दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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सोमवार, फ़रवरी 22, 2016

60 के बाद भी चुस्त और तंदुरुस्त रहने का फंडा

बुढ़ापे में लुत्फ़ उठायें "राज" के साथ 

सेवानिवृत्ति के बाद खासकर कामकाजी महिलाओं के जीवन में कई समस्याएं आती हैं। वे घर में कैद होने के एहसास से भी परेशानियां महसूस करने लगती हैं। इन बदलावों को समझ लिया जाए तो काफी परेशानियां दूर हो जाती हैं। बता रहे हैं राजेश मिश्रा.... 

सेवानिवृत्ति इंसान के जीवन का एक ऐसा पड़ाव है जहां से पूरी जिंदगी ही बदल जाती है। सेवानिवृत्ति के बाद नियमित रूप से घर से निकलना संभव नहीं होता। इसलिए जरूरी है कि सेवानिवृत्ति के बाद स्थितियों को देखते हुए और अपनी क्षमता के अनुसार जीवनशैली का चुनाव करें और खानपान का ख्याल रखें।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान, दिल्ली के मनोचिकित्सक, डॉ. तेजबहादुर बताते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद लोग जिस चीज को लेकर सबसे ज्यादा घबराते हैं वह है अपनी भागीदारी न होना, सहकर्मियों से दूर होना और आय में कमी। सेवानिवृत्ति के बाद सबसे बड़ी समस्या अहमियत की होती है। नौकर-चाकर नहीं होते, गाड़ी-बंगला भी वापस हो जाता है। ये स्थितियां बर्दाश्त नहीं होती हैं। इससे बचने के लिए सेवानिवृत्ति से पहले ही दिमागी तौर पर तैयार हो जाना चाहिए। और जहां तक आर्थिक स्थिति की बात है, उसकी तैयारी भी पहले से कर लेनी चाहिए। इसके अलावा समाज में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए अपनी क्षमताओं के अनुसार जीवनशैनी का चुनाव करें।
इस उम्र में आप अपने अनुभव को योजनाबद्ध तरीके से उपयोग करें। इस उम्र में ढेरों काम ऐसे हैं जिनसे आपको अतिरिक्त आय होने के साथ-साथ खालीपन दूर हो सकता है। अपने अनुभव से लोगों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। यदि आपको पढ़ने-लिखने का शौक है तो आपके लिए ढेरों पत्र-पत्रिकाओें के दरवाजे खुले हैं। अगर आप समाज सेवा करना चाहते हैं तो जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा बांटने से अच्छा और कोई काम नहीं हो सकता। इसके अलावा अपने मित्रों या संबंधियों के साथ कोई नया व्यवसाय शुरू सकते हैं। इस उम्र में आपको घरेलू जीवन में भावनात्मक ठेस का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन यह ध्यान में रखना चाहिए कि आपको अपने लिए नहीं, नयी पीढ़ी के लिए भी जीना है।
रिटायरमेंट इंसान के जीवन का ऐसा पड़ाव है, जहां से सब कुछ बदल जाता है। पुरुष तो साठ के बाद किसी न किसी तरीके से घर से बाहर निकलने के रास्ते तलाश लेते हैं, लेकिन बड़ी समस्या महिलाओं के सामने आती है। वे रिटायरमेंट के बाद घर में कैद होकर रह जाती हैं, इसलिए जरूरी है कि नए नजरिए से सोचा जाए।

समय रहते कर लें तैयारी 

सुनीता को ही ले लीजिए, उनकी सेवानिवृत्ति को कुछ ही समय बचा है, इसलिए वो आजकल उदास-सी रहती हैं। कहती हैं, समझ में नहीं आता है कि साठ के बाद अपने आपको कहां और कैसे एंगेज रखूंगी। ये बात सही है कि लम्बे समय तक परिवार और ऑफिस में सक्रिय रहीं महिलाओं की उपयोगिता धीरे-धीरे कम होती जाती है, जो उनके लिए पीड़ादायक साबित होती है।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के मनोचिकित्सक डॉ. तेजबहादुर कहते हैं, सेवानिवृत्ति के बाद लोग जिस चीज से सबसे अधिक डरे रहते हैं, वह है कार्यों में उनकी भागीदारी न होना, सहकर्मियों से विछोह और साधन व आय में कमी। समय रहते ही इन स्थितियों से निपटने की तैयारी कर ली जाए तो सेवानिवृत्ति के बाद आने वाले बदलाव से सहजता से निपटा जा सकता है।
मनोचिकित्सक बताते हैं कि आर्थिक स्थिति को बेहतर रखने की तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए। नौकरी के दौरान नियमित रूप बचत करना जारी रखा जाए तो अच्छा खासा बैंक बैलेंस हो जाता है। और जब बैंक बैलेंस ठीक-ठाक होगा तो घर परिवार में आपकी पूछ बराकर रहेगी। इससे आप साठ के बाद भी आत्मविश्वास से भरे रहेंगे।
इसके अलावा समाज में अपनी स्थित बनाए रखने के लिए जरूरी है कि साठ के बाद अपनी क्षमताओं के अनुसार जीवनशैनी का चुनाव करें। उम्र का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि सेवानिवृत्ति से पहले सभी फैसले उम्र को ध्यान में रखते हुए लिए जाते हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद नजरिया बदलना होगा। अपनी पसंद के अनुसार काम का चयन किया जा सकता है। अपने मनोरंजन के लिए शौक को जिंदा किया जा सकता है।

न बदलें रुटीन

श्रीमती करुणा के लिए सेवानिवृत्ति ही अभिशाप बन गयी। दो साल पहले तक वह बिल्कुल फिट थीं। काम के मामले में अपनी बहुओं तक को मात देती थीं, लेकिन आज वे चलने-फिरने के लिए लाचार हो गयी हैं। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेष डॉ. हरीश मनसुखानी बताते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद अचानक परेशानी आ सकती है, क्योंकि पहले एक नियमित दिनचर्या होती है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद पूरी दिनचर्या बदल जाती है, जो परेशानी का कारण बन जाती है। दूसरी समस्या आती है खानपान के कारण, क्योंकि रिटायरमेंट के बाद खानपान पर पहले की तरह ध्यान नहीं दे पाते। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आती हैं। प्रौढ़ावस्था में होने वाली हड्डियों की प्रमुख बीमारियों में घुटनों, कमर और गर्दन का दर्द आम है। जिस तरह उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अन्य अंगों में परिवर्तन आता है, उसी प्रकार हड्डियां बढ़ने से उनकी बनावट में बदलाव आता है। यदि महिलाएं समय रहते चेत जाएं और रुटीन न बदलें तो आने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है। सेवानिवृत्ति के बाद महिलाओं को सुबह-शाम खाने से पहले 10-10 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए, साथ ही संतुलित भोजन करना चाहिए।
सुनीता को ही ले लीजिए, उनकी सेवानिवृत्ति को कुछ ही समय बचा है, इसलिए वो आजकल उदास-सी रहती हैं। कहती हैं, समझ में नहीं आता है कि साठ के बाद अपने आपको कहां और कैसे एंगेज रखूंगी। ये बात सही है कि लम्बे समय तक परिवार और ऑफिस में सक्रिय रहीं महिलाओं की उपयोगिता धीरे-धीरे कम होती जाती है, जो उनके लिए पीड़ादायक साबित होती है।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के मनोचिकित्सक डॉ. तेजबहादुर कहते हैं, सेवानिवृत्ति के बाद लोग जिस चीज से सबसे अधिक डरे रहते हैं, वह है कार्यों में उनकी भागीदारी न होना, सहकर्मियों से विछोह और साधन व आय में कमी। समय रहते ही इन स्थितियों से निपटने की तैयारी कर ली जाए तो सेवानिवृत्ति के बाद आने वाले बदलाव से सहजता से निपटा जा सकता है।
मनोचिकित्सक बताते हैं कि आर्थिक स्थिति को बेहतर रखने की तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए। नौकरी के दौरान नियमित रूप बचत करना जारी रखा जाए तो अच्छा खासा बैंक बैलेंस हो जाता है। और जब बैंक बैलेंस ठीक-ठाक होगा तो घर परिवार में आपकी पूछ बराकर रहेगी। इससे आप साठ के बाद भी आत्मविश्वास से भरे रहेंगे।
इसके अलावा समाज में अपनी स्थित बनाए रखने के लिए जरूरी है कि साठ के बाद अपनी क्षमताओं के अनुसार जीवनशैनी का चुनाव करें। उम्र का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि सेवानिवृत्ति से पहले सभी फैसले उम्र को ध्यान में रखते हुए लिए जाते हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद नजरिया बदलना होगा। अपनी पसंद के अनुसार काम का चयन किया जा सकता है। अपने मनोरंजन के लिए शौक को जिंदा किया जा सकता है।

दिनचर्या बदलने पर अाता है बदलाव

सेवानिवृत्ति के बाद अचानक शारीरिक परेशानी आ सकती है। क्योंकि पहले एक नियमित दिनचर्या थी, पूरा दिन भागादौड़ी में गुजरता था, लेकिन बदली दिनचर्या और बंद हुई भागदौड़ परेशानी का कारण बन जाती है। प्रौढ़ावस्था में होने वाली हड्डियों की प्रमुख बीमारियों में घुटनों, कमर और गर्दन का दर्द शामिल है। जिस तरह उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अन्य अंगों में परिवर्तन आता है, उसी प्रकार हड्डियां बढ़ने से उनकी बनावट में बदलाव आता है। यह परिवर्तन 40-45 साल के बाद शुरू हो जाता है। रिटायरमेंट के बाद खानपान का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी है। उम्र बढ़ने के साथ खानपान में परिवर्तन की जरूरत होती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता दुरुस्त रहे।
  • सुबह-शाम कम से कम 10-10 मिनट एक्सरसाइज करें। टहलें जरूर।
  • पर्याप्त कैल्शियम वाला भोजन करें। हरी सब्जियों की मात्रा अधिक रखें।
  • ब्लडप्रेशर, शुगर की जांच नियमित करायें। कोई समस्या हो तो समय पर उपचार कराएं।
  • अचानक गर्म से ठंड में या ठंड से गर्म में जाने से बचें। ऐसा करने से जोड़ों का दर्द हो सकता है।
  • घुटनों में दर्द होने पर नमक मिले गर्म पानी में तौलिया भिगोकर सिकाई कर सकते हैं।
  • डॉक्टर व फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह पर एक्सरसाइज कर सकते हैं। दर्द निवारक दवा अधिक नहीं लेनी चाहिए।
  • 60 के बाद जल्दी-जल्दी लेकिन कम-कम मात्र में खाना खाते रहना चाहिए। दिन में छह बार खाने के नियम पर अमल करें। तीन बार भारी और तीन बार हल्का खाना चाहिए।
  • बढ़ती उम्र में कब्ज नुकसानदेय है। इससे बचने के लिए फाइबर युक्त खाना खाना चाहिए, जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहे।
  • खाने में सलाद की मात्र बढ़ानी चाहिए और सेब जैसे फलों को छिलके सहित खाना चाहिए। अगर गाजर या सेब को चबाने में परेशानी होती है तो बारीक काटकर खाया जा सकता है।
  • चोकर वाला आटा, गेंहू, जौ का दलिया आदि खाने में शामिल करना चाहिए।
  • हरे पत्ते वाली सब्जियां, स्प्राउट, कमल ककड़ी और दालें पर्याप्त मात्र में खानी चाहिए। विटामिन सी वाले फल जैसे आंवला, नींबू, टमाटर, केला, अंगूर, चीकू और खट्टे फल नियमित रूप से खाने चाहिए।
  • उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, इसलिए कैल्शियल वाली चीजें, जैसे योगर्ट, मछली, सोया मिल्क, दूध और दूध से बने उत्पाद आदि का सेवन करना चाहिए।

क्या न खाएं

  1. पॉलिश वाले अनाज, मैदा, नूडल्स, आलू, साबुत दालें आदि खाने से बचना चाहिए और रात में इन चीजों से बिल्कुल परहेज करना चाहिए।
  2. तली चीजें न खाएं, जैसे समोसा, ब्रेड पकौड़ आदि। इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेबल बढ़ जाता है।
  3. इस उम्र में शुगर वाली चीजें खाने से परहेज करें। इससे ग्लूकोज का लेबल बढ़ता है

Seasonal Foods