दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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सोमवार, जून 13, 2016

मधुमेह में कैसा आहार लेना चाहिए

मधुमेह को घरेलू इलाज से करें कंट्रोल

मधुमेह जैसी आजीवन रहने वाली बीमारी की चिकित्सा संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जाना आसान है। गौरतलब है कि मधुमेह या चीनी की बीमारी को मधुमेह रोगी स्वंय अपनी देखभाल करके कंट्रोल कर सकते हैं। विशेष भोजन या हल्का भोजन लेकर मधुमेह आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसमें ध्यान रखने वाली बात होती है कि मधुमेह रोगियों का खाना कैसा हो। आइए जानें मधुमेह रोगियों को खाने में क्या चीज लेनी चाहिए और क्या नहीं। 
"मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है...: "राज"

यदि आप मधुमेह रोगी हैं तो, जाहिर सी बात है कि आपके दिमाग में यह एक सवाल जरुर आया होगा कि क्या हम फल का सेवन कर सकते हैं? एक्सपर्ट बोलते हैं कि मधुमेह रोगी भी फल का सेवन कर सकते हैं लेकिन सही मात्रा में। ऐसे फल जैसे, केला, लीची, चीकू और कस्टर्ड एप्पल आदि से बचना चाहिये। आज हम आपको कुछ ऐसे 18 फल बताने जा रहे हैं, जिसका सेवन आप आराम से कर सकते हैं। दरअसल, मधुमेह के रोगियों को रेशेदार फल, जैसे तरबूज, खरबूजा, पपीता, सेब और स्ट्राबेरी आदि खाने चाहिए। इन फलों से रक्त शर्करा स्तर नियंत्रित होता है इसलिये इन्‍हें खाने से कोई नुकसान नहीं होता। मधुमेह रोगियों को फलो का रस नहीं पीना चाहिये क्योंकि एक तो इसमें चीनी डाली जाती है और दूसारा कि इसमें गूदा हटा दिया जाता है, जिससे शरीर को फाइबर नहीं मिल पाता। तो आइये जानते हैं कि मधुमेह रोगियों को कौन-कौन से फलों का सेवन करना चाहिये।

कीवी 

कई रिसर्च के अनुसार यह बात सामने आई है कि कीवी खाने से ब्‍लड शुगर लेवल कम होता है।

काली जामुन 

मधुमेह रोगियो के लिये यह फल बहुत ही लाभकारी है। इसके बीजो़ को पीस कर खाने से मधुमेह कंट्रोल होता है।

अमरख 

यदि आप को मधुमेह है तो आप यह फल आराम से खा सकते हैं। पर यदि रोगी को डायबिटीज अपवृक्कता है तो उसे अमरख खाने से पहले डॉक्‍टर से पूछना चाहिये।

अमरूद 

अमरूद में विटामिन ए और विटामिन सी के अलावा फाइबर भी होता है।

चैरी 

इसमें जीआई मूल्‍य 20 होता है जो कि बहुत कम माना जाता है। यह मधुमेह रोगियों के लिये बहुत ही स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक मानी जाती है।

आड़ू 

इस फल में भी जीआई बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और मधुमेह रोगियों के लिये अच्‍छा माना जाता है।

सेब 

सेब में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।

अनानास 

इसमें एंटी बैक्‍टीरियल तत्‍व होने के साथ ही शरीर की सूजन कम करने की क्षमता होती है। यह शरीर को पूरी तरह से फायदा पहुंचाता है।

नाशपाती 

इसमें खूब सारा फाइबर और विटामिन पाया जाता है जो कि मधुमेह रोगियों के लिये फायदेमंद होता है।

पपीता 

इसमें विटामिन और अन्‍य तरह के मिनरल होते हैं।

अंजीर

इसमें मौजूद रेशे मधुमेह रोगियों के शरीर में इंसुलिन के कार्य को बढावा देते हैं।

संतरा

यह फल रोज खाने से विटामिन सी की मात्रा बढेगी और मधुमेह सही होगा।

तरबूज 

यदि इसे सही मात्रा में खाया जाए तो यह फल मधुमेह रोगियों के लिये अच्‍छा साबित होगा।

अंगूर 

अंगूर का सेवन मधुमेह के एक अहम कारक मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम से बचाता है। अंगूर शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है।

अनार 

यह फल भी बढे हुए ब्‍लड शुगर लेवल को कम करने में असरदार है।

खरबूज 

इसमें ग्‍लाइसिमिक इंडेक्‍स ज्‍यादा होने के बावजूद भी फाइबर की मात्रा अच्‍छी होती है इसलिये यदि इसे सही मात्रा में खाया जाए तो अच्‍छा होगा।

कटहल

यह फल इंसुलिन लेवल को कम करता है क्‍योंकि इसमें विटामिन ए, सी, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, कैल्‍शियम, पौटैशियम, आयरन, मैग्‍नीशियम तथा अन्‍य पौष्टिक तत्‍व होते हैं।

आमला

इस फल में विटामिन सी और फाइबर होता है जो‍ कि मधुमेह रोगी के लिये अच्‍छा माना जाता है।

मधुमेह रोगियों का खाना "राज" कैसा हो?

मधुमेह जैसी आजीवन रहने वाली बीमारी की चिकित्सा संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जाना आसान है। गौरतलब है कि मधुमेह या चीनी की बीमारी को मधुमेह रोगी स्वंय अपनी देखभाल करके कंट्रोल कर सकते हैं। विशेष भोजन या हल्का भोजन लेकर मधुमेह आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसमें ध्यान रखने वाली बात होती है कि मधुमेह रोगियों का खाना कैसा हो। आइए जानें मधुमेह रोगियों को खाने में क्या चीज लेनी चाहिए और क्या नहीं।
  1. मधुमेह रोगियों को घुलनशील फाइबर युक्त आहार लेना चाहिए।
  2. विशेष भोजन के रूप में मधुमेह रोगी जल्दी पचने वाला आहार ले सकते हैं। 
  3. मधुमेह रोगी को खाने में हल्दी का सेवन किसी न किसी रूप में ज़रूर करना चाहिए।
  4. मधुमेह रोगियों को काब्रोहाइड्रेट के रूप में मोटा अनाज, भूरे चावल, प्रोटीन युक्त पदार्थ, मांस इत्यादि लेना चाहिए। 
  5. हल्के आहार में मधुमेह रोगी को अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, टोंड दूध इत्यादि लेना फायदेमंद होता है। 
  6. मधुमेह में संतुलित आहार के साथ-साथ कैलोरी, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट इत्यादि भी भरपूर मात्रा में लेना चाहिए। 
  7. तरल पदार्थों को बनाते समय उसमें शुगर फ्री खाद्य पदार्थ का ही इस्तेमाल करें जैसे टमाटर की चटनी इत्यादि में शुगर न डालें। 
  8. अंगूर, जामुन,सेब इत्यादि फलों से भी मधुमेह को नियंत्रि‍त किया जा सकता है। 
  9. कम शुगर वाले खाद्य पदार्थ लें जिसमें कम वसा वाले खाने को प्राथमिकता दें। 
  10. दूध वाली चाय के बजाय ग्रीन टी, लेमन टी, हर्बलटी इत्यादि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। 
  11. सलाद में हरी सब्जियां की सलाद बना सकते हैं। 
  12. आप घर की बनी टमाटर की चटनी, सूप और टमाटर ले सकते हैं। 
  13. खीरा प्याज, नींबू और सामान्य मिर्च मसालों का ही प्रयोग करें।
  14. करेला, मेथी दाना का सेवन करें। 
  15. अधिक समय तक भूखे ना रहें और थोड़े-थोड़े समय में कुछ न कुछ खाते रहें। 
  16. खाना बनाते समय सरसों का तेल, मूंगफली,सोयाबीन,सूर्यमुखी के तेल का इस्तेमाल करें ये आपको मधुमेह नियंत्रित करने में बहुत मदद करेगा। 
  17. स्ट्राबेरी, तरबूज़, पपीता, बेर जैसे फल आदि जल्दी पच जाते हैं इसलिए वो आंत में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं। काजू, बादाम और ड्राईफ्रूट्स खाने से भी मधुमेह को बढ़ने से रोका जा सकता है। 
  18. मधुमेह के मरीज साबुत दाल ,सलाद ,कच्चे मीठे खट्टे फलों के साथ-साथ विटामिन सी, ई कुछ खनिज इत्यादि पौष्टिक आहार को अपने भोजन में शामिल कर मधुमेह को कम कर सकते हैं। 
  19. हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ मैग्निशियम और विटामिन जैसी एंटी-ऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत होती हैं जो कि रक्त से शुगर की मात्रा कम करने में लाभकारी भूमिका निभाता है।
वे खाद्य पदार्थ  "राज" जो रक्त में शुगर का स्तर बढ़ाते हैं
  • चीनी
  • नमक
  • गुड़ 
  • देसी घी
  • फुलक्रीम दूध
  • घी में तले परांठें 
  • आइस्क्रीम
  • मांस 
  • अंडा 

धूम्रपान व मदिरापान 

डायबिटीज के रोगी को आहार में जड़ एवं कंद, मिठाइयाँ, चॉकलेट, तला हुआ भोजन, सूखे मेवे, केला, चीकू, सीताफल इत्यादि चीजों को खाने से बचना चाहिए। इतना ही नहीं मधुमेह नियंत्रि‍त करने के लिए डॉक्टर के निर्देशानुसार ही कैलोरीज लेनी चाहिए।

मधुमेह को घरेलू इलाज से करें कंट्रोल

मधुमेह बीमारी में रक्त में शर्करा की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है। अभी तक इसका कोई स्थाई इलाज सामने निकल कर नहीं आया है। इसलिए अगर आपको डायबीटीज को कंट्रोल करना है, तो अच्छा पौष्टिक आहार और अपने लाइफस्टाइल में परिवर्तन लाना होगा। इस बीमारी को घरेलू इलाज से काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते है मधुमेह को घरेलू इलाज से कैसे कंट्रोल कर सकते हैं।

मधूमेह को ठीक करने के लिए "राज" घरेलू इलाज- 

1. करेला- डायबिटीज में करेला काफी फायदेमंद होता है, करेले में कैरेटिन नामक रसायन होता है, इसलिए यह प्राकृतिक स्टेरॉयड के रुप में इस्तेमाल होता है, जिससे खून में शुगर लेवल नहीं बढ़ पाता। करेले के 100 मिली. रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है।
2. मेथी- मधुमेह के रोगियों के लिए मेथी बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप रोज़ 50 ग्राम मेथी नियमित रुप से खाएगें तो निश्चित ही आपका ग्लूकोज़ लेवल नीचे चला जाएगा, और आपको मधुमेह से राहत मिलेगी।
3. जामुन- जामुन का रस, पत्ती़ और बीज मधुमेह की बीमारी को जड़ से समाप्त कर सकता हैं। जामुन के सूखे बीजों को पाउडर बना कर एक चम्मच दिन में दो बार पानी या दूध के साथ लेने से राहत मिलती है।
4. आमला- एक चम्मच आमले का रस करेले के रस में मिला कर रोज पीएं , यह मधुमेह की सबसे अच्छी दवा है।
5. आम की पत्ती – 15 ग्राम ताजे आम के पत्तों को 250 एमएल पानी में रात भर भिगो कर रख दें। इसके बाद सुबह इस पानी को छान कर पी लें। इसके अलावा सूखे आम के पत्तों को पीस कर पाउडर के रूप में खाने से भी मधुमेह में लाभ होता है।
6. शहद- कार्बोहाइर्ड्रेट, कैलोरी और कई तरह के माइक्रो न्यू ट्रिएंट से भरपूर शहद मधुमेह के लिए लाभकारी है। शहद मधुमेह को कम करने में सहायता करता है।
इसके अलावे इनका सेवन करने से भी मधुमेह में आराम मिलता है-
1. एक खीरा, एक करेला और एक टमाटर, तीनो का जूस निकालकर सुबह खाली पेट पीने से मधुमेह नियंत्रित होता है।
2. नीम के सात पत्ते सुबह खाली पेट चबाकर या पीसकर पानी के साथ लेने से मधुमेह में आराम मिलता है।
3. सदाबहार के सात फूल खाली पेट पानी के साथ चबाकर पीने से मधुमेह में आराम मिलता है।
4. जामुन, गिलोय, कुटकी, नीम के पत्ते, चिरायता, कालमेघ, सूखा करेला, काली जीरी, मेथी इन सब को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण सुबह-शाम खाली पेट पानी के साथ लें, इससे मधुमेह में आराम मिलता है।

इन आहार से "राज" दूर रहें-

1. मीठे से दूर रहें
वैसे तो ऐसे लोग बहुत बड़ी संख्या में हैं, जो मीठा खाना पसंद नहीं करते, लेकिन इसके बावजूद वे मधुमेह के शिकार हैं। मधुमेह मीठा खाने के कारण नहीं होता, लेकिन एक बार यह हो जाए तो मरीज को मीठे से दूर रहना पड़ता है। इसलिए कोशिश करें कि मिठाई ना खाएं।
2. जमीन के अंदर उगनेवाले चाजों से बचें
शकरकंदी, अरवी, आलू और ऐसी कई चीजे जो जमीन के अंदर उगती है, उनको ना खाएं या कोशिश करें कि कम से कम मात्रा में इनका सेवन करें।
3. जंक फ़ूड से दूर रहें
जंक फ़ूड बिल्कुल ना खाएं, इससे मधुमेह का खतरा और बढ़ जाता है। साथ ही तली हुई चीजें भी ना खाएं, यह आपकी बीमारी को और बढ़ा देगा। अंकुरित अन्न को उबालकर या भुनकर खाएं पर तलकर नहीं खाएं।
4. सूखा मेवा ना खाएं
अगर आपको मधुमेह है तो आप सूखा मेवा कभी नहीं खाएं, और अगर खाना भी हो तो इन्हे पानी में भिगोकर खा सकते हैं।
5. वसायुक्त भोजन ना करें
मधुमेह से बचना है, तो वसायुक्त भोजन कम लें। वसा या कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने से मधुमेह बढ़ता है। इसलिए वसा या कार्बोहाइड्रेट की कम मात्रा वाला भोजन लेने से मधुमेह से बचाव हो सकता है।
6. चावल ना खाएं 
अगर आप रोज एक बड़ा बाउल सफेद चावल खाते हैं, तो आपको टाइप-2 मधुमेह होने का खतरा सामान्य से 11 प्रतिशत ज्यादा होता है। चावल के पकाने की विधि पर उसके खाने से होने वाला फायदा या नुकसान निर्भर करता है। अगर चावल की बिरयानी बनाई जाए या चावल को मांस या सोयाबीन के साथ खाया जाए, तो डाइबिटीज होने का खतरा ज्यादा रहता है। क्योंकि इससे शरीर में रक्त में शर्करा की मात्रा पर असर पड़ सकता है।
7. इन फलों से दूर रहें
केला, आम, लीची जैसे फलों को ना खाएं या कम मात्रा में खाएं, क्योंकि इससे मधूमेह का खतरा बढ़ता है।
8. इनसे भी दूर रहें
अगर आपको मधुमेह हो तो आप आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री आदि से भी परहेज रखें। यह आपके स्वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक होते है।

रविवार, जुलाई 19, 2015

मधुमेह में एहतियात है बहुत जरुरी

डायबिटीज/मधुमेह में इन्हें आजमाएं और राहत पाएं : राज



मधुमेह चयापचयी विकारों से पनपने वाला रोग है जो शरीर की इन्सुलिन पैदा करने या इन्सुलिन का उपयोग करने की क्षमता को प्रभावित करता है। आंकड़ों की मानें तो भारत में ये रोग पूरी दुनिया के मुकाबले तेज़ी से बढ़ रहा है। युवाओं में इस रोग की बढ़ती तादाद से परेशान डॉक्टर इससे लड़ने की नई तकनीकों की तलाश में हैं। जिन्हें डायबिटीज होती है उन्हें खाने - पीने का खास ख्याल रखना पड़ता है ! डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए नियमित दिनचर्या और पोषणयुक्‍त आहार की जरूरत होती है ! ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें डायबिटीज के रोगी खा सकते हैं … !

1.इसमें छुपा है ढेर सारा फाइबर … !

डायबिटीज है तो आप बींस आराम से खा सकते हैं ! बींस - मसूर - मटर - राजमा आदि खाने पर आपको ढेर सारा फाइबर मिलेगा ! रोजाना के भोजन में बीन्स और मसूर की दाल को शामिल कर लेना टाइप टू डायबिटीज से पीडि़त लोगों के लिए लाभकारी रहता है ! 
मधुमेह की काट करती है बीन्स ! बीन्स में प्रोटीन - कार्बोहाइड्रेट - विटामिन सी तथा कैल्शियम - फॉस्फोरस - आयरन - कैरोटीन - थायमीन - राइबोफ्लेविन - नियासीन आदि अनेक तरह के मिनरल और विटामिन मौजूद होते हैं ! इसमें सोडियम की मात्रा कम तथा पोटेशियम व मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है - जो सेहत के लिए लाभदायक है ! बीन्स लेने से कब्ज की शिकायत नहीं होती - पेट भी साफ रहता है ! इसमें मौजूद फाइबर ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है !

2. सूखे .... ! लेकिन गुणों से भरपूर !!

मेवों में फाइबर - स्‍वस्‍थ वसा और मैगनीशियम होता है ! मेवे खाने से पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है - अखरोट में फाइबर - विटामिन बी - मैग्‍नीशियम और एंटी आक्सिडेंट्स अधिक मात्रा में होते हैं ! इसको खाने से मधुमेह की बीमारी दूर रहती हैं ! डायबिटीज फाउंडेशन और नेशनल डायबिटीज, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन के हालिया शोध में हृदय संबंधी रोगों व मधुमेह में पिस्ते को लाभकारी पाया गया है !  मेवों में वसा बहुत ज्यादा होने के बावजूद ये डायबिटीज जैसी कई गंभीर बीमारियों के जोखिम कम करने में मददगार होते हैं ! काजू टाइप 2 डायबिटीज रोकने में मददगार होता है !

3. लेडी फिंगर करती है डायबिटीज की काट .... !

भिन्डी का सेवन मधुमेह के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता हैं ।  यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है । इसमें से एक चिपचिपा रस निकलता है जो कि शरीर में ग्‍लूकोज लेवल को कंट्रोल करता है! मधुमेह के रोगियों को भिंडी की अधकची सब्जी फायदा करती है - भिंडी विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर का अच्छा स्रोत है ! इसमें कैल्शियम, पोटेशियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैंगनीज और फास्फोरस जैसे मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं !

4. ब्लड शुगर लेवल रहता है कंट्रोल में ..... !

गेहूं में बहुत सारा रेशा तथा विटामिन बी कॉम्प्‍लेक्‍स होता है, जो पाचन शक्‍ति को मजबूत बनाता है ! इसलिये साबुत वीट ब्रेड - रोटी या गेहूं के आटे से बना कोई भी व्‍यंजन शुगर लेवल को कंट्रोल में रखता है ! ओट्स - गेहूं या बाजरा हो - इन सभी में फाइबर - विटामिन ई - बी ~ आयरन - मैगनीशियम और सेलिनियम होता है !
साबुत अनाज का ग्लाइसैमिक इंडैक्स सफेद आटे के मुकाबले ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करता है - एक नवीनतम शोध के अनुसार जो व्यक्ति साबुत अनाज का सेवन करते हैं उन्हें मधुमेह होने की संभावना कम होती है - शोध में पाया गया कि साबुत अनाज खाने वालों में इंसुलिन सेंस्टिविटी बेहतर पाई गई !

राजेश मिश्रा का ये नुस्खा जरूर अपनाएं 

तुलसी के पत्ते: तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन बनता है। ये सारे तत्व मिलकर इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। इससे इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। एक और फ़ायदा ये है कि पत्तियों में मौजूद ऐन्टीआक्सिडन्ट आक्सिडेटिव स्ट्रेस संबंधी कुप्रभावों को दूर करते हैं।
नुस्खा: शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें।
पटसन के बीज: इनमें फाइबर सामग्री बहुल मात्रा में पाई जाती है जो पाचन में तो मदद करते ही हैं साथ ही फैट और शुगर के अवशोषण में भी सहायक होते हैं। पटसन के बीज खाने से मधुमेह से ग्रसित मरीजों में शुगर की मात्रा 28 प्रतिशततक कम होती है।
नीलबदरी के पत्ते: मधुमेह को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से हो रहा है. जर्नल ऑफ़ न्यूट्रीशन ने  कहा है कि इसकी पत्तियों में एंथोसियानीडीनस भारी मात्रा में मौजूद होते हैं जो चयापचय की प्रक्रिया और ग्लूकोज़ को शरीरके विभिन्न भागों में पहुंचाने की प्रक्रिया को समृद्ध करता है। अपने इस ख़ास गुण के कारण नीलबदरी के पत्ते ब्लड शुगरलेवल को कम करने में काफी कारगर होते हैं।
दालचीनी: ये इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारने के साथ-साथ ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को भी कम करता है। अगर सिर्फ आधी चम्मच दालचीनी रोज़ ली जाए तो इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारा और अपने वज़न को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ह्रदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो जाता है।
नुस्खा: लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद मिलेगी।
ग्रीन टी: ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं जो एक मज़बूत एंटी-ऑक्सीडेंट और हाइपो-ग्लाइसेमिक तत्व हैं, इससे ब्लड शुगर को रिलीज़ करने में मदद मिलाती है और शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमाल कर पाता है।
सहजन के पत्ते: इसे मोरिंगा भी कहते हैं, इसके पत्तों में इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह के मामलों में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है।
इसबगोल: पानी में मिलने के बाद इसबगोल की भूसी ‘जेल’ जैसा तत्व बनाती है जिसका सेवन ब्लड ग्लूकोज़ के अवशोषण और भोजन के पाचन को सुगम बनाता है। ये अल्सर और एसिडिटी से भी बचाता है।
करेला: करेले में इन्सुलिन-पोलिपेपटाइड होता है, ये एक ऐसा बायो-कैमिकल तत्व है जो ब्लड-शुगर को कम करने में उपयोगी है।
नुस्खा : हर हफ्ते कम से कम एक बार करेले की सब्जी या कढी ज़रूर लें. अगर आप जल्द असर चाहते हैं तो तीन दिनमें एक बार खाली पेट करेले का जूस लें।
नीम: देश में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले नीम के पत्ते स्वाद में कडवे होते हैं पर इनमें बहुत सी खासियतें हैं। नीम इन्सुलिन रिसेप्टर सेंसिटिविटी बढाने के साथ साथ शिराओं व धमनियों में रक्त प्रवाह को ठीक करता है और हाइपो ग्लाय्केमिक ड्रग्स पर निर्भर होने से बचाता है।
नुस्खा: बेहतर नतीजों के लिए नीम के पत्तों का जूस रोज़ सुबह खाली पेट लें।
काला जामुन: ये ब्लड-शुगर को कम करने में मदद करता है और ह्रदय संबंधी बीमारियों से शरीर को दूर रखता है।

मंगलवार, अप्रैल 21, 2015

5 गंभीर रोगों के लिए राज का कारगर घरेलु उपाय

ज्यादा वजन , डायबिटीज़, पैरों और घुटने का दर्द, किडनी की समस्या और थायरॉयड से ऐसे मिलेगी मुक्ति
Powerlifter Julia Vins (Russia)

इस आलेख में राजेश मिश्रा आप सभी के लिए लाये हैं 5 गंभीर बिमारियों से निजात पाने का सरल और कारगर उपाय| जिसमें डाइट, एक्सर्साइज़ और लाइफस्टाइल के तहत सजग रहने की सुन्दर पहेली बताई जा रही है| इसे अपनाकर आप और अपने परिवार के साथ-साथ रिश्तेदारों को कई रोगों से बचा सकते हैं...

ये रोग हैं- 1.वजन काम करना, 2 . डायबिटीज़, 3.पैरों और घुटने का दर्द, 4.किडनी की समस्या और 5. थायरॉयड|


कामकाजी हो या गृहिणी, घर-बार के अलावा उन्हें खुद को संभालने का वक्त बहुत कम मिल पाता है। उसी तरह से जिस तरह से अधिकांशतः पुरुष पैसे कमाने, व्यापार बढ़ाने,  परिवार की जिम्मेदारियों को निर्वाह करने में भूल जाते हैं की उनका शरीर कई रोगों का कारखाना (उद्योग) बन गया है|  कम वक्त और सही जानकारी के अभाव में, सैकड़ों बार कोशिश करने के बावजूद हमारा शरीर कई रोगों के आगोश में जकड जाता है| अब होगा सही इलाज़ परहेज़ और एक्सरसाइज़ से| 

वजन कम करना

वजन कम करना और चर्बी को गला देना दोनों ही अलग अलग बातें हैं। आज कल हम तरह तरह के जंक फूड खाते रहते हैं , जिनमें खाघ पदार्थ और पोषण के नाम पर कुछ भी नहीं होता, लेकिन हां, इससे फैट खूब मिल जाता है। यही फैट आपके शरीर में जम जाता है जो कई दिनों तक रहने से विष का रूप ले लेता है।

डाइट

  • मक्खन, घी, मलाई आदि न लें, क्योंकि इनसे दिल की नलियां संकरी होती हैं और वजन भी बढ़ता है।
  • मैदा, सूजी, सफेद चावल, चीनी, आलू यानी सफेद चीजों की मात्रा डाइट में काफी कम कर दें। दूध भी डबल टोंड लें।
  • पैक्ड चीजें मसलन पैक्ड जूस, बेकरी आइटम्स, सॉस आदि से बचें। रोजाना करीब आधे चम्मच से ज्यादा नमक न लें।
  • बहुत मीठी चीजों (मिठाई, चॉकलेट आदि) से बचें। ये वजन बढ़ाती हैं।
  • जितना हो सके हाई फाइबर और लो फैट वाली डाइट लें। गेहूं, ज्वार, ओट्स, बाजरा आदि को आटे या दलिया की तरह लें। इनका मिक्स दलिया अच्छे कॉलेस्ट्रॉल और ओमेगा-3 को बढ़ाता है।
  • रोजाना आधा चम्मच फ्लैक्स-सीड्स (अलसी के बीज) गुनगुने पानी के साथ खाएं। चाहें तो आटे में भी मिला सकते हैं। 5 किलो आटे के लिए 100-150 ग्राम फ्लैक्स-सीड्स काफी हैं।
  • रोजाना सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली नॉर्मल पानी के साथ लें। इससे कॉलेस्ट्रॉल की प्रॉब्लम में आराम मिलता है।
  • रोजाना 5-6 बादाम और 1-2 अखरोट खाएं। बादाम-अखरोट रात भर भिगोकर लें। इससे पाचन अच्छा होता है और विटामिन ई की मात्रा बढ़ती है।
  • लो-ग्लाइसिमिक इंडेक्स (धीमें-धीमें ग्लूकोज में तब्दील होने वाले)वाले फल जैसे कि जामुन, पपीता, सेब, आड़ू आदि खाएं।
  • हरी सब्जियां, साग, शलजम, बीन्स, मटर, ओट्स, सनफ्लावर सीड्स, अलसी आदि खाएं। इनमें फॉलिक एसिड होता है, जो कॉलेस्ट्रॉल को काबू में रखता है।
  • ऑलिव ऑयल, तिल का तेल और सरसों का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं। ये हार्ट के लिए अच्छे हैं।
  • हफ्ते में 2-3 बार मछली या चिकन खा सकते हैं। हालांकि मछली बेहतर है। चिकन खाना चाहते हैं, तो एक बार में 100 ग्राम तक काफी है। ध्यान रहे कि यह तले-भुने और ज्यादा मसालेदार न हों।

नोट : ग्लाइसिमिक इंडेक्स उस लेवल को कहा जाता है, जिस पर खाने से मिलने वाले एनर्जी ग्लूकोज में बदलती है। हाई-ग्लाइसिमिक, यानी जिन चीजों का ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, वे तेजी से ग्लूकोज में बदलती हैं। इससे भूख जल्दी लगती है और हमें दोबारा खाना पड़ता है। नतीजा शरीर में फैट बढ़ जाता है, लो-ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाली चीजें धीरे-धीरे ग्लूकोज में बदलती हैं और काफी देर तक पेट भरा होने का अहसास कराती हैं। ये वजन घटाने के लिहाज से काफी फायदेमंद हैं।

एक्सरसाइज

  • अगर हार्ट पेशंट को दो मंजिल चढ़ने या 2 किमी पैदल चलने के बाद सांस फूलने जैसी कोई दिक्कत नहीं होती, तो वह सामान्य लोगों की तरह एक्सरसाइज कर सकता है, वरना डॉक्टर से पूछकर एक्सरसाइज करें।
  • किसी भी एक्सरसाइज के दौरान अगर दिक्कत (बेचैनी, दर्द, उलटी, घबराहट आदि) हो, तो वहीं रुक जाएं। डॉक्टर को दिखाने के बाद ही फिर से एक्सरसाइज का प्लान करें।
  • हल्की फिजिकल एक्सरसाइज के तौर पर रोजाना 45-50 मिनट वॉक करें। एक बार में नहीं कर सकते तो 15-15 मिनट के लिए तीन बार में करें।
  • जॉगिंग या एयरोबिक्स से पहले डॉक्टर से सलाह ले लें, क्योंकि बीपी का लोवर लेवल बढ़ता है।
  • हैवी एक्सरसाइज जैसे कि वेट लिफ्टिंग आदि न करें। अगर हार्ट प्रॉब्लम शुरुआती स्टेज में है, तो लाइट वेट लिफ्टिंग कर सकते हैं।
  • योग और प्राणायाम करें। लेकिन ध्यान रखें कि ये कार्डियो एक्सरसाइज के विकल्प नहीं हैं। उसके बाद ब्रिस्क वॉक, साइकलिंग आदि करें।
  • अनुलोम-विलोम करें। शीतली प्राणायाम खासतौर पर मन को शांत रखता है और बीपी को मेंटेन करता है। कपालभाति, भ्रस्त्रिका और कुंबज बिना डॉक्टर से पूछे न करें।
  • खाने के बाद न चलें, क्योंकि खाने के बाद हार्ट रेट बढ़ जाता है। चलने लगेंगे, तो हार्ट रेट और बढ़ कर डबल हो जाएगा। इससे घुटन हो सकती है। खाने के कम-से-कम 40-45 मिनट बाद चलें।
  • ऐसे आसन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें, जिनमें सारा वजन सिर पर या हाथों पर आता है, जैसे कि मयूरासन, शीर्षासन आदि।

लाइफस्टाइल

  1. टाइम पर खाएं
  2. रेग्युलर फिजिकल एक्सरसाइज करें।
  3. स्ट्रेस से बचें

डायबीटीज (शुगर)

डायबीटीज के मरीज वजन कंट्रोल में रखें, तो इंसुलिन छूट सकता है और दवाएं भी 40 फीसदी तक कम हो सकती हैं। बेहतर फिटनेस के लिए यह जरूरी है।

डाइट

  • चीनी, शक्कर, गुड़, गन्ना, शहद, चॉकलेट, पेस्ट्री, केक, आइसक्रीम आदि मीठी चीजों से बचें।
  • हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों से बचें, क्योंकि ये जल्दी ग्लूकोज में बदल जाती हैं। इससे शरीर में शुगर एकदम से बढ़ जाता है। इनमें प्रमुख हैं मैदा, सूजी, सफेद चावल, वाइट ब्रेड, नूडल्स, पित्जा, बिस्किट, तरबूज, अंगूर, सिंघाड़ा, चीकू, केला, आम, लीची आदि।
  • सब्जियों में आलू, अरबी, कटहल, जिमिकंद, शकरकंद, चुकंदर न खाएं। इनमें स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होता है, जो शुगर बढ़ा सकते हैं। हां, इन्हें कभी-कभार उबाल कर खा सकते हैं।
  • फलों में आम, चीकू, अंगूर, केला, शरीफा आदि से परहेज करें क्योंकि इनमें शुगर काफी ज्यादा होती है।
  • मैदा और मक्के का आटा न खाएं। इनका ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है।
  • शुगर के मरीजों को प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा कॉम्बिनेशन लेना चाहिए। मसलन, नाश्ते में टोंड या डबल टोंड के दूध में बना दलिया लें या फिर ब्राउन ब्रेड के साथ अंडा लें। इसी तरह खाने में सब्जी के साथ दाल भी लें। इससे शुगर का लेवल सही रहता है। वजन कम करना है, तो कार्ब कम करके प्रोटीन बढ़ाएं। कार्बोहाइड्रेट से शुगर जल्दी बनती है, जबकि प्रोटीन से धीरे-धीरे शुगर रिलीज होती है, जिससे ज्यादा देर तक पेट भरा हुआ लगता है।
  • लो-ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाली चीजें (हरी सब्जियां, सोया, मूंग दाल, काला चना, राजमा, ब्राउन राइस, अंडे का सफेद हिस्सा आदि) खाएं।
  • खाने में करीब 20 फीसदी फाइबर जरूर हो। चोकर के साथ रोटी बनाएं। जौ (बारले), काला चना, लोबिया, राजमा, स्प्राउट्स आदि खाएं क्योंकि इनसे प्रोटीन और फाइबर दोनों मिलते हैं। स्प्राउट्स में एंटी-ऑक्सिडेंट भी काफी होते हैं।
  • दिन भर में 4-5 बार फल और सब्जियां खाएं, लेकिन एक ही बार में सब कुछ खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता, मौसमी आदि और सब्जियों में करेला, घीया, तोरी, सीताफल, खीरा, टमाटर आदि खाएं।
  • रोजाना 5-7 बादाम और 1-2 अखरोट खाएं। दालचीनी का एक टुकड़ा और एक चम्मच मेथीदाना रोजाना खाएं। दालचीनी को पीसकर और मेथीदाना को भिगोकर या आटे में मिलाकर खा सकते हैं।
  • घीया, करेला, खीरा, टमाटर, एलोवेरा और आंवले का जूस खासतौर पर फायदेमंद है।
  • लो फैट दही और स्किम्ड/डबल टोंड दूध लेना चाहिए। ग्रीन टी पीना अच्छा है। चाय के साथ हाई फाइबर बिस्कट या फीके बिस्कट ले सकते हैं।
  • छाछ और नारियल पानी पिएं। नीम-करेला पाउडर ले सकते हैं। फौरी तौर पर न सही, लेकिन लंबे वक्त में यह जरूर फायदा पहुंचाता है।

एक्सरसाइज

  1. रोजाना 50 मिनट वॉक करें। वॉक करते वक्त कम से कम 8-10 मिनट में 1 किमी चल लें। रोजाना 10,000 कदम चलने की कोशिश करें। नंगे पैर न चलें।
  2. अगर लगातार टाइम नहीं मिल रहा या ज्यादा थकान होती है, तो 15-15 मिनट 3 बार वॉक कर लें।
  3. साइकलिंग, स्वीमिंग और डांसिंग भी कर सकते हैं।
  4. 40-45 तक की उम्रवाले लोग हल्की वेट लिफ्टिंग भी कर सकते हैं। इससे मसल्स टोंड होती हैं।
  5. योग करें। पश्चिमोत्तान आसन, अर्धमत्स्येंद्र आसन खास फायदेमंद हैं।
  6. प्राणायाम खासकर कपालभांति और डीप ब्रीदिंग करें। मन शांत रहेगा।

लाइफस्टाइल

  • खाने में गैप न रखें। गैप रखने से शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होता है। हर दो घंटे में कुछ खाएं।
  • खाने की मात्रा करीब-करीब बराबर ही रखें।
  • अपने छोटे-मोटे काम खुद करें। जितना चलेंगे और जितना कड़वा खाएंगे, उतना फायदा होगा।

पैरों और घुटने का दर्द

पैरों और घुटने के दर्द में एक साइकल बन जाती है दर्द और मोटापे की। दर्द है इसलिए चल नहीं पाते और चल नहीं पाते, इसलिए वजन बढ़ता जाता है। ऐसे में डाइट वजन घटाने का सबसे बड़ा जरिया है।

डाइट

  1. मोटे तौर पर डाइट हार्ट या डायबीटीज के मरीजों वाली ही रहेगी। यानी भरपूर फाइबर, कम तेल-मसाला और चिकनाई वाली चीजें खाएं। मीठा भी कम करें। इससे वजन कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।
  2. प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर डाइट लें। प्रोटीन के लिए फिश, सोयाबीन, स्प्राउट्स, दालें, मक्का और बीन्स आदि को खाने में शामिल करें, जबकि कैल्शियम के लिए दूध और दूध से बनी चीजें जैसे कि पनीर, दही आदि खाएं।
  3. सामान्य तौर पर फल और सब्जियों (खासकर हरी पत्तेदार) को खाने में शामिल करें।
  4. डॉक्टर की सलाह पर कैल्शियम और विटामिन डी की टैब्लेट और सैशे भी ले सकते हैं।

एक्सरसाइज

  • जिन मरीजों को बैठने के बाद दर्द होता घुटने में दर्द होता है, वे ज्यादा से ज्यादा चलें। इससे दर्द कम होगा। दर्द ज्यादा है और चल नहीं सकते, तो लेटकर और खड़े होकर करनेवाली एक्सरसाइज करें, जैसे कि साइकलिंग, योग आदि।
  • धीरे-धीरे ही सही, चलें। लंबा नहीं चल सकते, तो जब भी वक्त मिले, 10-10 मिनट के लिए चलें।
  • फिक्स साइकलिंग और स्वीमिंग करें। सारी एक्सरसाइज मिलाकर रोजाना 50 मिनट जरूर करें।
  • बैठे-बैठे 15-20 मिनट में पैरों को गोल-गोल घुमाते रहें। सीधा तानें।
  • ताड़ासन, एकपादउत्तानासन, कटिचक्रासन, सेतुबंध, पवनमुक्तासन (बिना सिर उठाए), भुजंगासन, अर्धनौकासन और हाथों व पैरों की सूक्ष्म क्रियाएं करें।
  • अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, कपालभाति प्राणायाम करें।

नोट

  1. स्क्वैटिंग (उठक-बैठक) न करें। घुटनों को मोड़कर और चौकड़ी मारकर न बैठें।
  2. लगातार एक ही पोजिशन में बैठे या खड़े न रहें। एक पैर पर वजन न डालें।
  3. वज्रासन जैसे घुटने मोड़ने वाले आसन न करें।
  4. ट्रेडमिल से बेहतर खुले में एक्सरसाइज करना है, क्योंकि ट्रेडमिल के वाइब्रेशन घुटने और एड़ी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

लाइफस्टाइल

  • ऐसा कोई काम न करें, जिससे घुटनों पर अतिरिक्त प्रेशर पड़े। फास्ट डांस, एयरोबिक्स और जॉगिंग न करें।
  • घुटनों में दर्द है तो इंडियन टायलेट यूज न करें। पिंडलियों में दर्द होता है तो कैल्शियम चेक कराएं।
  • अस्थमा
  • जितना वजन कम होगा, उतना ही हमारे लंग्स की कैपेसिटी बढ़ेगी। जिन मरीजों को एक्सरसाइज करने पर बेहतर महसूस होता है, वे कोई भी एक्सरसाइज कर सकते हैं, लेकिन जिन्हें दिक्कत होती है, वे डॉक्टर से पूछ कर ही करें।

डाइट

  • ई फाइबर और प्रोटीन से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। इस दौरान मसल्स ज्यादा काम करती हैं, इसलिए प्रोटीन से भरपूर दालें, सोयाबीन, अंडा आदि खाएं।
  • काली मिर्च, सौंठ, लौंग को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इस चूर्ण को आधा छोटा चम्मच खाने से पहले खा लें। हल्की गर्म तासीर होने से यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाती हैं।
  • एक्सरसाइज
  • नॉर्मल दिनों में 45-50 मिनट घूमें, लेकिन जब अस्थमा अटैक हो तो न घूमें। बाहर जाएं, तो नेबुलाइजर लेकर जाएं।
  • योग का रोल ज्यादा है। सर्वांगासन अस्थमा के मरीजों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है।
  • डीप ब्रिदिंग करें। मन शांत रहेगा, तो बेचैनी और घबराहट अटैक की वजह नहीं बनेगी। लाइफस्टाइल आमतौर पर लाइफस्टाइल सामान्य ही रहता है। छोटे-मोटे काम खुद करें। खुद को बहुत ज्यादा न थकाएं।

किडनी की समस्या

जिन लोगों को किडनी की समस्या है, उन्हें वजन कंट्रोल करने में खानपान पर खास ध्यान देना होता है। फिर भी यह तय है कि खाना ऐसा हो, जिससे किडनी पर फालतू जोर न पड़े। किडनी की प्रॉबल्म में प्रोटीन कम लेना चाहिए, क्योंकि किडनी जब सही से काम नहीं करती, तब अधिक प्रोटीन लेने से शरीर में प्रोटीन वेस्ट ज्यादा हो जाते हैं। इससे प्रोटीन टॉक्सिसिटी हो जाती है और किडनी फेल भी हो सकती है। प्रोटीन दालें, दूध, दही, पनीर, मीट, अंडा, मछली आदि में पाया जाता है।

डाइट

  1. टमाटर, पालक, मशरूम अवॉयड करें, क्योंकि ये यूरिक एसिड बढ़ाते हैं, जोकि किडनी के लिए नुकसानदेह है। हैवी दालों राजमा, आदि को अवॉयड करें।
  2. टिंडा, तोरी, सेब, अमरूद और पपीता खाएं। संतरा, मौसमी टमाटर, आंवला आदि कम खाएं क्योंकि इनमें पोटैशियम ज्यादा होता है। इसी तरह लौकी और करेले का जूस न पीएं। इनमें विटामिन सी होता है। ये किडनी के लिए अच्छे नहीं हैं।
  3. ऐपल, ब्लैकबेरी, मटर जैसे अल्केलाइन (जिनका पीएच लो रहता है) फल ज्यादा खाएं, ताकि एसिडिक हो गए सिस्टम को बैलेंस किया जा सके। एक्सरसाइज साइकलिंग, स्वीमिंग और ब्रिस्क वॉक को मिलाकर रोजाना 40-50 मिनट एक्सरसाइज करें। लेकिन खुद को बहुत ज्यादा थकाएं नहीं।
लाइफस्टाइल
  • दवा टाइम पर लें। खाना टाइम पर खाएं और डाइट को प्लान पूरी तरह फॉलो करें।
  • किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी) टाइम पर करवाएं।

थायरॉयड

हाइपोथायरॉइडिज्म वजन बढ़ने की एक बड़ी वजह है। थायरॉइड की गड़बड से हॉर्मोंस का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे मोटापा बढ़ता है। इसके मरीज का तीखा, चटपटा, मीठा आदि खाने का दिल ज्यादा करता है, सो वजन बढ़ता जाता है।

डाइट

  1. ब्रोकली, गोभी, मशरूम, सोयाबीन आदि न खाएं, क्योंकि इनमें आयोडीन ज्यादा होता है। ये हाइपोथायरॉडिज्म में नुकसान पहुंचाती हैं।
  2. थायरॉयड से कोलेस्ट्रोल बढ़ सकता है। ऐसे में दिल की बीमारी में बताई गई डाइट को फॉलो करना बेहतर है।
  3. नमक कम करें। एक्सरसाइज 40-45 साल वाले वेट एक्सरसाइज और एयरोबिक्स करें। पहली कैटिगरी की एक्सरसाइज से स्ट्रैंथिंग होती है और दूसरी कार्डियो कैटिगरी में है।

लाइफस्टाइल

  • थोड़ी राहत मिलने पर दवाएं छोड़े नहीं, वरना समस्या के साथ मोटापा लौट आएगा।
  • लें नियमों की असरदार गोली
  • अगर आपको कोई बीमारी है और आपका वजन ज्यादा है, तो सिर्फ 10 फीसदी वजन कम करने से आपको बीमारी में 45 फीसदी तक फायदा हो सकता है।
  • एकदम वजन घटाने की न सोचें। तेजी से वजन घटाना चाहेंगे, तो न सिर्फ सेहत को नुकसान होगा, बल्कि मनचाहा रिजल्ट न मिलने से आपका विश्वास भी कम होगा और आप वजन घटाने की कोशिश छोड़ देंगे। महीने में 2 किलो वजन घटाना सही है।
  • पहचानें कि आपका मोटापा कार्ब्स की वजह से है या फैट की वजह से। आम पहचान यह है कि फैट आधारित मोटापा पूरे शरीर में होगा, जबकि कार्ब आधारित मोटापा तोंद पर ज्यादा होगा। आमतौर पर डायबीटीज, बीपी आदि में कार्ब वाला मोटापा ज्यादा होता है, क्योंकि लोग डाइट से फैट तो कम कर देते हैं, कार्ब नहीं। मोटापा पहचानने के बाद डाइट में बदलाव करें।
  • जितना वजन आपका 20 साल की उम्र में था, उसमें 5 किलो बढ़ा दें। आपका वजन उतना ही होना चाहिए, बाकी ओवरवेट हैं।
  • रोजाना 500 और हफ्ते में 3500 कैलरी कम करने से हफ्ते भर में करीब आधा किलो वजन कम हो जाएगा।
  • आयुर्वेद के मुताबिक मीठी, नमकीन और खट्टी चीजें वजन बढ़ाती हैं, जबकि तीखी, कड़वी और कसैली चीजें मोटापा को कंट्रोल करती हैं, इसलिए हर मीठी चीज के साथ तीखा या कसैला खाएं।
  • 20 से 40 साल की उम्र वाले हफ्ते में दो दिन एनएरोबिक्स यानी वे एक्सरसाइज जो रेजिस्टेंस के अगेंस्ट (स्क्वैश, रनिंग, जॉगिंग, बाधा दौड़, पंजा लड़ाना आदि) होती हैं, कर सकते हैं। अगर लगातार करते हैं और फिर छोड़ देते हैं, तो दिक्कत हो सकती है। 40 साल के बाद डॉक्टर की सलाह से करें।
  • हैवी एक्सरसाइज एक मिनट में 4-5 कैलरी से ज्यादा बर्न नहीं कर सकती। यानी एक घंटे मैराथन करने के बाद आप करीब 250-300 कैलरी बर्न कर सकते हैं, लेकिन उसके बाद अगर एक बालूशाही खा ली तो करीब 400 कैलरी आप शरीर में जमा कर लेते हैं। ऐसे में डाइट पर कंट्रोल बहुत जरूरी है।
  • पहली मंजिल के बाद लिफ्ट न लें।
  • घर में मोबाइल फोन और रिमोट यूज न करें।
  • मोबाइल पर बात करते हुए चहलकदमी करें।
  • कार ऑफिस से दूर पार्क करके ऑफिस तक वॉक करें।

शुक्रवार, मार्च 20, 2015

Diabetes treat : मधुमेह का ईलाज

मधुमेह : कुछ देसी नुस्खे और योग

आजकल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है। डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। मधुमेह रोगियों के लिए कुछ देसी नुस्खे पेश किए जा रहे हैं। इनमें से किसी को भी आजमाने से पूर्व अपने चिकित्सक से राय अवश्य ले लें। डायबिटीज भारत मे 5 करोड़ 70 लाख लोगोंकों है और 3 करोड़ लोगों को हो जाएगी अगले कुछ सालों मे सरकार ये कह रही है । हर दो मिनट मे एक मौत हो रही है डायबिटीज से जुड़े लोगों की। आप गौर फरमाएं राजेश मिश्रा की बातों पर… इससे परेशान लोग बहुत तकलीफों का सामना कर रहे हैं ... किसी की किडनी ख़राब हो रही है, किसीका लीवर ख़राब हो रहा है किसीको ब्रेन हेमारेज हो रहा है, किसीको पैरालाईसीस हो रहा है, किसी को ब्रेन स्ट्रोक आ रहा है, किसी को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है, किसी को हार्ट अटैक आ रहा है। Complications बहुत ही खतरनाक है ।

नपुंशक बना देता है मधुमेह : राज 

मधुमेह या डायबिटीज का एक प्रभाव ऐसा भी है जिस पर अमूमन खुलकर चर्चा कम ही होती है। मधुमेह पर होने वाली कई गोष्ठियों में भी विशेषग्य अक्सर इस विषय (सेक्स प्रभाव ) को छोड़ देते हैं। सच यह है कि असुविधाजनक चर्चा मानकर छोड़ दिए जाने से इस गंभीर नुक्सान के प्रति जागरूकता लाने का एक महत्वपूर्ण पहलू छूट जाता है। विशेषग्यों का मानना है कि मधुमेहग्रस्त स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स संबंधी ऐसी शिथिलता आ जाती है जिसके कारण इच्छा होते हुए भी ऐसे मरीज सेक्स के प्रति अक्षम हो जाते हैं। अंग शिथिल पड़ जाते हैं । महिलाओं में योनि की तंत्रिकाओं व उसकी कोशिकाओं को इतना नुकसान पहुंचता है जिससे संसर्ग के वक्त होने वाला द्रव्य प्रवाह रुक जाता है। योनि मार्ग सूख जाता है जिससे संसर्ग काफी तकलीफदेह हो जाता है। नतीजे में मधुमेह के मरीजों में कामेच्छा ही मर जाती है। एक अध्ययन के मुताबिक लगभग ४० प्रतिशत मधुमेह पीड़ित महिलाओं में या कामेच्छा ही मर जाती है या सेक्स के प्रति उनकी रुचि ही खत्म हो जाती है। कोई कामोत्तेजना न होने या सेक्स की अक्षमता के कारण यौनांगों में कोई कामोत्मुक प्रतिक्रिया नहीं होती। कहने का अर्थ यह है कि ऐसा महिला मरीजों का पूरा सेक्स जीवन ही नष्ट हो जाता है।
इसी तरह पुरुषों में भी मधुमेह के कारण तंत्रिकाएं और रक्तवाहिनियां प्रभावित होती हैं। इस कारण वह नपुंशकता का शिकार हो जाता है। मधुमेह पुरुषों के शिश्न समेत पूरे शरीर के तंत्रिका तंत्र को नष्ट कर देता है। एक बार जब तंत्रिकाएं नष्ट हो जाती हैं तो वह बिल्कुल क्रियाशील नहीं रह जाती हैं। संपर्क या संसर्ग के वक्त इसी कारण पुरुषों को कोई उत्तेजना नहीं होती। सामान्य अर्थों में इसे यह कहा जा सकता है कि मन में उठी कामोत्तेजना शिश्न (लिंग) तक नहीं पहुंच पाती। मन उत्तेजित हो जाता है मगर यौनांग बेजान पड़े रहते हैं क्यों कि उन तक कामोत्तेजना को पहुंचाने वाली तंत्रिकाओं की क्रियाशीलता मधुमेह के कारण नष्ट हो चुकी रहती है। नपुंशकता की इस अवस्था में लगभग असहाय हो जाता है मधुमेह का मरीज। क्यों कि लिंग में वह तनाव या कड़ापन नही आ पाता जो सेक्स क्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी होता है। यानी दो मुख्य घटनाएं होती हैं। पहला यह कि संवेदनाओं या कामेच्छा की सूचना यौनांगों तक नहीं पहुंच पाती और दूसरा यह कि रक्त कोशिकाओं में दोष के कारण लिंग में तनाव नहीं आता। स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स की यह अधोगति तब आती है जब वे मधुमेह को नियंत्रित नहीं रख पाते। अगर मधुमेह पर कारगर नियंत्रण हो तो सेक्स संबंधी इन विकारों से बचा जा सकता है।
जब किसी व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी होती है। इसका मतलब है वह व्यक्ति दिन भर में जितनी भी मीठी चीजें खाता है (चीनी, मिठाई, शक्कर, गुड़ आदि) वह ठीक प्रकार से नहीं पचती अर्थात उस व्यक्ति का अग्नाशय उचित मात्रा में उन चीजों से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसलिये वह चीनी तत्व मूत्र के साथ सीधा निकलता है। इसे पेशाब में शुगर आना भी कहते हैं। जिन लोगों को अधिक चिंता, मोह, लालच, तनाव रहते हैं, उन लोगों को मधुमेह की बीमारी अधिक होती है। मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रेागी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

तो ऐसी स्थिति मे हम क्या करें ?

एक छोटी सी सलाह है के आप इन्सुलिन पर जादा निर्भर न करे क्योंकि यह इन्सुलिन डाईबेटिस से भी जादा खतरनाक है, साइड इफेक्ट्स बहुत है ।
सामग्री:: 100 ग्राम मेथी दाना, 100 ग्राम तेज पत्र, 150 ग्राम जामुन की गुठली और 250 ग्राम बेल पत्र।
बनाने की विधि :: इन सब को अलग अलग धूप में सुखाकर इन्हे पत्थर पर पीस ले और बाद में सबको मिलाले इसका एक चम्म्च सुबह नाश्ता करने से पहले 1 गिलास गर्म पानी से ले ले और एक चम्म्च रात को खाना खाने से एक घण्टे पहले, इस दवा को 3 महिने लगातार लेने से मधुमेह (डायबिटीज) खत्म हो जाती है, इसके साथ रोजाना योग-प्राणायाम जरूर करें । 

परहेज और सावधानियां  : राज 

ज्यादा फ़ाईबर और कम फ़ैट वाली चीजे खाए जैसे सब्जीया खाए, दाल छिलके वाली ही खाएं। चीनी न खाए, देसी गुड खा सकते है (बिना कैमीकल वाला) फ़ल आदि जिसमें प्राक्रतिक शक्कर होती है वो सभी खा सकते हैं। 

नींबू से प्यास बुझाइए : राज 

मधुमेह के मरीज को प्यास अधिक लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने की अवस्था में नीबू निचोड़कर पीने से प्यास की अधिकता शांत होती है।

खीरा खाकर भूख मिटाइए : राज 

मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में बार-बार भूख महसूस होती है। इस स्थिति में खीरा खाकर भूख मिटाना चाहिए।

गाजर-पालक को औषधि बनाइए

इन रोगियों को गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है।

रामबाण औषधि है शलजम : राज 

मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। अतः शलजम की सब्जी, पराठे, सलाद आदि चीजें स्वाद बदल-बदलकर ले सकते हैं।

जामुन खूब खाइए : राज 

मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। जामुन को मधुमेह के रोगी का ही फल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में बेहद फायदेमंद हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन औषधि के रूप में खूब करना चाहिए। जामुन की गुठली संभालकर एकत्रित कर लें। इसके बीजों जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार, तीन ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शुगर की मात्रा कम होती है।

करेले का इस्तेमाल करें : राज 

प्राचीन काल से करेले को मधुमेह की औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसका कड़वा रस शुगर की मात्रा कम करता है। मधुमेह के रोगी को इसका रस रोज पीना चाहिए। इससे आश्चर्यजनक लाभ मिलता है। अभी-अभी नए शोधों के अनुसार उबले करेले का पानी, मधुमेह को शीघ्र स्थाई रूप से समाप्त करने की क्षमता रखता है।

मैथी का प्रयोग कीजिए : राज 

मधुमेह के उपचार के लिए मैथी दाने के प्रयोग का भी बहुत चर्चा है। दवा कंपनियाँ मैथी के पावडर को बाजार तक ले आई हैं। इससे पुराना मधुमेह भी ठीक हो जाता है। मैथीदानों का चूर्ण बनाकर रख लीजिए। नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिए। कुछ दिनों में आप इसकी अद्भुत क्षमता देखकर चकित रह जाएँगे।

चमत्कार दिखाते हैं गेहूँ के जवारे

गेहूँ के पौधों में रोगनाशक गुण विद्यमान हैं। गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड के नाम से पुकारा जाता है। जवारे का ताजा रस निकालकर आधा कप रोगी को तत्काल पिला दीजिए। रोज सुबह-शाम इसका सेवन आधा कप की मात्रा में करें।

अन्य उपचार : राज 

नियमित रूप से दो चम्मच नीम का रस, केले के पत्ते का रस चार चम्मच सुबह-शाम लेना चाहिए। आँवले का रस चार चम्मच, गुडमार की पत्ती का काढ़ा सुबह-शाम लेना भी मधुमेह नियंत्रण के लिए रामबाण है।

मोटा खाएं मस्त रहें : राज 

मोटे अनाज न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं बल्कि इनके इस्तेमाल से दिल की बीमारी कैल्शियम की कमी और कई तरह की बीमारियां आप के पास भी नहीं फटक पातीं। देहाती भोजन समझ कर जिन मोटे अनाजों को रसोई से कभी का बाहर किया जा चुका है, अब वैज्ञानिक शोध से बार-बार उनकी पौष्टिकता सिद्घ हो रही है। भारतीय खाद्य एवं चारा विभाग की फसल विज्ञानी डा. उमा रघुनाथन के मुताबिक धान और गेहूं की अपेक्षा छोटे खाद्यान्न जैसे मड़ुआ, कोदो, सावां तथा कुटकी आदि की पौष्टिकता अधिक है। 

परंपरागत तौर से रसोई घर से बाहर की कर दिए गए मोटे अनाज दिल की बीमारी, मधुमेह तथा डियोडिनम अल्सर से लड़ने में सहायक है। यही नहीं, सामान्य गेंहूं में जहां साल 2 साल में घुन लग जाता है वहीं मड़ुआ का दाना 2 दशक तक ज्यों का त्यों बना रहता है।

शुगर फ्री से घुल न जाए कडुवाहट : राज 

चॉकलेट, मिठाई, आईसक्रीम व सॉफ्ट ड्रिंक जैसी चीजों पर 'शुगर फ्री' लिखा देखकर गुमराह न हों, क्योंकि इनका लगातार इस्तेमाल न सिर्फ मधुमेह के स्तर व मोटापे की समस्या को बढ़ा सकता है, बल्कि सिरदर्द, पेट दर्द, अनिद्रा व चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुगर फ्री के नाम पर धड़ल्ले से परोसी जा रही इन चीजों में सिर्फ चीनी के इस्तेमाल से परहेज किया जाता है, दूध, खोया, घी जैसे फैट व कैलोरी के अन्य कंटेंट वही होते हैं, जो आम उत्पादों में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में 'शुगर फ्री है, तो नुकसान नहीं करेगा' इस भ्रम में मधुमेह ग्रस्त लोग इन चीजों का मुक्त रूप से इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं, जो कि काफी घातक साबित होता है। उल्लेखनीय है कि चॉकलेट, आईसक्रीम, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक जैसी जिन चीजों से मधुमेह रोगियों को परहेज करने के लिए कहा जाता है, कंपनियां उनके शुगर फ्री उत्पाद बाजार में लेकर आ जाते हैं, जिनका दावा होता है कि इनके इस्तेमाल से मधुमेह रोगियों को कोई समस्या नहीं होगी। आजकल शादी-विवाह व जन्मदिन आदि की पार्टियों में भी शुगर फ्री उत्पादों को परोसना फैशन ट्रेंड बन गया है और मधुमेह पीड़ित लोग भी बेफिक्र होकर इनका इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली डायबिटिक रिसर्च सेंटर की ओर से किए गए अध्ययन में पाया गया कि शुगर फ्री उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मुंह का स्वाद खराब रहने, माइग्रेन, पेट संबंधी दिक्कतें, चिड़चिड़ापन व इनसोमनिया जैसी समस्याएं आम होती हैं।

कपाल भाति से दूर होते हैं संपूर्ण रोग : राज 

यदि प्रत्येक व्यक्ति कपाल भाति प्राणायाम करता रहे तो वह संपूर्ण रोगों से मुक्ति पा सकता है। कपाल भाति प्राणायाम के निरंतर अभ्यास करने से मस्तिष्क व मुख मंडल पर तेज, आभा व सौंदर्य बढ़ता है साथ ही हृदय, फेफड़ों एवं मस्तिष्क के सभी रोग दूर होते है। मोटापा, मधुमेह, गैस, कब्ज, अम्लियत आदि के विकार दूर होते है यदि मनुष्य कपाल भाति प्राणायाम करता रहे तो शरीर निरोग रहता है। भ्रामरी प्राणायाम अनेक रोगों को दूर करता है। यह प्राणायाम आंख, कान, बालों के लिए काफी लाभदायक है इसके अलावा इससे मिरगी के चक्कर आना, हाथ, पैरों के सुनापन आदि बीमारियों में यह योग महत्वपूर्ण है। यह प्राणायाम बुद्धि वर्धक भी है। रोजाना इसे 3-4 मिनट तक करने से बुद्धि का विकास होगा व स्मरण शक्ति भी बढ़ेगी।

प्राणायाम और आसन

योग गुरु स्वामी रामदेव साधकों को प्राणायाम और आसन कराने के साथ ही इनकी खासियत भी बताते है। जीवन के रूपांतरण की सप्त प्रणायाम की क्रियाओं के सम्पूर्ण आरोग्य देने का जिक्र करते हुए स्वामी रामदेव ने भस्त्रिका प्राणायाम के बारे में बताया है कि लम्बा गहरा श्वास फेफड़ों में ढाई सेकेंड में भरो और ढाई सेकेंड में ही छोड़ो। सामान्य तरह से अधिकतम पांच मिनट और कैंसर या किसी अन्य समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को इसे 10 मिनट तक करना चाहिए। यानी सामान्यत: 50 से 60 बार और जटिलता में सौ बार यह प्रक्रिया दोहरानी है। कपाल भांति एक सेकेंड में एक बार करना चहिये। औसतन इससे एक झटके में एक ग्राम वजन कम होता है। कैंसर ल्यूकोडर्मा में कपालभांति 15 की जगह 30 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है। भस्त्रिका अगर अर्जन है तो कपालभांति विसर्जन। यह क्रिया 15 मिनट में नौ सौ होनी चाहिए। असाध्य रोगों में 18 सौ से दो हजार बार दोहराई जानी चाहिए। गत दिनों मैं जगकल्याण स्नेह मिलन कार्यक्रम के दौरान उनके हरिद्वार स्थित विशालकाय सभी सुखों से समृद्ध आश्रम में भी गया था जहाँ उन्होंने गहरा श्वास लेकर बाहर छोड़कर वाह्य प्राणायाम की क्रिया को तीन से पांच बार करने की सलाह देते हुए अनुलोम-विलोम प्राणायाम के बारे में बताया कि इसे एक चक्र में अधिकतम पांच मिनट करें और सामान्य रूप में कुल समय 15 मिनट और असाध्य रोगों की स्थिति में 30 मिनट दें। होंठ बंदकर ओंकार का गुंजन करने वाले भ्रामरी के साथ ही उन्होंने उद्गीत और प्रणाम प्राणायाम का जिक्र किया। साथ ही सहायक प्राणायाम उज्जायी के बारे में बताया कि यह गले और थायरायड की समस्याओं में लाभप्रद है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी शक्ति संकल्प की, विचार की और विश्वास की है। प्राणायाम यह सोचकर करो कि मैं बीमार नहीं हूं। उन्होंने कहा कि अतिपोषण और कुपोषण दोनों बीमारी का कारण हैं। अब तक अन्नमय कोष को खूब पोषित किया है, अब कमजोर पड़ते मनोमय, ज्ञानमय और आनन्दमय कोष को प्राणायाम से पोषित करो। प्रज्ञा का विस्तार होगा। प्राणायाम, सूक्ष्म व सम्पूर्ण व्यायाम के साथ उंन्होंने योग आसन के विषय में कहा कि जितनी भी संसार में आकृतियां हैं, पशु पक्षी हैं, उतने ही आसन हैं। लिहाजा सब आसन हमें नहीं करने, हमें सिर्फ वही योग करना है जो हमें निरोग बनाता हो। उन्होंने भुजंग, मर्कट, वज्र और सिंह आसन भी कराये।

कम खाएँ ज्यादा जिएँ : राज 

यदि आप कम खाते हैं, तो आप ज्यादा समय तक जिंदा रहेंगे। एक नए अध्ययन में ये बात सामने आई है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बहुत कम खाना शुरू कर दिया जाए, जो जीवन ही समाप्त कर दे। 1930 में यह पाया गया कि प्रयोगशाला में रहने वाले जीव कम कैलोरी वाले पदार्थ खाते हैं और लंबे समय तक जीवित रहते हैं। इन लोगों को कैंसर, मधुमेह और हृदयाघात जैसी शिकायतें कम ही होती है। परंतु फिर भी अभी तक इसके प्रमाण कम ही थे कि कम खाने वाले ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं। अब एन्ड्रयू डिलिन ने केलिफोर्निया के ला जोला स्थित साल्क इंस्टीट्यूट फॉर बायलॉजिकल स्टडीज में अध्ययन में एक जीन का पता किया है। इसका सीधा संबंध मनुष्य के जीवन से होता है। यह भी बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि यदि कैलोरी सीमित कर दी जाए तो इससे जीवन अवधि ब़ढ़ सकती है। शोध दल ने पाया कि शरीर पीएच-4 नाम की जीन होती है, जो मनुष्य में विकास के लिए जिम्मेदार होती है। परंतु वयस्कों में ये कैलोरी के साथ कार्य करती है। मनुष्य में पीएचए-4 के समान तीन जीन और भी होती हैं। ये जीन ग्लूकागॉन से संबंधित रहती है। इसका संबंध पेनक्रियाज के हार्मोन से बना रहता है। यही शरीर में रक्त शर्करा को ब़ढ़ाता है और शरीर का संतुलन बनाए रखता है, विशेष रूप से उपवास आदि के दौरान।