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गुरुवार, जनवरी 21, 2016

दही खाने के 25 फायदे

दही के हज़ार गुण! - दही खाओ निरोगी रहो

Benefits of Dahi (Yogurt)

खाने में आप दही को किस नाम से पुकारते है "राज"- दही या कर्ड या कर्डस या योघर्ट? जितना आप पढ़ेंगे उतना आप महसूस करेंगे कि "राजेश मिश्रा" ने यह नाम कितना आसानी से लिया है। जिस भी नाम से आप पुकारें, यह फ्रिज़ में रहनेवाला सबसे हैण्डी फूड है। अमेरिका के आहार विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला है कि दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती हैं तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं। खान-पान में ऐसी कई चीजें शामिल हैं, जिनमें खूबसूरती और स्वास्थ्य का खजाना छिपा होता है। दही भी एक ऐसा ही खजाना है, जिसका उपयोग हर तरह से फायदेमंद है।
यह माना जाता है कि मानव भोजन में पिछले 4500 सालों से दही का प्रयोग होता रहा है .
दूध में लैक्टोबेसिल्स बुलगारिक्स बैक्टीरिया को डाला जाता है, इससे शुगर लैक्टीक एसिड में बदल जाता है। इससे दूध जम जाता है और इस जमे हुए दूध को दही कहते हैं। दूध के मुकाबले दही खाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है। दही में कैल्सियम को एसिड के रूप में समा लेने की भी खूबी होती है। रोज 300 मि.ली. दही खाने से आस्टियोपोरोसिस, कैंसर और पेट के दूसरे रोगों से बचाव होता है। 
डाइटिशियन के मुताबिक दही बॉडी की गरमी को शांत कर ठंडक का एहसास दिलाता है। फंगस को भगाने के लिए भी दही का प्रयोग किया जाता है। 
बीमारियां भगाता है दही :आज की भागदौड की जिंदगी में पेट की बीमारियों से परेशान होने वाले लोगों की संख्या सब से ज्यादा होती है। ऎसे लोग यदि अपनी डाइट में प्रचूर मात्रा में दही को शामिल करें तो अच्छा होगा। दही का नियमित सेवन करने से शरीर कई तरह की बीमारियों से मुक्त रहता है। दही में अच्छी किस्म के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं। पेट में मिलने वाली आंतों में जब अच्छे किस्म के बैक्टीरिया का अभाव हो जाता है तो भूख न लगने जैसी तमाम बीमारियां पैदा हो जाती हैं। इस के अलावा बीमारी के दौरान या एंटीबायटिक थेरैपी के दौरान भोजन में मौजूद विटामिन और खनिज हजम नहीं होते। इस स्थिति में दही सबसे अच्छा भोजन बन जाता है। यह इन तत्वों को हजम करने में मदद करता है। इससे पेट में होने वाली बीमारियां अपनेआप खत्म हो जाती हैं। दही खाने से पाचनक्रिया सही रहती है, जिससे खुलकर भूख लगती है और खाना सही तरह से पच भी जाता है। दही खाने से शरीर को अच्छी डाइट मिलती है, जिस से स्किन में एक अच्छा ग्लो रहता है।
इन्फेकशन से बचाव: मुंह के छालों पर दिन में 2-4 बार दही लगाने से छाले जल्द ही ठीक हो जाते हैं। शरीर के ब्लड सिस्टम में इन्फेक्शन को कंट्रोल करने में वाइट ब्लड सेल्स का महत्तवपूर्ण योगदान होता है। दही खाने से वाइट ब्लड सेल्स मजबूत होते हैं, जो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। 
बढती उम्र के लोगों को दही का सेवन जरूर करना चाहिए। जो लोग लंबी बीमारी से लड रहे होते हैं, उन्हे दही अवश्य खाना चाहिए। दही उनके लिए बहुत फायदेमंद होता है। सभी डायटीशियन एंटीबायटिक थेरैपी के दौरान दही का नियमित सेवन करने की राय देते हैं। दही के सेवन से हार्ट में होने वाले कोरोनरी आर्टरी रोग से बचाव किया जा सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि दही के नियमित सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रोल को कम किया जा सकता है।
सबके लिए लाभकारी: दही एक प्रिजर्वेटिव की तरह काम करता है। दही खमीरयुक्त डेयरी उत्पाद माना जाता है। पौष्टिकता के मामले में दही को दूध से कम नहीं माना जाता है। यह कैल्सियम तत्व के साथ ही तैयार होता है। कार्बोहाइडे्रट, प्रोटीन और फैट्स को साधारण रूप में तोडा जाता है। इसलिए दही को प्री डाइजेस्टिक फूड माना जाता है। दही को छोटे बच्चों के लिए भी उपयुक्त होता है। जोलोग किसी कारण लैक्टोस यानी शुगर मिल्क का सेवन नहीं कर पाते वे भी दही का सेवन कर सकते हैं। शुगर लैक्टीेक एसिड में बंट जाती है। बैक्टीरिया भी कैल्सियम और विटामिन बी को हजम करने में मदद करता है। 
अगर मीठा दही खाना हो तो इसमें चीनी की जगह पर शहद या ताजा फलों को मिलाया जा सकता है। दही और छाछ गरमी को अंदर और बाहर दोनों तरह से बचाता है। दही तपती धूप का प्रकोप रोकने में भी सहायक है। ठंडे या फ्रिज में रखे दही का सेवन नहीं करना चाहिए। सदैव ताजा दही का ही सेवन करना चाहिए।
1) दही बालों के लिए एक बेहतरीन कंडीशनर है , दही बालों में जड़ से लगायें और 15-20 मिनट लगे रहने दें फिर बाल धुल लें . यह उपाय बालों की रूसी ,रूखापन दूर कर बालों को चमकदार और मुलायम बनाता है.
2) बालो में अगर रूसी ज्यादा है तो दही में काली मिर्च पाउडर मिलाकर बालों की जड़ो में लगायें ,थोड़ी देर लगे रहने के बाद धो लें.
3) दही में काली मुल्तानी मिटटी मिलाकर बालों में लगायें ,यह शैम्पू का काम करता है साथ ही बालों को झड़ने से भी रोकता है.
4) दही में बेसन, चन्दन पाउडर और थोडा सा हल्दी मिलकर उबटन चेहरे और शरीर पर लगायें ,सूखने पर छुड़ा लें. आप की त्वचा पर बेहतरीन चमक,निखार और स्निग्धता आएगी.
5) अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो दही -शहद मिलाकर चेहरे पर लगायें, यह उपाय चेहरे के अतिरिक्त तैलीय तत्व को दूर करता है .
6) चेहरे पर होने वाले दानो और मुहांसों के उपचार के लिए खट्टी दही का लेप चेहरे पर लगायें सूखने पर धोएं, फायदा होगा .
7) आयुर्वेद के अनुसार गाय के दूध से बनने वाला दही बलवर्धक, शीतल, पौष्टिक, पाचक और कफनाशक होता है.
8) भैंस के दूध से बनने वाला दही रक्त, पित्त, बल-वीर्यवर्धक, स्निग्ध, कफकारक और भारी होता है.
9) मख्खन निकाला हुआ दही शीतल, हल्का, भूख बढानेवाला, वातकारक और दस्त रोकने वाला होता है.
10) दही में कैल्सियम सबसे ज्यादा होता है जोकि हड्डी ,दांत ,नाखून आदि का विकास और संरक्षण करता है.
11) दही में कैल्सियम के अतिरिक्त विटामिन A, B6, B12 ,प्रोटीन, राइबोफ्लेविन पोषक तत्त्व पाए जाते हैं.
12) दही शरीर में श्वेत-रक्त कणिकाओं (White Blood Corpuscles) की संख्या बढाता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता का तेजी से विकास होता है.
13) एंटीबायोटिक दवाइयों के सेवन के दुष्प्रभाव से बचने के लिए दही सेवन की सलाह डाक्टर भी देते हैं.
14) दही पेट के लिए अमृत समान माना गया है , दही आंतों और पेट की गर्मी दूर करता है और पाचन तंत्र को सबल बनाता है.
15) ह्रदय रोग ,हाई ब्लड प्रेशर ,गुर्दे की बिमारियों में दही का प्रयोग अच्छा माना गया है.
कोलेस्ट्रोल बढ़ने से रक्त-वाहिकाओं में रक्त प्रवाह में अवरोध पैदा होता है, दही कोलेस्ट्रोल बढ़ने से रोकता है.
16) बवासीर के उपचार के लिए छाछ में अजवायन मिला कर पिए ,लाभ होगा.
सर्दी, खांसी और अस्थमा के रोगियों को दही के सेवन से बचना चाहिए.
17) दही के ऊपर का पानी भी फायदेमंद माना जाता है, इससे दस्त, कब्ज, पीलिया, दमा के रोगियों को लाभ होता है.
18) मुह के छालों के उपचार के लिए दिन में 3-4 बार छालों पर दही लगायें.
19) दही के नुकसानरहित सेवन के लिए दही में काला नमक, सोंठ, पुदीना, जीरा पाउडर मिलाकर खाएं.
20) बहुत से लोगों को दूध आसानी से नहीं पचता है, वो लोग दही सेवन से दूध के सभी पोषक तत्वों को प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि दही सुपाच्य होता है.
21) दही हमेशा ताज़ा ही खाना चाहिए. दही के सेवन से नींद भी बढ़िया आती है.
22) दही से बहुत से बेहतरीन भोज्य पदार्थ बनते है जैसे लस्सी, छाछ, रायता आदि. दही से बहुत तरह के रायता बनाये जा सकते है जैसे ककड़ी, प्याज-खीरा-टमाटर का रायता, बूंदी का रायता, अनानास का रायता आदि. इनका सेवन गर्मियों में लू और डीहाईड्रेशन से बचाता है.
23) जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गरमी दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।
24) हड्डियों के लिए –
दही में calcium की अच्छी मात्रा होती है , जो के हमारे शरीर के हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है | बच्चों को खास कर दही खिलाना चाहिए |
25) हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को रोजाना दही का सेवन करना चाहिए।

गुरुवार, फ़रवरी 26, 2015

दही में है सेहत और खूबसूरती का खजाना

Yogurt : A wealth of health and beauty 
गर्मियों में सेहत का सबसे बड़ा हथियार


दूध से जमनेवाला दही एक रुचिकर और सेहतमंद माध्यम है। दही में अच्छी किस्म के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ मिलता है। आयुर्वेद के मुताबिक गर्मियों में दूध के मुकाबले दही खाने के फायदे बहुत अधिक होते हैं। रोजाना एक कटोरी दही न सिर्फ बीमारियों को दूर रखता है बल्कि शरीर स्वस्थ बनाता है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है।
दही में कैल्सियम को एसिड के रूप में समा लेने की भी खूबी होती है। रोज दही दूध के मुकाबले दही खाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है।
गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है।
दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गरमी दूर हो जाती है। पाचन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है। दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती हैं तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं।
दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढ़ने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न करे और हार्टबीट सही बनी रहे। दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी सहायक है।
दूध की अपेक्षा दही को अधिक लाभकारी माना जाता है। यह प्राचीन काल से ही हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग होता रहा है। पुरानी पीढ़ी के लोग दही को अधिक महत्व देते हैं। इसे बच्चे, युवा, बूढ़े सभी लोग रूचि से खाते हैं। इसमें अन्य खाद्य पदार्थों की अपेक्षा पोषक तत्व अधिक मात्रा में रहते हैं। इसे हर मौसम में प्रयोग में लाया जा सकता है परन्तु गर्मियों में दही का प्रचलन अन्य ऋतुओं की अपेक्षा ज्यादा होता है। इस ऋतु में प्रतिदिन नियम से दही लेना पाचन की दृष्टि से अच्छा माना जाता है। दही पाचन व्यवस्था को सुधारता है तथा बल प्रदान करता है। स्वाद में तो सभी इसके दीवाने है ही। स्वास्थ्य की उन्नति की दृष्टि से इसके समान कोई आहार नहीं है। भारत में ही नहीं, संसार भर में दही का उपयोग स्थान के अनुसार खाने, सौंदर्य, औषधि व मांगलिक अवसरों पर होता रहा है। सुपाच्य व सुस्वादु गुण के कारण दही का प्रयोग प्रायः सभी घरों में समान रूप से होता रहा है। यह भी असंदिग्ध रूप से जीवन अवधि में बढ़ोतरी होती है।

औषधीय गुण

दही में एक ऐसा पदार्थ पाया जाता है जो रक्त में उपलब्ध कोलेस्ट्रोल को कम करता है, अतः यह हृदय रोग में लाभ पहुंचाता है। पेट की गड़बड़ी (कब्जियत) ही सभी रोगों की जड़ है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधी क्षमता में ह्रास होता है परन्तु दही का समुचित मात्रा में सेवन प्रतिरोधी क्षमता का विकास करता है। दही में विद्यमान लैक्टोसिलस बल्गोरिकस और स्ट्रेप्टोकोकस थमोफिलस बैक्टीरिया जो फायदेमंद बैक्टीरिया हैं, शरीर के समुचित विकास में अनुकूल प्रभाव डालते हैं। इसके सेवन से ट्यूमर रोग भी ठीक होने की संभावना रहती है। खाना खाने के बाद दही में चुटकी भर अजवायन व काला नमक मिलाकर सेवन करने से वायु रोग में आराम मिलता है। इस तरह क प्रयोग से कब्जियत व बवासीर रोग में भी 25 प्रतिशत तक लाभ होता है। दही में नीम की कोंपल पीस कर फोड़े-फुंसियों में लगाने से लाभ होता है और अगर लस्सी में 1-2 पत्ती पीसकर उपयोग करें तो खून साफ होता है।

सौंदर्य प्रसाधन भी

प्राचीन समय से ही दही का प्रयोग सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में होता आ रहा है। यह स्ायुओं और त्वचा को पुष्टिकारक तत्व प्रदान करता है। इसके उपयोग से सौन्दर्य में चार-चांद लगाये जा सकते हैं।
त्वचा को नर्म और साफ रखने के लिए दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गले व बाहों पर लगाने से त्वचा में चमक आती है। दही में बेसन मिलाकर लगाने से त्वचा की सफाई हो जाती है। इस प्रयोग स मुंहासों में भी लाभ होता है। दही में आटे का चोकर मिलाकर दस मिनट रखें। फिर इसे उबटन की तरह प्रयोग करें। इस उबटन से त्वचा को विटामिन ‘सी’ व ‘ई’ मिलता है जिससे उसमें चमक बनी रहती है। दही में संतरे व नींबू का रस मिलाकर क्लींजर के रूप में उपयोग करने से चेहरे का रंग निखर कर कांति बढ़ जाती है। दही में काली मिट्टी मिलाकर केश धोने से केश मुलायम, चमकीले व घने हो जाते हैं।

दही बनाने में सावधानी

दही बनाने की विधि : दही हमेशा शुध्द और ताजे दूध से ही बनाया जाना चाहिये। गाय अथवा भैंस का दूध या दोनों मिला हुआ दूध काम में लाया जा सकता है। दूध को दही बनने में अनेक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। यह एक रसायनिक विधि है। अतः उत्तम दही पाने के लिए विधिवत वैज्ञानिक तरीकों का पालन करना आवश्यक है।
साफ बर्तन में दूध को आधा घंटे तक धीरे-धीरे गर्म करें, तत्पश्चात् दस मिनट तक तेज आंच पर खूब उबालें। दूध उबालने के तुरन्त बाद बर्तन को आग से उतार कर साधारण तापमान 30-35 डिग्री सें. पर ठंडा करें।
कांसा, पीतल, तांबा एवं अल्मीनियम इत्यादि के बर्तनों में दही नहीं जमाना चाहिये। दही जमाने के लिए मिट्टी या चीनी मिट्टी के बर्तन ही उपयुक्त होते हैं।