दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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रविवार, जुलाई 19, 2015

नाक की खूबसूरती के लिए राज का अनोखा उपाय

आपके खूबसूरती में चार चाँद लगा देंगे ये टिप्स

महिलाओं की खूबसूरती का आकलन सबसे पहले उनके नैन - नक्श से किया जाता है ! लंबे घने बाल, बड़ी - बड़ी आंखें, पिंक लिप्स और शार्प नोज वाले फीचर्स किसी एक महिला में मिलना बहुत ही मुश्किल होता है! चेहरा हमारे बॉडी का सबसे खूबसूरत पार्ट होता है और नाक उससे भी ज्यादा, जो हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचती है ! शॉर्प नोज वाले चेहरे पर मेकअप करना भी बहुत आसान होता है ! ज्यादातर महिलाएं नाक को शेप में लाने के लिए सर्जरी का सहारा लेने लगी हैं - इसमें पैसे के साथ ही काफी समय भी लगता है ! इन दोनों प्रकार की समस्याओं से बचने और नाक को शेप में लाने के लिए कुछ ऐसी एक्सरसाइज हैं, जिन्हें घर पर करना भी आसान है और ये काफी हद तक कारगर भी हैं !

1. नाक पर प्रेशर लगाना ..... !

उम्र के साथ - साथ बॉडी में कई प्रकार के चेंजेज होते हैं, खासतौर से हड्डियों और मसल्स में ।
यही कारण है कि जन्म के बाद से ही छोटे बच्चों की मालिश पर खास ध्यान दिया जाता है
उनकी नाक को भी मालिश के दौरान शेप दिया जाता है !
छोटी नाक पाने के लिए उंगली को नाक के नीचे लगाएं और धीरे - धीरे उसे ऊपर - नीचे करें
इस एक्सरसाइज को करने से नाक की हड्डी शेप में बनी रहती है अगर शेप में नहीं है तो आ जाती है - नाक को ऊपर - नीचे करते वक्त हल्का - सा प्रेशर भी लगाएं !
दिन में जितनी बार इस एक्सरसाइज को करेंगे - उतना ही फायदा मिलेगा !

2. हंसना - मुस्कुराना .... !

हंसने - मुस्कुराने से सिर्फ सेहत ही अच्छी नहीं होती, बल्कि इससे चेहरे के मसल्स की भी अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है । 
जानकर आश्चर्य होगा कि हंसने से नाक को भी शेप में लाया जा सकता है !
सीधी नाक पाने के लिए खुलकर हंसना सबसे बेहतरीन एक्सरसाइज है - इससे नाक के साइड के मसल्स शेप में आते हैं, जिससे नाक बिल्कुल सीध में आ जाती है अगर वो हल्की - सी भी टेढ़ी - मेढ़ी है तो !

3. सांस की एक्सरसाइज .... !

नाक के बेहतर शेप और उसे सीधी करने के लिए सबसे बेस्ट है ब्रीदिंग एक्सरसाइज !
हाथ की उंगली से नाक को एक साइड से बंद करके दूसरी साइड से गहरी सांस लें और फिर दूसरा साइड बंद करके पहली साइड से सांस छोड़ें !
कम से कम 5 से 10 बार इस एक्सरसाइज को करें !
ये एक्सरसाइज सिर्फ नाक को शेप में लाने के ही लिए नहीं, बल्कि बॉडी को रिलैक्स करने में भी बहुत ही कारगर होती है !

4. साइड प्रेसिंग ..... !

पतली नाक पाने की ख्वाहिश लगभग सभी महिलाओं को होती है, क्योंकि ये खूबसूरती को बढ़ाती है ! लेकिन बचपन में नाक की सही मालिश न होने के कारण वो चौड़ी हो जाती है !
इस एक्सरसाइज को करके नाक को पतला किया जा सकता है !
दोनों हाथों की उंगलियों से नाक को दोनों साइड से दबाते हुए उसे आगे की ओर ले जाएं !
जितनी बार हो सके - उतनी बार इस एक्सरसाइज को करें !

5. मुंह की एक्सरसाइज ..... !

नाक के आसपास की लाइन जिसे स्माइल लाइन कहा जाता है और जो बढ़ती उम्र के साथ और भी गहरी होती जाती है, चेहरे के लुक्स को बिगाड़ देती है !
इससे छुटकारा पाने में ये एक्सरसाइज आपकी मदद कर सकती है !
मुंह के अंदर हवा भर के उसे 5 सेकंड तक बंद करके रखें ! इस एक्सरसाइज को दाएं - बाएं, ऊपर - नीचे चारों तरफ मुंह में हवा भरकर करें और 5 सेकंड तक होल्ड करने के बाद छोड़े !
मसल्स की टाइटनेस बनी रहेगी, साथ ही नाकों का शेप भी !

6. लेफ्ट - राइट मूवमेंट ..... !

इस एक्सरसाइज को करने से नाक की मसल्स रिलैक्स होती है, जिससे उसे शेप मिलता है
सांसों को अंदर खींचकर नाक को लेफ्ट - राइट मूव करें !
नाक के होल को जल्दी - जल्दी खोलें - बंद करें !
कुछ देर की एक्सरसाइज नाक को बेहतर शेप दे सकती है !
एक्सरसाइज करने के दौरान चेहरे के मूवमेंट्स का ख्याल रखें !

7. नाक की मसाज ...... !

खूबसूरत शेप के लिए नाकों की मसाज बहुत ही जरूरी है - मसाज से केवल शेप ही नहीं, साइनस और माइग्रेन में भी आराम मिलता है !
नाक को ऊपर से लेकर नीचे और दाएं से लेकर बाएं किसी अच्छी क्रीम या ऑयल से मसाज करें !
रोजाना 5 मिनट की मसाज करके इसका असर देखा जा सकता है ! 
लगातार एक महीने तक इस एक्सरसाइज को करें !

ये घरेलु नुस्खे हैं बेजोड़ ...राज

होमियो या एलोपैथिक दवा बार-बार लेने से बचें ...!

आज की लाइफस्टाइल और भाग - दौड़ की जिंदगी में आए दिन होने वाली इन तकलीफों में आराम पाने के लिए आजमाएं ये नुस्खे ...
* पीरियड्स का दर्द कुछ कम हो, इसके लिए एक गिलास ठंडे पानी में 2 - 3 नींबू निचोड़ कर पी लें !
* अगर तेज सिरदर्द हो - तो सेब काटकर उसमें थोड़ा सा नमक मिला कर सुबह खाली पेट खाएं - काफी आराम मिलेगा !
* बार - बार पेट फूलता है, तो पानी में 1/4 चम्मच बेकिंग सोडा पानी में मिलाकर पीने से आराम मिलेगा !
* अगर गले की खराश से परेशान हैं, तो 2 - 3 तुलसी की पत्तियों को डालकर पानी में उबाल लें - इस पानी से गरारा करें !
* मुंह के अल्सर में पका केला और शहद मिला कर खाने से काफी आराम मिलता है - इसे मुंह में लगाया भी जा सकता है !
* इसी तरह हाई बी पी का घरेलु इलाज करें - इसके लिए थोड़ा - थोड़ा मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांक लें!
( यह पाउडर डायबिटीज में भी लाभकारी है )
* अस्थमा है, तो आधा चम्मच दालचीनी पाउडर शहद में मिलाकर सोने से पहले खाएं - कुछ दिनों में फर्क महसूस करेंगे !
* कहीं जलन हो रही है या फिर धूप से त्वचा झुलस गई हो - कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है !
तरबूज के छिलके के सफेद भाग में कपूर और चंदन मिलकर लेप करें - जलन से शांति मिलेगी !
* जोड़ों के दर्द मेंं एक गिलास गर्म पानी में नींबू निचोड़कर दिन में 8 से 10 बार पीएं !
* बुखार आने पर अजवाइन चूर्ण आधा चम्मच दिन में तीन बार खाएं - जल्द राहत मिलेगी और बुखार उतर जाएगा !
* सरसों के तेल में 3 - 4 लहसुन की कली डालकर पका लें और ठंडा कर लें - इस तेल से मालिश करने से बदन दर्द में आराम मिलेगा !
* सौंफ और मिश्री का समभाग चूर्ण मिलाकर दो चम्मच दोनों समय भोजन के बाद लेते रहने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है !
* खरबूजे के साथ खरबूजे के बीज भी खाने चाहिए - क्योंकि बीज स्मरण शक्ति बढ़ाने व शरीर का पोषण करने में समर्थ हैं !
* गर्मी से चक्कर आना - उल्टी जैसा बार - बार लगता है, तो एक बर्तन में सौ ग्राम धनिया कूटकर डाल दें - उसमें लगभग आधा किलो पानी डाल दें ! एक घंटे बाद आधा कप पानी छानकर उसमें पांच बताशे डालकर हर तीन घण्टे में पीएं !
* तुलसी के पत्तों के रस में शहद या शक्कर मिला चाटने से चक्कर आना बन्द होता है !
* सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग उबालकर उस पानी को पीने से लाभ मिलता है !

गुरुवार, जुलाई 16, 2015

मुल्तानी मिटटी से दें चेहरे को रौनक

साबुन से ज्यादा कारगर है मुल्तानी मिटटी
आइये जानते हैं कुछ इसी तरह का राज का घरेलु उपचार


मुल्तानी मिटटी और पानी को आपस में मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को तैलीय त्वचा पर लगाएं। पूरी तरह सूखने के बाद इसे धो लें। यह सच है कि आप चाहकर भी अपनी लाइफस्टाइल नहीं बदल सकते और न ही ऎसी चीजों को छोड़ सकते हैं जो आपकी जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन आप सचेत रह सकते हैं और खतरों को कम कर सकते हैं। आखिर कब हम पूर्ण स्वास्थ्य को प्राप्त कर पाएंगे? इसका जवाब खोजने के लिए हमें "बैक टू बेसिक्स" के सिद्धांत पर काम करना होगा। हमें फिर से कुदरत के करीब जाना होगा-

मुलतानी मिट्टी के अनोखे उपयोग जो त्वचा को कोमल और दमकता बनाएं-

  • यदि आपकी त्वचा आॅयली है तो आप मुल्तानी मिट्टी में पुदीना की पत्तियों का पेस्ट और दही को मिलाकर अच्छे से मिला लें और इस पेस्ट को चेहरे से गर्दन तक लगाएं। और आधे घंटे तक तब तक रहने दें जब तक पेस्ट पूरी तरह से न सूख जाए। इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें। यह चेहरे की चिकनाई को खत्म करता है।
  • यदि मुंहासों से परेशान हो तो मुल्तानी मिट्टी को पानी में भिगोकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर इस पेस्ट को लगाने से मुंहासों से निजात मिलता है।
  • यदि आप अपने बालों को मुलायम और चमकदार बनाना चाहते हैं तो मुल्तानी मिट्टी के पेस्ट को आप बालों पर भी लगा सकते हैं, मुल्तानी मिट्टी को एक कटोरे में भिगो लें और 2 घंटे के बाद जब मुल्तानी मिट्टी पूरी तरह से घुल जाए, इस पेस्ट को सूखे बालों पर लगा लें, आधे घंटे के बाद बालों को गुनगुने पानी से धो लें।
  • आपकी त्वचा रूखी है तो आप दूध में काजू को भिगोकर रातभर एक कटोरे में रहने दें और सुबह इन्हें पीसकर मुल्तानी मिट्टी में मिला लें और उसमें थोड़ी शहद की बूंदे डालकर पेस्ट तैयार करें और इसे स्क्रब के रूप पर चेहरे पर लगालें।
  • इस तरह प्राकृतिक के रूप में मिले मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग से आप अपनी सुंदरता को लंबे समय तक बनाये रख सकते हैं। प्राचीन समय से इसका प्रयोग होता आया है लेकिन आधुनिक काॅस्मेटिक्स के प्रयोग से लोग जल्द ही अपनी सुंदरता को खो रहे हैं। कोशिश जरूर करें मुल्तानी मिट्टी के प्रयोग का।

मुल्तानी मिट्टी लगाएं

आज के जमाने में कई लोग खुशबू के फेर में तरह-तरह के साबुन इस्तेमाल करते हैं। इन साबुनों में कई तरह के कैमिकल होते हैं जो कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं। आप साबुन के बजाय मुल्तानी मिट्टी को नहाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर नहाते वक्त सफाई का पूरा खयाल रखा जाए तो वैसे भी साबुन की जरूरत नहीं रहती।

सच्चे स्वास्थ्य का इंतजार

आपको अपने खानपान, रहन-सहन और दिनचर्या में बदलाव करना होगा। आपको कृत्रिम चीजों के बजाय कुदरती चीजों का इस्तेमाल करना होगा। अगर आप बनावटी संसार में फंसे रहेंगे तो सच्ची सेहत कभी प्राप्त नहीं कर पाएंगे। यह सच है कि आप एकदम से अपनी लाइफस्टाइल नहीं बदल सकते और न ही खतरनाक चीजों को फौरन अपने जीवन से बाहर निकाल सकते हैं। लेकिन जानकारी होने पर सचेत रहकर खतरों को कम कर सकते हैं। सच्चा स्वास्थ्य आपका इंतजार कर रहा है। ... तो फिर देर किस बात की, जानते हैं उन तरीकों के बारे में जो सेहत में सकारात्मक बदलाव लेकर आएंगे। लेकिन इन बदलावों के लिए आपको सबसे पहले अच्छी सेहत के लिए दृढ़ निश्चय करना होगा।

दातुन चबाएं

कई शोध टूथपेस्ट को कैंसर का कारक बता रहे हैं। ऎसे में नीम की दातुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। दांतों के लिए नीम की दातुन काफी फायदेमंद रहती है। अगर नियमित तौर पर दातुन न मिले तो भी खाली ब्रश करके या सप्ताह में केवल दो बार पेस्ट लगाकर भी हम खतरे को कम कर सकते हैं।

पानी को उबालकर पिएं

आज ज्यादातर घरों में पानी साफ करने के लिए आरओ मशीन लगी हुई है। लेकिन कई बार ज्यादा मशीनी पानी भी नुकसान दे सकता है। आरओ की जगह पर पानी को अच्छी तरह से उबालकर तांबे के बर्तन में रखकर इस्तेमाल किया जा सकता है। जैन धर्म में धोवन पानी की परंपरा है। पानी में राख मिलाकर धोवन पानी तैयार किया जाता है।

सूती कपड़े और नीम


आजकल फॉइल पेपर में रोटियां लपेटकर रखी जाती हैं। इसके स्थान पर सूती कपड़े में भी रोटियां रखी जा सकती हैं। रेफ्रिजरेटर के इस्तेमाल को भी सीमित करने की जरूरत है। वहीं नीम की पत्तियां कीटाणुओं का नाश कर सकती हैं। इन्हें पानी में उबालकर इस्तेमाल में लिया जा सकता है। यह एंटीसेप्टिक लिक्विड का विकल्प हो सकती हैं।

दवाओं का ज्यादा सेवन

बात-बात में पेनकिलर लेना कैंसर के कारक हो सकते हैं। हमें अपनी सहनशीलता बढ़ानी चाहिए। थोड़ी-सी परेशानी होने पर दवाइयों के पीछे नहीं भागना चाहिए। इसके बजाय घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

बुधवार, जुलाई 15, 2015

थायराइड मरीज के लिए डाइट चार्ट

Diet Chart for Thyroid patient

थायराइड बहुत ही आवश्‍यक ग्रंथि है। यह ग्रंथि गले के अगले-निचले हिस्‍से में होती है। थायराइड को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। क्‍योंकि इसका लक्षण एक साथ नही दिखता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो आदमी की मौत हो सकती है। यह ग्रंथि होती तो बहुत छोटी है लेकिन, हमारे शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में इसका बहुत योगदान होता है।

थाइराइड एक प्रकार की इंडोक्राइन ग्रंथि है, जो कुछ हार्मोन के स्राव के लिए जिम्‍मेदार होती है। यदि थाइराइड ग्रंथि अच्‍छे से काम करना बंद कर दे तो शरीर में कई समस्‍यायें शुरू हो जाती हैं। शरीर से हार्मोन का स्राव प्रभावित हो जाता है। लेकिन यदि थायराइड ग्रंथि कम या अधिक सक्रिय हो तब भी शरीर को प्रभावित करती है।

लाइफस्‍टाइल और खान-पान में अनियमितता बरतने के कारण थायराइड की समस्‍या होती है। अगर शुरूआत में ही खान-पान का ध्‍यान रखा जाए तो थायराइड की समस्‍या होने की संभावना कम होती है। थायराइड के मरीजों का डाइट चार्ट कैसा हो, हम आपको उसकी जानकारी देते हैं।

थायराइड रोगियों के लिए डाइट चार्ट -

  • अपनी डाइट चार्ट में ऐसे खाद्य-पदार्थों को शामिल कीजिए जिसमें आयोडीन की भरपूर मात्रा हो। क्‍योंकि आयोडीन की मात्रा थायराइड फंक्‍शन को प्रभावित करती है।
  • समुद्री जीवों में सबसे ज्‍यादा आयोडीन पाया जाता है। समुद्री शैवाल, समुद्र की सब्जियों और मछलियों में आयोडीन की भरपूर मात्रा होती है।
  • कॉपर और आयरन युक्‍त आहार के सेवन करने से भी डायराइड फंक्‍शन में बढ़ोतरी होती है।
  • काजू, बादाम और सूरजमुखी के बीज में कॉपर की मात्रा होती है।
  • हरी और पत्‍तेदार सब्जियों में आयरन की भरपूर मात्रा होती है।
  • पनीर और हरी मिर्च तथा टमाटर थायराइड गंथि के लिए फायदेमंद हैं।
  • विटामिन और मिनरल्‍स युक्‍त आहार खाने से थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि होती है।
  • प्‍याज, लहसुन, मशरूम में ज्‍यादा मात्रा में विटामिन पाया जाता है।
  • कम वसायुक्‍त आइसक्रीम और दही का भी सेवन थायराइड के मरीजों के लिए फायदेमंद है।
  • गाय का दूध भी थायराइड के मरीजों को पीना चाहिए।
  • नारियल का तेल भी थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि करता है। नारियल तेल का प्रयोग सब्‍जी बनाते वक्‍त भी किया जा सकता है।

थायराइड के रोगी इन खाद्य-पदार्थों को न खायें -

  • सोया और उससे बने खाद्य-पदार्थों का सेवन बिलकुल मत कीजिए।
  • जंक और फास्‍ट फूड भी थायराइड ग्रंथि को प्रभावित करते हैं। इसलिए फास्‍ट फूड को अपनी आदत मत बनाइए।
  • ब्राक्‍कोली, गोभी जैसे खाद्य-पदार्थ थायराइड फंक्‍शन को कमजोर करते हैं।

थायराइड थायराइड के मरीजों को डाइट चार्ट का पालन करना चाहिए, साथ ही नियमित रूप से योगा और एक्‍सरसाइज भी जरूरी है। नियमित व्‍यायाम करने से भी थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि होती है। थायराइड की समस्‍या बढ़ रही हो तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए।

डॉक्टर के सलाह के बगैर कभी ना खाएं दवाईयां यह आपके लिए घातक हो सकता है

बेवजह दवा खाने से बचें उम्र बढ़ जाएगी 




जहां तक हो सके अपनी मर्जी से दवाओं का इस्तेमाल न करें। लोगों में यह आम धारणा है कि छोटी-मोटी तकलीफ होने पर वह अपनी मर्जी से कोई भी दवाई खा लेते हैं इसलिए वह अपने घरों में क्रोसिन, इबूप्रोफेन, एमोक्सीसिलिन जैसी गोलियों से लेकर बैनेड्रिल जैसे कफ सिरप भी रखते हैं. लेकिन आपको इस बात का अंदाजा नहीं है कि आपकी यह छोटी सी लापरवाही आपके लिए कितना बड़ा जोखिम बन सकती है. बिना सोचे समझे दवाईयों के सेवन से साइड इफेक्टस भी हो सकता है. इसके अलावा किसी आम तथा अस्थायी समस्या को ठीक करने के स्थान पर यह दवाइयां गुर्दे की खराबी जैसी किसी गम्भीर समस्या से ग्रस्त करने की वजह भी बन सकती हैं. इसी तरह से लंबे समय तक इन्हें इस्तेमाल करने से खतरनाक व्याधियां या अंगों को अपूर्णीय क्षति पहुंच सकती है.

शोध द्वारा यहबात साबित हुई है कि एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक या गलत प्रयोग की वजह से कुछ सर्वाधिक प्रभावी एंटीबायोटिक दवाइयां भी बेअसर साबित हो रही हैं. इसके अलावा कई केसों में डॉक्टर भी जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक्स दे देते हैं. यह भी देखा गया है कि लोग अपने आप ही एंटीबायोटिक्स का सेवन करते रहते हैं तथा अक्सर ही वे इसका कोर्स पूरा नहीं करते यानी वे तय अवधि से पहले ही इसका सेवन बंद कर देते हैं. इन्हीं कारणों से एंटीबायोटिक बेअसर साबित हो रहे हैं. कई लोगों को तो इस बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं होती. आईए आपको बताते हैं इस बारे में-

कफ सिरप(खांसी-जुकाम दवाई)
बैनेड्रिल, कोरेक्स, फैंसिडिल आदि
कब दिया जाता है: छाती जाम होने, जुकाम, खांसी, गला दर्द तथा अन्य संबंधित समस्या होने पर

साइड इफैक्ट्स: दिल मिचलाना, उनींदापन, चक्कर, आंखों की पुतलियों का फैलना, याद्दाश्त की खराबी, अवसाद तथा घबराहट.

अत्यधिक इस्तेमाल से: कफ सिरप का लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से शरीर के विभिन्न अंगों के संचालन में गड़बड़ी, थाइरॉयड की समस्या, अतिसक्रियता, मतिभ्रम, दौरा, उच्च रक्तचाप, पेट में दर्द तथा दिल की धड़कन में गड़बड़ी आ सकती है.

जानकारों के अनुसार: दो तरह की कफ सिरप हैं- एक्सपैक्टोरैंट्स तथा सप्रैसैंट्स. जहां सप्रैसैंट्स खांसने की उत्तेजना को कम करके खांसी को नियंत्रित करते हैं वहीं एक्सपैक्टोरैंट्स बलगम को बढ़ा कर अधिक खांसने को बाध्य करते हैं. सप्रैसैंट्स का प्रयोग सूखी खांसी के इलाज में होता है जबकि एक्सपैक्टोरैंट्स का प्रयोग बलगम वाली खांसी के इलाज हेतु किया जाता है. कुछ अन्य तरह की खांसी भी है जिनके लिए एंटीहिस्टामाइन(एलर्जी तथा जुकाम के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ड्रग्स) बेहतर काम करते हैं. लोग बिना जाने अपनी मर्जी से किसी भी कफ सिरप का सेवन कर लेते हैं. उच्च रक्तचाप तथा दिल के रोगियों को तो अपनी मर्जी से इन दवाइयों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए.

समाधान : बिना सोचे-समझे कफ सिरप के सेवन के बदले कुछ कुदरती घरेलू उपचार अपनाएं. गले को राहत देने के लिए नमक मिले पानी से गरारे करें, अदरक वाली चाय पीएं तथा काली मिर्च सहित शहद जैसे अन्य घरेलू उपायों का प्रयोग करें.

स्लीपिंग पिल्स (नींद की गोलियां)
एल्फ्रैक्स, ट्राइका, डाइजेपोज, जैपलोन, डोरमिन आदि
कब दी जाती है: नींद न आने की गम्भीर समस्या होने पर.

साइड इफैक्ट्स: चक्कर, पेट तथा अंतडिय़ों की समस्याएं तथा वजन बढऩा.
अत्यधिक इस्तेमाल से: डिमैंशिया की जल्द शुरूआत, नींद की गोलियों का आदी होना, दौरे, रक्तचाप कम होना तथा मांसपेशियों का कमजोर हो जाना.
जानकारों की राय: नींद न आने की समस्या किसी छुपी समस्या का लक्षण भी हो सकता है. यह किसी आम तनाव की वजह से भी हो सकता है. नींद की गोली लेने के स्थान पर समस्या की जड़ का इलाज करना बेहतर होगा.
समाधान: मेडीटेशन(ध्यान लगाना) तथा गहरी सांस लेने की कसरतें, शराब पीने तथा धूम्रपान में कमी करें. कैफीन से दूर रहें तथा तनाव ना लें. किसी स्वास्थ्य समस्या की वजह से नींद की गोलियों की डॉक्टर द्वारा सलाह देने पर ही इनका सेवन करें.

पेनकिलर्स (दर्दनिवारक)
इबूप्रोफेन, एस्प्रिन, पैरासिटामोल आदि
कब दी जाती है: सिर, पीठ व घुटनों में दर्द, चोट लगने, मोच आने या हल्का जल जाने पर
साइड इफैक्ट्स: दिल मिचलाना, उल्टी आना, डायरिया तथा पेट में दर्द
अत्यधिक इस्तेमाल से: उच्च रक्तचाप, गुर्दों में खराबी, आघात का खतरा बढऩा तथा दिल का दौरा पडऩा.
जानकारों की राय: अधिक मात्रा में दर्दनिवारकों का सेवन करने वाले लोग सुरक्षित ढंग से ड्राइव नहीं कर पाते हैं क्योंकि वे उनींदापन महसूस करते हैं जिसके घातक परिणाम हो सकते हैं. सिरदर्द से राहत पाने के लिए जो लोग नियमित रूप से दर्दनिवारकों का सेवन करते हैं उनके अक्सर सिरदर्द रहने तथा इन दवाइयों पर निर्भर हो जाने की संभावना बढ़ जाती है. अक्सर सेवन करने से कुछ दर्दनिवारक तो खुद सिरदर्द का कारण बन जाते हैं. कुछ तरह के पेनकिलर्स का एक साथ सेवन करना भी खतरनाक होता है.

समाधान: यदि आपको दर्दनिवारकों की वजह से ही रहने वाले सिरदर्द के लक्षण महसूस हों तो बेहतर होगा कि आप दर्दनिवारकों का सेवन बंद कर दें. वैसे भी दर्दनिवारकों का सेवन समस्या के असली कारण को खत्म नहीं करता है. यह दर्द किसी गंभीर व्याधि या फिर किसी ऐसे सामान्य कारण से हो सकता है जिसका उपचार जीवनशैली में बदलाव, व्यायाम तथा आहार में सुधार जैसे सरल ढंग से सम्भव हो.

एंटीबायोटिक्स (बैक्टीरिया नाशक दवाइयां)
एमोक्सीसिलिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन, एम्पिसिलिन, एरिथ्रोमाइसिन आदि
कब दी जाती है: बैक्टीरिया, फंगस तथा अन्य परजीवियों से होने वाले संक्रमण के उपचार के लिए
साइड इफैक्ट्स: कुछ एंटीबायोटिक्स डायरिया, त्वचा पर चकत्ते, एलर्जी के कारण बन जाते हैं तथा इसके साथ बैक्टीरिया द्वारा प्रतिरोधी शक्ति हासिल कर लेना भी शामिल है

अत्यधिक इस्तेमाल से: इन पर निर्भरता से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है क्योंकि यह अंतडिय़ों की परत में रहनेवाले स्वस्थ बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देते हैं. लम्बे इस्तेमाल से लिवर तथा गुर्दों की खराबी जैसी जानलेवा समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं. गर्भवती महिलाओं में ये गर्भ में पल रहे शिशु को नुक्सान पहुंचाते हैं जिससे वे जन्मजात व्याधियों या जन्म संबंधी विकारों से ग्रस्त हो सकते हैं.

जानकारों की राय: एंटीबायोटिक्स के गलत प्रयोग से रोग की पहचान करने में देरी हो सकती है या उसकी गलत पहचान हो सकती है. यदि इनका सेवन अक्सर किया जाता है तो ये बैक्टीरिया के खिलाफ बेअसर साबित होने लगते हैं. इनका उचित मात्रा में सेवन न करने या जरूरत से अधिक लम्बे समय तक सेवन करने से बैक्टीरिया में इनके प्रति प्रतिरोधी ताकत पैदा हो जाती है जिससे और भी गम्भीर स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

समाधान: कुछ तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में इनका सेवन जरूरी होता है परंतु इस दौरान इनके नुक्सान को कम से कम करने के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए. जैसे एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं तो आहार में दही जरूर शामिल कीजिए ताकि अंतडिय़ों में रहने वाले लाभकारी बैक्टीरिया को होने वाले नुक्सान को कम किया जा सके. साथ ही अपने शरीर पर विश्वास करना सीखिए कि वह संक्रमणों से खुद लड़ सकता है.

शनिवार, जुलाई 11, 2015

आलस्यः सबसे बड़ा रोग व शत्रु

आलस दूर करने के घरेलु नुस्खे

Laziness Treatment

आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। आलस्‍य को दूर करना सफलता हासिल करने के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। यहां दिये उपाय आलस्‍य को अपने रास्‍ते से दूर करने में मददगार साबित हो सकते है। आजकल की लाइफ भागदौड़ से भरी हुई है। ऐसे में लोगों को अपनी सेहत पर ध्यान देने का वक्त ही नहीं मिलता, जिसके कारण वे कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। अगर आप चाहते हैं कि बीमारियां आप से कोसो दूर रहे, तो हम आपको यहां कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं। हेल्दी रहने के लिए इन टिप्स को आप अपना सकते हैं।

  • रात को सोने से पहले चेहरा धोना चाहिए। दिनभर चेहरे पर चढ़ी धूल के कारण आपकी स्किन खराब हो जाती है, लेकिन इससे बचने का यह सबसे कारगर तरीका होता है।
  • हमें बार-बार बैक्टीरया के हमले का शिकार होना पड़ता है। इसका हमें पता ही नहीं चलता। एंटीबैक्टीरियल क्रीम का इस्तेमाल हाथ धोने में करने से पेट की बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है।
  • डाइट में ज्यादा से ज्यादा फाइबर को शामिल करें। इससे पेट के रोगों में कमी आती है। इसके साथ ही इससे भूख कम लगती है। ऐसा होने से ज्यादा वजन वाले लोगों को वजन कम करने में आसानी होती है।
  • नहाने के बाद पूरी तरह से बाल सुखाएं। ऐसा करने से बालों में होने वाली रूसी से बचा जा सकता है। बहुत से लोगों को गीले बालों में कंघी करने की आदत होती है। ऐसी आदत बाल झड़ने और कमजोर होने की समस्या के लिए जिम्मेदार हो सकती है। इससे बचने के लिए बालों को सुखाना अच्छा होगा। 
  • शहद का टेस्‍ट काफी लाजवाब होता है। इसमें बहुत सारा कार्बोहाड्रेट होता है जो कि चाटने पर शरीर को तुरंह ही एनर्जी देता है। तो अगर आपको ऐसा लगता है कि आप सुबह बहुत सुस्‍त सा फील कर रहे हैं और आपका मन ऑफिस जाने का नहीं कर रहा है तो शहद का सेवन करें। इसी कारण से चाइना में रहने वाले लोग रोज सुबह दूध, ब्रेड या गरम पानी में शहद घोल मिला कर पीते और खाते हैं।

1) आलस पर काबू :-

आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। आलस्य ऐसा दोष है जिससे मनुष्य अपने वर्तमान और भविष्य दोनों को नष्ट कर देता है। आलस्‍य समय-समय पर सभी को प्रभावित करता है। और हर कोई इस आलसीपन को दूर करने के उपायों को ढूढ़ते रहते हैं। आलस्‍य को दूर करना सफलता हासिल करने के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। यहां पर दिये उपाय चीजों को सही तरीके से करने और आलस्‍य को अपने रास्‍ते से दूर करने में मददगार साबित हो सकती है।

2) टाल-मटोल छोड़ें :-

टाल मटोल वास्तव में आलस का ही प्रतिरूप है। जब भी कोई काम आता है, हम उसे यह कहकर टाल देते हैं कि इसे थोड़ी देर बाद कर लूंगा। लेकिन यह हमारी आदत लत बन जाती है। आज का काम कल पर और कल का काम परसों पर डालने वाली आदत को छोड़कर हम इस लत से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं।

3) लाभ और परिणाम के बारे में सोचें :-

अपने कार्यों के लाभ पर ध्‍यान केंद्रित करें और आलस्‍य पर काबू पाने के लिए खुद को पुरस्‍कृत करें। इसके अलावा इस बारे में सोचें कि आलस्‍य का शिकार होने पर क्‍या-क्‍या हो सकता है। अपने आपको प्रेरित करने के लिए उन सभी पर नजर

4) व्यवस्थित तरीके से करें :-

एक ही समय में एक साथ बहुत सारे काम करने की स्थिति में आप खुद को हतोत्साहित महसूस करने लगते हैं। लेकिन इन सब चीजों को व्‍यवस्थित कर आप काम को आसान बना सकते हैं। कुछ भी हो सभी के लिए आयोजन बहुत जरूरी होता है।

5) प्रारंभ (Starting) :-

शुरुआत करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन शुरूआत के लिए और चीजों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए स्‍वयं को प्रेरित करें। आप दैनिक लक्ष्य बना कर और ध्‍यान को भटकने से रोककर शुरूआत के लिए स्‍वयं को तैयार कर सकते हैं। साथ ही खुद को बताओ कि आप शुरूआत के लिये तैयार

6) सोने का समय Sleep schedule ::-

सोना का एक नियमित शेड्यूल होना बहुत महत्‍वपूर्ण है। यह पता करना बहुत जरूरी है कि आपको रात में पर्याप्‍त नींद आती है या नहीं। सप्ताहांत सहित, प्रत्येक दिन एक ही समय में बिस्तर पर सोने और एक ही समय पर उठने की आदत बनाये। कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। समय के साथ, आप इतने सक्षम हो जायेगें कि बिना अलार्म घड़ी के स्‍वयं ही यह सब कर पायेगें।

7) हल्‍का भोजन :-

एक भारी यानी फैट, शुगर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर भोजन से आपको आलस महसूस होता है। इसके अलावा आपको ग्लाइसेमिक खाद्य पदार्थों से भी दूर रहना चाहिए क्‍योंकि यह रक्त शर्करा के बढ़ने के साथ आपमें अस्‍थायी ऊर्जा को बढ़ावा देता है। ऐसी ऊर्जा कुछ मिनट में दूर होकर आपको थकान महसूस करवाती है।

8) एक्‍सरसाइज ::-

एक्‍सरसाइज, दिमाग सहित शरीर के हर हिस्‍से के लिए बहुत लाभकारी होती हैं। जब आप नियमित रूप से एक्‍सरसाइज करते हैं तो आप खुद को अधिक ऊर्जावान महसूस करते है। रक्त परिसंचरण बेहतर और चयापचय कार्यों भी अच्‍छी तरह से होते है। इसलिए नियमित रूप से एक्‍सरसाइज करने की कोशिश करें, आप सिर्फ 15 मिनट की एक्‍सरसाइज को अपने रूटीन में शामिल करें।

9) टास्‍क को छोटा करें :-

अपने नियत कार्य को पूरा करने के लिए समय ले, खासतौर पर यदि अगर आपका टास्‍क बहुत बड़ा है तो। छोटी चीजों बहुत अधिक सुलभ और अधिक साध्‍य लगती हैं। नियत कार्य को भागों में तोड़कर आप उस पर अच्‍छे से नियंत्रण पा सकते हैं और यह दिखने में भी बहुत आरामदेह लगती है।

10) प्रेरणा के लिए सफल लोगों को देखें :-

सफल लोगों को आलस्‍य कभी जीत नहीं सकता है। आप खुद को कुछ तरीकों से ऐसे लोगों के साथ संबद्ध करने का प्रयास करें। जानें कि दैनिक चुनौतियों के साथ लड़कर भी सफलता को कैसे हासिल करते हैं और वह किस तरह आलस को अपने दूर करने में कामयाब होते हैं।

शनिवार, जुलाई 04, 2015

राजेश मिश्रा की जनोपयोगी कुछ आवश्यक बातें

हर मर्ज का उपाय है इस आलेख में

सावन साग न भादौं दही, कुवार दूध न कातिक मही

हाथ जोड़कर आप सभी पाठकों से विनम्र निवेदन है इस आलेख को पुरे दिल से आत्मसात (कंठस्थ/याद) कर लें तो जिंदगी में कभी डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा. साथ ही राजेश मिश्रा द्वारा सुझाये गए इस आलेख से आप आस-पड़ोस और घर के डॉक्टर बन जायेंगे . यह आलेख हज़ारों पाठको से बातचीत और बड़े बुजुर्ग के कथन के साथ-साथ कई संकलन के बाद तैयार की गई है बहुत ही मेंहनत से ये आलेख (लिखी/संकलन से ) तैयार की गई है... पूरा जरूर पढ़ें और अपनों को पढ़ाएं : - राजेश मिश्रा 




आज का विज्ञान, चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी चमत्कारिक प्रयोग करता जा रहा है। छोटे-छोटे उपनगरों में भी बड़े-बड़े नर्सिग होम, डीएम, एमएस और एमडी चिकित्सकों की भरमार हो गई है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या जब ये चिकित्सक नहीं थे तो लोग बीमार होकर मर जाते थे? या आबादी वीरान हो जाया करती थी? बिल्कुल नहीं, लोग आज से ज्यादा स्वस्थ थे। आज भी गांवों में चिकित्सा की कोई बेहतर सुविधा नहीं है फिर भी 90 या 95 वर्ष के वृद्ध खेतों में काम करते हुए मिल जायेंगें। उनके उत्तम सेहत का राज है खान, पान, अनुपात और परम्परागत दिनचर्या। जो पीढ़ी दर पीढ़ी अपने पूर्वजों द्वारा रटायी जाती रही है। ये सब दोहों, चौपाइयों और कविताओं के रूप में है। जिनके लेखक और रचनाकारों का कुछ अता-पता नहीं है।

इन कविताओं में भारतीय जलवायु, मौसम और परिवेश का ध्यान रखते हुए गहन शोध किया गया है। जो आज पढ़े लिखे समाज में लुप्तप्राय हैं। जिले के प्रख्यात वैद्य रहे स्व.शिवसहाय सिंह अपने शिष्यों व रोगियों को मौसम के निषिद्ध भोजन इस प्रकार समझाते थे- सावन साग न भादो दही, कुवार दूध न कातिक मही। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि मौसम विशेष में शारीरिक रासायनिक क्रियायें बदल जाया करती हैं। जलालपुर के इजरी गांव निवासी रामकुमार वैद्य अपनी कविताओं और गानों में खान-पान की दिनचर्या सुनाया करते थे।

भोजन के बाद की दिनचर्चा-भोजनोपरान्त थोड़ा टहल के बाई ओर करवट लेटना भी लाभकारी है। बासी भोजन खाना, हर हाल हानिकारक कहा, खाके तेज चलना या दौड़ना दुखारी है। किस भोजन के बाद कौन सा आहार स्वीकार है। कौन विष के समान है इसकी लम्बी फेहरिस्त है। -

  • पक्का कटहल खायके फिर लो पान चबाय, पेट फुलै सांसा रुके और तुरन्त मरिजाय।
  • जिस तेल में तली गई हो मछली उसी में, सिद्ध हुई पीपल जहर के समान है।
  • मधु की समान मात्रा घी या व्योम-जल संग, खाने वाले को ढकेल देता श्मशान है।
  • मधु या मकोय भी है एक साथ विष सम, प्रान हरने का यह करक प्रधान है।

दूध के साथ इन फलों का सेवन निषिद्ध है-आम, आमड़ा, करौंदा, केला, नीबू, कागजी और नीबू जम्म्बूरी, वहेरी, बेर, कैंथ खाता है कमरख, कटहल, नारियल औ अनार, अखरोट आंवला न दूध से सुहाता है।

ये सारे के सारे प्रयोग लिपिबद्ध न होकर परम्परागत ढंग से लोगों द्वारा सुन-सुनकर याद किये गये हैं। ‘‘पूर्वजों ने जो भी कहा है उसकी प्रामाणिकता आज भी प्रासंगिक है, तब भी विज्ञान था। हमारे उन्हीं विज्ञान पर विदेशों में शोध हो रहा है। पुराने वैद्यों के पास दूर दर्शिता थी। सावन में साग वर्जित है कारण कि उस समय वैक्टीरिया का प्रभाव साग के पत्तों पर अधिक होता है।
भादों में दही इसलिए न खाना चाहिए कि उस समय भी वैक्टीरिया अधिक होती है। हमारे पूर्वज जो वैद्य के रूप में थे उनका अनुभव नकारा नहीं जा सकता। राज्य वैद्य नाड़ी देखकर बताते थे कि शरीर का ताप क्रम कितना है आज थर्मामीटर लगाये जाते हैं।’’

भोजन की विधि :-

  • सुबह के समय सूखा पदार्थ पहले खाएं फिर द्रव्य पदार्थ लें । भारी , मीठा और चिकना पदार्थ पहले खाएं,
  • अम्ल व लवण युक्त मध्य में खाएं ।
  • कडुवा, तीखा , कसैला अंत में खाएं ।
  • यदि भूख कम लगती है तो पहले गर्म पदार्थ पहले
  • खायें ।
  • रात्रि के समय सत्तू , फल और दही का सेवन ना करें।
  • हरा उड़द दालों में श्रेष्ठ है, यह हल्का और वातकारक है ।
  • कुलथी की दाल को सर्दियों में खाएं कफ, वायु , उदररोग , पथरी, साँस सम्बन्धी रोग को ठीक करता है ।
  • उड़द की दाल शुक्र को बढ़ाने वाला होता है ।
  • जौ पित्त , कंठ रोग और कफ को शांत करता है ।

निषेध :-

  • अति मधुर भोजन अग्नि को नष्ट करता है, अत्यंत लवण युक्त भोजन आँखों के हानिकर है, अति तीक्ष्ण,
  • तथा अति अम्ल युक्त भोजन वृद्धावस्था को बढाता है ।
  • दही, मधु , घृत, सत्तू , खीर, कांजी को छोड़कर अन्य आहार द्रव्य को खाते समय थोडा छोड़ देना चाहिए ।
  • पेट दर्द में- घी के साथ मिश्रित हींग, 
  • पुराने ज्वर में- मधु के साथ पीपर , 
  • वातरोग में- घी में भूना लहसुन, 
  • श्वांस रोग में - शहद मिश्रित त्रयूषण ( सोंठ, मिर्च, पीपल ), 
  • शीतरोग में- पान के रस में मिर्च, 
  • प्रमेह रोग में - त्रिफला के साथ गुड, 
  • सन्निपाति रोग में - शहद के साथ अदरक , 
  • ज्वर में - नागरमोथा तथा पित्तपापड़ा , 
  • गृहणी रोग में- मट्टा , गरविष में- स्वर्ण भस्म , उल्टी में - धान का लावा, 
  • अतिसार ( दस्त )में - कुटज , रक्तपित्त में - वासा , 
  • अर्श में - चित्रक , पेट के कीड़ों में - वायविडंग लाभप्रद है ।
  • दही :- दही को रात्रि में , ज्यादा गर्म करके , वर्षा ऋतु में , शरद ऋतु में दही नहीं खाना चाहिए । 
  • विना मूंग की दाल, मधु , घी , गुड के बिना दही नहीं खाना चाहिए ।
  • बिना पूरी जमे दही ना खाएं , रोजाना दही ना खाएं ।
पाठक बंधुओं! हजारों मरीजों को देख कर और न जाने कितने हजार मरीजों से बात करके मुझे एक बात बड़ी शिद्दत से परेशान करती रही कि ज्यादातर बीमारियों का मुख्य कारण गलत खान पान है। अगर हमें इस बात की सही जानकारी हो कि किस चीज के साथ क्या नहीं खाना चाहिए तो हो सकता है कि हम खुद को अनावश्यक रोगों से सुरक्षित रख सकें। इसलिए आप सभी से निवेदन है कि इस लेख को बहुत ध्यान से पढियेगा जिससे इसका लाभ आपको मिल सके। अगर ऎसी ही कुछ जानकारियां आपको हों तो मुझे जरूर बता दीजियेगा।

  • सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी। 
  • दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है। 
  • दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही, नमक, इमली, खरबूजा, बेल, नारियल, मूली, तोरई, तिल , तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए। 
  • दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए। 
  • गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए। 
  • ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं। 
  • शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं। 
  • खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी ,कटहल कभी नहीं। 
  • घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा
  • तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं। 
  • चावल के साथ सिरका कभी नहीं। 
  • चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं। 
  • खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं। 

कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे-

  1. खरबूजे के साथ चीनी 
  2. इमली के साथ गुड 
  3. गाजर और मेथी का साग
  4. बथुआ और दही का रायता 
  5. मकई के साथ मट्ठा 
  6. अमरुद के साथ सौंफ 
  7. तरबूज के साथ गुड 
  8. मूली और मूली के पत्ते 
  9. अनाज या दाल के साथ दूध या दही 
  10. आम के साथ गाय का दूध
  11. चावल के साथ दही
  12. खजूर के साथ दूध 
  13. चावल के साथ नारियल की गिरी
  14. केले के साथ इलायची 
कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं। और माले मुफ्त दिले बेरहम वाली कहावत तो मशहूर है ही। शादियों में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मैंने अनेक बार देखा है। कुछ लोगो तो बस फ्री में जहर भी मिल जाए तो थाली भर के खायेंगे ……खैर चलिए लेकिन माल भले ही दूसरे का हो पेट आप का ही होता है। और बाद में तकलीफ भी आप को ही होती है। आइये हम कुछ ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ --
  • केले की अधिकता में दो छोटी इलायची 
  • आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड 
  • जामुन ज्यादा खा लिया तो 3-4 चुटकी नमक 
  • सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम 
  • खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत 
  • तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग 
  • अमरूद के लिए सौंफ 
  • नींबू के लिए नमक
  • बेर के लिए सिरका
  • गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो 3-4 बेर खा लीजिये 
  • चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये 
  • बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च 
  • मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये 
  • बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं 
  • खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये 
  • मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं 
  • इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये 
  • मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये 
  • मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये 
  • घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं 
  • खुरमानी ज्यादा हो जाए तोठंडा पानी पीयें 
  • पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये 
अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये 80% बीमारियों से बचे रहेंगे। 

किस महीने में क्या नही खाना चाहिए और क्या जरूर खाना चाहिए ---

  1. चैत में गुड बिलकुल नहीं खाना, नीम की पत्ती /फल, फूल खूब चबाना। 
  2. बैसाख में नया तेल नहीं खाना, चावल खूब खाएं। 
  3. जेठ में दोपहर में चलना मना है, दोपहर में सोना जरुरी है। 
  4. आषाढ़ में पका बेल खाना मना है, घर की मरम्मत जरूरी है। 
  5. सावन में साग खाना मना है, हर्रे खाना जरूरी है। 
  6. भादो मे दही मत खाना, चना खाना जरुरी है। 
  7. कुवार में करेला मना है, गुड खाना जरुरी है। 
  8. कार्तिक में जमीन पर सोना मना है, मूली खाना जरूरी है। 
  9. अगहन में जीरा नहीं खाना, तेल खाना जरुरी है। 
  10. पूस में धनिया नहीं खाना, दूध पीना जरूरी है। 
  11. माघ में मिश्री मत खाना, खिचड़ी खाना जरुरी है। 
  12. फागुन में चना मत खाना, प्रातः स्नान और नाश्ता जरुरी है।
    Rajesh Mishra (Trip Trikut Pahad, Jharkhand)