दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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बुधवार, फ़रवरी 25, 2015

कुछ कारगर निवारण एवं सुझाव

Some effective Prevention and Tips

इस बार राजेश मिश्रा आप सभी के लिए लाए हैं कई रोगों का एक ही जगह इलाज। इन रोगों में शामिल है- पथरी, झाइयां, खूनी बवासीर, मासिक स्राव कष्ट तथा दर्द के साथ होना, बवासीर, सिर के बाल झड़ना, मूत्रावरोध।

पथरी : यदि गुर्दे या मूत्राशय में पथरी हो तो 250 ग्राम कुलथी (शिमला की पहाड़ियों से आने वाली सफेद कुलथी ठीक रहती है) को साफ कर रात को तीन किलो पानी में भिंगोकर रख दें। सबेरे भीगी हुई कुल्थी सहित उस पानी को धीमी आंच पर लगभग चार घंटे तक पकायें। जब पानी सिर्फ एक किलो रह जाये (जो काले चनों के सूप की तरह होता है) तब उसे नीचे उतार लें। तीस से पचास ग्राम (अपनी पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का छौंक लगायें। छौंक में थोड़ा सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं। इस स्वादिष्ट सूप को 250 ग्राम की मात्रा में दिन में एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर लगभग बारह बजे पी लें। दस-पंद्रह दिन तक इस नुस्खे के सेवन से गुर्दे और मूत्रालय की पथरी गलकर बिना आपरेशन के बाहर आ जाती है। इस नुस्खे के सेवन करते वक्त दोपहर का भोजन नहीं लेना है।

झाइयां : चेहरे पर काली झाइयां साधारणत: त्वचा की निचली परतों में रहने वाले प्राकृतिक पदार्थ सिलीकोन की कमी से होती है। नहाने से पूर्व रोज एक चम्मच गुनगुने शहद में 2-3 बूंदे ग्लिसरीन व चुटकी भर नमक मिलाकर अच्छी तरह मथकर हल्के हाथ से कुछ दिनों तक लगाने से झाइयां दूर हो जाती हैं।
खूनी बवासीर : गुड़ के साथ एक दो हरड़ को दोनों समय खाने के बाद नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होगा।

मासिक स्राव कष्ट तथा दर्द के साथ होना : 2 चम्मच अजवायन, 2 कप पानी में डालकर उबालें। 1 कप शेष रख लें, इसमें गुड़ मिलाकर सुबह खाली पेट चाय की तरह पी लें। यह नुस्का प्रतिदिन सुबह-शाम 3 दिन तक लेना चाहिए। सामान्यत: 3 मासिक स्राव तक प्रयोग पर्याप्त रहता है। मासिक स्राव होने से 3 दिन पहले इसका प्रयोग आरंभ करने से मासिक समय पर खुलकर आता है।
पेट में गैस : अजवायन के साथ हरड़ और काला नमक लेने से पेट फूलना, पेट दर्द, डकारें आना आदि में तत्काल राहत मिलती है।

बवासीर : आम के कोमल पत्तों को जल के साथ पीसकर मिश्री मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है। खूनी बवासीर से रक्त आना बंद होता है।
रक्त प्रदर : आम की गुठली की गिरी का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में लेने से रक्त प्रदर, खूनी बवासीर, पेट के कीड़े दूर होते हैं।

सिर के बाल झड़ना : बरगद के पत्तों को कुचल लें और अलसी के तेल में पकायें। पत्तों के जल जाने पर तेल छानकर रख लें। इस तेल की मालिश करने से कुछ ही दिनों में बालों का झड़ना रुक जायेगा और झड़े हुए बालों के स्थान पर नये बाल आने लगेंगे।
देशी घी में 4-6 बादाम की गिरी पीसकर डाल दें और इतनी उबालें कि गिरी के टुकड़े जल जायें। अब घी को छानकर शीरी में भर लें। यह घी गुनगुना करके सिर पर मालिश करने से बालों का झड़ना रुकता है और दिमागी कमजोरी भी दूर होती है।

मूत्रावरोध : पेशाब की रुकावट में कबाव चीनी का एक चम्मच चूर्ण दूध की लस्सी से देने पर तत्काल मूत्र हो जाता है। दूध के अभाव में मिश्री के साथ भी दे सकते हैं।

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