दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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शनिवार, मई 23, 2015

गर्मी में कैसा हो आपका खान-पान

गर्मी में क्या खाना चाहिए और किस-किस से करें परहेज़
गर्मी के मौसम की दिनचर्या
Summer Routine : Food, water and shelter

गर्मी अनेक समस्याओं के साथ दस्तक दे चुकी है। सावधानी न बरती जाए तो इस मौसम में बीमार पड़ना तय-सा हो जाता है। राजेश मिश्रा बता रहे हैं इस मौसम में अपनी और परिवार की देखभाल करने के उपाय।
गर्मियां हमारे शरीर को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। इस मौसम में बाहरी तापमान बढ़ने से हमारे शरीर का ताप भी बढ़ जाता है, इसलिए हमें ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए, जो शरीर को ठंडा रखे। गर्मियों में हमारा पाचन-तंत्र भी कमजोर पड़ जाता है, इसलिए जरूरी है कि ताजा और हल्का भोजन किया जाए। बढ़ता तापमान संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है, इसलिए इस मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। गर्मियों में अधिक समय घर से बाहर न बिताएं।
बदलती ऋतुओं के अनुसार शरीर में स्वाभाविक रासायनिक परिवर्तन होते हैं और इस परिवर्तन में ऋतूचर्यानुसार खाध्य पदार्थों का सेवन किया जाए तो वात-पित्त-कफ के उभार से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है| यहाँ राजेश मिश्रा करेंगे  गर्मी की ऋतू में अच्छी सेहत के लिए सेहतमंद दिन चर्या की बात -
अल सुबह उठते ही 2-3 गिलास पानी पीना चाहिए| इसके बाद शौच,दन्त सफाई,आसान और प्राणायाम नियमित रूप से करें| अब रात को पानी भिगोये हुए 11  बादाम को छिलके उतारकर पीसकर एक गिलास दूध के साथ पीएं| इसके नियमित प्रयोग से शारीरिक तंदुरुस्ती मिलती है और आंतरिक उष्मा शांत होती है| गर्मी के मौसम में तले भुने,गरिष्ठ और ज्यादा मसालेदार पदार्थों की बजाय फल फ्रूट ,हरी सब्जियों के सलाद और जूस का ज्यादा इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद रहता है| इससे गर्मी की वजह से पसीना होने से होने वाली पानी कमी का पुनर्भरण भी होता रहता है|
ग्रीष्म ऋतू में बाजारू चीजें खाने से बचने की सलाह दी जाती है| इस मौसम में शारीरिक कमजोरी, अपच,  दाद, पेचिश, सीने में जलन, खूनी बवासीर, मुहं की बदबू आदि रोगों से बचने का सरल उपचार भी लिख देता हूँ| खाली पेट,नींबू का रस आंवले का रस और हरे धनिये का रस मिश्री मिलाकर पीने से कई रोगों से बचाव हो सकता है| दोपहर और सांयकालीन भोजन में चावल के साथ अरहर,मूंग,उडद की दाल और हरी पत्तीदार सब्जियों का समावेश करें| छाछ व् दही का सेवन करना हितकारी है| रात का भोजन ना करें तो ज्यादा अच्छा|
गर्मी में घर से बाहर निकलने के पहले 2 गिलास पानी जरूर पी लेना चाहिए| टमाटर, तरबूज, खरबूज, खीरा ककड़ी, गन्ने का रस और प्याज का उपयोग करते रहना चाहिए| इन चीजों से पेट की सफाई होती है और अंदरूनी गर्मी शांत होती है|

गर्मी दूर भगाने के कारगर तरीके-

नींबू पानी- यह गर्मी के मौसन का देसी टानिक है| शरीर में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाने पर एनीमिया, जोड़ों का दर्द, दांतों के रोग, पायरिया, खांसी और  दमा जैसी दिक्कते हो सकती हैं| नींबू में भरपूर विटामिन सी होता है| अत: इन बीमारियों से दूरी बनाए रखने में यह उपाय सफल रहता है| पेट में खराबी होना, कब्ज, दस्त होना में नींबू के रस में थौड़ी सी हींग, काली मिर्च, अजवाइन, नमक , जीरा मिलाकर पीने से काफी राहत मिलती है|

तरबूज का रस- 

तरबूज के रस से एसीडीटी का निवारण होता है| यह दिल के रोगों डायबीटीज व् केंसर रोग से शरीर की रक्षा करता है|

पुदीने का शरबत- 

गर्मी में पुदीना बेहद फायदेमंद रहता है| पुदीने को पीसकर स्वाद अनुसार नमक,चीनी जीरा मिलाएं| इस तरह पुदीने का शरबत बनाकर पीने से लू.जलन, बुखार, उल्टी व गैस जैसी समस्याओं में काफी लाभ होता है|

ठंडाई- 

गर्मी में ठंडाई काफी लाभ दायक होती है| इसे बनाने के लिये खस खस और बादाम रात को भिगो दें|सुबह इन्हें मिक्सर में पीसकर ठन्डे दूध में मिलाएं| स्वाद अनुसार शकर मिलाकर पीएं| गर्मी से मुक्ति मिलेगी|

गन्ने का रस- 

गर्मी में गन्ने का रस सेहत के लिये बहुत अच्छा होता है| इसमें विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं| इसे पीने से ताजगी बनी रहती है| लू नहीं लगती है| बुखार होने पर गन्ने का रस पीने से बुखार जल्दी उतर जाता है| एसीडीटी की वजह से होने वाली जलन में गन्ने का रस राहत पहुंचाता है| गन्ने के रस में नीम्बू मिलाकर पीने से पीलिया जल्दी ठीक होता है| गन्ने के रस में बर्फ मिलाना ठीक नहीं है|

छाछ - 
गर्मी के दिनों में छाछ का प्रयोग हितकारी है| आयुर्वेद शास्त्र में छाछ के लाभ बताए गए हैं| भोजन के बाद आधा गिलास छाछ पीने से फायदा होता है| छाछ में पुदीना ,काला नमक,जीरा मिलाकर पीने से एसीडीटी की समस्या से निजात मिलती है|

खस का शरबत - 

गर्मी में खस का शरबत बहुत ठंडक देने वाला होता है| इसके शरबत से दिमाग को ठंडक मिलती है| इसका शरबत बनाने के लिये खस को धोकर सुखालें| इसके बाद इसे पानी में उबालें| और स्वाद अनुसार शकर मिलाएं| ठंडा होने पर छानकर बोतल में भर लें|

सत्तू - 

यह एक प्रकार का व्यंजन है| इसे भुने हुए चने , जोऊं और गेहूं पीसकर बनाया जाता है| बिहार में यह काफी लोकप्रिय है| सत्तू पेट की गर्मी शांत करता है| कुछ लोग इसमें शकर मिलाकर तो कुछ लोग नमक और मसाले मिलाकर खाते हैं|

आम पन्ना - 

कच्चे आम को पानी में उबालकर उसका गूदा निकाल लें| इसमें शकर, भुना जीरा, धनिया, पुदीना, नमक मिलाकर पीयें| गर्मी की बीमारियाँ दूर होंगी|

हर दो घण्टे में 24 आउंस पानी पिएं

लोग अमूमन प्यास लगने पर पानी पीते हैं, जबकि डिहाइड्रेशन से बचने का तरीका यह है कि हर 10 मिनट पर पानी पीते रहें और प्यास लगने की नौबत ही न आए। डायटीशियन नीतू चांदना कहती हैं, ‘एक वयस्क व्यक्ति को गर्मी के मौसम में घर से निकलते वक्त 17 से 20 आउंस पानी पीना चाहिए। अगर खाली पानी न पिया जाए तो जूस या सूप के रूप में लिक्विड ले लें।’
जितनी देर बाहर रहें, हर 10 मिनट पर 7 से 10 आउंस पानी लेते रहें। ध्यान रहे कि हर दो घण्टे में शरीर को 24 आउंस पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा अगर सिर दर्द या शरीर में खिंचाव महसूस हो तो भी तुरंत पानी पिएं। पानी के अलावा सोडियम, पोटेशियम और नमक की कमी से भी डिहाइड्रेशन होता है, इसीलिए नमक खूब खाएं। फलों या स्नैक्स पर नमक ऊपर से डाल कर खाएं। सोडियम और पोटैशियम के लिए तरबूज, लीची, दही खाएं।

अदरक, काली मिर्च, तुलसी खाएं

नीतू सलाह देती हैं कि खाने में तुलसी की पत्ती और तुलसी के बीज का इस्तेमाल करें। तुलसी शरीर के लिए एक तरह से एंटीसेप्टिक का काम करती है। इसके अलावा सब्जी की ग्रेवी में भुना बेसन डालें, ये दोनों ही चीजें शरीर को ठंडा रखती हैं। खाने में प्याज, अदरक, काली मिर्च और लहसुन की मात्र बढ़ा दें। ये मसाले खून को साफ रखते हैं और इन्हें खाने से चूंकि पसीना निकलता है, इसलिए शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है। एलर्जी और फूड प्वाइजनिंग जैसी बीमारियां अपनी गिरफ्त में नहीं लेतीं।

चीनी कम, शहद ज्यादा

खान-पान में मिठास जितनी ज्यादा होगी, शरीर को ऊर्जा उतनी ही मिलेग, इसलिए ऐसी चीजें खाएं, जो अच्छा कार्बोहाइड्रेट दे सकें। लेकिन चीनी से परहेज करें, क्योंकि चीनी शरीर को खराब कार्बोहाइड्रेट देती है, जिससे ऊर्जा तो मिलती है, मगर पाचन संबंधी शिकायत भी हो जाती है। चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल करें। इससे आपके शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बनेगा। आप ग्रीन टी या दूध में शहद मिला कर पी सकते हैं। ऐसे फल खाएं, जिनमें ग्लूकोस का अंश हो। संतरा, मौसमी, लीची ऐसे ही फल हैं।

गर्मियों में क्या खाएं

मौसमी फल और सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करें। गर्मियों में मिलने वाली सब्जियां मुलायम, गूदेदार और नमी से भरपूर होती हैं, जो इस मौसम के लिहाज से बिल्कुल उपयुक्त होती हैं। ये सभी सब्जियां ठंडी तासीर वाली, पचने में आसान और उन सभी पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो इस गर्म और आर्द्र मौसम से शरीर का तालमेल बैठाने के लिए जरूरी हैं। लौकी, करेला, तोरी, कद्दू, खीरा, टिंडा, परमल, भिंडी, चौलाई जैसी गर्मियों की सब्जियों का सेवन करें। खीरा, पुदीना, तरबूज, मौसमी का सेवन भी करें। ये प्यास बुझाने वाले होते हैं, क्योंकि इनमें सोडियम और कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और एंटी ऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम और विटामिन ए काफी मात्रा में होते हैं। आम और दही भी कूलिंग वाले भोजन हैं। इनमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है।
प्याज में क्वेरिस्टिंग होता है, जो गर्मी से त्वचा पर पड़ने वाले रैशेज में आराम पहुंचाता है। तरबूज और खरबूजे में करीब 90 प्रतिशत पानी होता है और ये पचने में भी आसान होते हैं। गर्मियों में आने वाले इन फलों का सेवन जरूर करें। इस मौसम में अंगूर भी खूब आते हैं, जिनका सेवन काफी फायदेमंद होता है। इनमें लायकोपीन होता है, जो त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों के हानिकारक प्रभाव से बचाता है।
खाने के साथ सलाद जरूर खाएं। कच्ची सब्जियों से जरूरी एंजाइम मिलते हैं, जो शरीर को भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण करने में मदद करते हैं। शरीर जितने पोषक तत्वों का अवशोषण करेगा, उतना ही स्वस्थ रहेगा। सलाद फाइबर से भरपूर होने के कारण पाचन-तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

क्या न खाएं

  1. कैफीन से दूर रहें। इससे डीहाइड्रेशन बढ़ता है। 
  2. अधिक वसायुक्त और भारी भोजन न खाएं।
  3. तले हुए और मसालेदार भोजन से दूर रहें।
  4. बासी और गंदे माहौल में बना खाना न खाएं।
  5. प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से बचें।
  6. मिठाइयां कम से कम खाएं।

बढ़ा दें तरल पदार्थों का सेवन

गर्मी में हमारे शरीर को काम करने के लिए बहुत कम मात्रा में ऊष्मा की आवश्यकता होती है, इसलिए इस मौसम में हमें खाना कम खाना चाहिए और तरल पदार्थ ज्यादा लेने चाहिएं। डॉंक्टरों का कहना है कि गर्मियों में हमें अपने भोजन को खाना नहीं, पीना चाहिए। रोजाना तीन से चार लीटर पानी पिएं। इसके अलावा जूस, छाछ, लस्सी, नींबू पानी, नारियल पानी और आम पना का सेवन भी करें। डिब्बाबंद जूस का सेवन करने से बचें।

फलों, सब्जियों, दूध, ग्रीन टी और जूस में भी काफी मात्रा में पानी होता है। जो लोग इन चीजों का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, उन्हें ज्यादा मात्रा में पानी की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए अगर आपको बार-बार पानी पीना पसंद नहीं है तो अपने डाइट चार्ट में उन चीजों की मात्रा बढ़ा दें।

गर्मियों में जल्दी खराब हो जाता है खाना

इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, इसलिए फूड पॉयजनिंग, डायरिया और उल्टी-दस्त के मामले अत्यधिक बढ़ जाते हैं। अधिकतर लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखी सब्जियां, फल और खाना लंबे समय तक खराब नहीं होता, जो गलत है। कच्ची सब्जियों और फलों को 2 से 4 दिन से अधिक समय तक न रखें।

डीहाइड्रेशन और संक्रमण से बचाव

गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) हो जाती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी होने से लू लगने की आशंका बढ़ जाती है। गर्मियों में घर से बाहर धूप में अधिक समय न बिताएं। इससे शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे थकान, रक्तचाप कम होना, कमजोरी महसूस होना आदि समस्याएं हो सकती हैं। पानी के अलावा आप नारियल पानी, नींबू पानी, बेल के शरबत आदि से भी अपने शरीर में शीतलता बनाये रख सकते हैं। अपने युरिन के रंग पर नजर रखें। गहरे रंग का युरिन डीहाइड्रेशन की निशानी है। उसका रंग हल्का रखने के लिए अधिक मात्रा में पानी पिएं।
गर्मी के मौसम में दूषित जल पीने व बाहर के कटे-खुले खाद्य पदार्थ खाने के कारण हैजा, टाइफाइड, पीलिया, आंतों में सूजन व अनेक प्रकार के संक्रमणों के मामले बढ़ जाते हैं। कई बार अधिक खाना भी फूड पॉयजनिंग का कारण बन जाता है। घर पर बना सादा और सुपाच्य भोजन ही करें। बाहर खाने से बचें। कभी मजबूरी में बाहर खाना भी पड़े तो ऐसे रेस्तरां से खाएं, जहां ताजा और हाइजनिक खाना मिले।

रहें ऊर्जा से भरपूर

अपने दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करें। कम वसा वाला भोजन खाएं और ताजे फलों का रस पिएं। तले हुए और मसालेदार भोजन से बचें। अल्कोहल व कैफीन का सेवन कम करें, क्योंकि इनसे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और आप सुस्ती अनुभव करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

  • सब्जियों, फलों और बचे हुए खाने को तुरंत फ्रिज में रख दें।
  • फ्रिज का तापमान बहुत महत्वपूर्ण है। यह पांच डिग्री सेल्सियस से कम और फ्रीजर का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
  • कच्चे और पके हुए मांस तथा सी फूड को ज्यादा समय तक स्टोर न करें, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।
  • यह जांचने के लिए कि भोजन सही है या नहीं, उसे चखना नहीं चाहिए, क्योंकि कई बार यह बेहद नुकसानदेह साबित होता है।
  • दूध और दुग्ध उत्पादों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर न रखें।
  • बचे हुए खाने को ज्यादा समय तक रेफ्रिजरेटर के बाहर न रखें। दोबारा सेवन करने से पहले उसे ठीक से गर्म कर लें।
  • एक्सपाइरी डेट के खाद्य पदार्थों का सेवन कतई न करें।
  • उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।

Seasonal Foods