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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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सोमवार, मार्च 28, 2016

गर्भावस्था में खान-पान कैसा होना चाहिए : राज

गर्भावस्था के हर हफ्ते में महिला को चाहिए अलग पोषण
What should be Eating in Pregnancy

गर्भवती का खान-पान  : राज, गर्भावस्था के दौरान आहार संतुलित तो होना ही चाहिए साथ ही आपके खाने मेंप्रोटीन, आयरन और विटामिन आदि भरपूर मात्रा में होना चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए डॉक्टर हमेशा पौष्टिक आहार लेने की सलाह देते हैं। लेकिन गर्भावस्था के दौरान "राज" आहार का खास ख्याल रखना आवश्यक हो जाता है। जिससे जच्चा-बच्चा दोनों ही हष्ट्-पुष्ट रहें। अक्सर गर्भवती महिलाओं के साथ ये समस्या रहती हैं कि वे गर्भावस्था‍ में क्या खाएं और क्या ना खाएं।

  • नाश्ते में अनाज, गेहूं का आटा, जई, कॉर्न फ्लैक्‍स, ब्रेड और पास्ता लें। 
  • सूखे फल खासकर अंजीर, खुबानी और किशमिश, अखरोट और बादाम लें।
  • गर्भावस्‍था मधुमेह से बचने के लिए कम चीनी का सेवन करें।
  • गर्भावस्‍था की आखिरी तिमाही में पौष्टिक आहार लेना अत्‍यंत महत्त्‍वपूर्ण।

स्वस्थ गर्भावस्था और तंदुरुस्त बच्चे के लिए अपनी आहार योजना बेहद सोच-समझकर बनानी चाहिए। आइए "राज" आपको बताते हैं कि गर्भावस्था के हर पड़ाव पर आपका आहार कैसा होना चाहिए।

जीरो से आठवें सप्ताह तक

  • हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, बथुआ, सरसों, मूली के पत्ते और सलाद को अपने भोजन में शामिल करें।
  • राजमा, चने की दाल, काले चने और सेम जरूर खाए।
  • खट्टे फल जैसे- खरबूजा, संतरा, मौंसमी भी खाए।
  • नाश्ता में अनाज, गेहूं का आटा, जई, कॉर्न फ्लैक्स, ब्रेड और पास्ता खा सकती है।
  • नट्स, विशेष रूप से अखरोट और बादाम जरूर खाए।
  • कैफीन युक्त पेय से बचें। नारियल पानी पिएं, मिल्‍क शेक, ताजा फलों के रस या नींबू पानी लें।
  • इससे आपके शरीर में पानी की मात्र बढ़ेगी और निर्जलीकरण की समस्‍या से बचे रहेंगी।

नौं से 16वां सप्‍ताह

  • हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे- पालक, मूली के पत्ते और सलाद।
  • लौकी, करेला और चुकंदर के रूप में सब्जियां।
  • गेहूं से बनीं वस्तुओं और ब्राउन राइस।
  • काले चने, पीली मसूर, राजमा, और लोभिया जैसी दालें।
  • अगर आप मांसाहारी हैं तो सप्ताह में दो बार मांस, अंडे और मछली (सामन मछली, झींगे और मैकेरल) आदि लें।
  • सूखे फल खासकर अंजीर, खुबानी और किशमिश, अखरोट और बादाम।
  • संतरे, मीठा नींबू और सेब आदि फल।
  • डेयरी उत्पादों विशेष रूप से दूध, दही, मक्खन, मार्जरीन, और पनीर आदि। ये विटामिन डी के मुख्‍य स्रोत हैं।
  • सीने में जलन और कब्ज रोकने के लिए, दिन में पानी के आठ दस गिलास जरूर पिएं।

17वें से 24वें सप्‍ताह तक

  • सूखे मेवे जैसे बादाम, अंजीर, काजू, अखरोट।
  • नारियल पानी, ताजा फलों का रस, छाछ और पर्याप्त मात्रा में पानी।
  • राजमा, सोयाबीन, पनीर, पनीर, टोफू, दही आपकी कैल्शियम की जरूरतों को पूरा करेगा।
  • टोन्ड दूध (सोया दूध)।
  • हरी सब्जियां जैसे पालक, ब्रोकोली, मेथी, सहजन की पत्तियां, गोभी, शिमला मिर्च, टमाटर, आंवला और मटर।
  • विटामिन सी के लिए संतरे, स्ट्रॉबेरी, चुकंदर, अंगूर, नींबू, टमाटर, आम और नींबू पानी का सेवन बढ़ाएं।
  • स्नैक्स में - भुना बंगाली चना, उपमा, सब्जी इडली या पोहा।

25वें से 32वें सप्‍ताह तक

  • गर्भावस्था के 25 सप्ताह से अपने चयापचय (मेटाबॉलिक) दर 20 प्रतिशत बढ़ जाती है, इसलिए आपके कैलोरी बर्न करने की गति बढ़ जाती है और नतीजतन आपको अधिक थकान और गर्मी महसूस होगी। इसलिए आपको अपने भोजन में तरल पदार्थो की मात्रा बढ़ानी चाहिए। इसका फायदा यह होगा कि आप निर्जलीकरण से भी दूर रहेंगी और साथ ही आपको कब्‍ज भी नहीं होगा। वात रोग से बचने के लिए छोटे-छोटे अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा भोजन करती रहें।
  • एक दिन में 10-12 गिलास पानी पिएं।
  • दही के साथ एक या दो पराठें।
  • प्रचुर मात्रा में बादाम और काजू का सेवन करें।
  • फलों का रस पीने से अच्‍छा है कि ताजा फल खाए जाएं।
  • भोजन के साथ सलाद जरूर लें।
  • प्याज, आलू, और राई आदि का सेवन करें।
  • सेब, नाशपाती, केले, जामुन, फलियां और हरी पत्तेदार सब्जियां।
  • मछली, जैसे -सेलमॉन, बांग्रा आदि। अगर आप शाकाहारी हैं तो मछली के तेल के विकल्प या उसकी खुराक ले सकती हैं।

33वें से 40वें सप्‍ताह तक

  • गर्भावस्था की आखिरी तिमाही में पौष्टिक आहार लेना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इस दौरान भ्रूण पूरी तरह तैयार हो चुका होता है। वह जन्‍म लेने को तैयार होता है। पौष्टिक आहार जैसे, फल और सब्जियां बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करती हैं।
  • गर्भावस्था मधुमेह से बचने के लिए कम चीनी का सेवन करें।
  • शुगर फ्री बिस्किट, एल्‍कोहल रहित पेय पदार्थ का सेवन करें।
  • खीरा, गाजर, मूली और हरी पत्तेदार सब्जियां।
  • विटामिन सी के लिए स्‍ट्राबैरी, नींबू, मौसमी, ब्रोकली, आंवला का रस, संतरा या आम को अपने भोजन में शामिल करें।
  • सूखे मेवे जैसे, खजूर, अंजीर, बादाम, अखरोट, खुमानी और किशमिश का रोजाना सेवन करें। वहीं तैलीय, मसालेदार और जंक फूड का परहेज करें।
प्रसव का समय निकट आ चुका है। और ऐसे में मां को अपने बच्‍चे के लिए प्रचुर मात्रा में दूध की जरूरत होती है। तो, अपने भोजन में बैंगन, दालें आदि की मात्रा बढ़ा दें। चाय कॉफी और चीनी वाली चीजों से जरा दूरी रखें।

गर्भवती का खान-पान के लिए इन्हें भी आज़मा सकती हैं... 

  1. गर्भावस्था के दौरान आहार संतुलित तो होना ही चाहिए साथ ही आपके खाने में प्रोटीन, आयरन और विटामिन आदि भरपूर मात्रा में होना चाहिए। साथ ही गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में आयरन और फोलिक एसिड की गोली लेना भी जरूरी होता है।
  2. सामान्य महिला को अपने दैनिक आहार में 2100 कैलोरी की जरूरत होती है, जबकि गर्भवती महिला को 2500 कैलोरी की जरूरत होती है। 10 प्रतिशत कैलोरी प्रोटीन से तथा 35 प्रतिशत कैलोरी फैट यानी तेल, घी और मक्खन से तथा 55 प्रतिशत कैलोरी कार्बोहाइड्रेट से मिलनी चाहिए।
  3. नाश्ता अधिक देर से न करें, सुबह उठने के कुछ समय पश्चात ही नाश्‍ता कर लें। साथ ही दाल, चावल, सब्जियां, रोटी और फलों को अपने दैनिक आहार में शामिल करें।
  4. दैनिक आहार में हरी सब्जि़यां, दूध, उबला भोजन, अंकुरित चना, अंडे को जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि गर्भ में पल रहे शिशु को मां के आहार से ही पोषण मिलता है। जब मां पौष्टिक खाना खाएगी तभी तो बच्चा भी स्वस्थ होगा।
  5. गर्भवती महिलाओं को खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में अजवाइन अवश्य लेना चाहिए। इससे मिचली नहीं आती और खाना जल्दी हजम होता है।
  6. यदि गर्भधारण के दौरान सुबह अक्सर आपका जी मिचलाता है तो आपको खूब पानी पीना चाहिए। खाना थोड़ा-थोड़ा कई बार खाएं साथ ही अच्छी नींद लें जिससे मां और होने वाला शिशु दोनों ही स्वस्थ रहें।
  7. दलिया या साबुत अनाज से बनी रोटियां भी अपने आहार में शामिल करना चाहिए। मैदे का उपयोग कम से कम करें।
  8. गर्भावस्था में छाछ पीना लाभकारी हो सकता है। लेकिन आपको दही के उत्‍पादों से एलर्जी है तो छाछ न लें।
  9. गर्भवती महिलाओं को बादाम, अखरोट जैसे कुछ मेवे अवश्य लेना चाहिए। ये न सिर्फ कमजोरी दूर करते हैं बल्कि इनके सेवन से मां और होने वाले बच्चे दोनों का मस्तिष्क भी तेज होता है।
  10. सब्जियों को मेथी का तड़का देकर बनाएं। मेथी के सेवन से गर्भाशय शुद्ध रहता है और भूख अधिक लगती है।
  11. बढ़ता हुए गर्भस्‍थ शिशु अपनी सभी जरूरतें मां द्वारा लिए आहार से पूरी करता है। क्‍योंकि आहार से गर्भवती महिला की लौह तत्वों की आपूर्ति नहीं हो पाती, इसलिए आयरन फोलिक एसिड की गोलियां खाना जरूरी होता है। साथ ही फोलिक एसिड कई तरह के आहार में विटामिन बी के रूप में विद्यमान होता है।
  12. दूध में मुनक्का उबालकर पहले मुनक्का खायें फिर दूध पी जायें। इससे कब्ज की शिकायत नहीं होगी साथ ही हीमोग्लोबीन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
  13. पत्तागोभी खायें क्‍योंकि इसमें क्षारीय तत्व होते हैं जो रक्त शोधन करते हैं। इसकी सब्जी या कच्चा सलाद अवश्य लें।
  14. गर्भवती महिलाओं को नमक कम से कम खाना चाहिए इससे रक्तचाप नॉर्मल रहता है।
  15. इसके अलावा डॉक्टर से खाने-पीने की उचित जानकारी ले लेना बेहतर होता है जिससे मां और बच्चे दोनों में किसी तरह की कोई बीमारी या कमजोरी न पनप पाएं।

गर्भावस्था में फलो के फायदे 

अनार



अनार में एंटी ऑक्सीडैंट्स तथा विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाएं जाते हैं। अनार का जूस गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
सेब


विटामिन ,कैल्शियम , आयरन , प्रोटीन से भरपूर होता है गर्भावस्था में अनिद्रा जैसे रोग में काफी लाभकारी होता है

केला



पोटैशियम , सोडियम , फास्फोरस ,विटामिन ए ,बी 1, और सी होते है

अंगूर



कैल्शियम , आयरन , क्लोरिन होते है

संतरा



कैल्शियम ,क्लोरिन , कापर ,लोहा , विटामिन बी 1, और सी भरपूर होते है

नासपाती



फास्फोरस ,विटामिन ए , बी 1, बी 2 और पोटैशियम पाया जाता है

पालक



पालक में आयरन सबसे ज्‍यादा होता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह काफी उपयोगी है।

चुकंदर



यह विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्पलेक्स, कैरोटिनाइड्स और फ्लेवोनाइड्स का अच्छा स्रोत है। इसमें आयरन भरपूर होता है, जो गर्भवती महिलाओं में बच्चे के विकास में सहायक होता है।

अंकुरित आहार


गर्भवती महिला को संतुलित मात्रा में अंकुरित आहार भी मिलना चाहिए। इसके लिए अंकुरित सोयाबीन , मूंग, चने , गेहू का सेवन करना चाहिए बीजों के अंकुरित होने के पश्चात् इनमें पाया जाने वाला स्टार्च- ग्लूकोज, फ्रक्टोज एवं माल्टोज में बदल जाता है जिससे न सिर्फ इनके स्वाद में वृद्धि होती है बल्कि इनके पाचक एवं पोषक गुणों में भी वृद्धि हो जाती है |नवजात शिशु में मानसिक, शारीरिक दुर्बलताओं को दूर किया जा सकता है यदि गर्भवस्था के दौरान महिला अंकुरित अनाज का सेवन करती है।

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