दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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रविवार, जुलाई 19, 2015

ये घरेलु नुस्खे हैं बेजोड़ ...राज

होमियो या एलोपैथिक दवा बार-बार लेने से बचें ...!

आज की लाइफस्टाइल और भाग - दौड़ की जिंदगी में आए दिन होने वाली इन तकलीफों में आराम पाने के लिए आजमाएं ये नुस्खे ...
* पीरियड्स का दर्द कुछ कम हो, इसके लिए एक गिलास ठंडे पानी में 2 - 3 नींबू निचोड़ कर पी लें !
* अगर तेज सिरदर्द हो - तो सेब काटकर उसमें थोड़ा सा नमक मिला कर सुबह खाली पेट खाएं - काफी आराम मिलेगा !
* बार - बार पेट फूलता है, तो पानी में 1/4 चम्मच बेकिंग सोडा पानी में मिलाकर पीने से आराम मिलेगा !
* अगर गले की खराश से परेशान हैं, तो 2 - 3 तुलसी की पत्तियों को डालकर पानी में उबाल लें - इस पानी से गरारा करें !
* मुंह के अल्सर में पका केला और शहद मिला कर खाने से काफी आराम मिलता है - इसे मुंह में लगाया भी जा सकता है !
* इसी तरह हाई बी पी का घरेलु इलाज करें - इसके लिए थोड़ा - थोड़ा मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांक लें!
( यह पाउडर डायबिटीज में भी लाभकारी है )
* अस्थमा है, तो आधा चम्मच दालचीनी पाउडर शहद में मिलाकर सोने से पहले खाएं - कुछ दिनों में फर्क महसूस करेंगे !
* कहीं जलन हो रही है या फिर धूप से त्वचा झुलस गई हो - कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है !
तरबूज के छिलके के सफेद भाग में कपूर और चंदन मिलकर लेप करें - जलन से शांति मिलेगी !
* जोड़ों के दर्द मेंं एक गिलास गर्म पानी में नींबू निचोड़कर दिन में 8 से 10 बार पीएं !
* बुखार आने पर अजवाइन चूर्ण आधा चम्मच दिन में तीन बार खाएं - जल्द राहत मिलेगी और बुखार उतर जाएगा !
* सरसों के तेल में 3 - 4 लहसुन की कली डालकर पका लें और ठंडा कर लें - इस तेल से मालिश करने से बदन दर्द में आराम मिलेगा !
* सौंफ और मिश्री का समभाग चूर्ण मिलाकर दो चम्मच दोनों समय भोजन के बाद लेते रहने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है !
* खरबूजे के साथ खरबूजे के बीज भी खाने चाहिए - क्योंकि बीज स्मरण शक्ति बढ़ाने व शरीर का पोषण करने में समर्थ हैं !
* गर्मी से चक्कर आना - उल्टी जैसा बार - बार लगता है, तो एक बर्तन में सौ ग्राम धनिया कूटकर डाल दें - उसमें लगभग आधा किलो पानी डाल दें ! एक घंटे बाद आधा कप पानी छानकर उसमें पांच बताशे डालकर हर तीन घण्टे में पीएं !
* तुलसी के पत्तों के रस में शहद या शक्कर मिला चाटने से चक्कर आना बन्द होता है !
* सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग उबालकर उस पानी को पीने से लाभ मिलता है !

बुधवार, मार्च 25, 2015

राज का स्वास्थ्य चालीसा

Raj's Health Chalisa
स्वस्थ रहने के सूत्र

एक स्वस्थ जीवन शैली का चयन करना एक लंबी, अधिक पूरा जीवन हो सकता है। आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार से आप के आसपास हर किसी पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आप उदाहरण के माध्यम से अपने परिवार और दोस्तों के बेहतर आदतों को सिखा सकते हैं स्वस्थ रहने के विचार से भयभीत होने की जरूरत नहीं है. कुछ छोटे परिवर्तन करने से आपको बड़े परिणाम देखने को मिल सकते है।

मनुष्य के जीवन में स्वास्थ्य का सर्वाधिक महत्व है। स्वास्थ्य के बिना धन ,संपत्ति, मनोरंजन और अन्य सुविधाएं महत्व हीन हैं। कहते हैं जो व्यक्ति तन और मन से स्वस्थ् होता है, वह संसार का सबसे सुखी प्राणी है, क्योंकि स्वस्थ् तन में ही स्वस्थ् मन रहता है। हमारे ऋषि मुनियों ने शुरू से ही स्वास्थ्य के महत्व को स्वीकार किया है और स्वस्थ बने रहने के लिए प्रकृति के नियमों का पालन करने की सलाह दी है। जो मनुष्य सूर्योदय से पूर्व उठते हैं और अपनी दिनचर्या पूर्ण करके निर्धारित समय के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करते हैं, निष्काम भाव से कर्म करते हैं तथा रात्रि में समय पर शयन करते हैं वे हमेशा स्वस्थ् बने रहते हैं। स्वस्थ रहने का सबसे आसान मंत्र है- प्रकृति के नियमों का पालन, कठोर शारीरिक परिश्रम और पौष्टिक, सादा व गर्म भोजन। आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हम यहाँ दे रहे कुछ टिप्स जिन पर अमल करके आप अपने आपको चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं।

ताजा हवा और धूप

सूरज की रोशनी के कई फ़ायदे है इस से आपकी त्वचा सूर्य के प्रकाश के संपर्क मे रहती है. इस से आपको विटामिन डी मिलता है जिससे आपके शरीर के निर्माण और मजबूत, स्वस्थ हड्डियों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है जो कैल्शियम को अवशोषित में मदद करता है।
1. दूध और कटहल का कभी भी एक साथ सेवन नहीं करना चाहिये ।
2. दूध और कुलत्थी भी कभी एक साथ नहीं लेना चाहिए।
3. नमक और दूध (सेंधा नमक छोड़कर) दूध और सभी प्रकार की खटाइयां, दूध और मूँगफली, दूध और मछली, एक साथ प्रयोग ना करें।
4. दही गर्म करके नहीं खाना चाहिये हानि पहुँचती है, कढ़ी बनाकर खा सकते हैं।
5. शहद और घी समान परिणाम में मिलाकर लेना विष के समान है।
6. जौ का आटा कोर्इ अन्न मिलाये बिना नहीं लेना चाहिए।
7. रात्रि के समय सत्तू का प्रयोग वर्जित है, बिना जल मिलाये सत्तू ना खायें।
8. तेज धूप में चलकर आने के बाद थोड़ा आराम करके ही पानी पियें, व्यायाम या शारीरिक परिश्रम के तुरन्त बाद पानी ना पियें या थोड़ी देर बाद पानी पियें।
9. प्रात:काल भोजन के पश्चात तेज गति से चलना हानिकारक है।
10. शाम को खाने के बाद थोड़ी देर चलना आवश्यक है, खाना खाकर तुरन्त सो जाना हानिकारक है।
11. रात्रि में दही का सेवन निषेध है, भोजन के तुरन्त बाद जल का सेवन निषेध है। दिन में भोजन के बाद मठ्ठा और रात्रि में भोजन के बाद दूध लेना लाभदायक होता है। वात के रोगों में ब्लड एसिडिटी, कफ वृद्धि या संधिवात में दही ना खायें।
12. शौच क्रिया के बाद, भोजन से पहले, सर्दी-जुकाम होने पर, दांतों में पीव आने पर और पसीना आने की दशा में पान का सेवन नहीं करना चाहिए।
13. सिर पर अधिक गर्म पानी डालकर स्नान करने से नेत्रों की ज्योति कम होती है जरूरत पड़ने पर गुनगुने पानी से स्नान कर सकते हैं।
14. सोते समय सिर पर कपड़ा बांधकर सोना, पैरों में मोजे पहनकर सोना, अधिक चुस्त कपड़े पहनकर सोना हानिकारक है।
15. शहद कभी भी गर्म करके ना खायें, छोटी मधुमक्खी का शहद सर्वोत्तम होता है।
16. तेज ज्वर आने पर तेज हवा, दिन में अधिक देर तक सोना, अधिक परिश्रम, स्नान, क्रोध आदि से बचना चाहिये।
17. नींद लेने से पित्त घटता है, मालिश से वात कम होता है और उल्टी करने से कफ कम होता है एवं उपवास करने से ज्वर शांत होता है ।

राज के इन आसान हेल्थ टिप्स को भी अपनाएं 

इन दिनों लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल ऐसी बना ली है कि दिनों दिन वे नई-नई परेशानियों और बीमारियों से घिरते जा रहे हैं। चाहे खान-पान हो या आरामदायक जीवनशैली। और तो और शहरी वातावरण भी उन्हें इस तरह की दिनचर्या बनाने में काफी मदद की है। सभी ऐशोआराम की चीजें उन्हें घर बैठे हासिल हो जाती है। उन्हें उठकर कहीं जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
  • प्रतिदिन वॉक करें। अगर हो सके तो फुटबॉल खेलें यह एक प्रकार का एक्सरसाइज ही है।
  • ऑफिस में या कहीं भी जाएं तो लिफ्ट के बदले सीढिय़ों का इस्तेमाल करें।
  • अपने कुत्ते को वॉक पर खुद लेकर जाएं। बच्चों के साथ खेलें, लॉन में नंगे पांव चलें, घर के आसपास पेड़ पौधे लगाऐं, यानि कि वो सब करें जिनसे आप खुद को एक्टिव रख सकें। 
  • ऐसी जगह एक्सरसाइज न करें जहां भीड़भाड़ ज्यादा हो।
  • तले-भुने भोजन, और अन्य फैटी चीजों से परहेज करें यह बहुत से बीमारियों की जड़ होती है। 
  • डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। जैसे कि चीज, कॉटेज चीज, दूध और क्रीम का लो फैट प्रोडक्ट आदि। 
  • यदि खाना ही है तो, मक्खन ,फैट फ्री चीज और मोयोनीज का लो फैट उत्पाद प्रयोग में लाऐं।
  • तनाव हमारी जिंदगी में काफी निगेटिव असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव कम करने के लिए सकारात्मक विचार बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। 
  • तनाव कम करने के लिए रोज कम से कम आधा घंटा ऐसे काम करें, जिसे करने में आपको मन लगता हो। 
  • तनाव कम करने के लिए आप योग का भी सहारा ले सकते हैं।
  • गुस्सा तनाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है इसलिए गुस्सा आने पर स्वंय को शांत करने के लिए एक से दस तक गिनती गिनें। 
  • उन लोगों से दूर रहने की कोशिश करें जो आपके तनाव को बढ़ाते हों।
  • धूम्रपान से परहेज करें। धूम्रपान से शरीर और उम्र पर असर तो पड़ता ही है, साथ ही फेफड़ों का कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है।
  • धूम्रपान में कमी लाने के लिए उसकी तलब लगने पर सौंफ आदि का सेवन करें।
  • मार्केट में भी आजकल बहुत से प्रोडक्ट मिलने लगे हैं जो धूम्रपान की तलब को कम करते हैं।
  • सुबह-शाम ताजा भोजन करें।
  • निश्चित समय पर भोजन करें।
  • अनियमित भोजन से दूर रहें।
  • पानी ज्यादा से ज्यादा पिएँ।
  • रात का भोजन सोने से तीन घंटे पहले अवश्य कर लें।
  • खाना खाने के बाद 10 मिनट वज्रासन में अवश्य बैठें।
  • भोजन से पहले व तुरंत बाद पानी पीना हानिकारक है।
  • गरिष्ठ, तले, मसालेदार, खटाईयुक्त भोजन से परहेज करें।
  • अंकुरित अन्न, सलाद, सूप का समावेश भोजन व नाश्ते में अवश्य करें।
  • केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें।

गुरुवार, फ़रवरी 26, 2015

सेक्स में असफलता दूर कैसे करें

They try to enjoy the Real Pleasures of Sex
सेक्स का असली सुख भोगने के लिए इन्हें आजमाएं 

यौन दुर्बलता एक गंभीर समस्या है आज के युग में हमारे प्रदूषित खान -पान की वजह से और स्वयं के गलत हरकतों के कारण युवक-युवतियां असमय ही दुर्बलता के शिकार होते जा रहे है ..और इस तरह की समस्याओं में डॉक्टर के पास जाने से घबराते हैं।

ऐसे में घरेलू उपाय को अपनाकर सेक्स लाइफ को बुस्टअप कर सकते हैं:-

  • आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।
  • लहसुन आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढाता है बल्कि आपकी सेक्स लाइफ को भी बढाता है| ऐसे में अगर आप लहसुन नहीं खा रहे हैं तो आज से ही खाना शुरू कर दीजिये| क्योंकि लहसुन की 2-3 कलियां और प्याज का प्रतिदिन सेवन से यौन- शाक्ति बढ़ती है। ऐसे में अगर आप सप्ताह में दो से तीन बार काले चने से बने खाद्य पदार्थों को प्रयोग में ला रहे है तो आपके लिए यह लाभकारी है|
  • 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।


  • एक सेब में हो सके जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।
  • 15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से ज्यादा शक्तिशाली महसूस करेंगे।
  • कच्चा गाजर या इसका जूस भी यौन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है। हफ्ते में दो बार भिंडी और सहजन खाने से काफी फायदा होता है।
  • 15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। इसे यौन-टौनिक के रूप मे इस्तेमाल करें। इसके अलावा आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करें। http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करें।
  • इसके अलावा आप 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन लें।
  • घी के साथ उड़द की दाल को भूनकर और इसके अंदर दूध को मिलाकर तथा अच्छी तरह से पकाकर इसकी खीर तैयार कर लें। इसके बाद इसमें चीनी या खांड मिलाकर इसका इस्तेमाल करने से वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है तथा संभोग करने की शक्ति भी बढ़ जाती है।
  • 5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें। इस मिश्रण को 7 दिनों तक पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है|http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • 100 ग्राम आंवले के चूर्ण को लेकर आंवले के रस में 7 बार भिगों लें इसके बाद इसे छाया में सूखने के लिए रख दें। इसके सूख जाने के बाद इसको इमामदस्ते से कूट-पीसकर रख लें। रोजाना इस चूर्ण को एक चम्मच लेकर शहद के साथ मिलाकर चाट लें तथा इसके ऊपर से एक गिलास दूध पी लें। इसका सेवन करने से आपकी यौन शक्ति में आई दुर्बलता दूर हो जायेगी|
  • सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे पर
  • रखकर खाएं। इसके प्रयोग से आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी।
  • चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू तथा दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। 
आयुर्वेद में भी क्रियात्मक क्षमता बनाए रखने की बहुत सी दवाएं हैं:-

वसंत मालती:-

स्त्री-पुरूष् दोनों में शारीरिक क्षमता और दुर्बलता, चाहे किसी कारण भी हो, नाशक स्वर्ण तथा मोती युक्त ओैषधि है। ज्वरों के पश्चात के दौर्बल्य में भी अत्यंत उपयोगी है।

वसंत कुसुमाकर:-

बलवर्घक, कामोत्तेजक, मधुमेह नियंत्रक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसमें सोना, मोती, कस्तूरी, चांदी आदि प्रयुक्त होते हैं।http://www.rajayurved.blogspot.in/

वसंत तिलकरस:-

विशेष् रूप से पुरूष् द्वारा उपयुक्त बलवर्घक वाजीकरण तथा कामोद्दीपक, स्वर्णमुक्ता आदि प्रधान औष्धियां हैं। वृहऊंगेश्वस, वंगेश्वर दोनों ही मूल्यवान दवाइयां हैं। स्त्रियों के जननांगों के रोगों, श्वेत प्रदर, कामशीतलता आदि तथा पुरुषों के दुर्बलता शीघ्रपतन, शुक्रमेह आदि में लाभदायक दवाएं हैं।

शक्रवल्लभ रस:-

पुरुषों द्वारा अधिक सेवनीय बलवर्घक पौष्टिक उत्तेजक वाजीकर औष्ाधियां हैं। इसमें भी सोना, मोती आदि मूल्यवान दवाएं डाली जाती हैं।http://www.rajayurved.blogspot.in/

शतावरी मोदक:-

प्रमुख रूप से स्त्रियों द्वारा सेवन की जाने वाली यह औषधि शक्तिवर्घक स्तन रोग नाशक जननांगों के प्रदरों व गर्भाशय शिथिलता नाशक है।http://www.rajayurved.blogspot.in/

शिलाजीत शुद्ध:-

स्त्रियों व पुरुषों के सभी रोगों में उपयोगी। निरंतर प्रयोग से सभी रोग होने से रोकता है। बुढ़ापा थामता है दीर्घजीवन देता है।

शुक्रमातृकावटी व शिवा गुटिका:-

अधिकतर पुरुषों को वीर्यविकारों, मूत्ररोगों, वायुविकारों, प्रोस्टेट वृद्धि आदि में दिया जाता है। शिव गुटिका स्त्रियों के कमरदर्द, थकान और मूत्र रोगों में उपयोगी है।http://www.rajayurved.blogspot.in/
मदनानंद मोदक, नारी गुटिका, कौंचपाक, मूसलीपाक, मदनमोदक ये दवाइयां पुरुषों द्वारा विशेष कर यौन शक्ति वृद्धि बनाए रखने व पूरे वर्ष के लिए पुष्टि प्रदान के लिए प्रयुक्त होती है। इनमें कुछ नशीले पदार्थ भांग, अफीम आदि में प्रयुक्त किए जाते हैं। कामेश्वर, कामचूड़ामणि, मन्मथ रस ये स्त्री व पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है। शक्ति, बल सामथ्र्य तथा कार्यक्षमता वर्घक बलवर्घक दवाइयां हैं।ये सामान्यत: नीम-हकीम तथा बिना चिकित्सक के परामर्श से इनका प्रयोग नौजवान लड़के ज्यादा करते हैं।
रतिवल्लभ मूंगपाक, सौभाग्यशुंठी ये दोनों दवाइयां मुख्यत: स्त्रियों के सेवनार्थ बनी हैं। प्रथम ये दवाये जननांगों को शक्ति, पुष्टि संकोच, गर्भाधान योग्य बनाती हैं। सोहाग सोंठ प्रसव के बाद की दुर्बलता, पीड़ा कमरदर्द, थकान, ज्वर को मिटाती है। आयुर्वेद में कामोत्तेजक, स्तंभक, वाजीकरण शक्तिवर्घक तथा स्त्री के स्त्रीत्व को पुष्पित और प्रशस्त रखने वाली दवाओं की कमी नहीं है।

बुधवार, फ़रवरी 25, 2015

कुछ कारगर निवारण एवं सुझाव

Some effective Prevention and Tips

इस बार राजेश मिश्रा आप सभी के लिए लाए हैं कई रोगों का एक ही जगह इलाज। इन रोगों में शामिल है- पथरी, झाइयां, खूनी बवासीर, मासिक स्राव कष्ट तथा दर्द के साथ होना, बवासीर, सिर के बाल झड़ना, मूत्रावरोध।

पथरी : यदि गुर्दे या मूत्राशय में पथरी हो तो 250 ग्राम कुलथी (शिमला की पहाड़ियों से आने वाली सफेद कुलथी ठीक रहती है) को साफ कर रात को तीन किलो पानी में भिंगोकर रख दें। सबेरे भीगी हुई कुल्थी सहित उस पानी को धीमी आंच पर लगभग चार घंटे तक पकायें। जब पानी सिर्फ एक किलो रह जाये (जो काले चनों के सूप की तरह होता है) तब उसे नीचे उतार लें। तीस से पचास ग्राम (अपनी पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का छौंक लगायें। छौंक में थोड़ा सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं। इस स्वादिष्ट सूप को 250 ग्राम की मात्रा में दिन में एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर लगभग बारह बजे पी लें। दस-पंद्रह दिन तक इस नुस्खे के सेवन से गुर्दे और मूत्रालय की पथरी गलकर बिना आपरेशन के बाहर आ जाती है। इस नुस्खे के सेवन करते वक्त दोपहर का भोजन नहीं लेना है।

झाइयां : चेहरे पर काली झाइयां साधारणत: त्वचा की निचली परतों में रहने वाले प्राकृतिक पदार्थ सिलीकोन की कमी से होती है। नहाने से पूर्व रोज एक चम्मच गुनगुने शहद में 2-3 बूंदे ग्लिसरीन व चुटकी भर नमक मिलाकर अच्छी तरह मथकर हल्के हाथ से कुछ दिनों तक लगाने से झाइयां दूर हो जाती हैं।
खूनी बवासीर : गुड़ के साथ एक दो हरड़ को दोनों समय खाने के बाद नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होगा।

मासिक स्राव कष्ट तथा दर्द के साथ होना : 2 चम्मच अजवायन, 2 कप पानी में डालकर उबालें। 1 कप शेष रख लें, इसमें गुड़ मिलाकर सुबह खाली पेट चाय की तरह पी लें। यह नुस्का प्रतिदिन सुबह-शाम 3 दिन तक लेना चाहिए। सामान्यत: 3 मासिक स्राव तक प्रयोग पर्याप्त रहता है। मासिक स्राव होने से 3 दिन पहले इसका प्रयोग आरंभ करने से मासिक समय पर खुलकर आता है।
पेट में गैस : अजवायन के साथ हरड़ और काला नमक लेने से पेट फूलना, पेट दर्द, डकारें आना आदि में तत्काल राहत मिलती है।

बवासीर : आम के कोमल पत्तों को जल के साथ पीसकर मिश्री मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है। खूनी बवासीर से रक्त आना बंद होता है।
रक्त प्रदर : आम की गुठली की गिरी का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में लेने से रक्त प्रदर, खूनी बवासीर, पेट के कीड़े दूर होते हैं।

सिर के बाल झड़ना : बरगद के पत्तों को कुचल लें और अलसी के तेल में पकायें। पत्तों के जल जाने पर तेल छानकर रख लें। इस तेल की मालिश करने से कुछ ही दिनों में बालों का झड़ना रुक जायेगा और झड़े हुए बालों के स्थान पर नये बाल आने लगेंगे।
देशी घी में 4-6 बादाम की गिरी पीसकर डाल दें और इतनी उबालें कि गिरी के टुकड़े जल जायें। अब घी को छानकर शीरी में भर लें। यह घी गुनगुना करके सिर पर मालिश करने से बालों का झड़ना रुकता है और दिमागी कमजोरी भी दूर होती है।

मूत्रावरोध : पेशाब की रुकावट में कबाव चीनी का एक चम्मच चूर्ण दूध की लस्सी से देने पर तत्काल मूत्र हो जाता है। दूध के अभाव में मिश्री के साथ भी दे सकते हैं।

मांस पेशियों में दर्द का घरेलू उपचार

Raj's Simple 11 Home Remedies for Muscle Pain


मांसपेशियों में दर्द किसी चोट या दुर्घटना, मांसपेशियों के अत्याधिक उपयोग या मांस पेशियों में तनाव, तनाव या चिंता या कुछ मेडिकल परिस्थितियों के कारण हो सकता है। मांसपेशियों के दर्द को प्राकृतिक तरीके से दूर करने के लिए कुछ प्रभावी घरेलू उपचार उपलब्ध है।
कभी कभी बहुत अधिक व्यायाम करने से भी मांसपेशियों में दर्द हो जाता है। इस स्थिति में हमारे शरीर को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इस अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए मांसपेशियों में अवायुश्वसन होता है जिसके कारण लेक्टिक एसिड एकत्रित होने लगता है। इस लेक्टिक एसिड के कारण मांसपेशियों में थकान और दर्द होता है।
सामान्यत: लेक्टिक एसिड विभाजित हो जाता है और मांसपेशियों का दर्द चला जाता है परन्तु इसमें कुछ दिन का समय लगता है। सौभाग्य से मांसपेशियों के दर्द को दूर करने के लिए हमारे पास कुछ घरेलू उपचार उपलब्ध है। कसरत करने के बाद मांसपेशियों के दर्द को कैसे दूर किया जाए तथा मांसपेशियों के दर्द को ठीक करने के लिए क्या अच्छा है? आज बोल्डस्काय आपको मांसपेशियों के किसी भी प्रकार के दर्द को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपचार बताएगा।

1) तेल से मालिश

मालिश से मांसपेशियों में रक्त परिसंचरण बढ़ता है जिससे मांसपेशियों को गर्मी मिलती है तथा यह लेक्टिक एसिड को दूर करता है जबकि तेल मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है और दर्द से राहत दिलाता है। विभिन्न प्रकार के तेल जैसे पाइन, लैवेंडर, अदरक और पिपरमेंट का तेल मांस पेशियों के दर्द को कम करने में सहायक होते हैं।

2) मैग्नीशियम सल्फेट से स्नान

मैग्नीशियम सल्फेट प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला खनिज है जो मांसपेशियों के ऊतकों की सूजन को कम करता है तथा मांसपेशियों के दर्द से आराम पहुंचाता है। यह पुरानी स्थिति जैसे फाईब्रोम्यल्गिया में भी मांसपेशियों के दर्द से आराम दिलाता है। नहाने के लिए मानक आकार के टब को गुनगुने या गर्म पानी से भरें तथा इसमें 1-2 कप ऐप्सम सॉल्ट मिलाएं तथा इस पानी में 15-30 मिनिट आराम करें। इस स्नान से मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन से आराम मिलता है, शरीर को आराम मिलता है और तनाव कम होता है। इस प्रकार व्यायाम करने के बाद मांसपेशियों के दर्द को दूर किया जा सकता है।

3) कोल्ड थेरपी

मांसपेशियों के दर्द को दूर करने के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है। कोल्ड थेरपी को क्रयोथेरेपी भी कहा जाता है जिसमें राहत पाने के लिए चोट की जगह पर आइस (बर्फ़) लगाया जाता है। अक्सर इसका उपयोग खेलकूद के कारण होने वाले लगने वाली चोटों में मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। चोट लगे हए स्थान पर बर्फ़ लगाने से उस स्थान पर रक्त परिसंचरण धीमा हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप उस स्थान पर दर्द और सूजन कम हो जाती है।

4) हीट थेरपी

हीट थेरपी का उपयोग मोच या ऐंठन, मांसपेशियों में जकड़न या ऐंठन के उपचार में किया जाता है। अच्छा होगा कि गंभीर चोटों में हीट थेरपी का उपयोग न किया जाए क्योंकि इसके कारण सूजन बढ़ सकती है और असुविधा हो सकती है। गर्मी से मांसपेशियों के दर्द में आराम मिलता है, मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और मांसपेशियों का तनाव कम होता है। गर्मी प्रभावित स्थान पर रक्त परिसंचरण बढ़ाती है से चोट लगे हुए स्थान पर रक्त परिसंचरण बढ़ जाता है जिससे मांसपेशियों की चोट से भी आराम मिलता है।

5) गर्म और ठंडा स्नान

बारी बारी गर्म और ठंडे पानी से स्नान करने से दर्द से तेज़ी से आराम मिलता है। इससे प्रभावित स्थान का रक्त परिसंचरण बढ़ता है, सूजन और दर्द कम कम होता है। ठंडा स्नान दर्द वाले स्नान को सुन्न कर देता है तथा गर्म स्नान मांसपेशियों को आराम देता है, ऐंठन को दूर करता है तथा सम्पूर्ण शरीर के तनाव को कम करता है। पानी में सुगंध वाले तेल जैसे लैवेंडर, यूकेलिप्टस और बरगामोट मिलाने से अतिरिक्त लाभ होता है।

6) जडी बूटियाँ और लेप

कुछ जडी बूटियों में एंटी इम्फ्लेमेट्री (प्रदाहनाशी) और आरामदायक गुण होते हैं। जबकि हर्बल लेप (जडी बूटियों के अर्क का अर्द्ध ठोस रूप जो लोशन, जेल या बामके रूप में होता है) त्वचा तथा ऊतकों में अंदर तक प्रवेश करते हैं तथा आराम पहुंचाते हैं।

7) एक्युप्रेशर

एक्युप्रेशर एक वैज्ञानिक पद्धति है जिसमें आराम पहुंचाने के लिए शरीर के विभिन्न एक्युप्रेशर पॉइंट्स पर प्रेशर (दबाव) देकर उन्हें उत्तेजित किया जाता है। यह मांसपेशियों को आराम पहुंचाने तथा उन्हें ठीक करने में सहायक होता है। मांसपेशियों को आराम देकर और बढ़े हुए एंड्रोफिन्स से मांसपेशियों के दर्द से तीव्र और प्राकृतिक तरीके से आराम पाया जा सकता है।

8) मैगनीशियम

शरीर में मैगनीशियम का स्तर कम होने पर मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन की समस्या हो सकती है। मैगनीशियम का संपूरक लें। आप अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल कर सकते हैं जिनमें मैगनीशियम प्रचुर मात्रा में हो। मैगनीशियम से समृद्ध खाद्य पदार्थों में गुड़, कुम्हड़ा और कद्दू के बीज, पालक, रसपालक, कोका पाउडर, ब्लैक बीन्स, अलसी के बीज, तिल के बीज, सूरजमुखी के बीज, बादाम और काजू शामिल हैं।

9) ऐप्पल सीडर विनेगर

मांसपेशियों के दर्द से कैसे आराम पाया जाए? मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए एसीवी एक प्रभावी घरेलू औषधि है। एक गिलास पानी में एक या दो चम्मच ऐप्पल सीडर विनेगर मिलकर पीयें। जिस स्थान पर दर्द हो रहा है उस स्थान पर आप विनेगर लगा भी सकते हैं। इससे आपको मांसपेशियों के दर्द से आराम मिलेगा।

10) लाल मिर्च

इसमें कैप्सैसिन पाया जाता है जो ऑर्थराइटिस, जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द और मांसपेशियों के सामान्य दर्द से राहत पहुंचाता है। आप स्वयं पेस्ट बना सकते हैं। इसके लिए एक चौथाई या आधा टेबल स्पून लाल मिर्च को जैतून के तेल (गर्म) या नारियल के तेल में मिलाएं। इसे प्रभावित स्थान पर लगायें तथा लगाने के बाद अपने हाथ धो डालें। इसे अपनी नाक, आँखों और मुंह से दूर रखें क्योंकि इससे जलन हो सकती है।

11) चेरी का रस

चेरी का रस दौड़ने या बहुत अधिक व्यायाम करने के बाद मांसपेशियों में होने वाले दर्द को दूर करने में सहायक होता है। चेरी में एंथोक्यनिंस नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो जलन को कम करता है। दर्द और जलन को कम करने के लिए चेरी का खट्टा रस पीयें। इससे पैरों और हाथ की मांसपेशियों में होने वाले दर्द से आराम मिलेगा।

बुधवार, फ़रवरी 18, 2015

कमर दर्द : कारण और घरेलू उपचार

Back pain: Causes and Home Remedies

कारण :*****

1- हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना।
2- मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव।
3- गलत तरीके से अधिक वजन।
4- गलत तरीके से बैठना।

उपचार :
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1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।


2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।

3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।


4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।

5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।

6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।

7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।


8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।

9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।


10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।

11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।
12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।

सोमवार, फ़रवरी 16, 2015

निरोगी काया के लिए राजेश मिश्रा के अचूक नुस्खे

घर और बागान में मौजूद सब्जी और फ़लों से करें गंभीर से गंभीर रोगों का निवारण


मैं आप सभी के लिए यहाँ केला, चुकंदर, सेब, करैला, जामुन, पपीता, कटहल , आम, संतरा, लौकी, टमाटर, कद्दू, प्याज, अनानास और गाजर में छुपे औषधीय गुणों को लेकर हाजिर हुआ हूँ.. जिसे जानकर आप लाभान्वित होंगे और आस-पडोसी इसके गुण जानकर खुश होंगे. लीजिये यहाँ मौजूद है राजेश मिश्रा के अथक परिश्रम से जुगाड़ किया गया कारगर नुस्खे... 

सेवफ़ल के गुण:


सेवफ़ल में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाये जाते हैं।
इसमें खनिज तत्व और विटामिन अधिक मात्रा में मौजूद रहते है।
सेवफ़ल में उपस्थित लोह तत्व से शरीर में नया खून बनने में मदद मिलती है।
गुर्दे की पथरी वाले रोगियों को नियमित रूप से सेवफ़ल इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
सेवफ़ल में कब्ज तोडने की अद्भुत शक्ति है। कच्चे सेवफ़ल के नियमित उपयोग से कब्ज का स्थाई ईलाज हो जाता है।
उबले सेवफ़ल खाने से बच्चों के अतिसार (दस्त लगने) में लाभ होता है।
हृदय-रोगों में सेवफ़ल अति गुणकारी सिद्ध हुआ है। उच्च रक्तचाप में इसका उपयोग लाभदायक है। इसमें अच्छी मात्रा में पोटेशियम और फ़ास्फ़ोरस पाया जाता और सोडियम नही के बराबर होता है। यही कारण है कि सेवफ़ल हृदय रोगों में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इसमे पेक्टीन होता है जो कोलेस्टरोल(एल्डीएल) को घटाता है। दो सेवफ़ल नित्य खाने से कोलेस्टरोल 16% तक कम हो जाता है।सेवफ़ल में उपस्थित पेक्टीन शरीर मे गेलेक्टेरुनिक एसीड उत्पन्न करता है जिससे इन्सुलिन की जरूरत कम हो जाती है। इस प्रकार सेवफ़ल डायबीटीज में हितकारी है। इसीलिये तो कहते हैं"an apple a day keeps doctor away."

केला के गुण:

केला दुनिया भर में सबसे विस्तृत क्षेत्र में उपयोग होने वाला फ़ल है। इसे छिलका उतारकर या छिलका सहित खाया जा सकता है।
 इसमें सोडियम की मात्रा कम और पोटेशियम ज्यादा होने से उच्च रक्तचाप में लाभप्रद फ़ल है। हाई ब्लड प्रेशर की जटिलताओं को भी नियंत्रित करता है। केले में पाया जाने वाला रेशा भी इसमें सहायता करता है। केले में उपस्थित पोटेशियम के प्रभाव से गुर्दों के जरिये केल्शियम की कम हानि होती है और इस प्रकार केला अस्थिक्षरण रोग में लाभ देता है। अतिसार रोग मे केला अत्यंत हितकारी है। इससे ईलेक्ट्रोलाईट्स की पूर्ति होती है और पौषक तत्वों का शरीर में संचय होता है। केले में अम्लता विरोधी तत्वों की मौजूदगी से पेप्टिक अल्सर के रोगियों को केला खाने की सलाह दी जा सकती है।केले में उपस्थित पेक्टीन से आंतों की कार्यकुशलता बढती है और कब्ज रोग में फ़ायदा होता है। कच्चा केला शूगर रोगियों के लिये बेहद लाभ प्रद है। केले के अंदर केरोटोनाईड होता है,इससे विटामिन ए की पूर्ति होती है और रात्री अंधत्व रोग में इस्तेमाल करना प्रयोजनीय है। पर्यात मात्रा में केले का सेवन करते रहने से किडनी के केंसर से बचाव हो सकता है लेकिन प्रोसेस्ड जूस ज्यादा उपयोग करने से किडनी के केंसर की संभावना बढ जाती है।

कटहल के गुण:
राजेश मिश्रा कटहल के साथ 

कटहल के फ़ल में कई प्रकार के महत्वपूर्ण प्रोटीन्स, कार्बोहाईड्रेट्स और विटामिन्स पाये जाते हैं।
सब्जी के तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले कटहल से अचार और पापड भी बनाये जाते हैं। कटहल की पत्तियों की राख में अल्सर को ठीक करने के गुण होते हैं। पके हुए कटहल का गूदा निकालकर भली प्रकार मेश करें,फ़िर उबालकर ठंडा करें,यह मिश्रण पीना जबर्दस्त स्फ़ूर्तिदायक होता है। यह मिश्रण शरीर में टानिक का काम करता है। कटहल के छिलकों से निकलने वाले दूध को गांठनुमा सूजन अथवा कटे-फ़टे चमडे ,घाव पर लगावें तो लाभ होता है।
कटहल की कोंपलों को कूटकर गोली बनालें। इनको चूसने से स्वर भंग और गले के रोगों में फ़ायदा होता है।
इसकी पत्तियों का रस शूगर रोगियों और उच्च रक्तचाप में लाभ पहुंचाता है। 
कटहल की जड का काढा बनाकर दमा रोगी को पिलाना लाभप्रद होता है।
इसमें केंसर से लडने के गुण भी हैं।
कटहल से मानव शरीर में प्रोटीन,कर्बोहायड्रेट और विटामिन्स की यथोचित आपूर्ति होती है।
इसमें अति न्यून मात्रा में केलोरी और फ़ेट होते है अत: वजन कम करने वालों के लिये भी उपयोगी है।
कब्ज रोग से परेशान व्यक्ति इसका नियमित इस्तेमाल करके कब्ज से छुटकारा पा सकते हैं।
कटहल की जड का उपयोग कई प्रकार के चर्म रोगों में सफ़लता से किया जा सकता है।

चुकंदर के गुण:


पारंपरिक रूप से चुकंदर शरीर में नया खून बनाने वाले फ़ल के रूप में जाना जाता है।
चुकंदर लिवर, पित्ताषय, तिल्ली, और गुर्दे के विकारों को लाभप्रद पाया गया है। इन अंगों के दूषित तत्वों को बाहर निकालने की शक्ति चुकंदर में पाई गई है।
चुकंदर में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।केल्शियम,फ़ास्फ़ोरस और लोह तत्व भी खूब होता है।इसमें पाये जाने वाले आयरन से कब्ज नहीं होती है।
चुकंदर अपने क्षारीय तत्वों की वजह से अम्लपित्त(एसीडीटी) में उपयोगी रहता है।
चुकंदर धमनियों में केल्शियम जमने के रोग में अति उपयोगी है। 
चुकंदर ब्लड प्रेशर को सामान्य और नियमित करता है।
चुकंदर के जूस में शहद मिलाकर पीने से आमाषय के अल्सर में लाभ मिलता है।
चुकंदर का जूस और गाजर का जूस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से पित्ताषय(गाल ब्लाडर) और किडनी के रोग नष्ट होते हैं।
चुकंदर में पाया जाने वाला क्लोरिन लिवर के विजातिय पदार्थों को निष्कासित करने(डिटाक्सीफ़ाई) में मददगार होता है।
चुकंदर में सोडियम, पोटेशियम, फ़ासफ़ोरस, केल्यशियम, आयोडीन, आयरन, ताम्र, विटामिन-बी1, बी2, बी3, बी6 और विटामिन "सी" पाया जाता है।
इसमें एक शक्तिशाली एन्टिआक्सीडेंट पाया जाता है जिसका नाम है- बीटासायनिन. इसमें केंसर से लडने और प्रतिकार की शक्ति है। चुकंदर के गहरे लाल रंग के लिये बीटासायनिन उत्तरदायी है।

गाजर के गुण:
गाजर मे प्रचुर मात्रा में विटामिन ए होता है। यह विटामिन बीटा केरोटीन के रूप में मौजूद रहता है।लिवर में बीटा केरोटीन विटामिन ए में बदल जाता है।गाजर के रस में केंसर विरोधी तत्व पाये जाते हैं। अनुसंधान में पाया गया है कि गाजर में केंसर को ठीक करने के गुण विद्ध्यमान हैं। यह फ़ेफ़डे, स्तन और बडी आंत के केंसर से बचाव करता है। चर्म विकृतियों में भी गाजर का उपयोग लाभप्रद रहता है। चेहरे पर कांति के लिये गाजर का उपयोग किया जाना चाहिये।गाजर हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। इसे टोनिक के रूप में व्यवहार करना चाहिये। यह नेत्रों के लिये बेहद फ़ायदेमंद है। बुढापे में आने वाले मोतियाबिंद की रोकथाम करता है। गाजर हमारे शरीर के सेल्स को तंदुरस्त रखते हुए बुढापा आने की गति को धीमा करता है। शरीर की खरोंच,घाव ठीक करने के लिये गाजर को कूटकर लगाना चाहिये। गाजर को मेश करके उसमे थोडा सा शहद मिलाकर फ़ेस पेक की तरह इस्तेमाल करने से चेहरे की खूबसूरती में इजाफ़ा होता है। इसमें संक्रमण (इन्फ़ेक्शन) विरोधी तत्व होते हैं। गाजर में अल्फा केरोटीन और ल्युटीन तत्व होने की वजह से हृदय रोगों से भी बचाव करता है। शरीर को स्वच्छ और विजातीय पदार्थों से मुक्त रखने में गाजर की महती भूमिका हो सकती है। यह लिवर की सहायता करके पित्त दोष का निवारण करता है और चर्बी घटाता है।

पाईनेपल (अनानास) के गुण:

वैसे तो सभी ताजा फ़लों में प्रचुर मात्रा में एन्जाईम्स होते हैं लेकिन पाईनेपल में एक अद्भुत एन्जाईम होता है जिसे ब्रोमेलैन कहा जाता है।ब्रोमेलैन की उपस्थिति से यह फ़ल शरीर के किसी भाग में आई सूजन में लाभकारी है और पीडानाशक भी है। इसमें विटामिन सी का भंडार है। पाईनेपल चोंट,खरोंच,मोच,मांसपेशी खिंचने,शौथ में हितकारी फ़ल माना गया है।इसके सूजन विरोधी गुण से संधिवात और गठिया रोगी लाभान्वित हो सकते हैं। शल्य क्रिया के बाद की सूजन ठीक करने में भी इसका व्यवहार होना उचित है। ब्रोमैलेन प्रोटीन पचाने में भी सहयोगी रहता है।यहां यह भी बताना उचित होगा कि एन्जाईम्स ताप से नष्ट हो जाते हैं , इसलिये पाईनेपल या जूस को ऊबालना हानिकारक है|

जामुन के गुण:

1) जामुन की गुठली चिकित्सा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी मानी गई है। इसकी गुठली के अंदर की गिरी में 'जंबोलीन' नामक ग्लूकोसाइट पाया जाता है। यह स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोकता है। इसी से मधुमेह के नियंत्रण में सहायता मिलती है। 
जामुन के कच्चे फलों का सिरका बनाकर पीने से पेट के रोग ठीक होते हैं। अगर भूख कम लगती हो और कब्ज की शिकायत रहती हो तो इस सिरके को ताजे पानी के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह और रात्रि, सोते वक्त एक हफ्ते तक नियमित रूप से सेवन करने से कब्ज दूर होती है और भूख बढ़ती है।
इन दिनों कुछ देशों में जामुन के रस से विशेष औषधियों का निर्माण किया जा रहा है, जिनके माध्यम से सिर के सफेद बाल आना बंद हो जाएँगे। 
गले के रोगों में जामुन की छाल को बारीक पीसकर सत बना लें। इस सत को पानी में घोलकर 'माउथ वॉश' की तरह गरारा करना चाहिए। इससे गला तो साफ होगा ही, साँस की दुर्गंध भी बंद हो जाएगी और मसूढ़ों की बीमारी भी दूर हो जाएगी। 
विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन की पत्तियों का रस पिलाना चाहिए। काटे गए स्थान पर इसकी ताजी पत्तियों का पुल्टिस बाँधने से घाव स्वच्छ होकर ठीक होने लगता है क्योंकि, जामुन के चिकने पत्तों में नमी सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। 
जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है। 
जामुन का रस, शहद, आँवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है। 
जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है। 
जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है। 
गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।
जामुन स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का शीघ्र अवशोषित होकर रक्त निर्माण में भाग लेने वाला तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है। इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन खाने से शरीर में जकड़न एवं बुखार होने की सम्भावना भी रहती है। इसे कभी खाली पेट नहीं खाना चाहिए और न ही इसके खाने के बाद दूध पीना चाहिए। 

संतरा (नारंगी) के गुण:

नारंगी रंग का दिखने वाला संतरा ठंडा, तन और मन को प्रसन्नता देने वाला फल है। यह जितना खाने में स्‍वादिष्‍ट होता है उतना ही स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी फायदेमंद होता है। एक व्यक्ति को जितनी विटामिन ‘सी’ की आवश्यकता होती है, वह एक संतरें को प्रतिदिन खाते रहने से पूरी हो जाती है। संतरे के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है, चुस्ती-फुर्ती बढ़ती है, त्वचा में निखार आता है तथा सौंदर्य में वृद्धि होती है। प्रस्तुत है इसके कुछ प्रयोग- 
1. संतरे का सेवन जहाँ जुकाम में राहत पहुँचाता है, वहीं सूखी खाँसी में भी फायदा करता है। यह कफ को पतला करके बाहर निकालता है।
2. संतरे में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, लोहा और पोटेशियम काफी होता है। संतरे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विद्यमान फ्रुक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन, शरीर में पहुंचते ही ऊर्जा देना प्रारंभ कर देते हैं।
3. संतरे का एक गिलास रस तन-मन को शीतलता प्रदान कर थकान एवं तनाव दूर करता है, हृदय तथा मस्तिष्क को नई शक्ति व ताजगी से भर देता है।
4. पेचिश की शिकायत होने पर संतरे के रस में बकरी का दूध मिलाकर लेने से काफी फायदा मिलता है।
5. संतरे का नियमित सेवन करने से बवासीर की बीमारी में लाभ मिलता है। रक्तस्राव को रोकने की इसमें अद्भुत क्षमता है।
6. तेज बुखार में संतरे के रस का सेवन करने से तापमान कम हो जाता है। इसमें उपस्थित साइट्रिक अम्ल मूत्र रोगों और गुर्दा रोगों को दूर करता है।
7. दिल के मरीज को संतरे का रस शहद मिलाकर देने से आश्चर्यजनक लाभ मिलता है।
8. संतरे के सेवन से दाँतों और मसूड़ों के रोग भी दूर होते हैं।
9. छोटे बच्चों के लिए तो संतरे का रस अमृततुल्य है। उन्हें स्वस्थ व हृष्ट-पुष्ट बनाने के लिए दूध में चौथाई भाग मीठे संतरे का रस मिलाकर पिलाने से यह एक आदर्श टॉनिक का काम करता है।
10. जब बच्चों के दाँत निकलते हैं, तब उन्हें उल्टी होती है और हरे-पीले दस्त लगते हैं। उस समय संतरे का रस देने से उनकी बेचैनी दूर होती है तथा पाचन शक्ति भी बढ़ जाती है।
11. पेट में गैस, अपच, जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप, गठिया, बेरी-बेरी रोग में भी संतरे का सेवन बहुत कुछ लाभकारी होता है।
12. गर्भवती महिलाओं तथा यकृत रोग से ग्रसित महिलाओं के लिए संतरे का रस बहुत लाभकारी होता है। इसके सेवन से जहाँ प्रसव के समय होने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है, वहीं प्रसव पीड़ा भी कम होती है। बच्चा स्वस्थ व हृष्ट-पुष्ट पैदा होता है|
13. संतरे के सूखे छिलकों का महीन चूर्ण गुलाब जल या कच्चे दूध में मिलाकर पीसकर आधे घंटे तक लेप लगाने से कुछ ही दिनों में चेहरा साफ, सुंदर और कांतिमान हो जाता है। कील मुँहासे-झाइयों व साँवलापन दूर होता है।
14. संतरे के ताजे फूल को पीसकर उसका रस सिर में लगाने से बालों की चमक बढ़ती है। बाल जल्दी बढ़ते हैं और उसका कालापन बढ़ता है।

आम के गुण:

आम सिर्फ स्वाद में ही नम्बर वन नहीं है, यह अनेक गुणों का भी खजाना है। आइये जानते हैं कि आम किन-किन घातक बीमारियों में मिटाने में हमारी मदद कर सकता है|
1. शहद के साथ पके आम के सेवन से क्षयरोग एवं प्लीहा के रोगों में लाभ होता है तथा वायु और कफ दोष दूर होते हैं।
2. यूनानी चिकित्सकों के अनुसार, पका आम आलस्य को दूर करता है तथा मूत्र संबंधी रोगों का सफाया करता है।
3. प्राकृतिक रूप से पका हुआ आम क्षयरोग यानी टीबी को मिटाता है, गुर्दे एवं बस्ति (मूत्राशय) खोई हुई शक्तियों को लौटाता है। 
4. जिन लोगों को शुक्रप्रमेह शारीरिक विकारों और वातादि यानी वायु संबंधी दोषों के कारण संतानोत्पत्ति न होती हो उनके लिए पका आम किसी वरदान से कम नहीं है। मतलब कि संतान सुख से वंचित दंपत्ती के लिये आम बेहद लाभदायक होता है। 
5. प्राकृतिक रूप से पके हुए ताजे आम के सेवन से पुरूषों में शुक्राणुओं की कमी, नपुंसकता, दिमागी कमजोरी आदि रोग दूर होते हैं।
6. कच्चे और पके दोनों तरह के आम कई तरह की किस्मों में मिलते हैं । कच्चे आम में गैलिक एसिड के कारण खटास होती है। आम के पकने के साथ उसका रंग भी सफेद से पीला हो जाता है। यही पीले रंग का कैरोटीन हमारे शरीर में जाकर विटामिन 'ए' में परिवर्तित हो जाता है। इसमें विटामिन 'सी' भी काफी होता है। 
कच्चा आम-
कच्चे आम में बहुत से गुण पाए जाते हैं। कच्चे आम को आग में भूनकर पानी में मसलकर आम का पन्ना बनाते हैं। फिर इसमे भुना हुआ जीरा, सेंधानमक और कालीमिर्च डालते हैं। इस पन्ना को पीने से लू लगने के रोग में आराम आता है। आम के पन्ना को शरीर पर मलने से ठण्डक मिलती है।

पका आम

मीठे और पके आम शरीर में वीर्य को बढ़ाने वाले, ताकत पैदा करने वाले, त्वचा को निखारने वाले, ठंडे और पित्त को सन्तुलित रखने वाले होते हैं।

आमरस-

आम का रस भारी- ताकत बढ़ाने वाला, वात को हरने वाला, दस्त लाने वाला, प्यास को कम करने वाला और शरीर में कफ की मात्रा को बढ़ाने वाला होता है। अगर आम के रस को निकालकर उसमे बराबर मात्रा में दूध और सफेद बूरा या इच्छानुसार मिश्री मिलाकर कपड़े में छानकर इस्तेमाल किया जाए तो ये बहुत ही स्वादिष्ट आम का रस बन जाता है।

लाभकारी-

दूध और मिश्री मिला हुआ आम का रस शरीर के अन्दर से पित्त को समाप्त करता है। ये पुष्टिदायक, रुचिकारक और वीर्य तथा बल को बढ़ाने वाला होता है। ये आम का रस स्वाद में मीठा और तासीर में ठंडा होता है। आम का रस यक्ष्मा (टी.बी) के रोगियों के लिए बहुत ही लाभकारी है। इसको पीने से बुखार तथा खांसी जैसे रोग दूर हो जाते हैं। यक्ष्मा (टी.बी ) के रोगी की सांस जब चढ़ने लगती है, बलगम में खून आता हो तो ऐसे समय में रोगी को आम का रस देने से बहुत लाभ होता है।

कब न खाएँ : 

भूखे पेट आम न खाएँ। इसके अधिक सेवन से रक्त विकार, कब्ज और पेट में गैस बनती है। कच्चा आम अधिक खाने से गला दर्द, अपच, पेट दर्द हो सकता है। कच्चा आम खाने के तुरंत बाद पानी न पिएँ। मधुमेह के रोगी आम से परहेज करें। खाने से पहले आम को ठंडे पानी या फ्रिज में रखें, इससे इसकी गर्मी निकल जाएगी।

करेला के गुण:

एक असाध्य बीमारी है मधुमेह ‘डायबिटीज’ । करेला मधुमेह के रोगियों के लिए ‘अमृत’ तुल्य है। 100 मिली. के रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है और प्रात: चार किलोमीटर टहलना चाहिए तथा मिठाई खाने से परहेज रखना चाहिए। करेला मधुमेह के अलावा अन्य शारीरिक तकलीफों में भी लाभदायक है। जैसे-
कब्ज : नित्य करेला सेवन करने से कब्ज दूर होता है। यह एक अनुपम सब्जी है और इसमें ज्यादा तेल-मसाले नहीं डालने चाहिए।
पीलिया : ताजा करेले का रस सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।
दमा : दमा के मरीज भी करेले का रस सुबह खाली पेट लेकर राहत पा सकते हैं। सब्जी भी ज्यादा खानी चाहिए।
पथरी : पथरी गुर्दे की हो या मूत्राशय की, इसे तोड़कर बाहर निकालने की क्षमता करेला रखता है। करेले का रस दिन में दो बार और दोनों समय भोजन में करेले की सब्जी खानी चाहिए।
खूनी बवासीर : मस्से फटने से रक्तस्राव होता है जिसे खूनी बवासीर कहा जाता है। रोगी नित्य दिन में दो समय करेले के रस में दो चम्मच शक्कर मिलाकर पिये तो लाभ होगा।
पाचन शक्ति : यदि पाचन शक्ति कमजोर हो तो किसी भी प्रकार करेले का नित्य सेवन करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। करेला स्वयं भी शीघ्र पचता है।
खून की शुध्दि : करेला खून की शुध्दि करने में पूरी तरह सक्षम है। यदि त्वचा-रोग हो तो भी रक्त-शुध्दि हेतु करेले का रस कुछ दिनों तक आधा-आधा कप पीना लाभदायक है। इस प्रकार कड़ुवा करेला अनेकों रोगों में औषधि रूप में काम आ सकता है बशर्ते उसे उसी रूप में लिया जाये- रस या सब्जी बनाकर।

लौकी के गुण:

सब्जी के रुप में खाए जाने वाली लौकी हमारे शरीर के कई रोगों को दूर करने में सहायक होती है। यह बेल पर पैदा होती है और कुछ ही समय में काफी बड़ी हो जाती है। वास्तव में यह एक औषधि है और इसका उपयोग हजारों रोगियों पर सलाद के रूप में अथवा रस निकालकर या सब्‍जी के रुप में एक लंबे समय से किया जाता रहा है। 
लौकी को कच्‍चा भी खाया जाता है, यह पेट साफ करने में भी बड़ा लाभदायक साबित होती है और शरीर को स्‍वस्‍य और शुद्ध भी बनाती है। लंबी तथा गोल दोनों प्रकार की लौकी वीर्य वर्धक , पित्‍त तथा कफनाशक और धातु को पुष्ट करने वाली होती है। आइए इसके औषधीय गुणों पर एक नज़र डालते हैं- 
1. हैजा होने पर 25 एम.एल. लौकी के रस में आधा नींबू का रस मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। इससे मूत्र बहुत आता है। 
2.खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। 
3.हृदय रोग में, विशेषकर भोजन के पश्चात एक कप लौकी के रस में थोडी सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हृदय रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 
4.लौकी में श्रेष्‍ठ किस्म का पोटेशियम प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिसकी वजह से यह गुर्दे के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे पेशाब खुलकर आता है। 
5.लौकी श्‍लेषमा रहित आहार है। इसमें खनिज लवण अच्‍छी मात्रा में मिलते है। 
6.लौकी के बीज का तेल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है तथा हृदय को शक्‍ति देता है। यह रक्‍त की नाडि़यों को भी तंदुरस्त बनाता है। लौकी का उपयोग आंतों की कमजोरी, कब्‍ज, पीलिया, उच्‍च रक्‍तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, शरीर में जलन या मानसिक उत्‍तेजना आदि में बहुत उपयोगी है।

टमाटर के गुण:

टमाटर स्वादिष्ट होने के साथ पाचक भी होता है। पेट के रोगों में इसका प्रयोग औषधि की तरह किया जा सकता है। जी मिचलाना, डकारें आना, पेट फूलना, मुँह के छाले, मसूढ़ों के दर्द में टमाटर का सूप अदरक और काला नमक डालकर लिया जाए तो तुरंत फायदा होता है। 
टमाटर के सूप से शरीर में स्फूर्ति आती है। पेट भी हल्का रहता है। सर्दियों में गर्मागर्म सूप जुकाम इत्यादि से बचाता है। अतिसार, अपेंडिसाइटिस और शरीर की स्थूलता में टमाटर का सेवन लाभदायक है। रक्ताल्पता में इनका ‍निरंतर प्रयोग फायदा देता है। 
टमाटर की खूबी है कि इसके विटामिन गर्म करने से भी नष्ट नहीं होते। बेरी-बेरी, गठिया तथा एक्जिमा में इसका सेवन आराम देता है। ज्वर के बाद की कमजोरी दूर करने में इससे अच्छा कोई विकल्प नहीं। मधुमेह के रोग में यह सर्वश्रेष्ठ पथ्य है। 
टमाटर में विटामिन 'सी' होता है, जो कि इम्युनिटी के स्तर को बढ़ाता है जिससे साधारण सर्दी और कफ की शिकायत नहीं होती। गॉल स्टोन और लिवर कन्जेशन में भी टमाटर का सेवन कारगर है। हम कह सकते हैं कि टमाटर पोषक तत्वों का खजाना है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाला विटामिन 'ए' आँखों और त्वचा के लिए व पोटेशियम मांसपेशियों में होने वाली ऐंठन में भी फायदा पहुँचाता है।
टमाटर में जो लाल रंग का तत्व होता,उसे लायकोपिन कहते हैं,यह तत्व शरीर को विजातीय पदार्थों(टाक्सीन्स) से मुक्त करने में सहायक है।लायकोपिन शरीर को फ़्री रेडिकल्स से मुक्त करने के मामले में बीटा केरोटीन(एन्टी ओक्सीडेन्ट) से भी आगे है।
अनुसंधान में पाया गया है कि टमाटर के नियमित सेवन से प्रोस्टेट केंसर से बचाव होता है।इसराईल के वैग्यानिकों के अनुसार टमाटर फ़ेफ़डे,बडी आंत और गर्भाषय के केंसर से बचाव करता है।और सबसे सुखप्रद तथ्य ये कि टमाटर सेवन करने से व्यक्ति लंबे समय तक बुढापे की चपेट मे नहीं आता है।

पपीता के गुण:

पपीता न केवल एक स्वादिष्ट फ़ल है बल्कि इसमे उपस्थित औषधीय गुणों का विशेष महत्व है।
पपीते में उच्च मात्रा में पोटेशियम तत्व पाया जाता है और इसके गूदे में भरपूर विटामिन" ए " मिलता है। पपीता के बीज और पत्तियां अपने कीटाणुनाशक गुणों के चलते आंतों में निवास करने वाले किटाणुओं को मारने के लिये प्रयोग किये जा सकते हैं।इसके नियमित उपयोग से कब्ज रोग का ईलाज हो जाता है।इसमें पाये जाने वाले पापैन(प्रोटीन) का हमारे शरीर के पाचन संस्थान को चुस्त-दुरस्त रखने का उत्तरदायित्व है। पपीते का जूस नियमित पीने से बडी आंत की सफ़ाई होती है और उसमें स्थित संक्रमण,श्लेष्मा और पीप का निष्कासन होने लगता है। ऐसे घाव जो अन्य चिकित्सा से ठीक न हो रहे हों पपीता का छिलका उन घावों पर कुछ रोज लगाकर अच्छे परिणाम की उम्मीद रखना चाहिये। पपीता में सूजन विरोधी और केंसर से बचाने के गुण मौजूद हैं।इस सूजन विनाशक गुण के चलते पपीता उन लोगों के लिये फ़ायदेमंद है जो शौथ, संधिवात ,गठिया रोग से पीडित है।
पपीता उदर रोगों में लाभकारी है। आमाषय को स्वच्छ करता है। एक ताजा अध्ययन का निष्कर्ष है कि 3 -4  रोज सिर्फ़ पपीता खाने से आमाषय और आंतों को आशातीत लाभ मिलता है।
कच्चा पपीता खाने से मासिक धर्म के विकार नष्ट होते हैं। मासिक धर्म खुलकर और नियमित आने लगता है। पपीता उन लोगों के लिये अमृत समान है जो सर्दी,खासी,फ़्लु से बार-बार परेशान रहते हैं। पपीता का उपयोग करने से हमारे शरीर का इम्युन सिस्टम मजबूत होता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफ़ा होता है।गर्भवतियों में सुबह की मिचली नियंत्रित करने के लिये पपीता का सेवन हितकारी है।
धमनियों के कठोर होने के दोष को निवारण करने में पपीता उपयोगी है। शूगर रोगियों की हृदय की बीमारियों में पपीता अत्यंत हितकारी है।पपीता का रेशा खराब कोलेस्टरोल(एल्डीएल) का स्तर घटाता है और इस प्रकार हृदय की सुरक्षा करता है।
इसके नियमित सेवन से अंगों और ग्रंथियों में केंसर की रोकथाम और बचाव होता है।

कद्दू (काशीफ़ल) के गुण:

कद्दू में मुख्य रूप से बीटा केरोटीन पाया जाता है, जिससे विटामिन ए मिलता है। पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर में फ्री रैडिकल से निपटने में मदद करता है। कद्दू ठंडक पहुंचाने वाला होता है। इसे डंठल की ओर से काटकर तलवों पर रगड़ने से शरीर की गर्मी खत्म होती है। कद्दू लंबे समय के बुखार में भी असरकारी होता है। इससे बदन की हरारत या उसका आभास दूर होता है। 
कद्दू के बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। यह बलवर्धक, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है।

कद्दू का रस भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह मूत्रवर्धक होता है और पेट संबंधी गड़बड़ियों में भी लाभकारी रहताहै। यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक होता है और अग्नयाशय को भी सक्रिय करता है। इसी वजह से चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को कद्दू के सेवन की सलाह देते हैं।
प्रोस्टेट ग्रंथि बढने के रोग में 30  ग्राम कद्दू के बीज(छिलका रहित) तवे पर सेक लें और खाएं। ऐसा दिन में तीन बार करें। इन बीजों में फ़ायटोस्टरोल तत्व की उपस्थिति से प्रोस्टेट ग्रंथि सिकुडकर मूत्र बिना रुक्कावट खुलकर आने लगता है।

प्याज के गुण:

कुछ चीजें ऐसी हैं कि जिन्हे हम अनजाने में खाते है लेकिन वे हमारे स्वास्थ्य के लिये फ़ायदेमंद होती हैं।साधारण तौर पर हम प्याज का उपयोग खाने को रुचिकर बनान के हिसाब से करते हैं। लेकिन जानने योग्य यह है कि प्याज गर्म तासीर वाला होता है और स्वास्थ्य संबंधी कईे परेशानियों को दूर करने वाला साबित होता है।
रक्त दोष दूर करने के लिये प्याज के 50  ग्राम रस में 10 ग्राम मिश्री और 2 ग्राम जीरा सफ़ेद भुना हुआ मिलालें।
अजीर्ण याने बदहजमे की शिकायत हो तो प्याज के छोटे छोट टुकडे काट लें उसमें नींबू निचोड लें और भोजन के सार्थ सेवन करें।
बच्चों को बदहजमी होने पर उनको प्याज के रस की 3-4  बूंदे चटानी चाहिये।प्याज पीसकर बालों में लगा्ने से खोपडी के बाल काले उगने लगेगे। जिस जगह सिर के बाल उड गये हों वहां प्याज का रस ऊंगली से मालिश करें , वहां बाल उगने लगेंगे।
प्याज मं क्वेरसेटिन नामक एन्टिओक्सीडेंट प्रचुरता से पाया जाता है जो आमाषय के केंसर की रोक थाम करता है। यह लाल और पीले प्याज में पाया जाता है ,सफ़ेद प्याज में नहीं मिलता है। प्याज का यह एन्टिओक्सीडेंट रक्तवहा नलिकाओं में खून के थक्के जमने स रोकता है,खून को पतला करता है,खराब कोलेस्टरोल कम करता है और बढिया कोलेस्टरोल का स्तर ऊंचा करता है। दमा रोगी और पुरानी खासी के मरीज प्याज के सेवन से लाभान्वित होते हैं। धमनी काठिन्य रोग में प्याज सेवनीय है।
प्याज सूजन विरोधी गुण रखता है,संक्रमण में एन्टिबायोटिक के रूप मे काम करता है। प्याज में केंसर से लडने की की क्षमता है।

रविवार, फ़रवरी 15, 2015

बड़े ही कारगर और सटीक नुस्खे

राजेश मिश्रा का सस्ती घरेलू उपचार एवं सुझाव

  • अपनी दवा ठंडे पानी से मत लें।
  • पांच बजे शाम के बाद भारी खाना न खाएं।
  • सुबह में रात की अपेक्षा ज्यादा पानी पियें।
  • सोने का सबसे बेहतर समय 10 बजे रात से 4 बजे सुबह होता है।
  • खाना खाने के तुरंत बाद न ही सोयें या न ही लेटे।
  • फ़ोन कॉल बाएं कान से सुनें।
  • जब मोबाइल फ़ोन बिलकुल डिस्चार्ज हो रहा हो तो उस समय फ़ोन न सुने क्योंकि उस समय रेडिएशन 1000 गुना ज्यादा होता है।
  • चार्ज में लगे फ़ोन से फ़ोन न ही करें, न ही रिसीव करें. उस समय रेडिएशन ज्यादा निकलता है।

एलोवेरा
कई बार हमारी छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज हमारे किचन गार्डन या फिर आस-पास मौजूद गार्डन में ही होता है, लेकिन इन चीजों का पता न होने के कारण हम इनका फायदा नहीं उठा सकते। आइए, जानें किन पौधे में है कौन सा औषधीय गुण और आप अपनी किस बीमारी के लिए कर सकते हैं इसका इस्तेमाल...

एलोवेरा को चित्र कुमारी, घृत कुमारी आदि नामों से भी जाना जाता है। यह गूदेदार और रसीला पौधा होता है। एलोवेरा के रस को अमृत तुल्य बताया गया है। आइए जानें, इसे आप अपनी किन शारीरिक समस्याओं के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। सबसे पहले तो यह बता दें कि इसका इस्तेमाल आपको लंबे समय तक जवां बनाए रखता है। इस पौधे का रस ही सबसे अहम हिस्सा है, जिसे एलो जेल के नाम से जाना जाता है और इसे पीने से आप खुद को स्वस्थ्य और तरोजाता महसूस करेंगे। वैसे तो इसका रस बालों में लगाने से बाल काले, घने और नर्म रहते हैं, लेकिन कहते हैं कि यह गंजेपन को भी दूर करने की ताकत रखता है। सर्दी-खांसी में भी इसका रस औषधि का काम करता है। इसके पत्ते को भूनकर रस निकाल लें और फिर इसका आधा चम्मच जूस एक कप गर्म पानी के साथ लेना फायदेमंद बताया जाता है। फोड़े-फुंसी पर भी यह गजब का असर करता है। इसके अलावा मुहांसे, फटी एड़ियां, सन बर्न, आंखों के चारों ओर काले धब्बे को भी यह दूर करता है। इन सबके अलावा बवासीर, गठिया रोग, कब्ज और हृदय रोग तथा मोटापा आदि के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

दांत दर्द-

  • दांत का दर्द अगर परेशान कर रहा हो तो पांच लौंग पीस कर उसमे निम्बू का रस निचोड़कर दांतो पर मलने से दर्द दूर होता है। 
  • दांत में कीड़ा लगने पर दांतो के नीचे लौंग को रखना या लौंग का तेल लगाना चाहिए। 
  • पांच लौंग एक ग्लास पानी में उबालकर इसमें कुल्ले करने से दर्द ठीक हो जाता है। 
  • नीम की कोंपलों को उबाल कर कुल्ले करने से दांतो का दर्द जाता रहता है। 
  • दर्द वाले दांत पर कपूर लगाएं। दांत में छेद हो तो उसमे कपूर भर दें। दर्द दूर होगा, कीड़े भी मर जाएंगे।
  • गर्म पानी में मिलकर कुल्ले करने से दांत दर्द में लाभ होता है। नित्य रात को सोने से पहले गर्म पानी में नमक डाल कर गरारे करके सोने से दांतों में कोई रोग नहीं होता। 
  • अदरक के टुकड़े पर नमक डालकर दर्द वाले दांतो में दबाएं, आराम मिलेगा। 

खजूर-

खजूर को शीतकालीन का फल माना गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए यह पित्त के अनेक रोगों में लाभदायक रहता है। शरीर के विकास के लिए यह श्रेष्ठ फल है। आइये जानें इसके फ़ायदे। 

  • सुखी खांसी होने पर दिन में दो बार सुबह और शाम खजूर खाने से लाभ होता है। 
  • खजूर का सेवन करने से पाचन-क्रिया ठीक होती है। पेट के दर्द और कब्ज़ के लिए लाभकारी है। 
  • दूध के साथ खजूर खाने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। 
  • खजूर और दही खाने से पेचिश में लाभ होता है। 
  • गुठली निकाले हुए दो खजूरों में थोड़ा सा शुद्ध घी, दो दाने काली मिर्च मिलकर एक महीना खाएं और ऊपर  दूध पिएं। इस तरह आपको अद्भुत शक्ति मिलेगी।

मेथी -

भले ही इसे कफ और ज्वर का कारक माना जाता रहा हो लेकिन यह शरीर की कई कृमियों का विनाश करती है। हम बात कर रहे हैं मेथी की । इसे खाने से भूख बढ़ती है और कमर व पीठ दर्द में लाभ होता हैं। आइए जाने इसके फ़ायदे । 

  • आग से जलने पर दानेदार मेथी को पानी में पीसकर लेप लगाने से जलन दूर हो जाती हैं । 
  • दानेदार मेथी की फंकी गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता हैं। 
  • अगर भूख ना लगती हो तो 7 ग्राम मेथी दाने में थोड़ा सा घी डालकर सके जब यह लाल होने लगे तो उतार कर ठंढा करें फिर पीस लें । इसके बाद इसमें शहद मिलाकर डेढ़ महीने तक चाटे ,भूख बढऩे लगेगी। 
  • डायबिटीज के रोगियों के लिए भी यह काफ़ी लाभदायक हैं । इसके सेवन से शरीर में शुगर लेवल कम होने के साथ कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होने लगता हैं ।