दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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मंगलवार, मार्च 03, 2015

माइग्रेन :कारण और निवारण

Successful home Treatment
of Migraine

माइग्रेन का सफल घरेलू उपचार

माइग्रेन को आम बोलचाल की भाषा में अधकपारी भी कहते हैं। यह नाम इसे इसलिए मिला क्योंकि आम तौर पर इसका शिकार होने पर सिर के आधे हिस्से में दर्द रहता है, जबकि आधा दर्द से मुक्त होता है।यह कोई छोटा-मोटा दर्द नहीं है। यह आपके सारे दिन की गतिविधियों को ठप्प कर देने वाला दर्द है। इससे आपकी आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। यह ऐसा दर्द है जिसे भगाने के लिए कई बार मरीज को दवा लेने का होश तक नहीं रहता। इसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन आप इस दर्द को कम ज़रूर कर सकते हैं। भीषण सरदर्द की यह बीमारी माइग्रेन है। माइग्रेन किस वजह से होता है यह भी जानना जरूरी है। माइग्रेन की मुख्य वजह है, चिंता करना, देर रात तक काम करना, मानसिक दुर्बलता, जुकाम, नजला, कब्ज, मलेरिया का प्रभाव आदि।महिलाओं में माइग्रेन के मुख्य कारण है, हिस्टीरिया, अधिक शारीरिक या मानसिक कार्य करना, सदमा लगना, बेवजह पेरशान रहना आदि। महिलाएं पुरूषों की तुलना में माइग्रेन से अधिक पीड़ित रहती हैं। माइग्रेन का सही समय पर इलाज होना जरूरी है क्योंकि इस दर्द से रोगी बेचैन हो जाता है और गलत दवाइयों का सेवन करने लगता है। जिसकी वजह से दूसरी और बीमारियां रोगी को लग जाती है। आयुर्वेद में माइग्रेन का सटीक इलाज मौजूद है लेकिन यदि दर्द बहुत ही तेज है तो आप तुरंत डाक्टर को दिखाना न भूलें।
इसके निवारण के लिए डॉक्टर द्वारा कई दवाईयाँ दी जाती हैं लेकिन इन दवाइयों का लगातार उपयोग हमारे शरीर को नुकसान भी पहुँचा सकता है। इनको लगातार लेते रहने से इन दवाओं की शरीर को आदत भी हो जाती है। इस बीमारी के लिए कई घरेलू उपचार भी किए जा सकते हैं।
कुछ घरेलू और आसान उपाय जिनसे माइग्रेन में आराम मिल सकता है, इस प्रकार हैं-
माइग्रेन के ज्यादातर रोगी जानते हैं कि इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन कई ऐसे भी हैं, जिन्हें यह भी पता नहीं कि इससे असरदार तरीके से निपटा जा सकता है।

माइग्रेन की पहचान

  • क्या आपको सिर के एक हिस्से में बुरी तरह धुन देने वाले मुक्कों का एहसास होता है, और लगता है कि सिर अभी फट जाएगा?
  • क्या उस वक्त आपके लिए अत्यंत साधारण काम करना भी मुश्किल हो जाता है?
  • क्या आपको यह एहसास होता है कि आप किसी अंधेरी कोठरी में पड़े हैं, और दर्द कम होने पर ही इस अनुभव से निजात मिलती है?
अगर इनमें से किसी भी प्रश्न का उत्तर हां में है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि आपको माइग्रेन हुआ है। इसलिए फौरन डॉक्टर के पास जाकर इसकी पुष्टि कर लेनी चाहिए।
ज्यादातर लोगों को माइग्रेन का पता तब चलता है, जब वे कई साल तक इस तकलीफ को ङोलने के बाद इसके लक्षणों से वाकिफ हो जाते हैं।
कठोरता : किसी कठोर चीज से सिर के एक हिस्से में जोर-जोर से वार करने का एहसास तब होता है, जब जैविक परिवर्तन के कारण खून की धमनियां फूलने लगती हैं, या उनमें जलन होने लगती है। जबकि अन्य प्रकार के सिरदर्द में आमतौर पर दर्द सिकुड़ी हुई धमनियों या सिर और गर्दन की मांसपेशियों के सख्त हो जाने के कारण होता है। ‘माइग्रेन का दर्द बहुत जबर्दस्त होता है। इसस आप रोजमर्रा के आम काम भी नहीं कर पाते। यहां तक कि चलना फिरना भी दूभर हो जाता है, और लगता है कि शरीर टूट चुका है।’
गैस की समस्या :
  • माइग्रेन के साथ अक्सर जी मिचलाता है, और उल्टी भी हो जाती है।
  • माइग्रेन का अटैक होने पर मरीज को रोशनी, आवाज या किसी तरह की गंध नहीं सुहाती।
  • माइग्रेन का हमला अचानक होता है। कई बार यह शुरू में हल्का होता है, लेकिन धीरे-धीरे बहुत तेज दर्द में तब्दील हो जाता है। माइग्रेन का अटैक किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन ज्यादातर इसकी शुरुआत किशोर उम्र से होती है।
  • माइग्रेन के ज्यादातर मरीज वे होते हैं, जिनके परिवार में ऐसा इतिहास रहा है। इसके कुल मरीजों में 75 प्रतिशत महिलाएं होती हैं।
  • स्थान : माइग्रेन का दर्द आमतौर पर सिर के एक सिरे से, या कभी-कभी बीचोंे बीच से या पीछे की तरफ से उठता है।
  • माइग्रेन का दर्द 4 से 48 घंटे तक रह सकता है। कभी यह रह-रहकर कई हफ्तों या महीनों तक, या फिर सालों तक खास अंतराल में उठता है। कई बार एक ही समय में यह बार-बार हथौड़ों की बारिश का एहसास कराता है।
  • माइग्रेन की अनुभूति कई बार वास्तविक दर्द से दस मिनट से लेकर आधे घंटे पहले ही शुरू हो जाती है। इस दाौरान सिर में बिजली फट पड़ने, आंखों के आगे अंधेरा छा जाने, बदबू आने, सुन्न पड़ जाने या दिमाग में झन्नाहट का एहसास होता है। किसी-किसी मरीज को अजीब-अजीब सी छायाएं नजर आती हैं। किसी को चेहरे और हाथों में सुइयां या या पिनें चुभने का एहसास होता है। लेकिन कई अध्ययनों से सामने आया है कि माइग्रेन के प्रभामंडल का एहसास केवल एक से पांच प्रतिशत मरीजों को ही होता है। इसे क्लासिकल माइग्रेन कहा जाता है, लेकिन यह महिलाओं में कम होता है।

माइग्रेन का इलाज

  • विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन से निपटने में इस बात का रोल काफी अहम होता है कि आप इसके लिए कितने तैयार हैं। सभी मरीजों में माइग्रेन के पूर्व संकेत (ट्रिगर्स) एक से नहीं होते, इसलिए उनके लिए डायरी में अपनी अनुभूतियां दर्ज करना उपयोगी हो सकता है। इसके बाद आप दवा की सहायता से इन ट्रिगर्स से समय रहते बचकर, माइग्रेन को टाल भी सकते हैं।
  • माइग्रेन का दर्द होने पर आप देशी घी में गुड खायें यह आधे सिर मे होने वाले दर्द से निजात दिलाता है। यदि दर्द सुबह से ही होने लगे तो आप दूध में जलेबी या रबड़ी का सेवन करें। एैसा करने से आधे सीसी का दर्द रूक जाता है।माइग्रेन के दर्द से यदि उल्टी हो रही हो तो खाने के समय में रोगी को शहद खिलाएं एैसा करने से उल्टी और दर्द बंद हो जाता है। यदि दर्द सुबह से ही शुरू हो जाता है तो तुलसी के पत्तों को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें और फिर इसमें शहद मिलाकर दिन में तीन बार चाटें। यह दर्द में राहत देगा और धीरे-धीरे माइग्रेन के प्रभाव को कम करेगा।
  • आधे सिर के हिस्से में दर्द ज्यादा हो तो आप रोगी को आधा चम्मच शहद में आधा चम्मच नमक मिलाकर चटाएं। हींग भी माइग्रेन के दर्द से रहात देने में असरकारी है। आप पानी में हींग को अच्छी तरह से घोल लें फिर इसे सूंघे और इसका लेप माथे पर लगाएं। दर्द से निजात मिलेगा।
  • अंगूर का रस सुबह पीने से माइग्रेन के दर्द से निजात मिलता है। सुबह से शुरू होने वाले दर्द में आप सुबह-सुबह ही 150 ग्राम पानी में 50 ग्राम शक्कर मिलाकर धीरे-धीरे पीएं यह सिर दर्द से मुक्ति दिलवाता है। आधे सिर के दर्द से निजात पाने के लिए आप सूर्योदय से पहले उठकर 25 ग्राम खील को शहद के साथ सेवन करें और फिर आधे घंटे की नींद लें एैसा 1 सप्ताह तक करने से माइग्रेन के दर्द से मुक्ति मिलती है।
  • लहसून माइग्रेन के दर्द से निजात दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लहसून को पीस कर उसका लेप दर्द वाली जगह पर लगाने से दर्द से निजात मिलता है साथ ही आप लहसून के रस की दो छोटी बूंदे नाक के छिद्र में डालें।

सिर की मालिश -

हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम और प्यार किसी भी दवा से ज़्यादा असर करता है। इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह इस दर्द से राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए हल्की खुश्बू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।

धीमी गति से साँस लें -

अपनी साँस की गति को थोड़ा धीमा करके, लंबी साँसे लेने की कोशिश करें। यह तरीका आपको दर्द के साथ होने वाली बेचैनी से राहत दिलाने में सहायता करेगा।
अरोमा थेरेपी माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए आजकल खूब पसंद की जा रही है। इस तरीके में हर्बल तेलों के एक तकनीक के माध्यम से हवा में फैला दिया जाता है या फिर इसको भाप के ज़रिए चेहरे पर डाला जाता है...

ठंडे या गर्म पानी की मसाज-

एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर,उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग भी कर सकते हैं।

अरोमा थेरेपी-

अरोमा थेरेपी माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए आजकल खूब पसंद की जा रही है। इस तरीके में हर्बल तेलों के एक तकनीक के माध्यम से हवा में फैला दिया जाता है या फिर इसको भाप के ज़रिए चेहरे पर डाला जाता है।
इसके साथ हल्का म्यूज़िक भी चलाया जाता है जो दिमाग को सुकून पहुँचाता है।

योगासन

माइग्रेन का निवारण योगासन द्वारा भी सुलभ है। इसके लिए रात्रि को बिना तकिए केशवासन में सोएं। सुबह-शाम योगाभ्यास में ब्रह्म मुद्रा, कंध संचालन, मार्जरासन, शशकासन के पश्चात प्राणायाम करें। इसमें पीठ के बल लेटकर पैर मिलाकर रखें। श्वास धीरे-धीरे अंदर भरें, तब तक दोनों हाथ बिना मोड़े सिर की तरफ जमीन पर ले जाकर रखें और श्वास बाहर निकालते वक्त धीरे-धीरे दोनों हाथ बिना कोहनियों के मोड़ें व वापस यथास्थिति में रखें। ऐसा प्रतिदिन दस बार करें। अंत में कुछ देर शवासन करके नाड़िशोधन प्राणायाम दस-दस बार एक-एक स्वर में करें।

चेतावनी : कई बार सिरदर्द दूसरी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का भी संकेत होता है। इसलिए बार-बार होने वाले तेज सिरदर्द, गर्दन दर्द, अकड़न, जी मिचलाने या आंखों के आगे अंधेरा छा जाने को बिलकुल भी नजर अंदाज न करें और फौरन डॉक्टर को दिखाएं।

शनिवार, फ़रवरी 28, 2015

नुकसान रहित डिओड्रेंट घर पर बनायें

Create a Natural Deodorants at home

बाजारी डिओड्रेंट से शरीर को नुक्सान

पसीने की बदबू से छुटकारा पाने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय बरसों से करते रहे हैं। कभी टेलकम पाउडर का सहारा लिया, तो कभी कपूर का। पिछले कुछ बरसों से डिओडरेंट पुरजोर इस्तेमाल में है। लेकिन खुशबू फैलाने वाले डियो के इस्तेमाल के कुछ नुकसान भी हैं। इसलिए राजेश मिश्रा द्वारा बताये गए नुस्खे से आप घर पर डिओड्रेंट बनाये ये आपके शरीर को नुक्सान नहीं पहुंचाएगा.. 

पसीना और बदबू : राजेश मिश्रा

  • बदबू हमारे शरीर में पसीने के जरिए पनपती है।
  • हालांकि पसीना अपने आप में बदबूरहित होता है। जब शरीर पर पनपने वाले माइक्रोस्कोपिक बैक्टीरिया इसके साथ मिलते हैं, तब बदबू पैदा होती है।
  • पसीने की बदबू के लिए कई बार शरीर के कुछ हार्मोन जिम्मेदार होते हैं, तो कई बार खानपान या वातावरण इसकी वजह बनता है।
  • लेकिन बदबू पनपने की सबसे बड़ी वजह है पसीने के साथ बैक्टीरिया का मिलना, जो हमारे शरीर में ही रहते हैं और पसीने के साथ मिलकर तेजी से बढ़ते हैं।

डियो का रोल : राजेश मिश्रा

  • डियो शरीर में बदबू फैलाने वाले बैक्टीरिया पर असर डालता है। हालांकि यह पसीना आने से नहीं रोक पाता।
  • इसमें मौजूद केमिकल्स खुशबू पैदा करते हैं।

डियो से नुकसान : राजेश मिश्रा

  • कंज्यूमर एजुकेशन ऐंड रिसर्च सोसायटी (सीईआरएस) की मैगजीन इनसाइट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कुछ डियोडरेंट या ऐंटिपर्सपिरेंट स्किन, आंखों और लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • डियो में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल अल्जाइमर और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं।
  • डियो में इस्तेमाल होने वाला ऐंटि-बैक्टीरियल फेफड़े और लिवर डैमेज की वजह बन सकता है।
  • यूएस एफडीए के मुताबिक गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए डियो का नियमित इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। इसमें इस्तेमाल होने वाला ऐल्युमिनियम उनके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है।
  • डियो से कपड़ों का रंग खराब होने के अलावा कॉटन और लिनेन जैसे फैब्रिक का फाइबर खराब होने का खतरा भी रहता है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग - राजेश मिश्रा

आप लगभग एक तिहाई कप सिरका (एसिटिक एसिड) और इतनी ही मात्रा में पानी लिया ले और इसे अच्छी तरह से आपस में घोल लिया जाए और उबाल आने तक गर्म किया जाए। दूसरी तरफ एक अलग बर्तन में तीन लौंग, धनिया और पुदीना की थोड़ी ताजी पत्तियाँ, लगभग 4 पत्तियाँ नीलगीरी की और एक ग्राम दालचीनी की छाल का चूर्ण लिया ले । और इन सभी को गर्म सिरके और पानी के गर्म घोल में डाला जाता है। तुरंत इसे छान लिया जाए और ठंडा होने पर बंद जार रखकर रेफ्रिजेटर में रख दे । प्रतिदिन नहाने के बाद थोड़ी मात्रा इस मिश्रण की लेकर अपनी बाहों और पसीना ज्यादा आने वाले शारीरिक अंगों पर लगाया जाए तो यह शरीर की दुर्गंध को खत्म करता है और पसीना आने का सिलसिला भी रोक देता है। धीरे धीरे आपको एक हलकी सुगंध का भी एहसास होगा और नुकसान दायक भी नहीं है .

कार के अंदर की गंध दूर करने के देसी नुस्खे:-राजेश मिश्रा

दो बड़े कटोरे ले लीजिए, दोनो में नैप्किन या टोवेल रख दें, इस पर सिरका या जिसे विनेगर कहते है डालना शुरू करिए, ऐसा तब तक किया जाए जब तक कि नैप्किन या टोवेल पूरी तरह से सिरके को सोख ले, यानि गीला हो जाए। एक कटोरे को कार की अगली सीट के नीचे और दूसरा पिछ्ले सीट के फ़्लोर पर एक पूरी रात के लिए रख दिया जाए। अगले दिन सुबह सिरके को निचोड़ कर फ़ें क दिया जाए और कपड़े को धो लिया जाए, एक और रात के लिए यही प्रकिया अगली शाम को दोहरायी जाए, गंध दूर हो जाएगी।
एक अन्य उपाय के अनुसार सेव काटकर टुकड़े तैयार किए जाएं और कप या छोटी कटोरी में डालकर कार की सीट्स के नीचे फ़्लोर पर रख दिये जाएं, एक दो दिन में ये टुकड़े सिकुड़ जाएंगे, फि़र एक बार यही प्रक्रिया दोहरायी जाए, धीमे धीमे गंध दूर हो जाएगी।
कार फ़्लोर पर काफी पावडर छिड़क दिया जाए तो भी कार की गंध दूर हो जाती है।

मिनटों में हो जायेगा चेहरा सुन्दर

घरेलु नुस्खों से चेहरे को निखारिए
Household Tips to Improve Face

सुंदर दिखना हर किसी की चाहत होती है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप मंहगे उत्पाद का प्रयोग करें या ब्यूटी पार्लर का रुख करें। चेहरे की खूबसूरती को निखारने के लिए जरूरी है कि आप इसका खास खयाल रखें। जानिए * राजेश मिश्रा से कुछ आसान उपाय जिनसे आपकी खूबसूरती निखार जाएगी और रौनक बरकरार रहेगी। 
  • कच्चे दूध में रूई का फाहा भिगोकर चेहरा साफ़ करने से कील मुहाँसे और झाँई दूर होकर त्वचा स्वस्थ बनती है।* राजेश मिश्रा 
  • हल्दी और चंदन का चूर्ण दूध में भिगोकर चेहरे पर लगाने से थकी और मुरझाई त्वचा स्वस्थ होती है।
  • तरबूज़ के रस को चेहरे पर लगाएँ और सूख जाने पर धो दें। इससे दाग धब्बे दूर होते हैं तथा त्वचा साफ़ होकर निखर जाती है।* राजेश मिश्रा 
  • मसूर की दाल और दूध के उबटन में घी मिलाकर शरीर पर लगाने से त्वचा नर्म और चमकदार बन जाती है।* राजेश मिश्रा 
  • एक एक-एक चम्मच ग्लिसरीन, गुलाबजल और नींबू का रस मिलाकर हाथों से मलें और सूख जाने पर धो दें। इससे सख्त हाथ मुलायम हो जाएँगे।* राजेश मिश्रा 
  • उँगलियों पर ज़रा-सा बादाम या जैतून का तेल लेकर नियमित रूप से भौंहों और बरौनियों पर लगाने से वे घनी और चमकदार बन जाती हैं।* राजेश मिश्रा 
  • बालों में चमक लाने के लिए १ प्याला पानी मे ३ बडे चम्मच सफेद सिरका मिलाकर लगाएँ और १५ मिनट बाद धो दें।* राजेश मिश्रा 
  • आँखों के पास गहरे घेरों और सूजन के लिए खीरे के पतले टुकड़ों को आँखों पर रखकर बीस मिनट आराम करें, फिर चेहरा धो दें।* राजेश मिश्रा 

ऎसे हटाए चेहरे के दाग* राजेश मिश्रा 

  • सूखी हल्दी की गांठ को नींबू के रस में मिलाकर लगाने से भी दाग-धब्बे तेजी से मिटने लगते हैं। सूखी त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने के लिए दूध में चंदन की लकड़ी घिसकर लगाएं।
  • तैलीय त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने के लिए चंदन का बूरा गुलाब जल में मिलाकर लगाएं। यह प्रयोग हर मौसम में लाभकारी है। चोट के निशान पर लाल चंदन रोज पानी में घिस कर लगाएं 20 दिन में फायदा नजर आने लगेगा।
  • टमाटर में नींबू की दस-बारह बूंदे मिलाएं इस मिश्रण को चेहरे पर मलने से दाग-धब्बे दूर होते हैं। अक्सर पेट की खराबी से चेहरे पर दाग-धब्बे नजर आते हैं अत: दिन में कम से कम तीन बार नींबू पानी पिएं, कुछ ही हफ्तों में चेहरा चमकने लगेगा।
  • गुलाब जल को आइस ट्रे में जमाकर क्यूब्स को आंखों के इर्द-गिर्द घुमाने से आँखें तरोताजा तो होती हैं, उसकी जलन भी कम हो जाती है।
  • इसी तरह खीरे के रस का प्रयोग भी आँखों के लिए किया जा सकता है। साथ ही झुलसी त्वचा के लिए भी यह कारगर उपाय होगा।
  • एक चुटकी कपूर को शहद में मिलाकर चेहरा धोएं, चेहरा खिल जाएगा। साथ ही साबुन से चेहरा धोने के बाद गीले चेहरे पर चीनी और नमक लगाकर थोड़ी देर रखें और फिर उसे धो लें। यह चेहरे के लिए अच्छा स्क्रबर होगा।
यदि आप स्थाई तौर पर अपने चेहरे को बेदाग व खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो इन आसान टिप्सों को आजमाइएँ -
  1. चेहरे पर हर रोज चंदन पावडर, गुलाब जल व हल्दी को मिलाकर इनका लेप लगाएँ। रोजाना यह लेप चेहरे पर लगाने से आपके चेहरे की रंगत निखरती है। 
  2. ऐलोवेरा के पत्तों की ऊपरी परत निकालकर उसके गूदे को चेहरे पर मलने से धीरे-धीरे दाग-धब्बे कम होने लगते हैं। 
  3. हर रोज त्वचा पर शहद लगाने से त्वचा के दाग-धब्बे कम पड़ने के साथ-साथ त्वचा का रूखापन भी दूर होता हैं। 
  4. आप चाहे तो मौसमी फलों जैसे केला, संतरा, पपीता, आम आदि का गूदा अपने चेहरे पर लगा सकते हैं। फलों के पैक को लगाने से भी चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं।
अपने मुखड़े को चांद का टुकड़ा बनायें, मनुष्य का चेहरा उसके व्यक्तित्व का आईना होता है। शायद इसीलिए स्त्रियां अपने चेहरा निखारने के लिए प्रयासरत रहती हैं। इसके लिए महंगे सौंदर्य प्रसाधन इस्तेमाल करती हैं। पर मध्यवर्गीय महिलायें इसे आसानी से प्रयोग नहीं कर पातीं। तो फिर क्यों ना सस्ते व आसान तरीके से अपने मुखड़े को निखारा जाये।
  • चेहरे पर गुलाबीपन लाने के लिये कच्चे दूध में नींबू का रस व नमक मिलाकर नहाने से पहले मलें। दूध में ब्रेड के काटन (साइड) भिगा दें। कुछ देर बाद उससे मुंह पर मालिश करें। कुछ ही दिनों में चेहरा फूल की तरह खिल जायेगा।
  • शहद में जरा सी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगायें इससे चेहरे की मैल निकल जायेगी व चेहरा साफ व ताजातरीन होगा।
  • पुदीने की पत्तियों को उबलते पानी में डाले, फिर छान लें। इससे चेहरे की नियमित सफाई करने से चेहरा तरोताजा बना रहेगा।
  • केले को मैश करके एक चम्मच दूध मिलाएं। इसे चेहरे पर लगायें पंद्रहृ-बीस मिनट तक चेहरा थपथपा कर सुखा लेंफिर ठंडे पानी से धो लें इससे झुर्रियां दूर होंगी।
  • एक चम्मच सौंफ को पानी में अच्छी तरह से उबालें। जब गाढ़ी हो जाए तो थीड़ी मात्रा में शहद मिला लें।। इसे चेहरे पर लगाने के दस मिनट बाद धो लें। इससे झुर्रियां दूर होकर चेहरे पर चमक आयेगी।
  • आलू को कद्दूकस करके पूरे चेहरे पर लगायें। बीस मिनट रखें फिर धो लें। इससे चेहरा नरम होगा. अगर त्वचा तैलीय हो तो ज्यादा फायदेमंद होगा।
  • र्दन व आंखों के नीचे कालापन- कच्चा खीरा, आलू कद्दूकस करके चेहरे पर रगड़े, कालीमा दूर हो जाएगी।
  • टमाटर बहुत फायदेमंद है। टमाटर पीसकर लगायें, अगर त्वचा सूखी हो तो टमाटर में दही मिलाकर लगायें। चेहरा खिल उठेगा।
  • खीरा – त्वचा के लिए बेहतरीन है। खाने से या लगाने से चेहरे पर गहरा असर पड़ता है। नींबू त्वचा को कसता है। अगर आप इसमें नींबू मिलायें तो ना सिर्फ चेहरा कस जायेगा, बल्कि उसमें उज्ज्वलता आएगी।
  • तरबूज एक अच्छा मॉइश्चराइजर है। इसे थोड़ा मथ लें और चेहरे पर लगायें। सूखने पर धो लें ठंडे पानी से। गर्मी में त्वचा के लिए बहुत अच्छा है।
  • क्या आपकी त्वचा थकी-थकी व झुलसी है। तो घबरायें नहीं। एक आड़ू लेकर उसका छिलका निकाल कर गूदा शहद में मिला दें। थोड़ा सा दूध मिला लें। इसे चेहरे पर आधा घंटा तक लगातार लगाये रखें। फिर नींबू डालकर गुनगुने पानी से धो लें। देखेंगे कि आपका चेहरा किस तरह दमकता है।
  • झाईयों के लिए केले का पैक असर दिखाता है। एक पका केला दही के साथ मथ लें। इसे चेहरे व गले पर लगा लें, चेहरे की झाईयां और काले निशान इसके लगातार इस्तेमाल से दूर हो जाएंगे।
  • चोकर- क्या आपके चेहरे पर मुंहासें हैं। तो गेहूं का चोकर फेंकिए मत, इसे जमा करके थोड़ा सा चोकर इसमें थोड़ा शहद, मलाई मिला लें। इसे चेहरे पर लगातार धीरे-धीरे मलें-माथे पर, बाहों पर और पैरों पर भी लगायें और मलते रहें, जब सूखने लगे तो धो लें। यह मुंहासों को मिटाता है, त्वचा का सूखा मांस उतारता है।
  • गेंदे के फूलों की पत्तियों को पानी में भिगो लें। थोड़ी देर बाद मसल लें और ग्लिसरीन मिलाकर चेहरे पर लेप करें। थोड़ी देर बाद धो लें। यह त्वचा के लिए अनोखी खुराक है।
  • झुर्रियां- चेहरे पर झुर्रियां, दाग-धब्बे हों तो पपीते का गूदा, ताजा दही और कपूर मिलाकर लगायें।
  • झाईयां- चेहरे पर मुंहासों के दाग, झाईयां हों, आंखों के नीचे काले घेरे, चेहरा भद्दा, कुरूप दिखाई दे तो तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच, नींबू रस दो चम्मच मिलाकर हल्के-फुल्के अंगुलियों से या रूई से सुबह व रात को प्रभावित त्वचा पर लगाकर मलें और 20-25 मिनट लगा रहने दें, फिर गुनगुने पानी से धो लें ।



शरीर पर किसी भी जगह दाग का होना परेशानी पैदा करता है और यदि दाग चेहरे पर हो तो ज्यादा परेशानी सहनी पड़ती है। ऎसा माना जाता है चेहरा शरीर का सबसे मुख्य हिस्सा है और वो दागी हो तो परेशानी बड़ी हो जाती है।
दाग एक तरह से सौंदर्य से संबंधित समस्या है और शोध बताते हैं ये दाग अक्सर जलने की वजह से, सड़क दुर्घटनाओं में लगी चोट की वजह से, या फिर किशोरावस्था में हॉर्मोनल च ेजेस के साथ होने वाले मुंहासों की वजह से हो सकते हैं।
दाग व धब्बे किसी भी कारण से हो सकते हैं। ऎसे दाग हटाने के लिए लोग अक्सर नई-नई क्रीम का इस्तेमाल करते हैं। पर कोई सुधार नजर नहीं आता। इन दवाओं और क्रिम को लगाने से ये दाग हल्के हो जाते हैं लेनि जड़ से नहीं हटते।
अब इन्हें हटाने के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से इनमें ऎसे सुधार किए जाते हैं कि ये करीब-करीब गायब ही हो जाते हैं।
दाग धब्बों को हटाने के लिए जो चिकित्सा उपलब्ध हैं, उनमें स्कार रिवीजन सर्जरी, फैट इंजेक्शन सर्जरी और लेजर ट्रीटमेंट को खास तौर अपनाया गया है और उसका लाभ भी हुवा है। हम यहां आपको उन्हीं में से कुछ इलाज की विधियों के बारे में बता रहे हैं-
एक्सपर्टस ने बताया सबसे आधुनिक फैट इंजेक्शन सर्जरी है। यह चोट के दाग-धब्बों के साथ-साथ जलने के कारण बने दागों व निशानों और मुंहासे के कारण बने दाग-धब्बों को मिटाने में कारगर साबित हुई है। यह इलाज का तरीका धब्बे को ठीक करने के लिए बेहद उपयोगी है।
फैट इंजेक्शन सर्जरी के अंतर्गत रोगी की वसा कोशिकाओं को ही इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल किया जाता है। फैट ग्राफ्टिंग की यह प्रक्रिया रोगी के शरीर से लाइपोसक्शन विधि के माध्यम से वसा प्राप्त करने के साथ शुरू होती है। यह वसा पेट या कूल्हे के पास से ली जाती है। इसकी प्रोसेसिंग करने के बाद सर्जन इसे दोबारा धब्बे वाली त्वचा के नीचे इंजेक्ट कर देता है।
इसके बाद दूसरा तरीका जो आजकल चलन में है वो है स्कार रिवीजन सर्जरी। चोट की वजह से होने वाले ज्यादातर धब्बों को परंपरागत स्कार रिवीजन सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है। चेहरे के धब्बों के लिए यह सर्जरी बेहोश किए बगैर की जा सकती है। इस विधि से धब्बे को सर्जरी की सहायता से हटा दिया जाता है।

शुक्रवार, फ़रवरी 27, 2015

माहवारी (मासिक धर्म) के सभी दोषों को ऐसे दूर करें

Periods (Menses) : Remove all the defects
अनियमित माहवारी के लिए आयुर्वेदिक

मासिक धर्म स्त्री में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।  यदि मासिक धर्म में अनियमितता होती है तो स्त्री के शरीर में अन्य विकार उत्पन्न हो जाते है।  इसका कारण शरीर के भीतर किसी रोग का होना भी हो सकता है।  इसके सुचारु रूप से न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित रह जाती है। 

कारण

शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी - इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता। 

पहचान

गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण है। 

1. किशमिश: पुरानी किशमिश को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे लगभग 200 मिलीलीटर पानी में रात को गोकर रख दें। सुबह इसे उबालकर रख लें। जब यह एक चौथाई की मात्रा में रह जाए तो इसे छानकर सेवन करने से मासिक-धर्म के सभी दोष नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
2. तिल: काले तिल 5 ग्राम को गुड़ में मिलाकर माहवारी (मासिक) शुरू होने से 4 दिन पहले सेवन करना चाहिए। जब मासिक धर्म शुरू हो जाए तो इसे बंद कर देना चाहिए। इससे माहवारी सम्बंधी सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। लगभग 8 चम्मच तिल, एक गिलास पानी में गुड़ या 10 कालीमिर्च को (इच्छानुसार) पीसकर गर्म कर लें। आधा पानी बच जाने पर 2 बार रोजाना पीयें, यह मासिक-धर्म आने के 15 मिनट पहले से मासिकस्राव तक सेवन करें। ऐसा करने से मासिक-धर्म खुलकर आता है। 14 से 28 मिलीलीटर बीजों का काढ़ा एक ग्राम मिर्च के चूर्ण के साथ दिन में तीन बार देने से मासिक-धर्म खुलकर आता है। तिल, जौ और शर्करा का चूर्ण शहद में मिलाकर खिलाने से प्रसूता स्त्रियों की योनि से खून का बहना बंद हो जाता है। * राजेश मिश्रा 
3. ज्वार: ज्वार के भुट्टे को जलाकर इसकी राख को छान लें। इस राख को 3 ग्राम की मात्रा में पानी से सुबह के समय खाली पेट मासिक-धर्म चालू होने से लगभग एक सप्ताह पहले देना चाहिए। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
4. चौलाई: चौलाई की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें। इसे लगभग 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय खाली पेट मासिक-धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिनों पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
5. असगंध: असगंध और खाण्ड को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें, फिर इसे 10 ग्राम लेकर पानी से खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
6. रेवन्दचीनी: रेवन्दचीनी 3 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय खाली पेट माहवारी (मासिक धर्म) शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
7. कपूरचूरा: आधा ग्राम कपूरचूरा में मैदा मिलाकर 4 गोलियां बनाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक गोली का सेवन माहवारी शुरू होने से लगभग 4 दिन पहले स्त्री को सेवन करना चाहिए। मासिक-धर्म शुरू होने के बाद इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। 
8. राई: मासिक-धर्म में दर्द होता हो या स्राव कम होता हो तो गुनगुने पानी में राई के चूर्ण को मिलाकर, स्त्री को कमर तक डूबे पानी में बैठाने से लाभ होता है।* राजेश मिश्रा 
9. मूली: मूली के बीजों का चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ 3-3 ग्राम सेवन करने से ऋतुस्राव (माहवारी) का अवरोध नष्ट होता है। सुरेश चौहान 10. अडूसा (वासा): अड़ूसा के पत्ते ऋतुस्त्राव (मासिकस्राव) को नियंत्रित करते हैं। रजोरोध (मासिकस्राव अवरोध) में वासा पत्र 10 ग्राम, मूली व गाजर के बीज प्रत्येक 6 ग्राम, तीनों को 500 मिलीलीटर पानी में पका लें। चतुर्थाश शेष रहने पर यह काढ़ा कुछ दिनों तक सेवन करने से लाभ होता है।
11. कलौंजी: 2-3 महीने तक भी मासिक-धर्म के न होने पर और पेट में भी दर्द रहने पर एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम को खाना खाने के बाद सोते समय 30 दिनों तक पियें। नोट: इस प्रयोग के दौरान आलू और बैगन नहीं खाना चाहिए। * राजेश मिश्रा  
12. विदारीकन्द: विदारीकन्द का चूर्ण 1 चम्मच और मिश्री 1 चम्मच दोनों को पीसकर 1 चम्मच घी के साथ
मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मासिक-धर्ममें अधिक खून आना बंद होता है। विदारीकन्द के 1 चम्मच चूर्ण को घी और चीनी के साथ मिलाकर चटाने से मासिक-धर्म में अधिक खून आना बंद हो जाता है।
13. उलटकंबल: उलटकंबल की जड़ की छाल का गर्म चिकना रस 2 ग्राम की मात्रा में कुछ समय तक रोज देने
से हर तरह के कष्ट से होने वाले मासिक-धर्म में लाभ मिलता है। * राजेश मिश्रा 
  • उलटकंबल की जड़ की छाल को 6 ग्राम लेकर 1 ग्राम कालीमिर्च के साथ पीसकर रख लें। इसे मासिक धर्म से 7 दिनों पहले से और जब तक मासिक-धर्म होता रहता है तब तक पानी के साथ लेने से मासिक-धर्म नियमित होता है। इससे बांझपन दूर होता है और गर्भाशय को शक्ति प्राप्त होती है।
  • अनियमित मासिक-धर्म के साथ ही, गर्भाशय, जांघ और कमर में दर्द हो तो उलटकंबल की जड़ का रस 4 ग्राम निकालकर चीनी के साथ सेवन करने से 2 दिन में ही लाभ मिलता है।
  • उलटकंबल की 50 ग्राम सूखी छाल को जौ कूट यानी पीसकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें। यह काढ़ा उचित मात्रा में दिन में 3 बार लेने से कुछ ही दिनों में मासिक-धर्म नियमित समय पर होने लग जाता है। इसका प्रयोग मासिक धर्म शुरू होने से 7 दिन पहले से मासिक-धर्म आरम्भ होने तक दें।
  • उलटकंबल की जड़ की छाल का चूर्ण 4 ग्राम और कालीमिर्च के 7 दाने सुबह-शाम पानी के साथ मासिक- धर्म के समय 7 दिन तक सेवन करें। 2 से 4 महीनों तक यह प्रयोग करने से गर्भाशय के सभी दोष मिट जाते हैं। यह प्रदर और बन्ध्यत्व की सर्वश्रेष्ठ औषधि है।  * राजेश मिश्रा 
14. अनन्नास: अनन्नास के कच्चे फलों के 10 मिलीलीटर रस में, पीपल की छाल का चूर्ण और गुड़ 1-1 ग्राम मिलाकर सेवन करने से मासिक-धर्म की रुकावट दूर होती है। * राजेश मिश्रा 
  • अनान्नास के पत्तों का काढ़ा एक चौथाई ग्राम पीने से भी मासिक-धर्म की रुकावट दूर होती है।
15. बथुआ: 2 चम्मच बथुआ के बीज 1 गिलास पानी में उबालें। आधा पानी बच जाने पर छानकर पीने से रुका हुआ मासिकधर्म खुलकर साफ आता है। * राजेश मिश्रा 

नुस्खे 

  • 3 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से माहवारी ठीक हो जाती है|
  • दूब का रस एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय पीने से रुकी माहवारी खुल जाती है|
  • कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर कुछ दिनों तक खाने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
  • ग्वारपाठे का रस दो चम्मच की मात्रा में खाली पेट लगभग दो सप्ताह तक सेवन करें|
  • 10 ग्राम तिल, 2, ग्राम कालीमिर्च, दो नग छोटी पीपल तथा जरा-सी शक्कर-सबका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
  • 3 ग्राम तुलसी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें|
  • 50 ग्राम सोंठ, 30 ग्राम गुड़, 5 ग्राम बायबिड़ंग तथा 5 ग्राम जौ - सबको मोटा-मोटा कूटकर दो कप पानी में औटाएं| जब पानी आधा कप रह जाए तो काढ़े का सेवन करें| रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|
  • बरगद की जटा, मेथी और कलौंजी - सब 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूट लें| फिर आधा किलो पानी में सब चीजें डालकर काढ़ा बनाएं| जब पानी आधा रह जाए तो छानकर शक्कर डालकर पी जाएं|
  • प्याज का सूप एक कप बनाएं| उसमें थोड़ा- सा गुड़ घोल लें| इस पीने से रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|
  • दिन में तीन बार 2-2 ग्राम नामा गरम पानी से सेवन करना चाहिए| इससे मासिक धर्म खुल जाता है|

सिगरेट और शराब से छुटकारा

राज द्वारा सुझाये गए आसान उपाय से मिलेगी मुक्ति

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल क्या खूब लिखा है लिखने वाले ने पता नहीं लिखने वाला शराब और नशा से कितना परिचित था पर जिसने भी लिखा है शराब पीने वालो को उसकी वकालत करने के लिए एक अच्छी लाइन दे दी थी | बाकई शराब अब नशीली नहीं रह गयी कियोकि देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले 18 से 35 वर्ष के युवा इन पार्टियों को स्टेटस सिंबल नहीं मानते , कारन चिलम तम्बाकू सिगार के नलिकाओं से गुजरता नशा अब नशों तक जा चूका है रेव पार्टियों में एल एस डी ड्रग्स हशीन कोकीन से भी बढकर नशा कोबरा डंक तक गहरा चूका है ! आज हमारे समाज में युवा पीढ़ी को नशे के ओर अग्रसर होते देख किसे दुःख नहीं होता | दुर्भाग्य से पिछले पांच से दस सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है | कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं | 
आजकल के कालेज लाइफ में ये रोग हमारी युवा पीढ़ी को इस प्रकार लग गया है कि अनेको घर के बच्चे बर्बादी की कगार पे पहुँच गए है घर वालो को तब पता चलता है जब वो पूरी तरह लिप्त हो जाते है इससे जादा गंभीर परिणाम यहाँ तक देखने को मिला है कि नशे कि लत पूरी करने के लिए राहजनी ,चोरी इत्यादि करने लगते है कालेज में लड़कियां भी खुद को स्मार्ट बताने के लिए भी नशे का सहारा ले रही है .हमारे और आपके बच्चे जब इसके शिकार हो सकते हैं | हर कोई इस बुरी लत से अपने बच्चों और अन्य सदस्यों को बचाना चाहेगा | खुद नशे की लत के शिकार कुछ लोग यही चाहते हैं की किसी तरह से इस लत से छुटकारा मिल जाए परन्तु उनका इस पर कोई वश नहीं | नशा व्यक्ति की रगों में पहुँच कर व्यक्ति को अपना गुलाम बना लेता है व्यक्ति मानसिक रूप से पंगु हो जाता है |
यदि हर माँ बाप को यह भान हो जाये जिनका बच्चा नशा कर रह है | तो शायद कुछ जिंदगियां बचा सकें मेरा अभिप्राय केवल इंतना है | कि घरवालों को इसकी खबर ही नही लग पाती कि कब और कैसे उनके परिवार का सदस्य नशा करने लग गया है | नशे की लत्त को छुड़ाने के लिय सरकार ने नशा मुक्ति केन्द्र खोल रखे हैं | पता चलते ही वहां से मदद लेनी चाहिए | यथासंभव यह प्रयास करना चाहिये जो कि नशा मुक्ति के लिए सीधा और सरल रास्ता है | मेरा (Rajesh Mishra) यह लेख उन लोगो के लिए है जो नशा छोड़ना चाहते है लेकिन छोड़ नही पाते नशे का संबंध मन मस्तिष्क से है |


शराब पीना और विशेषरूप से धूम्रपान के साथ शराब पीना बहुत ही खतरनाक है | इससे अनेकों रोग जैसे कैंसर (मुह का ), महिलाओं में स्तन कैंसर, आदि रोग होते है | ऐसे बुरे व्यसन (आदत) एक मानसिक बीमारी है और इसे को छुडाने के लिए मानसिक बीमारी जैसे इलाज की आवश्यकता होती है | वात होने पर लोग चिंता और घबराहट को दबाने के लिए धूम्रपान का सहारा लेते है | पित्त बढने से शरीर के अन्दर गर्मी लेने की इच्छा होती है और धूम्रपान की इच्छा होती है | कफ बढने से शरीर के अन्दर डाली गयी तम्बाकू की शक्ति बढती है |
लेकिन आप इसका इलाज आयुर्वेद के माध्यम से कर सकते है और इसे बनाने के लिए 18-20 जड़ी – बूटियों का प्रयोग किया जाता है | सभी औषधियों को निश्चित मात्रा में मिलाकर यह दवा तैयार की जाती है | इस दवा का कोई बुरा प्रभाव नहीं है यदि इसे शरीर के वजन और स्वास्थ्य अनुसार दवा की मात्रा तयकर लिया जाता है | इस दवा का प्रयोग किसी का शराब का नशा छुड़ाने, धूम्रपान का नशा छुड़ाने, और अन्य का नशा छुड़ाने (जैसे गुटका, तम्बाकू) में प्रयोग किया जा सकता है |

जड़ी – बूटियों का विवरण और मात्रा निम्न है :-

गुलबनफशा- 2 ग्राम
निशोध - 4 ग्राम
विदारीकन्द (कुटज) – 15 ग्राम
गिलोय – 4 ग्राम
नागेसर - 3 ग्राम
कुटकी - 2 ग्राम
कालमेघ - 1 ग्राम
भ्रिगराज – 6 ग्राम
कसनी - 6 ग्राम
ब्राम्ही – 6 ग्राम
भुईआमला - 4 ग्राम
आमला - 11 ग्राम
काली हरर - 11 ग्राम
लौंग -    1 ग्राम
अर्जुन - 6 ग्राम
नीम – 7 ग्राम
पुनर्नवा - 11 ग्राम
मेश्श्रीन्गी

कैसे प्रयोग करे :-

उपर दी गयी सभी जड़ी – बूटियों को कूट और पीसकर पाऊडर बना लें । एक चम्मच दवा पाऊडर को एक दिन में दो बार खाना खाने के बाद पानी के साथ ले | इस दवा को खाने में मिलाकर भी दिया जा सकता है | जैसे – जैसे नशे की लत कम होने लगे इस दवा की मात्रा धीरे – धीरे कम कर दे | इस दवा का असर फ़ौरन पता चलने लगता है और लगभग दो माह में पूरी तरह से नशे की लत खत्म हो जाती है लेकिन दवा को कम मात्रा में और 2-3 दिन के अंतर के लगभग ६ माह दे जिससे नशे की लत जड़ से खत्म हो जाए |
ये दवा विज्ञापन वाले बना कर टी वी में आपको ही उलटे सीधे और मनमाने दामो पे बेचते है जबकि आप इसे घर पे ही बना सकते है .

एक और नशा मुक्ति उपाय :-

  • आयुर्वेदिक ओषधि है जिसको आप सब अच्छे से जानते है और पहचानते हैं राजीव भाई ने उसका बहुत इस्तेमाल किया है लोगो का नशा छुड्वने के लिए और उस ओषधि का नाम है अदरक और ये आसानी से सबके घर मे होती है इस अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे और उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो और यह अदरक ऐसे भी अदभुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा जैसे ही इसका रस लाड़ मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका –तंबाकू शराब –बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी सुबह से शाम तक चूसते रहो और आप ने ये 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा .
  • मेरा खुद का अनुभव किया है गुटका छुड़ाने के लिए हमने दो साल पहले इसका उपयोग किया था में पूरा दिन गुटका खाता था और कभी -कभी रात को भी खा के सोता था एक समय ये भी आया जब मुझे खाना खाने में तकलीफ होने लगी तो आप यकीन करे परिक्षण के लिए ये प्रयोग हमने स्वयं पे आजमाया और सिर्फ तीन दिन में ही मुझे गुटके से नफरत होने लगी लेकिन हमने इसे एक माह जारी रखा और तब से आज तक कभी भी मेरा मन नहीं हुआ है .
  • अदरक मैं ऐसे क्या चीज है यह अदरक मे एक ऐसे चीज है जिसे हम रसायनशास्त्र (केमिस्ट्री ) मे कहते है इसे सल्फर !
  • अदरक मे सल्फर बहुत अधिक मात्रा मे है ! और जब हम अदरक को चूसते है जो हमारी लार के साथ मिल कर अंदर जाने लगता है ! तो ये सल्फर जब खून मे मिलने लगता है ! तो यह अंदर ऐसे हारमोनस को सक्रिय कर देता है ! जो हमारे नशा करने की इच्छा को खत्म कर देता है ! और विज्ञान की जो रिसर्च है सारी दुनिया मे वो यह मानती है की कोई आदमी नशा तब करता है ! जब उसके शरीर मे सल्फर की कमी होती है ! तो उसको बार बार तलब लगती है बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि की ! तो सल्फर की मात्रा आप पूरी कर दो बाहर से ये तलब खत्म हो जाएगी ! इसका राजीव भाई ने हजारो लोगो पर परीक्षण किया और बहुत ही सुखद प्रणाम सामने आए है ! बिना किसी खर्चे के शराब छूट जाती है बीड़ी सिगरेट शराब गुटका आदि छूट जाता है ! तो आप इसका प्रयोग करे!
अब आप ये सब नहीं कर सकते है तो होमिओपेथी की भी दवा है लीजिए अब इसके उपयोग का एक दूसरे उपयोग का तरीका भी जाने ...!
  • अदरक के रूप मे सल्फर भगवान ने बहुत अधिक मात्रा मे दिया है ! और सस्ता भी है. इसी सल्फर को आप होमिओपेथी की दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं ! आप कोई भी होमिओपेथी की दुकान मे चले जाओ और विक्रेता को बोलो मुझे सल्फर नाम की दवा दे दो ! वो दे देगा आपको शीशी मे भरी हुई दवा दे देगा और सल्फर नाम की दावा होमिओपेथी मे पानी के रूप मे आती है प्रवाही के रूप मे आती है जिसको हम घोल (Dilution )भी कहते है अँग्रेजी मे .
  • यह पानी जैसे आएगी देखने मे ऐसे ही लगेगा जैसे यह पानी है ये 5 मिली लीटर दवा की शीशी दस या पन्द्रह रूपये की आती है और उस दवा का एक बूंद जीभ पर दाल लो सवेरे सवेरे खाली पेट फिर अगले दिन और एक बूंद डाल लो .ये 3 खुराक लेते ही 50 से 60 % लोग की दारू छूट जाती है और जो ज्यादा पियक्कड है जिनकी सुबह दारू से शुरू होती है और शाम दारू पर खतम होती है वो लोग हफ्ते मे दो दो बार लेते रहे तो एक दो महीने तक करे बड़े बड़े पियक्कड की दारू छूट जाएगी .बस हो सकता है कि दो या तीन महीने का समय लगे . यही सल्फर अदरक मे होता है .और इसका अर्क ही होमिओपेथी की दुकान मे भी उपलब्ध है आप आसानी से खरीद सकते है लेकिन जब आप होमिओपेथी की दुकान पर खरीदने जाओगे तो वो आपको पुछेगा कितनी ताकत (पोटेंसी)की दवा दूँ आप उसको कहे 200 potency की दवा देदो या आप सल्फर 200 कह कर भी मांग सकते है.लेकिन जो बहुत ही पियकर है उनके लिए आप 1000 Potency की दवा ले. अगर समाज सेवा करनी है तो आप 200 मिली लीटर का बोतल खरीद लो एक 150 से रुपए मे मिलेगी और आप उससे 10000 लोगो की शराब छुड़वा सकते हैं.लेकिन साथ मे आप मन को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह बायीं नाक से सांस ले और अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करे.
  • बहुत ज्यादा चाय और काफी पीने वालों के शरीर मे आर्सेनिक (ARSENIC ) तत्व की कमी होती है,उसके लिए आप ARSENIC- 200 का प्रयोग करे.चाय और काफी भी छुट जायेगी .
  • गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी पीने वालों के शरीर मे फास्फोरस (PHOSPHORUS) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप PHOSPHORUS 200 का प्रयोग करे ये गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी इत्यादि छुडा देगा .
  • शराब पीने वाले मे सबसे ज्यादा सल्फर (SULPHUR) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप SULPHUR 200 का प्रयोग करे ये शराब को छुडा देता है लेकिन हो सके तो आप बाज़ार में मिलने वाली अदरक से ही शुरुवात करे आप को इससे ही पूरा लाभ मिल जाएगा ...!

गुरुवार, फ़रवरी 26, 2015

सेक्स में असफलता दूर कैसे करें

They try to enjoy the Real Pleasures of Sex
सेक्स का असली सुख भोगने के लिए इन्हें आजमाएं 

यौन दुर्बलता एक गंभीर समस्या है आज के युग में हमारे प्रदूषित खान -पान की वजह से और स्वयं के गलत हरकतों के कारण युवक-युवतियां असमय ही दुर्बलता के शिकार होते जा रहे है ..और इस तरह की समस्याओं में डॉक्टर के पास जाने से घबराते हैं।

ऐसे में घरेलू उपाय को अपनाकर सेक्स लाइफ को बुस्टअप कर सकते हैं:-

  • आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।
  • लहसुन आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढाता है बल्कि आपकी सेक्स लाइफ को भी बढाता है| ऐसे में अगर आप लहसुन नहीं खा रहे हैं तो आज से ही खाना शुरू कर दीजिये| क्योंकि लहसुन की 2-3 कलियां और प्याज का प्रतिदिन सेवन से यौन- शाक्ति बढ़ती है। ऐसे में अगर आप सप्ताह में दो से तीन बार काले चने से बने खाद्य पदार्थों को प्रयोग में ला रहे है तो आपके लिए यह लाभकारी है|
  • 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।


  • एक सेब में हो सके जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।
  • 15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से ज्यादा शक्तिशाली महसूस करेंगे।
  • कच्चा गाजर या इसका जूस भी यौन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है। हफ्ते में दो बार भिंडी और सहजन खाने से काफी फायदा होता है।
  • 15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। इसे यौन-टौनिक के रूप मे इस्तेमाल करें। इसके अलावा आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करें। http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करें।
  • इसके अलावा आप 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन लें।
  • घी के साथ उड़द की दाल को भूनकर और इसके अंदर दूध को मिलाकर तथा अच्छी तरह से पकाकर इसकी खीर तैयार कर लें। इसके बाद इसमें चीनी या खांड मिलाकर इसका इस्तेमाल करने से वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है तथा संभोग करने की शक्ति भी बढ़ जाती है।
  • 5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें। इस मिश्रण को 7 दिनों तक पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है|http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • 100 ग्राम आंवले के चूर्ण को लेकर आंवले के रस में 7 बार भिगों लें इसके बाद इसे छाया में सूखने के लिए रख दें। इसके सूख जाने के बाद इसको इमामदस्ते से कूट-पीसकर रख लें। रोजाना इस चूर्ण को एक चम्मच लेकर शहद के साथ मिलाकर चाट लें तथा इसके ऊपर से एक गिलास दूध पी लें। इसका सेवन करने से आपकी यौन शक्ति में आई दुर्बलता दूर हो जायेगी|
  • सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे पर
  • रखकर खाएं। इसके प्रयोग से आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी।
  • चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू तथा दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। 
आयुर्वेद में भी क्रियात्मक क्षमता बनाए रखने की बहुत सी दवाएं हैं:-

वसंत मालती:-

स्त्री-पुरूष् दोनों में शारीरिक क्षमता और दुर्बलता, चाहे किसी कारण भी हो, नाशक स्वर्ण तथा मोती युक्त ओैषधि है। ज्वरों के पश्चात के दौर्बल्य में भी अत्यंत उपयोगी है।

वसंत कुसुमाकर:-

बलवर्घक, कामोत्तेजक, मधुमेह नियंत्रक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसमें सोना, मोती, कस्तूरी, चांदी आदि प्रयुक्त होते हैं।http://www.rajayurved.blogspot.in/

वसंत तिलकरस:-

विशेष् रूप से पुरूष् द्वारा उपयुक्त बलवर्घक वाजीकरण तथा कामोद्दीपक, स्वर्णमुक्ता आदि प्रधान औष्धियां हैं। वृहऊंगेश्वस, वंगेश्वर दोनों ही मूल्यवान दवाइयां हैं। स्त्रियों के जननांगों के रोगों, श्वेत प्रदर, कामशीतलता आदि तथा पुरुषों के दुर्बलता शीघ्रपतन, शुक्रमेह आदि में लाभदायक दवाएं हैं।

शक्रवल्लभ रस:-

पुरुषों द्वारा अधिक सेवनीय बलवर्घक पौष्टिक उत्तेजक वाजीकर औष्ाधियां हैं। इसमें भी सोना, मोती आदि मूल्यवान दवाएं डाली जाती हैं।http://www.rajayurved.blogspot.in/

शतावरी मोदक:-

प्रमुख रूप से स्त्रियों द्वारा सेवन की जाने वाली यह औषधि शक्तिवर्घक स्तन रोग नाशक जननांगों के प्रदरों व गर्भाशय शिथिलता नाशक है।http://www.rajayurved.blogspot.in/

शिलाजीत शुद्ध:-

स्त्रियों व पुरुषों के सभी रोगों में उपयोगी। निरंतर प्रयोग से सभी रोग होने से रोकता है। बुढ़ापा थामता है दीर्घजीवन देता है।

शुक्रमातृकावटी व शिवा गुटिका:-

अधिकतर पुरुषों को वीर्यविकारों, मूत्ररोगों, वायुविकारों, प्रोस्टेट वृद्धि आदि में दिया जाता है। शिव गुटिका स्त्रियों के कमरदर्द, थकान और मूत्र रोगों में उपयोगी है।http://www.rajayurved.blogspot.in/
मदनानंद मोदक, नारी गुटिका, कौंचपाक, मूसलीपाक, मदनमोदक ये दवाइयां पुरुषों द्वारा विशेष कर यौन शक्ति वृद्धि बनाए रखने व पूरे वर्ष के लिए पुष्टि प्रदान के लिए प्रयुक्त होती है। इनमें कुछ नशीले पदार्थ भांग, अफीम आदि में प्रयुक्त किए जाते हैं। कामेश्वर, कामचूड़ामणि, मन्मथ रस ये स्त्री व पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है। शक्ति, बल सामथ्र्य तथा कार्यक्षमता वर्घक बलवर्घक दवाइयां हैं।ये सामान्यत: नीम-हकीम तथा बिना चिकित्सक के परामर्श से इनका प्रयोग नौजवान लड़के ज्यादा करते हैं।
रतिवल्लभ मूंगपाक, सौभाग्यशुंठी ये दोनों दवाइयां मुख्यत: स्त्रियों के सेवनार्थ बनी हैं। प्रथम ये दवाये जननांगों को शक्ति, पुष्टि संकोच, गर्भाधान योग्य बनाती हैं। सोहाग सोंठ प्रसव के बाद की दुर्बलता, पीड़ा कमरदर्द, थकान, ज्वर को मिटाती है। आयुर्वेद में कामोत्तेजक, स्तंभक, वाजीकरण शक्तिवर्घक तथा स्त्री के स्त्रीत्व को पुष्पित और प्रशस्त रखने वाली दवाओं की कमी नहीं है।

कमर दर्द को आसान बनाये "आसन"


Make it easy to Back Pain (Backache)  "posture"

काम चाहे घर में हो या ऑफिस में, कार्य चाहे खडे़ रहकर करने का हो या बैठकर करनेका अक्सर कमर में दर्द हो ही जाता है। कमर दर्द की वजह से आपको बड़ी परेशानी होती है। महिलाओं में कमर दर्द एक आम समस्या हो गई है। खासकर कामकाजी महिलाएं तो इस समस्या के साथ जीने की आदी दिखती हैं। जब इससे बचने और उससे मुक्ति के उपाय बेहद आसान हैं तो क्यों इस समस्या से जूझा जाए। राजेश मिश्रा बता रहे हैं इससे मुक्ति के उपाय -
कमर दर्द के कई कारण होते हैं यथा- सर्जिकल डिलेवरी, सोने, उठने-बैठने के गलत नियम आदि। परन्तु आजकल जो ज्यादातर मामलों में कमर दर्द देखने में आ रहा है उसका कारण है ऊंची हील वाली चप्पलें पहनना। जो आज का प्रमुख फैशन भी है।

क्यों होता है कमर में दर्द

डाक्टर हमेशा से ऊंची एड़ी वाली चप्पलें व सैंडिल पहनने से बचने की सलाह देते आ रहे हैं। फैशन के चलते उनकी सलाह सुनना कोई पसंद नहीं करता है। हर किसी महिला को शारीरिक बढ़ाने हेतु इस तरह की चप्पलें व सैंडिल अधिक भाती हैं। एस्ट्रोजन हार्मोंस भी इस दर्द के लिये जिम्मेदार होता है। होता यह है कि चालीस-पैंतालीस वर्ष के उपरांत महिलाओं में मासिक चक्र लगभग बंद हो जाता है जिससे रीढ़ की हड्डी में कठोरता आने व कमर के आसपास चर्बी जम जाने से यह दर्द शुरू हो जाता है। एस्ट्रोजन की कमी यानि शरीर में कैल्शियम की कमी को दर्शाता है जिससे ओस्टियोपोरेसिस नामक रोग होता है जो हड्डी से जुड़ा रोग है।

अन्य कारण

उठने बैठने के गलत तरीके या झटकेदार तरीके से उठने बैठने के कारण कभी रीढ़ की डिस्क खिसक जाती है। इसके अलावा ज्यादा आरामतलब जिंदगी तथा कुछ घातक बीमारियां भी इस रोग की जनक मानी जाती है। प्रायः पीछे के पॉकेट में मोटी पर्स या मोबाइल रखना लड़कियां फैशन समझती हैं, पर यह भी कमर दर्द के लिए सबसे बड़ा कारण बन जाता है। 

छुटकारा पाने के लिये क्या करें

छुटकारा पाने के लिये सर्वोत्तम उपाय प्राकृतिक चिकित्सा ही है। योग अपनाकर कमर को लचीला बनाया जा सकता है जिससे कमर दर्द में राहत मिल सकती है। तात्कालिक राहत के लिये प्रचलित चिकित्सा पध्दति जैसे एलौपैथिक, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, बायोकेमिक जैसी अन्य पध्दतियों को भी साथ में अपना सकते हैं।.

दर्द से मुक्ति के लिये योग करें

कमर दर्द में नीचे दिये जा रहे चार आसन अति उपयोगी हैं। इन्हें आजमाइये और दर्द से छुटकारा पाइये।

शलभ आसन

1. इस आसन को करने के लिये सर्वप्रथम पेट के बल लेट जाइये।
2. अब दोनों हाथों को अपनी जांघ के नीचे रविये।
3. श्वांस अंदर भरते हुए पहले दाहिने पैर को बिना मोड़े धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाइये कुछ सेकेंड रुककर दाहिने पैर को उसी स्थिति में रखे हुए बायें दो दाहिने पैर की तरह ऊपर की ओर उठाइये। ध्यान रखिये कि हर स्थिति में आपको ठोड़ी जमीन से जुड़ी रहनी चाहिये। श्वांस छोड़ते हुए पूर्ण स्थिति में आइये।
4. आप अपनी क्षमतानुसार क्रम को दोहराइये।

मकरासन

1. पेट के बल लेटकर हाथ की कोहनियों को मोड़कर बिल्कुल सीधे हथेलियों पर ठोड़ी को रखिये।
2. धीरे-धीरे लम्बी श्वांस खींचते हुए दोनों पैर की एड़ियों को कूल्हे से सटाने का प्रयास कीजिए। श्वांस छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आ जाइये।

धनुरासन

इस आसन का सीधा-सा अर्थ है शरीर को मोड़कर धनुष के समान बनाना।
1. पेट के बल लेटकर दोनों पैरों के घुटने को मोड़कर कूल्हे के ऊपर लाकर दोनों हाथों से दोनों पंजों को पकड़िये।
2. श्वांस भरते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठाइये एवं धनुष के समान रचना बनाईये। इस दौरान गर्दन सीधे रखते सामने की ओर देखिए। 
3. क्षमतानुसार रुककर धीरे-धीरे छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में लौट आइये।

भुजंगासन

यानि फन फैलाये सांप के समान आकृति वाला आसन।
1. इसमें भी पहले वाले आसन की तरह पेट के बल लेटकर हथेलियों को छाती के बाजू में रखकर पंजे मिलाते हुए कोहनी को थोड़ा ऊपर उठाकर श्वांस छाती में भरते हुए सिर को ऊपर उठाइये। नाभि जमीन में सटी हो। सिर को पीछे की ओर मोड़िये। थोड़ रुककर पूर्व स्थिति में आ जाइये।

राजेशजी  द्वारा बताये गए ये टिप्स भी आजमाएं और दूसरे लोगों जो ऐसे रोगों से परेशान हैं उन्हें भी बताएं, सभी लाभवान होंगे 

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1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।
4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।
5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।
7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।
8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।
9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।
10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।
11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।
12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।