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गुरुवार, फ़रवरी 26, 2015

दही में है सेहत और खूबसूरती का खजाना

Yogurt : A wealth of health and beauty 
गर्मियों में सेहत का सबसे बड़ा हथियार


दूध से जमनेवाला दही एक रुचिकर और सेहतमंद माध्यम है। दही में अच्छी किस्म के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ मिलता है। आयुर्वेद के मुताबिक गर्मियों में दूध के मुकाबले दही खाने के फायदे बहुत अधिक होते हैं। रोजाना एक कटोरी दही न सिर्फ बीमारियों को दूर रखता है बल्कि शरीर स्वस्थ बनाता है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है।
दही में कैल्सियम को एसिड के रूप में समा लेने की भी खूबी होती है। रोज दही दूध के मुकाबले दही खाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है।
गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है।
दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गरमी दूर हो जाती है। पाचन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है। दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती हैं तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं।
दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढ़ने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न करे और हार्टबीट सही बनी रहे। दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी सहायक है।
दूध की अपेक्षा दही को अधिक लाभकारी माना जाता है। यह प्राचीन काल से ही हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग होता रहा है। पुरानी पीढ़ी के लोग दही को अधिक महत्व देते हैं। इसे बच्चे, युवा, बूढ़े सभी लोग रूचि से खाते हैं। इसमें अन्य खाद्य पदार्थों की अपेक्षा पोषक तत्व अधिक मात्रा में रहते हैं। इसे हर मौसम में प्रयोग में लाया जा सकता है परन्तु गर्मियों में दही का प्रचलन अन्य ऋतुओं की अपेक्षा ज्यादा होता है। इस ऋतु में प्रतिदिन नियम से दही लेना पाचन की दृष्टि से अच्छा माना जाता है। दही पाचन व्यवस्था को सुधारता है तथा बल प्रदान करता है। स्वाद में तो सभी इसके दीवाने है ही। स्वास्थ्य की उन्नति की दृष्टि से इसके समान कोई आहार नहीं है। भारत में ही नहीं, संसार भर में दही का उपयोग स्थान के अनुसार खाने, सौंदर्य, औषधि व मांगलिक अवसरों पर होता रहा है। सुपाच्य व सुस्वादु गुण के कारण दही का प्रयोग प्रायः सभी घरों में समान रूप से होता रहा है। यह भी असंदिग्ध रूप से जीवन अवधि में बढ़ोतरी होती है।

औषधीय गुण

दही में एक ऐसा पदार्थ पाया जाता है जो रक्त में उपलब्ध कोलेस्ट्रोल को कम करता है, अतः यह हृदय रोग में लाभ पहुंचाता है। पेट की गड़बड़ी (कब्जियत) ही सभी रोगों की जड़ है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधी क्षमता में ह्रास होता है परन्तु दही का समुचित मात्रा में सेवन प्रतिरोधी क्षमता का विकास करता है। दही में विद्यमान लैक्टोसिलस बल्गोरिकस और स्ट्रेप्टोकोकस थमोफिलस बैक्टीरिया जो फायदेमंद बैक्टीरिया हैं, शरीर के समुचित विकास में अनुकूल प्रभाव डालते हैं। इसके सेवन से ट्यूमर रोग भी ठीक होने की संभावना रहती है। खाना खाने के बाद दही में चुटकी भर अजवायन व काला नमक मिलाकर सेवन करने से वायु रोग में आराम मिलता है। इस तरह क प्रयोग से कब्जियत व बवासीर रोग में भी 25 प्रतिशत तक लाभ होता है। दही में नीम की कोंपल पीस कर फोड़े-फुंसियों में लगाने से लाभ होता है और अगर लस्सी में 1-2 पत्ती पीसकर उपयोग करें तो खून साफ होता है।

सौंदर्य प्रसाधन भी

प्राचीन समय से ही दही का प्रयोग सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में होता आ रहा है। यह स्ायुओं और त्वचा को पुष्टिकारक तत्व प्रदान करता है। इसके उपयोग से सौन्दर्य में चार-चांद लगाये जा सकते हैं।
त्वचा को नर्म और साफ रखने के लिए दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गले व बाहों पर लगाने से त्वचा में चमक आती है। दही में बेसन मिलाकर लगाने से त्वचा की सफाई हो जाती है। इस प्रयोग स मुंहासों में भी लाभ होता है। दही में आटे का चोकर मिलाकर दस मिनट रखें। फिर इसे उबटन की तरह प्रयोग करें। इस उबटन से त्वचा को विटामिन ‘सी’ व ‘ई’ मिलता है जिससे उसमें चमक बनी रहती है। दही में संतरे व नींबू का रस मिलाकर क्लींजर के रूप में उपयोग करने से चेहरे का रंग निखर कर कांति बढ़ जाती है। दही में काली मिट्टी मिलाकर केश धोने से केश मुलायम, चमकीले व घने हो जाते हैं।

दही बनाने में सावधानी

दही बनाने की विधि : दही हमेशा शुध्द और ताजे दूध से ही बनाया जाना चाहिये। गाय अथवा भैंस का दूध या दोनों मिला हुआ दूध काम में लाया जा सकता है। दूध को दही बनने में अनेक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। यह एक रसायनिक विधि है। अतः उत्तम दही पाने के लिए विधिवत वैज्ञानिक तरीकों का पालन करना आवश्यक है।
साफ बर्तन में दूध को आधा घंटे तक धीरे-धीरे गर्म करें, तत्पश्चात् दस मिनट तक तेज आंच पर खूब उबालें। दूध उबालने के तुरन्त बाद बर्तन को आग से उतार कर साधारण तापमान 30-35 डिग्री सें. पर ठंडा करें।
कांसा, पीतल, तांबा एवं अल्मीनियम इत्यादि के बर्तनों में दही नहीं जमाना चाहिये। दही जमाने के लिए मिट्टी या चीनी मिट्टी के बर्तन ही उपयुक्त होते हैं।

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