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शनिवार, जून 27, 2015

बहुत कारगर है नीम की पत्तियां

फोड़े-फुंसी से लेकर पीलिया तक को ठीक कर देती है 
पेट में कीड़े होने पर नीम की नई और ताजा पत्तियों का उपयोग करना चाहिए

Benefits-and-Uses-of-Neem



नीम का पेड़ अनेक रोगों में फायदेमंद माना गया है। नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। यहाँ तक कि इसको भारत में ‘गांव का दवाखाना’ कहा जाता है। यह अपने औषधीय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, ‘श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला।’

नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटिज, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।

नीम के पत्ते भारत से बाहर 34 देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं। इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है।

इसकी पत्तियों का सेवन करने से कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

1. नीम की पत्तियों को चबाकर खाने से शरीर में मौजूद रक्त शुद्ध हो जाता है।
2.नीम की दातुन करने से दांत मजबूत होने के साथ-साथ दांतों में चमक आ जाती है और मसूढ़े में भी सूजन नहीं होती।
3.नीम की वल्कल का लेप किसी भी घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है।
4.नीम की पत्तियों को पानी में उबाल उस पानी से नहाने से त्वचा संबंधी रोगों से निजात मिलती है।
5.नीम से तैयार तेल की मालिश करना भी लाभकारी होता है।
6.नीम से तैयार तेल कई औषधियां बनाने में प्रयोग किया जाता है, नीम का सेवन करना डायबीटिज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।
7.नीम के बीजों से तैयार चूर्ण का सेवन खाली पेट करने से बवासीर से राहत मिलती है।
8.नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर उस पानी से बाल धोने से बाल काले होने के साथ-साथ बालों का झड़ना भी बंद हो जाता है।
9.नीम की पत्तियों का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो जाती है।
10.कान दर्द होने पर नीम की पत्तियों का रस कान में डालने से दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।
11.नीम के तेल की कुछ बूंदों को दूध में डालकर पीने से जलन होने पर आराम मिलता है।

नीम के बारे में उपलब्ध प्राचीन ग्रंथों में इसके फल, बीज, तेल, पत्तों, जड़ और छिलके में बीमारियों से लड़ने के कई फायदेमंद गुण बताए गए हैं। प्राकृतिक चिकित्सा की भारतीय प्रणाली ‘आयुर्वेद’ के आधार-स्तंभ माने जाने वाले दो प्राचीन ग्रंथों ‘चरक संहिता’ और ‘सुश्रुत संहिता’ में इसके लाभकारी गुणों की चर्चा की गई है। इस पेड़ का हर भाग इतना लाभकारी है कि संस्कृत में इसको एक यथायोग्य नाम दिया गया है – “सर्व-रोग-निवारिणी” यानी ‘सभी बीमारियों की दवा।’ लाख दुखों की एक दवा!

इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य की शक्ति से ही चलता है…..सूर्य की ऊर्जा से जन्मे तमाम जीवों में नीम ने ही उस ऊर्जा को सबसे ज्यादा ग्रहण किया है। इसीलिए इसे रोग-निवारक समझा जाता है – किसी भी बीमारी के लिए नीम रामबाण दवा है। नीम के एक पत्ते में 150 से ज्यादा रासयानिक रूप या प्रबंध होते हैं। इस धरती पर मिलने वाले पत्तों में सबसे जटिल नीम का पत्ता ही है। नीम की केमिस्ट्री सूर्य से उसके लगाव का ही नतीजा है।
नीम के पत्तों में जबरदस्त औषधीय गुण तो है ही, साथ ही इसमें प्राणिक शक्ति भी बहुत अधिक है। अमेरिका में आजकल नीम को चमत्कारी वृक्ष कहा जाता है। दुर्भाग्य से भारत में अभी लोग इसकी ओर ध्यान नहीं दे हैं। अब वे नीम उगाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि नीम को अनगिनत तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपको मानसिक बिमारी है, तो भारत में उसको दूर करने के लिए नीम के पत्तों से झाड़ा जाता है। अगर आपको दांत का दर्द है, तो इसकी दातून का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपको कोई छूत की बीमारी है, तो नीम के पत्तों पर लिटाया जाता है, क्योंकि यह आपके सिस्टम को साफ कर के उसको ऊर्जा से भर देता है। अगर आपके घर के पास, खास तौर पर आपकी बेडरूम की खिड़की के करीब अगर कोई नीम का पेड़ है, तो इसका आपके ऊपर कई तरह से अच्छा प्रभाव पड़ता है।

बैक्टीरिया से लड़ता है नीम

दुनिया बैक्टीरिया से भरी पड़ी है। हमारा शरीर बैक्टीरिया से भरा हुआ है। एक सामान्य आकार के शरीर में लगभग दस खरब कोशिकाएँ होती हैं और सौ खरब से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। आप एक हैं, तो वे दस हैं। आपके भीतर इतने सारे जीव हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है।

आपके शरीर के भीतर जरूरत से ज्यादा बैक्टीरिया नहीं होने चाहिए। अगर हानिकारक बैक्टीरिया की तादाद ज्यादा हो गई तो आप बुझे-बुझे से रहेंगे, क्योंकि आपकी बहुत-सी ऊर्जा उनसे निपटने में नष्ट हो जाएगी। नीम का तरह-तरह से इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया के साथ निपटने में आपके शरीर की ऊर्जा खर्च नहीं होती।

आप नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें। सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ हो सकता है – आपके बदन पर के सारे बैक्टीरिया नष्ट हो जाएंगे। या फिर नीम के कुछ पत्तों को पानी में डाल कर रात भर छोड़ दें और फिर सुबह उस पानी से नहा लें ।

एलर्जी के लिए नीम

नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें, उसकी छोटी-सी गोली बना कर सुबह-सुबह खाली पेट शहद में डुबा कर निगल लें। उसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं, जिससे नीम ठीक तरह से आपके सिस्टम से गुजर सके। यह हर प्रकार की एलर्जी – त्वचा की, किसी भोजन से होनेवाली, या किसी और तरह की – में फायदा करता है। आप सारी जिंदगी यह ले सकते हैं, इससे कोई नुकसान नहीं होगा। नीम के छोटे-छोटे कोमल पत्ते थोड़े कम कड़वे होते हैं, वैसे किसी भी तरह के ताजा, हरे पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बीमारियों के लिए नीम

नीम के बहुत-से अविश्वसनीय लाभ हैं, उनमें से सबसे खास है – यह कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। हर किसी के शरीर में कैंसर वाली कोशिकाएं होती हैं, लेकिन वे एक जगह नहीं होतीं, हर जगह बिखरी होती हैं। किसी वजह से अगर आपके शरीर में कुछ खास हालात बन जाते हैं, तो ये कोशिकाएं एकजुट हो जाती हैं। छोटे-मोटे जुर्म की तुलना में संगठित अपराध गंभीर समस्या है, है कि नहीं? हर कस्बे-शहर में हर कहीं छोटे-मोटे मुजरिम होते ही हैं। यहां-वहां वे जेब काटने जैसे छोटे-मोटे जुर्म करते हैं, यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन किसी शहर में अगर ऐसे पचास जेबकतरे एकजुट हो कर जुर्म करने लगें, तो अचानक उस शहर का पूरा माहौल ही बदल जाएगा। फिर हालत ये हो जाएगी कि आपका बाहर सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं होगा। शरीर में बस ऐसा ही हो रहा है। कैंसर वाली कोशिकाएं शरीर में इधर-उधर घूम रही हैं। अगर वे अकेले ही मस्ती में घूम रही हैं, तो कोई दिक्कत नहीं। पर वे सब एक जगह इकट्ठा हो कर उधम मचाने लगें, तो समस्या खड़ी हो जाएगी। हमें बस इनको तोड़ना होगा और इससे पहले कि वे एकजुट हो सकें, यहां-वहां इनमें से कुछ को मारना होगा। अगर आप हर दिन नीम का सेवन करें तो ऐसा हो सकता है; इससे कैंसर वाली कोशिकाओं की तादाद एक सीमा के अंदर रहती है, ताकि वे हमारी प्रणाली पर हल्ला बोलने के लिए एकजुट न हो सकें। इसलिए नीम का सेवन बहुत लाभदायक है।

नीम में ऐसी भी क्षमता है कि अगर आपकी रक्त धमनियों(आर्टरी) में कहीं कुछ जमना शुरु हो गया हो तो ये उसको साफ कर सकती है। मधुमेह(डायबिटीज) के रोगियों के लिए भी हर दिन नीम की एक छोटी-सी गोली खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह उनके अंदर इंसुलिन पैदा होने की क्रिया में तेजी लाता है।

साधना के लिए नीम

नीम आपके सिस्टम को साफ रखने के साथ उसको खोलने में भी खास तौर से लाभकारी होता है। इन सबसे बढ़ कर यह शरीर में गर्मी पैदा करता है। शरीर में इस तरह की गर्मी हमारे अंदर साधना के द्वारा तीव्र और प्रचंड ऊर्जा पैदा करने में बहुत मदद करती है।रोजाना नीम की चार-पांच कोमल पत्तियां चबाकर खाने से खून साफ होता है और कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है।
1. चेचक का इंफेक्शन होने पर नीम के पत्तों को पानी में उबालकर नहाने से लाभ होता है।
2. फोड़े-फुंसियों पर भी नीम के पत्तों का लेप लगाने से फायदा होता है।
3. नीम के पत्तों को पीसकर इसकी गोली सुबह-शाम शहद के साथ लेने से खून साफ होता है।
4. डायबिटीज के रोगी को नीम के पत्तों का रस पीने से लाभ होता है।
5. पेट में कीड़े होने पर नीम की नई व ताजा पत्तियों के रस में शहद मिलाकर चाटें।
6. दमे के मरीज को नीम के तेल की 20-25 बूंदे पान में डालकर खाने से राहत मिलती है।
7. नीम की सूखी पत्तियों का धुआं करने से घर में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट होते हैं।
8. शरीर पर होने वाली खुजली, खाज और सोरायसिस में राहत के लिए नीम के पत्तों को उबालकर उससे नहाएं।

नीम एक आयुर्वेदिक दवाई है, जिसके कई सारे स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक फायदे हैं। नीम, हमारे शरीर, त्‍वचा और बालों के लिये बहुत फायदेमंद है। इसका कडुआ स्‍वाद बहुत से लोगो को खराब लगता है इसलिये वे इसे चाह कर भी नहीं खा पाते। इसी कारण नीम का रस पीना ज्‍यादा आसान होता है। आइये जानते हैं इस गुणकारी नीम के रस का फायदा। 

नीम का जूस कैसे पिएं? 

1. नीम का रस बहुत कडुआ होता है, जिसे पीना बहुत मुश्‍किल होता है। अगर आपको इसके फायदे चाहिये तो इसे एक ग्‍लास में डाल कर इसको दवा समझ कर पूरा एक साथ पी लें। इसके अलावा ये भी देखिये की नीम के रस को और किस-किसी प्रकार से पिया जा सकता है। नीम त्‍वचा के लिए अमृत होती है 
2. नीम के रस में थोड़ा मसाला डाल दें जिससे उसमें स्‍वाद आ जाए। इसको पीने से पहले उसमें नमक या काली मिर्च और या फिर दोनों ही डाल दें। 
3. कई लोगो को नीम की महक अच्‍छी नहीं लगती। इसलिये जब रस निकाल लें तब उसको फ्रिज में 15-20 मिनट के लिये रखें या फिर उसमें बर्फ के कुछ क्‍यूब डाल दें और फिर पिएं। लेकिन सबसे अच्‍छा होगा कि नीम के रस को निकाल कर तुरंत ही पी लिया जाए। इसको 30 मिनट से ज्‍यादा स्‍टोर कर के नहीं रखना चाहिये। 
4. नीक का रस पीने से पहले अपनी नाक को दबा लें, इससे जूस को पीने में आसानी होगी। अगर आपको नीम जूस का पूरा फायदा उठाना है, तो इसमें चीनी बिल्‍कुल भी न मिलाएं। 
5. नीम का रस हमेशा सुबह-सुबह पिएं। इसकी कडुआहट को कम करने के‍ लिये इसमें नमक मिलाएं और हल्‍का सा पानी भी।