हैं। गर्मियों में आने वाले इन फलों का सेवन जरूर करें। इस मौसम में अंगूर भी खूब आते हैं, जिनका सेवन काफी फायदेमंद होता है। इनमें लायकोपीन होता है, जो त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों के हानिकारक प्रभाव से बचाता है।
खाने के साथ सलाद जरूर खाएं। कच्ची सब्जियों से जरूरी एंजाइम मिलते हैं, जो शरीर को भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण करने में मदद करते हैं। शरीर जितने पोषक तत्वों का अवशोषण करेगा, उतना ही स्वस्थ रहेगा। सलाद फाइबर से भरपूर होने के कारण पाचन-तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

क्या न खाएं

  1. कैफीन से दूर रहें। इससे डीहाइड्रेशन बढ़ता है। 
  2. अधिक वसायुक्त और भारी भोजन न खाएं।
  3. तले हुए और मसालेदार भोजन से दूर रहें।
  4. बासी और गंदे माहौल में बना खाना न खाएं।
  5. प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से बचें।
  6. मिठाइयां कम से कम खाएं।

बढ़ा दें तरल पदार्थों का सेवन

गर्मी में हमारे शरीर को काम करने के लिए बहुत कम मात्रा में ऊष्मा की आवश्यकता होती है, इसलिए इस मौसम में हमें खाना कम खाना चाहिए और तरल पदार्थ ज्यादा लेने चाहिएं। डॉंक्टरों का कहना है कि गर्मियों में हमें अपने भोजन को खाना नहीं, पीना चाहिए। रोजाना तीन से चार लीटर पानी पिएं। इसके अलावा जूस, छाछ, लस्सी, नींबू पानी, नारियल पानी और आम पना का सेवन भी करें। डिब्बाबंद जूस का सेवन करने से बचें।

फलों, सब्जियों, दूध, ग्रीन टी और जूस में भी काफी मात्रा में पानी होता है। जो लोग इन चीजों का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, उन्हें ज्यादा मात्रा में पानी की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए अगर आपको बार-बार पानी पीना पसंद नहीं है तो अपने डाइट चार्ट में उन चीजों की मात्रा बढ़ा दें।

गर्मियों में जल्दी खराब हो जाता है खाना

इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, इसलिए फूड पॉयजनिंग, डायरिया और उल्टी-दस्त के मामले अत्यधिक बढ़ जाते हैं। अधिकतर लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखी सब्जियां, फल और खाना लंबे समय तक खराब नहीं होता, जो गलत है। कच्ची सब्जियों और फलों को 2 से 4 दिन से अधिक समय तक न रखें।

डीहाइड्रेशन और संक्रमण से बचाव

गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) हो जाती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी होने से लू लगने की आशंका बढ़ जाती है। गर्मियों में घर से बाहर धूप में अधिक समय न बिताएं। इससे शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे थकान, रक्तचाप कम होना, कमजोरी महसूस होना आदि समस्याएं हो सकती हैं। पानी के अलावा आप नारियल पानी, नींबू पानी, बेल के शरबत आदि से भी अपने शरीर में शीतलता बनाये रख सकते हैं। अपने युरिन के रंग पर नजर रखें। गहरे रंग का युरिन डीहाइड्रेशन की निशानी है। उसका रंग हल्का रखने के लिए अधिक मात्रा में पानी पिएं।
गर्मी के मौसम में दूषित जल पीने व बाहर के कटे-खुले खाद्य पदार्थ खाने के कारण हैजा, टाइफाइड, पीलिया, आंतों में सूजन व अनेक प्रकार के संक्रमणों के मामले बढ़ जाते हैं। कई बार अधिक खाना भी फूड पॉयजनिंग का कारण बन जाता है। घर पर बना सादा और सुपाच्य भोजन ही करें। बाहर खाने से बचें। कभी मजबूरी में बाहर खाना भी पड़े तो ऐसे रेस्तरां से खाएं, जहां ताजा और हाइजनिक खाना मिले।

रहें ऊर्जा से भरपूर

अपने दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करें। कम वसा वाला भोजन खाएं और ताजे फलों का रस पिएं। तले हुए और मसालेदार भोजन से बचें। अल्कोहल व कैफीन का सेवन कम करें, क्योंकि इनसे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और आप सुस्ती अनुभव करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

  • सब्जियों, फलों और बचे हुए खाने को तुरंत फ्रिज में रख दें।
  • फ्रिज का तापमान बहुत महत्वपूर्ण है। यह पांच डिग्री सेल्सियस से कम और फ्रीजर का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
  • कच्चे और पके हुए मांस तथा सी फूड को ज्यादा समय तक स्टोर न करें, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।
  • यह जांचने के लिए कि भोजन सही है या नहीं, उसे चखना नहीं चाहिए, क्योंकि कई बार यह बेहद नुकसानदेह साबित होता है।
  • दूध और दुग्ध उत्पादों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर न रखें।
  • बचे हुए खाने को ज्यादा समय तक रेफ्रिजरेटर के बाहर न रखें। दोबारा सेवन करने से पहले उसे ठीक से गर्म कर लें।
  • एक्सपाइरी डेट के खाद्य पदार्थों का सेवन कतई न करें।
  • उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।