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मंगलवार, अगस्त 11, 2015

मेथी शरीर के लिए संजीवनी ब्यूटी है : राजेश मिश्रा

मेथी एक गुण अनेक : कई रोगों का मिनटों में ठीक करता है * बच्चों से बूढों को देता है निरोगी काया  * महिलाओं की कामेच्छा बढाती है

मेथी देखने में तो हैं छोटे, मगर गुण है अनेक। ये अपने महक और स्वाद के द्वारा पूरे व्यंजन के स्वाद को बदल देने की क्षमता रखते हैं। वैसे तो मेथी का स्वाद थोड़ा कड़वा होता है लेकिन भारतीय रसोईघरों में मेथी का इस्तेमाल साधारणतः करी, सब्ज़ियों से बने व्यंजन, दाल आदि के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। और मेथी के पत्तों से बनें मेथी पराठा की बात कैसे भूल सकते हैं।
इन सबके अलावा मेथी के बहुत सारे औषधीय गुण भी हैं, जिसके बारे में शायद बहुत कम ही लोग जानते हैं।मेथी में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, नियासिन, पोटेशियम, आयरन, और एल्कलॉयड (क्षाराभ- वनस्पतियों का मूल तत्व) होते हैं। इसमें डाओस्जेनिन नामक यौगिक (कम्पाउन्ड) होता है जो एस्ट्रोजन सेक्स हार्मोन जैसा काम करता है। इस यौगिक के कारण ही मेथी बहुगुणी बन जाता है, जिसके कारण वह स्वास्थ्य से लेकर सौन्दर्य सभी क्षेत्रों में अपना जादू चला पाता है।

1 . मेथी (fenugreek), सोंठ और हल्दी बराबर मात्रा में मिलाकर, पीसकर रोज सुबह-शाम खाना खाने के बाद गर्म पानी से दो – दो चम्मच खाएं, इससे मौसमी बदलाव के असर से बचे रहेंगे।
2 . रोज सुबह भूखे पेट एक चम्मच कुटी हुई मेथी में, 1 ग्राम कलोंजी (मंगरेल) मिलाकर खाएं, पाचन ठीक रहेगा।
3 . मेथी के दाने हर सुबह खाली पेट, दोपहर और रात को खाना खाने के बाद आधा चम्मच पानी के साथ फाकने से हड्डियों के जोड़ मजबूत रहेंगे।
4 . हल्दी, गुड, पिसा हुआ मेथी दाना और पानी समान मात्रा में मिलाकर गर्म करें और रात को सोते समय घुटनों पर इसका लेप लगाएँ। इस पर पट्टी बांध कर रात भर बंधे रहने दे। सुबह पट्टी हटा कर साफ कर ले। कुछ ही दिनों में दर्द से राहत महसूस होगा: राजेश मिश्रा
5. अलसी के बीजो के साथ 2 अखरोट लेने से जोड़ो के दर्द से आराम मिलता है।
6. मेथी के लड्डू खाने से हाथ पैरों के जोड़ो के दर्द में आराम मिलता है।
7. 30 साल की उम्र के बाद रोज मेथी के दाने फांकने से शरीर के जोड़ मजबूत बने रहते हैं। बुढ़ापे तक मधुमेह, ब्लड प्रेशर और गठिया जैसे रोगों से बचाव होता है।
8. मेथी दाने को तवे या कड़ाही में गुलाबी होने तक सेकें। ठंडा होने पर पीस ले, रोज सुबह आधा चम्मच, एक गिलास पानी के साथ लें। : राजेश मिश्रा
9. मेथी को दरदरी कूट कर सर्दियों मे रोज सुबह दो चम्मच और गर्मियों मे एक चम्मच पानी के साथ लें।
10. अंकुरित मेथी खाएं और इसे खाने के बाद आधे घंटे तक कुछ न खाएं। पाचन दुरुस्त रहेगा और स्किन की समस्याओं से बचे रहेंगे : राजेश मिश्रा

औरतों के ल‌िए मेथी का सेवन इन 5 मामलों में है फायदेमंद

वैसे तो मेथी का सेवन दमा से लेकर कामेच्छा तक, कई मामलों में फायदेमंद है लेकिन महिलाओं के लिए इसका सेवन खास वजह से भी जरूरी है। चाहे मेथी का सेवन साग के रूप में हो या फिर दाने के तौर पर, महिलाओं के लिए मासिक चक्र से जुड़ी समस्याओं के उपचार में यह काफी फायदेमंद माना जाता है।

जानें महिलाओं की सेहत के लिए मेथी के सेवन से जुड़े फायदे

  • मेथी में सेपोनिन्स और डायोसजेनिन नामक दो ऐसे तत्व हैं जो शरीर में स्टीरॉयड्स व एस्ट्रोजन की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से पीरियड्स के दौरान पड़ने वाले क्रैंप और पेट दर्द में आराम मिलता है।
  • इसमें आयरन की मात्रा अधिक है इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन जच्चा-बच्चा की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।
  • मेथी में मौजूद सेपोनिन्स और डायोसजेनिन शरीर में सेक्स हार्मोन बढ़ाते हैं जिससे महिलाओं की कामेच्छा बढ़ती है।
  • मेथी में मौजूद डायोसजेनिन और आइसोफ्लेवोन्स मेनोपॉड के दौरान महिलाओं के मूड को नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है।
  • मेथी में मौजूद डायोसजेनिन महिलाओं के शरीर में हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है। इससे हार्मोन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

 मेथी के 15 स्वास्थ्यवर्द्धक गुण:

स्तन्यआहार (ब्रेस्टमिल्क) के उत्पादन को बढ़ाता है:

मेथी में डाओस्जेनिन नामक यौगिक होता है जो दूध पिलाने वाली माँ के लिए दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।

शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान करता है

मेथी शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान बनाने में बहुत मदद करता है। यह शिशु के जन्म के समय गर्भाशय के संकुचन को बढ़ाकर जन्म की प्रकिया को आसान करने में मदद करता है। इसके कारण यह प्रसव वेदना को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें गर्भधारण के अवस्था में अत्यधिक मात्रा में मेथी न खायें, इससे गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को आसान करने में मदद करता है

मेथी में जो एस्ट्रोजन सेक्स हार्मोन जैसे गुण वाला यौगिक डाओस्जेनिन और आईसोफ्लैवोन्स (isoflavones) होता है वह मासिक धर्म चक्र के समय शारीरिक समस्याओं जैसे उल्टी करने की इच्छा, बेचैनी, मनोभाव में बदलाव आदि समस्याओं को कम करने में मदद करता है। मेनोपोज़ या रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में जो समस्याएं उत्पन्न होती है, जैसे गर्मी लगना, कुछ भी अच्छा न लगना यानि मनोभाव में जल्दी-जल्दी बदलाव आना जैसी अवस्थाओं को कुछ हद तक कम करने में मदद करता है। किशोरावस्था, गर्भावस्था, दूध पिलाने के अवधि में आयरन की कमी को पूर्ण करने में मेथी मदद करता है। इसलिए अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में मेथी साग खाना न भूलें। खाना बनाते वक्त आयरन के सोखने की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए व्यंजन में आलू या टमाटर को डालना न भूलें।

स्तन के आकार को बढ़ाता है

अगर आप स्तन के छोटे आकार को लेकर शर्मिंदा महसूस करते हैं तो मेथी को अपने रोज के आहार में शामिल करें। इसका एस्ट्रोजेन हार्मोन स्तन के आकार को बढ़ाने में मदद करता है।

कोलेस्ट्रॉल को कम करता है

अध्ययन के अनुसार मेथी शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।

हृदय संबंधी खतरे को कम करने में मदद करता है

मेथी के दानों में गैलाक्टोमेनन (galactomannan) के गुण के कारण वह दिल के दौरा पड़ने के खतरे को कम करने में मदद करता है। मेथी पोटेशियम का सबसे अच्छा स्रोत होता है जो सोडियम के प्रभाव को कम करके दिल के हृदय गति और रक्त चाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।

मधुमेह को नियंत्रित करता है

मेथी मधुमेह ग्रस्त लोगों के लिए वरदान स्वरूप है। मेथी में जो घुलनशील फाइबरगैलाक्टोमेननहोता है, वह रक्त में शुगर के सोखने की प्रक्रिया को कम करने में मदद करता है।

हजम शक्ति को बढ़ाता है

मेथी शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। साथ ही कब्ज़ से भी राहत दिलाता है।

एसिड रिफल्क्स या हर्टबर्न से राहत दिलाता है

अपने आहार में एक छोटा चम्मच मेथी को शामिल करने से एसिड रिफल्क्स या हर्टबर्न से प्रभावकारी रूप से राहत मिलता है। इस्तेमाल करने के पहले मेथी के दानों को पानी में भिगोकर रखने से उसके ऊपर म्यूसीलाजिनॉस का स्तर बन जाता है जो पेट में जलन से राहत दिलाने में मदद करता है।

बुखार और गले के दर्द से राहत दिलाता है

एक छोटा चम्मच नींबू का रस और शहद के साथ मेथी खाने से न सिर्फ बुखार कम होता है, म्यूसलिज के प्रभाव से सर्दी-खांसी और गले के दर्द से राहत मिलती है।

कोलोन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है

मेथी का फाइबर शरीर से विषाक्त पदार्थ टॉक्सिन्स को निकालने में सहायता करता है। इस प्रक्रिया के द्वारा वह कैंसर से कोलोन के म्युकस मेमब्रेन की रक्षा करता है।

भूख को कम करके वज़न घटाने की प्रक्रिया में मदद करता है

सुबह भिगोया हुआ मेथी दाना खाने से पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है। इसलिए जो लोग वज़न घटाना चाहते हैं वे खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं।

त्वचा के सूजन और दाग जैसे समस्याओं से राहत दिलाता है

अगर आपके त्वचा में कहीं भी जल गया है, फोड़ा हुआ है या एक्जिमा हुआ है, उस जगह पर मेथी के पेस्ट में भिगोया हुआ साफ कपड़ा बाँध दें। यह उपचार प्रभावकारी रूप से काम करता है।

सौन्दर्य उत्पादक

मेथी के बने फेस पैक ब्लैकहेड, मुँहासे, झुर्रियों को रोकने में बहुत प्रभावकारी रूप से काम करते हैं। थोड़े से पानी में मेथी के दानें डालकर उबाल लें फिर उससे मुँह को धोयें। एक और भी तरीका है, मेथी के पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें और उसको चेहरे पर बीस मिनट तक लगाकर रखें। सूखने पर पानी से धो लें। इस पैक से चेहरे की रौनक बढ़ जाती है।

बालों की समस्या से राहत दिलाता है

बालों की समस्या से लड़ने के लिए अपने आहार में मेथी को शामिल करें या बालों पर मेथी का पेस्ट भी लगा सकते हैं, इससे आपके बाल काले और घने बन जायेंगे। अगर आपके बाल झड़ रहे हैं या पतले हो गए हैं तो नारियल के तेल में मेथी के दानों को उबालकर रात भर भिगोकर रखें। अगले दिन सुबह इस तेल को बालों में लगायें, इससे बालों का झड़ना कम हो जाएगा।

सोमवार, अप्रैल 20, 2015

घर के छतों पर लगाएं निरोगी की खेती

मिलेगी सब्जी और निखरेगा परिवार, जब होगा घर पर ऐसा पैदावार

सौंफ, मेथी, धनिया, तुलसी, पुदीना आदि की भारतीय रसोई में खास जगह रही है। कैसा हो अगर आप राजेश मिश्रा के कहे अनुसार अपनी छत, बरामदे व गमलों में भी इन्हें जगह देकर अपना खुद का गार्डन तैयार करें और ताजी हरी सब्जियों व औषधीय पौधों को अपने और परिवार की सेहत के लिए इस्तेमाल में लाएं। मैं भी जब गाँव में रहता था तो अपने बड़े भाईजी तारकेश्वर मिश्रजी के साथ अपने पैतृक निवास भेल्दी (जिला-छपरा, बिहार) में उगाया करता था... कच्चे सब्जियों को खेतों से तोड़कर खाने का मजा ही कुछ और होता है... यह करना बहुत मुश्किल भी नहीं है, आइये जानें..

मैंने कोलकाता और कई अन्य राज्यों में गया जहाँ मैंने लोगों को अपने छतों और आसपास के जगहों में तुलसी व धनिए जैसे औषधीय गुणों से युक्त पौधे लगाते देखा। चाहें तो आप भी इस तरह के पौधों को अपनी जरूरत के अनुरूप लगा सकते हैं। इस तरह ये चीजें व्यावसायिक फसलों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों से भी मुक्त रहेंगी। ‘औषधियों को जितना ताजा इस्तेमाल में लाया जाए, उतना बेहतर। फसल के रूप में कटाई होने और सेवन में देरी होने पर उनके पोषक तत्वों में कमी आती रहती है। इन पौधों में विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट व फाइटोन्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। शोध कहते हैं कि इन औषधियों का नियमित उपभोग संक्रमण, सूजन, जलन, मोटापे व जोड़ों के दर्द में राहत पहुंचाता है।
‘सबसे अच्छी बात है कि ऐसे पौधों को अधिक रख-रखाव की जरूरत नहीं होती। कम समय में भी इनकी देखभाल की जा सकती है। इन्हें जरूरत है तो बस थोड़ी सी धूप, पानी, रोशनी, हल्की मिट्टी और पत्तियों की खाद की। इनमें से कुछ पौधों को आप कांच की बोतल या छोटे गमलों में भी लगा सकते हैं।’ दो सप्ताह की अवधि के युवा पौधे यानी माइक्रोग्रीन, खासतौर पर फ्लेवर और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। माइक्रोग्रीन पौधों की उस अवस्था को कहते हैं, जब पौधों में शुरुआती पत्तियां आती हैं। माइक्रोग्रीन को आप साल भर उगा सकते हैं और ये 7 से 10 दिन में तैयार भी हो जाते हैं। इन्हें कम पानी की जरूरत होती है।
कैसे कर सकते हैं इन्हें तैयार, आइये जानें..

पुदीना

कैसे उगाएं: पुदीने के एक छोटे से गुच्छे को नीचे से लगभग दो इंच की लंबाई में काट लें। अब निचले हिस्से की पत्तियों को हटा लें और गांठ यानी पत्ती वाली जगह के नीचे से काट लें। अब तने को पानी के गिलास में रख लें। इसे तब तक हवा व रोशनी में रखें, जब तक इनमें जड़ें आने लगें। ऐसा होने में लगभग दो सप्ताह का समय लगता है। जैसे ही जड़ें निकलने लगती हैं, उन्हें लगभग 10 इंच गहरे गमले में रेतीली मिट्टी में बो दें। मिट्टी में नमी बनाए रखें। बहुत अधिक पानी न डालें। इस पौधे को हर रोज 5 से 6 घंटे की सूरज की रोशनी में रखना जरूरी है।

उपयोग करें: पुदीने की सुगंध और फ्लेवर चटनी, शीतल पेय व सलाद में खासे पसंद किए जाते हैं। पुदीने का रस अपाचन और मरोड़ में लाभ पहुंचाता है। 2012 में बायोशिमी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पुदीने में मौजूद एक तत्व प्रोस्टेट कैंसर को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। नई दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट व डायटिक्स सौम्या श्रीवास्तव के अनुसार, ‘पुदीना त्वचा के लिए फायदेमंद है। त्वचा के संक्रमण में भी इससे राहत मिलती है। इसीलिए इसे क्लिंजर व टोनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।’

तुलसी

कैसे उगाएं: तुलसी के बीजों को छोटी सी मटकी में मिट्टी में एक चौथाई इंच गहरे दबा दें। इस मिट्टी में रेत, सामान्य मिट्टी व खाद मिली होनी चाहिए। जब तक बीज फूटने न लगे, तब तक मिट्टी में नमी का बने रहना जरूरी है। इसमें पांच दिन से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। अब जैसे-जैसे दो से तीन पत्तियों के जोड़े बनते रहें, इन्हें 6 से 8 इंच के कंटेनर में बोएं। मिट्टी में नमी बनाए रखें। हर दिन पौधे को एक से दो घंटे की धूप दें।

उपयोग में लाएं: आयुर्वेदिक दवाओं में तुलसी का काफी इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुरता होती है। साथ ही इससे रक्त में ग्लूकोज व शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है। उबलते हुए पानी में तुलसी की तीन से चार पत्तियां डाल कर इसकी भाप भी ले सकते हैं, जिससे श्वसन संबंधी संक्रमण को दूर करने में मदद मिलती है। तुलसी के रस का घर में छिड़काव करने से मक्खी व मच्छर दूर रहते हैं। ब्रिटेन में वर्ष 2009 में ब्रिटिश फार्मास्युटिकल कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए एक अध्ययन के अनुसार तुलसी से सूजन व जलन को 73% तक कम किया जा सकता है।

लेमनग्रास

कैसे उगाएं: लेमनग्रास के डंठल को जार में एक इंच पानी डाल कर रखें। दो-तीन दिनों के भीतर जड़ों में स्प्राउट्स निकलेंगे। इन्हें हल्की मिट्टी में दबा दें। इनमें खूब पानी दें, पर मिट्टी पूरी तरह पानी में डूबी नहीं होनी चाहिए।
उपयोग में लाएं: थाई और वियतनामी व्यंजनों में इस फ्लेवर का काफी इस्तेमाल किया जाता है। अनीता अग्रवाल के अनुसार, ‘ऐसे लोग जिन्हें कब्ज रहता है, वे चाय में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।’ लेमनग्रास की चाय पाचक ग्रंथि की सफाई करती है, जिससे मधुमेह होने की स्थिति में रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। वर्ष 2011 में प्रकाशित जर्नल ऑफ एथनोफार्मेकोलॉजी के अनुसार लेमनग्रास से तनाव को कम करने में भी मदद मिलती है।

मेथी

कैसे उगाएं: छोटे पौधे के रूप में इसे उगाने के लिए केवल पांच से छह दिन का समय लगता है। इसके बीजों को रुई और ऊन के गोले में फैला कर इन्हें रोशनी में रखें, पर सीधे सूरज की धूप इन पर नहीं पड़नी चाहिए। पानी सूखने के बाद ही इन पर पानी का छिड़काव करें।

उपयोग में लाएं: मेथी से ग्लिसमिक इंडेक्स काबू में रहता है और यह सूजन व जलन को भी कम करता है। ग्लिसमिक इंडेक्स भोजन में मौजूद विभिन्न तरह के काबरेहाइड्रेट के रक्त शर्करा पर होने वाले असर का मापक है। सरसों और मेथी को पीस कर पट्टी पर इसका लेप करके आर्थराइटिस में दर्द वाले जोड़ पर लगाने से आराम मिलता है। श्रीवास्तव कहते हैं, ‘प्रसव के बाद महिलाओं के लिए मेथी का सेवन जरूरी बताया जाता है। इसमें मौजूद डायोज्गेनिन माताओं में अधिक दूध बनाता है। जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार मेथी की हर्बल चाय पीने से मांओं में अधिक दूध बनता है। कढ़ी, दाल, परांठा आदि भारतीय व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया ही जाता है।’

सरसों

कैसे उगाएं: मेथी की तरह ही समान प्रकिया सरसों के लिए अपनाएं।
उपयोग में लाएं: आशुतोष गुलेरी के अनुसार, ‘सरसों की पत्तियों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स, विटामिन, मिनरल व फाइबर प्रचुरता में होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं। सरसों के स्प्राउट्स का सेवन ऑस्टिओपरोसिस और एनीमिया में राहत पहुंचाता है। इसके अलावा हृदय रोगों, अस्थमा, आंत व प्रोस्टेट कैंसर में भी राहत मिलती है।’ श्रीवास्तव के अनुसार, ‘एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुरता के साथ सरसों बुढ़ापे की प्रक्रिया को भी धीमा करती है। जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार इससे एल्जाइमर्स रोग होने की आशंका भी कम हो जाती है।
गुलेरी यह भी कहते हैं, ‘हाइपरटेंशन के मरीजों को इसका इस्तेमाल ध्यानपूर्वक करना चाहिए। सरसों का अधिक और बार-बार इस्तेमाल रक्त के दबाव को बढ़ा देता है।’

सौंफ

कैसे उगाएं: बीजों को दस इंच गहरे गमले में मिट्टी में दबाएं। इस गमले को पॉलीथीन से ढंक दें। जैसे ही अंकुरण होने लगे, गमले को रोशनी में रख दें। पानी का छिड़काव मिट्टी सूखने पर ही करें।
उपयोग में लाएं: सौंफ में मौजूद आयरन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। आशुतोष कहते हैं, ‘सौंफ हाजमे को दुरुस्त रखती है, जिससे अतिरिक्त वायु और तरल बाहर निकलते हैं। पाचन दुरुस्त रखने वाले इन्जाइम्स बाहर निकलते हैं। इससे पीरियड सिस्टम ठीक होता है।

धनिया

कैसे उगाएं: सौंफ की तरह ही यही प्रक्रिया धनिये के साथ अपनाएं।
उपयोग में लाएं: धनिये को शीतल गुणों के कारण जाना जाता है। यह मधुमेह में भी लाभकारी है और कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, ‘धनिये के एंटीसेप्टिक गुण मुंह के छाले व अल्सर में फायदा पहुंचाते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स आंखों के लिए लाभकारी हैं।’ इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार रूमेटॉयड आर्थराइटिस के लिए उपयोगी सूजन को भी कम रखने में यह असरकारी है। ताजगी से भरपूर यह औषधि चीजों के फ्लेवर को भी बढ़ा देती है। आप इसे किसी भी सब्जी, सूप, दही, चावल में इस्तेमाल कर सकते हैं।