दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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शनिवार, जुलाई 04, 2015

राजेश मिश्रा की जनोपयोगी कुछ आवश्यक बातें

हर मर्ज का उपाय है इस आलेख में

सावन साग न भादौं दही, कुवार दूध न कातिक मही

हाथ जोड़कर आप सभी पाठकों से विनम्र निवेदन है इस आलेख को पुरे दिल से आत्मसात (कंठस्थ/याद) कर लें तो जिंदगी में कभी डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा. साथ ही राजेश मिश्रा द्वारा सुझाये गए इस आलेख से आप आस-पड़ोस और घर के डॉक्टर बन जायेंगे . यह आलेख हज़ारों पाठको से बातचीत और बड़े बुजुर्ग के कथन के साथ-साथ कई संकलन के बाद तैयार की गई है बहुत ही मेंहनत से ये आलेख (लिखी/संकलन से ) तैयार की गई है... पूरा जरूर पढ़ें और अपनों को पढ़ाएं : - राजेश मिश्रा 




आज का विज्ञान, चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी चमत्कारिक प्रयोग करता जा रहा है। छोटे-छोटे उपनगरों में भी बड़े-बड़े नर्सिग होम, डीएम, एमएस और एमडी चिकित्सकों की भरमार हो गई है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या जब ये चिकित्सक नहीं थे तो लोग बीमार होकर मर जाते थे? या आबादी वीरान हो जाया करती थी? बिल्कुल नहीं, लोग आज से ज्यादा स्वस्थ थे। आज भी गांवों में चिकित्सा की कोई बेहतर सुविधा नहीं है फिर भी 90 या 95 वर्ष के वृद्ध खेतों में काम करते हुए मिल जायेंगें। उनके उत्तम सेहत का राज है खान, पान, अनुपात और परम्परागत दिनचर्या। जो पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पूर्वजों द्वारा रटायी जाती रही है। ये सब दोहों, चौपाइयों और कविताओं के रूप में है। जिनके लेखक और रचनाकारों का कुछ अता-पता नहीं है।

इन कविताओं में भारतीय जलवायु, मौसम और परिवेश का ध्यान रखते हुए गहन शोध किया गया है। जो आज पढ़े लिखे समाज में लुप्तप्राय हैं। जिले के प्रख्यात वैद्य रहे स्व.शिवसहाय सिंह अपने शिष्यों व रोगियों को मौसम के निषिद्ध भोजन इस प्रकार समझाते थे- सावन साग न भादो दही, कुवार दूध न कातिक मही। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि मौसम विशेष में शारीरिक रासायनिक क्रियायें बदल जाया करती हैं। जलालपुर के इजरी गांव निवासी रामकुमार वैद्य अपनी कविताओं और गानों में खान-पान की दिनचर्या सुनाया करते थे।

भोजन के बाद की दिनचर्चा-भोजनोपरान्त थोड़ा टहल के बाई ओर करवट लेटना भी लाभकारी है। बासी भोजन खाना, हर हाल हानिकारक कहा, खाके तेज चलना या दौड़ना दुखारी है। किस भोजन के बाद कौन सा आहार स्वीकार है। कौन विष के समान है इसकी लम्बी फेहरिस्त है। -

  • पक्का कटहल खायके फिर लो पान चबाय, पेट फुलै सांसा रुके और तुरन्त मरिजाय।
  • जिस तेल में तली गई हो मछली उसी में, सिद्ध हुई पीपल जहर के समान है।
  • मधु की समान मात्रा घी या व्योम-जल संग, खाने वाले को ढकेल देता श्मशान है।
  • मधु या मकोय भी है एक साथ विष सम, प्रान हरने का यह करक प्रधान है

दूध के साथ इन फलों का सेवन निषिद्ध है-आम, आमड़ा, करौंदा, केला, नीबू, कागजी और नीबू जम्म्बूरी, वहेरी, बेर, कैंथ खाता है कमरख, कटहल, नारियल औ अनार, अखरोट आंवला न दूध से सुहाता है।

ये सारे के सारे प्रयोग लिपिबद्ध न होकर परम्परागत ढंग से लोगों द्वारा सुन-सुनकर याद किये गये हैं। ‘‘पूर्वजों ने जो भी कहा है उसकी प्रामाणिकता आज भी प्रासंगिक है, तब भी विज्ञान था। हमारे उन्हीं विज्ञान पर विदेशों में शोध हो रहा है। पुराने वैद्यों के पास दूर दर्शिता थी। सावन में साग वर्जित है कारण कि उस समय वैक्टीरिया का प्रभाव साग के पत्तों पर अधिक होता है।
भादों में दही इसलिए न खाना चाहिए कि उस समय भी वैक्टीरिया अधिक होती है। हमारे पूर्वज जो वैद्य के रूप में थे उनका अनुभव नकारा नहीं जा सकता। राज्य वैद्य नाड़ी देखकर बताते थे कि शरीर का ताप क्रम कितना है आज थर्मामीटर लगाये जाते हैं।’’

भोजन की विधि :-

  • सुबह के समय सूखा पदार्थ पहले खाएं फिर द्रव्य पदार्थ लें । भारी , मीठा और चिकना पदार्थ पहले खाएं,
  • अम्ल व लवण युक्त मध्य में खाएं ।
  • कडुवा, तीखा , कसैला अंत में खाएं ।
  • यदि भूख कम लगती है तो पहले गर्म पदार्थ पहले
  • खायें ।
  • रात्रि के समय सत्तू , फल और दही का सेवन ना करें।
  • हरा उड़द दालों में श्रेष्ठ है, यह हल्का और वातकारक है ।
  • कुलथी की दाल को सर्दियों में खाएं कफ, वायु , उदररोग , पथरी, साँस सम्बन्धी रोग को ठीक करता है ।
  • उड़द की दाल शुक्र को बढ़ाने वाला होता है ।
  • जौ पित्त , कंठ रोग और कफ को शांत करता है ।

निषेध :-

  • अति मधुर भोजन अग्नि को नष्ट करता है, अत्यंत लवण युक्त भोजन आँखों के हानिकर है, अति तीक्ष्ण,
  • तथा अति अम्ल युक्त भोजन वृद्धावस्था को बढाता है ।
  • दही, मधु , घृत, सत्तू , खीर, कांजी को छोड़कर अन्य आहार द्रव्य को खाते समय थोडा छोड़ देना चाहिए ।
  • पेट दर्द में- घी के साथ मिश्रित हींग, 
  • पुराने ज्वर में- मधु के साथ पीपर , 
  • वातरोग में- घी में भूना लहसुन, 
  • श्वांस रोग में - शहद मिश्रित त्रयूषण ( सोंठ, मिर्च, पीपल ), 
  • शीतरोग में- पान के रस में मिर्च, 
  • प्रमेह रोग में - त्रिफला के साथ गुड, 
  • सन्निपाति रोग में - शहद के साथ अदरक , 
  • ज्वर में - नागरमोथा तथा पित्तपापड़ा , 
  • गृहणी रोग में- मट्टा , गरविष में- स्वर्ण भस्म , उल्टी में - धान का लावा, 
  • अतिसार ( दस्त )में - कुटज , रक्तपित्त में - वासा , 
  • अर्श में - चित्रक , पेट के कीड़ों में - वायविडंग लाभप्रद है ।
  • दही :- दही को रात्रि में , ज्यादा गर्म करके , वर्षा ऋतु में , शरद ऋतु में दही नहीं खाना चाहिए । 
  • विना मूंग की दाल, मधु , घी , गुड के बिना दही नहीं खाना चाहिए ।
  • बिना पूरी जमे दही ना खाएं , रोजाना दही ना खाएं ।
पाठक बंधुओं! हजारों मरीजों को देख कर और न जाने कितने हजार मरीजों से बात करके मुझे एक बात बड़ी शिद्दत से परेशान करती रही कि ज्यादातर बीमारियों का मुख्य कारण गलत खान पान है। अगर हमें इस बात की सही जानकारी हो कि किस चीज के साथ क्या नहीं खाना चाहिए तो हो सकता है कि हम खुद को अनावश्यक रोगों से सुरक्षित रख सकें। इसलिए आप सभी से निवेदन है कि इस लेख को बहुत ध्यान से पढियेगा जिससे इसका लाभ आपको मिल सके। अगर ऎसी ही कुछ जानकारियां आपको हों तो मुझे जरूर बता दीजियेगा।

  • सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी। 
  • दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है। 
  • दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही, नमक, इमली, खरबूजा, बेल, नारियल, मूली, तोरई, तिल , तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए। 
  • दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए। 
  • गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए। 
  • ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं। 
  • शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं। 
  • खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी ,कटहल कभी नहीं। 
  • घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा
  • तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं। 
  • चावल के साथ सिरका कभी नहीं। 
  • चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं। 
  • खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं। 

कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे-

  1. खरबूजे के साथ चीनी 
  2. इमली के साथ गुड 
  3. गाजर और मेथी का साग
  4. बथुआ और दही का रायता 
  5. मकई के साथ मट्ठा 
  6. अमरुद के साथ सौंफ 
  7. तरबूज के साथ गुड 
  8. मूली और मूली के पत्ते 
  9. अनाज या दाल के साथ दूध या दही 
  10. आम के साथ गाय का दूध
  11. चावल के साथ दही
  12. खजूर के साथ दूध 
  13. चावल के साथ नारियल की गिरी
  14. केले के साथ इलायची 
कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं। और माले मुफ्त दिले बेरहम वाली कहावत तो मशहूर है ही। शादियों में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मैंने अनेक बार देखा है। कुछ लोगो तो बस फ्री में जहर भी मिल जाए तो थाली भर के खायेंगे ……खैर चलिए लेकिन माल भले ही दूसरे का हो पेट आप का ही होता है। और बाद में तकलीफ भी आप को ही होती है। आइये हम कुछ ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ --
  • केले की अधिकता में दो छोटी इलायची 
  • आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड 
  • जामुन ज्यादा खा लिया तो 3-4 चुटकी नमक 
  • सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम 
  • खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत 
  • तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग 
  • अमरूद के लिए सौंफ 
  • नींबू के लिए नमक
  • बेर के लिए सिरका
  • गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो 3-4 बेर खा लीजिये 
  • चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये 
  • बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च 
  • मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये 
  • बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं 
  • खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये 
  • मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं 
  • इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये 
  • मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये 
  • मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये 
  • घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं 
  • खुरमानी ज्यादा हो जाए तोठंडा पानी पीयें 
  • पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये 
अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये 80% बीमारियों से बचे रहेंगे। 

किस महीने में क्या नही खाना चाहिए और क्या जरूर खाना चाहिए ---

  1. चैत में गुड बिलकुल नहीं खाना, नीम की पत्ती /फल, फूल खूब चबाना। 
  2. बैसाख में नया तेल नहीं खाना, चावल खूब खाएं। 
  3. जेठ में दोपहर में चलना मना है, दोपहर में सोना जरुरी है। 
  4. आषाढ़ में पका बेल खाना मना है, घर की मरम्मत जरूरी है। 
  5. सावन में साग खाना मना है, हर्रे खाना जरूरी है। 
  6. भादो मे दही मत खाना, चना खाना जरुरी है। 
  7. कुवार में करेला मना है, गुड खाना जरुरी है। 
  8. कार्तिक में जमीन पर सोना मना है, मूली खाना जरूरी है। 
  9. अगहन में जीरा नहीं खाना, तेल खाना जरुरी है। 
  10. पूस में धनिया नहीं खाना, दूध पीना जरूरी है। 
  11. माघ में मिश्री मत खाना, खिचड़ी खाना जरुरी है। 
  12. फागुन में चना मत खाना, प्रातः स्नान और नाश्ता जरुरी है।
    Rajesh Mishra (Trip Trikut Pahad, Jharkhand)

मंगलवार, मार्च 03, 2015

राज कि छोटी-छोटी मगर मोटी-मोटी बातें

Get compliments of the house as a Doctor

घर का डॉक्टर बनें तारीफ पाएं


छोटी-छोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स सभी को कभी न कभी होती है। यदि आप घर पर ही ऐसी प्रॉब्लम्स का उपाय करना चाहते हैं तो आज राजेश मिश्रा आपको बता रहे हैं ऐसे महत्वपूर्ण घरेलू नुस्खे, जिनका पता होने पर आप कुछ साधारण रोगों का इलाज खुद कर सकते हैं और घर का डॉक्टर कहलाने के साथ-साथ तारीफ भी पाएंगे.. 
पेट दर्द - अाधा चम्मच हल्दी और आधे चम्मच नमक को मिलाकर ठंडे पानी से फांकी मार लें। पेट दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
बालों का गिरना - यदि आपके बालों में रूसी है या फिर आपके बाल झड़ रहे हैं तो आप कच्चे पपीते का पेस्ट बनाकर बालों की जड़ों पर 10 मिनट तक लगाएं। उसके बाद बाल धो लें। ऐसा करने से आपके बाल नहीं झड़ेंगे।

खून की खराबी - खून साफ नहीं हैं तो 1 चम्मच शहद को आधे गिलास पालक के रस में मिलाकर 1 महीने तक सेवन करें। यह आपके रक्त विकार को दूर करेगा और खून को साफ रखेगा।
स्किन प्रॉब्लम - नारियल पानी में कच्चा दूध, नींबू का रस, बेसन और चंदन पाउडर मिलाकर लेप तैयार करें। नहाने से 15 मिनट पहले ये लेप चेहरे पर लगाएं। उसके बाद चेहरा धो लें। यह नुस्खा स्किन प्रॉब्लम दूर कर चेहरे को चमकदार बनाता है।
एसिडिटी - भोजन करने के बाद आप थोड़े से गुड़ का सेवन करें। ऐसा करने से एसिडिटी की समस्या खत्म हो जाएगी।
सिरदर्द - एक गिलास गर्म पानी में आधे नींबू का रस डालकर पिएं। सिर दर्द दूर हो जाएगा। साथ ही युकेलिप्टस के तेल से सिर की मसाज करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है।
गैस्ट्रिक ट्रबल - अजवायन और काला नमक पीस कर समान मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को एक चम्मच मात्रा में गर्म पानी से लें। गैस की समस्या में तुरंत आराम मिलेगा।
गैस्ट्रिक ट्रबल - एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नीबू, थोड़ा सा काला नमक, सिका हुआ जीरा और थोडी सी हींग मिलाकर लेने से गैस की तकलीफ में तत्काल राहत मिलती है।
जुकाम - यदि जुकाम या सर्दी हो तो रात को सोने से पहले गर्म पानी पीकर सोएं। जुकाम में बहुत राहत मिलेगी।

घरेलू उपचार

1. अपनी दवा ठंडे पानी से मत लें।

2. पांच बजे शाम के बाद भारी खाना न खाएं।

3. सुबह में रात की अपेक्षा ज्यादा पानी पियें.

4. सोने का सबसे बेहतर समय 10 बजे रात से 4 बजे सुबह होता है।

5. खाना खाने के तुरंत बाद न ही सोयें या न ही लेटे.

6. फ़ोन कॉल बाएं कान से सुनें।

7. जब मोबाइल फ़ोन बिलकुल डिस्चार्ज हो रहा हो तो उस समय फ़ोन न सुने क्योंकि उस समय रेडिएशन

1000 गुना ज्यादा होता है।

8. चार्ज में लगे फ़ोन से फ़ोन न ही करें, न ही रिसीव करें. उस समय रेडिएशन ज्यादा निकलता है।

दांत दर्द-

  • दांत का दर्द अगर परेशान कर रहा हो तो पांच लौंग पीस कर उसमे निम्बू का रस निचोड़कर दांतो पर मलने से दर्द दूर होता है। 
  • दांत में कीड़ा लगने पर दांतो के नीचे लौंग को रखना या लौंग का तेल लगाना चाहिए। 
  • पांच लौंग एक ग्लास पानी में उबालकर इसमें कुल्ले करने से दर्द ठीक हो जाता है। 
  • नीम की कोंपलों को उबाल कर कुल्ले करने से दांतो का दर्द जाता रहता है। 
  • दर्द वाले दांत पर कपूर लगाएं। दांत में छेद हो तो उसमे कपूर भर दें। दर्द दूर होगा, कीड़े भी मर जाएंगे।
  • गर्म पानी में मिलकर कुल्ले करने से दांत दर्द में लाभ होता है। नित्य रात को सोने से पहले गर्म पानी में 
  • नमक डाल कर गरारे करके सोने से दांतों में कोई रोग नहीं होता। 
  • अदरक के टुकड़े पर नमक डालकर दर्द वाले दांतो में दबाएं, आराम मिलेगा। 

खजूर-

  • खजूर को शीतकालीन का फल माना गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए यह पित्त के अनेक रोगों में लाभदायक हता है। शरीर के विकास के लिए यह श्रेष्ठ फल है। आइये जानें इसके फ़ायदे। 
  • सुखी खांसी होने पर दिन में दो बार सुबह और शाम खजूर खाने से लाभ होता है। 
  • खजूर का सेवन करने से पाचन-क्रिया ठीक होती है। पेट के दर्द और कब्ज़ के लिए लाभकारी है। 
  • दूध के साथ खजूर खाने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। 
  • खजूर और दही खाने से पेचिश में लाभ होता है। 
  • गुठली निकाले हुए दो खजूरों में थोड़ा सा शुद्ध घी, दो दाने काली मिर्च मिलकर एक महीना खाएं और ऊपर से दूध पिएं। इस तरह आपको अद्भुत शक्ति मिलेगी।

मेथी -

हम बात कर रहे है मेथी की । आइए जाने इसके फ़ायदे । 
  • इसे खाने से भूख बढ़ती है और कमर व पीठ दर्द में लाभ होता हैं । 
  • भले ही इसे कफ और ज्वर का कारक माना जाता रहा हो लेकिन यह शरीर की कई कृमियों का विनाश करती है । 
  • आग से जलने पर दानेदार मेथी को पानी में पीसकर लेप लगाने से जलन दूर हो जाती हैं । 
  • दानेदार मेथी की फंकी गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता हैं। 
  • अगर भूख ना लगती हो तो 7 ग्राम मेथी दाने में थोड़ा सा घी डालकर सके जब यह लाल होने लगे तो उतार कर ठंढा करें फिर पीस लें । इसके बाद इसमें शहद मिलाकर डेढ़ महीने तक चाटे ,भूख बढऩे लगेगी। 
  • डायबिटीज के रोगियों के लिए भी यह काफ़ी लाभदायक हैं । इसके सेवन से शरीर में शुगर लेवल कम होने के साथ कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होने लगता हैं ।

बुधवार, फ़रवरी 25, 2015

कुछ कारगर निवारण एवं सुझाव

Some effective Prevention and Tips

इस बार राजेश मिश्रा आप सभी के लिए लाए हैं कई रोगों का एक ही जगह इलाज। इन रोगों में शामिल है- पथरी, झाइयां, खूनी बवासीर, मासिक स्राव कष्ट तथा दर्द के साथ होना, बवासीर, सिर के बाल झड़ना, मूत्रावरोध।

पथरी : यदि गुर्दे या मूत्राशय में पथरी हो तो 250 ग्राम कुलथी (शिमला की पहाड़ियों से आने वाली सफेद कुलथी ठीक रहती है) को साफ कर रात को तीन किलो पानी में भिंगोकर रख दें। सबेरे भीगी हुई कुल्थी सहित उस पानी को धीमी आंच पर लगभग चार घंटे तक पकायें। जब पानी सिर्फ एक किलो रह जाये (जो काले चनों के सूप की तरह होता है) तब उसे नीचे उतार लें। तीस से पचास ग्राम (अपनी पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का छौंक लगायें। छौंक में थोड़ा सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं। इस स्वादिष्ट सूप को 250 ग्राम की मात्रा में दिन में एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर लगभग बारह बजे पी लें। दस-पंद्रह दिन तक इस नुस्खे के सेवन से गुर्दे और मूत्रालय की पथरी गलकर बिना आपरेशन के बाहर आ जाती है। इस नुस्खे के सेवन करते वक्त दोपहर का भोजन नहीं लेना है।

झाइयां : चेहरे पर काली झाइयां साधारणत: त्वचा की निचली परतों में रहने वाले प्राकृतिक पदार्थ सिलीकोन की कमी से होती है। नहाने से पूर्व रोज एक चम्मच गुनगुने शहद में 2-3 बूंदे ग्लिसरीन व चुटकी भर नमक मिलाकर अच्छी तरह मथकर हल्के हाथ से कुछ दिनों तक लगाने से झाइयां दूर हो जाती हैं।
खूनी बवासीर : गुड़ के साथ एक दो हरड़ को दोनों समय खाने के बाद नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होगा।

मासिक स्राव कष्ट तथा दर्द के साथ होना : 2 चम्मच अजवायन, 2 कप पानी में डालकर उबालें। 1 कप शेष रख लें, इसमें गुड़ मिलाकर सुबह खाली पेट चाय की तरह पी लें। यह नुस्का प्रतिदिन सुबह-शाम 3 दिन तक लेना चाहिए। सामान्यत: 3 मासिक स्राव तक प्रयोग पर्याप्त रहता है। मासिक स्राव होने से 3 दिन पहले इसका प्रयोग आरंभ करने से मासिक समय पर खुलकर आता है।
पेट में गैस : अजवायन के साथ हरड़ और काला नमक लेने से पेट फूलना, पेट दर्द, डकारें आना आदि में तत्काल राहत मिलती है।

बवासीर : आम के कोमल पत्तों को जल के साथ पीसकर मिश्री मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है। खूनी बवासीर से रक्त आना बंद होता है।
रक्त प्रदर : आम की गुठली की गिरी का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में लेने से रक्त प्रदर, खूनी बवासीर, पेट के कीड़े दूर होते हैं।

सिर के बाल झड़ना : बरगद के पत्तों को कुचल लें और अलसी के तेल में पकायें। पत्तों के जल जाने पर तेल छानकर रख लें। इस तेल की मालिश करने से कुछ ही दिनों में बालों का झड़ना रुक जायेगा और झड़े हुए बालों के स्थान पर नये बाल आने लगेंगे।
देशी घी में 4-6 बादाम की गिरी पीसकर डाल दें और इतनी उबालें कि गिरी के टुकड़े जल जायें। अब घी को छानकर शीरी में भर लें। यह घी गुनगुना करके सिर पर मालिश करने से बालों का झड़ना रुकता है और दिमागी कमजोरी भी दूर होती है।

मूत्रावरोध : पेशाब की रुकावट में कबाव चीनी का एक चम्मच चूर्ण दूध की लस्सी से देने पर तत्काल मूत्र हो जाता है। दूध के अभाव में मिश्री के साथ भी दे सकते हैं।

मांस पेशियों में दर्द का घरेलू उपचार

Raj's Simple 11 Home Remedies for Muscle Pain


मांसपेशियों में दर्द किसी चोट या दुर्घटना, मांसपेशियों के अत्याधिक उपयोग या मांस पेशियों में तनाव, तनाव या चिंता या कुछ मेडिकल परिस्थितियों के कारण हो सकता है। मांसपेशियों के दर्द को प्राकृतिक तरीके से दूर करने के लिए कुछ प्रभावी घरेलू उपचार उपलब्ध है।
कभी कभी बहुत अधिक व्यायाम करने से भी मांसपेशियों में दर्द हो जाता है। इस स्थिति में हमारे शरीर को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इस अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए मांसपेशियों में अवायुश्वसन होता है जिसके कारण लेक्टिक एसिड एकत्रित होने लगता है। इस लेक्टिक एसिड के कारण मांसपेशियों में थकान और दर्द होता है।
सामान्यत: लेक्टिक एसिड विभाजित हो जाता है और मांसपेशियों का दर्द चला जाता है परन्तु इसमें कुछ दिन का समय लगता है। सौभाग्य से मांसपेशियों के दर्द को दूर करने के लिए हमारे पास कुछ घरेलू उपचार उपलब्ध है। कसरत करने के बाद मांसपेशियों के दर्द को कैसे दूर किया जाए तथा मांसपेशियों के दर्द को ठीक करने के लिए क्या अच्छा है? आज बोल्डस्काय आपको मांसपेशियों के किसी भी प्रकार के दर्द को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपचार बताएगा।

1) तेल से मालिश

मालिश से मांसपेशियों में रक्त परिसंचरण बढ़ता है जिससे मांसपेशियों को गर्मी मिलती है तथा यह लेक्टिक एसिड को दूर करता है जबकि तेल मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है और दर्द से राहत दिलाता है। विभिन्न प्रकार के तेल जैसे पाइन, लैवेंडर, अदरक और पिपरमेंट का तेल मांस पेशियों के दर्द को कम करने में सहायक होते हैं।

2) मैग्नीशियम सल्फेट से स्नान

मैग्नीशियम सल्फेट प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला खनिज है जो मांसपेशियों के ऊतकों की सूजन को कम करता है तथा मांसपेशियों के दर्द से आराम पहुंचाता है। यह पुरानी स्थिति जैसे फाईब्रोम्यल्गिया में भी मांसपेशियों के दर्द से आराम दिलाता है। नहाने के लिए मानक आकार के टब को गुनगुने या गर्म पानी से भरें तथा इसमें 1-2 कप ऐप्सम सॉल्ट मिलाएं तथा इस पानी में 15-30 मिनिट आराम करें। इस स्नान से मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन से आराम मिलता है, शरीर को आराम मिलता है और तनाव कम होता है। इस प्रकार व्यायाम करने के बाद मांसपेशियों के दर्द को दूर किया जा सकता है।

3) कोल्ड थेरपी

मांसपेशियों के दर्द को दूर करने के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है। कोल्ड थेरपी को क्रयोथेरेपी भी कहा जाता है जिसमें राहत पाने के लिए चोट की जगह पर आइस (बर्फ़) लगाया जाता है। अक्सर इसका उपयोग खेलकूद के कारण होने वाले लगने वाली चोटों में मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। चोट लगे हए स्थान पर बर्फ़ लगाने से उस स्थान पर रक्त परिसंचरण धीमा हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप उस स्थान पर दर्द और सूजन कम हो जाती है।

4) हीट थेरपी

हीट थेरपी का उपयोग मोच या ऐंठन, मांसपेशियों में जकड़न या ऐंठन के उपचार में किया जाता है। अच्छा होगा कि गंभीर चोटों में हीट थेरपी का उपयोग न किया जाए क्योंकि इसके कारण सूजन बढ़ सकती है और असुविधा हो सकती है। गर्मी से मांसपेशियों के दर्द में आराम मिलता है, मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और मांसपेशियों का तनाव कम होता है। गर्मी प्रभावित स्थान पर रक्त परिसंचरण बढ़ाती है से चोट लगे हुए स्थान पर रक्त परिसंचरण बढ़ जाता है जिससे मांसपेशियों की चोट से भी आराम मिलता है।

5) गर्म और ठंडा स्नान

बारी बारी गर्म और ठंडे पानी से स्नान करने से दर्द से तेज़ी से आराम मिलता है। इससे प्रभावित स्थान का रक्त परिसंचरण बढ़ता है, सूजन और दर्द कम कम होता है। ठंडा स्नान दर्द वाले स्नान को सुन्न कर देता है तथा गर्म स्नान मांसपेशियों को आराम देता है, ऐंठन को दूर करता है तथा सम्पूर्ण शरीर के तनाव को कम करता है। पानी में सुगंध वाले तेल जैसे लैवेंडर, यूकेलिप्टस और बरगामोट मिलाने से अतिरिक्त लाभ होता है।

6) जडी बूटियाँ और लेप

कुछ जडी बूटियों में एंटी इम्फ्लेमेट्री (प्रदाहनाशी) और आरामदायक गुण होते हैं। जबकि हर्बल लेप (जडी बूटियों के अर्क का अर्द्ध ठोस रूप जो लोशन, जेल या बामके रूप में होता है) त्वचा तथा ऊतकों में अंदर तक प्रवेश करते हैं तथा आराम पहुंचाते हैं।

7) एक्युप्रेशर

एक्युप्रेशर एक वैज्ञानिक पद्धति है जिसमें आराम पहुंचाने के लिए शरीर के विभिन्न एक्युप्रेशर पॉइंट्स पर प्रेशर (दबाव) देकर उन्हें उत्तेजित किया जाता है। यह मांसपेशियों को आराम पहुंचाने तथा उन्हें ठीक करने में सहायक होता है। मांसपेशियों को आराम देकर और बढ़े हुए एंड्रोफिन्स से मांसपेशियों के दर्द से तीव्र और प्राकृतिक तरीके से आराम पाया जा सकता है।

8) मैगनीशियम

शरीर में मैगनीशियम का स्तर कम होने पर मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन की समस्या हो सकती है। मैगनीशियम का संपूरक लें। आप अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल कर सकते हैं जिनमें मैगनीशियम प्रचुर मात्रा में हो। मैगनीशियम से समृद्ध खाद्य पदार्थों में गुड़, कुम्हड़ा और कद्दू के बीज, पालक, रसपालक, कोका पाउडर, ब्लैक बीन्स, अलसी के बीज, तिल के बीज, सूरजमुखी के बीज, बादाम और काजू शामिल हैं।

9) ऐप्पल सीडर विनेगर

मांसपेशियों के दर्द से कैसे आराम पाया जाए? मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए एसीवी एक प्रभावी घरेलू औषधि है। एक गिलास पानी में एक या दो चम्मच ऐप्पल सीडर विनेगर मिलकर पीयें। जिस स्थान पर दर्द हो रहा है उस स्थान पर आप विनेगर लगा भी सकते हैं। इससे आपको मांसपेशियों के दर्द से आराम मिलेगा।

10) लाल मिर्च

इसमें कैप्सैसिन पाया जाता है जो ऑर्थराइटिस, जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द और मांसपेशियों के सामान्य दर्द से राहत पहुंचाता है। आप स्वयं पेस्ट बना सकते हैं। इसके लिए एक चौथाई या आधा टेबल स्पून लाल मिर्च को जैतून के तेल (गर्म) या नारियल के तेल में मिलाएं। इसे प्रभावित स्थान पर लगायें तथा लगाने के बाद अपने हाथ धो डालें। इसे अपनी नाक, आँखों और मुंह से दूर रखें क्योंकि इससे जलन हो सकती है।

11) चेरी का रस

चेरी का रस दौड़ने या बहुत अधिक व्यायाम करने के बाद मांसपेशियों में होने वाले दर्द को दूर करने में सहायक होता है। चेरी में एंथोक्यनिंस नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो जलन को कम करता है। दर्द और जलन को कम करने के लिए चेरी का खट्टा रस पीयें। इससे पैरों और हाथ की मांसपेशियों में होने वाले दर्द से आराम मिलेगा।