दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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बुधवार, जुलाई 15, 2015

डॉक्टर के सलाह के बगैर कभी ना खाएं दवाईयां यह आपके लिए घातक हो सकता है

बेवजह दवा खाने से बचें उम्र बढ़ जाएगी 




जहां तक हो सके अपनी मर्जी से दवाओं का इस्तेमाल न करें। लोगों में यह आम धारणा है कि छोटी-मोटी तकलीफ होने पर वह अपनी मर्जी से कोई भी दवाई खा लेते हैं इसलिए वह अपने घरों में क्रोसिन, इबूप्रोफेन, एमोक्सीसिलिन जैसी गोलियों से लेकर बैनेड्रिल जैसे कफ सिरप भी रखते हैं. लेकिन आपको इस बात का अंदाजा नहीं है कि आपकी यह छोटी सी लापरवाही आपके लिए कितना बड़ा जोखिम बन सकती है. बिना सोचे समझे दवाईयों के सेवन से साइड इफेक्टस भी हो सकता है. इसके अलावा किसी आम तथा अस्थायी समस्या को ठीक करने के स्थान पर यह दवाइयां गुर्दे की खराबी जैसी किसी गम्भीर समस्या से ग्रस्त करने की वजह भी बन सकती हैं. इसी तरह से लंबे समय तक इन्हें इस्तेमाल करने से खतरनाक व्याधियां या अंगों को अपूर्णीय क्षति पहुंच सकती है.

शोध द्वारा यहबात साबित हुई है कि एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक या गलत प्रयोग की वजह से कुछ सर्वाधिक प्रभावी एंटीबायोटिक दवाइयां भी बेअसर साबित हो रही हैं. इसके अलावा कई केसों में डॉक्टर भी जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक्स दे देते हैं. यह भी देखा गया है कि लोग अपने आप ही एंटीबायोटिक्स का सेवन करते रहते हैं तथा अक्सर ही वे इसका कोर्स पूरा नहीं करते यानी वे तय अवधि से पहले ही इसका सेवन बंद कर देते हैं. इन्हीं कारणों से एंटीबायोटिक बेअसर साबित हो रहे हैं. कई लोगों को तो इस बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं होती. आईए आपको बताते हैं इस बारे में-

कफ सिरप(खांसी-जुकाम दवाई)
बैनेड्रिल, कोरेक्स, फैंसिडिल आदि
कब दिया जाता है: छाती जाम होने, जुकाम, खांसी, गला दर्द तथा अन्य संबंधित समस्या होने पर

साइड इफैक्ट्स: दिल मिचलाना, उनींदापन, चक्कर, आंखों की पुतलियों का फैलना, याद्दाश्त की खराबी, अवसाद तथा घबराहट.

अत्यधिक इस्तेमाल से: कफ सिरप का लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से शरीर के विभिन्न अंगों के संचालन में गड़बड़ी, थाइरॉयड की समस्या, अतिसक्रियता, मतिभ्रम, दौरा, उच्च रक्तचाप, पेट में दर्द तथा दिल की धड़कन में गड़बड़ी आ सकती है.

जानकारों के अनुसार: दो तरह की कफ सिरप हैं- एक्सपैक्टोरैंट्स तथा सप्रैसैंट्स. जहां सप्रैसैंट्स खांसने की उत्तेजना को कम करके खांसी को नियंत्रित करते हैं वहीं एक्सपैक्टोरैंट्स बलगम को बढ़ा कर अधिक खांसने को बाध्य करते हैं. सप्रैसैंट्स का प्रयोग सूखी खांसी के इलाज में होता है जबकि एक्सपैक्टोरैंट्स का प्रयोग बलगम वाली खांसी के इलाज हेतु किया जाता है. कुछ अन्य तरह की खांसी भी है जिनके लिए एंटीहिस्टामाइन(एलर्जी तथा जुकाम के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ड्रग्स) बेहतर काम करते हैं. लोग बिना जाने अपनी मर्जी से किसी भी कफ सिरप का सेवन कर लेते हैं. उच्च रक्तचाप तथा दिल के रोगियों को तो अपनी मर्जी से इन दवाइयों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए.

समाधान : बिना सोचे-समझे कफ सिरप के सेवन के बदले कुछ कुदरती घरेलू उपचार अपनाएं. गले को राहत देने के लिए नमक मिले पानी से गरारे करें, अदरक वाली चाय पीएं तथा काली मिर्च सहित शहद जैसे अन्य घरेलू उपायों का प्रयोग करें.

स्लीपिंग पिल्स (नींद की गोलियां)
एल्फ्रैक्स, ट्राइका, डाइजेपोज, जैपलोन, डोरमिन आदि
कब दी जाती है: नींद न आने की गम्भीर समस्या होने पर.

साइड इफैक्ट्स: चक्कर, पेट तथा अंतडिय़ों की समस्याएं तथा वजन बढऩा.
अत्यधिक इस्तेमाल से: डिमैंशिया की जल्द शुरूआत, नींद की गोलियों का आदी होना, दौरे, रक्तचाप कम होना तथा मांसपेशियों का कमजोर हो जाना.
जानकारों की राय: नींद न आने की समस्या किसी छुपी समस्या का लक्षण भी हो सकता है. यह किसी आम तनाव की वजह से भी हो सकता है. नींद की गोली लेने के स्थान पर समस्या की जड़ का इलाज करना बेहतर होगा.
समाधान: मेडीटेशन(ध्यान लगाना) तथा गहरी सांस लेने की कसरतें, शराब पीने तथा धूम्रपान में कमी करें. कैफीन से दूर रहें तथा तनाव ना लें. किसी स्वास्थ्य समस्या की वजह से नींद की गोलियों की डॉक्टर द्वारा सलाह देने पर ही इनका सेवन करें.

पेनकिलर्स (दर्दनिवारक)
इबूप्रोफेन, एस्प्रिन, पैरासिटामोल आदि
कब दी जाती है: सिर, पीठ व घुटनों में दर्द, चोट लगने, मोच आने या हल्का जल जाने पर
साइड इफैक्ट्स: दिल मिचलाना, उल्टी आना, डायरिया तथा पेट में दर्द
अत्यधिक इस्तेमाल से: उच्च रक्तचाप, गुर्दों में खराबी, आघात का खतरा बढऩा तथा दिल का दौरा पडऩा.
जानकारों की राय: अधिक मात्रा में दर्दनिवारकों का सेवन करने वाले लोग सुरक्षित ढंग से ड्राइव नहीं कर पाते हैं क्योंकि वे उनींदापन महसूस करते हैं जिसके घातक परिणाम हो सकते हैं. सिरदर्द से राहत पाने के लिए जो लोग नियमित रूप से दर्दनिवारकों का सेवन करते हैं उनके अक्सर सिरदर्द रहने तथा इन दवाइयों पर निर्भर हो जाने की संभावना बढ़ जाती है. अक्सर सेवन करने से कुछ दर्दनिवारक तो खुद सिरदर्द का कारण बन जाते हैं. कुछ तरह के पेनकिलर्स का एक साथ सेवन करना भी खतरनाक होता है.

समाधान: यदि आपको दर्दनिवारकों की वजह से ही रहने वाले सिरदर्द के लक्षण महसूस हों तो बेहतर होगा कि आप दर्दनिवारकों का सेवन बंद कर दें. वैसे भी दर्दनिवारकों का सेवन समस्या के असली कारण को खत्म नहीं करता है. यह दर्द किसी गंभीर व्याधि या फिर किसी ऐसे सामान्य कारण से हो सकता है जिसका उपचार जीवनशैली में बदलाव, व्यायाम तथा आहार में सुधार जैसे सरल ढंग से सम्भव हो.

एंटीबायोटिक्स (बैक्टीरिया नाशक दवाइयां)
एमोक्सीसिलिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन, एम्पिसिलिन, एरिथ्रोमाइसिन आदि
कब दी जाती है: बैक्टीरिया, फंगस तथा अन्य परजीवियों से होने वाले संक्रमण के उपचार के लिए
साइड इफैक्ट्स: कुछ एंटीबायोटिक्स डायरिया, त्वचा पर चकत्ते, एलर्जी के कारण बन जाते हैं तथा इसके साथ बैक्टीरिया द्वारा प्रतिरोधी शक्ति हासिल कर लेना भी शामिल है

अत्यधिक इस्तेमाल से: इन पर निर्भरता से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है क्योंकि यह अंतडिय़ों की परत में रहनेवाले स्वस्थ बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देते हैं. लम्बे इस्तेमाल से लिवर तथा गुर्दों की खराबी जैसी जानलेवा समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं. गर्भवती महिलाओं में ये गर्भ में पल रहे शिशु को नुक्सान पहुंचाते हैं जिससे वे जन्मजात व्याधियों या जन्म संबंधी विकारों से ग्रस्त हो सकते हैं.

जानकारों की राय: एंटीबायोटिक्स के गलत प्रयोग से रोग की पहचान करने में देरी हो सकती है या उसकी गलत पहचान हो सकती है. यदि इनका सेवन अक्सर किया जाता है तो ये बैक्टीरिया के खिलाफ बेअसर साबित होने लगते हैं. इनका उचित मात्रा में सेवन न करने या जरूरत से अधिक लम्बे समय तक सेवन करने से बैक्टीरिया में इनके प्रति प्रतिरोधी ताकत पैदा हो जाती है जिससे और भी गम्भीर स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

समाधान: कुछ तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में इनका सेवन जरूरी होता है परंतु इस दौरान इनके नुक्सान को कम से कम करने के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए. जैसे एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं तो आहार में दही जरूर शामिल कीजिए ताकि अंतडिय़ों में रहने वाले लाभकारी बैक्टीरिया को होने वाले नुक्सान को कम किया जा सके. साथ ही अपने शरीर पर विश्वास करना सीखिए कि वह संक्रमणों से खुद लड़ सकता है.

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