दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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सोमवार, मार्च 23, 2015

पेट की चर्बी घटायें इन 3 आसनों से

Reduce belly fat from these 3 rugs


अगर आप अपने पेट की बढ़ती चर्बी से परेशान हैं और इसे कम करने के लिए किसी कारगर उपाय की तलाश में हैं तो योगासन आपके लिए बहुत मददगार हो सकते हैं। योगासनों न सिर्फ आपको पेट से फैट्स कम करने में मदद मिलेगी बल्कि आपकी मांसपेशियां मजबूत होंगी और शरीर लचीला होगा।

आइए जानें ऐसे तीन आसनों के बारे में जिनसे आपको पेट की चर्बी कम करने में आसानी होगी।

भुजंगासन

इस आसन से न सिर्फ पेट की चर्बी कम होती है बल्कि बाजुओं, कमर और पेट की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और शरीर लचीला बनता है। इसकी विधि इसप्रकार है -
  • पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे टिकाएं।
  • दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें।
  • अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े।
  • अब शरीर के अग्रभाग को बाजुओं के सहारे उठाएं।
  • शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।

बलासन

बलासन उन लोगों के लिए परफेक्ट आसन है जिन्होंने योगासन की शुरुआत की हो। इससे पेट की चर्बी भी कम होती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। गर्भवती महिलाएं या घुटने के रोग से पीड़ित लोग इसे न करें। इसकी विधि इसप्रकार है -
  • घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं जिससे शरीर का सारा भाग एड़ियों पर हो।
  • गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें।
  • आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं।

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन पेट की चर्बी कम करने के लिए बेहद आसान और प्रभावी आसन है। इसकी आसान विधि इसप्रकार है-
  • सबसे पहले सीधा बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की ओर सटाकर सीधा फैलाएं।
  • दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और कमर को बिल्कुल सीधा रखें। 
  • फिर झुककर दोनों हाथों से पैरों के दोनों अंगूठे पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके घुटने न मुड़ें और न ही आपके पैर जमीन से ऊपर उठें।
  • कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

इन योगासनों को रुटीन में शामिल करेंगे तो तोंद कम करना आपके लिए आसान हो जाएगा।

शनिवार, मार्च 21, 2015

पाचन शक्ति बढ़ाने के कारगर उपाय

भूख बढाने के कुछ असरदार नुस्खे

एक कहावत है ‘पहला सुख निरोगी काया’। स्वस्थ शरीर स्वस्थ दिमाग के निर्माण में सहायक होता है। स्वस्थ रहने की पहली शर्त है आपकी पाचन शक्ति का सुदृढ़ होना। भोजन के उचित पाचन के अभाव में शरीर अस्वस्थ हो जाता है, मस्तिष्क शिथिल हो जाता है और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। जिस प्रकार व्यायाम में अनुशासन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार भोजन में भी अनुशासन महत्वपूर्ण है। अधिक खाना, अनियमित खाना, देर रात तक जागना, ये सारी स्थितियां आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करती हैं। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि पाचन शक्ति को दुर्बल होने से बचाएं। पाचन तंत्र की दुर्बलता दूर करने के कुछ घरेलू उपाय यहां दिए जा रहे हैं, जिनके प्रयोग से निश्चय ही काफी लाभ होगा।
  • पके अनार के 10 ग्राम रस में भुना हुआ जीरा और गुड़ समभाग मिलाकर दिन में दो या तीन बार लें। पाचन शक्ति की दुर्बलता दूर होगी।
  •  काली राई 2-4 ग्राम फांकी लेने से कब्ज से होने वाली बदहजमी मिट जाती है।
  • अनानास के पके फल के बारीक टुकड़ों में सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
  • भोजन के बाद पेट झूल जाए, बेचैनी महसूस हो तो 20-50 ग्राम अनानास का रस पीएं।
  • पकाए हुए आंवले को घीयाकस करके स्वादानुसार काली मिर्च, सौंठ, सेंधा नमक, भुना जीरा और हींग मिलाकर बड़ी बनाकर छाया में सुखा लें। इसके सेवन से पाचन विकार दूर हो जाता है तथा भूख बढ़ती है। मन भी प्रसन्न रहता है।
  • अमरूद के कोमल पत्तों के 10 ग्राम रस में थोड़ी शक्कर मिलाकर प्रतिदिन केवल एक बार प्रातःकाल सेवन करने से बदहजमी दूर होकर पाचन शक्ति बढ़ती है।
  • खट्टे-मीठे अनार का रस एक ग्राम मुंह में लेकर धीरे-धीरे पीएं। इस प्रकार 8-10 बार करने से मुख का स्वाद ठीक होकर आंत्र दोष दूर होता है और ज्वर के कारण हुई अरूचि दूर होती है तथा पाचन शक्ति बढ़ जाती है।
  • हरड़ एवं गुड़ के 6 ग्राम चूर्ण को गर्म पानी से या हरड़ के चूर्ण में सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से पाचन शक्ति तेज होती है।
  • हरड़ का मुरब्बा खाने से पाचन शक्ति सबल होती है।
  • 1-2 ग्राम लौंग को जौकूट करके 100 ग्राम पानी में उबालें। 20-25 ग्राम शेष बचने पर छान लें और ठंडा होने पर पीएं। इससे पाचन संबंधी विकार दूर होते हैं। हैजे में भी यह लाभकारी है।
  • इलायची के बीजों के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर दिन में 2-3 बार 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गर्भवती स्त्री के पाचन विकार दूर हो जाते हैं तथा खुलकर भूख लगती है।
  • एक कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर 5-6 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से पेट की वायु, उर्द्धवात, बदहजमी, विषमाग्नि जैसी शिकायतें दूर होकर पाचन शक्ति प्रबल होती है।
  • नींबू काटकर काला नमक लगाकर चाटने से बदहजमी और भोजन के प्रति अरूचि दूर होती है।

सूखी खांसी दूर करने के कुछ घरेलू नुस्खे

घरेलु नुस्खे जो दिलाएंगे खांसी से राहत

बदलते मौसम, ठंडा गर्म खाना पीना या एलर्जी आदि के कारण हमें कभी भी खांसी हो सकती है। खाँसीसे बचाव, इसका उपचार अब हम बहुत ही आसानी से घर पर ही कर सकते है|
कहावत रही है कि आती सर्दी गला पकड़ती हैं और जाती सर्दी टांग मारती हैं अर्थात् इस ऋतु के प्रारम्भ और अंत में कई बीमारियां जन्म लेती है इस ऋतु में अधिकतर सर्दी, जुकाम, खांसी, ज्वर, मलेरिया जैसी घातक बीमारियां हो जाता हैं। मौसम बदलने के साथ खांसी जुकाम प्रायः हो जाते हैं। खांसी यदि लम्बे समय तक रहे तो नुकसानदायक हैं। अतः खांसी शुरू होते ही उसे दूर करने के उपाय किये जाने चाहिए। आयुर्वेद के ग्रंथ ‘सुश्रुत संहिता में लिखा है- मुख, कान और गले में धुएं एवं उड़ने वाली धूल के पहुंचने, अधिक व्यायाम करके रूखा आहार ग्रहण करने, आधारणी वेग जैसे छींक के वेग को रोकने और भोजन का जरा सा अंश भी श्वसन नलिका यानी विपरीत मार्ग में चले जाने से खांसी की उत्पति होती है। सामान्य तौर पर खांसी फेफड़ों से अधिक सर्दी या गर्मी का असर होते नजला जुकाम हो जाने, निमोनिया, प्लूरिसी, ब्रोंकाइटिस, तपेदिक फ्लू, टौंसिल्स बढ़ जाने, उस पर सूजन आ जाने, गले ं खराश हो जाने, श्वास नली में धूल, धुआं, आहार या दूध, जल जैसे पेय पदार्थ चले जाने, खट्टी वस्तुओं के अधिक सेवन से, फेफड़ों से किसी प्रकार काजख्म होने से और कफ होने से हुआ करती हैं। ठण्डा और कोहरे वाला मौसम भी खांसी को उत्पन्न करने में सहायक होता है। गंदी जगह रहने वाले, अस्वास्थ्यकर वातावरण, भीड़भाड़ वाले इलाके, झोपड़पट्टी तथा औद्योगिक क्षेत्र या अन्य प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों व बच्चों को यह समस्या अधिक रहती हैं। अतः ऐसे क्षेत्र में रहने वालों को विशेष सावधानी रखना चाहिए। मौसम के उतार-चढ़ाव व सर्दी के मौसम में शुरू से ही बचाव की कोशिश करनी चाहिए। सर्दी के मौसम में गर्म कपड़े पहनने चाहिए तथा किसी प्रकार का संक्रमण होने पर तत्काल ही चिकित्सा करवानी चाहिए। सर्दी का प्रभाव बच्चों व बूढ़ों पर अधिक होता है। अतः उनकी विशेष देखभाल करना चाहिए। खांसी होने पर कुछ घरेलू नुस्खे अपनाये जा सकते हैं।
‘सेंधा नमक मिलाये के, काढ़ा लेय बनाये।
जब चौथाई जल रहें, गर्म गर्म पी जाये,
यही विधि कुछ दिन पीये, सुखी खांसी जाये॥
काली मिर्च महीन पिसावे, आक पुष्प और शहद मिलावे।
चटनी भोजन पूर्व ही खाये, सूखी खांसी, झट मिट पाये॥
* खांसी होने पर अनार के छिलके का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसे। इसके अलावा अनार के छिलकों को सूखाकर चूर्ण बनाकर सेवन करें।
* भोजन के बाद दोनों समय आधा चम्मच सौंठ चबाने से सुखी खांसी में आराम मिलता है।
* भुनी हुई फिटकरी और चीनी (एक रत्ती) दोनों को मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें। 4/5 दिन में काली खांसी ठीक हो जायेगी।
* दही दो चम्मच, चीनी एक चम्मच, काली मिर्च का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर चाटने से बच्चों की काली खांसी और बूढ़ों की सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
* आधा चम्मच अदरक का रस और आधा चम्मच शहद चाटने से खांसी में आराम मिलता है।
* काली मिर्च पीसकर उसमें चार गुना गुड़ मिलाकर आधा ग्राम की गोलियां बना ले इससे खांसी जुकाम व सर्दी के रोगों में लाभ होता है।
* खांसी होने पर लौंग बराबर चूसते रहे। सिके हुए लौंग अधिक लाभदायक रहते हैं। इसके अलावा काली मिर्च मुंह में रखकर चूसे।
* सूखे आंवले का चूर्ण मिश्री के साथ लें। हल्दी भूनकर घी या शहद के साथ मिलाकर लें।
* मूलेठी का एक छोटा टुकड़ा, 2 कालीमिर्च व मिश्री का एक छोटा टुकड़ा लेकर इन तीनों को मुंह में लेकर धीरे-धीरे 2-3 बार खाली पेट या खाने के बाद चूसे। इससे पुरानी खांसी, गले की खराश, गला बैठना, स्वर भंग में तत्काल एवं स्थायी लाभ होता है। मूलेठी के टुकड़े मुंह में डालकर चूसते रहे। छोटे बच्चों को मुलेठी का सत दे। रात में सोते समय पान में मुलेठी का चूर्ण डालकर खाये। खांसी से छुटकारा मिल जायेगा।
* तुलसी के पत्ते, कालीमिर्च, अदरक युक्त चाय पीने से खांसी में शीघ्र आराम मिल जाता है।
* यदि बच्चा सूखी खांसी से पीड़ित है तो पान के रस में शहद का मिश्रण करके चटाइये शीघ्र लाभ होगा।
* सूखी खांसी तथा कूकर खांसी से परेशान होने पर पान के उष्ण रस से लाभ होता है ऐसा दिन में 3/4 बार करें।
* एक गिलास दूध में एक चम्मच पिसी हल्दी डालकर आग पर रखकर खूब उबाले जब दूध आधा शेष रह जाये तो उतार कर ठण्डा कर ले इसे रात को सोते समय पीने से खांसी, सर्दी व गले की खराश मिट जाती है।
* लौंग या बहेड़ा अथवा दोनों को धीमे तल कर रखले इनका 1-1 टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से खांसी में आराम मिलता है।
* अडूसा के पत्ती का रस एक चम्मच आधा चम्मच शुध्द घी व आधा चम्मच पिसी मिश्री मिला तीनों को मिलाकर दिन में 4/5 बार चाटने से खांसी में आराम मिलता है।
* सेव फलों का रस निकालकर थोड़ी मिश्री मिलाकर पीने से सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
* अंजीर के साथ पुदीना खाने से कफयुक्त खांसी में लाभ होता है।
* पुरानी खांसी में ताजा मुनक्के के दानों को रात के समय साफ पानी में भिगो दे प्रातःकाल 10 दाने कुछ दिनों तक लगातार नियमित खायें। मुनक्का के बीज निकालकर उसमें 3/4 काली मिर्च रखकर चबाये। 4/5 दिन में आराम हो जायेगा।
* बलगम खांसी में दो चम्मच शरद, आधा चम्मच ग्लिसरीन में गर्म करके नींबू का रस मिलाकर सेवन करें।
* अधिक तथा बार-2 खांसी चलने पर हल्दी की गांठ चूसने से आराम मिलता है।
* सुखी खांसी होने पर एक ग्राम अजवाइन एक सादे पान के पत्ते पर रखकर चबाये अदरक के छोटे-छोटे मुंह में रखकर चूसे।

सावधानियां

जाड़े के दिनों में विशेष सावधानी रखना चाहिए। ठण्डी हवा न लगे इसके लिए सिर व कान ढक कर रखें। यात्रा के दौरान ओढ़ने बिछाने का पूरा सामान रखें। प्रातः एवं सायंकाल दुपहिया वाहन की यात्रा टाले तथा यात्रा के दौरान मफलर व अन्य व्यवस्था रखें। खान-पान में तेल, घी व चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित यात्रा में करें। मौसमी फलो अमरूद, बेर, सेवफल, अनार आदि खाने का बाद पानी न पीयें। प्रतिदिन रात्रि को दूध में पिण्ड खजूर दूध में उबालकर पीये। यदा-कदा दूध में केसर डालकर पीये। सर्दी खांसी का प्रकोप अधिक होने पर विक्स का मालिश करें, गले व छाती पर विक्स की मालिश करें। यदा-कदा प्लास्टिक की बोतल में गर्म पानी डालकर सिकाई करें। पीने का पानी कुनकुना कर पीये। नमक युक्त पानी से गरारे करें। फ्रिज में रखे पदार्थों का सेवन नहीं करें। खांसी होने पर दही, छाछ, रायता, लस्सी व ठंडे पेय पदार्थों का सेवन नहीं करें। सास, चटनी, अचार तीखे मसालों का उपयोग कम करें।



समान्यतय कहा जाता हे की आप यह खाएँ यह न खाएँ, इस प्रकार से रहें या न रहें तो इसमें विचारणीय बात यह हे की इन उपरोक्त बताई गई बातों में लगभग हर रोग और उसके ठीक करने का राज छुपा हुआ हे, उन्हें समझना होगा।
सुखी खांसी को मिटाने सोंठ+ मुन्नक्का +मिश्री + कालानमक +शहद- को गाय के घी या अच्छे मलाई वाले गाय के दूध के साथ देने से कफ निकलेगा और आराम होगा।
उपरोक्त चीजें पीपल+ कालीमिर्च और मिलकर केवल शहद के साथ चटाने से कफ वाली खांसी (जिसमें अधिक बलगम आती हो)ठीक होती हे ।
सूखी खांसी में खट्टी चीजें,अधिक भोजन और हींग हानिकारक होती हे।
सूखी खांसी होने पर अदरक का प्रयोग नहीं करें ।
हल्दी का प्रयोग हमारे घरों में खांसी के लिए अक्सर किया जाता हे पर यह जान लें की हल्दी कफ को सुखाती हे , इसलिए सूखी खांसी में देने पर तकलीफ और बढ जाएगी।
खांसी के विषय में एक बात समझने की और भी हे की यह आती क्यों हे?
खांसी आने में श्वास सस्थान अर्थात साँस लेने में प्रयुक्त होने वाले शरीर के अवयव आते हें। इनमें गला,फेफड़े प्रमुख हें। जब भी प्रकार की विजातीय वस्तु इन स्थानों पर आ जाती हे जेसे खाई गई कोई बस्तु,श्वास से अन्दर आई कोई वस्तु,जीवाणु,विषाणु,आदि आदि,तब हमारे शरीर की प्रणाली उसे बाहर फेक देना चाहती हे तब ही खांसी,छींक, अदि आती हे। यह प्रयत्न तब तक चलता हे जब तक वह विजातीय पदार्थ बाहर नहीं कर दिया जाता ,यदि गले में चिकनाहट हे तब उसके साथ थोडा थोडा लगातार फेका जाता रहता हे परचिकनाहट नहीं हे तो इस प्रयत्न में सूखी खाँसी आती रहती हे। यदि ऐसी चीज जो और अधिक खुश्की करे तो खांसी का दोरा शांत नहीं हो पता। इस हेतु सहायक के रूप में चिकनाहट ओषधि के साथ देने पर लाभ होता हे। यही इसको ठीक करने का सिधांत हे।
आयुर्वेद में घरेलु उपायों के अतिरिक्त कई ओषधियाँ उपलब्ध हें इनका समुचित अनुपान( ओषधि के साथ ली जाने वाली सहायक द्रव्य जेसे शहद,पानी,दूध,घी, छाछ, दही, आदि-आदि) के साथ सेवन रोग मिटाता हे। इसी कारण आयुर्वेदिक चिकित्सा में अनुपान को भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हे। विना उपयुक्त अनुपान के ली गई ओषधि व्यर्थ या हानि करने वाली भी सिद्ध हो जाती हे। कुछ सामान्य सी ओषधियाँ बना कर प्रयोग की जा सकती हें

कंटकारी- Solanum Xanthocarpum
कंटकारी भस्म- बरसात के बाद अपने आप भारत के अधिकांश भागो में उत्पन्न होने वाली यह वनस्पति जिसमें जामुनी रंग के फुल लगते हे सारे पोधे पर कांटे और कांटे युक्त्त पत्तियां होती हे( देखे चित्र ) इसको जड़ सहित उखाड़कर धोकर मिटटी साफ करलें सुखाकर लोहे के तवे पर ढक कर जला लें यह कंटकारी भस्म होगी सुखी खांसी में शहद और गोघृत के साथ कफ युक्त खांसी में शहद और छोटी पीपल एक साथ, कहते से रोग मुक्त हो जाता हे यह बड़ी निरापद ओषधि हे जो शिशुओं से लेकर वृधो तक चमत्कारी असर दिखाती हे। किसी भी स्थिति में कोई भी हानी नहीं करती। कंटकार्यवलेह (या कंटकारी अवलेह ) के नाम से कई अन्य ओषधियो के साथ बनी का उपयोग विना भय के किया जा सकता हे। इसे पानी मिलाकर सिरप की तरह पिया जा सकता हे।

शुक्रवार, मार्च 20, 2015

Diabetes treat : मधुमेह का ईलाज

मधुमेह : कुछ देसी नुस्खे और योग

आजकल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है। डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। मधुमेह रोगियों के लिए कुछ देसी नुस्खे पेश किए जा रहे हैं। इनमें से किसी को भी आजमाने से पूर्व अपने चिकित्सक से राय अवश्य ले लें। डायबिटीज भारत मे 5 करोड़ 70 लाख लोगोंकों है और 3 करोड़ लोगों को हो जाएगी अगले कुछ सालों मे सरकार ये कह रही है । हर दो मिनट मे एक मौत हो रही है डायबिटीज से जुड़े लोगों की। आप गौर फरमाएं राजेश मिश्रा की बातों पर… इससे परेशान लोग बहुत तकलीफों का सामना कर रहे हैं ... किसी की किडनी ख़राब हो रही है, किसीका लीवर ख़राब हो रहा है किसीको ब्रेन हेमारेज हो रहा है, किसीको पैरालाईसीस हो रहा है, किसी को ब्रेन स्ट्रोक आ रहा है, किसी को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है, किसी को हार्ट अटैक आ रहा है। Complications बहुत ही खतरनाक है ।

नपुंशक बना देता है मधुमेह : राज 

मधुमेह या डायबिटीज का एक प्रभाव ऐसा भी है जिस पर अमूमन खुलकर चर्चा कम ही होती है। मधुमेह पर होने वाली कई गोष्ठियों में भी विशेषग्य अक्सर इस विषय (सेक्स प्रभाव ) को छोड़ देते हैं। सच यह है कि असुविधाजनक चर्चा मानकर छोड़ दिए जाने से इस गंभीर नुक्सान के प्रति जागरूकता लाने का एक महत्वपूर्ण पहलू छूट जाता है। विशेषग्यों का मानना है कि मधुमेहग्रस्त स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स संबंधी ऐसी शिथिलता आ जाती है जिसके कारण इच्छा होते हुए भी ऐसे मरीज सेक्स के प्रति अक्षम हो जाते हैं। अंग शिथिल पड़ जाते हैं । महिलाओं में योनि की तंत्रिकाओं व उसकी कोशिकाओं को इतना नुकसान पहुंचता है जिससे संसर्ग के वक्त होने वाला द्रव्य प्रवाह रुक जाता है। योनि मार्ग सूख जाता है जिससे संसर्ग काफी तकलीफदेह हो जाता है। नतीजे में मधुमेह के मरीजों में कामेच्छा ही मर जाती है। एक अध्ययन के मुताबिक लगभग ४० प्रतिशत मधुमेह पीड़ित महिलाओं में या कामेच्छा ही मर जाती है या सेक्स के प्रति उनकी रुचि ही खत्म हो जाती है। कोई कामोत्तेजना न होने या सेक्स की अक्षमता के कारण यौनांगों में कोई कामोत्मुक प्रतिक्रिया नहीं होती। कहने का अर्थ यह है कि ऐसा महिला मरीजों का पूरा सेक्स जीवन ही नष्ट हो जाता है।
इसी तरह पुरुषों में भी मधुमेह के कारण तंत्रिकाएं और रक्तवाहिनियां प्रभावित होती हैं। इस कारण वह नपुंशकता का शिकार हो जाता है। मधुमेह पुरुषों के शिश्न समेत पूरे शरीर के तंत्रिका तंत्र को नष्ट कर देता है। एक बार जब तंत्रिकाएं नष्ट हो जाती हैं तो वह बिल्कुल क्रियाशील नहीं रह जाती हैं। संपर्क या संसर्ग के वक्त इसी कारण पुरुषों को कोई उत्तेजना नहीं होती। सामान्य अर्थों में इसे यह कहा जा सकता है कि मन में उठी कामोत्तेजना शिश्न (लिंग) तक नहीं पहुंच पाती। मन उत्तेजित हो जाता है मगर यौनांग बेजान पड़े रहते हैं क्यों कि उन तक कामोत्तेजना को पहुंचाने वाली तंत्रिकाओं की क्रियाशीलता मधुमेह के कारण नष्ट हो चुकी रहती है। नपुंशकता की इस अवस्था में लगभग असहाय हो जाता है मधुमेह का मरीज। क्यों कि लिंग में वह तनाव या कड़ापन नही आ पाता जो सेक्स क्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी होता है। यानी दो मुख्य घटनाएं होती हैं। पहला यह कि संवेदनाओं या कामेच्छा की सूचना यौनांगों तक नहीं पहुंच पाती और दूसरा यह कि रक्त कोशिकाओं में दोष के कारण लिंग में तनाव नहीं आता। स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स की यह अधोगति तब आती है जब वे मधुमेह को नियंत्रित नहीं रख पाते। अगर मधुमेह पर कारगर नियंत्रण हो तो सेक्स संबंधी इन विकारों से बचा जा सकता है।
जब किसी व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी होती है। इसका मतलब है वह व्यक्ति दिन भर में जितनी भी मीठी चीजें खाता है (चीनी, मिठाई, शक्कर, गुड़ आदि) वह ठीक प्रकार से नहीं पचती अर्थात उस व्यक्ति का अग्नाशय उचित मात्रा में उन चीजों से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसलिये वह चीनी तत्व मूत्र के साथ सीधा निकलता है। इसे पेशाब में शुगर आना भी कहते हैं। जिन लोगों को अधिक चिंता, मोह, लालच, तनाव रहते हैं, उन लोगों को मधुमेह की बीमारी अधिक होती है। मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रेागी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

तो ऐसी स्थिति मे हम क्या करें ?

एक छोटी सी सलाह है के आप इन्सुलिन पर जादा निर्भर न करे क्योंकि यह इन्सुलिन डाईबेटिस से भी जादा खतरनाक है, साइड इफेक्ट्स बहुत है ।
सामग्री:: 100 ग्राम मेथी दाना, 100 ग्राम तेज पत्र, 150 ग्राम जामुन की गुठली और 250 ग्राम बेल पत्र।
बनाने की विधि :: इन सब को अलग अलग धूप में सुखाकर इन्हे पत्थर पर पीस ले और बाद में सबको मिलाले इसका एक चम्म्च सुबह नाश्ता करने से पहले 1 गिलास गर्म पानी से ले ले और एक चम्म्च रात को खाना खाने से एक घण्टे पहले, इस दवा को 3 महिने लगातार लेने से मधुमेह (डायबिटीज) खत्म हो जाती है, इसके साथ रोजाना योग-प्राणायाम जरूर करें । 

परहेज और सावधानियां  : राज 

ज्यादा फ़ाईबर और कम फ़ैट वाली चीजे खाए जैसे सब्जीया खाए, दाल छिलके वाली ही खाएं। चीनी न खाए, देसी गुड खा सकते है (बिना कैमीकल वाला) फ़ल आदि जिसमें प्राक्रतिक शक्कर होती है वो सभी खा सकते हैं। 

नींबू से प्यास बुझाइए : राज 

मधुमेह के मरीज को प्यास अधिक लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने की अवस्था में नीबू निचोड़कर पीने से प्यास की अधिकता शांत होती है।

खीरा खाकर भूख मिटाइए : राज 

मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में बार-बार भूख महसूस होती है। इस स्थिति में खीरा खाकर भूख मिटाना चाहिए।

गाजर-पालक को औषधि बनाइए

इन रोगियों को गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है।

रामबाण औषधि है शलजम : राज 

मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। अतः शलजम की सब्जी, पराठे, सलाद आदि चीजें स्वाद बदल-बदलकर ले सकते हैं।

जामुन खूब खाइए : राज 

मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। जामुन को मधुमेह के रोगी का ही फल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में बेहद फायदेमंद हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन औषधि के रूप में खूब करना चाहिए। जामुन की गुठली संभालकर एकत्रित कर लें। इसके बीजों जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार, तीन ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शुगर की मात्रा कम होती है।

करेले का इस्तेमाल करें : राज 

प्राचीन काल से करेले को मधुमेह की औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसका कड़वा रस शुगर की मात्रा कम करता है। मधुमेह के रोगी को इसका रस रोज पीना चाहिए। इससे आश्चर्यजनक लाभ मिलता है। अभी-अभी नए शोधों के अनुसार उबले करेले का पानी, मधुमेह को शीघ्र स्थाई रूप से समाप्त करने की क्षमता रखता है।

मैथी का प्रयोग कीजिए : राज 

मधुमेह के उपचार के लिए मैथी दाने के प्रयोग का भी बहुत चर्चा है। दवा कंपनियाँ मैथी के पावडर को बाजार तक ले आई हैं। इससे पुराना मधुमेह भी ठीक हो जाता है। मैथीदानों का चूर्ण बनाकर रख लीजिए। नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिए। कुछ दिनों में आप इसकी अद्भुत क्षमता देखकर चकित रह जाएँगे।

चमत्कार दिखाते हैं गेहूँ के जवारे

गेहूँ के पौधों में रोगनाशक गुण विद्यमान हैं। गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड के नाम से पुकारा जाता है। जवारे का ताजा रस निकालकर आधा कप रोगी को तत्काल पिला दीजिए। रोज सुबह-शाम इसका सेवन आधा कप की मात्रा में करें।

अन्य उपचार : राज 

नियमित रूप से दो चम्मच नीम का रस, केले के पत्ते का रस चार चम्मच सुबह-शाम लेना चाहिए। आँवले का रस चार चम्मच, गुडमार की पत्ती का काढ़ा सुबह-शाम लेना भी मधुमेह नियंत्रण के लिए रामबाण है।

मोटा खाएं मस्त रहें : राज 

मोटे अनाज न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं बल्कि इनके इस्तेमाल से दिल की बीमारी कैल्शियम की कमी और कई तरह की बीमारियां आप के पास भी नहीं फटक पातीं। देहाती भोजन समझ कर जिन मोटे अनाजों को रसोई से कभी का बाहर किया जा चुका है, अब वैज्ञानिक शोध से बार-बार उनकी पौष्टिकता सिद्घ हो रही है। भारतीय खाद्य एवं चारा विभाग की फसल विज्ञानी डा. उमा रघुनाथन के मुताबिक धान और गेहूं की अपेक्षा छोटे खाद्यान्न जैसे मड़ुआ, कोदो, सावां तथा कुटकी आदि की पौष्टिकता अधिक है। 

परंपरागत तौर से रसोई घर से बाहर की कर दिए गए मोटे अनाज दिल की बीमारी, मधुमेह तथा डियोडिनम अल्सर से लड़ने में सहायक है। यही नहीं, सामान्य गेंहूं में जहां साल 2 साल में घुन लग जाता है वहीं मड़ुआ का दाना 2 दशक तक ज्यों का त्यों बना रहता है।

शुगर फ्री से घुल न जाए कडुवाहट : राज 

चॉकलेट, मिठाई, आईसक्रीम व सॉफ्ट ड्रिंक जैसी चीजों पर 'शुगर फ्री' लिखा देखकर गुमराह न हों, क्योंकि इनका लगातार इस्तेमाल न सिर्फ मधुमेह के स्तर व मोटापे की समस्या को बढ़ा सकता है, बल्कि सिरदर्द, पेट दर्द, अनिद्रा व चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुगर फ्री के नाम पर धड़ल्ले से परोसी जा रही इन चीजों में सिर्फ चीनी के इस्तेमाल से परहेज किया जाता है, दूध, खोया, घी जैसे फैट व कैलोरी के अन्य कंटेंट वही होते हैं, जो आम उत्पादों में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में 'शुगर फ्री है, तो नुकसान नहीं करेगा' इस भ्रम में मधुमेह ग्रस्त लोग इन चीजों का मुक्त रूप से इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं, जो कि काफी घातक साबित होता है। उल्लेखनीय है कि चॉकलेट, आईसक्रीम, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक जैसी जिन चीजों से मधुमेह रोगियों को परहेज करने के लिए कहा जाता है, कंपनियां उनके शुगर फ्री उत्पाद बाजार में लेकर आ जाते हैं, जिनका दावा होता है कि इनके इस्तेमाल से मधुमेह रोगियों को कोई समस्या नहीं होगी। आजकल शादी-विवाह व जन्मदिन आदि की पार्टियों में भी शुगर फ्री उत्पादों को परोसना फैशन ट्रेंड बन गया है और मधुमेह पीड़ित लोग भी बेफिक्र होकर इनका इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली डायबिटिक रिसर्च सेंटर की ओर से किए गए अध्ययन में पाया गया कि शुगर फ्री उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मुंह का स्वाद खराब रहने, माइग्रेन, पेट संबंधी दिक्कतें, चिड़चिड़ापन व इनसोमनिया जैसी समस्याएं आम होती हैं।

कपाल भाति से दूर होते हैं संपूर्ण रोग : राज 

यदि प्रत्येक व्यक्ति कपाल भाति प्राणायाम करता रहे तो वह संपूर्ण रोगों से मुक्ति पा सकता है। कपाल भाति प्राणायाम के निरंतर अभ्यास करने से मस्तिष्क व मुख मंडल पर तेज, आभा व सौंदर्य बढ़ता है साथ ही हृदय, फेफड़ों एवं मस्तिष्क के सभी रोग दूर होते है। मोटापा, मधुमेह, गैस, कब्ज, अम्लियत आदि के विकार दूर होते है यदि मनुष्य कपाल भाति प्राणायाम करता रहे तो शरीर निरोग रहता है। भ्रामरी प्राणायाम अनेक रोगों को दूर करता है। यह प्राणायाम आंख, कान, बालों के लिए काफी लाभदायक है इसके अलावा इससे मिरगी के चक्कर आना, हाथ, पैरों के सुनापन आदि बीमारियों में यह योग महत्वपूर्ण है। यह प्राणायाम बुद्धि वर्धक भी है। रोजाना इसे 3-4 मिनट तक करने से बुद्धि का विकास होगा व स्मरण शक्ति भी बढ़ेगी।

प्राणायाम और आसन

योग गुरु स्वामी रामदेव साधकों को प्राणायाम और आसन कराने के साथ ही इनकी खासियत भी बताते है। जीवन के रूपांतरण की सप्त प्रणायाम की क्रियाओं के सम्पूर्ण आरोग्य देने का जिक्र करते हुए स्वामी रामदेव ने भस्त्रिका प्राणायाम के बारे में बताया है कि लम्बा गहरा श्वास फेफड़ों में ढाई सेकेंड में भरो और ढाई सेकेंड में ही छोड़ो। सामान्य तरह से अधिकतम पांच मिनट और कैंसर या किसी अन्य समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को इसे 10 मिनट तक करना चाहिए। यानी सामान्यत: 50 से 60 बार और जटिलता में सौ बार यह प्रक्रिया दोहरानी है। कपाल भांति एक सेकेंड में एक बार करना चहिये। औसतन इससे एक झटके में एक ग्राम वजन कम होता है। कैंसर ल्यूकोडर्मा में कपालभांति 15 की जगह 30 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है। भस्त्रिका अगर अर्जन है तो कपालभांति विसर्जन। यह क्रिया 15 मिनट में नौ सौ होनी चाहिए। असाध्य रोगों में 18 सौ से दो हजार बार दोहराई जानी चाहिए। गत दिनों मैं जगकल्याण स्नेह मिलन कार्यक्रम के दौरान उनके हरिद्वार स्थित विशालकाय सभी सुखों से समृद्ध आश्रम में भी गया था जहाँ उन्होंने गहरा श्वास लेकर बाहर छोड़कर वाह्य प्राणायाम की क्रिया को तीन से पांच बार करने की सलाह देते हुए अनुलोम-विलोम प्राणायाम के बारे में बताया कि इसे एक चक्र में अधिकतम पांच मिनट करें और सामान्य रूप में कुल समय 15 मिनट और असाध्य रोगों की स्थिति में 30 मिनट दें। होंठ बंदकर ओंकार का गुंजन करने वाले भ्रामरी के साथ ही उन्होंने उद्गीत और प्रणाम प्राणायाम का जिक्र किया। साथ ही सहायक प्राणायाम उज्जायी के बारे में बताया कि यह गले और थायरायड की समस्याओं में लाभप्रद है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी शक्ति संकल्प की, विचार की और विश्वास की है। प्राणायाम यह सोचकर करो कि मैं बीमार नहीं हूं। उन्होंने कहा कि अतिपोषण और कुपोषण दोनों बीमारी का कारण हैं। अब तक अन्नमय कोष को खूब पोषित किया है, अब कमजोर पड़ते मनोमय, ज्ञानमय और आनन्दमय कोष को प्राणायाम से पोषित करो। प्रज्ञा का विस्तार होगा। प्राणायाम, सूक्ष्म व सम्पूर्ण व्यायाम के साथ उंन्होंने योग आसन के विषय में कहा कि जितनी भी संसार में आकृतियां हैं, पशु पक्षी हैं, उतने ही आसन हैं। लिहाजा सब आसन हमें नहीं करने, हमें सिर्फ वही योग करना है जो हमें निरोग बनाता हो। उन्होंने भुजंग, मर्कट, वज्र और सिंह आसन भी कराये।

कम खाएँ ज्यादा जिएँ : राज 

यदि आप कम खाते हैं, तो आप ज्यादा समय तक जिंदा रहेंगे। एक नए अध्ययन में ये बात सामने आई है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बहुत कम खाना शुरू कर दिया जाए, जो जीवन ही समाप्त कर दे। 1930 में यह पाया गया कि प्रयोगशाला में रहने वाले जीव कम कैलोरी वाले पदार्थ खाते हैं और लंबे समय तक जीवित रहते हैं। इन लोगों को कैंसर, मधुमेह और हृदयाघात जैसी शिकायतें कम ही होती है। परंतु फिर भी अभी तक इसके प्रमाण कम ही थे कि कम खाने वाले ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं। अब एन्ड्रयू डिलिन ने केलिफोर्निया के ला जोला स्थित साल्क इंस्टीट्यूट फॉर बायलॉजिकल स्टडीज में अध्ययन में एक जीन का पता किया है। इसका सीधा संबंध मनुष्य के जीवन से होता है। यह भी बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि यदि कैलोरी सीमित कर दी जाए तो इससे जीवन अवधि ब़ढ़ सकती है। शोध दल ने पाया कि शरीर पीएच-4 नाम की जीन होती है, जो मनुष्य में विकास के लिए जिम्मेदार होती है। परंतु वयस्कों में ये कैलोरी के साथ कार्य करती है। मनुष्य में पीएचए-4 के समान तीन जीन और भी होती हैं। ये जीन ग्लूकागॉन से संबंधित रहती है। इसका संबंध पेनक्रियाज के हार्मोन से बना रहता है। यही शरीर में रक्त शर्करा को ब़ढ़ाता है और शरीर का संतुलन बनाए रखता है, विशेष रूप से उपवास आदि के दौरान।

बुधवार, मार्च 04, 2015

कब्‍ज दूर करने के घरेलू उपचार

Constipation: Causes, Prevention and treatment as per Ayurveda
कैसे रुके कब्ज का कब्जा

सामान्य रूप से मल का निष्कासन ना होना तथा आंतों में मल का रूकना कब्ज कहलाता है॰

अक़सर आपका पेट ठीक तरह से साफ नहीं होता है तो इसका मतलब कब्ज हो सकता है और आपके शरीर में तरल पदार्थ की कमी है। कब्ज के दौरान आप खुद में तरोजाता महसूस नहीं कर पाते। कब्ज का यदि ठीक समय पर इलाज न कराया जाए तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकता है। कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कूते जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यांदि होती हैं। कब्ज के लिए प्रभावी प्राकृतिक उपचार तो मौजूद है ही साथ ही आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से भी कब्ज को दूर किया जा सकता है। आइए जानें कब्ज के लिए कौन-कौन से आयुर्वेदिक उपचार मौजूद हैं।
अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्‍ज और पेट गैस की समस्‍या आम बीमारी की तरह हो गई है। कब्‍ज रोगियों में गैस व पेट फूलने की शिकायत भी देखने को मिलती है। लोग कहीं भी और कुछ भी खा लेते हैं। खाने के बाद बैठे रहना, डिनर के बाद तुरंत सो जाना ऐसी आदतें हैं जिनके कारण कब्‍ज की शिकायत शुरू होती है। पेट में गैस बनने की बीमारी ज्‍यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है लेकिन यह किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकती है।
आइए हम आपको कब्‍ज से बचने के घरेलू नुस्‍खे के बारे में जानकारी देते हैं;

कब्‍ज के उपचार के घरेलू उपाय –

  • सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा।
  • 20 ग्राम त्रिफला रात को एक लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्‍ज की शिकायत दूर हो जाएगी।
  • कब्‍ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्‍मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्‍ज दूर हो जाता है।
  • हर रोज रात में हर्र को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्‍ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा।
  • रात को सोते वक्‍त अरंडी के तेल को हल्‍के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा।
  • इसबगोल की भूसी कब्‍ज के लिए रामबाण दवा है। दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्‍त इसबगोल की भूसी लेने से कब्‍ज समाप्‍त होता है।

  • पका हुआ अमरूद और पपीता कब्‍ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है।
  • किशमिश को पानी में कुछ देर तक डालकर गलाइए, इसके बाद किशमिश को पानी से निकालकर खा लीजिए। इससे कब्‍ज की शिकायत दूर होती है।
  • पालक का रस पीने से कब्‍ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्‍जी का प्रयोग करना चाहिए।
  • अंजीर के फल को रात भर पानी में डालकर गलाइए, इसके बाद सुबह उठकर इस फल को खाने से कब्‍ज की शिकायत समाप्‍त होती है।
  • मुनक्‍का में कब्‍ज नष्‍ट करने के तत्‍व मौजूद होते हैं। 6-7 मुनक्‍का रोज रात को सोने से पहले खाने से कब्‍ज समाप्‍त होती है।
  • कब्‍ज की समस्‍या से बचने के लिए नियमित रूप से व्‍यायाम और योगा करना चाहिए। गरिष्‍ठ भोजन करने से बचें।
इन नुस्‍खों को प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। अपनाने के बाद भी अगर पेट की बीमारी ठीक नही होती तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए।

इमली एक गुण अनेक

Tamarind is a property of Manyइमली के औषधीय गुण

इमली का फल कच्चा हरा, पकने के बाद लाल रंग का हो जाता है। पकी इमली का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। इसे खाने के बाद दांत तक खट्टे होने लगते हैं। एक इमली के फल में तीन से लेकर दस बीज निकलते हैं। ये बीज काले, चमकदार व बहुत कड़े होते हैं। इमली का खट्टा-मीठा स्वाद किसी के भी मुंह में देखते ही पानी ला देता है। इसीलिए इमली का उपयोग खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि इमली सिर्फ टेस्टी ही नहीं है चटखारेदार और मुँह में पानी लाने वाली इमली स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है : राजेश मिश्रा| 

वीर्य – पुष्टिकर योग : 

इमली के बीज दूध में कुछ देर पकाकर और उसका छिलका उतारकर सफ़ेद गिरी को बारीक पीस ले और घी में भून लें, इसके बाद सामान मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें | इसे प्रातः एवं शाम को 5-5 ग्राम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य पुष्ट हो जाता है | बल और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है तथा स्व-प्रमेह नष्ट हो जाता है |

शराब एवं भांग का नशा उतारने में :

  • नशा समाप्त करने के लिए पकी इमली का गूदा जल में भिगोकर, मथकर, और छानकर उसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर पिलाना चाहिए |
  • इमली के गूदे का पानी पीने से वमन, पीलिया, प्लेग, गर्मी के ज्वर में भी लाभ होता है |
  • ह्रदय की दाहकता या जलन को शान्त करने के लिये पकी हुई इमली के रस (गूदे मिले जल) में मिश्री मिलाकर पिलानी चाहियें |

लू-लगना : 

पकी हुई इमली के गूदे को हाथ और पैरों के तलओं पर मलने से लू का प्रभाव समाप्त हो जाता है | यदि इस गूदे का गाढ़ा धोल बालों से रहित सर पर लगा दें तो लू के प्रभाव से उत्पन्न बेहोसी दूर हो जाती है |

चोट – मोच लगना : 

इमली की ताजा पत्तियाँ उबालकर, मोच या टूटे अंग को उसी उबले पानी में सेंके या धीरे – धीरे उस स्थान को उँगलियों से हिलाएं ताकि एक जगह जमा हुआ रक्त फ़ैल जाए |

गले की सूजन : 

इमली 10 ग्राम को 1 किलो जल में अध्औटा कर (आधा जलाकर) छाने और उसमें थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर रोगी को गरारे या कुल्ला करायें तो गले की सूजन में आराम मिलता है |

खांसी : 

टी.बी. या क्षय की खांसी हो (जब कफ़ थोड़ा रक्त आता हो) तब इमली के बीजों को तवे पर सेंक, ऊपर से छिलके निकाल कर कपड़े से छानकर चूर्ण रख ले| इसे 3 ग्राम तक घृत या मधु के साथ दिन में 3-4 बार चाटने से शीघ्र ही खांसी का वेग कम होने लगता है | कफ़ सरलता से निकालने लगता है और रक्तश्राव व् पीला कफ़ गिरना भी समाप्त हो जाता है |

ह्रदय में जलन : 

इमली का रस मिश्री के साथ पिलाने से ह्रदय में जलन कम हो जाती है |

नेत्रों में गुहेरी होना : 

इमली के बीजों की गिरी पत्थर पर घिसें और इसे गुहेरी पर लगाने से तत्काल ठण्डक पहुँचती है |

चर्मरोग : 

लगभग 30 ग्राम इमली (गूदे सहित) को 1 गिलाश पानी में मथकर पीयें तो इससे घाव, फोड़े-फुंसी में लाभ होगा|
उल्टी होने पर पकी इमली को पाने में भिगोयें और इस इमली के रस को पिलाने से उल्टी आनी बंद हो जाती है |

भांग का नशा उतारने में : 

नशा उतारने के लिये शीतल जल में इमली को भिगोकर उसका रस निकालकर रोगी को पिलाने से उसका नशा उतर जाएगा |

खूनी बवासीर : 

इमली के पत्तों का रस निकालकर रोगी को सेवन कराने से रक्तार्श में लाभ होता है |

शीघ्रपतन : 
Tamarind Jam and Morabba : Rajesh Mishra

  • लगभग 500 ग्राम इमली 4 दिन के लिए जल में भिगों दे | उसके बाद इमली के छिलके उतारकर छाया में सुखाकर पीस ले | फिर 500 ग्राम के लगभग मिश्री मिलाकर एक चौथाई चाय की चम्मच चूर्ण (मिश्री और इमली मिला हुआ) दूध के साथ प्रतिदिन दो बार लगभग 50 दिनों तक लेने से लाभ होगा |
  • लगभग 50 ग्राम इमली, लगभग 500 ग्राम पानी में दो घन्टे के लिए भिगोकर रख दें उसके बाद उसको मथकर मसल लें | इसे छानकर पी जाने से लू लगना, जी मिचलाना, बेचैनी, दस्त, शरीर में जलन आदि में लाभ होता है तथा शराब व् भांग का नशा उतर जाता है | 

बहुमूत्र या महिलाओं का सोमरोग : 

इमली का गूदा 5 ग्राम रात को थोड़े जल में भिगो दे, दूसरे दिन प्रातः उसके छिलके निकालकर दूध के साथ पीसकर और छानकर रोगी को पिला दे | इससे स्त्री और पुरुष दोनों को लाभ होता है | मूत्र- धारण की शक्ति क्षीण हो गयी हो या मूत्र अधिक बनता हो या मूत्रविकार के कारण शरीर क्षीण होकर हड्डियाँ निकल आयी हो तो इसके प्रयोग से लाभ होगा |

अण्डकोशों में जल भरना : 

लगभग 30 ग्राम इमली की ताजा पत्तियाँ को गौमूत्र में औटाये | एकबार मूत्र जल जाने पर पुनः गौमूत्र डालकर पकायें | इसके बाद गरम – गरम पत्तियों को निकालकर किसी अन्डी या बड़े पत्ते पर रखकर सुहाता- सुहाता अंडकोष पर बाँध कपड़े की पट्टी और ऊपर से लगोंट कास दे | सारा पानी निकल जायेगा और अंडकोष पूर्ववत मुलायम हो जायेगें |

पीलिया या पांडु रोग : 

इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भष्म 10 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से पान्डु रोग ठीक हो जाता है |

आग से जल जाने पर : 

इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भष्म गाय के घी में मिलाकर लगाने से, जलने से पड़े छाले व् घाव ठीक हो जाते है |

पित्तज ज्वर : 

इमली 20 ग्राम 100 ग्राम पाने में रात भर के लिए भिगो दे | उसके निथरे हुए जल को छानकर उसमे थोड़ा बूरा मिला दे | 4-5 ग्राम इसबगोल की फंकी लेकर ऊपर से इस जल को पीने से लाभ होता है |

सर्प , बिच्छू आदि का विष : 

इमली के बीजों को पत्थर पर थोड़े जल के साथ घिसकर रख ले | दंशित स्थान पर चाकू आदि से छत करके 1 या 2 बीज चिपका दे | वे चिपककर विष चूसने लगेंगे और जब गिर पड़े तो दूसरा बीज चिपका दें | विष रहने तक बीज बदलते रहे |

मंगलवार, मार्च 03, 2015

राज कि छोटी-छोटी मगर मोटी-मोटी बातें

Get compliments of the house as a Doctor

घर का डॉक्टर बनें तारीफ पाएं


छोटी-छोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स सभी को कभी न कभी होती है। यदि आप घर पर ही ऐसी प्रॉब्लम्स का उपाय करना चाहते हैं तो आज राजेश मिश्रा आपको बता रहे हैं ऐसे महत्वपूर्ण घरेलू नुस्खे, जिनका पता होने पर आप कुछ साधारण रोगों का इलाज खुद कर सकते हैं और घर का डॉक्टर कहलाने के साथ-साथ तारीफ भी पाएंगे.. 
पेट दर्द - अाधा चम्मच हल्दी और आधे चम्मच नमक को मिलाकर ठंडे पानी से फांकी मार लें। पेट दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
बालों का गिरना - यदि आपके बालों में रूसी है या फिर आपके बाल झड़ रहे हैं तो आप कच्चे पपीते का पेस्ट बनाकर बालों की जड़ों पर 10 मिनट तक लगाएं। उसके बाद बाल धो लें। ऐसा करने से आपके बाल नहीं झड़ेंगे।

खून की खराबी - खून साफ नहीं हैं तो 1 चम्मच शहद को आधे गिलास पालक के रस में मिलाकर 1 महीने तक सेवन करें। यह आपके रक्त विकार को दूर करेगा और खून को साफ रखेगा।
स्किन प्रॉब्लम - नारियल पानी में कच्चा दूध, नींबू का रस, बेसन और चंदन पाउडर मिलाकर लेप तैयार करें। नहाने से 15 मिनट पहले ये लेप चेहरे पर लगाएं। उसके बाद चेहरा धो लें। यह नुस्खा स्किन प्रॉब्लम दूर कर चेहरे को चमकदार बनाता है।
एसिडिटी - भोजन करने के बाद आप थोड़े से गुड़ का सेवन करें। ऐसा करने से एसिडिटी की समस्या खत्म हो जाएगी।
सिरदर्द - एक गिलास गर्म पानी में आधे नींबू का रस डालकर पिएं। सिर दर्द दूर हो जाएगा। साथ ही युकेलिप्टस के तेल से सिर की मसाज करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है।
गैस्ट्रिक ट्रबल - अजवायन और काला नमक पीस कर समान मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को एक चम्मच मात्रा में गर्म पानी से लें। गैस की समस्या में तुरंत आराम मिलेगा।
गैस्ट्रिक ट्रबल - एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नीबू, थोड़ा सा काला नमक, सिका हुआ जीरा और थोडी सी हींग मिलाकर लेने से गैस की तकलीफ में तत्काल राहत मिलती है।
जुकाम - यदि जुकाम या सर्दी हो तो रात को सोने से पहले गर्म पानी पीकर सोएं। जुकाम में बहुत राहत मिलेगी।

घरेलू उपचार

1. अपनी दवा ठंडे पानी से मत लें।

2. पांच बजे शाम के बाद भारी खाना न खाएं।

3. सुबह में रात की अपेक्षा ज्यादा पानी पियें.

4. सोने का सबसे बेहतर समय 10 बजे रात से 4 बजे सुबह होता है।

5. खाना खाने के तुरंत बाद न ही सोयें या न ही लेटे.

6. फ़ोन कॉल बाएं कान से सुनें।

7. जब मोबाइल फ़ोन बिलकुल डिस्चार्ज हो रहा हो तो उस समय फ़ोन न सुने क्योंकि उस समय रेडिएशन

1000 गुना ज्यादा होता है।

8. चार्ज में लगे फ़ोन से फ़ोन न ही करें, न ही रिसीव करें. उस समय रेडिएशन ज्यादा निकलता है।

दांत दर्द-

  • दांत का दर्द अगर परेशान कर रहा हो तो पांच लौंग पीस कर उसमे निम्बू का रस निचोड़कर दांतो पर मलने से दर्द दूर होता है। 
  • दांत में कीड़ा लगने पर दांतो के नीचे लौंग को रखना या लौंग का तेल लगाना चाहिए। 
  • पांच लौंग एक ग्लास पानी में उबालकर इसमें कुल्ले करने से दर्द ठीक हो जाता है। 
  • नीम की कोंपलों को उबाल कर कुल्ले करने से दांतो का दर्द जाता रहता है। 
  • दर्द वाले दांत पर कपूर लगाएं। दांत में छेद हो तो उसमे कपूर भर दें। दर्द दूर होगा, कीड़े भी मर जाएंगे।
  • गर्म पानी में मिलकर कुल्ले करने से दांत दर्द में लाभ होता है। नित्य रात को सोने से पहले गर्म पानी में 
  • नमक डाल कर गरारे करके सोने से दांतों में कोई रोग नहीं होता। 
  • अदरक के टुकड़े पर नमक डालकर दर्द वाले दांतो में दबाएं, आराम मिलेगा। 

खजूर-

  • खजूर को शीतकालीन का फल माना गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए यह पित्त के अनेक रोगों में लाभदायक हता है। शरीर के विकास के लिए यह श्रेष्ठ फल है। आइये जानें इसके फ़ायदे। 
  • सुखी खांसी होने पर दिन में दो बार सुबह और शाम खजूर खाने से लाभ होता है। 
  • खजूर का सेवन करने से पाचन-क्रिया ठीक होती है। पेट के दर्द और कब्ज़ के लिए लाभकारी है। 
  • दूध के साथ खजूर खाने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। 
  • खजूर और दही खाने से पेचिश में लाभ होता है। 
  • गुठली निकाले हुए दो खजूरों में थोड़ा सा शुद्ध घी, दो दाने काली मिर्च मिलकर एक महीना खाएं और ऊपर से दूध पिएं। इस तरह आपको अद्भुत शक्ति मिलेगी।

मेथी -

हम बात कर रहे है मेथी की । आइए जाने इसके फ़ायदे । 
  • इसे खाने से भूख बढ़ती है और कमर व पीठ दर्द में लाभ होता हैं । 
  • भले ही इसे कफ और ज्वर का कारक माना जाता रहा हो लेकिन यह शरीर की कई कृमियों का विनाश करती है । 
  • आग से जलने पर दानेदार मेथी को पानी में पीसकर लेप लगाने से जलन दूर हो जाती हैं । 
  • दानेदार मेथी की फंकी गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता हैं। 
  • अगर भूख ना लगती हो तो 7 ग्राम मेथी दाने में थोड़ा सा घी डालकर सके जब यह लाल होने लगे तो उतार कर ठंढा करें फिर पीस लें । इसके बाद इसमें शहद मिलाकर डेढ़ महीने तक चाटे ,भूख बढऩे लगेगी। 
  • डायबिटीज के रोगियों के लिए भी यह काफ़ी लाभदायक हैं । इसके सेवन से शरीर में शुगर लेवल कम होने के साथ कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होने लगता हैं ।